पत्रकारिता के नए छात्रों को ‘सत्य के संधान’ का लेक्चर दे आए शशिशेखर!

आजकल के दौर में मुख्यधारा के संपादक, अखबार और चैनल सत्य की कतई पत्रकारिता नहीं कर रहे हैं. वे झूठ की, सत्ता की, कारपोरेट की, लालच की, अवसरवादिता की, जन विरोध की पत्रकारिता कर रहे हैं. बिड़ला खानदान के अखबार हिंदुस्तान के समूह संपादक हैं शशि शेखर. अंबानी के चैनल न्यूज18इंडिया के एंकर हैं सुमित अवस्थी. Continue reading

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‘डीबी पोस्ट’ की खबर पर ‘माखनलाल’ में बवाल, एक शिक्षक ने खोला अखबार के खिलाफ मोर्चा

Sanjay Dwivedi : भोपाल का एक अंग्रेजी अखबार इन दिनों माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की छवि खराब कर रहा है। विगत 27 अगस्त, 2017 को उसने जो खबर छापी है उसे लेकर अखबार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। अज्ञान, दुर्भावना और साजिशन लिखी गयी खबरें कैसै आपको गिराती हैं, यह खबर उसका उदाहरण है। अखबार लिखता है विश्वविद्यालय में अल्पसंख्यकों के त्यौहारों पर अवकाश नहीं होगा क्योंकि यहां आरएसएस का एजेंडा चल रहा है।

किसी भी विश्वविद्यालय में अकादमिक कैलेंडर अकादमिक गतिविधियों तक सीमित होते हैं और वे हर छुट्टी का जिक्र नहीं करते। मप्र सरकार द्वारा घोषित सभी छुट्टियां विश्वविद्यालय में बाध्यकारी हैं। मप्र जनसंपर्क के कैलेण्डर में इसका जिक्र होता है। विश्वविद्यालय द्वारा छापे गए कैलेंडर में भी सभी छुटिट्यों का जिक्र है। किंतु बिना तथ्यों को जांचे खबर लिखने की हड़बड़ी में संवाददाता महोदय अकादमिक कैलेंडर को अंतिम मानकर खबर लिख बैठे। विश्वविद्यालय के किसी जिम्मेदार अधिकारी से बात करने की जहमत नहीं उठाई, ऐसे में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों को लगता है कि अखबार का उद्देश्य तथ्यपूर्ण पत्रकारिता के बजाए विश्वविद्यालय की छवि खराब कर अपनी एक खबर बनाने तक सीमित है। ऐसी पत्रकारिता ही पूरी मीडिया को कलंकित करती है।

सरकारी संस्थाओं पर निशाना, कारपोरेट की मिजाजपुर्सी :

मुझे याद नहीं आता कि कारपोरेट मीडिया कभी भी किसी निजी विश्वविद्यालय के मामलों में ऐसी हरकत और उलजूलूल खबरें लिखने का पुरूषार्थ जुटा सके। मैंने आजतक इन अखबारों में निजी विश्वविद्यालयों, निजी अस्पतालों, निजी मोबाइल कंपनियों के खिलाफ खबर नहीं देखी। सरकारी विश्वविद्यालय, अस्पताल और संस्थाएं इनका आसान निशाना हैं। ताकि सरकारी संस्थाओं को बदनाम कर कारपोरेट की मिजाजपुर्सी की जा सके। लाखों रूपए की फीस लेकर पढ़ा रहे निजी विश्वविद्यालय इनके लिए स्वर्ग हैं, क्योंकि वे मोटे विज्ञापन से कारपोरेट मीडिया को खरीद चुके हैं। किंतु सस्ती फीस लेकर देश के गरीब और आखिरी आदमी को शिक्षा दे रहे संस्थान इनके निशाने पर हैं। देश में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय एक अकेला उदाहरण है जो बिना किसी सरकारी सहायता के अपने दम पर स्वावलंबन के साथ खड़ा है और विद्यार्थियों को सबसे कम फीस पर 28 प्रकार के विशेषज्ञता-कौशल आधारित कोर्स करवाता है।

सांप्रदायिक सद्भावना को चोट पहुंचाने की कोशिश :

इस खबर का दुखद पहलू यह है कि इसमें सांप्रदायिक सद् भावना को भी चोट पहुंचाने की कोशिश की गयी है। विश्वविद्यालय में हर, जाति-धर्म के विद्यार्थी आते हैं और उससे समानता के आधार पर व्यवहार किया जाता है। ऐसी खबरों के माध्यम से हिंदू-मुसलमान जैसे विवाद पैदा करना संवाददाता और समाचार पत्र की सोच को दर्शाता है। अफसोस यह समाचार देश के एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान द्वारा प्रकाशित किया जाता है। जिसकी हिँदी और भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता में बहुत यशस्वी योगदान है। ऐसे संस्थान में बैठे कुछ पत्रकार जिस तरह अपनी खुन्नस निकालने के लिए, एजेंडा आधारित पत्रकारिता कर रहे हैं वह दुखद है।

पत्रकार के अज्ञान पर दया आती है कि उन्हें यह भी नहीं पता कि एक सरकारी संस्थान तो राज्य द्वारा निर्धारित छुट्टियां रोक नहीं सकता बल्कि निजी संस्थाओं को चाहे वे ईसाई मिशनों द्वारा संचालित विद्यालय हों या आरएसएस के शिशु मंदिर सबको यह अवकाश देने होते हैं। किंतु माखनलाल विवि की छवि बिगाड़ने में पत्रकार महोदय इस स्तर तक चले जाएंगें, इस अंदेशा नहीं था। पत्रकारिता में आ रहे छात्र-छात्राओं के लिए सबकः

1. किसी खबर को पूरी तरह चेक करने, पुष्टि के बाद ही छापें…

2. सांप्रदायिक दुर्भावना को बढ़ाने वाली खबरों को कभी प्रकाशित न करें, तथ्यों को जांचें….

3. किसी संस्था की छवि को बिगाड़ने वाली रिपोर्टिंग से बचें…

4. किसी के बहकावे में आकर संबंधित संस्था का पक्ष लिए बिना समाचार न छापें…

5. जरूरी हो तो इस विषय के विशेषज्ञों से बात जरूर करें…

कृपया पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल की छवि को बिगाड़कर छात्र-छात्राओं के भविष्य से न खेलें। देश के सबसे गरीब इलाकों के सबसे गरीब विद्यार्थी इस संस्था में आते हैं। उनके भविष्य से न खेलें। विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र होने के नाते यह पोस्ट बहुत दुखी मन से लिख रहा हूं। मुझे एक पूर्व पत्रकार होने के नाते भी इस बात का दुख है कि पत्रकारिता का स्तर कहां जा रहा है। आखिर हम पत्रकारिता की प्रामणिकता और विश्वसनीयता को क्या यूं ही गंवाते रहेंगें।

माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के शिक्षक संजय द्विवेदी की एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं…

Ankur Vijaivargiya संजय जी की बातों से पूर्णतया सहमत हूं। माखनलाल का एक पूर्व छात्र होने के नाते मुझे अपने विश्वविद्यालय पर गर्व है। कल इसी खबर के संदर्भ में एक छात्र ने पूछा था कि आखिर माखनलाल का नाम जानता कौन है। मैंने उसे जवाब दिया था कि नाम जानना छोड़िए अब तो हमारे छात्रों के कामों को भी बड़े संस्थान मानने लग गए हैं। पहले बैच से लेकर आखिर पासआउट बैच के कई विद्यार्थियों से मेरा निजी और पारिवारिक परिचय है। सभी अपने अपने संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर हैं। हाल ही में अहमदाबाद के एक बड़े कौलेज में था। वहां मुख्य अतिथियों में से दो माखनलाल के पूर्व छात्र थे। जब वहां के शिक्षकों को बताया कि मैं भी माखनलाल से हूं, तो उनका विश्वविद्यालय के प्रति सम्मान देखते बनता था। हम सब माखनलाल के साथ थे, हैं और रहेंगे।

Vinit Utpal अंकुर, जिसने आपसे पूछा कि माखनलाल को जानता कौन है, जरा उनसे पूछिये कि ‘पत्रकार’ शब्द कहाँ से आया और इस शब्द को इजाद किसने किया था.

