महिला एंकर को डिप्रेशन में जाने और इस्तीफा देने तक परेशान किया गया, पढ़िए चिट्ठी

सर

मैंने 5 अप्रैल 2016 को नेशनल वॉयस चैनल में बतौर एंकर / प्रोडयूसर ज्वाइन किया था. शुरुआत काफी अच्छी रही लेकिन पिछले दो महीने से लगातार मुझे आफिस में बेवजह कोई ना कोई मुददा बनाकर परेशान किया जा रहा है. मुझे इतना परेशान किया गया था कि मैं डिप्रेशन में आ गई थी. इसके बाद ऑफिस में ही मेरी तबियत खराब हो गई. मैं कई दिन तक अस्पताल में रही. ठीक होने के बाद जब मैंने ऑफिस ज्वाइन किया तो भी मेरे सीनियर का रवैया नहीं बदला. उसके बाद भी वो लगातार मुझे मानसिक रुप से प्रताड़ित करते रहे.

मुझे कहा गया कि मेरा चेहरा अच्छा नहीं है. कभी कुछ तो कभी कुछ कहा जाता रहा. सर, जो लोग मेरे चेहरे को लेकर सवाल कर रहे हैं कि मेरा चेहरा स्क्रीन पर अच्छा नहीं लग रहा, मुझे लगता है कि पहले उन लोगों को खुद आईना देखना चाहिए. जिनके सिर पर चार बाल नहीं वो दूसरों के चेहरे पर सवाल उठाते हैं. अपराध के शो करते-करते लोगों की सोच भी आपराधिक प्रवृत्ति की हो गई है. सर हाल ही में मेरे पापा की तबीयत खराब हो गई थी. इसके बाद मैंने एचआर को मेल करके जानकारी दी थी. साथ ही अपने सीनियर को फोन करके सूचना दे दी थी. लेकिन मेरे सीनियर ने ऑफिस में झूठी अफवाह फैलाई और ये कहा कि मैं इस्तीफा देकर चली गई हूं. मेरे सीनियर को ये मालूम होना चाहिए कि इस्तीफा मेल से दिया जाता है, मुंह से बोलकर नहीं.

मैंने इस्तीफा नहीं दिया था और मेरे सीनियर ने सभी को गुमराह किया, क्योंकि वो चाहते हैं कि ऑफिस में मेकअप रुम से लेकर आउटपुट, इनपुट, प्रोग्रामिंग, आईटी हर जगह उनके ही लोग हों, जो उनकी हां में हां और ना में ना कर सकें. पर मेरे साथ ऐसा नहीं है कि मै सीनियर की हर गलत बात का साथ दूं. मैंने ऑफिस में 14 से 15 घंटे तक भी काम किया है. उन लोगों में से नहीं जो ऑफिस टाइम में रात को दारु पीने पार्क चले जाते हैं और आकर आउट डालकर ये दिखाते हैं कि हमने कितने घंटे काम किया है.

सर बातें तो और भी बहुत हैं लेकिन फिलहाल मैं इस माहौल को देखते हुए ऑफिस नहीं आ सकती. सर नोटिस देकर काम करने पर भी मुझे परेशान ही किया जाएगा, इसलिए अपनी सारी परेशानी बताते हुए मैं ऑफिस से इस्तीफा दे रही हूं. मेरे पापा की तबीयत अबी भी ठीक नहीं है और मैं खुद बहुत डिप्रेशन में हूं कि ऑफिस में मेरे खिलाफ किस तरीके से षडयंत्र रचा गया. सर आपसे विनती है कि मेरे पिछले महीने की सैलरी और अभी तक की सारी छुट्टियां एडजस्ट करा कर कल तक मेरे बैंक खाते में मेरे पैसे जमा करा दें. मुझे काफी जरूरत है. एमडी सर का जाते जाते शुक्रिया करना चाहती हूं कि आपने मुझ पर भरोसा किया और अपने संस्थान में काम करने का मौका दिया. 

रेशू त्यागी
एंकर

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उचित शर्मा से नाराज पायनियर की मार्केटिंग टीम ने दिया इस्‍तीफा

छत्‍तीसगढ़ से प्रकाशित पायनियर हिन्दी अखबार में मैनेजर उचित शर्मा के व्‍यवहार से नाराज होकर सिटी टीम ने इस्‍तीफा दे दिया है. उचित शर्मा के अनप्रोफेशनल रवैये तथा अपने लोगों की भर्ती करने के लिए प्रताडि़त करने का आरोप लगाते हुए प्रबंधन को अपना इस्‍तीफा सौंप दिया.

इस्‍तीफा देने वालों में छत्‍तीसगढ़ टीम के मार्केटिंग हेड विक्रम प्रधान, असिस्‍टेंट मार्केटिंग मैनेजर चंद्रकांत श्रीवास, सीनियर मार्केटिंग एक्‍जीक्‍यूटिव क्‍लीफोर्ड और आदेश श्रीवास्‍तव शामिल हैं. इससे पहले उचित शर्मा के व्‍यवहार से नाराज होकर ग्राफिक्‍स डिजाइनर टीकेश्‍वर साहू ने पा‍यनियर से इस्‍तीफा दे दिया था. इनमें से ज्‍यादातर फाउंडर मेंबर थे. 

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उपेंद्र राय ने सीईओ और एडिटर इन चीफ पद से इस्तीफा दिया

जब मालिक पैसे नहीं देगा तो सीईओ और एडिटर इन चीफ क्या कर लेगा. लंबे समय के जद्दोजहद के बाद उपेंद्र राय ने इस्तीफा दे दिया. बात वही थी. सुब्रत राय फंड रिलीज नहीं कर रहे थे और कर्मचारियों की सेलरी की डिमांड बढ़ती जा रही थी. ऐसे में रोज रोज के किच किच से तंग आकर उपेंद्र राय ने ग्रुप एडिटर इन चीफ और ग्रुप सीईओ के दोनों पदों से इस्तीफा दे दिया है. सहारा के उच्च पदों पर आसीन लोगों ने इस खबर को कनफर्म किया है. यह भी बताया जा रहा है कि अभिजीत सरकार को अब सहारा मीडियाा की भी पूरी जिम्मेदारी दे दी गई है.

पूर्वी यूपी के जिला गाजीपुर के रहने वाले उपेंद्र राय ने सहारा समूह में बहुत छोटे पद से शुरुआत की थी और पूरे ग्रुप को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई. उनकी कमर्ठता और निष्ठा को देखते हुए सहारा प्रबंधन लगातार उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां देता गया. उपेंद्र राय ने पूरी लायल्टी और डेडीकेशन के साथ सहारा समूह को अपने योगदान से काफी बड़ा बनाने में भरपूर योगदान दिया. बाद में किन्हीं मुद्दों को लेकर सहारा प्रबंधन से उपेंद्र राय का विवाद हुआ तो वो इस्तीफा देकर स्टार न्यूज चले गए. ऐसा कम होता है जब सहारा में काम किया कोई वरिष्ठ कर्मी किसी दूसरे ग्रुप में बड़े पद पर जाए. उपेंद्र राय ने दिल्ली और मुंबई में रहकर स्टार न्यूज के लिए जमकर काम किया.

