पहले प्रदीप संगम, फिर ओम प्रकाश तपस और अब संतोष तिवारी का जाना….

एक दुर्भाग्यपूर्ण संयोग या दुर्योग, जो कहिए… मेरे ज्यादातर प्रिय पत्रकारों का समुदाय धीरे-धीरे सिकुड़ता छोटा होता जा रहा है… दो-तीन साल के भीतर एकदम से कई जनों का साथ छोड़कर इस संसार को अलविदा कह जाना मेरे लिए स्तब्धकारी है… पहले आलोक तोमर, फिर प्रदीप संगम, उसके बाद ओमप्रकाश तपस और अब संतोष तिवारी… असामयिक रणछोड़ कर चले जाना या जीवन के खेल में आउट हो जाना हर बार मुझे भीतर तक मर्माहत कर गया… सारे पत्रकारों से मैं घर तक जुड़ा था और प्यार दुलार का नाता बहुत हद तक स्नेहमय सा बन गया था… इनका वरिष्ठ होने के बाद भी यह मेरा सौभाग्य रहा कि इन सबों के साथ अपना बोलचाल रहन-सहन स्नेह से भरा रसमय था… कहीं पर कोई औपचारिकता या दिखावापन सा नहीं था… यही कारण रहा कि इनके नहीं होने पर मुझे खुद को समझाने और संभलने में काफी समय लगा…

वरिष्ठ पत्रकार और संपादक संतोष तिवारी का निधन

Shambhu Nath Shukla : आज दोपहर रोहतक से पुरषोत्तम शर्मा का फोन आया और उसने जब बताया कि भाई साहब संतोष तिवारी जी नहीं रहे तो शॉक्ड रह गया। जेहन में 41 साल पहले का 1976 यूं घूम गया जैसे कल की ही बात हो। हम तब सीपीआई एमएल के सिम्पैथाइजर थे। हम यानी मैं और दिनेशचंद्र वर्मा। हमने तब श्रीपत राय की कहानी पत्रिका में एक कहानी पढ़ी जिसके लेखक का पता दिनेश के पड़ोस वाले घर का था। वह लेखक थे संतोष तिवारी। हम उस पते पर घर पहुंचे। संतोष के पिताजी ने दरवाजा खोला तो हमने पूछा कि तिवारी जी हैं?

संतोष तिवारी

पिंक सिटी प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष विश्वास कुमार का निधन

जयपुर से खबर है कि पिंक सिटी प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष विश्वास कुमार जी का आज सुबह 9:30 बजे निधन हो गया. उनकी शव यात्रा उनके गांधी नगर स्थित आवास से 2:00 बजे रवाना हुई और लाल कोठी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया. इस मौके पर शहर के गणमान्य लोग मौजूद थे.

नेशनल वायस चैनल के एडिटर इन चीफ बृजेश मिश्र के पिता अवध नारायण मिश्रा का निधन

नेशनल वायस न्यूज चैनल के एडिटर इन चीफ बृजेश मिश्र के पिता अवध नारायण मिश्र का बीते दिनों निधन हो गया. उनके निधन पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत कई वरिष्ठ नेताओं, पत्रकारों, गणमान्य लोगों ने शोक व्यक्त किया है. अवध नारायण मिश्र भी पत्रकारिता के पेशे से लम्बे समय तक जुड़े रहे हैं और अपने लेखन के ज़रिये उन्होंने समाज की तमाम विसंगतियों के खिलाफ संघर्ष किया. उनका कौशाम्बी के कड़ा घाट पर बड़ी संख्या में संभ्रात लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया. मुखाग्नि उनके बड़े शैलेश मिश्र ने दी.