Mohammad Irfan पीत पत्राकारिता। मेरा सवाल ये है कि उक्त पत्रकार को सही जानकारी लेनी थी। उसे किसी अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र से बात करनी थी, तब जाकर रिपोर्ट लिखता। वाकई में तथ्यहीन, उद्देश्यहीन, विवेकहीन, भावहीन जितने भी हीन हैं सबको जमाकर उक्त खबर छापी गई। विश्विद्यालय के शिक्षकों से मालूमात करनी थी। ऐसी बेहूदा ख़बरों से संस्थान की विश्वसनीयता कम होती है और छात्रों पर बुरा असर पड़ता है। कारवाई होनी चाहिए।

Siddharth Sarathe आश्चर्य की बात है इतने नामी गिरामी अखबार के दफ्तर में कोई भी एक बुद्धिजीवी नही था जो एक बार तथ्यों को जांच लेता या जांचने के आदेश दे देता, क्या इतने बड़े अखबार की खबरें सिर्फ कुतर्कों ओर बयानबाजियों पर ही आधारित हैं ? शर्मनाक ….दरअसल कई पत्रकार ओर अखबार सरकारी संस्थानों पर उंगली उठाकर ही खुद को निष्पक्ष साबित करने का एकमात्र विकल्प मानते हैं ।

Keshav Kumar मानहानि का मामला दर्ज करने के साथ ही अखबार के संपादक, प्रबंधक और स्वामी को सांस्थानिक तौर पर शिकायत लिखें. निजी तौर पर भी शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, बोर्ड सदस्य, पूर्व छात्र, मौजूदा छात्र- छात्राएं और शुभचिंतक जन भी अखबार, राज्य और केंद्र सरकार की मशीनरी के अलावा भारतीय प्रेस परिषद को पत्र लिखें. हर मोर्चे पर जवाब जरूरी होता है.

Soni Yadav बिलकुल सर.. अगर मैं गलत नही हूँ तो हमारे सभी साथी जो मीडिया में कार्यरत है उन्हें भी ईद या क्रिसमस की छुट्टी नही मिलती, तो क्या वह भी आर एस एस की वजह से है? नही, क्यूंकि वह उस संस्था की आवश्यकता है| और रही mcu की तो भले यहां यह घोषित नहीं है, पर छुट्टी मिलती जरूर है| तो ठीक उसी तरह सर जी MCU एक संसथान है जिसकी अपनी बाध्यताएं और limitations है| कृपया इस बात को समझे और हर चीज़ को राजनीती से न जोड़े| और एक बात जो मैं MCU के सभी passout से कहना चाहती| कृपया इस संसथान के खिलाफ काम न करे, हो सकता ऐसा करने पर आपको निजी रूप से लाभ हो, पर वह इस संसथान की छवि को छाती पोह्चाएगी| जिसकी भापाई करने में सालों लग जायेंगे, और जिसका सीधा और साफ़ नुकसान आने वाले छात्रों को होगा|

Surender Paul निकृष्ट पत्रकारिता का उत्कृष्ट नमूना… पिछले कुछ दिनों से ये सुपारी पत्रकार MCU के विरुद्ध एक सोची समझी साजिश के तहत ऐसी आधारहीन मनगढ़ंत और घटिया पत्रकारिता कर रहे हैं… मेरा सुझाव है कि हमें MCU में एक स्थान चिन्हित करके इस प्रकार की मूर्खतापूर्ण और गैर जिम्मेदार खबरों का चस्पा कर उस पर अपनी टिप्पणी लिखनी चाहिए… इससे हमारे विद्यार्थियों के लिए निकृष्ट पत्रकारिता के उदाहरण भी सामने होंगे और ये अखबार और इनके सुपारी पत्रकार भी बेनकाब होते रहेंगे…

Abhishek Dubey university is poore mamle par chup kyu hai. abhi tak koi bayan MCU ki taraf se nahi aaya hai. kuthiala ji ka number band hai…message kiya koi jawab nahi…registrar sharma ji phone rcv nahi karte hain…message karo rply nahi karte hain…MCU jao milte nahi hain. कोर्ट जाने का विकल्प खुला है। आप कोर्ट जाएं।

Surender Paul समाचार के मूल्यों (news values) में एक मूल्य समाचार का बिकाउपन (Salability) भी जुड़ गया है। इसलिए इन दिनों माखनलाल विश्वविद्यालय के नये परिसर में प्रस्तावित गौशाला का मुद्दा भी काफी छाया हुआ है… हालांकि परिसर में गौशाला निर्माण का निर्णय चार वर्ष पूर्व ही लिया गया था लेकिन उस समय यह मुद्दा बिकाऊ नहीं था, आजकल बिकाऊ है इसलिए बात-बात पर बिकने वाले कुछ मीडिया घराने और कुछ तथाकथित पत्रकार इस मुद्दे को भी काफी उछाल रहे हैं। और दूसरा बिकाऊ मूल्य है ‘सांप्रदायिकता’ यह समाचार उसी मूल्य को ध्यान में रखकर गढ़ा गया लगता है। यह तो पीत पत्रकारिता से भी निकृष्ट और घटिया स्तर की पत्रकारिता हुई। ऐसे ही गैर जिम्मेदाराना समाचारों से सांप्रदायिक तनाव फैलता है। अब इस पत्रकार को यह कौन समझाए कि अकादमिक कैलेंडर और छुट्टियों के कैलेंडर में बहुत अंतर होता है। धिक्कार है, लानत है, …. सुपारी पत्रकारिता करने वालों कुछ तो शर्म करो… आखिर तुम्हारी ऐसी घटिया पत्रकारिता के उदाहरण हम अपनी कक्षाओं में विद्यार्थियों को देने वाले हैं…

Pravin Dubey इसलिए बात-बात पर बिकने वाले कुछ मीडिया घराने और कुछ तथाकथित पत्रकार इस मुद्दे को भी काफी उछाल रहे हैं.. आपकी पृष्ठभूमि निकलवाता हूँ कि आप जीवन में कभी बिके या नहीं…किस संघ के नेता की अनुकम्पा से आपकी नियुक्ति हुई है ये भी पता करवाता हूँ…

Surender Paul ज़रूर मेरा बैकग्राउंड पता करो Pravin Dubey और यह भी पता करो कि संघ से मेरा क्या कनेक्शन है। और रही बात बिकने की तो सुरेन्द्र पॉल न तो बिकाऊ था, न बिकाऊ है और न ही कभी बिकने वाला लेकिन आपकी इस टिप्पणी से आपकी सोच ज़रूर सामने आई है…

Pravin Dubey आप Surender Paul सबको बिकाऊ…दलाल निरुपित कर रहे हैं…सोच तो आमने-सामने आकर भी ज़ाहिर कर सकता हूँ..आप अमर उजाला में राजेश रापरिया साहब के वक़्त थे क्या…? आपके ही शब्दों को यदि मानू तो क्या आपसे भी वहां दलाली कराई जाती थी..और जहां तक मेरा प्रश्न है, तो मैं बता दूँ कि उस यूनिवर्सिटी में जितने खैरख्वाह आपके होंगे, उनसे मेरे बारे में पता कर लेना…सब चोर हैं पत्रकारिता में..एक आप ही शरीफ़ पैदा हुए हैं

Surender Paul भाई साहब इतना बुरा मत मानिये और दिल पे मत लीजिए मैंने ‘सबको’ नहीं कहा बल्कि ‘कुछ’ पत्रकारों और मीडिया घरानों की बात की है। और सबसे महत्वपूर्ण बात Context की है किस संदर्भ में कहा है। मैं आपको नहीं जानता और न ही आपकी धमकी की तर्ज पर मुझे आपका बैकग्राउंड पता करने की चाहत है… और इस फालतू काम के लिए समय तो बिल्कुल भी नहीं है। यह धमकी पत्रकारों की एक सदाबहार धमकी है क्योंकि हर बात में नकारात्मकाक ढूंढते ढूंढते उन्हें हर जगह ऐसे लोगों की तलाश रहती है जिनका बैकग्राउंड खंगालकर वो कुछ लिखकर उन्हें बदनाम कर सकें। मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया अनावश्यक बातों को तूल न दें। 1990 में बने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में कई योग्य शिक्षक अपनी सेवाएं दे चुके हैं और दे रहे हैं चाहे उनका बैकग्राउंड या राजनीतिक विचारधारा कुछ भी रही हो और अभी भी ऐसे शिक्षक यहां कार्यरत हैं। मैं भी Mainstream media छोड़कर पिछले 12 वर्षों से यहां अपनी सेवाएं दे रहा हूँ। MCU को लेकर काफी कुछ छपता रहता है जिस पर मैंने कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन जिस समाचार को लेकर चर्चा हो रही है वह निकृष्ट और गैर जिम्मेदाराना पत्रकारिता का एक उदाहरण है। ऐसा समाचार देश के धार्मिक सौहार्द के लिए खतरा है। मैंने इस समाचार को लेकर ही अपनी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया के लोग जब ऐसी हरकतें करते हैं तो मेरा भी दिल दुखता है और शायद आपको भी एक वरिष्ठ और जिम्मेदार पत्रकार के नाते चिंता तो अवश्य ही होती होगी क्योंकि हम सब एक ही बिरादरी के लोग हैं।