उपेंद्र राय की मेहनत और लगन को देखते हुए, साथ ही पुराने विवादों को निराधार व मनगढ़ंत पाते हुए सहारा प्रबंधन ने उपेंद्र राय के सहारा में कार्यकाल के दौरान कर्तव्यनिष्ठ इतिहास के मद्देनजर उन्हें एक बार फिर सहारा में ससम्मान वापसी कराई. उन्हें मीडिया हेड का पद दिया गया. लेकिन फिर किन्हीं आंतरिक उपद्रवों के चलते उपेंद्र राय को सहारा से साइडलाइन कर दिया गया. ऐसे में उपेंद्र राय ने अपनी मेधा और क्षमता के बल पर जी न्यूज में शीर्षस्थ पद पर ज्वाइन कर सेवा देने की शुरुआत की. कुछ दिनों बाद एक बार फिर सहारा प्रबंधन उपेंद्र राय के शरणागत हुआ और उन्हें ग्रुप सीईओ और एडिटर इन चीफ बनाकर सहारा के मुश्किल दिनों में वापसी कराई. लेकिन सहारा प्रबंधन जिन शर्तों और वादों के जरिए उपेंद्र राय को संस्थान में बड़े पद पर वापस लाया, उन वादों को निभाने में विफल हुआ. सहारा समूह अपने ही कर्मचारियों को सेलरी दे पाने में असफल होता रहा. ऐसे में उपेंद्र राय ने आज एक बार फिर से अपना इस्तीफा प्रबंधन को सौंप दिया है. 

माना जा रहा है कि सहारा प्रबंधन अब सिर्फ वादों और भरोसों के जरिए सहारा कर्मियों को अपने साथ जोड़े रखना चाहता है. लेकिन जब तक सहारा कर्मियों को तनख्वाह न दी जाएगी, तब तक वो कैसे सहारा की सेवा कर पाएंगे. ऐसे में अब बड़ा सवाल सहारा कर्मियों के भविष्य का है. क्या सहारा की गाड़ी अब पूरी तरह डगमगा गई है और पूरी ताकत सिर्फ व सिर्फ सहारा श्री सुब्रत राय को छुड़ाने में लगा दिया है, भले ही सहारा कर्मियों का घर बार चौपट होता रहे. कहा जा रहा है कि आने वाले दिन सहारा समूह के लिए बेहद मुश्किल भरे दिन साबित होने वाले हैं. देखना है कि नए मीडिया हेड अभिजीत सरकार इस मुश्किल वक्त को कैसे हैंडल कर पाते हैं.

उपेंद्र राय के ज्वायनिंग के दौरान की भड़ास पर प्रकाशित खबर पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें….

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रिफ़त अब्दुल्लाह ने विशेष संवादादाता पद से इस्तीफ़ा दे दिया

Priyabhanshu Ranjan : क्या आपको श्रीनगर में तैनात ईटीवी के उस रिपोर्टर की याद है जिसने 2014 में आई बाढ़ के वक़्त अपनी जान दाँव पर लगाकर 300 लोगों की जान बचाई थी। उसका नाम है रिफ़त अब्दुल्लाह। रिफ़त ने एक बार फिर किसी डूबते को बचाने की कोशिश की है। इस बार उसने अपनी नौकरी दाँव पर लगाई है ताकि मीडिया की साख न डूब जाये। रिफ़त ने आज ईटीवी उर्दू के विशेष संवादादाता पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

वजह जानेंगे तो हैरान रह जाएँगे। दरअसल, महबूबा मुफ़्ती को पहली महिला मुख्यमंत्री बनने पर बधाई देने के लिए ईटीवी वह कर रहा था जिसे अब तक देखा-सुना नहीं गया। सोमवार यानी 4 अप्रैल को महबूबा मुफ़्ती के शपथग्रहण से पहले ईटीवी की ओर से जम्मू और श्रीनगर में ‘’अब्बू की लाडली’’ और ‘’कश्मीर की बेटी’’ महबूबा मुफ़्ती को सूबे की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने की बधाई देते हुए बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स लगवाई गईं थीं। ईटीवी के इस अंदाज़ को देखते हुए सवाल उठ रहे थे कि क्या किसी मीडिया संस्थान का ऐसा करना जायज़ है। तमाम लोग इसे सत्ता के साथ नत्थी होने की ईटीवी अकुलाहट बताते हुए आलोचना कर रहे थे।

रिफ़त ने ईटीवी के इस रुख का विरोध करते हुए इस्तीफ़ा दे दिया। उन्होंने बताया कि किसी मीडिया संस्थान को ऐसा नहीं करना चाहिए जैसा कि ईटीवी ने किया है। वे इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। यह पत्रकारिता की मर्यादा का उल्लंघन है। रिफ़त 2005 से श्रीनगर में तैनात हैं और चैनल के चर्चित चेहरों में हैं। कश्मीर घाटी में आई बाढ़ के समय उनके काम की गूँज पूरे देश में सुनाई पड़ी थी। उन्होंने रिपोर्टिंग करने के साथ-साथ जान जोख़िम में डालते हुए करीब 300 लोगों की जान भी बचाई थी। उन्हें बेहतर रिपोर्टिंग के लिए कई अवार्ड भी मिल चुके हैं।

युवा पत्रकार प्रियभांशु रंजन के फेसबुक वॉल से.

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‘सामना’ के संपादक पद से प्रेम शुक्ला का इस्तीफा, भाजपा में शामिल होंगे, मंत्री या प्रवक्ता बनने के आसार

मुंबई से मीडिया जगत और राजनीति की एक बड़ी खबर सामने आ रही है. शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादक प्रेम शुक्ला ने पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक प्रेम शुक्ला भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं. बताया जा रहा है कि उन्हें भाजपा में प्रवक्ता का पद दिया जा सकता है या फिर मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल में मंत्री पद से नवाजा जा सकता है.

प्रेम शुक्ल लंबे समय से सामना के संपादक हैं और शिव सेना के जाने माने चेहरे के रूप में न्यूज चैनलों पर बहसों में प्रकट होते हैं. यूपी के रहने वाले प्रेम शुक्ला ने मुंबई में अपनी कड़ी मेहनत से तरक्की हासिल की और आज वे देश के जाने माने चेहरे बन चुके हैं. प्रेम शुक्ला को लेकर कई किस्म के कयास लगाए जा रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि प्रेम शुक्ला का संपादक पद से हटना ठाकरे खानदान की अंदरुनी उठापटक का नतीजा है. वहीं अन्य का कहना है कि नरेंद्र मोदी निजी तौर पर प्रेम शुक्ला को पसंद करते हैं इसलिए उन्हें भाजपा में शामिल कराया जाएगा. उन्हें पार्टी का प्रवक्ता बनाया जा सकता है या फिर केंद्र में मंत्री पद दिया जा सकता है.

