बेशर्म डीडी न्यूज़ ने अटलजी के मरने की खबर चलाई, अकल के अंधे इंडिया टीवी ने भी नकल किया

अब इंडिया टीवी के एंकर डीडी न्यूज़ पर ठीकरा फोड़ने में जुटे… ब्रेकिंग न्यूज, एक्सक्लूसिव खबर, बड़ी खबर जैसे तमगे लगाकर अक्सर दुनिया भर में बदनाम रही और आलोचना का शिकार रही भारतीय मीडिया की फेहरिस्त में सरकारी चैनल DD NEWS भी आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर बिना पुष्ट किए ही बड़े-बड़े टेक्स्ट और बिग ब्रेकिंग बैनर लगा कर चला दिया। Continue reading

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इलाहाबाद में डीडी न्यूज के नाम पर कार्यक्रम में कई लोग पहुंच जाते थे, निदेशक ने जारी किया आदेश

इलाहाबाद : पिछले कुछ दिनों से कुछ लोग खुद को गलत तरीके से डीडी न्यूज़ का रिपोर्टर बताकर समूचे इलाहाबाद में तमाम सरकारी व निजी कार्यक्रमों में कवरेज के लिए पहुंच जाते थे। एक ही जगह दूरदर्शन / डीडी न्यूज के नाम पर कई लोगों के पहुँचने से आयोजकों के सामने न सिर्फ कन्फ्यूजन क्रिएट होता था, बल्कि इससे सरकारी टीवी चैनल की छवि भी धूमिल होती थी। डीडी न्यूज के लिए राजीव खरे व राजकुमार रॉकी को शहर इलाहाबाद के लिए नियुक्त किया गया है। बाकी दो लोगों (उमाशंकर गुप्ता और प्रवीण मिश्रा ) को नैनी तथा फाफामऊ क्षेत्र दिया गया है।

दूरदर्शन केंद्र लखनऊ के निदेशक पंकज पांडेय जी ने 23 अक्टूबर को जारी अपने आदेश में पुनः यह साफ कर दिया है कि शहर इलाहाबाद में कवरेज के लिए सिर्फ दो लोग राजीव खरे व राजकुमार (रॉकी) ही अधिकृत हैं। कोई भी अन्य नहीं। इसके अलावा प्रवीण मिश्र को सिर्फ फाफामऊ क्षेत्र व उमा शंकर को नैनी क्षेत्र के लिए अधिकृत किया गया है। यह दोनों सिर्फ अपने इन्ही क्षेत्र में ही रिपोर्टिंग कर सकते हैं। राजीव खरे व राजकुमार फाफामऊ और नैनी क्षेत्र को छोड़ शहर इलाहाबाद व बाकी बचे स्थानों पर कवरेज के लिए अधिकृत हैं।

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DD News recruitment fixed!

Prasar Bharati has shown an amazing capacity to remain in news rather than producing news. After massive blame game for delay in launch of its prestigious DD Kisan channel followed by recent controversy over Rs.6.5 crore endorsement fee to Amitabh Bachchan and fixing in recruitment process it is now the turn of DD News to attract eyeballs over recruitment issues.

DD News has undertaken a speedy recruitment action to hire anchor correspondents ranging from Rs.120000 to Rs.60000. Interestingly the advertisement for the process was published in January this year. But after that no forward movement happened on this. But suddenly after sleeping for almost five months the channel woke up and conducted written exams followed by screen tests at a whirlwind speed.

Insiders say that the reason for this speed is not because of any urgency to refurbish the manpower but a desire to fill these seats with some preferred candidates. In the category for Senior Anchor-Correspondent, which carries a compensation package of Rs.120000 per month the list has already been filled with at least three names Divya Vaidyanathan, Palak Sharma and Smita Mishra are being pushed through. The post has four vacancies.

Vaidyanathan’s husband I believed to be a close confidant of Digvijay Singh who despite being out of the power corridors seems to wield considerable influence in ministry of Information & Broadcasting. Similarly Palak Sharma’s father has been a congress functionary and editor of Congress party magazine. However the third name is a departure from the first two. Smita Mishra has been covering BJP as her primary beat. In fact Smita was invited to the DD news studios as a guest the very next day after being short listed for screen test.

Meanwhile the second category of Anchor Correspondent has two names prominently being promoted Teena Kumari Jha and Smriti Rastogi. It is believed that their name is being promoted through a mutual friend of Prasar Bharati Chairman A. Surya Prakash. The mutual contact Girish Nikam has been a family friend of Prakash and his wife Pushpa. Nikam also belongs to Karnataka but has been in Delhi now for some time.

Currently he is working at Rajya Sabha TV and is believed to be a closet person of RSTV CEO Gurdeep Singh Sappal. Looking at the developments it seems that recruitment at DD News are being done more on the basis of personal contact than professional capabilities or requirements of the channel.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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डीडी न्यूज में अंग्रेजी पत्रकारों और मीडियाकर्मियों के लिए वैकेंसी, अप्लाई करें

डीडी न्यूज में अंग्रेजी मीडियाकर्मियों के लिए नौकरी है. प्रसार भारती की तरफ से डीडी न्यूज में विभिन्न पदों के लिए भर्ती की घोषणा की गई है. इस बारे में विधिवत अप्लीकेशन प्रारूप और पदों-योग्यताओं का विवरण जारी किया गया है. आवेदन करने की आखिरी तारीख और समय 9 मार्च शाम पांच बजे तक है.

कुल 20 पद हैं जो इस प्रकार हैं-  सीनियर एंकर कम करेस्पोंडेंट्स (अंग्रेजी) / आउटपुट कोआर्डिनेटर्स, एंकर कम करेस्पोंडेंट्स (अंग्रेजी), करेस्पोंडेंट्स (अंग्रेजी),  डिप्टी असाइमेंट एडिटर, सीनियर प्रोमो मोशन ग्राफिक्स आर्टिस्ट, सीनियर प्रोमो एडिटर और टेक्स्ट मॉनीटर (द्विभाषी).

