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सियासत

मुसलमानों के इस जहरीले रुख से मोदी को फिर बंपर ‘एंटी-मुस्लिम’ वोट मिलेंगे!

Dayanand Pandey

तो क्या आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड भाजपा की पिच पर खेल रहा है। 2019 की चुनावी दुरभि-संधि में शामिल हो गया है मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड। मुझे तो यही लगता है। जिस तरह बैठे-बिठाए हर ज़िले में शरिया अदालत और मुसलमानों के एक और अलग देश की धमकी भरी मांग और इस पर गरमागरम बहस शुरु हो गई है वह हैरतंगेज है।

नरेंद्र मोदी की दो ही तो यूएसपी हैं। एक राहुल गांधी दूसरे, हिंदू-मुसलमान। वह कहते हैं न कि अंधे को क्या चाहिए, बस दो आंख। राहुल की निकम्मई और पप्पूगिरी जैसे कम पड़ गई थी कि राहुल गांधी पर कोकीन के नशे का आरोप भी नत्थी हो गया है बरास्ता सुब्रमण्यम स्वामी। जिस पर राहुल गांधी समेत समूची कांग्रेस ख़ामोश है। बोलने पर, मुकद्दमा करने पर डोप टेस्ट की चुनौती सामने है। सो ख़ामोशी बरत ली गई है। कांग्रेस हर ज़िले में शरिया अदालत और मुसलमानों के लिए एक और देश पर भी अभी ख़ामोश है।

लेकिन मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के अहमकपने का कोई इलाज नहीं है। गोया ओवैसी और आजम खान जैसे लोगों के जहरीले बोल कम पड़ रहे थे कि मुस्लिम पर्सनल बोर्ड अपनी नई धज में उतर गया है। जफरयाब जिलानी से लगायत डिप्टी ग्रैंड मुफ्ती नासिर उल इस्लाम तक को लगता है जैसे वह सचमुच हर ज़िले में शरिया अदालत बना लेंगे। नहीं तो मुसलमानों के लिए पाकिस्तान की तरह एक और नया देश बना लेंगे। सच यह है कि इस्लामिक आतंकवाद और मुसलमानों के इसी जहरीले रुख के चलते ही 2014 में नरेंद्र मोदी को बंपर एंटी मुस्लिम वोट मिले थे। मुस्लिम वोट बैंक की तब धज्जियां उड़ गई थीं। आज तक उड़ी हुई हैं। मुसलमानों के इसी जहरीले रुख के चलते 2019 में नरेंद्र मोदी को फिर बंपर एंटी मुस्लिम वोट मिल जाएंगे।

भाजपा ने पिच पूरी तरह से तैयार कर ली है। मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड अपनी मिट्टी पलीद करने के लिए इस पिच पर लंगोट कस कर आ गया है। धर्म को अफीम बताने वाले कामरेड लोग भी सेक्यूलरिज्म की चैम्पियनशिप जीतने खातिर बस लंगोट कस ही रहे होंगे। अपनी सारी लफ्फाजी के साथ जल्दी ही कामरेड लोग भी अकलियत को कंधा देने के लिए इस पिच पर पूरी ताकत से लामबंद हो जाएंगे। न हर्र लगे , न फिटकरी , भाजपा का रंग चोखा बनाने के लिए और क्या चाहिए। म

हागठबंधन में दुनिया भर के लोगों को आप शामिल कर लीजिए। भाजपा की इस चुनावी बिसात पर नरेंद्र मोदी की कालर, अरे, एक बटन और एक क्रीज़ भी नहीं टेढ़ी कर पाएंगे। अभी न जाने तरकश में कितनी और पिचें तैयार पड़ी हैं। नरेंद्र मोदी का वह एक शुरुआती जुमला याद आता है, चार साल काम करेंगे, पांचवें साल राजनीति। तो राजनीति शुरू हो गई है।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार दयानंद पांडेय की एफबी वॉल से.

https://www.youtube.com/watch?v=gmo14EBEyfM

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1 Comment

1 Comment

  1. madan kumar tiwary

    July 11, 2018 at 11:30 am

    मोदी बुरी तरह हार रहा है, जबरदस्त जनाक्रोश है मोदी के खिलाफ ,शायद उतना जनाक्रोश मनमोहन के खिलाफ 2014 में या इंदिरा जी के खिलाफ 1977 में भी नही था ,कही 28 पर न सिमट जाए बीजेपी ,वैसे दयानन्द पांडे पुर्वाग्रह से पीड़ित व्यक्ति हैं ,हमेशा जनभावनाओं के खिलाफ ही लिखते हैं , No one take him seriously .

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