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अमर उजाला नोएडा से एक साल में एक दर्जन विकेट गिर चुके हैं

अमर उजाला नोएडा हेड ऑफिस के एक साल में एक दर्जन विकेट गिर चुके हैं। अपने मोहरे फिट करने के जुगाड़ में लगे संपादक अभी भी कई पर टेढी़ नजर रखे हैं। सबसे लेटेस्ट गिरने वाले दो विकेट सब एडिटर मनीष सिंह और सीनियर सब एडिटर अमित कुमार बाजपेयी हैं। अमर उजाला से जुड़े अधिकारियों की मानें तो ग्रेटर नोएडा के स्टार रिपोर्टर और बीते दो साल से नोएडा हेड ऑफिस में सबसे तेज एडिटिंग-पेजीनेशन करने वाले अमित कुमार ने संस्थान को गुडबाय बोल दिया है।

2006 में जागरण आई नेक्स्ट की लांचिंग टीम में फोटो जनलिस्ट पोजीशन छोड़कर वो अमर उजाला ग्रेटर नोएडा में रिपोर्टर बने। सात साल तक रिपोर्टिंग के बाद बीते दो साल से वो डेस्क पर थे। उन्होंने अपनी नई पारी राजस्थान पत्रिका के पोर्टल कैच न्यूज हिंदी के साथ की है. वहीं, मनीष सिंह भी पिछले करीब चार साल से दिल्ली डेस्क पर डिजाइनर पन्ना बनाने के उस्ताद मानें जाते हैं। मध्य प्रदेश के  सतना निवासी मनीष ने भी अगस्त में इस्तीफा दे दिया है और अब वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैंl

इससे पहले अगस्त में ही नोएडा ब्यूरो के रिपोर्टर सोमदत्त शर्मा ने हिंदुस्तान गुड़गांव का दामन थाम लिया था। राष्ट्रीय सहारा के बाद वो करीब तीन साल पहले अमर उजाला से जुड़े थे। अमर उजाला में जूनियर सब एडिटर सोमदत्त हिंदुस्तान में रिपोर्टर के रूप में जुड़े हैं। वहीं, इससे पहले इस साल नोएडा के सीनियर सब एडिटर-  रिपोर्टर अनुराग त्रिपाठी और क्राइम बीट प्रभारी दिनेश शर्मा भी संस्थान को गुडबाय बोल चुके हैं। दिनेश ने नवोदय टाइम्स दिल्ली में ज्वाइन किया है।

इसके अलावा दिल्ली के बाद ग्रेटर नोएडा में रिपोर्टर और डेस्क पर भेजे गए भरत पांडेय भी अब यहां नहीं हैं। जबकि दिल्ली डेस्क पर काम करने वाले रोहिताश्व, फरीदाबाद ब्यूरो के कुंदन तिवारी यहां से जा चुके हैं। इससे पहले देहरादून स्टेट ब्यूरो प्रमुख शेषमणि शुक्ला और बरेली ब्यूरो चीफ रह चुके मुकेश उपाध्याय भी डेस्क पर भेजे जाने के बाद कुछ समय काम करके अमर उजाला से इस्तीफा दे चुके हैं। गुड़गांव ब्यूरो चीफ मलिक असगर हाशमी भी गुड़गांव से जा चुके हैं। जबकि पलवल प्रभारी भगत सिंह डागर भी संस्थान छोड़ कर जा चुके हैं। जहां तक जानकारी है इस साल एनसीआर से एक दर्जन से ज्यादा स्टाफ अमर उजाला को छोड़ देगा।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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अखबार में छपे लेख पर भारत की आपत्ति के बाद लेखक प्रतीक प्रधान को नेपाली पीएम के प्रेस सलाहकार पद से इस्तीफा देना पड़ा

Abhishek Srivastava : बिहार चुनाव और आरक्षण पर बहस की आड़ में भारत सरकार ने चुपके से नेपाल में आर्थिक नाकाबंदी लगा दी है। नेपाल की वेबसाइटों और चैनलों पर लगातार यह ख़बर चल रही है कि किस तरह  भारत सरकार ने अपनी मर्जी का संविधान न बनने की खीझ में गाडि़यों को आज सुबह से ही सीमा पर रोकना शुरू कर दिया है और बिना किसी औपचारिक घोषणा के नेपाल में तेल की सप्‍लाई रोक दी है।

इससे ठीक पहले यानी कल नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला के प्रेस सलाहकार प्रतीक प्रधान से सिर्फ इसलिए इस्‍तीफा ले लिया गया था क्‍योंकि एक अखबार में उनके लिखे लेख पर भारत के  विदेश सचिव ने आपत्ति जता दी थी। नेपाल की संप्रभुता और संविधान को लेकर भारत की सरकार इतनी बेचैन क्‍यों है, इसे विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर 20 सितंबर और 21 सितंबर यानी लगातार  दो दिनों तक नेपाल की स्थिति पर जारी प्रेस विज्ञप्तियों की कठोर भाषा से समझा जा सकता है। नेपाल में भारत सरकार का दखल काफी तेजी से बढ़ रहा है। नाकेबंदी की इस खबर को अगर भारतीय  मीडिया नहीं उठाता है, तब भी नेपाल की संप्रभुता से सरोकार रखने वाले तमाम पत्रकारों को इसे प्रसारित करना चाहिए। सुविधा के लिए नेपाली वेबसाइट का लिंक दे रहा हूं। इस वेबसाइट पर लगातार  निगाह बनाए रखें।

भारतको नाकाबन्दी सूरु, सूरक्षाको कारण देखाउँदै तेल ल्याउन दिइएन
http://www.khabardabali.com/2015/09/39339/

पत्रकार और एक्टिविस्ट अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

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प्रताड़ना से क्षुब्ध न्यूज नेशन के रिपोर्टर ने दिया इस्तीफा, फटकार मिली कि विज्ञापन नहीं दे सकते तो फांसी पर लटक जाओ !