Sharad Jha कोई सही नहीं है Avinash सब गलत हैं, और मीडिया के बारे में कौन नहीं जानता कि बिना तड़का लगाये खबर नहीं छपती है। और हाँ मेरा विरोध कुव्यवस्था और भ्रष्टाचार से है मैं गौशाला का विरोधी नहीं हूँ,, पहले आप पत्रकारिता के लिये बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने पर कार्य कीजिए। नये परिसर को लेके जो हसीन सपना दिखया जा रहा है उसको पूरा कीजिये फिर गौशाला बनाइये या जो करिये। सपना मत दिखाइये की ऐसा होगा, वैसा होगा, भाई मैं हकीकत में जीने वाला इंसान हूँ, मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख कर नहीं जीता हूँ। और जिन लोगों को ये लगता है कि मैंने अपने पोस्ट से माखनलाल की बुराई किया हूँ। उनको बस इतना कहूंगा कि भाई मैं हकीकत लिखा था अब यहां की सच्चाई बुरी है तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है, बुरा मैंने नहीं बनाया है। कुव्यवस्था अपने फैला रखी है, मेरे तरह बहुत बच्चे दूर से बहुत अरमान लेकर आते हैं यहां आकर नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली स्थिति हो जाती है। व्यथा तो निकलेगी ही। बहुत लोग हैं जो feel good में जीते हैं,उनकी जिंदगी उनको मुबारक हो।

Pravin Dubey आप जो भी हैं Surender Paul श्रीमान… मैं आपको नहीं जानता..अब तक मैं मौन था..माखनलाल यूनिवर्सिटी के आप पैरोकार हैं और लिख रहे हैं media has turned out to be one of the most corrupt institutions with absolutely no ethics or responsibility….इसका मतलब वो यूनिवर्सिटी भी दलाल और ब्लेकमेलर कैसे बने, इसकी तालीम दे रही है…मैं भी वही का स्टूडेंट हूँ 1995 बैच का…सिर्फ भाषण फेसबुक पर देना बहुत आसान बात है और किसी भी बयान या घटना को सबके ऊपर कृपया मत थोपिए और हाँ…ये सही है कि एक ख़ास विचारधारा की पोषक हो गई है माखनलाल यूनिवर्सिटी…..मुंह उठाकर कुछ भी बोलने से पहले उनके गिरेबान में भी झांकिए जिनकी आप वकालत कर रहे हैं..

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विश्व संवाद केंद्र भोपाल ने महर्षि नारद जी का सम्मान किया या अपमान?

आज के पत्रिका और कुछ अन्य समाचार पत्रों में खबर पढ़ी कि विश्व संवाद केंद्र भोपाल ने आदि पत्रकार महर्षि नारद जी की जयंती के अवसर पर कुछ पत्रकारों को सम्मानित किया। मुझे सम्मानित किये गये पत्रकारों की सूची में एक ऐसे पत्रकार का नाम पढ़कर बहुत ताज्जुब हुआ जो पत्रकार से अधिक ब्लैकमेलर के रूप में जाना जाता है। जिसे पत्रकारिता के आधारभूत सिद्धांतों और मूल्यों का भी ज्ञान नहीं है।

भोपाल के एक दैनिक में कार्यरत यह पत्रकार कुछ लोगों के खिलाफ उनकी सुपारी लेकर भी खबरें लिखता रहा है। उसने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति और कई शिक्षकों के खिलाफ भी आधारहीन और मानहानिकारक समाचार लिखे। हालांकि अपनी इन्हीं हरकतों के कारण उक्त सुपारी पत्रकार एक समाचार पत्र में ज्यादा दिन टिक भी नहीं पाता क्योंकि धकिया दिया जाता है।

हद तो तब हो गई जब उक्त कथित पत्रकार ने जून 2015 में माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति और कुछ महिला शिक्षकों के साथ की एक सार्वजनिक कार्यक्रम की फोटो को अपनी फेसबुक वॉल पर पोस्ट कर काफी घटिया, अश्लील, आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणी भी की थी। इस बात पर जब उक्त शिक्षिकाओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सायबर पुलिस में लिखित शिकायत की तो तब जाकर वह पोस्ट फेसबुक से हटी और उक्त पत्रकार को पीपुल्स समाचार से निकाल दिया गया। कुलपति व प्रशासन की सलाह पर उक्त युवा पत्रकार के ‘करियर’ को ध्यान में रखते हुए अपमान के घूंट पीकर भी उक्त महिला शिक्षकों ने उक्त पत्रकार को बाद में माफ कर दिया था। लेकिन उसके बावजूद उक्त पत्रकार की हरकतें नहीं रुकीं।

अब हैरानी इस बात की है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मीडिया और प्रचार संगठन ‘विश्व संवाद केंद्र, भोपाल द्वारा इतने प्रतिष्ठित सम्मान के लिए क्या भोपाल में यही पत्रकार बच गया था। नारी शक्ति और नारी सम्मान की दुहाई देने वाले संघ के कर्ता-धर्ताओं को कम से कम ऐसे किसी पत्रकार को सम्मानित करने से पूर्व इसके कृत्य और कुकृत्यों के बारे में भी खोजबीन कर लेनी चाहिए।

घटिया सोच और महिलाओं के प्रति अपनी रुग्ण मानसिकता का कई बार परिचय दे चुके इस कथित पत्रकार को इस प्रकार एक प्रतिष्ठित संस्था द्वारा सम्मानित करने से MCU का शिक्षक समुदाय स्तब्ध और क्षुब्ध है। यह न केवल महर्षि नारद का अपमान है बल्कि भोपाल के उन कई योग्य और वरिष्ठ पत्रकारों का भी अपमान है जो इस प्रतिष्ठित सम्मान के अधिक हकदार और योग्य थे।

माखनलाल पत्रकार विश्वविद्यालय में कार्यरत शिक्षक सुरेंद्र पॉल की एफबी वॉल से.

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पुष्पेन्द्र पाल के माखनलाल विश्वविद्यालय से जाने से छात्रों में गहरी टीस, वीसी से नफरत

पुष्पेन्द्र पाल  सिंह  के बच्चों  की दुनिया  और  क्लास रूम से दूर चले जाने को सिर्फ वही  समझ सकता है, जो उनसे पढ़ा हो या जो उनको करीब से जानता हो। रवीश कुमार जब अपने लेख ‘कभी रवीश कुमार मत  बनना’ में मीडिया और कम्युनिकेशन शिक्षा के दुर्गति की बात करते हैं तो अनायास ही आँखों के सामने अपना माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय घूमने लगता है। कैसे एक कुलपति (कुलनाशपति) किसी अच्छे शैक्षणिक संस्थान को बर्बाद करता है, इसको हम लोगों ने बड़े क़रीब से देखा है। 

रवीश  कुमार जब लिखते हैं कि देश में मीडिया और कम्युनिकेशन के बहुत कम अच्छे शिक्षक हैं तो आँखों के सामने पुष्पेन्द्र सर और आनंद प्रधान सर का चेहरा और उनकी वर्तमान स्थिति बेचैन करने लगती है। आज के समय में भी पुष्पेन्द्र सर के दो-ढाई घंटे के क्लास को बच्चे पूरी तन्मयता के साथ करते हैं। उनकी  पढ़ाई हुई  चीजें  चाहे वो लिस्निंग हो  या  कम्युनिकेशन के सिद्धांत या उस आदमी का भी भला करो जो आपका बुरा सोच रहा है, कभी भूलती नहीं हैं। वे खुद अपने आप में एक चलते-फिरते क्लास रूम हैं।

पुष्पेन्द्र  सर का  क्लास रूम से दूर चले जाना बच्चों  का वो नुकसान है, जिसका वो अंदाजा भी नहीं लगा पायेंगे। कुलपति ने पुष्पेन्द्र सर को ठिकाने लगा के विश्वविद्यालय की रही सही कसर भी पूरी कर दी। आनन्द प्रधान सर की स्थिति भी किसी से छुपी नहीं है। उनका जाना किसी व्यक्ति या विचारधारा की जीत नहीं, बच्चों  की हार  है। जानने और करने के बाद लगा की कम्युनिकेशन क्या फिल्ड है  और उसे जानने के लिए पुष्पेन्द्र सर जैसे शिक्षकों की जरुरत वैसे ही है, जैसे शरीर में खून की। नई दुनिया, धर्मयुग के स्वर्णिम दौर से लेकर भास्कर के उदय की कहानी से होते हुए विदेशी विवि के जर्नलिज्म विभागों की आँखों देखी कहानी अब वैसे कोई नहीं बताएगा।  

सबकी कहानियाँ मोटा मोटी  एक सी ही हैं। माखनलाल के कुलपति के कारनामों पे अगर किताब लिखी जाये तो वो 600 पेज भी पार कर जाये। राज्य सभा जाने का ख्वाब देखने वाले कुलपति कुठियाला के खासमखास हो या उसके द्वारा फर्जी भर्ती किये गए गुर्गो का गिरोह हो, उनको एक बात याद रखनी चाहिए। किसी लकीर को छोटा करने के लिए उससे बड़ी लकीर खींचनी पड़ेगी। उसको मिटा के छोटा करने के लिए तो चम्पुओं चापलूसों की उम्र भी छोटी पड़ेगी।