हिंदुस्तान, मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पत्रकार विजय सिंह का सड़क हादसे में निधन

Sami Ahmad : भाई विजय सिंह कल रात सड़क हादसे में हमसे हमेशा के लिए जुदा हो गए। ज़िंदादिल इंसान। हौसला हमेशा साथ। जब मोतिहारी के ‘तास’ की बात निकलती फ़ौरन दावत देते, आइये ना भैया। मैं भी भैया ही कहता। लेकिन ऐसी खबर पर अब मैं चौंकता नहीं क्योंकि मुज़फ्फरपुर के साथ यह बदकिस्मती बहुत पुरानी हो गयी है। एक तो इस पेशे की मजबूरी है, देर रात लौटने की। जो बचे बस उनकी किस्मत है वरना अपने इलाके में कौन कब सड़क हादसे का शिकार हो जाए और किस पर कब बिजली का तार गिर जाए, कहा नहीं जा सकता। वैसे भी हमारे समाज में ऐसी मौतों को कभी गम्भीरता से नहीं लिया जाता।

किसी को यकीन नहीं हो रहा युवा पत्रकार राजुल निगम अब नहीं रहे

स्व. पत्रकार राजुल निगम की विभिन्न तस्वीरें…

सुल्तानपुर के पत्रकार जगत के महानायक थे राजुल निगम… महान व्यक्तित्व के धनी पत्रकार थे राहुल निगम। इन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में सराहनीय कार्य तो किया ही, पत्रकारिता की लाज बचाने के लिए अतुलनीय कार्य किया। सुल्तानपुर का पत्रकार जगत आज अपने एक महानायक राजुल निगम को खो कर एक खालीपन अधूरेपन अपूर्णता का एहसास कर रहा है। राजुल निगम जी न्यूज सहित कई पत्र-पत्रिकाओं में कार्यरत रहे और अपने कार्यों की बदौलत समाज में अपनी एक प्रतिष्ठित जगह बनायी, साथ ही पत्रकारिता की शुचिता और पत्रकारों के सम्मान के लिए सदैव आगे बढ़कर लड़ाई लड़ी।

भड़ास संपादक यशवंत के बड़े पिता जी श्रीकृष्ण सिंह का निधन

भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह के बड़े पिताजी श्रीकृष्ण सिंह का कल उनके जिले गाजीपुर स्थित पैतृक गांव में देहांत हो गया. उनकी उम्र 85 साल से ज्यादा थी. उन्हें कोई रोग / शोक नहीं था. उनका निधन हार्ट अटैक के कारण हुआ. वे अपने पीछे चार बेटे, बहुओं और नाती-पोतों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. यशवंत कई रोज से अपने गांव में ही थे. सो, उन्होंने बड़े पिता जी के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार में शिरकत किया. यशवंत ने फेसबुक पर अपने बड़े पिताजी को लेकर एक संस्मरणात्मक राइटअप लिखा है, जिसे नीचे दिया जा रहा है….

पानी और पर्यावरण के लिए लड़ने वाले संत पुरुष अनुपम मिश्र नहीं रहे

आज सुबह व्हाट्सएप पर सुप्रभात संदेशों के साथ एक दु:खद संदेश यह भी मिला कि जाने-माने पर्यावरणविद् और गांधीवादी अनुपम मिश्र नहीं रहे… जिस देश में चारों तरफ पाखंड और बनावटीपन का बोलबाला हो वहां पर एक   शुद्ध खांटी और खरे अनुपम मिश्र का होना कई मायने रखता है। सोशल मीडिया से ही अधकचरी शिक्षित हो रही युवा पीढ़ी अनुुपम मिश्र को शायद ही जानती होगी। देश में आज-कल ‘फकीरी’ के भी बड़े चर्चे हैं। लाखों का सूट पहनने और दिन में चार बार डिजाइनर ड्रेस पहनने वाले भी ‘फकीर’ कहलाने लगे हैं, मगर असली फकीरी अनुपम मिश्र जैसे असल गांधीवादी ही दिखा सकते हैं। उनका अपना कोई घर तक नहीं था और वे गांधी शांति फाउंडेशन नई दिल्ली के परिसर में ही रहते थे।

