An Open Letter to new PCI president Shri Gautam Lahiri

Dear Sir,

Please accept my Durga Puja and Dussehra greetings.

Congratulations on your resounding victory. I impose great trust in your able leadership as president of the Press Club of India (PCI). You have earned respect and admiration all these years through your sheer hard work and integrity. But, Sir, at PCI you have succeeded something which I would describe as a “bed of thorns”. The erstwhile PCI Secretary-General has left behind him a legacy of falsehood, distrust, and fraud played by him on the Club, in general, and members, in particular.

I am sure you must be aware that the erstwhile Secretary-General gave Club membership to undeserving people all these years just to satiate his lust of cheap vote-bank politics. His shamelessness was at its nadir this year when he did not even care to display the list of new members, perhaps for fear of being exposed.

Considering the high standards of journalism you have set all these years before us, I would expect that you make sure the list of new PCI members (made earlier this year) is properly displayed both at the Club’s notice board and website. This would enable all PCI members to know the ‘credentials’ of the new members. As president of the PCI you have all the powers to do the above mentioned. It is also expected of you that you would not allow this practice (of awarding PCI membership to undeserving people) to continue during your tenure as PCI president.

Also, I would like to draw your kind attention towards a number of false affidavits and forged documents (i.e. minutes of meetings) which the erstwhile Secretary-General produced before different courts of law in Delhi in cases filed by PCI members on the Club. Exercising the powers bestowed on you as PCI president, please look into all these acts of fraud committed by the erstwhile Secretary-General, thereby ensuring that JUSTICE IS NEITHER DELAYED NOR DENIED to PCI members.

Sir, today is Dussehra. This festival symbolises triumph of Good over Evil. May this spirit prevail inside the Press Club of India too…under your able leadership!!

Regards.
Pankaj Yadav
Senior Journalist
pkjyadav@gmail.com

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हार के बाद मठाधीशों को अब मार्गदर्शक मंडल ज्वाइन कर लेना चाहिए : नदीम अहमद काजमी

Nadeem Ahmad Kazmi : Lesson of the press club elections result are…. 

1- mathadeesh should join margdarshak mandal.

2- press club of India will carry on with its liquor policy, Afeem won’t be served. Marx said (religion is like opium)

3- Mandir masjid bair karate mail karaatee madhushala.

4- why all gang up against one. The guy is not even candidate.

Maaf kar do yaar. Jashn manaao. Suna hai teree mehfil mein ratjagga hai. Congratulations to Gautam-vinay panel who swept the poll.

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Press club is going JNU way, what to do. Some of my old friends may not be comfortable as they expressed on FB.

निवर्तमान सेक्रेट्री जनरल नदीम अहमद काजमी की एफबी वॉल से. 

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NBT के रामेश्वर जी ने मेरे वोटों का बंटवारा कर दिया : विभूति रस्तोगी

ईमानदारी से मेहनत की थी, प्रेस क्लब की बेहतरी के लिए काम करता रहूँगा

दोस्तों

आप सभी को नमस्कार

अभी अभी सोकर उठा हूँ। मैंने प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में मैनेजिंग कमेटी सदस्य के लिए चुनाव बेहद शिद्दत और ईमानदारी के साथ लड़ा था। सच बताऊँ, प्रेस क्लब में बहुत कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भ्रष्टाचार का बोलबाला है। वहां काफी कुछ किया जा सकता है। मैं इसी वजह से मात्र 7 दिन पहले चुनाव लड़ने का मूड बनाया और बाला जी पैनल से चुनाव लड़ा। 6 दिन तक धुंआधार प्रचार किया। सभी अग्रज और अपने मित्र पत्रकारों से मिला। आप सभी ने दिल से साथ दिया और मेरा खूब उत्साह बढ़ाया। इसका मैं ऋणी हूँ।

प्रेस क्लब का चुनाव लड़कर पता चला कि मुझे वाकई दिल्ली में संपादक, वरिष्ठ पत्रकार, समकक्ष पत्रकार और अनुज पत्रकारों ने बहुत साथ दिया। वाकई सर, बहुत साथ दिए आप लोग। हर बार प्रेस क्लब में दो पैनल बनते हैं। लेकिन इस बार चार पैनल बने। इसी के साथ मेरे समय में ही दिल्ली लोकल से हबीब अख्तर जी का पैनल बन गया जिसमें कई ऐसे थे जिनकी वजह से न चाहते हुये मेरे वोट का ठीकठाक बंटवारा हो गया। हालाँकि वोटिंग वाले दिन मैंने खुद लोकल पत्रकारों से अनुरोध करता रहा कि भाई मैं गंभीरता के साथ चुनाव लड़ा हूं, मुझे आप वोट देते हैं तो मैं आगे निकल सकता हूँ। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

NBT से रामेश्वर जी को 113 वोट मिले जो 100% मेरे वोटर पत्रकारों से ही बंटवारा हुआ है। अगर रामेश्वर जी गंभीरता से लड़ते तो मुझे बहुत ज्यादा ख़ुशी होती। मैं उनका छोटा भाई हूँ, उनकी पूरी मदद करता। फिर हम दोनों में से कोई जीत जाता। कई फैक्टर इसी बार हुआ क्योंकि मैं इसी बार जो चुनाव लड़ रहा था। मुझे कुछ भी बहुत ज्यादा संघर्ष के बाद मिलता है। हालाँकि मैंने बहुत ज्यादा मेहनत की थी। तभी मनोरंजन भारती से लेकर ज्यादातर लोगों ने कहा कि इस बार वाकई तुमने प्रेस क्लब के चुनाव को चुनाव बना दिया।

15 ऐसे पत्रकार मित्र हैं जो वाकई मेरे घर, परिवार, दिल और दिमाग से बेहद करीब हैं बावजूद इसके वो मुझे वोट देने घर से निकले ही नहीं। इससे मेरा समीकरण कुछ गड़बड़ हो गया। मेरे पैनल में अध्यक्ष सहित सभी लोग बहुत अच्छे और जुझारू थे लेकिन बेवजह हमारे पैनल को संघी बोलकर बदनाम किया गया जिसका माकूल जवाब नहीं दिया जा सका। हालाँकि मेरी बहन और दूरदर्शन की सीनियर जर्नलिस्ट अनीता चौधरी जीत दर्ज करने में सफल रहीं। उन्हें बहुत बहुत बधाई।

खैर, दिल्ली में मुझे 235 पत्रकार प्यार करते हैं, यह मेरे लिए बहुत ही ज्यादा गौरव की बात है। माना जाता है कि प्रेस क्लब जैसे देश के पत्रकारों के गढ़ में चुनाव लड़ना आसान नहीं होता लेकिन 7 दिन पहले सोच कर चुनाव लड़ने के बाद भी 235 वोट यह दर्शाता है कि मंजिल बहुत नजदीक है। आदमी को ईमानदारी से और बेहद मजबूती से कोई काम करना चाहिए, भले ही नतीजा कुछ भी हो।

दिल्ली के सभी मेरे मित्र चाहे पत्रकार हो या नहीं, उन्होंने हर तरीके से मदद की। मनोबल बढ़ाया। सभी का दिल से धन्यवाद। साथ ही इतना जरूर कहूँगा कि हम प्रेस क्लब को यूँ ही नहीं छोड़ सकते हैं, वहां की बेहतरी के लिए लगातार सक्रिय रहूँगा।

आपका

विभूति रस्तोगी

मूल खबर….