आवेदन पत्र और अन्य जानकारी पाने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर पूरा विज्ञापन डाउनलोड कर सकते हैं… DD News Job Detail

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दूरदर्शन की नजर में अब भी प्रधानमंत्री के पद पर मनमोहन सिंह हैं (देखें वीडियो)

दूरदर्शन न्यूज वाले सुधरने का नाम नहीं ले रहे. अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारतीय दौरे के दौरान लाइव प्रसारण में दूरदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बोल दिया गया. यह काम किसी और ने नहीं बल्कि यहां के वरिष्ठ एंकर अशोक श्रीवास्तव ने किया. सोशल मीडिया पर डीडी न्यूज की इस गलती का वीडियो वायरल हो चुका है.

डीडी न्यूज में लगातार गल्तियां हो रही हैं लेकिन कोई इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है. कुछेक मामलों में कार्रवाई तो हुई लेकिन अंततः नतीजा सिफर रहा. आप भी देखिए कि एंकर महोदय बोलते बोलते प्रधानमंत्री मनमोहन बोल गए. संबंधित वीडियो का लिंक यूं है….

https://www.youtube.com/watch?v=fYPu6H4TyyU


इन ताजातरीन वीडियोज को भी देख सकते हैं….

प्रिंटिंग प्रेस : मशीन और इंसान के काम की शुद्धता में फर्क बताइए
https://www.youtube.com/watch?v=bmcFPDnPA44

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डीएम साब सोते रहे, मंत्री जी भाषण देते रहे
https://www.youtube.com/watch?v=QRVxOXWp__4

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जी संगम के प्रतिनिधि ने हत्यारोपी को ‘साहब’ कहा
https://www.youtube.com/watch?v=OKwtz3bqhK0

 

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डीडी न्यूज वालों की जय हो, अबकी मोदी बंदर कथा

डीडी न्यूज वाले लगातार गलती पर गलती करते जा रहे हैं. ताजा मामला भी ट्वीट से जुड़ा है. डीडी न्यूज की तरफ से ट्वीट किया गया- “A man dressed as Santa Claus feeds monkeys ahead of Christmas”. लेकिन इस कैप्शन के साथ जो तस्वीर लगाई गई उसमें नरेंद्र मोदी बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं और बैठक में Amit Shah, Arun Jaitley, Sushma Swaraj और Rajnath Singh हैं. लोग सोच में पड़ गए कि आखिर इस तस्वीर में क्या मोदी सांता हैं और बंदर बाकी लोग?

खैर, डीडी न्यूज वालों को गलती का एहसास हुआ तो तुरंत इस ट्वीट को डिलीट मार दिया. साथ ही एक खेद प्रकाश भी प्रकाशित किया, कुछ यूं:  “An unrelated picture was inadverently placed by side of the China zoo story. We have removed the tweet.”

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डीडी न्यूज वालों का सामान्य ज्ञान देखिए, राजनाथ सिंह को भाजपा अध्यक्ष बता दिया

दूरदर्शन वाले सुधरेंगे नहीं. डीडी न्यूज की तरफ से झारखंड इलेक्शन को लेकर जो ट्वीट किया गया है उसमें राजनाथ सिंह को भाजपा अध्यक्ष बताया गया है. ट्विटर का स्क्रीनशाट देखिए.

अमित शाह भाजपा अध्यक्ष हैं और राजनाथ सिंह गृहमंत्री, इतनी सामान्य सी बात अगर डीडी न्यूज के बंदों को नहीं पता तो उनकी योग्यता पर क्या कहना.

 

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‘Smarananjali’- A tribute to martyrs of the 1965 war to be telecast on Doordarshan National

New Delhi : Doordarshan Delhi recently held a programme in the form of a lyrical tribute by Artists to the martyrs in the presence of their families and the Minister of Defence and the Chiefs of Army, Navy and Air force and Chiefs of Paramilitary forces. The programme named ‘Smarananjali’ – A musical tribute to Martyrs by Doordarshan on the occasion of 50th of the 1965 War is set to be telecast on DD National on 7th December 2014 at 9 am.

It will feature renowned artists like violin maestro L. Subramanium and renowned singer Kavita Krishnamurthy, Mr. Pankaj Udhas and Mr. Suresh Wadkar. The musical tribute will be interlaced with specially choreographed dance performances of memorable patriotic songs by Ms. Manjula Parmesh and Group. An additional attraction is the on the spot painting by renowned painter, B.S. Verma and a dance by soldiers from the Madras Engineering Group(MEG) who will  perform  to the song “Ma Tujhe Salaam”.

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गोवा डीडी एंकराइन कांड : कान खोलकर सुनो मैडम, माथा गरम मत करो

गोवा में आयोजित फिल्म फेस्टीवल की ‘लाइव-रिपोर्टिंग-एंकरिंग’ में ‘गवर्नर ऑफ इंडिया’ अलाप कर दुनिया भर में डीडी की दुर्गति करा चुकी मैडम सामने आ गयी  हैं। माफी मांगने से ज्यादा, हवावाजी और ज्ञान बांटने के लिए। मैडम का नाम आयनाह पाहूजा है (इस लेख में अगर मोहतरमा का नाम अंग्रेजी से हिंदी में लिखने पर कुछ त्रुटि हो, तो मैडम जी कहीं इस मुद्दे पर भी जांच के लिए तुम मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के पास मत चली जाना, जैसे अपनी एतिहासिक गोवा एंकरिंग का वीडियो यू-ट्यूब से हटवाने की कोशिशों में तुमने मुंबई पुलिस को पसीना ला दिया है)। मैडम का नाम भी उन्हीं के एक वीडियो से पता चला है। मैडम को भी उसी यू-ट्यूब का सहारा लेना पड़ा है, जिस पर उनका गोवा में की गई एंकरिंग “गवर्नर ऑफ इंडिया” वाला वीडियो मौजूद है।