हादसे की तस्वीर लेने गये भास्कर के फोटोग्राफर की सड़क दुर्घटना में मौत

दैनिक भास्कर के फोटोग्राफर आदित्य कुमार सिंह की मौत। भीषण कोहरे में बिहार के हाजीपुर में हुए सड़क हादसे का कवरेज करने जा रहे आदित्य को मुर्गी लदे वाहन ने कुचल दिया। वे हाजीपुर ब्यूरो में कार्यरत थे। फोटो पत्रकार आदित्य कुमार सिंह को मंजन नाम से भी जाना जाता था। उनकी उम्र मात्र 25 साल थी। घटना हाजीपुर में मुजफ्फरपुर जाने वाले वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या­77 पर सदर थाना क्षेत्र में एकारा गुमटी के पास हुई।

हिंदी और भोजपुरी के प्रसिद्ध लेखक विवेकी राय का निधन

वाराणसी : हिंदी और भोजपुरी के प्रसिद्ध लेखक विवेकी राय का आज वाराणसी में निधन हो गया. वे 93 वर्ष के थे. उन्होंने तड़के करीब 4.45 बजे अंतिम सांस ली. सांस लेने में दिक्कत की वजह से वाराणसी के निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उन्होंने 19 नवंबर को ही अपना 93वां जन्मदिन मनाया था. वह मूल रूप से गाजीपुर के सोनवानी गांव के निवासी थे. 

वरिष्ठ छायाकार हरजिंदर सिंह और पत्रकार अरविन्द श्रीवास्तव का निधन

लखनऊ : एक दुखद खबर है. वरिष्ठ छायाकार हरजिंदर सिंह का निधन हो गया है. उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट हरजिंदर सिंह के असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है. हिन्दी दैनिक ‘आज’ से बीते कई दशकों से संबद्ध रहे हरजिंदर सिंह का हृदयगति रुकने से निधन हो गया है.

वरिष्ठ पत्रकार गिरीश निकम दिल्ली में छाए प्रदूषण की बलि चढ़ गए!

Gurdeep Singh Sappal : गिरीश निकम चले गए। मौत ने पिछले साल भी उनके दिल पर दस्तक दी थी। तब भी उनकी धड़कन को पूरी तरह जकड़ कर थाम दिया था। लेकिन न्यूयॉर्क की आपात मेडिकल सुविधाओं ने उसे परास्त कर दिया था। मौत, जो सिगरेट और रम के बुलावे पर आयी थी, धीरे धीरे पीछे हटती गई, वेंटिलेटर पर साँसें वापिस सामान्य होती गयी। गिरीश जी उठे और वापिस स्क्रीन पर छा गए।

ब्रेन हैमरेज के बाद SGPGI में भर्ती कराए गए लखनऊ के पत्रकार रीतेश द्विवेदी का निधन

लखनऊ में करीब 15 साल से पत्रकारिता कर रहे पत्रकार रीतेश द्विवेदी का संजय गांधी पीजीआई में निधन हो गया. उन्हें ब्रेन हेमरेज के बाद भर्ती कराया गया था. उनका अंतिम संस्कार लखनऊ के चौक के गुल्लाला श्मशान घाट पर किया गया. लखनऊ में चौपटिया के दिलाराम बारादरी के रहने वाले रीतेश ने राजधानी के कई बड़े मीडिया संस्थानों से जुड़ कर लंबे समय तक पत्रकारिता की.

आजतक के युवा पत्रकार रजत सिंह की दिल्ली के एम्स ट्रामा सेंटर में मौत

आजतक न्यूज चैनल के पत्रकार रजत सिंह का दो दिन पहले एक्सीडेंट हो गया था. नोएडा के बॉटनिकल गार्डन के पास उनकी बाइक को डम्पर ने टक्कर मार दी थी. उनके सिर में गंभीर चोटें आई थी. उन्हें एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था.