मऊ (उ.प्र.) : यहां न्यूज़ स्टेट/न्यूज़ नेशन के प्रतिनिधि तैनात रहे रविन्द्र माली ने डेस्क इंचार्ज (इनपुट हेड), नोएडा को अपना इस्तीफा भेज दिया है। त्यागपत्र में उन्होंने अपनी आर्थिक हालत बयान करने के साथ ही बताया है कि विज्ञापन विभाग के लोग कह रहे हैं, एड नहीं दे सकते तो फांसी पर लटक जाओ। 

उन्होंने अपने त्यागपत्र में डेस्क इंचार्ज को बताया है कि ”आपके प्रतिष्ठित समाचार चैनल न्यूज़ स्टेट उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड में बतौर संवाददाता मऊ जिले में तब से हूं, जब इसके ‘अल्फ़ा न्यूज़’ नाम से आने की तैयारी हो रही थी । फिर नेशनल से लेकर रीजनल तक अभी तक पूरी ईमानदारी से काम किया है। विज्ञापन विभाग द्वारा मुझसे पंचायत चुनाव में 24 लाख रुपये के विज्ञापन की डिमांड की गई। मैं एक स्ट्रिंगर हूँ और स्ट्रिंगर का कोई नहीं होता। वो अपना सब कुछ दांव पर लगाकर खबर कलेक्ट करके अपने चैनल पर प्राथमिकता के साथ भेजता है लेकिन जब उसके साथ कोई घटना होती है तो उसे कोई भी पूछने वाला नहीं होता। 

”चैनल से एक आदेश पर स्ट्रिंगर अपना खाना छोड़कर सबसे पहले खबर पर दौड़ता है। हर खतरों से अनजान रास्ते में क्या होगा, वो घर सही सलामत अपने पारिवार में लौटेगा की नहीं, ये सोचते हुए सक्रिय हो जाता है। इस कमरतोड़ महंगाई में एक स्ट्रिंगर अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करता है, सर सब जानते है। पत्रकारिता में हमें 10 साल हो गए। इसके आलावा न कही नौकरी की और न ही कहीं कोई साइड में आज तक कोई दूसरा काम। एक बेटी 11 साल की और एक बेटा 10 साल का है, जिसकी पढाई-लिखाई बड़ी मुस्किल से हो रही है । 

”आप के चैनल से करीब 5 हजार और समाचार प्लस भी देखता हूं, इसलिए वो भी पांच हजार रुपए देता है। इस बात को आप सभी जानते हैं। विज्ञापन के लिए धमकी दी जा रही है कि नहीं  दोगे तो निकाल दिए जाओगे। कहते हैं, ख़बर भेज कर मऊ से कौन सा क्रांति लिख दोगे। 24 लाख का एड नहीं दे पाओगे तो फांसी लगाकर मर जाना। खबर से नहीं, एड से अपना भविष्य बनाओ। खबर में क्या रखा है। 

”सर बहुत कुछ कहा जा रहा है। बहुत दिनों  से टार्चर हो रहा है। ये हमारे साथ ही नहीं, सभी के साथ हो रहा है। कोई कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है क्योंकि डर है कि कहीं ऐसा न हो कि हमें निकाल दिया जाए। हम एड के लिए पूरी कोशिश करते हैं और जो मिल जाता है, हम देते भी हैं। 15 अगस्त पर भी 10 एड लिया हूं बड़ी मुश्किल से । दो दिनों से सोया नहीं हूं। बहुत परेशान हूं। यहाँ तक कि मै सर दर्द का मरीज बन गया हूं। आप लोगों का बहुत प्यार और आशीर्वाद मिला। 

”मैं कहीं भी रहूं, आप लोगों का सदैव आशीर्वाद बना रहे। ये मेल करते वक्त हमारा शरीर कांप रहा है और आँखों से आंसू निकल रहे हैं। फिर भी। अतः श्रीमान निवेदन के साथ कहना है कि आपके चैनल से कार्यमुक्ति की इच्छा प्रकट करते हुए अपने पद से त्याग पत्र देना चाहता हूँ । आप प्रार्थना पत्र पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए प्रार्थी का त्याग पत्र स्वीकार करने की कृपा करे।  

रविन्द्र माली, मऊ।” 

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श्री ग्रुप चेयरमैन मनोज द्विवेदी मेरा पैसा दबाए है, मैंने खुद नोटिस देकर इस्तीफा दिया : पंकज वर्मा

Dear Yashwant ji, Apropos our telecon of date I am forwarding you the copy of my E-mail dt 12.02.15 addressed to Mr Manoj Dwivedi, Chairman-Shri Group indicating my willingness to part from the Orgn on my own due to non-payment of salary and other expeses for over 6 months. The news carried by you quoting a so called letter dt 20.02.15 of Mr Umesh Azad, ED regarding my termination from the Orgn is totally wrong as no such letter whatsoever has been either served on me or intimated to me so far.

I have opted for one month notice period (1st March to 31 st March, 15) on my own due to acute financial crisis in Shri Group for the last one year or so. As discussed I will again request you to cross check with the concerned target audience before carrying such frivilous news item in your reputed News Portal known for its tremendous credibility. I am likely to join a leading News TV Channel shortly once my long pending dues are settled in Shri Group and you will be intimated about it in due course.

Warm Regards

Pankaj Verma

Sr Journalist
Lucknow

Mob No:

+919415011122

+919838311122

श्री न्यूज और श्री ग्रुप के चेयरमैन मनोज द्विवेदी को लिखा गया पत्र इस प्रकार है….

—– Forwarded Message —–

From: pankaj verma (pankajkverma1@yahoo.co.in)

To: Manoj Dwivedi ( chairman@shrigroup.co.in, chairman@shriinfratech.in )

Cc: Rishi Arora ( rishi@shrigroup.co.in ); rishi@shriinfratech.in ; Sharad Kesharwani ( sharad@shrigroup.co.in ); sharad@shriinfratech.in

Sent: Thursday, 12 February 2015 3:02 PM

Subject: Reg; Parting

Hon’ble Chairman,

I have been closely observing the recent development in the Group and continued financial constraints which has adversely affected not only the Media wing including Shri News & Shri Times but Infra Projects and Solar Venture of the Group as well.The Organisation has not able to utilize properly the services of professionals like us for which I was hired initially.It not only created frustrations at times but I really feel sorry for you as due to lack of professional support at the top level,there was a breakdown of your own speed as well.There is complete dearth of seasoned professionals at Sr level to match your speed and their inability to translate your vision into a ground reality.

I was earmarked by you for the Core Team 2.5 years back inspite of stiff resistance at the top and I continued to survive their onslaughts only because I had your complete trust and support.Whatever little I could contribute for the Orgn was only due to your confidence and faith in my abilities and competence, be it handling Shri News / Shri Times Affairs with UP / UTKD Govt Depts, Revenue oriented Deals, Himachal Election Venture, Haryana Project, Earmarking key personalities for Board of Director’s positions, Image / Brand Building exercises of the Group at the creamy level of Govt / Bureacracy / Corporate world, Misc Ventures including the Cooperative Bank Projects spreading over 7 virgin states including troublesome Maharastra & Kolkata to your utmost satisfaction. My greatest satisfaction remains in the fact that you still rate me very high and has been proudly saying on different occasions that no one in the Group can match my Performance level, Communication Skills, Competence level and ability to handle even the top brass of the Govt and Corporate world.