मतलब मैडम जी अपनी कारस्तानी का वीडियो हटवाने के लिए तो मुंबई पुलिस की क्राइम-ब्रांच के पास जा पहुंची। इस दलील के साथ कि यू-ट्यूब पर जब तक उनकी एतिहासिक गोवा एंकरिंग का वीडियो मौजूद रहेगा, डीडी न्यूज में भर्ती करने वालों और उसके कर्ता-धर्ताओं की नाक में सोशल-मीडिया नकेल कसे रहेगा। साथ ही मैडम को भी इस वीडियो से काफी दिक्कत महसूस होती रहेगी। यहां उल्लेखनीय है कि, अब मैडम ने अपनी सफाई के लिए उसी यू-ट्यूब का इस्तेमाल किया है, जिससे वे अपनी और डीडी की फजीहत वाला वीडियो नेस्तनाबूद कराने पर तुली हुई थीं। अरे क्यों मैडम ऐसा क्यों? हम तो आपको तब ईमान मजबूत जिगर वाला मानते, जब आप यू-ट्यूब से कहतीं कि-

‘गोवा से आपकी गवर्नर ऑफ इंडिया वाली एतिहासिक लाइव एंकरिंग का वीडियो भी यू-ट्यूब पर पड़ा दुनिया की नजरों में ‘बजबजाते’ रहने के लिए मौजूद रखा जाये और उसके बाद उठे तूफान-तमाशे पर आपने जो सफाई दी है या अपनी अज्ञानता के बाद फिर उसके ऊपर जो “ज्ञान” बांटा है, वो वीडियो भी यू-ट्यूब पर मौजूद रहे।’ आयनाह पाहूजा जी के सफाई वाले वीडियो से साफ जाहिर है कि वे, यू-ट्यूब पर वही वीडियो देखने की तमन्ना रखती हैं, जिसमें डीडी के काले इतिहास के लिए उनके द्वारा गोवा में की गई लापरवाहीपूर्ण एतिहासिक एंकरिंग को लेकर  ‘सफाई’ दी गयी है। न कि वो वीडियो जिसमें उन्होंने भारतीय पत्रकारिता की आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मनहूस उदाहरण का अध्याय जोड़ा है।

मोहतरमा आप समाज से न्याय चाहती हो….तो तुम्हें भी तो समाज के साथ न्याय करना चाहिए। गोवा में अपनी तथाकथित काबिल लाइव एंकरिंग वाला वीडियो भी यू-ट्यूब पर मौजूद रखो और इस थू-थू कराने वाले वीडियो के बदले में जो तुमने अपनी साफाई दी है, वो वीडियो भी यू-ट्यूब पर मौजूद रखो। तब तो जमाना भी जानेगा कि, हां मैडम जी वाकई बड़ी ज्ञानी और ईमानदार हैं अपने और समाज के प्रति।

मैडम अपनी सफाई वाले वीडियो में आगे फरमाती हैं, कि- ‘मेरा मजाक उड़ा लो आगे ऐसा किसी और के साथ मत करना’। इस पर मोहतरमा बस इतना सुन लो कि तुमसे अपने किये का खामियाजा को अभी तक भुगता नहीं जा रहा है। दूसरे के साथ या किसी और के साथ ऐसा न करें, इसकी नसीहत दे रही हो। पहले अपना हाल तो दुरुस्त कर लो। फिर सब-कुछ अगर सही-सलामत रहे तो उसके बाद बाकियों की ‘नंबरदारी/ झंडाबरदारी’ भी कर लेना। अभी तो तुमसे अपना किया हुआ ही नहीं संभल रहा है। इस पर तुम बाकियों के साथ वैसा कुछ न हो जैसा तुम्हारे साथ हुआ, नसीहत भी भांज रही हो। अरे पहले अपना देखो। बाकियों का बाकियों पे छोड़ दो। ज्ञान गुरु ही बांट सकता है। चेला नहीं। पहले इस लायक तो बना लो इस जिंदगी में खुद को कि लोग तुम्हारे ज्ञान को पचायें। गोवा एंकरिंग की तरह तुम्हारे ज्ञान का “बैंड” न बजायें।

अब आखिर में यह भी जेहन में दर्ज कर लो, कि गोवा में तुम्हारी कम-अक्ली और लाइव एंकरिंग के चलते डीडी और तुम्हारी काबिलियत का जितना भी सोशल मीडिया में ‘लेखा-जोखा’ दर्ज हुआ है, उसके लिए न तो इयरफोन की खराबी, न तुम्हारा प्रोग्राम प्रोड्यूसर और न ही कोई और जिम्मेदार था। इस सबकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर तुम्हारी, तुम्हारी अनुभवहीनता और डीडी के उन उस्तादों की थी, जिन्होंने आंख मूंदकर तुम्हें गोवा फेस्टीवल में ‘गवर्नर ऑफ इंडिया’ जैसी शर्मनाक एंकरिंग के लिए ले जाकर ‘जंग-ए-लाइव-एंकरिंग’ में उतार दिया। लाइव एंकरिंग का तुम्हें अनुभवी पत्रकार बनाने की उम्मीद में।

लेखक संजीव चौहान वरिष्ठ खोजी पत्रकार हैं.

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डीडी न्यूज सिर्फ हिंदी खबरों का चैनल होगा, अंग्रेजी की होगी छुट्टी!

खबर आ रही है कि डीडी न्यूज से अंग्रेजी की छुट्टी होगी. यह चैनल सिर्फ हिंदी खबरें दिखाएगा. डीडी न्यूज को चौबीसों घंटे का हिंदी न्यूज चैनल बनाकर रीलांच करने की तैयारी चल रही है. बाद में एक नया चैनल अंग्रेजी खबरों का लांच किया जाएगा. अभी डीडी न्यूज में हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में खबरें आती हैं.