प्रशांत मिश्र (इस साल माखनलाल से पासआऊट छात्र) से संपर्क : 9826181687

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तो इसलिए टेलीविजन मीडिया में दर्शक हाशिए पर जा रहा है

भोपाल, 1 अगस्त । प्रख्यात जनसंचार शास्त्री मार्शल मेक्लुहान का कथन है कि ‘माध्यम ही संदेश है’। वर्तमान भारतीय मीडिया की स्थिति को देखकर आज यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि ‘स्वामित्व ही संदेश है’। आज समाचारपत्र, टेलीविजन एवं अन्य मीडिया संस्थानों के मालिकों द्वारा तय किए गए विचार ही मीडिया में दिखाई देते हैं। यह विचार आज माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में वरिष्ठ पत्रकार श्री मुकेश कुमार ने व्यक्त किए।

आज विश्वविद्यालय परिसर में श्री मुकेश कुमार की नई पुस्तक ‘टी.आर.पी: टी.वी. न्यूज और बाजार’ पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस प्रसंग पर बोलते हुए श्री मुकेश कुमार ने कहा कि टी.आर.पी. की वास्तविकता एवं टी.आर.पी. पर भारतीय मीडिया जगत का विचार जानने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का सर्वेक्षण किया गया। तमाम कमियों एवं आलोचनाओं के बावजूद टी.आर.पी. के आकड़ों से ही आज भारतीय टेलीविजन मीडिया संचालित हो रहा है। एक ओर मीडिया संस्थाओं को मीडिया मालिकों के हितों को ध्यान में रखना है वहीं दूसरी ओर टी.आर.पी. के आकड़ों के अनुसार अपनी विषय सामग्री बनानी है। ऐसे दौर में टेलीविजन मीडिया में दर्शक हाशिए पर जा रहा है। लोग अपने-अपने हिसाब से टी.आर.पी. का उपयोग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मीडिया के संचालन के लिए पूँजी की आवश्यकता होती है और यह बाजार से प्राप्त होती है। इसीलिए आज की मीडिया को बाजार संचालित करता है। टी.आर.पी. हमें सिर्फ यह नहीं बताता की कौन-सा चैनल, कौन-सा कार्यक्रम नंबर वन है, बल्कि वह एक मार्केट पर्शेप्सन भी देता है। आज संपूर्ण टेलीविजन जगत में समाचार चैनलों का केवल 7 प्रतिशत शेयर है और इसमें भी अंग्रेजी न्यूज चैनल का केवल 0.3 प्रतिशत शेयर है।

इस परिचर्चा में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी सहभगिता की। विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग एवं संचार शोध के विद्यार्थियों ने परिचर्चा में हिस्सा लिया। परिचर्चा में ए.बी.पी. न्यूज के ब्यूरो चीफ वरिष्ठ पत्रकार श्री बृजेश राजपूत भी उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त जनसंपर्क विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव, संचार शोध विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका वर्मा एवं अन्य शिक्षक उपस्थित थे।

प्रेस विज्ञप्ति

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ये कैसा आक्रोश है जो माखनलाल के एक एचओडी पर गाज गिरने के बाद ही भड़कता है!

Mayank Saxena : भोपाल से पत्रकारिता विश्वविद्यालय विवाद की आवाज़ें थोड़ी बहुत सुन रहा हूं और हंस रहा हूं। आखिर ये किस तरह का आक्रोश है, जो हर बार तब ही भड़कता है और आंदोलनधर्मी हो जाता है, जब किसी एचओडी पर गाज गिरती है? क्या जब एचओडी को पद से नहीं हटाया गया था, तब हालात अच्छे थे? क्यों आखिर हर बार इस नौटंकी का इंतजार किया जाता है?

क्या आप सब को तब बुरा नहीं लगा, जब ज़्यादातर संघ या भाजपा की पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों को ही पीएचडी के लिए चयनित किया गया? क्या जब सिलेबस को संघ की शिक्षा से भर दिया गया, तब विरोध नहीं होना चाहिए था? क्या अपने मनमाने और करीबी लोगों को अहम पदों पर बिठाते जाने और पढ़ाई का स्तर गिरते जाने पर आंदोलन नहीं होना चाहिए था?

क्या आप को तब आंदोलन की राह नहीं पकड़नी थी? याद कीजिए कि पिछली बार आपने कब विरोध किया था…??? तभी न जब एचओडी महोदय…मतलब कि उसके अलावा सब ठीक है…ये सारे मुद्दे और दिक्कतें जो अब उठाई जा रही हैं, बीते पांच साल में क्यों नहीं उठाई गई…मतलब साफ है कि एचओडी की बहाली के साथ ही…आप फिर सब कुछ ऐसे ही झेलने लगेंगे… मैं Pushpendra Pal Singh जी का सम्मान करता हूं…गुरु हैं…उनसे बहुत सीखा है…लेकिन सीधी बात कहना चाहता हूं कि M.C.R.P.V. University, Bhopal (M.P.) की समस्याओं के खिलाफ आंदोलन चलाएं…एक ही आदमी की बात पर सारी बातें करेंगे तो लड़ाई हल्की होती जाएगी…शायद पी पी सर भी ऐसा नहीं चाहेंगे…

बुनियादी सुविधाओं, पढ़ाई न होने, प्लेसमेंट कम होते जाने, संघ के विरोधियों या न्यूट्रल छात्रों से भेदभाव. साम्प्रदायिकता और माहौल के खिलाफ अगर आप लड़ाई करते रहते, तो आज ये न होता…और होता भी तो आपकी लड़ाई ज़्यादा मज़बूत रहती…मेरी बात गंभीरता से समझिएगा…बाकी कुठियाला कि कुटिलता पर मैंने पांच साल पहले 2010 में ही लिखा था, उसे साझा कर रहा हूं….

कुठियाला जी, हम सब आपके इरादे जानते हैं
http://old.bhadas4media.com/article-comment/6736-2010-09-28-09-07-25.html

पत्रकार मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.

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माखनलाल के एचओडी पुष्पेंद्रपाल सिंह पद से हटाए गए

माखनलाल पत्रकारिता विवि में एक बार फिर से हाफ चड्ढा छाप कुलपति ने सोशलिस्ट और छात्रों के हितों के रक्षक पुष्पेंद्रपाल सिंह को पत्रकारिता विभाग के एचओडी पद से ऐसे मौके पर हटाया, जब विवि परिसर छात्रों से खाली है। उसके बावजूद सोशल मीडिया पर ‪#‎लड़ाई‬ जारी है का हैशटैग लगा कर छात्र पिछले तीन दिनों से पीपी सिंह के साथ खड़े हैं। 

 

कुठियाला की कुंठा में सहयोगी संजय द्विवेदी, सौरभ मालवीय आदि की नियुक्तियों पर हमेशा सवाल उठे हैं। मालवीय की नियुक्ति पर जबलपुर हाईकोर्ट में केस भी चल रहा है। न तो कैम्पस प्लेसमेंट हो रहे हैं और न ही स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप की इजाज़त दी जाती है। जिसकी इजाज़त है, वह है एकात्म मानववाद पर लेक्चर, संघ का कश्मीर पर दृष्टिकोण, नारद की पत्रकारिता, राष्ट्रवाद की अवधारणा। कभी कभी तो पूरा कैम्पस ही भगवा और भाजपाई हो जाता है। व्यापम घोटाले के मुख्य आरोपी शिवराज सिंह चौहान के बेहद नजदीकी कुठियाला फिलहाल दुबई गए हैं। डर कर भागने की कुठियाला की इसी आदत ने उसे पिछली बार शर्मिंदा किया था, जब उसने पीपी सिंह को उनके पद से हटा दिया था। फिर छात्र आंदोलन के दबाव से बहाल किया था। छात्रों, आप लोग संघर्ष करिए और जो जो कुठियाला के प्रिय हैं उनको घेरिए। अख़बारों में अपना विरोध छपवाइए। दबाव ऐसे ही बनेगा। कुठियाला के साथ ही आरएसएस का पुतला फूंकिए, शैक्षणिक संस्थान में राजनीति करने के विरोध में। एक बात और, संघी बहुत डरपोक होते हैं।

माखनलाल से पत्रकारिता की पढ़ाई कर चुके मोहम्मद अनस के एफबी वॉल से

Badal Saroj : यूं तो, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पूरे दशक में कोई अच्छी खबर नहीं आयी है। अब अनस मोहम्मद अनस जैसे मित्रो और इस विवि के अच्छे उत्पादों से पता चला है कि इस विवि के सबसे लोकप्रिय और संयत व्यक्ति माने जाने वाले पुष्पेन्द्र पाल सिंह को पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। इस निंदनीय और पूर्वाग्रही कार्यवाही में छोटी छोटी बिखरी बिंदियों जैसी टूटी फूटी लकीरों द्वारा खुद को एक स्थापित बड़ी रेखा से ज्यादा बड़ा दिखाने की तिकड़म के सिवाय कुछ नहीं है। इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। एक बार पुनः नए-पुराने माखनलालियों और लालों से अपील है कि वे अपने पुराने कैम्पस को नेत्र-बुद्धि -सोच विहीन संपोलों के अण्डों का भंडारगृह बनने से बचाने के लिए कभी मिलकर बैठें और कुछ तजबीज -कमसेकम इन साजिशियों को बेनकाब करने की तजबीज सोचें।

मध्य प्रदेश के कम्युनिस्ट नेता बादल सरोज के एफबी वॉल से.

