नई दिल्ली : दैनिक हिंदुस्तान अब मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू करने की मांग करने वाले पत्रकारों को सबक सिखाने पर उतर आया है। सूत्रों से पता चला है कि दो मीडिया कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। चार और को निकालने की तैयारी है। इस अंदर ही अंदर पत्रकारों में गुस्सा उबल रहा है।
आजकल हिन्दुस्तान नोएडा और एचटी मीडिया दिल्ली में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भड़ास ने जब हिन्दुस्तान की एक खबर 10 मार्च को छापी तो भड़ास को वहां हिन्दुस्तान प्रबंधन ने प्रतिबंधित कर दिया। बताया गया है कि दिल्ली का हिंदुस्तान प्रबंधन मजीठिया की लड़ाई लड़ने वालो या मजीठिया मांगने वालो को बाहर का रास्ता दिखाने में जुट गया है। इससे हिंदुस्तान के पत्रकारों में बड़ी बेचैनी है। सूत्रों के मुताबिक अभी तक दो को बाहर कर दिया गया है और अगले सप्ताह तक चार और को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी है। कसूर है कि मजीठिया क्यों मांगा।
ये वही अख़बार है, जिसे बिरला ने देश का नं.1 अख़बार बनाया और सारी जिंदगी हमेशा यहां के वर्करों को खुश रखा और हर वेजबोर्ड यहां सबसे पहले दिया गया । पर अब प्रबंधकों की नीयत खराब है। वो दोनों हाथों से इसे लूट रहे हैं और वर्करों का शोषण तो कर ही रहे हैं और सरकार तथा उच्चतम न्यायलय के फैसले को भी अपने आगे कुछ नहीं समझ रहे। हैरानी की बात है कि अखबार की सर्वेसर्वा शोभना भरतिया भी पूरी चुप्पी साधे हैं।
एक पत्रकार के पत्र पर आधारित
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sanjay singh
March 23, 2015 at 10:44 am
itna hi nahi HT ke HR ka kaminapanti ye hai ki sub editor/ reporter ke post per jin logon ki bahali hui hai unka designation change ker diya gaya hai. ab unhe content provider, content analyzer or content reader ka post badal ker diya jaa raha hai taki yen-ke-prakaren Majithiya na dena pade
raghvendrasing
March 24, 2015 at 4:23 am
Ab in maliko ka bura waqt aa gaya he, jin patrakaro ne ab tak unko saport kiya he….. shayad wo bhul gaye he ki kalam ki takat hamare pass he…
Dosto dikha do ki ye ladai ab nahi rukegi… bas ab unko darne do nyay or sachhai hamare sath he…
raghvendrasing
March 24, 2015 at 4:28 am
Sale puri tarhase harami pan pe utar aaye h., hamare khoon pasine ki kamai par khud ke bivi bachho ko palne walo.. yaad rakhna tum ko to doctor admit nahi karege., haram ka paisa kab tak rakh paoge….
Teeka Kumar
April 22, 2015 at 12:50 pm
Wage hike for media workers was pertinent . As for 14 years there no enhancement in pay of the workers.
But it is also eye boggling that the salary of third and fourth class workers rose by 200% to 300 % . Workers of no other industry in the same class get the salary of Rs 60000/- to Rs 70000/- . This is sheer pampering of these class of workers as they have virtually no work to do because technology upgradation.These is the sore point and truly speaking no owners will be willing to pay an hike of 200 % to 300 % these workers who have very little contribution in productivity.
However the owners could be willing to pay their journalists since the survival of the paper solely depends on the journalists nowadays. So any pressure on the owners to implement the wage board without studying its implications could be disastrous on the industry.Most of Union leaders are non-journalists and they fail to grasp the reality and are fooling the workers.. If the owners close their papers and declares bankruptcy and the workers become jobless and do not get any salary will these union leaders pay them from their own pocket for their survival? Workers should think from this aspect too and not be swayed by these stupid union leaders who only want their on rise at their cost. How many of these leaders have donated to those workers who are now jobless and have no money to feed their families. These leaders are all robbers be careful of them workers