दो भाषाओं का चैनल होने के कारण इसका कोई अपना दर्शक वर्ग तैयार नहीं हो पा रहा है. दो भाषाओं के दर्शकों को रिझाने के चक्कर में हाथ कोई भी दर्शक नहीं आ रहा है. इसी कारण डीडी न्यूज को हिंदी दर्शकों के लिए बनाने की तैयारी की जा रही है.

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डीडी के मठाधीशों, आने वाली पीढ़ियों की जड़ों में मट्ठा मत डालो

सोशल मीडिया से ही सुना-पढ़ा है कि गोवा फिल्म फेस्टीवल में डीडी नेशनल का बैंड बजवा चुकी महिला एंकराइन को लेकर संस्थान में ही कई गुट हो गये हैं। प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सिरकार इस सवाल के जवाब को लेकर व्याकुल हैं, कि इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम की कवरेज के लिए इन भद्र और अनुभवहीन महिला एंकर को गोवा भेजा ही क्यों गया? इस सवाल की पड़ताल के लिए प्रसार भारती ने अतिरिक्त महानिदेशक स्तर के आला-अफसर को दिल्ली से मुंबई भेजा है। साथ ही प्रसार भारती ने इस सब कलेश को ‘सिस्टम फेल्योर’ मान लिया है।

सुना है कि, डीडी की मट्टी पलीत कराने वाली आरोपी एंकराइन सदमे में हैं। मेरी समझ में नहीं आता, कि गल्ती मानने के बजाये और एंकरिंग से अपने पांव खुद ही पीछे खींचने के बजाये, मैडम सदमे में क्यों चली गयी हैं? दुनिया भर में डीडी की थू-थू कराने वाली इन अनुभवहीन मैडम के परिवार ने मुंबई पुलिस की शरण ली है। परिवार चाहता है, कि मैडम ने जो कुछ किया है। मैडम के कारनामे का जो वीडियो दुनिया में फैला है। उस वीडियो को यू-ट्यूब से गायब करा दिया जाये। ताकि न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। मतलब जब वीडियो ही गायब हो जायेगा, तो फिर लल्ली के कारनामे पर जमाना हंस ही कैसे पायेगा? बहुत सही। क्या रास्ता अख्तियार किया है परिवार और डीडी की मट्टी पलीत कराने वाली महिला एंकराइन ने। अरे अगर थीड़ी सी भी समझ है, तो मैडम को ऐसी थू-थू-मय पत्रकारिता और इतनी घटिया स्तर की एंकरिंग को लात मार देनी चाहिए। यह तो कुछ कर नहीं पायीं। परिवार उतर आया है मैडम के कारनामे को ‘ज़मींदोज’ कराने पर। इस रणनीति के तहत कि पुलिस से तुर्रेबाजी कराके वीडियो हटवा दो…और जो कुछ जमाने भर के सामने आ चुका है हमेशा-हमेशा के लिए उसे सुपुर्द-ए-खाक करा दो।

वाह बहुत खूब। क्या शानदार और निर्लज्जता का रास्ता अख्तियार कर रही हैं मोहतरमा और उनके शुभचिंतक परिवारीजन। इतना सब डीडी का मजाक उड़वाने के बाद परिवार का यह तुर्रा कि, मैडम इसलिए बीमार हो गयी हैं, क्योंकि उनका वो वीडियो यू-ट्यूब पर है, जिसमें उनकी कथित काबिलियत का सबसे बड़ा नमूना क़ैद हो चुका है (हकीकत में असलियत)। अरे मैडम और मैडम के परिवार वालो तुम चाहते हो कि, तुम्हारी और तुम्हारी लल्ली, और डीडी में बैठे तुम्हारी लल्ली जैसे नाकाबिलों के खैर-ख्वाहों की खुशी की खातिर तमाम जमाना अपनी आंखों को गरम सूजों से फोड़ ले। ऊं हूं….न कतई नहीं। तुम्हारी यह डिमांड बहुत गलत है। तुम अपनी खुशी के लिए तो मुंबई पुलिस से सबको गलत साबित कराने पर तुली बैठी हो। सबकी आंखों और जुबां बंद कराने की तमन्ना संजो रही/रहे हो। जरा एंकराइन (अधकचरी एंकराइन) मैडम और उनके शुभ-चिंतको यह तो सोचो और देखो ठंडे-संतुलित दिमाग से, कि डीडी के इतिहास में किस हद तक का ‘काला-पन्ना’ दर्ज करा बैठी हैं, यह अनुभवहीन और अल्पज्ञानी एंकराइन जी।

अब आओ डीडी के मुंबई प्रमुख कोई मुकेश शर्मा से भी दो-टूक बात कर लें। इस ‘एंकर-नामा’ या ‘एंकरिंग-एंकराइन-कांड’ के लिए सीधे तौर पर जबाबदेही इन्ही शर्मा जी की बनती है। वजह, श्रीमान जी मुंबई डीडी के सिरमौर मतलब सर्वे-सर्वा यह शर्मा साहब ही हैं। डीडी में कैसे-कैसे ‘नव-रत्न’ तराश कर ‘फिट’ किये या कराये जाते हैं…या अब तक किये जाते रहे हैं…इसका नमूना मैडम एंकराइन के ‘श्रीमुख’ से निकली वो ‘एंकर-धारा’ है, जो किसी भी पत्रकार/ मीडिया से जुड़े इंसान के दिमाग को पिघलाकर उसमें ‘मट्ठे’ का सा असर कर सकती है। मैडम की तरफदारी में गलतियों को घोटकर पीने के लिए मैदान में उतरे शर्मा जी फरमा रहे हैं कि, मोहतरमा की एंकरिंग के दौरान तकनीकी परेशानियां थीं। मसलन…..