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पत्रकार मदनमोहन जोशी और श्यामलाल यादव को ‘गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान’

भोपाल : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्व विद्यालय में गत दिनो आयोजित एक समारोह में वर्ष 2012 का ‘गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान’ वरिष्ठ पत्रकार मदन मोहन जोशी को एवं वर्ष 2013 का सम्मान युवा पत्रकार श्यामलाल यादव को प्रदान किया गया। साथ ही, सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतिभा-2015 का पुरस्कार वितरण भी किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं मंचासीन अतिथियों ने साकेत दुबे की पुस्तक ‘डॉ.धर्मवीर भारती: पत्रकारिता के सिद्धान्त’ एवं मनोज चतुर्वेदी की पुस्तक ‘महात्मा गांधी और संवाद कला’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है। उसने देश की राजनीति को नई दिशा दी है। पत्रकारिता नहीं होती तो आज देश की राजनीति की दिशा-दशा कुछ और होती। दादा माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन हमारे लिए आज भी प्रकाश पुंज है। 

पत्रकार मदनमोहन जोशी और श्यामलाल यादव को सम्मानित करते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

 

साकेत दुबे और मनोज चतुर्वेदी की पुस्तकों के प्रकाशनोत्सव की एक झलक

मुख्यमंत्री ने कहा कि मदन मोहन जोशी केवल पत्रकार नहीं, सामाजिक सरोकारों को साथ लेकर चलने वाले व्यक्ति हैं। श्यामलाल यादव ने कम उम्र में पत्रकारिता में बड़ी ऊंचाइयाँ हासिल की हैं, जो युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। युवा पत्रकारों से उन्होंने सामाजिक सरोकार वाली पत्रकारिता करने का आह्वान किया। 

मदन मोहन जोशी ने कहा कि ऐसी पत्रकारिता का संकल्प लेना चाहिए जिससे व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र का भला हो सके। श्यामलाल यादव ने कहा कि मेहनत करके पत्रकारिता में कुछ भी हासिल किया जा सकता है। हिमाचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी ने कहा कि पत्रकारिता के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती मूल्यों के संरक्षण की है। सनसनीपूर्ण पत्रकारिता का बोलबाला है। पत्रकारिता में ऐसे प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे मूल्यों एवं संवेदनाओं का संरक्षण हो सके। 

माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान के अंतर्गत वैदिक मिशन ट्रस्ट के स्वामी धर्मबंधु ने कहा कि विद्यार्थी पांच संकल्प लें। प्राचीन साहित्य का अध्ययन, अपनी संस्कृति का सम्मान, राष्ट्र के प्रति प्रेम का भाव, आदर्श स्थापित करने का प्रयास कर एवं अन्याय-अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएँ। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने विश्वविद्यालय की आगामी योजनाओं के बारे में चर्चा करते हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया।

समारोह में विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। विद्यार्थियों के दल ने समाज में व्याप्त बुराइयों पर केन्द्रित लघु नाटिका ‘पागलों की दुनिया’ प्रस्तुत की। छात्राओं के कालबेलिया नृत्य पर लोग झूम उठे। विश्वविद्यालय बैण्ड ने भी मन मोहन लिया। इस दौरान प्रतिभा-2015 के दौरान सम्पन्न निबंध प्रतियोगिता, फीचर लेखन प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता, एनीमेशन, पोस्टर, कार्टून, पावर पाइंट निर्माण प्रतियोगिता, नाट्य प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता तथा क्विज़ प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरित किए गए। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला, हिमालच विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी, वरिष्ठ पत्रकार राधेश्याम शर्मा, रमेश शर्मा एवं वरिष्ठ साहित्यकार कैलाशचन्द्र पंत उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें –  

Journalism has given new direction to country’s politics: Shivraj Singh Chouhan : Lecture of Swami Dharmbandhu of Vedi Mission Trust was organised during Makhanlal Chaturvedi Memorial Lecture by Journalism University

Bhopal : Journalism is essential for democracy. Journalism has given a new direction to the country’s politics. Had journalism not been there, the political scenario would have been entirely different in the country. Life of Makhanlal Chaturvedi even today, is a great source of inspiration for us. These views were expressed by Chief Minister Shri Shivraj Singh Chouhan while addressing the Makhanlal Chaturvedi Memorial lecture and Ganesh Shankar Vidyarthi Award ceremony organised by Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication in Bhopal on Tuesday.

The Ganesh Shankar Vidyarthi award for the year 2012 was conferred upon senior journalist, Shri Madan Mohan Joshi while award for the year 2013 was conferred upon young journalist, Shri Shyamlal Yadav. On this occasion, Chief Minister said that Madan Mohan Joshi is not only a journalist but also a social worker. About Shyamlal Yadav, Chouhan said that he has reached a great height in the field of journalism at a very young age which is a great source of inspiration for the youths. He called upon the student to work hard and do not escape from working hard and should keep their goals big. He said that there is no bigger service than serving others and no bigger sin than harming others. Youths should practice journalism in such a way that they shine in the sky like stars. Giving four sutras of success to the students, he said that they should have ‘Paon Mein Chakkar’, ‘Muh Mein Shakkar’, ‘Sine Mein Aag’ and ‘Mathe Pe Barf’ and exhorted them to practice journalism which is in the interest of the society.

Speaking on the occasion, Madan Mohan Joshi said that journalism should take resolution to be in a kind of journalism that is in the interest of individual, society and nation. Shyamlal Yadav, in his address, said that anything could be achieved in journalism by dint of hard work and the young generation should not refrain from hard work. VC of Himachal University, Prof. ADN Bajpayee said that the biggest challenge before the journalism today is to preserve the journalistic values. There is the need to encourage efforts which could help in preservation of values and sensitivity. The vice-chancellor of the university, Prof. Brij Kishore Kuthiala, on this occasion talked about the upcoming programmes of the university and expressed gratitude towards the guests. The entire programme was coordinated by head of the Mass Communication Department, Sanjay Dwivedi.

Sufferings could be fought by increasing capabilities: Swami Dharmbandhu

The biggest characteristics of the human life is humanity. When there is lack of capability in humans, they will have mroe jealousy. Today people are not unhappy because of their own inefficiencies but because of efficiencies of others. To be able to get rid of their sufferings, people should become more capable. Today, there is need to emphasize on internal purification. We should focus on purity of body, mind, soul and conscience. Stregnths could be increased by creating knowledge. These views were expressed by the founder of Vedic Mission Trust, Swami Dharmbandhu.

He said that the problems of the modern age were determined by the heads of different countries of the world in 2005 wherein they said that world should come out of wars and give stress on better management. Today, the biggest problem before the humab beings is the problem of character. Today, even those nations which are ruling the international platforms too seem to be admitting this fact that development is not possible without peace. He said that the renowned educationist of the country, BS Kothari advocated of an education system which could promote the spirity of humanity. Quoting the great philosopher, Russeau, he Dharmbandhu said that everything given to us by the nature is sacred but it is destroyed when it reaches the hands of the human beings. Knowledge should be taken and learnt even from the enemies. Giving knowledge is the biggest charity. Today the G-8 nations consititute 19 per cent of the total population of the world while they have 75 per cent of the world resources in under their possession.

In his addres, Swami Dharmbandhu mentioned about 5 resolutions that students should take. First, studying the ancient literature, second: respecting our culture, third: feeling of affection towards the nation, fourth: try to establish ideals and fifth: raising voice against injustice and atrocities. He exhorted the student to live a hard working life and said that those not doing hard works in their lives do not have the right to pray to the almighty. Similarly, those who do not perspire should not have the right to relax. He said that a person is known by his thoughts and to be able role model for others it is important that one becomes patient, stay away from greed and should bring humility in one’s behaviour. Talking about the books authored by the great souls of the world, he appealed the students to go through them.

Students enjoy cultural activities, cheer prize winners

Prize distribution for cultural and sports event Pratibha-2015 : The prize distribution ceremony for annual cultural and sports fest Pratibha-2015 was also organised during the function. Students also presented cultural activities like skit titled, ‘Paagalon Ki Duniya’ to highlight the corruptions and irregularities prevailing in the society. The folk dance, Kalbeliya, presented by the students also enthralled the audience. The Universiy Band too mesmerised the audience with their musical instruments. During this, the winners of different competitions like essay, feature writing, debate, extempore, animation, cartoon, poster, powerpoint presentation, play, dance, quiz and others were also given away felicitated with prizes. Vice-Chancellor of the university, Prof. Brij Kishore Kuthiala, VC of Himachal University, Prof. ADN Bajpayee, senior journalist Radheshyam Sharma and senior litterteur, Kailashchandra Pant were present to give away the prizes to the winners of the competitions.