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प्रेस क्लब आफ इंडिया चुनाव 2016 : ये है फाइनल लिस्ट, देखिए कौन कितने वोट से हारा, कौन जीता

प्रेस क्लब आफ इंडिया चुनाव 2016 में हार जीत की फाइनल लिस्ट आ गई है. निवर्तमान महासचिव नदीम अहमद काजमी द्वारा समर्थित लाहिरी-विनय पैनल को भारी जीत मिली है. सिर्फ मैनेजिंग कमेटी में तीन सदस्य इस पैनल से बाहर के जीते हैं जिसमें एक अनीता चौधरी हैं जो बाला-कृष्णा पैनल से थीं. समृद्धि भटनागर और रवि बत्रा निर्दल लड़े और जीते. इन तीन के अलावा सभी वो जीते जो लाहिरी-विनय पैनल के थे. लाहिरी-विनय पैनल ने काफी मतों से अपने प्रतिद्वंदियों को पछाड़ा. मतगणना का काम आज सुबह चार बजे खत्म हुआ. ये है हार जीत की पूरी लिस्ट…

कल शाम सात बजे तक आए रुझान के आधार पर भड़ास ने जिस खबर / आकलन का प्रकाशन किया था, वह अनुमान सच निकला, देखें क्या लिखा गया था…

पिछले साल यानि वर्ष 2015 में हुए चुनाव में कौन कितने वोट से हारा जीता था, जानने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें :

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प्रेस क्लब आफ इंडिया चुनाव के शुरुआती रुझान : गौतम-विनय-मनोरंजन-अरुण पैनल जीत की ओर

रायसीना रोड स्थित प्रेस क्लब आफ इंडिया में वोटों की गिनती का काम जोरों पर है. जो शुरुआती रुझान मिल रहे हैं उसके मुताबिक गौतम लाहिरी (अध्यक्ष), विनय कुमार (सेक्रेट्री जनरल), मनोरंजन भारती (उपाध्यक्ष) और अरुण जोशी (कोषाध्यक्ष) पैनल जीत की तरफ तेजी से अग्रसर है. इस पैनल के मैनेजिंग कमेटी के लगभग 14 सदस्य जीत की ओर हैं. राष्ट्रीय सहारा के संजय सिंह लगातार छठीं बार जीत दर्ज कराने जा रहे हैं.

अभी तक मिले ट्रेंड के मुताबिक संजय सिंह सबसे ज्यादा वोट पाने वाले टाप 5 विजेताओं में चल रहे हैं. संजय को हर पैनल के लोगों ने वोट दिया है क्योंकि उनकी छवि ईमानदार और कर्मठ पदाधिकारी की रही है. बाला-श्रीकृष्णा पैनल से मैनेजिंग कमेटी सदस्य के लिए चुनाव लड़ रहीं दूरदर्शन की अनीता चौधरी जीत की ओर अग्रसर हैं. अनीता को भी सभी पैनल के लोगों ने वोट किया है.

हालांकि अभी तक केवल तीन राउंड ही मतगणना हो सकी है, अभी छह राउंड बाकी है, इसलिए अंतिम रूप से कुछ भी कहा नहीं जा सकता. फाइनल रिजल्ट आने में अभी थोड़ा वक्त है. फिलहाल ये तो तय है कि निवर्तमान सेक्रेट्री जनरल नदीम अहमद काजमी ने जिस पैनल को जिताने की अपील की, वही पैनल जीतता हुआ दिख रहा है. कहा जा रहा है कि पिछले कई बरस से जो अपने खास लोगों को वोटर बनाया जा रहा है, उसी का कमाल है कि एकमुश्त वोट नदीम अहमद द्वारा उतारे गए पैनल को मिले दिख रहे हैं जिससे पैनल के लोगों की जीत सुनिश्चित होती दिख रही है. अगर ऐसा हुआ तो यह माना जा सकता है कि प्रेस क्लब आफ इंडिया में जो दुर्व्यवस्था है, वह कांटीन्यू रहेगी.

प्रेस क्लब आफ इंडिया से एक पत्रकार द्वारा प्रेषित मेल पर आधारित.

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प्रेस क्लब आफ इंडिया में राजनीतिक एजेंडा लेकर चुनाव लड़ रहे पत्रकारों को वोट न दें : विनीता यादव

Vinita Yadav : प्रेस क्लब का चुनाव कुछ ज़्यादा ही राजनीतिक हो चला है. जिस बात पर आपत्ति जताते हुए मैंने ख़ुद को अलग किया, हुआ इसके उलट कि वहाँ अब लोग खुलकर राजनीतिक रंग में आ हुए हैं. क्या है ये भाई, क्यूँ? इस बार पूरा जेएनयू यहीं ज़ोर लगा रहा है तो भाई मोदी जी और सोनिया जी को भी चिट्ठी लिख दो कि नज़र इधर करें. Raisina hills पर बने प्रेस क्लब को क्रांति के नाम पर बर्बाद ना कर दिया जाए.

और, वैसे यहां क्रांति नहीं, काम की ज़रूरत है. एक पत्रकार के पास अपना इतना वक़्त हो गया है कि अपने बैठने की जगह पर झंडे बुलंद करे? क्यूँ भाई? फिर पूछती हूं कि क्या ज़रूरत राजनीति घुसाने की. देश भर में सफ़ाये के कगार पर खड़ी ये पार्टी अब प्रेस क्लब में वजूद ढूँढ रही है, ग़ज़ब है! Pls members its request. dnt vote for politically influenced journalists.

प्रेस क्लब आफ इंडिया में नदीम अहमद काजमी की निरंकुशता और अराजकता के खिलाफ झंडा उठाने वाली टीवी पत्रकार विनीता यादव की एफबी वॉल से.

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नदीम अहमद काजमी का जंगलराज (पार्ट दो) : चुनाव बाद भी लगाम अपने हाथ में रखने की तैयारी!