But I wonder how long you could have put a break on these disgruntled elements who were after my life and always tried to convince you for getting rid of me.I will not like to name them at this juncture but I had the privilege to get your views in confidence at times about their continued moves every now and then. Please recollect you at the time of my joining the Orgn had told me that this was the last Orgn of my professional career and “Shri Group” would take care of me and my family forever and some percentage of Share/Stakes would be passed on to me like others at the top,in case I match your expectations in due course.But today I realise you have to carry on with the Founder members of the Group and professionals like us can always be hired and fired on their whims and fancies.

In light of the financial constraints and inability of the Group to sustain continuance of Sr Staffs like us (though I being the exception one as all others in my level have remained Scot free so far) I intend to part with the Orgn with heavy heart.The period from 1st March to 31st March’15 may please be treated as mandatory one month’s Notice Period and I may please be relieved w.e.f. 1st April’15. Will request you to settle my dues at the earliest which amounts to roughly over 13 lacs (Salary for 6 months: 9 lacs,Routine Office Exps for last 1.5 yrs: 3.75 lacs,Office Car Driver’s salary for 5 months: 40K).

I am grateful to you for your complete trust in my abilities and competence and providing me a wonderful platform.I am thankful to all the Directors and colleagues,specially Alvina ji for extending their cooperation and it will be a great memory which I will cherish all along my life.Last but not the least,my personal loyalty for you will remain intact all along my life.

Warm Personal Regards
 
Pankaj Verma

1, Rajbhawan Colony

Lucknow


मूल खबर…..

सीओओ पंकज वर्मा को श्री मीडिया ग्रुप से बाय बाय कर दिया गया

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गुजरात दंगों में निष्पक्ष भूमिका निभाने वाले आईपीएस अफसर राहुल शर्मा को अंतत: इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा

Amitabh Thakur : मैं अपने साथी और बैचमेट राहुल शर्मा (1992 बैच, गुजरात कैडर आईपीएस), जिन्होंने हाल में सेवा से इस्तीफा दे दिया को सलाम करता हूँ. राहुल को आईजी पद पर प्रोमोशन नहीं मिला, उन पर 2 विभागीय जांच थे, उन्हें एक प्रतिकूल एसीआर मिला था पर जिस तरह उन्होंने 2002 गुजरात दंगों में एसपी भावनगर के रूप में पूर्णतया निष्पक्ष और न्यायसंगत भूमिका निभायी थी.

जिस प्रकार उनके कॉल डिटेल रिकार्ड्स से माया कोदनानी और बाबू बजरंगी सहित तमाम नेताओं को सजा मिलने में मदद मिली, उससे मेरी निगाह में वे अकेले सभी राज्यों के डीजीपी को मिलकर बने समूह से अधिक सम्मानित हैं. उन्होंने इस प्रक्रिया में कई ताकतवर शत्रु बनाए पर एक पल के लिए भी वे सत्य और कर्तव्य के पथ से विलग नहीं हुए. राहुल, आपको नमन.

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर के फेसबुक वॉल से.

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सेक्स टेप वायरल होने के बाद अतुल अग्रवाल ने ईटीवी से दिया इस्तीफा

अतुल अग्रवाल पर भाग्य और दुर्भाग्य का ग़ज़ब का साया पड़ा रहता है. जब इंडस्ट्री के लोग अतुल अग्रवाल के करियर के अंत होने की भविष्यवाणी कर देते हैं तो यह शख्स अपने दम पर फिर से पत्रकारिता में पुनर्जीवन पाकर छा जाता है. लेकिन ज्योंही यह आदमी सफलता के चंद कदम चल पाता है कि अपनी ही किन्हीं हरकतों से धड़ाम होकर जमींदोज हो जाता है. न्यूज24 चैनल से एक गुमनाम आईडी से ग्रुप मेल भेजने के आरोप में नौकरी गई तो भास्कर न्यूज से एक लड़की से यौन दुर्व्यवहार को लेकर निकाले गए. इन दिनों ईटीवी में थे, जहां से उन्हें इसलिए इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि उनका एक सेक्स टेप यूट्यूब पर वायरल हो गया है.

अतुल अग्रवाल सेक्स स्कैंडल नामक इस टेप में अतुल अग्रवाल की बातचीत एक महिला पत्रकार से हो रही होती है और इस बातचीत के बहाने ढेर सारी बातें पता चलती हैं. ये टेप दो रोज पहले किन्हीं सज्जन ने यूट्यूब पर अपलोड किया और इस वीडियो लिंक को अतुल अग्रवाल के खिलाफ एक लंबा चौड़ा मेल बनाकर उसके साथ अटैच करके सैकड़ों लोगों को भेजा. भड़ास की पड़ताल में पता चला कि ये आडियो टेप तबका है जब अतुल अग्रवाल समाचार प्लस चैनल में हुआ करते थे और संबंधित लड़की भी उसी चैनल में काम किया करती थी. अतुल और लड़की के बीच किसी तीसरे चौथे शख्स को लेकर बातचीत होती रहती है और पूरी बातचीत के दौरान अतुल लड़की के साथ अपने बेहद नजदीकी संबंध को स्वीकारते हैं.

गालियों और सेक्स संबंधों के बारे में बातचीत से भरे इसे टेप को सुनकर मीडिया के भीतर की दुर्गंध को महसूस किया जा सकता है. जिन सज्जन ने ये टेप अपलोड किया है, उन्होंने मेल में दावा किया है कि अतुल अग्रवाल के दो और इसी किस्म के सेक्स टेप जल्द जारी किए जाएंगे. सूत्रों का कहना है कि पहले से ही ढेर सारे आरोप झेल रहे अतुल अग्रवाल को अब इस मुसीबत से पार पाने में वक्त लगेगा. इन प्रकरणों से अतुल अग्रवाल की निजी पारिवारिक जिंदगी लगभग चौपट होने की कगार पर है. साथ ही उन कई लड़कियों को भी करियर व जीवन में दिक्कत आएगी जिनका नाम इस पूरे प्रकरण में परोक्ष या अपरोक्ष रूप से आया है. सूत्रों का कहना है कि सेक्स टेप में जिस लड़की से अतुल अग्रवाल की बातचीत हो रही है, वह लड़की भी इन दिनों ईटीवी में काम कर रही है. उसके भी ईटीवी से जाने की चर्चा है.