During the function, two books published by the Publication Department of the University were released by Chief Minister Shivraj Singh Chouhan and other dignitaries present on the dais. The book authored by Saket Dubey, ‘Dharmvir Bharti: Patrakarita Ke Siddhant’ and ‘Mahatma Gandhi Aur Samvad Kala’ written by Manoj Chaturvedi were released on  the occasion.  

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126वीं जयंती पर कर्मवीर विद्यापीठ में माखनलाल चतुर्वेदी की पत्रकारिता को नमन

खंडवा (म.प्र.) : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के परिसर कर्मवीर विद्यापीठ, खंडवा में आज 4 अप्रैल को पं. माखनलाल चतुर्वेदी की 126 वीं जयंती पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माखनलाल चतुर्वेदी शासकीय कन्या महाविद्यालय, खंडवा के प्राचार्य डॉ. श्रीराम परिहार ने अपने व्याख्यान में माखनलाल चतुर्वेदी की पत्रकारिता को नमन करते हुए, लोकमान्यतिलक को राजनीतिक गुरु, महात्मा गांधी को राजनीतिक गुरु व माधवराव सप्रे को पत्रकारिता गुरु बताया।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के कर्म के सिद्धांत से प्रेरित होकर उन्होंने अपने समाचार पत्र का नाम ‘कर्मवीर‘ रखा। आज की युवा पीढ़ी, जो पत्रकारिता के माध्यम से देश सेवा के लिए तत्पर है, उनके लिए माखनदादा मार्गदर्शक के रूप में सदैव उपस्थित हैं।

इस अवसर पर तीन पुलिया स्थित पं. माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद कर्मवीर विद्यापीठ में माखन दादा की याद में आयोजित व्याख्यानमाला की शुरूआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। कर्मवीर विद्यापीठ की छात्राओं ने सरस्वती वंदना की। स्वागत उद्बोधन विद्यापीठ के सामान्य प्रशासन प्रमुख राजेंद्र परसाई द्वारा दिया गया। 

कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका श्वेता चौधरी व आभार परिसर के पुस्कालय प्रभारी ओपी चौरे ने किया। इस अवसर पर कर्मवीर विद्यापीठ की मीनिता दीवान, प्रीतेश अग्निहोत्री, शिवेन्द्र मिश्रा आदि छात्र-छात्राओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। 

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आज है माखनलाल जयंती : मजीठिया मांग रहे पत्रकार इस मीडिया पर गर्व करें कि शर्म !

राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए माखनलाल चतुर्वेदी ने लिखा कि ‘बिजली के प्रकाश में बैठकर लिखने वाले की अपेक्षा, जो रोटी बेंचकर तेल खरीदता है और फिर लिखता है उसकी ओर ध्यान देना जरूरी है, ऐसे साहित्यिक की सेवा करते हुए जो दिखाई दे उसे मेरा वन्दन है।…गरीब साहित्यिक से बड़ा मैं दुनिया में किसी को नहीं मानता। साधनहीनता में छटपटाने वाले साहित्यिक की ओर पुरानी व नयी पीढ़ियों का ध्यान किया जाना ही चाहिए। गद्दियों और सिंहासनों को चाहे जो चुनौती दे, परन्तु मृगछाला पर बैठे बृहस्पति को कोई चुनौती नहीं दे सके, यह मेरी साध है।’ 4 अप्रैल 1925 को जब खंडवा से उन्होंने ‘कर्मवीर’ का पुनः प्रकाशन किया तो उनका आह्वान था- ‘आइए, गरीब और अमीर, किसान और मजदूर, ऊंच-नीच, जित-पराजित के भेदों को ठुकराइए। प्रदेश में राष्ट्रीय ज्वाला जगाइए और देश तथा संसार के सामने अपनी शक्तियों को ऐसा प्रमाणित कीजिए, जिस पर आने वाली संतानें स्वतंत्र भारत के रूप में गर्व करें।’ 

 

लेकिन आज कारपोरेट घरानों ने पत्रकारिता का क्या हाल बना रखा है, जग जाहिर है। उनके चाल-चलन की इस खराब नजीर और क्या हो सकती है कि उनकी करतूतों के खिलाफ पहले तो सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। उसे भी कारपोरेट मीडिया ने अनसुना कर दिया तो अब देश भर के पत्रकार सर्वोच्च न्यायालय के दर पर दस्तक दे रहे हैं। आगामी 28 अप्रैल को उसकी सुनवाई है। इस बीच अखबार घराने, पता चला है, तरह तरह के कागजी हेर-फेर करने में लगे हैं, ताकि मीडिया कर्मी कानूनी तौर भी अपना हक हासिल न कर सकें। 

भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में माखनलाल चतुर्वेदी नाम बड़े आदरपूर्वक लिया जाता है। वह गणेश शंकर विद्यार्थी से विशेष रूप से प्रभावित रहे। स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में वह सन 1921-22 के असहयोग आंदोलन में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए जेल गए थे। वह कई प्रतिष्ठित समाचारपत्रों के संपादक रहे। उन्होंने मुख्य रूप से कर्मवीर, प्रभा, प्रताप आदि पत्रों का संपादन किया। वर्ष 1943 में उन्हें ‘हिम किरीटिनी’ पर उस समय का हिन्दी साहित्य का सबसे सम्मानित ‘देव पुरस्कार’ दिया गया था। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में उनके नाम पर स्थापित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय को कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी और भारतीय विश्वविद्यालय संगठन की सदस्यता भी प्राप्त है।  

विश्वविद्यालय की सामान्य परिषद में चेयरमैन भारतीय प्रेस आयोग, जनसंपर्क विभाग, मध्यप्रदेश वित्त मंत्रालय, नेता प्रतिपक्ष मध्यप्रदेश विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा सदस्य, ख्याति प्राप्त संपादक, शिक्षाविद, भाषाविद, आदि आते हैं। विश्वविद्यालय द्वारा पत्रकारिता, मास कम्यूनिकेशन, पब्लिक रिलेशन, एडवर्टाइजिंग, लाइब्रेरी एवं इनफॉर्मेशन साइंस, फोटोग्राफी से लेकर उच्च स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, रे़डियो, टेलीविज़न, सायबर जर्नलिज्म, वीडियोग्राफी, प्रिटिंग टेक्नोलॉजी एवं इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी जैसे विभिन्न कोर्स संचालित किये जाते हैं। 

सन 1927 में माखनलाल चतुर्वेदी भरतपुर में सम्पादक सम्मेलन के अध्यक्ष बने। माधवराव सप्रे के ‘हिन्दी केसरी’ ने सन 1908 में ‘राष्ट्रीय आंदोलन और बहिष्कार’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया तो खंडवा के युवा अध्यापक माखनलाल चतुर्वेदी का निबंध प्रथम चुना गया। अप्रैल 1913 में खंडवा के हिन्दी सेवी कालूराम गंगराड़े ने मासिक पत्रिका ‘प्रभा’ का प्रकाशन आरंभ किया, जिसके संपादन का दायित्व माखनलाल को सौंपा गया। सितंबर 1913 में उन्होंने अध्यापक की नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह पत्रकारिता, साहित्य और राष्ट्रीय आंदोलन के लिए समर्पित हो गए। 

जयप्रकाश त्रिपाठी के फेसबुक वॉल से

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A lecture on ‘Role of Media in Intellectual Growth of the Nation’ was organised by Journalism University

Bhopal, January 30: Every nation has its own nature and behaviour. And development could b achieved only when the policies are made according to the nature otherwise there will be deformation. The first intellectual development of the human beings occur at the home and then in the society. Today, media has to play a great role in the intellectual growth of the human beings. Therefore, media should first understand the cultural India then transfer the knowledge to the people.

These views were expressed by the Governor of Haryana, Prof. Kaptan Singh Solanki while addressing a function organised to mark the death anniversaries of Father of Nation Mahatma Gandhi and one of the greatest poet, journalist and freedom fighters of the country Makhanlal Chaturvedi. The function was organised on the subject, ‘Role of Media in Intellectual Growth of the Nation’ by Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication wherein Prof. Solanki was present as Chief Guest.