1-मैडम का ‘इयरफोन’ सुचारु रुप से काम नहीं कर रहा था।

2-सरकारी चैनल में सरकारी स्तर का ‘धक्कम-धक्का’ इयरफोन बीमार होने के चलते एंकराइन-मैडम शो-प्रोड्यूसर से निर्देश नहीं ले पा रही थीं।

3-गोवा में फिल्म फेस्टीवल की भीड़ देखकर अल्पज्ञानी एंकर मैम ‘नर्वस’ हो गयी थीं।

इन अज्ञानी (अ-प्रैक्टिशनर) एंकराइन की बेजा ‘कलाकारी’ के चलती जिस डीडी नेशनल दुनिया भर में अपनी ऐसी-तैसी करानी पड़ गयी, उसके मुंबई प्रमुख शर्मा जी अंत में फरमाते हैं कि (फिजूल में चर्चित हुईं) महिला रिपोर्टर की रिपोर्टिंग स्तरीय नहीं थी।

सुनो शर्मा जी अब आप मेरी सुनो। आप खुद ही मान रहे हैं कि, मैडम एंकराईन ‘इयरफोन’ पर ‘शो-प्रोड्यूसर’ से ज्ञान ‘गटक’ कर (लेकर, ग्रहण करके) आगे (डीडी के दर्शकों को) लाइव एंकरिंग में ज्ञान ‘बघारकर’ खुद को काबिल जताने में जुटी थीं। मतलब एंकरिंग और एंकराईन दोनो की ज़मीन “बैसाखियों” (शो-प्रोड्यूसर) पर चिपकी/ लिपटी पड़ी थी। मुंबई डीडी के शर्मा जी ‘प्रमुख’ आप होंगे, लेकिन बताना चाहूंगा, कि एक अच्छे एंकर/ रिपोर्टर के लिए लाइव के दौरान खुद ही अपने मुंह, हासिल अनुभव और ज्ञान से दर्शकों को ज्ञान देना होता है। इसमें शो-प्रोड्यूसर कुछ नहीं करता। मैडम ने अपने अल्पज्ञान के चलते लाइव में ही ‘गवर्नर ऑफ इंडिया’ धर पेला। इसमें इयरफोन, स्वंय आप, मैं, शो-प्रोड्यूसर या कोई और (जो मैडम के अलावा आपकी नजर में जिम्मेदार हो) जिम्मेदार नहीं हो सकता।

डीडी के मुंबई प्रमुख मुकेश शर्मा जी के मतानुसार- समारोह की भीड़ देखकर मोहतरमा ‘नर्वस’ हो गयीं। अब इसका जबाब भी आपको ही देना होगा, कि नर्वस होने वाली इतनी कमजोर कर्मचारी को लाइव एंकरिंग के लिए क्यों, आपके किस चहेते अधीनस्थ ने गोवा में जबरिया लाइव कराके डीडी नेशनल की इस कदर ‘बैंड’ बजवाने के लिए भेजा। और आपने अब तक उसका क्या ‘हिसाब-किताब’ फाइनल किया? अपनी पूरी ‘सफाई-रामलीला’ के अंत में शर्मा जी मोहतरमा की रिपोर्टिंग को स्तरीय नहीं मानते हैं। तो शर्मा जी अब आप बताईये कि, इसमें सोशल-मीडिया यह हमारे जैसे ‘कम-अक्ल’ दो-चार लाइनें आपकी और आपकी एंकर मैडम की काबिलियत पर लिख-धरने वाले कहां और क्यों जिम्मेदार हैं? शर्मा जी अपना ‘गिरहवान’ झांकिये, सब-कुछ मसाला तुम्हें वहीं दिखाई दे जायेगा। जरुरत है तो बस सिर्फ-और-सिर्फ आपको, मैडम को, मैडम को परिवार वालों को एक अदद “ईमान” की नजर से देखने भर की। मेरी ईमान भरी नज़र में तो इस पूरे तमाशे के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार स्वंय आप और आपके वे तमाम अधीनस्थ (जी-हजूरी करने वाले) हैं, जो आपकी हां-में-हां मिलाकर, आपकी तरह ही इस तरह की ‘गुस्ताखियों’ को ‘कफन-दफन’ करके इस तरह के अल्पज्ञानियों को सजा देने के बजाये उन्हें उल्टे बचाकर उनका भविष्य ‘खाई-खंदकों’ में दबाने के रास्ते तलाशते हैं।

बताईये भला..जिन मैडम की एंकरिंग का वीडियो दुनिया में ‘गदर’ मचाये हुए है। जो वीडियो और मैडम, मीडिया के लिए ‘माथा-पच्ची’ का कारण बने हुए हैं। जिन मैडम ने इतना बड़ा ‘बलंडर (ब्लंडर)’ मीडिया और अपने देश के सबसे सम्मानित समझे जाने वाले ‘डीडी नेशनल चैनल’ की झोली में जबरिया ही धर-फेंका हो, उन मैडम के इस सब करे-धरे पर ‘सही-बयानी’ करने पर भी खुद मैडम और उनका परिवार अब हमारी (पाठक-लेखकों) आंखों पर जबरिया काली पट्टी और मुंह पर सिलाई लगवाने की जुगत मे है, मुंबई पुलिस से। क्या यह उससे भी ज्यादा घातक साबित नहीं होगा, जितना मैडम गोवा फिल्म फेस्टीवल में “गवर्नर ऑफ इंडिया” परोस और पेश करके वापिस मुंबई लौट आई हैं!

लेखक संजीव चौहान वरिष्ठ खोजी पत्रकार हैं. उनसे संपर्क 09811118895 के जरिए किया जा सकता है.

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डीडी नेशनल की एंकराइन का फूहड़पन छोड़ो, इसे भर्ती करने वाले की तलाश करो

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दूरदर्शन की इस रिपोर्टर का लाइव कवरेज देखिए, हंसे बिना नहीं रह पाएंगे

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DD National gains big in the week 45 of TAM ratings

New Delhi : Doordarshan National – ‘Desh ka apna Channel’, has had its biggest gain of 67 TVM in the week-45 ending on 8th November, as per the latest report of TAM. While the other major GEC channels have shed weight in terms of their viewership, Doordarshan National seems to be gaining ground propelled by their massive campaign of channel relaunch.