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भास्कर न्यूज है अतुल अग्रवाल का पड़ाव

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भास्कर न्यूज के मैनेजिंग एडिटर अतुल पर छेड़छाड़ का आरोप

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अतुल अग्रवाल का इस्तीफानामा

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अतुल अग्रवाल कार्यमुक्त, समीर नए मैनेजिंग एडिटर

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अतुल अग्रवाल को मिली नौकरी, ईटीवी पहुंचे

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बैंक और टैक्स घोटालों को अखबार द्वारा ठीक से कवर न किए जाने पर पत्रकार ने दिया इस्तीफा

ब्रिटेन के एक बड़े अखबार ‘द डेली टेलीग्राफ’ के मुख्य राजनीतिक टिप्पणीकार ने अखबार से इसलिए इस्तीफा दे दिया क्योंकि इस अखबार ने एचएसबीसी घोटाले के प्रकरण को ठीक से कवर नहीं किया और पूरे मामले को बहुत छोटी खबर देकर निपटा दिया. भारत में दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, टाइम्स आफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स जैसे दर्जनों बड़े अखबारों के हजारों पत्रकार काम करते हैं लेकिन यह कभी सुनने को नहीं मिलता कि फलां पत्रकार ने फलां खबर के कम या ज्यादा कवरेज के कारण इस्तीफा दे दिया. भारतीय पत्रकार पापी पेट के लिए चुपचाप हर कुछ सहते झेलते रहते हैं. शायद भारतीय पत्रकारों के मानसिक स्तर का लोकतांत्रिक विकास अभी समुचित नहीं हुआ है.

‘द डेली टेलीग्राफ’ के चीफ पोलिटिकल एनालिस्ट पीटर ओबॉर्न द्वारा घोटालों का कवरेज ठीक से न करने के मुद्दे पर अखबार से इस्तीफा देने का प्रकरण दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. पीटर ओबॉर्न ने आरोप लगाया कि एचएसबीसी और स्विस टैक्स घोटाले की सीमित कवरेज कर अखबार ने एक तरह से अपने पाठकों से धोखाधड़ी की है. पीटर ओबॉर्न ने आरोप लगाया है कि कमर्शियल फायदे की वजह से अखबार ने इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को इतनी प्रमुखता नहीं दी, जितनी उसे मिलनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि पाठकों को सच्चाई से अवगत कराना अखबारों का ‘संवैधानिक कर्तव्य’ होता है.

वहीं ओबॉर्न के इस स्टेटमेंट को टेलिग्राफ ने आश्चर्यजनक और निराधार हमला बताया. वेबसाइट ओपन डेमोक्रेसी में प्रकाशित एक लेख में ओबॉर्न लिखा कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर पहले ही अखबार से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अखबार पर आरोप लगाते हुए लिखा कि पाठकों को टेलीग्राफ में इस खबर को ढूंढने के लिए सूक्ष्मदर्शी यंत्र की मदद की जरूरत होगी.

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चलो पिण्ड छूटा, धन्यवाद विजय त्रिपाठी!

3 जनवरी को फेसबुक पोस्ट और 6 जनवरी को भड़ास में लिखी अमर उजाला के नवोन्मेषक भाई साहब स्व. अतुल माहेश्वरी को दी गयी श्रद्धांजलि व व्यक्त की गयी भावनायें लगता है हमारे स्थानीय संपादक विजय त्रिपाठी को नहीं भायी है. 13 जनवरी से हमारा गैरसैंण हैड बन्द कर हमारे द्वारा पेषित समाचारों को कर्णप्रयाग हैड से लगाया जा रहा है. ये कहना उचित होगा कि उनकी ओर से हमें अमर उजाला से हटा दिया गया है. अर्थात भाई सहब के प्रति व्यक्त उद्गार को तो वे विषय नही बना पायेंगे, वे कोई मनगडंत कारण ढूंढें.

हम अपनी ओर से घोषण कर रहे हैं कि अब अमर उजाला के लिए समाचार नहीं प्रेषित करेंगे. हम अपनी उक्त पोस्ट व भड़ास में प्रकाशित लेख में अपनी पूरी व्यथा कह चुके हैं और उससे आगे कहना व्यर्थ होगा। अवैधानिक रूप से शपथ पत्र लेने वाले संपादक ने हमारी खबरो का हैड बदलकर कॉपीराइट कानून का उल्लंघन किया है और पाठक को भ्रमित करने का काम भी। बावजूद इसके हम कोई कार्यवाही करने नहीं जा रहे हैं और शौकिया पाठक का शौक यहीं छोड़ केवल पाठक बने रहना चाहते हैं अमर उजाला के। हम पत्रकार थे, हैं और रहेंगे। उसी तरह अमर उजाला के कायकर्ता थे, हैं और रहेंगे। स्थानीय संपादक बहुत आयेंगे-जायेंगे, लेकिन अमर उजाला के लिए हमारे 40 सालों का खून पसीना जिसने हमें कार्यकर्ता बनाया है, जिसकी बराबरी कितनी ही बड़ी तनख्वाह का नौकर नहीं कर सकता।

अमर उजाला के साथियों और अपने प्रिय पाठकों के प्यार, स्नेह और आदर के हम आभारी हैं। विश्वास दिलाना चाहते हैं कि आवश्यकता के समय हमें अपने निकट पायेंगे। भाई साहब! हमने कहा था- आपसे संबन्धों के चलते हम अखबार नहीं छोड़ पा रहे हैं। धन्यवाद विजय त्रिपाठी। आपने वो रास्ता दे दिया। बार-बार हुए अपमान के बाद एक और आखिरी अपमान का शुक्रिया।

PURUSHOTTAM ASNORA

purushottamasnora@gmail.com

मूल पोस्ट…

अतुल माहेश्वरी की चौथी पुण्य तिथि और अमर उजाला से चार दशक से जुड़े एक पत्रकार का दुख

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मीडिया में असहमति जताने के खतरे और सीएनएन के मशहूर पत्रकार Jim Clancy

Abhishek Srivastava : किसी पत्रकार के लिए अपने संस्‍थान के भीतर या बाहर सत्‍ता-समर्थक विचार से ”असहमति” जताना कितना घातक हो सकता है, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। ऐसे ”असहमत” पत्रकार चाहे कितने ही पुराने क्‍यों न हों, हर संस्‍थान के लिए सनातन ख़तरा होते हैं। ताज़ा उदाहरण सीएनएन के मशहूर पत्रकार Jim Clancy का है जिनसे बीते दिनों इसलिए जबरन इस्‍तीफा ले लिया गया क्‍योंकि शार्ली एब्‍डो के मामले पर उन्‍होंने कुछ ऐसे ट्वीट किए जो इज़रायल समर्थकों को (इज़रायली स्‍वामित्‍व वाले अमेरिकी मीडिया को भी) रास नहीं आए।

जिम 34 साल से सीएनएन में थे। शार्ली एब्‍डो पर हमले के बाद हुए मीडिया विमर्शों में जो पाला खींच दिया गया था- इस्‍लामिक आतंकवाद समर्थक बनाम इस्‍लाम विरोधी- उन्‍होंने दोनों को चुनने से इनकार कर दिया और बड़ी विनम्रता से ट्वीट किया कि ”हर मुस्लिम आतंकवादी है… इस सोच को दोबारा परखा जाना चाहिए।” उन्‍हें बाहर का रास्‍ता दिखा दिया गया। पहले भी वे इज़रायल का विरोध करते रहे थे लेकिन नौकरी में बने हुए थे, फिर अबकी ऐसा क्‍या हो गया???