नदीम अहमद काजमी ने प्रेस क्लब आफ इंडिया का जो हाल कर दिया है, उसे पटरी पर लाने में क्लब की नई चुनी जा रही समिति को बहुत मशक्कत करनी पड़ेगी. अगर नदीम अहमद काजमी के पैनल का आदमी सेक्रेट्री जनरल चुन लिया गया तो यकीन मानिए कि क्लब पटरी पर क्या आएगा, जंगलराज की अराजकता बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी. वैसे भी कहा जा रहा है कि नदीम अहमद काजमी अपने पैनल में एनडीटीवी के मनोरंजन भारती उर्फ बाबा और सुधि वगैरह को लाकर एक तरह से लगाम अपने हाथ में रखने की तैयारी में हैं. आइए जानते हैं कि नदीम अहमद काजमी ने अपने कार्यकाल में क्या क्या बड़े पाप किए हैं…

नदीम ने पूरे साल इलेक्टेड कमेटी के सामने नहीं रखा खर्चे का ब्योरा. कमेटी मेम्बर ने चुनाव देरी से कराने पर कई सवाल उठाये लेकिन नदीम ने हर बार टाल दिया. नदीम ने स्पेशल कैटेगरी के कई मेम्बर बना दिए लेकिन इसकी जानकारी किसी को नहीं दी और ना ही मैनेजिंग कमेटी से अनुमति ली. नियम है कि सभी सदस्य जब इजाजत देंगे तभी एसोसिएट मेम्बर बनाए जा सकते हैं. आरोप है कि पैसा बनाने के लिए नदीम ने अकेले फ़ैसला लिया. किसी को इसकी जानकारी नहीं दी.

पत्रकारों को सदस्यता देते वक़्त नदीम की ग़लत नीयत सामने आयी. लिस्ट में हर दूसरा सदस्य मुस्लिम दिखा. इसकी कोई ज़रूरत नहीं थी. क्लब में पत्रकार को सदस्यता उनके काम से मिलती है, ना की धर्म या जाति से. एक बैंक अकाउंट सीज हुआ तो नदीम ने फिर से किसी को जानकारी नहीं दी. ट्रेज़रर अरुण जोशी ने जब किसी सदस्य को बताया तो नदीम ने अरुण जोशी को भी अपने साथ कर लिया जिससे कोई तथ्य पर बोलने वाला ही नहीं रहा.

क्लब में बदलाव पर जो भी ख़र्च हुआ, इसकी किसी को कोई जानकारी नहीं थी, सिवाय नदीम या उनके एक दो लोगों के अलावा. इवेंट में सड़क छाप लोगों की परफारमेन्स पर 60000 के चेक दिए. सवाल उठने पर तुरंत जल्दबाज़ी में पेमेंट कर दिया. क्लब की बुरी हालत में पहुँच चुकी रसोई पर पूरे साल काम कारने की जगह राजनीति चलती रही.

नदीम की इन हरकतों से क्लब की प्रबंध समिति के कई सदस्य बेहद नाराज रहे. कइयों ने तो इसी विरोध को जताने के लिए चुनाव तक नहीं लड़ा इस बार. उदाहरण के तौर पर विनीता यादव का नाम लिया जा सकता है. विनीता पिछले तीन साल से क्लब की मैनेजिंग कमेटी की सदस्य रहीं और दो साल ज्वाइंट सेक्रेट्री. विनीता को सराहना इसलिए की जाती है क्योंकि उन्होंने प्रेस क्लब में कई ऐसे काम किए, आयोजन कराए जिससे क्लब की सकारात्मक छवि बनी. विनीता ने नदीम की बढ़ती तानाशाही और अराजकता को देखकर न सिर्फ नाराजगी जाहिर की बल्कि इसके विरोध में खुलकर बोला-लिखा. खासकर नदीम द्वारा कई फैसले अकेले लिए जाने और क्लब के संविधान को ताक पर रख दिए जाने से विनीता काफी नाराज रहीं. नदीम कहते तो ये रहे कि वे काफी काम कर रहे लेकिन सच्चाई यही है कि उन्होंने क्लब के कायदे कानूनों की जमकर धज्जियां उड़ाई और अपनी मनमानी की.

पिछले बीस साल से क्लब से चिपके रहने वाले नदीम ने भले ही इस साल चुनाव न लड़ने का ऐलान किया हो लेकिन गौतम लाहिरी के पैनल में नदीम ने वो चेहरे फिक्स कर दिए हैं जिनके जरिए वह क्लब में अपने मन मुताबिक काम कराने में सफल रहेंगे. यानि वे चुनाव न लड़कर भी क्लब पर कब्जा जमाने की पूरी साजिश रच चुके हैं. किसी न किसी तरह क्लब में नदीम अपनी मनमर्जी चलाना चाहते हैं. नदीम ने अपने हिसाब से क्लब में कई नेताओं को ओबलाइज किया. नदीम के इन गलत कामों से खफा विनीता ने कोर कमेटी की मीटिंग में जमकर विरोध किया. बताया जाता है कि नदीम ने सबके सामने अपने गलत कामों के लिए माफी मांगी लेकिन यह केवल दिखावा से ज्यादा कुछ नहीं था. नदीम अब परदे के पीछे बैठकर राजनीति करने में जुटे हैं.

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प्रॉपर्टी डीलरों को सदस्यता, पत्रकारों की बेदख़ली… यह है प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का सच!

कल दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की वोटिंग है। मुझे एक संजीदा पत्रकार मानते हुए लोगबाग मुझे भी अप्रोच कर रहे हैं कि मैं उनके पैनल को वोट करूं। मगर मैं करूं तो कैसे, मेरा वोट ही कहां है? आज तक मुझे प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने यह जवाब नहीं दिया कि मुझे इस क्लब का सदस्य नहीं बनाने के पीछे उनका तर्क क्या है। क्या मैं उनके मानकों को पूरा नहीं करता? पिछले 33 साल से मैं पत्रकार हूं और वह भी श्रमजीवी। इंडियन एक्सप्रेस समूह में बीस साल रहा। 12 साल अमर उजाला में और पिछले 17 वर्षों से मान्यताप्राप्त पत्रकार हूं तथा आज भी यह मान्यता है। क्लब के मानकों के अनुरूप मेरी नियमित मासिक आय जो पहले दो लाख के करीब थी अब रिटायर होने के बाद घट अवश्य गई लेकिन पत्रकारीय पेशे से ही मुझे 50 हजार रुपये मासिक की आय तो आज भी है।