As per the TAM data, DD National garnered a viewership of 218 Million signifying a bumper 40% increase compared to week-44, with more than 90% of increase coming from C&S homes. The viewership of mid-prime time slot also seems to be rising steadily with an increase of about 12%. Among the programs in this slot, Anudamini showed maximum gain in terms of viewership by 17%, followed by Amrita with 15% gain.

Some of the other top programs which have shown a rise in TVM are Bharat ki Shaan – Let’s Dance, Pavitra Bandhan, Rangoli, Samman ek Adhikar, Vande Matram & Sohni Mahiwal. With a slew of new programs in the prime-time slot starting today and a brand new look, Doordarshan National will look to gain higher on TAM charts in the coming weeks.

Press Release

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डीडी न्यूज के लिए अच्छा मौका है क्योंकि निजी चैनलों से लोग ऊब चुके हैं : सूर्य प्रकाश

प्रसार भारती के नए अध्यक्ष ए. सूर्य प्रकाश ने कहा है कि लोग निजी चैनलों से ऊब चुके हैं। ऐसे में डीडी न्यूज के पास मौका है कि वह खुद को उच्च श्रेणी के चैनल के रूप में पेश कर दर्शकों को अपनी ओर खींच सके। 28 अक्टूबर को प्रसार भारती बोर्ड के अध्यक्ष नियुक्त किए गए सूर्य प्रकाश ने कहा, संघ प्रमुख मोहन भागवत के विजदशमी भाषण का दूरदर्शन पर सजीव प्रसारण बिल्कुल सही था क्योंकि उनका यह भाषण खबर की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा, सालों पहले जब निजी समाचार चैनल अस्तित्व में आए तो कई लोगों ने डीडी न्यूज के भविष्य के बारे में सवाल उठाया, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।

उन्होंने कहा, ‘आज हम उस दौर में हैं, जब लोग निजी समाचार चैनलों के प्राइम टाइम की सामग्री और इस पर होने वाली तूतू-मैं-मैं से ऊब चुके हैं। मेरा मानना है कि लोग समाचार चैनलों पर खबरें चाहते हैं। वे शोर शराबा देखने नहीं आते। इसलिए अगर हम डीडी न्यूज को उच्च स्तरीय चैनल बनाते हैं तो हम कई निजी चैनलों से दर्शकों को अपनी ओर खींच सकते हैं।’

हाल के दिनों में डीडी न्यूज के एंकरों से हुई गलतियों की बाबत पूछे जाने पर उनका कहना था कि खबर के प्रसारण में चूक नहीं होनी चाहिए। चैनल के बारे में अपने विचार साझा करते हुए सूर्य प्रकाश ने कहा कि उनकी राय में डीडी न्यूज को द्विभाषी चैनल नहीं होना चाहिए। डीडी न्यूज ¨हदी और डीडी न्यूज अंग्रेजी दो अलग चैनल होने चाहिए। यह बहुत जरूरी है। इस बारे में वह प्रसार भारती बोर्ड के सदस्यों और इसके अधिकारियों से बात करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में प्रसार भारती भर्ती बोर्ड भी गठित किया होगा।

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मोदी ने बढ़ा दिया दूरदर्शन का कद

: पांच महीनों में दूरदर्शन की बढ़ी पूछ : टीवी दर्शक सबसे ज्यादा कौन सा चैनल देखते हैं? इसका खुलासा करने वाले टीआरपी यानी टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट चाहे जो कहते हों लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद सत्ता के गलियारों में अब देश के सार्वजनिक टीवी चैनल दूरदर्शन की बढ़ती धमक साफ देखने को मिल रही है। सरकार ,संचालन के केंद्र नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में दूरदर्शन की पूछ पिछले पांच महीनों में तेजी से बढ़ी है। मंत्री और अफसरों से लेकर देशी-विदेशी राजनयिक और कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल सरकार के हरेक कदम की जानकारी के लिए दूरदर्शन के समाचार चैनल पर खुद को अपडेट रख रहे हैं।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भी केबल ऑपरेटरों को दूरदर्शन के सभी चैनल दिखाने के लिए कड़े निर्देश दिए और कई ऑपरेटरों के खिलाफ डीडी न्यूज नहीं दिखाने के लिए कड़ी कार्रवाई भी की है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने पिछले महीने ही सभी मंत्रालयों के सचिवों को चिट्ठी लिखकर अपने मंत्रालय की गतिविधियों की जानकारी सबसे पहले दूरदर्शन को देने की अपील की थी। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मंत्री और अफसरों ने अपनी नजरें दूरदर्शन के डीडी न्यूज पर लगा दी है।

मानव संसाधन मंत्रालय के दो निदेशकों ने तो मंत्रालय के प्रशासकीय विभाग से अपने कमरों में टीवी रखने की गुजारिश लिखकर की है। इनमें से एक निदेशक ने बताया है कि बदले माहौल में टीवी पर दूरदर्शन देखना बहुत जरूरी हो गया है। डीडी न्यूज की हैसियत तब और बढ़ गई, जब प्रधानमंत्री अपने विदेश दौरों में सिर्फ डीडी न्यूज की मीडिया टीम को प्रसारण के लिए ले जाने का फैसला किया। अमेरिका, जापान, भूटान, नेपाल समेत तमाम विदेशी यात्राओं की जानकारी सबसे पहले डीडी न्यूज ने दी। फिर बाकी निजी चैनलों को डीडी न्यूज के जरिये सूचना हाथ लगी।