मुझे लगता है कि आप अगर सत्‍ता विरोधी रुख रखते हैं, तो ज़रूरी नहीं कि आपको संस्‍थान से पहले ही दिन निकाल दिया जाए। हर संस्‍थान अपने भीतर विरोध के तत्‍वों को एक सीमा तक सहता है। यह सीमा कुछ महीनों से लेकर कुछ बरसों और दशकों तक की भी हो सकती है- बिलकुल किसी रबरबैंड की तरह, लेकिन एक बिंदु पर हर रबरबैंड टूटता भी है। संस्‍थागत पत्रकारिता (यानी नौकरी) के भीतर भी लोकतंत्र है, बस उसकी सीमा हम या आप नहीं जानते। यानी सत्‍ता से ”असहमत” रहते हुए भी नौकरी की जा सकती है, लेकिन नौकरी कब जाएगी यह हम या आप नहीं जानते।

एक ”असहमत” पत्रकार की असहमति और संस्‍थान के भीतर/बाहर उसके असहमत होने की लोकतांत्रिक स्थिति- दोनों ही मालिकों/मैनेजरों की जेब में रहती हैं। हम, आप या जिम क्‍लैंसी सिर्फ असहमत हो सकते हैं जबकि वे हमें सिर्फ नौकरी से निकाल सकते हैं। इसीलिए किसी पत्रकार का नौकरी से निकाला जाना या कहीं नौकरी मिलना मुद्दा नहीं होना चाहिए। मुद्दा यह होना चाहिए कि नौकरी में रहते हुए उसकी ”असहमति” की वो हद क्‍या थी जिस पर उसे निकाल दिया गया। मुद्दा यह होना चाहिए कि नौकरी पाने/उसमें टिके रहने के लिए उसके किए ”समझौतों” की हद क्‍या थी। जेनुइन पत्रकारीय कर्म के अलावा किसी भी पत्रकार की ”क्रांतिकारिता” (भारत के न्‍यूज़रूमों में सबसे हास्‍यास्‍पद बन चुका शब्‍द) को उसकी ”असहमतियों” व ”समझौतों” की हद से परिभाषित किया जाना चाहिए।

http://www.independent.co.uk/news/people/jim-clancy-resigns-cnn-international-correspondent-quits-for-suggesting-israeli-propaganda-had-hand-in-charlie-hebdo-attacks-9992030.html

पत्रकार और एक्टिविस्ट अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

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तो IIT दिल्ली के प्रमुख रघुनाथ शिवगाँवकर ने इसलिए दिया इस्तीफा

Satyendra Ps : भाजपा और संघ के लुटेरे किसी भी सही आदमी को रहने नहीं देंगे। सुब्रहमन्यम स्वामी 1972 और 1991 के बीच पढाए का मेहनताना 70 लाख रुपये देने के लिए IIT दिल्ली के प्रमुख रघुनाथ शिवगाँवकर पर दबाव बनाए हुए थे। पढ़ाते क्या होंगे पता नहीं लेकिन केन्द्रीय संस्थानों में भुगतान को लेकर कोई दिक्कत नहीं होती, सब जानते हैं! साथ ही रघुनाथ से कहा जा रहा था कि सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट अकादमी खोलने के लिए iit कैम्पस में जगह दी जाए!

पढ़ाने का सबूत देने पर iit भुगतान देने को तैयार भी था! सबूत न दिखाने पर डायरेक्टर को कैग पकड़ता! iit परिसर में तेंदुलकर के गिल्ली डंडा को iit डायरेक्टर बिलकुल राजी न थे! आखिरकार उन्होंने इस्तीफा दे दिया। अब आज कच्छा बनियान गिरोह आरोप लगा रहा है कि विदेश में अवैध कैम्पस खोल रहे थे iit डायरेक्टर! ये गिरोह सोचता था कि गीदड़ भभकी देकर रघुनाथ से 70 लाख रूपये ऐंठ लेगा लेकिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया!

अब स्वामी मानव संसाधन विकास मंत्री बन सकते हैं। वजह ये कि एम्स में दवा की दलाली पर अंकुश लगाने वाले संजीव को दवा कम्पनियों के दलाल (ब्रोकर या डीलर कहें सम्मान में) जेपी नद्धा के कहने पर हटाया गया। फिर नद्धा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री बने। अब स्वामी की बारी है! देखते जाएं कि ये आरएसएस सरकार 5 साल में आम लोगों और उनके संस्थानों की क्या गति करती है!

अब तेंदुलकर कह रहे हैं कि मैंने कोई क्रिकेट अकादमी खोलने का प्रस्ताव नहीं किया! अगर iit जमीन दे देता तो महीन मुस्कुराते चले आते! आरएसएस भी चितपावन दबंगई दिखाने में कामयाब हो जाता! बहुत शातिर हैं सब।! संघी जो तर्क दे रहे हैं लचर है। अगर iit निदेशक चोर है और बचने के लिए इस्तीफा दिया तो क्या कच्छा बनियान गिरोह सरकार इस्तीफे के बाद जांच नहीं कराएगी? लेकिन भक्ति का चश्मा मोटा होता है।

पत्रकार सत्येंद्र प्रताप सिंह के फेसबुक वॉल से.

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आलोक सांवल का मूड फिर बिगड़ा, मृदुल त्यागी को बाहर का रास्ता दिखाया

आई-नेक्स्ट में तीन महीने पहले चौथी बार इंट्री मारने वाले मृदुल त्यागी को एक बार फिर आलोक सांवल ने मूड खराब होने के कारण निकाल बाहर किया है. एक बार फिर से एसोसिएट एडिटर श्रमिष्ठा शर्मा को कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी गई है. इस संबंध में जीएम पंकज पांडे ने मेल चलाकर पूरे ग्रुप को बताया है कि मृदुल को हटा दिया गया है, उनसे कोई संबंध न रखें. मृदुल त्यागी को इससे पहले भी तीन बार आई-नेक्स्ट से विभिन्न कारणों से बाहर का रास्ता दिखाया गया था.