चूंकि मैं शराब नहीं पीता इसलिए मेरा कोई उधारखाता प्रेस क्लब में नहीं चलेगा और न ही कोई बकाया होगा। नियमित उनका चंदा चुकाऊँगा ही। और उलटे उनके पदाधिकारियों की शराब का खर्च भी यदा-कदा वहन कर लिया करूंगा। मैने तीन-तीन सौ रुपये देकर आवेदन किया, सारे कागजात जमा किए मगर मुझे दिल्ली के प्रेस क्लब का सदस्य नहीं बनाया गया जबकि इसी बीच प्रापर्टी डीलरों, सत्ता के दलालों और फर्जी पत्रकारों को सदस्य बनाया गया। मैने पूछने की कोशिश भी की पर प्रेस क्लब के पदाधिकारी अपने को विशेष सुविधा प्राप्त होने का दावा करते रहे और मेरी जिज्ञासा ठंडे बस्ते डालते रहे। हालांकि इस प्रेस क्लब को तमाम सरकारी सुविधाएं मिली हुई हैं। दिल्ली के सबसे प्राइम लोकेशन में इतनी शानदार जगह और मद्य, मांस व मदिरा पर अथाह छूट। यह सब लेकर भी पदाधिकारीगण सदस्य किसको बनाते हैं इस पर कभी बहस होनी चाहिए और इसका उचित जवाब मिलना चाहिए।

प्रेस क्लब को एक्साइज में छूट वाली शराब दी जाए। जमीन दी जाए और प्रेस क्लब परिसर में रेलवे रिजर्वेशन काउंटर हो, ये सुविधाएं क्यों जब वहां पर पत्रकारों का ही प्रवेश निषेध हो।  मज़े की बात जब मैने शिकायत दर्ज की तो एक सज्जन ने कहा कि फॉर्म जमा करते वक्त आपने बताया क्यों नहीं? मैने कहा क्यों बताता। मैं क्यों कोई सिफारिश लगवाऊं, क्या मैं फर्जी पत्रकार हूं और फिर जब फॉर्म में सब लिखवा ही लिया था तब सिफारिश क्यों? प्रॉपर्टी डीलरों को तो सदस्यता और पत्रकारों की बेदख़ली, यह है प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का सच॥

अमर उजाला समेत कई अखबारों में संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार शम्भूनाथ शुक्ल की एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Harshvardhan Tripathi सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको प्रेस क्लब की सदस्यता नहीं मिली। ये प्रेस क्लब के पदाधिकारियों का मानसिक दिवालियापन दिखाता है। सच यही प्रेस क्लब की सदस्यता के लिए पदाधिकारियों से जुगाड़ लगाना ही होता है। इतना ही नहीं 7500 से ज्यादा सदस्यों वाले प्रेस क्लब के चुनाव में बमुश्किल 1500 लोग मत डालते हैं। लोगों को मताधिकार का महत्व समझाने वाले पत्रकार मत डालने नहीं आते। सुनते हैं प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने इधर अच्छी कमाई की है। इसीलिए सिर्फ अपने लोगों को सदस्यता, अपने लोगों का चुनाव।

Pramod Bramhbhatt प्रेस क्लब आफ इंडिया अप्रजातांत्रिक हो गया है। वहां साढ़े 12 हजार रुपए के साथ एक प्रेस क्लब सदस्य की अनुशंसा पर प्रेस वार्ता की पात्रता है यानि बिना अप्रोच और पैसे के कोई आदमी अपनी बात भी मीडिया के सामने नहीं रख सकता है। जबकि इससे तो बेहतर राज्यों के प्रेस क्लब हैं जहां हर व्यक्ति मात्र कुछ सैकड़े में प्रेस जगत के सामने अपनी बात रख सकता है। शुक्ल जी जब गाय इतनी दुधारू होगी तो राजनीति तो लाजमी है।

Sudesh Ranjan प्रेस क्लब को अपने सभी सदस्यों की लिस्ट सार्वजनिक करनी चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि पॉपर्टी डीलरों और गैर पत्रकारों को सदस्यता कैसे दी गई? एक सफाई अभियान वहां भी चलाया जाए।

Sanjaya Kumar Singh जब आप सदस्य नहीं बन पाए तो मुझे कौन पूछता। हर जगह चुनाव लड़ने वाले वोटर भी बनाते हैं (कुछ तो फर्जी भी) पर अपना प्रेस क्लब इन सब लफड़ों से ऊपर है। वोट मांगे जाते हैं लेकिन वोटर बनाने पर किसी का ध्यान नहीं है।

Sunil Yadav सर LUCKNOW प्रेस क्‍लब भी ऐसा ही है, यहां दिल्‍ली से भी अधिक जंगलराज है , इसके कारण ज्‍यादातर पत्रकार वहां आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में जाने से परहेज करते हैं

Suresh Sharma ईमानदारी से काम करने वाले कस्बाई अंचल से लेकर राष्ट़ीय स्तर तक के पत्रकार इस पीड़ा के शिकार है

Sunil Mishra पत्रकारीय नैतिकता के मानक पूरे होने से भी आप इनकी नजर में पत्रकार नही हैं तो ये दोष आपका कतई नही।

Yogendra Sharma इसका तात्पर्य यह है कि प्रेस क्लब की सदस्यता के लिए चाटुकार होना ज़रूरी है। ऐसे जगह आप अपनी मर्ज़ी से नहीं लिख सकते। यानि की एक गुलाम पत्रकार। हो सकता है मेरी ये धारणा गलत हो।

Narendra Tomar वहां एक ताकतवर कोकस का साम्राज्य है जो बहुत खास पहचान / सिफारिश के बिना दाखिल नहीं होने देते हैं ।

Kumar Atul चंडीगढ का भी बुरा हाल है । वहां भी मीडियाकर्मी कम माफिया ज्यादा काबिज हैं । वहां तो बकायदा कारपोरेट मेम्बर बनाने का चलन है । लाखों की फीस है। जाहिर है टुटपुजिये मीडियाकर्मियो की जगह उन्हीं का राज है । दिल्ली प्रेस क्लब से कई गुना बड़ा है । स्वीमिंग पूल और लान टेनिस कोर्ट भी है । अय्याशियो के लिए और क्या चाहिए।

Shravan Shukla आजकल फिल्म सिटी में प्रचारकों की बाढ़ आई हुई है। न्यूजरूम में घुस ही जाते हैं। अपन तो पहले ही हाथ जोड़ लेते हैं कि भैया हम सदस्य नहीं। उसके बाद ऐसे भागते हैं, जैसे पहचाना ही नहीं। पहले ऐसे बोलते हैं,जैसे लंगोटिया यार जमाने बाद मिले हों। हालांकि अधिकतर परिचित ही होते हैं।