ऐसे ही स्वच्छ भारत अभियान, शिक्षक दिवस और राष्ट्रीय एकता दिवस की प्रधानमंत्री की पहल का सबसे पहले आधिकारिक प्रसारण का अधिकार डीडी न्यूज को मिला। उसके बाद डीडी के जरिये दूसरे चैनलों को यह दिखाने का मौका मिला। सरकार के 100 दिनों के मौके पर लगभग सभी मंत्रालयों ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी उपलब्धियां बताईं। यही एक मौका था कि सभी मंत्री बाकी मीडिया से रू-ब-रू हुए। मगर ज्यादातर मंत्री डीडी न्यूज को बुलाकर ही अपने मंत्रालय की जानकारी देना ठीक समझ रहे हैं। सरकार की सूचना और प्रचार की जिम्मेदारी निभाने वाला प्रेस सूचना ब्यूरो भी सबसे पहले दूरदर्शन और आकाशवाणी को ही जानकारी दे रहा है।

विदेश दौरों में सिर्फ डीडी न्यूज की टीम ले जाने के मोदी के फैसले से दूरदर्शन की हैसियत काफी बढ़ गई। अमेरिका, जापान, भूटान, नेपाल समेत तमाम विदेशी यात्राओं की जानकारी सबसे पहले डीडी न्यूज ने दी। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने केबल ऑपरेटरों को दूरदर्शन के सभी चैनल दिखाने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। कई ऑपरेटरों के खिलाफ डीडी न्यूज नहीं दिखाने के लिए कड़ी कार्रवाई की गई है।

अमर उजाला, दिल्ली में प्रकाशित धीरज कनोजिया की स्टोरी.

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Dangerous Hindutva portents : Doordarshan as RSS’s publicity agent

By Praful Bidwai

Hindutva crossed another red line in Indian politics on October 3 when the state-owned Doordarshan news channel made a live broadcast, for the first time ever, of the Vijayadashami (Dussehra) address of a Rashtriya Swyamsevak Sangh chief.

The speech, ritually delivered annually from Nagpur, is meant to convey to swayamsevaks the thinking of the Sangh on current issues and define the RSS’s own relationship with the Bharatiya Janata Party. It is thus an internal matter of the Sangh Parivar, patently lacking any value or relevance for the general public.

Yet, DD rationalised Mohan Bhagwat’s broadcast on the ground that it is “newsworthy”. So did information minister Prakash Javadekar-while claiming that his ministry didn’t order the broadcast. This is a red herring. DD and All-India Radio, like the Prasar Bharati Corporation under which they work, are nominally autonomous of the government, but their directors general are appointed by the ministry without consulting Prasar Bharati, and are presumably answerable to the government.

By this criterion of “newsworthiness”, DD should broadcast/display everything from fashion shows, to standup comedies mocking particular religions, to “honour” killings, but rightly doesn’t.

The crucial issue is the Modi government’s culpability in promoting, and giving publicity to, an organisation that pushes a sectarian Right-wing agenda, and routinely deploys hate speech and inflammatory statements. Doordarshan simply has no business to provide a platform to such an organisation. Doing so with the taxpayer’s money through a live broadcast, over the contents of which DD has no control, makes the offence even more unforgivable.

Bhagwat in his address unleashed a vicious attack on Muslims, and used old, shopworn clichés about a “serious upsurge” in “jehadi activities” in Kerala and Tamil Nadu, and a growing “population imbalance” in West Bengal and Assam caused by “the illegal migration of a particular community” from across the border, all leading to a grave threat to “national security”. So much for “newsworthiness”!

This is an instance of naked Hindutva majoritarianism gone berserk. The RSS is not just another organisation, least of all the “cultural” body it claims to be. It is an intensely political organisation, and at the same time a quasi-militia with a secret society-like structure, whose leaders are never elected, but always nominated from the top. It is the ideological parent, political master and organisational gatekeeper of the BJP and the scores of fronts or affiliates that jointly constitute the Sangh Parivar.

The RSS was banned by the Central government in February 1948 following Mahatma Gandhi’s assassination by a Hindutva-inspired activist. The ground for the ban was that the RSS was involved in violence and subversion, including “suborning” the Indian state to its Hindu-supremacist agenda; it was spreading communal “poison” and indulging in other activities which “constituted a clear threat to the existence of the government and state…”, as the “final result” of which “the country had to suffer the sacrifice of the invaluable life of Gandhiji …”

The ban was lifted in July 1949 on condition that the RSS must have a written constitution specifying, among other things, respect for the Indian Tricolour-as distinct from the Bhagwa (saffron) flag the Sangh swears by-and its commitment to function as an open and peaceful organisation, and most important, to stay clear of party politics.

The RSS has flagrantly defied these conditions by repeatedly instigating communal violence and indulging in party politics. It spawned first the Jana Sangh and later the BJP. It has over the past decade nominated all the BJP’s key office-bearers, including Central and state-level organisational secretaries-and most recently, both the party’s Prime Ministerial candidate Narendra Modi and its national president Amit Shah. Indeed, it has tightened its grip on the Sangh Parivar as a whole, and the BJP in particular. It has played politics to the hilt.

The RSS’s defiance must not be condoned or go politically unpunished. All political parties not allied to the BJP must launch a sustained, serious street-level campaign of protest against the RSS and the Modi government-to begin with, by demanding an apology for the Doordarshan broadcast, and extracting a commitment never to repeat it.

So far, there have only been a few token demonstrations by the Congress. This won’t do. So grave is the breach of political decency committed through the broadcast that nothing less than a nation-wide campaign would do.

The RSS and the BJP have carved out a mutually close but unequal relationship, as AG Noorani argues in his The RSS and the BJP: A Division of Labour (Leftword Books). That relationship has reshaped and greatly strengthened the Sangh Parivar. As Noorani says: “Either the Sangh Parivar will have to be contained and defeated”, or else “Indian secularism, already enfeebled, will have to be abandoned and with it, democracy as well.”

What makes the Parivar agenda uniquely pernicious is, first, its insistence that India is and has always been a quintessentially Hindu society, which was invaded and subjugated by “foreigners” belonging to “alien” religions; and second, its demand that secular India must become a Hindu Rashtra or Hindu-denominational state by accepting the political primacy of one community on account of its numerical strength.