Member of the freshly-constituted Central Film Censor Board of India and senior journalist, Ramesh Patange was also present as the keynote speakers on the occasion. Prof. Solanki, in his address, further said that India is a nation built by the sages and saints. He said that the lives of Mahatma Gandhi and Makhanlal Chaturvedi are the reflection of the India’s culture and philosophy and therefore, it is not only India that derives inspiration from them but the entire world. He said that American President Barack Obama always quotes Mahatma Gandhi’s name in his addresses all over the world. While underlining the role of journalism in shaping India’s future, Haryana Governor said that journalists would have to take lessons from the practices and values of Makhanlal Chaturvedi. He said that January 30 is a pious day for the country who gave to great sons to India who devoted a major part of their lives to journalism and cultivated a seed of development and enlightenment in the society through it.

Senior journalist and Member of Central Film Censor Board, Ramesh Patange while addressing the students, said four kinds of independence are important for a society for its inclusive growth: political, social, economic and intellectual. He said that political freedom has been achieved and the nation is in the process of achieving social and economic freedom and would be achieved in the days to come. But the struggle for intellectual freedom is the toughest and the most important one. Media could play a vital role in it and therefore, it should rethink how this freedom could be achieved. While presiding over the function, vice-chancellor of the university, Prof. Brij Kishore Kuthiala said that besides, the education imparted at schools, colleges and universities, media too plays a key role in giving an intellect to the society. It is the responsibility of the media to take the intellectual level of the society to the zenith.

Prof. Kuthiala further said, “Realizing their responsibilities, media-persons should disseminate information to the society only after a thorough analysis according to their intellectual abilities.” He also exhorted the student to take into account the points brought to the fore during the function and think and imbibe them to shape themselves into responsible and competent journalists. Earlier, the function began with the lighting of the traditional lamp by the guests and recitation of Saraswati Vandana and Makhanlal Chaturvedi’s poems by students. The guests also paid tribute to Father of Nation Mahatma Gandhi and Makhanlal Chaturvedi by garlanding their portraits.

The function was coordinated by the head of Mass Communication Department, Sanjay Dwivedi. Among those present on the occasion were many eminent citizens from the city, heads of different departments of the Journalism University, faculty members, officers, employees and large number of students.

Dr. Pavitra Shrivastava
Director – Public Relations

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Save Scholar’s Career from Dictatorship of VC Prof. B.K. Kuthiala

: Mental torture being faced by Mass Communicaton Ph.D. Scholars : Student Forum of Makhanlal Chaturvedi National University of Communication and Journalism would like to bring to your notice that mental torture being faced by Mass Communicaton Ph.D. Scholars in University. As we would like to tell you that Application for Ph.D. were invited in the 2011, entrance examination was conducted on 29th January 2012, Entrance Exam was held at the University campus. Result  of Which came on 16 May 2012. The Course work commence on 13th February 2013 and the Result of course work was announced on 23rd December 2013.

After the result came all students had submitted their proposals for the further action to  be taken regarding the same. As per the requirement the students submitted the synopsis and DRC took place but after DRC had been conducted no further action  has been taken till now. What when student visit to Vice Chancelor and HOD they say “these thinks take time and just have an easily out of situation. This delay and in the process has raised following question among the students.

If the Vice Chancelor was aware of this delay, why he didn’t take any action till now on it. Who is fully responsible for this delay? Those scholar who had face academic gap due to this problem who is is  responsible for the same. Those student who have already submitted the synopsis and the cleared DRC process why there has been no further action done as DRC held on 17th September 2014 If due to this mental torture any Scholar harm himself or does something unpleasure who would be responsible for the loss.

Student Forcum of MCU
STUDENT FORUM of MCU
Student Forum of Makhanlal Chaturvedi Rashtriya Sanchar Evam Patrakarita Vishwavidyalay, Bhopal, Madhya Pradesh,
Email : sfomcu@gmail.com
2 January, 2015
Press Release

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Short film ‘Ek Bharatiya Aatma’ by Journalism University gets PRSI Award

: The film was adjudged as the ‘Best Corporate Film’ by PRSI at 36th All India Public Relations Conference held at Jaipur : Bhopal : A short film made by Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication, ‘Ek Bharatiya Aatma’ was adjudged as the ‘Best Corporate Film’ at 36th All India Public Relations Conference held at Jaipur and was awarded with Public Relations Society of India (PRSI) award. The university has made a film on Makhanlal Chaturvedi’s life and the educational and academic activities of the university titled, ‘Ek Bharatiya Aatma’. The conference was organized at Jaipur from December 19 to 21. The award, on the university’s behalf, was received by the head of Advertising and Public Relations Department, Dr Pavitra Shrivastava and head of Management Department Dr Avinash Bajpai.

PRSI is a reputed organization of the PR professionals of the country. It was established in India in 1958. The organization is a member of International Public Relations association. PRSI organizes All India Conference every year wherein PR activities are awarded in various categories. Under this exercise, the short film made by Journalism University ‘Ek Bharatiya Aatma’ was adjudged first prize winner in the category of ‘Best Corporate Film-2014’. The film throws light on contributions of Dada Makhanlal Chaturvedi in the freedom movement as well in the field of journalism and literature in addition to the educational and academic works carried out by the university.

The award was given at the hands of Vidhan Sabha speaker of Rajasthan, Kailash Meghwal. The national president of PRSI, Ajeet Pathak and other dignitaries were present on the occasion. The jury panel for the award comprised former chairman of National Minority Commission and former Chief Information Commissioner, Wajahat Habibullah, Chairman of Joint Electricity Regulatory Commission for the state of Goa and Union Territories, SK Chaturvedi, group president of Modi Enterprises, Sarthak Behuriya, Central Information Commissioner, M Shridhar, general secretary of PRSI, Sumita Singh and treasurer, Nivedita Banerjee.

(Dr. Pavitra Shrivastava)
Director, Public Relations

Press Release

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माखनलाल में मेरी पांच साल की पढ़ाई और आज की विज्ञापनी पत्रकारिता

सम्पादकीय पर विज्ञापन इस कदर हावी है कि लगता ही नहीं कहीं पत्रकारिता हो रही है। ये दौर ऐसा है कि हर कुछ को चाटुकारिता की चाशनी में बार-बार डुबाया जाता है और इसे ही सच्चा बताकर पेश किया जाता है। पत्रकार बनने का सपना लिए हमने 5 साल माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल में गुजारे। काफी गुर भी सीखे। पत्रकारिता की बारीकियों को हमारे गुरुओं ने हमें दम भर सिखाया। इंटर्नशिप ट्रेनिंग के लिए हमें दिल्ली आजतक भी भेजा। लेकिन पढ़ा था कि विज्ञापन और सम्पादकीय दो अलग चीजें होती हैं। लेकिन जब सच्चाई का सामना हुआ तो दिल के टुकड़े हजार भी हुए। हर समय विज्ञापन हावी रहा सम्पादकीय पर।

कोई भी खबर लिखी जाती है तो हमेशा विज्ञापन वाली खबर और बिना विज्ञापन वाली खबर का ध्यान देना पड़ता है। ऐसा न करने की सूरत में अच्छी खासी डांट पिलाई जाती है। हर खबर में अगर आपने विज्ञापनदाता का ध्यान नहीं रखा तो बस आप की शामत आई समझो। कई बार बवाल तो नाम छापने और ना छापने को लेकर हो जाया करता है। ऐसा लगता ही नहीं की पत्रकारिता कर रहे हैं, लगता है की बस पूंजीपतियो के सम्मान में निकल रहे एक अखबार में टाइपराईटर बन दिन भर लिखे जा रहे हैं। ऐसे में जिस पत्रकारिता का सपना देखा था वो आज विज्ञापन की बेड़ियों में जकड़ दिया गया है। टीस तो दिल में रोज़ उठती है..। लेकिन करें क्या सिर्फ लिखना ही सीखा है, और कोई काम आता ही नहीं।

प्रवीण श्रीवास्तव
Praveen Srivastava
मो- 08081808108
praveenpink31@gmail.com

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माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भ्रष्टाचार और गिरीश उपाध्याय

भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार का गढ़ बनता जा रहा है। इसका सीधा असर यहां पर अध्ययनरत भावी पत्रकारों पर पड़ रहा है। दूसरी बार कुलपति बने प्रो. बीके कुठियाला तांडव के खिलाफ एक युवा पत्रकार ने मोर्चा खोल रखा है। यहां हुई अवैध नियुक्तियों से विवि की छवि धूमिल हुई है। इंदौर घराने के सांध्य दैनिक 6 पीएम समाचार पत्र जिसे अभी-अभी एक साल भोपाल में शुरू हुआ है, में युवा पत्रकार गिरीश उपाध्याय पत्रकारिता विश्वविद्यालय की लगातार कलई खोल रहा है।  हर पांच छह दिन के अंतराल से एकाध खबर दे रहा है। 