Shashi Kant Rai यही हाल पत्रकारिता की भी है सर। पत्रकारिता से अब जनसरोकार और मिशनरी भाव हट सा गया है।बिजनेश हाबी है।मिशन की जगह कमीशन ने ले लिया है। दिल्ली प्रेस क्लब दलालों का अडडा सा बन गया है। जहा शाम होते होते शराब की नदियां बहनी शुरू हो जाती हैं जो देर रात तक चलती हैं। केवल कमीशन वाली पत्रकारिता करने वालों का ही बोलबाला है।मिशनरी पत्रकार तो मजदूरों से भी बदतर जीने को मजबूर हैं। मीडिया घराने खूब फल फूल रहे हैं। काला धंधा को सफेद कर रहे हैं मीडिया की आड में। ऐसे में पत्रकारिता और पत्रकार दोनों पर संकट आ पडा है।

Devendra Yadav अभिजात्य-कुलीन और श्रमजीवी पत्रकारिता में यही एक मौलिक भेद है।क्लब के सदस्य आप जैसे बौद्धिक पत्रकार जनों को एक खतरे के रूप में देखते हैं।

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प्रेस क्‍लब की नई प्रबंधन समिति ऐसे पत्रकारों का समूह हो जो महासचिव पद की तानाशाही प्रवृत्तियों पर निगरानी रखे

मित्रों, प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया के चुनाव में केवल एक दिन शेष है। शनिवार 1 अक्‍टूबर को मतदान होगा। ऐसे में अब तक सामने आए पैनलों से जो चुनावी तस्‍वीर उभर रही है, वह काफी भ्रमित करने वाली है। एक तरफ़ तथाकथित ‘आधिकारिक’ पैनल है (गौतम लाहिड़ी-विनय सिंह) जिसे पिछली प्रबंधन समिति के नीति-निर्माताओं का समर्थन प्राप्‍त है, जिसके ऊपर वरिष्‍ठ सदस्‍य और प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव रहे अली जावेद के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप है और जिसने बीते कुछ वर्षों में प्रेस क्‍लब के महासचिव का पद एक सीईओ के समानांतर बनाकर सदस्‍यता जैसी सामान्‍य प्रक्रिया को भी अपारदर्शी व प्रच्‍छन्‍न बनाने का काम किया है।

दूसरा पैनल (बाला-श्रीकृष्‍ण) स्‍पष्‍ट रूप से दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा प्रायोजित है जिसका घोषणापत्र ही इस बात का गवाह है कि इसके सदस्‍य घटनाओं को राष्‍ट्रवादी और राष्‍ट्रद्रोही के परस्‍पर विरोधी खांचे में रखकर देखने के पैरोकार हैं। अली जावेद को क्‍लब से निकालने वाले अधिकतर लोग इसी पैनल में शामिल हैं।

सरा पैनल (प्रशांत टंडन-फरीदी) इन दोनों के मुकाबले थोड़ा लोकतांत्रिक, युवा और प्रगतिशील अवश्‍य है लेकिन इसने राडिया टेप कांड में आरोपित एक पत्रकार गणपति सुब्रमण्‍यम को संयुक्‍त सचिव पद पर जाने-अनजाने खड़ा कर के अपनी साख पर बट्टा लगा दिया है। कायदे से होना यह चाहिए था कि पैनल इस पत्रकार की सच्‍चाई उजागर होने के बाद इससे अपना पल्‍ला झाड़ लेता, लेकिन उसने ऐसा न कर के अगंभीरता का परिचय दिया है। इस पैनल से वाइस-प्रेसिडेंट पद के दावेदार नवीन कुमार ने इस घटना के खिलाफ़ नैतिकता के आधार पर पैनल से खुद को अलग करते हुए स्‍वतंत्र रूप से चुनाव में खड़े होने का एलान कर के एक साहसिक उदाहरण कायम किया है।

चौथे पैनल (हबीब-पीके) का जि़क्र करने का कोई मतलब इसलिए नहीं बनता क्‍योंकि इसमें तीसरे पैनल के आधा दर्जन नाम रिपीट हैं। ऐसा लगता है कि यह एक डमी पैनल है। प्रेस क्‍लब में आम तौर से पैनल मतदान का चलन रहा है, लेकिन इस बार यह होता नहीं दिख रहा। अच्‍छा प्रबंधन चुनने के लिए कतई ज़रूरी नहीं कि पूरा का पूरा एक पैनल चुनने की सुविधा अपनाई जाए, बल्कि थोड़ा सा विवेक लगाकर विश्‍वसनीय व ईमानदार पत्रकारों का एक समूह चुना जा सकता है जो अलग-अलग पैनलों से हो। वाइस-प्रेसिडेंट पद के प्रत्‍याशी नवीन कुमार को इस दिशा में एक नज़ीर के तौर पर लिया जा सकता है।
 
पत्रकारिता और पत्रकार संगठनों/समूहों की विश्‍वसनीयता के संकट के इस दौर में हम सभी सदस्‍यों से अपील करते हैं कि वे ऐसे चेहरों को प्रबंधन के पदों और समिति के लिए चुनें जिनका पेशेवर रिकॉर्ड साफ-सुथरा हो, जो लिखने और बोलने का साहस रखते हों, ईमानदार हों और अपने किए के प्रति जवाबदेह हों। प्रेस क्‍लब की नई प्रबंधन समिति ऐसे पत्रकारों का समूह हो जो महासचिव पद की तानाशाही प्रवृत्तियों पर निगरानी रखते हुए उसे सभी सदस्‍यों के हितों के मद्देनज़र फैसले लेने को मजबूर कर सके। पैनल का मोह छोड़िए, सच्‍चे पत्रकारों को प्रेस क्‍लब से जोड़िए.

डेमोक्रेटिक जर्नलिस्‍ट्स लीग Democratic Journalists League : जनवादी पत्रकारों की एक मुहिम : संपर्क – djleague@gmail.com

भड़ास को मिले एक मेल पर आधारित.