The first proposition is comprehensively contradicted by history. Hinduism as we know it today, in its Brahminical casteist form, goes back to the eighth century AD, whereas Christianity in India goes back to the first century and Islam to the seventh century AD. Well before Hinduism became dominant, India had large communities of Jains and Buddhists, many of which were wiped out.

For well over a thousand years before the Modern Age, India was a mosaic of different ethnic-religious groups, including animists, nature- or ancestor-worshippers, and various syncretic traditions including atheism and agnosticism, besides Hindus, Buddhists and Muslims.

True, many non-Hindu ethnic groups invaded and ruled parts of medieval India, but most did so not as Muslims, but as Turks, Tajiks, Persians, Pashtuns or Moghuls, without practising mass-scale religious conversion. India’s Hindu and Buddhist kings and princes also invaded parts of Southeast Asia and neighbouring countries like Sri Lanka: that’s how these religions spread there. Maharaja Ranjit Singh invaded Afghanistan too.

Second, and more important, the Freedom Movement which conceptualised the project of a new society or Modern India, and struggled for it through mass resistance to British rule, developed an altogether different notion of nationhood, not based on ethnicity or religion, but independent of them. Central to this was the universalist idea of citizenship, with equal rights for all.

The Sangh Parivar was not part of this project. It did not participate in the Freedom Movement, choosing instead to collaborate with the British war effort and get arms training so as to build a communal militia directed primarily against Muslims. As the-then RSS chief MS Golwalkar said: “Hindus, don’t waste your energy fighting the British; save your energy to fight our internal enemies that are Muslims, Christians and Communists.”

The same Parivar today speaks for nationalism, but based on a nation of a different pre-modern kind, which glorifies an invented “Hindu” ancient India’s past. Thus Parivar ideologues like Dinanath Batra (of book-banning fame) believe that ancient India was “the fountainhead of everything”. In an interview with Outlook magazine (Oct 6), he says: “So whether it be the first spacecraft, television or car, or plastic surgery, or rockets there’s nothing that wasn’t conceived, designed and executed by Indians aeons ago”, including aircraft, generation of electricity in a cell, wireless communications, even atomic bombs.

These are pure fantasies, not backed by even a shred of evidence. All those historians who contradict these insane accounts have again become the target of the Parivar, whose ideologue Subramaniam Swamy let off a tirade at the National Museum (another compromised institution?) against “Marxist, Muslim and Western historians” and demanded that books written by “Nehruvian historians” such as Bipan Chandra and Romila Thapar “should be set afire”. (The Hindu, Oct 6) It’s a crying shame that the BJP and the RSS not only entertain such elements in their ranks, but actually lionise them. No wonder Batra’s books have become part of Gujarat’s school curriculum.

This represents unprecedented social and intellectual retrogression of a despicable kind, and an attempt to brainwash millions of children and infantilise adults on a mass scale. Yet, nothing will halt the Sangh Parivar-short of a popular mobilisation for secularism and rationality, against obscurantism, superstition and uninformed, blind ultra-nationalist hubris, and for tolerance and a compassionate commitment to building a modern, forward-looking, non-hierarchical society free of caste, gender and communal prejudice.

The Parivar has thrown down the gauntlet. All secular political parties, civil society organisations and public-spirited citizens must pick it up and fight communalism and obscurantism in every conceivable way: by legal means, through mass education, intellectual criticism, public intervention in every forum including the media, and above all, in the streets. That’s the only way to take India back from the Hindutva reactionaries by pushing them behind the red lines they have so audaciously crossed.

(The author can be contacted at : email: bidwai@bol.net.in)

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मंत्रालयों और पीएसयू के मीडिया प्लान में दूरदर्शन और एआईआर को वरीयता दें

केंद्र ने अपने सभी मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को डीडी व एआइआर को तबज्जो देने की हिदायत दी है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव बिमल जुल्का ने इस संबंध में सभी मंत्रालयों को एक पत्र भेजकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि मंत्रालयों व पीएसयू के मीडिया प्लान में दूरदर्शन और एआइआर को वरीयता दें। जुल्का ने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय व पीएसयू, जिनका प्राथमिक टारगेट ऑडियंस (श्रोता/ दर्शक) ग्रामीण आबादी है, अपने मीडिया प्लान में डीडी और एआइआर को वरीयता नहीं दे रहे हैं। वे मीडिया पर खर्च करते समय निजी सेटेलाइट चैनल या न्यूज चैनलों को अधिक वरीयता देते हैं जिनका झुकाव उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्ग के ऑडियंस के प्रति होता है जबकि डीडी और एआइआर का फोकस मुख्यत: समाज के कमजोर तबकों और महिला दर्शकों पर होता है।

उल्लेखनीय है कि दूरदर्शन देश के 92 प्रतिशत भू-भाग और 15 करोड़ परिवारों तक पहुंचता है। दूरदर्शन के पांच राष्ट्रीय चैनल व 11 क्षेत्रीय चैनल और इतने ही क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल हैं। इसी तरह आकाशवाणी भी देश के 92 प्रतिशत भूभाग तथा 99.19 प्रतिशत आबादी तक पहुंचता है। आकाशवाणी 23 भाषाओं और 149 बोलियों में प्रसारण करता है। माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से दूरदर्शन और एआइआर की वित्तीय सेहत और सुधरेगी। सूचना प्रसारण मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों को यह निर्देश ऐसे समय जारी किया है जब प्रधानमंत्री खुद सरकारी सूचना तंत्र को दुरुस्त करने पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने हाल में आकाशवाणी पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिये आम लोगों को संबोधित भी किया है। वह आगे भी रेडियो के जरिये राष्ट्र को संबोधित करने का इरादा जता चुके हैं। इसके अलावा सूचना प्रसारण मंत्रालय ने प्रत्येक मंत्रालय को उनसे संबद्ध पीआइबी के सूचना अधिकारियों को शीर्ष स्तरीय बैठकों में शामिल होने तथा निर्णय प्रक्रिया से अवगत कराने को भी कहा है।

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