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जसवीर सिंह जस्सी और सुधा साव (पत्रकार कपल टिफ़िन सर्विस वाले) की कहानी

खुशदीप सहगल-

बंदेया रे बंदेया तुझे वक़्त बदलना है… जसवीर सिंह जस्सी और सुधा साव पत्रकार कपल टिफ़िन सर्विस वाले… मीडिया में रहते कॉस्ट कटिंग में सैलरी आधी हुई तो शुरू की टिफ़िन सर्विस…काम जमने पर नौकरी छोड़ी, दोनों का जज़्बा तमाम युवाओं के लिए मिसाल….

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के, कांटों पे चलने से मिलेंगे साये बहार के ओ राही ओ राही ओ राही ओ राही…

यही कहना होगा 32 साल के जसवीर सिंह जस्सी और 27 साल की सुधा साव के लिए. पत्रकार कपल टिफिन सर्विस वाले…नाम सुनकर आप हैरत में पड़े होंगे…

ठीक सुना आपने…दोनों पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद पिछले 7-8 साल से मीडिया यानि टीवी-डिजिटल जैसे संस्थानों में नौकरी करते रहे हैं. नोएडा के एक मीडिया संस्थान ने कास्ट कटिंग में दोनों की सैलरी आधी कर दी गई तो घर खर्च चलाने में दुश्वारियां पेश आने लगीं.

तब दोनों एक ही मीडिया संस्थान में काम कर रहे थे. फिर दोनों ने नौकरी करते करते घर से ही पार्ट टाइम टिफिन सर्विस चलाने का इरादा किया. पांच छह महीने बाद ये काम थोड़ा जम गया तो दोनों ने नौकरी छोड़ पूरी तरह अपने टिफिन सर्विस को बढ़ाने की ठान ली.

जस्सी बीएसएसी, एमसीएजे हैं वहीं सुधा बीएससी इन मीडिया सांइस हैं. नोएडा में रहने वाला ये कपल घर से ही टिफिन सर्विस चला रहा है. सारा काम दोनों खुद करते हैं. खाना बनाने से लेकर घर-दफ्तरों में टिफिन पहुंचाने तक…दोनों हर काम को चेहरे पर मुस्कान लिए करते हैं.

मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाली सुधा का मायका कोलकाता में है. वहीं जस्सी गाजियाबाद के रहने वाले हैं. 10 दिसंबर 2020 को दोनों शादी के बंधन में बंधे.

रोजगार की जद्दोजहद के बावजूद जस्सी और सुधा सोशल कॉज के तहत दूसरों की मदद भी हमेशा करते आए हैं. चाहे वो योगा ट्रेनिंग हो या और किसी की तरह मदद. इसके लिए इन्होंने पत्रकार की पोटली नाम से छोटी सी मुहिम भी शुरू कर रखी है.

वाकई जस्सी और सुधा उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं जो आगे बढ़ना चाहते हैं. ज़रूरी नहीं कि आपने जो पढ़ाई की, जो प्रोफेशन चुना वहां सब बहार ही बहार मिले. जब हालात अपने हिसाब से न हो तो भी दिल में कुछ कर दिखाने का जज़्बा होना चाहिए, बेशक किसी दूसरी फील्ड में ही सही…

आज जिस तरह की अनिश्चितता है, जॉब क्राइसिस है, छंटनी हो रही हैं, कास्ट कटिंग है, उसमें युवाओं को अपने पैरों पर मजबूती से खड़े होने के लिए आउट ऑफ द बॉक्स आइडियाज़ पर काम करना चाहिए.

जस्सी और सुधा ने अपनी सोच के हिसाब से ही अपनी टैगलाइन रखी है- “चाहे जो हो बस सोच बदलनी चाहिए (लड़ते रहो बढ़ते रहो

जस्सी और सुधा की यही दुआ है कि उनका स्टार्ट अप जल्दी ही ऐसी स्थिति में आ जाए और वो दूसरों को जॉब दे सके. साथ ही वो ये भी कहते हैं कि जिस तरह उन्हें खुद मीडिया में रहते कास्ट कटिंग का सामना करना पड़ा, वैसे किसी और को न करना पड़े…
देशनामा का जस्सी और सुधा के हौसलों को सैल्यूट…

Watch this video-

https://www.youtube.com/watch?v=n-V-CrotmDA

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