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लॉबी-पैनल गोल गैंग गिरोह छोड़िए, अच्छे उम्मीदवारों को वोट कीजिए : अवतंस चित्रांश

वरिष्ठ पत्रकारों और मित्रों को नमस्कार, प्रेस क्लब का सदस्य होने के नाते मुझे लगा कि ये वक्त उचित है कि आप सभी से संवाद किया जाए। प्रेस क्लब चुनाव के सिलसिले में मुझे कई मेल मिले हैं। काफी तल्ख और आरोप प्रत्यारोप हैं। मीडिया में काम करने का मुझे गर्व है और सुकून होता है कि तमाम आरपोरेट कारपोरेट ..अल्ले बल्ले दल्ले आरोपों के बावजूद इस पेशे से जुड़े साथी अपने सामाजिक सरोकारों को कही ना कही किसी ना किसी तरह से निभाने की पूरी कोशिश करते हैं।

हालांकि हाल के वर्षों में मीडिया पर कई आरोप लगते हैं। बीजेपी के लोग हमें छद्म सेकुलर कहते हैं। कांग्रेस के लोग हमें भक्तगण कहते हैं, वामपंथी कारपोरेट मीडिया कहकर निपटा देते हैं। बाकी के अपनी सुविधा अपने एजेंडे के हिसाब से मीडिया को कुछ भी कहकर निकल लेते हैं। यहां तक कि डंडी मारने वाले दुकानदार भी गल्ले पर बैठ कर “मीडिया वाले “—-कह देते हैं। डॉक्टर इंजीनियर लोग क्या करते हैं कैसे करते हैं वही जाने लेकिन मीडिया को समाज सुधारने का ठेका मुफ्त देते हैं। माल्या/ सलमान टाइप  तो प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया को दावत देंगे लेकिन समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी की खबर दिखआ दें. तो हमें मीडिया धर्म सिखाने लगते है। मैं इस बहस में नहीं जाना चाहता लेकिन समाज में व्याप्त बुराई का असर अकेले मीडिया पर नहीं है।

इन सबके बीच प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, एक बड़ा नाम है जहां आम पत्रकार से लेकर खास पत्रकार, टाइम्स ऑफ इंडिया से लेकर फला फला पत्रिका, दक्षिण से लेकर उत्तर भारत, टीवी प्रिंट रेडियो तक के साथी मिलते हैं बैठते हैं बात करते हैं। तमाम पत्रकार संगठन होने के बावजूद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया एक व्यापक और बड़े पहचान को बनाए रखने में कामयाब रहा है।  ऐसे में मुझे लगता है कि चुनावी पैनलों की लड़ाई के बीच प्रेस क्लब में सहजता संवाद जैसा माहौल बनाने पर किसी ने ध्यान नहीं दिया… मुझे लगता है कि मैं आपसे निवेदन करूं कि प्रेस क्लब में आपसी सहयोग और संवाद का माहौल बनाने के लिए अच्छे उम्मीदवारों को वोट कीजिए ना कि लॉबी-पैनल -गोल-गैंग-गिरोह से आकर्षित होकर।

अवतंस चित्रांश
avtansh chitransh
संपादक, पूर्वापोस्ट
avtansh.chitransh@gmail.com

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PCI Elections 2016 : A note of “Dissent”

Journalism means expressing dissent and speaking truth to power. Alas! The Press Club Of India has lost this very essence. In the lust for power, all ethics and morality, even professional wisdom is being negotiated with in the current elections for PCI, New Delhi. The recent move by one brave journalist to dissociate himself from his panel at the last moment exposes grave corruption embedded in the the moral sphere of scribes who have formed convenient rainbow coalitions, convenienty called panels, to grab the small power centre that operates from 1, Raisina Road, New Delhi. This election however was a farce from the very beginning. Let us take some time to read this before we go to vote on October 1st, 2016.

The outgoing panel was supposed to go out of office after completion of its one-year term and remain as a caretaker till the current elections. This never happened. There are many arguments for and against this immoral act but what has conspired in the meantime needs to be recalled.

The defining moment for this panel, named Nadeem panel after PCI outgoing Secretary-General, came in the Ali Javed episode. Let’s not forget that Ali Javed only booked the PCI hall  in his capacity as a member where the Kashmir-centric program was held and allegedly “anti-national” slogans were raised. Despite, this management committee involved Delhi Police instead of initiating a preliminary internal inquiry. A complaint was lodged in the midnight by PCI against Javed and others that led to prolonged harassment of this senior member who teaches in DU and is himself the General Secretary of Progressive Writers Association, the oldest organisation of writers in this country associated with the Communist Party of India (CPI).

A signature campaign was initiated against PCI’s move the very next day in favour of Javed that immediately tested the waters. The “official” panel (Gautam-Vinay panel) supported by outgoing GS Nadeem Kazmi is backed by so-called CPI-CPM affiliated journalists. These scribes not only refused to sign the petition rather disapproved of running any such campaign because “right-wing will benefit” from it. Later Javed was reinstated but when he arrived one fine evening in the club, he was forced to leave and even abused as “Pakistani agent” by some management committee members as well as others.

At that time, the restraint from signing the petition in favour of Javed may have seemed tactical and politically correct to many, but this politics of convenience resulted in a fiasco when the elections were announced. “Official” panel was divided on Ali Javed Issue. Rahul Jalali, the President, with Shri Krishna and others moved to an entirely different panel (Bala-Krishna panel) that is being termed as “RSS” panel allegedly promoted by some Central Minister. Now Nadeem was left all alone with a few team members. So, the so-called CPI-CPM scribes who had defended Nadeem at the time of Ali Javed episode again discounted him on the pretext of a “minority complex” and formed Gautam-Vinay panel adding a few names from outside. Ironically, Ali Javed is supporting this so called “official” and “leftist” panel alongwith Nadeem Kazmi who was instrumental in getting him booked!

This was a blow in the face for the group of journalists who had initiated signature campaign in favour of Javed. So they decided to form an entirely different panel claiming to be “pure” leftists. Till the date of nomination, this panel could not arrange for a “President” candidate so it accomodated Nirnimesh Kumar (The Hindu). Awfully, Nirnimesh was the one who had abused Ali Javed on his first entry to PCI after being reinstated, as told by some members who had witnessed the whole tussle. When this info came into picture, some panel members openly opposed his candidature. Within 24 hours, Nirnimesh was “out of the panel” and Prashant Tandon promoted to “President” post from earlier General Secretary post. However, on the day of nomination cancellation i.e. September 23rd, the developments took a strange turn. This panel “merged” with a fourth panel (Shahid Faridi) and carved out an entirely new team with Nirnimesh Kumar demoted to “Treasurer” post (instead of being out of the panel as communicated) and Shahid Faridi brought-in at General Secretary post that was vacant due to the promotion of Tandon.

The story did not end here. The curious case of Nirnimesh Kumar’s candidature relates to the new memberships given by outgoing panel through “back door” without a “transparent” process. Nirnimesh was due to file a petition against these memberships when he was lured by the “pure” leftist panel at President’s post. This was because a couple of management committee candidates in this panel are “new” members and if the petition got filed, their candidature, even the panel’s  existence could have been mired in jeopardy. When he was opposed, the decision makers of this panel could not show mettle to get him out rather demoted him to “Treasurer” post and falsely communicated till September 23rd afternoon that he is “out”!