पत्रकार Dhirendra Pundir ने रजत सिंह को याद करते हुए फेसबुक पर कुछ यूं लिखा है :

सड़क हादसे में सुदर्शन न्यूज़ के गेस्ट कोआर्डिनेटर और एसाइनमेंट हेड विवेक चौधरी का निधन

सुदर्शन न्यूज़ के गेस्ट कोआर्डिनेटर और एसाइनमेंट हेड विवेक चौधरी के निधन होने की सूचना मिली है. विवेक पिछले कई सालों से अलग-अलग न्यूज़ चैनलो में अपनी सेवायें दे चुके है. वे श्री न्यूज़, चैनल वन न्यूज़, साधना न्यूज़ आदि चैनलों में गेस्ट कोआर्डिनेटर के तौर पर काम कर चुके हैं. बताया जाता है कि कल रात विवेक का निधन एक सड़क दुर्घटना में हो गया.

यादें शेष : हंसमुख पत्रकार चंद्रप्रकाश बुद्धिराज का यूं पीड़ा लेकर जाना…

सीपी : अब यादें ही शेष….

राजू उर्फ चंद्र प्रकाश बुद्धिराजा उर्फ सीपी. पहले नाम का अर्थ जान लेते हैं, चंद्र के समान प्रकाश हो जिसका, बुद्धि के जो राजा हो। उर्फ सीपी पर भी गौर फरमाएं तो जुबां पर सीेधे विशालकाय अद्भुत, अनोखे दिल्ली की जान, कनॉट प्लेस (सीपी) का नाम दिमाग पर छा जाता है। अतिश्योक्ति न होगी कि सीपी के बिना दिल्ली अधूरी है।  नाम को सार्थक करता प्रभाव था हमारे सीपी का, जो दुनिया से चले गए। सच में, तुम्हारे बिना आज तुम्हारे साथियों की दुनिया भी वैसे ही अधूरी है, जैसे ‘सीपी’ बिना दिल्ली।

पत्रकार प्रभात कुमार शांडिल्य और ओम प्रकाश बंसल का निधन

बिहार के गया से सूचना है कि चर्चित पत्रकार, जेपी आंदोलन से जुड़े एक्टिविस्ट व समाजसेवी प्रभात कुमार शांडिल्य का गुरुवार की दोपहर को निधन हो गया. उन्होंने गया शहर के नगमतिया रोड स्थित डॉ उषा लक्ष्मी आवास में अंतिम सांस ली.  वह काफी दिनों से बीमार थे. मूल रूप से बक्सर के रहनेवाले शांडिल्य जी का जन्म 24 नवंबर, 1951 को गया जिले के वजीरगंज के रहनेवाले राधेश्याम प्रसाद के घर में हुआ था. उनकी शिक्षा-दीक्षा वजीरगंज में हुई. पटना स्थित बीएन कॉलेज से समाजशास्त्र में एमए उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने कभी नौकरी करने की नहीं सोची और अविवाहित जिंदगी गुजारी. वह ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन में काफी दिनों तक सक्रिय रहे.

उफ्फ… दैनिक जागरण अलीगढ़ और ईनाडु टीवी हैदराबाद में हुई इन दो मौतों पर पूरी तरह लीपापोती कर दी गई

अलीगढ दैनिक जागरण के मशीन विभाग में कार्यरत एक सदस्य की पिछले दिनों मशीन की चपेट में आकर मृत्यु हो गई. न थाने ने रिपोर्ट लिखा और न ही डीएम ने कुछ कहा. शायद सब के सब जागरण के प्रभाव में हैं. यह वर्कर 2 दिन पहले वहां तैनात किया गया था. उसका भाई वहां पहले से कार्यरत था. पंचनामा जबरन कर लाश को उठवा दिया गया. बताया जाता है कि अलीगढ़ दैनिक जागरण में शाफ्ट टूट कर सिर में लगने से मौत हुई.