इसी साल जुलाई माह में आलोक सांवल ने उन्हें चौथी बार रखा. आई-नेक्स्ट के कंटेंट और तेवर को सुधारने के लिए मृदुल को कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई. शर्मिष्ठा शर्मा को साइड लाइन कर दिया गया. इन तीन महीनों में मृदुल ने आई-नेक्स्ट को क्राइम का अखबार बना दिया. बताया जाता है कि अपने शार्ट टेंपर वाले स्वभाव के कारण आलोक सांवल किसी बातचीत के दौरान गरम हो गए और तुरंत टर्मिनेशन का आदेश जारी कर दिया. आई-नेक्स्ट में हुई  इस हलचल से जहां एक तरफ शर्मिष्ठा शर्मा के साथ काम करने वाले पूराने लोग प्रसन्न हैं, वहीं अचानक पलटी मारकर मृदुल की जी हुजूरी करवाले परेशान हैं. 

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सुदर्शन न्यूज से मैनेजिंग एडिटर नवीन पांडेय का इस्तीफा, दैनिक भास्कर दिल्ली के संपादक राजेश उपाध्याय का तबादला

सुदर्शन न्यूज से मिली जानकारी के अनुसार नवीन पांडेय ने चैनल से इस्तीफा दे दिया है. वे मैनेजिंग एडिटर के पद पर कार्यरत थे. नवीन पांडेय कई अखबारों और चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं. सुदर्शन न्यूज से पहले वह चैनल वन और उससे पहले इंडिया टीवी में कार्यरत थे. सुदर्शन न्यूज में लगातार उठापटक चलता रहता है. यहां लोगों के आने और जाने का सिलसिला जारी रहता है. असल में प्रबंधन अपने पत्रकारों को बिजनेस टारगेट देता है, जिसके कारण यहां ठीकठाक लोग टिक नहीं पाते. साथ ही  इस चैनल में अचानक किसी की भी सेलरी आधी कर दी जाती है ताकि वह इस्तीफा दे दे या फिर कम सेलरी में काम करता रहे. चैनल में सीईओ के रूप में आरपी सिंह के आने के बाद से नवीन पांडेय के जाने की चर्चाएं शुरू हो गई थी.

एक अन्य सूचना के मुताबिक दैनिक भास्कर, दिल्ली के संपादक राजेश उपाध्याय का तबादला छत्तीसगढ़ कर दिया गया है. राजेश को छत्तीसगढ़ का स्टेट हेड बनाया गया है. राजेश उपाध्याय की जगह दिल्ली में संपादक पद पर अभी किसी को भेजा नहीं गया है. कई नाम चर्चा में हैं पर किसका फाइनल होगा, यह स्पष्ट नहीं हो सका है.

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नितिन का बीबीसी से इस्तीफा, माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े

बीबीसी के भारत संवाददाता नितिन श्रीवास्तव ने बीबीसी से इस्तीफा दे दिया है। अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में वे बीबीसी से कार्यमुक्त हो जाएंगे। नितिन पिछले आठ वर्षों से बीबीसी से जुड़े हुए थे।

नितिन को माइक्रोसॉफ्ट कंटेंट न्यूज़ डिविज़न से न्यूज़ एडिदर के पद का ऑफर मिला था जिसे उन्होने स्वीकार कर लिया है। माइक्रोसॉफ्ट में नितिन एमएसएन वेबसाइट और अन्य न्यूज़ एप्पस् देखेंगे।

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हरवीर सिंह, नलिन मेहता और शशिकांत कोन्हेर के बारे में सूचनाएं

पत्रकार हरवीर सिंह के बारे में पता चला है कि वह भास्कर ग्रुप के हिस्से बन गए हैं. उन्हें मनी भास्कर डॉट कॉम में संपादक बनाया गया है. अभी तक मनी भास्कर के संपादक अंशुमान तिवारी हुआ करते थे जो इंडिया टुडे हिंदी में चले गए हैं. हरवीर कई अखबारों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं.

एक अन्य जानकारी के मुताबिक टीओआई यानि टाइम्स ऑफ इंडिया में नलिन मेहता को कंसल्टिंग एडिटर के रूप में अप्वाइंट किया गया है. नलिन इसके पहले हेडलाइंस टुडे में मैनेजिंग एडिटर हुआ करते थे. नलिन जी न्यूज, एनडीटीवी आदि चैनलों में काम कर चुके हैं.

छत्तीसगढ़ के शहर बिलासपुर में प्रेस क्लब के बहुप्रतीक्षित चुनाव सोमवार को हुए. इसमें कुल 278 वोटर थे. 262 वोटरों में से मतदान करने वाले 165 वोट शशिकांत कोन्हेर को मिले. प्रतिद्वंदी विश्वेश ठाकरे को 97 मत हासिल हुए. इस तरह भाऊ 68 मतों से विजयी रहे. संगठन क्षमता, बेहतर अनुभव की जीत हुई. युवा विश्वेश ने फिर भी अच्छी टक्कर दी. 

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हिमाचल में दैनिक जागरण ने इस्तीफा मांगा तो राजेश्वर ठाकुर ने मजीठिया के लिए मुकदमा कर दिया

दैनिक जागरण हिमाचल से खबर है कि वरिष्ठ संवाददाता और बिलास पुर ब्यूरो प्रभारी राजेश्वर ठाकुर से इस्तीफा मांगा गया है. हालांकि अभी तक उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है और छुट्टी पर चले गए हैं. जागरण प्रबंधन ने इस  पर उनको स्थानांतरित किए बिना ही उनकी जगह धर्मशाला से विरेन को बिलासपुर भेज दिया है. सूत्रों के मुताबिक राजेश्वर ठाकुर ने भी दूसरी अखबार में जगह तलाश ली है, मगर वे जागरण को सस्ते में नहीं छोड़ना चाहते. पता चला है कि उन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड के तहत बकाया राशि वसूलने के लिए हाईकोर्ट में केस कर दिया है. इस संबंध में जल्द सुनवाई शुरू होने की उम्मीद है.

वहीं, धर्मशाला में एक दशक से भी अधिक समय से दैनिक जागरण के फोटोग्राफर चल रहे देशराज मोहन से भी इस्तीफा ले लिया गया है. हिमाचल में  दैनिक जागरण इन दिनों तीन ध्रुवों में बंटा हुआ है. इस कारण कर्मचारी परेशान हैं. इस बीच सूचना है कि धर्मशाला में फोटोग्राफर के पद  पर अमर उजाला के फोटोग्राफर चल रहे महिंद्र सिंह को लिया गया है. 

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सुमित अवस्थी ने जी न्यूज से इस्तीफा दिया, आईबीएन7 का नया चैनल हेड बनने की चर्चा

खबर है कि जी न्यूज से सुमित अवस्थी ने रिजाइन कर दिया है. उनके आईबीएन7 का नया चैनल हेड बनने की चर्चा है. सुमित जी न्यूज में रेजीडेंट एडिटर के पद पर कार्यरत थे. उन्होंने जी न्यूज के साथ पारी की शुरुआत 2013 अक्टूबर में की थी. उसके पहले वह आजतक में हुआ करते थे और उससे भी पहले आईबीएन7 में. अब दुबारा उनके आईबीएन7 जाने की संभावना है.

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