Now this third panel was Prashant-Faridi panel at last. But controversies never end in PCI. This hybrid panel fielded one Ganapathy Subramaniam at the Joint Secretary post, initially reserved for Charu Soni (who had also filed nomination. Her withdrawal/ouster is still unexplained.). Obviously he was imported from Faridi panel, the fourth one that got merged with this. Seven years are not sufficient to erase something as gigantic and incestuous as Radia Tapes scam that rocked UPA and this country. Ganapathy was then with ET Now and was caught on tape talking to Nira Radia, leaking informations and hobnobbing. He was fired from ET Now on this charge and had been oout of sight for a few years. Outlook, Deccan Chronicle and The New Indian Express had carried a detailed story and transcriptions of what conspired between both in 2009. The tapes are still on Outlook website found with much ease on googling.

The Vice-President candidate for this panel Navin Kumar (Deputy Editor, News 24) raised this issue on Tuesday, September 27, 2016 with the panel. With much indifference, he was told by the decision-makers that this could not be undone as elections are on head. More importantly, senior panel members tried to convince him that the conversation between Subramaniam and Radia was purely journalistic! Navin Kumar has dissociated himself from Prashant-Faridi panel in a formal email. He has decided to contest independently at Vice-President post.

Below is the text of Navin Kumar’s email leaked to media:

Dear all,

This is with regard to the latest developments in Prashant-Shahid panel to which I have been associated from the very beginning as a candidate for Vice-President post in the Press Club Of India elections 2016.

When it came to notice that the candidate for Joint Secretary post Mr. Ganapathy Subramaniam is tainted and was fired from ET Now way back in 2009 on charges of being involved in Radia tapes scam, I raised this issue officially today. I was expecting a moral revert from the panel but it did not happen. I was shocked to learn that many members see nothing wrong in content of tape. I am sorry but personally I see it as complete violation of basic journalistic ethics.

I have always stood by high democratic values and my heart bleeds when I see just for winning an election you have compromised your morals. At this juncture of time I have to decide where I would like to be seen. With greater democratic values or with people on unofficial payroll of Neera Radia in name of journalism?

I have no choice but to dissociate myself from this panel and fight the elections individually as I do not want to dent my credibility as a journalist professionally neither I feel it moral and ethical to continue
in the present scenario.

Pls take this mail on record that I am dissociating myself from Prahsant-Shahid panel as Vice President and contesting individually.

Pls note not to publish my name and picture as a candidate on any of your posters, banners, pamphlets, mailers, campaign material etc violating which may amount to serious defamation on each and every member of the panel.

I rest my case and withdraw from this panel as its member. I will continue to fight as an independent candidate on the post of Vice-President.

Happy election!

Regards,
Navin Kumar
VP candidate
Membership No. 6359

Now the million dollar question- Who should one vote for? Obviously, Navin Kumar may be one such name who has stood out in the supermarket of PCI-traders! What about rest?
 
Considering the holiness of a cow as scandalous in itself, there must be some standard by which one should go out for selecting candidates and vote in PCI elections if not for NOTA! Keeping an individual’s verified and pre-tested journalistic credential, professional honesty, democratic-secular bearing and basic human values in mind, some names are surely there to vote for- obviously not from a single panel! Here goes the LCM (Lowest Common Multiple in arithmetical parlance) of all panels:  

President: Prashant Tandon
General Secretary: Shahid Faridi (those who know about his role in HT union may decide better)
Vice-President: Navin Kumar
Joint Secretary: Jomy Thomas
Treasurer: None

Managing Committee:
Manan Kumar
Rajesh Kumar
Sudhi Ranjan Sen
Aadesh Rawal
Afroz Alam Sahil
Divya Trivedi
Jaya Nigam
Pankaj Srivastava
Shakeel Akhtar
Sushil Dev
Varun Shailesh
Vishwadeepak

Obviously this does not fill up all posts and that is never going to happen in the Press Club which usually votes for a singl panel, but then idealism is something that can never be negotiated with. To quote H.L. Mencken from A Book Of Burlesques, “An idealist is one who, on noticing that a rose smells better than a cabbage, concludes that it makes a better soup.”

Let us hope for a better soup this time.

The Dissenters
Press Club Of India
New Delhi
djleague@gmail.com

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राडिया टेप वाले पत्रकार को चुनाव लड़ाने पर नवीन कुमार ने खुद को पैनल से अलग किया, पढ़िए उनका पत्र

Dear all,

This is with regard to the latest developments in Prashant-Shahid panel to which I have been associated from the very beginning as a candidate for Vice-President post in the Press Club Of India elections 2016.

When it came to notice that the candidate for Joint Secretary post Mr. Ganapathy Subramaniam is tainted and was fired from ET Now way back in 2009 on charges of being involved in Radia tapes scam, I raised this issue officially today. I was expecting a moral revert from the panel but it did not happen. I was shocked to learn that many members see nothing wrong in content of tape. I am sorry but personally I see it as complete violation of basic journalistic ethics.

I have always stood by high democratic values and my heart bleeds when I see just for winning an election you have compromised your morals. At this juncture of time I have to decide where I would like to be seen. With greater democratic values or with people on unofficial payroll of Neera Radia in name of journalism?

I have no choice but to dissociate myself from this panel and fight the elections individually as I do not want to dent my credibility as a journalist professionally neither I feel it moral and ethical to continue in the present scenario.

Pls take this mail on record that I am dissociating myself from Prahsant-Shahid panel as Vice President and contesting individually.

Pls note not to publish my name and picture as a candidate on any of your posters, banners, pamphlets, mailers, campaign material etc violating which may amount to serious defamation on each and every member of the panel.

I rest my case and withdraw from this panel as its member. I will continue to fight as an independent candidate on the post of Vice-President.

Happy election!

Regards,
Navin Kumar
VP candidate
Membership No. 6359

(दोनों तस्वीरें नवीन कुमार की एफबी वॉल से.)

इसे भी पढ़ें ताकि पता चल सके राडिया टेप वाले पत्रकार के पैनल में कौन कौन प्रत्याशी हैं….