पत्रकारिता विवि का माहौल भयपूर्ण है। यहां पढ़ने वाले भावी पत्रकारों अपनी आवाज नहीं उठा पा रहे हैं। खबर रुकवाने में माहिर कुठियाला का जुगाड़तंत्र भी इस युवा पत्रकार के सामने काम नहीं कर पा रहा है। इस पत्रकार ने कुलपति प्रो. कुठियाला की रातों की नींद उठाकर रख दी है। वहीं उपाध्याय भावी पत्रकारों की आवाज बनकर उभकर सामने आया है। पर गिरीश उपाध्याय नाम के कारण कुछ परेशानी भी है। गिरीश उपाध्याय नाम से भोपाल राजधानी में दो पत्रकार हैं। एक नवदुनिया के पूर्व संपादक गिरीश उपाध्याय जो अब अपनी सेवाएं पत्राकारिता विवि में दे रहे हैं। दूसरा गिरीश उपाध्याय जो अभी-अभी पत्रकारिता जगत में अपनी पहचान बना रहा है। लेकिन शुरुआती दिनों में इस युवा पत्रकार द्वारा दी गई खबरों के कारण वरिष्ठ गिरीश उपाध्याय को परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। एक बार तो नवदुनिया के पूर्व संपादक  गिरीश उपाध्याय ने सोशल मीडिया और वाट्स-अप और एसएमएस के माध्यम से खंडन कर चुके हैं कि सांध्य दैनिक 6पीएम मैं जो गिरीश उपाध्याय खबर लिख रहा है वो मैं नहीं हूं। दरअसल, इसके पीछे यह कारण वरिष्ठ पत्रकार को लगातार पहुंच रहे फोन और खबर रुकवाने के लिए हो रही कोशिशों और बधाई भी हैं।

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वो माखनलाल के वीसी बनाए ही इसलिए गए हैं ताकि नए मिथक गढ़ सकें….

Mohammad Anas : ताकि लोग यह न कहें कि हमने अपनी ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़ वह सब होने दिया जिसे नहीं होना चाहिए था… इसे ऐसे ही लिख रहा हूं…  क्रांति नहीं समझिएगा क्योंकि जिस छोटी सी बात का निवेदन कर रहा हूं आगे, वह बहुत बड़ी बात नहीं है जो आपसे न हो सके. करने की कोशिश कीजिएगा..बस कोशिश… वहां बच्चों को पार्ट टाइम जॉब करने की मनाही है. कोर्स खत्म होने के बाद प्लेसमेंट नहीं है. रैगिंग हो रही है, यूनिवर्सिटी प्रशासन यूजीसी को फर्जी तौर पर कहता है कि एफआईआर हो चुकी है. नौकरियों में धांधली पिछले कई सालों से बिना रोक टोक के जारी है. कैम्पस के भीतर धार्मिक गतिविधियों से लेकर आरएसएस के पतलू, मोटू, छोटू, लम्बू सबका हैप्पी बड्डे धूमधाम से मनाया जा रहा है. वाइस चांसलर इतना चमत्कारी और विद्वान है कि उसके समकक्ष कोई दूसरा ज्ञानी ‘व्यापम के घोटालेबाज़ों’ को नहीं मिला और एक बार फिर से नौकरी बजाने और वीसी बने रहने की ज़िम्मेदारी दे दी गई.

आदरणीय वीसी के पहले कार्यकाल में उनका जिस अंदाज़ में स्वागत हुआ था, वह न तो भूले न तो उन्होंने स्वागत करने वालों को भूलने दिया. जिन सबने विरोध किया था, उनका सिर्फ इतना कहना था कि कैम्पस को बपौती समझ कर नारद मुनि को पहला पत्रकार नहीं बल्कि सहमति और सर्वांगीण विकास का सूचक बनाइये. वीसी साहब नाराज़ हो गए. आखिर होते भी क्यों नहीं. जब इनके डॉ बत्रा ने पहले जहाज से लेकर पहले टेस्ट ट्यूब बेबी तक को महाभारत में पाया जाना करार दे दिया हो तो यह कितनी सरल सी बात है की नारद साहब पहले पत्रकार भी न हो पाए. कितनी दिक्कत है जी आप लोगों को, इंसानियत भी कोई चीज़ होती है. हर अच्छे प्रतीक अपने मत और विचारधारा के अनुरूप आपने तो बना लिए अब आदरणीय कुठियाला जी नारद मुनि को पहला पत्रकार क्लेम करवा रहे हैं तो थोड़ा स्पेस बनाइये, खिसकिए.

देखिए होता क्या है, वो वीसी इसलिए ही बनाए गए हैं ताकि नए मिथक गढ़ सकें, नहीं गढ़ेंगे तो कोई संघी उन्हें कुर्सी पर बैठने के लिए तो कहेगा पर जब वे बैठेंगे तो वो पीछे से कुर्सी खींच ताली बजाएगा. कैसा अद्भुत दृश्य होगा. कितना मजाक बनेगा तब, सोचा है आपने? लेकिन बच्चों, प्यारे बच्चों. इस राजनीति में आपके वीसी साहब का मज़ाक न बने उसकी तो फ़िक्र है लेकिन खुद का मज़ाक बन जाए उसकी चिंता कौन करेगा? चिंटू या चिंटू के नाना? न, न बिल्कुल नहीं. अपनी फ़िक्र तो आपको ही करनी पड़ेगी. यूनिवर्सिटी में आपकी लाइफ सिर्फ दो या तीन साल की होती है… इस दौरान आपको उन फैसलों और व्यक्तियों की पहचान करनी ही होगी जिनसे आपका हित सुरक्षित रह सके. अब आप सब दिमाग से पैदल तो हैं नहीं की एप्पल और लावा की साउंड, पिक्चर तथा टच क्वालिटी परख न सकें. परखिए !

कोई भी विचारधारा सिर्फ आपका इस्तेमाल करती है और आप इस्तेमाल होते हैं. जहां दो साल ही रहना है वहां उसके साथ जाइए जो प्रत्यक्षरूप से आपके साथ हो. नौकरी ज़रूरी है,हमारे दौर में कुछ लोगों के लिए कभी नहीं थी इसलिए वीसी के फर्जीवाड़े और गुटबाजी के विरोध में छात्र हितों के लिए ऐसा दबाव बना था की वीसी अपने आवास पर ही कार्यालय शिफ्ट कर लिए थे. अरे डराइये, खौफ़ में रखिए. सरकारी पैसा खाने वालों को अपना दिमाग मत खाने दीजिए. इनसे जो मिले उसे समेट लीजिए. राजनीति तो होती है,होती रहेगी. एकात्म मानववाद पढ़ा जाए या फिर ये समझा जाए की बड़े अखबार और न्यूज़ चैनल में संपादक की गाली से कैसे बचना है? पूछिये अपने वीसी से. टाइम नहीं है दुनिया को. सब तेजी से भाग रहा है. एकात्म मानववाद पढ़ लेंगे या समझ लेंगे तो उसका इस्तेमाल कहाँ करेंगे ? ऐसे मानववाद को न तो बैंक एक्सेप्ट करता है और न ही एटीएम बाहर निकालता है… बच्चों, इसका पत्रकारिता से नजदीक का तो छोड़िये दूर का भी कोई रिश्ता नहीं.

माखनलाल पत्रकारिता विवि में पढ़ चुके और वर्तमान में कई मीडिया मंंचों से जुड़े सोशल एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.

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छेड़छाड़ के आरोप में माखनलाल के तीन छात्र सस्पेंड

हमेशा विवादों में रहने वाला भोपाल स्‍थित माखनलाल विवि एक बार फिर से विवादों में फंस गया है। अब यहां के मास कम्‍युनिकेशन डिपार्टमेंट की एक छात्रा को न्‍यू मीडिया विभाग के तीन छात्रों ने कैंपस में ही छेड़ दिया। छात्रा का आरोप है कि इन छात्रों ने उसे अपशब्‍द कहे और छेड़खानी की। इस छात्रा ने विवि के कुलपति बीके कुठियाला से इसकी शिकायत की। इसके बाद तीनों आरोपी छात्रों को सस्‍पेंड कर दिया गया।

यह कोई पहला मामला नहीं है, जब यह विवि विवादों में फंसा हो। कुछ दिनों पहले यहां एक छात्र के साथ रैगिंग भी हो चुकी है, जिसे ठंडे बस्‍ते में डाला जा चुका है। खुद कुलपति और कई प्रोफेसरों की नियुक्ति भी यहां विवादों में रह चुकी है। कुलपति पर आरोप लगते आए हैं कि उन्‍हें भगवे खेमे के अपने चेहतों को यहां नियुक्‍त किया हुआ है। यूजीसी के नियमों को ताक पर रखकर यहां नियुक्‍ितयां होती आई हैं।

सरकार बदलने के साथ विवि का रंग ढंग भी बदल जाता है। कांग्रेस के शासनकाल में यहां चुन चुन कर कांग्रेसी विचारधारा को सपोर्ट करने वालों की नियुक्तियां होती आई हैं। लेकिन हद Shivraj Singh Chouhan के शासनकाल में हो गई। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान संघ के दबाव के कारण चाहकर भी कुलपति समेत कई आरोपी प्रोफसरों को चेंज नहीं कर पा रहे हैं।

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