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ये है प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव का तीसरा पैनल…. एक अक्टूबर को पड़ेंगे वोट

प्रेस क्लब आफ इंडिया में एक अक्टूबर को वोट पड़ने हैं. भड़ास पर आपने अब तक दो पैनल के बारे में पढ़ा. अब ये तीसरा और आखिरी पैनल का डिटेल है. यह पैनल वामपंथी पत्रकारों का है. इसमें अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार प्रशांत टंडन बनाए गए हैं तो सेक्रेट्री जनरल के लिए शाहिद अफरीदी सामने हैं. उपाध्यक्ष के लिए नवीन कुमार मैदान में हैं तो ज्वाइंट सेक्रेट्री के लिए जी. सुब्रामण्यम हैं. ट्रेजरार पद के लिए निर्निमेष कुमार टक्कर दे रहे हैं.

मैनेजिंग कमेटी के लिए इस पैनल से आदेश रावल, कुमार गौरव, अफरोज आलम साहिल, पंकज श्रीवास्तव, अंजलि भाटिया, राहिल चोपड़ा, चार्ल्स इसाक, शकील अख्तर, दिव्या त्रिवेद, समृद्धि भटनागर, जया निगम, सुशील देव, कमलेश वकील, वरुण शैलेष, किरण शर्मा और विश्व दीपक.

भड़ास4मीडिया तक अपनी बात bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचाएं.

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नदीम अहमद काजमी ने ‘गौतम-विनय-मनोरंजन-अरुण’ पैनल को जिताने की अपील की

Nadeem Ahmad Kazmi : Dear Friends, I am not in fray this year in Press club Elections as we ourselves amended the constitution not to contest on Office bearer post after two years and i respect the amendment in toto. Elections are on 1st October and my support is for the Gautam Lahiri, Vinay Kumar, Manoranjan Bharti, Arun Joshi and Jomy Thomas panel.

Here i am attaching the panel list for your vote and support. Pls Give them panel vote to carry on the legacy of T R Ramchandran, Anand Sahay, Sandeep Dixit and rest of our team which has given a new Height and new life to this Club.

प्रेस क्लब आफ इंडिया के निर्वतमान सेक्रेट्री जनरल नदीम अहमद काजमी की एफबी वॉल से.

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प्रेस क्लब आफ इंडिया में चुनाव : Vote for ‘Bala-Srikrishna-Souvagya-Ajay-Sondeep’ Panel

We Solemnly Promise

The Press Club of India is an institution that’s almost as old as the nation. In its sixty-odd years of history, this organization has, very much like the nation itself, been through many changes, both lofty highs and steep lows. In its halcyon days, the Club was a professional place where journalists, and only journalists, turned in to not only hone their professional skills and enrich their intellectual quotient, but also to rest and recreate with the best of the ale that’s available in town, and at affordable prices.

It used to be a cozy corner that was classy and yet not elitist, elegant and yet not gaudy. It was a spot worthy of belonging to, an address that lent itself pride and respect. The old-timers say that the building began as a stable before it was elevated to a high-end rendezvous for some of the Capital’s sharpest minds and scholarly heads. In six- plus decades, the Press Club of India appears to have turned full circle, from a piss-pot for cavalry horses to a prim and proper saloon for journalists, and now back to a down and out rack meant for just anyone with money to throw around. The journalists-only exclusivity of the place has gradually given way to anyone-but-journalists kind of licentiousness.

If we let the drift go unhindered, this place, in another few years, would go down the dump, to become a place worse than the horse-piss ditch it was, to begin with. Someone has to clean it up, and put it back to its exclusivity as a place worthy of the Fourth Estate members.

This is what we have sworn to achieving once we get your mandate. It’s no easy task by any means, but with the active support and solidarity of the members, that’s you, we are confident of accomplishing it. We have identified a few core areas where we need to achieve quick results, so that we can build on further in order to restore the Club to its lost glory.

1. We will straightaway remove the cloak of secrecy that is identified with successive managements’ style of functioning, and will throw open the Club to transparency and fair play.

2. If the Press Club belongs to the members, it belongs as much to their families, too. We will make it a second home for both the members and their families. It will be a place that the members would use as an ideal work place , while their families would use it as a place for rest and recreation. There will be exclusive Family Days, regional food festivals, talent scout competitions for children (with attractive prizes) etc. 

3. Our team will lay special emphasis on the Club’s cultural and intellectual quotient. There will be more cultural activities that are region specific, film festivals that would represent both serious cinema and family entertainers. Sports and games will be augmented by organizing competition for both journalists and their families, cricket and football matches with other professionals such as politicians, bureaucrats, and diplomats. We would try and rope in the international media through the Foreign Correspondents’ Club and foreign missions in Delhi with this end in view. We also have plans to revive regular badminton and chess tournaments, again for both the members and their families.

5. Special focus would be on book exhibitions, book reading sessions, poetry presentations, and quiz competitions for both members and their families.

4. A couple of days in a month can be allotted exclusively to ladies (both journalists and family members) to interact with each other and share their notes – as reporters and wives.

6. The Club will make special efforts to periodically organize news-making seminars and debates that would witness some of the country’s best brains and talking-heads in fiery combat.

7.  All festivals (both religious and cultural) would be celebrated with participation of members and their families.

8. Last but not the least we will take forward the idea of a Federation of Press Clubs of India which was launched at the initiative of the Press Club of India with a view to strengthening the role of press clubs in furthering the cause of a free media.

Vote for Transparency and Betterment of Press Club on 1st October 2016…

Vote for “Bala-Srikrishna-Sondeep” Panel

PRESIDENT:  P.P. BALACHANDRAN “BALA”(Senior Journalist)
VICE- PRESIDENT: SOUVAGYA KAR (All India Radio)
SECRETARY GENERAL: SRI KSRISHNA (The Statesman)
JOINT SECRETARY: AJAY JHA (Ex-Sahara)
TREASURER: SONDEEP SHANKAR (Deccan Chronicle/Asian Age)

MANAGING COMMITTEE
1.PRAFUL KUMAR SINGH (msn.com)
2.UJJWAL KUMAR (NewsRise)          
3. KOMAL SHARMA (Sahara)           
4. ANITA CHOUDHARY (Doordrasan)   
5. ARVIND KUMAR SINGH (Hindustan)
6. SANJAY CHOWDHURY (Aajtak)    
7. CHANDAN KUMAR (India News)   
8. HIMANSHU MISHRA (Aajtak)      
9. JITENDER SHARMA (Zee News)
10. ATUL GANGWAR (TV Journalist)
11. KAMAL KISHORE SHANKAR (PTI)
12. MANASH PRATIM GOHAIN (Times of India)
13. MRIGANK PRABHAKAR (Sahara)
14. BIBHUTI KUMAR RASTOGI (Rashtriya Ujala)
15. UNNIKRISHNAN T (Mathrubhumi)
16. SUJAN SINGH (Photojournalist)

Regards

Praful singh

singhpraful@gmail.com

प्रेस रिलीज


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