मुंबई में पत्रकार रामकुमार मिश्र का निधन

मुंबई : हमारा महानगर के पूर्व उपसम्पादक और दबंग दुनिया के उपसंपादक रामकुमार मिश्र का कल देर शाम मुम्बई के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे तबियत खराब होने पर केइएम अस्पताल में भर्ती थे। शाम को उनका शव उनके घाटकोपर स्थित निवास पर ले जाया गया जहाँ पत्रकारों और शुभचिंतको ने उन्हें भावभीनी श्रधांजलि दी।

यशोभूमि के पत्रकार अरविन्द सिंह को मातृशोक

मुबई से प्रकाशित हिन्दी दैनिक यशोभूमि के उपसंपादक और वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द सिंह की माताजी गुलाबी देवी भुवाल सिंह का मुंबई के शिवड़ी स्थित तिलक इमारत  स्थित आवास में निधन हो गया। वे  81 साल की  थीं। गुलाबी देवी लंबे समय से बीमार चल रही थीं। वे अपने पीछे पुुत्र अरविन्द सिंह, विनय सिंह और …

प्रख्‍यात आलोचक एवं साहित्‍यकार प्रभाकर श्रोतिय का निधन

prabhakar

हिंदी के प्रख्‍यात आलोचक एवं साहित्‍यकार प्रभाकर श्रोतिय का गुरुवार की रात दिल्‍ली के सर गंगाराम अस्‍पताल में निधन हो गया. वे 76 वर्ष के थे तथा लंबे समय से बीमार चल रहे थे. वे अपने पीछे पत्‍नी तथा एक पुत्र एवं पुत्री का भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं. उनका अंतिम संस्‍कार हरिद्वार में किया जाएगा. प्रभाकर क्षोत्रिय ने हिंदी की कई प्रतिष्‍ठित साहित्‍यिक पत्रिकाओं का संपादन किया. क्षोत्रिय के निधन से हिंदी साहित्‍य जगत को गहरा धक्का पहुंचा है.

अलविदा अज्ञात जी, आप तो अशोक थे लेकिन हम अब भारी शोक में हैं

(स्व. अशोक अज्ञात जी)

कभी माफ़ मत कीजिएगा अशोक अज्ञात जी, मेरे इस अपराध के लिए … हमारे विद्यार्थी जीवन के मित्र अशोक अज्ञात कल नहीं रहे। यह ख़बर अभी जब सुनी तो धक् से रह गया । सुन कर इस ख़बर पर सहसा विश्वास नहीं हुआ । लेकिन विश्वास करने न करने से किसी के जीवन और मृत्यु की डोर भला कहां रुकती है। कहां थमती है भला ? अशोक अज्ञात के जीवन की डोर भी नहीं रुकी , न उन का जीवन । अशोक अज्ञात हमारे बहुत ही आत्मीय मित्र थे । विद्यार्थी जीवन के मित्र । हम लोग कविताएं लिखते थे। एक दूसरे को सुनते-सुनाते हुए हम लोग अकसर अपनी सांझ साझा किया करते थे उन दिनों।

…और इस तरह नींद में चले गये अशोक अज्ञात

गोरखपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ हिन्दी पत्रकार अशोक अज्ञात नहीं रहे। इस सत्य को स्वीकार करने के अलावा हमारे पास अब कोई चारा नहीं है। करीब छह-सात साल पहले की बात है। अशोक अज्ञात प्रेस क्लब का चुनाव जीते। उनकी पत्रकार-मंडली का शपथ-ग्रहण समारोह होना था। अज्ञात एक दिन मुझसे टकरा गये। बोले– शपथग्रहण समारोह के लिए मुख्य अतिथि के रूप में किसे बुलाऊँ?

टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया कैंसर के ताजा अटैक को मात न दे सके

सुभाष लखोटिया के प्रशंसकों एवं चहेतों के लिए यह विश्वास करना सहज नहीं है कि वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। भारत के शीर्ष टैक्स और निवेश सलाहकार के रूप में चर्चित एवं सीएनबीसी आवाज चैनल पर चर्चित शो ‘टैक्स गुरु’ के 500 से अधिक एपिसोड पूरा कर विश्व रिकार्ड बनाने वाले श्री लखोटिया अनेक पुस्तकों के लेखक थे। वे पिछले कई दिनों से जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे थे। उनको कैंसर था। डाक्टरों ने बहुत पहले उनके न बचने के बारे में कह दिया था लेकिन अपने विल पावर और जिजीविषा के कारण वे कैंसर व मौत, दोनों को लगातार मात दे रहे थे। पर इस बार जब हालत बिगड़ी तो कई दिनों के संघर्ष के बाद अंततः दिनांक 11 सितम्बर 2016 की मध्यरात्रि में इस दुनिया को अलविदा कह गए।

एक दिन, दो गम

अजय कुमार, लखनऊ

एक साहित्य जगत की महान विभूति थी तो दूसरा संगीत की दुनिया का सम्राट। एक कलम का उस्ताद था तो दूसरे की उंगलियों की थाप लोंगो को सम्मोहित कर लेती थी। दोनों ने एक ही दिन दुनिया से विदा ली। बात तबला सम्राट पंडित लच्छू महाराज और साहित्य की हस्ताक्षर बन गईं महाश्वेता देवी की हो रही है। भगवान भोले नाथ की नगरी वाराणसी से ताल्लुक रखने वाले लच्छू महाराज और बंगाल की सरजमी से पूरे साहित्य जगत को आईना दिखाने वाली ‘हजार चौरासी की मां’ जैसी कृतियां की लेखिका महाश्वेता देवी (90) ने भले ही देह त्याग दिया हो लेकिन साहित्य जगत और संगीत प्रेमिेयों के लिये यह हस्तियां शायद ही कभी मरेंगी। अपने चाहने वालों के बीच यह हमेशा अमर रहेंगी।

वरिष्ठ पत्रकार योगेंद्र कुमार लल्ला का निधन

Jaishankar Gupta : दुखद सूचनाओं का सिलसिला है कि टूटने का नाम ही नहीं ले रहा। अभी अपने से बड़े लेकिन इलाहाबाद के दिनों से ही मित्र नीलाभ अश्क के निधन से उबर भी नहीं सके थे कि लल्ला जी- योगेंद्र कुमार लल्ला उर्फ योकुल के निधन के समाचार ने भीतर से हिलाकर रख दिया। लल्ला जी को जानता तो था मैं उनके धर्मयुग के जमाने से ही, लेकिन उन्हें करीब से जानने- समझने का अवसर कलकत्ता, आज के कोलकाता में आनंद बाजार पत्रिका के हिंदी साप्ताहिक रविवार के साथ जुड़ने के बाद मिला।

योगेंद्र कुमार लल्ला

सबसे माफी मांगते अनंत की ओर चले गये नीलाभ जी

Hareprakash Upadhyay : सबसे माफी माँगते हुए अनंत की ओर चले गये नीलाभ जी। बेहद प्रतिभावान-बेचैन, सहृदय लेखक, कवि- अनुवादक! मुझसे तो बहुत नोक-झोक होती थी, मैं उन्हें अंकल कहता था और वे मुझे भतीजा! अंकल! अभी तो कुछ और दौर चलने थे। कुछ और बातें होनी थी। आप तो सबका दिल तोड़ चले गये। पर शिकायतें भी अब किससे और शिकायतों के अब मानी भी क्या! अंकल, हो सके तो हम सबको माफ कर देना। नमन अंकल! श्रद्धांजलि!

जाने-माने पत्रकार और ‘रंग प्रसंग’ के संपादक नीलाभ अश्क का निधन

नीलाभ नहीं रहे. नीलाभ यानि नीलाभ अश्क. आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली. पिछले कुछ दिनों से वे बीमार चल रहे थे. नीलाभ ‘रंग प्रसंग’ के संपादक थे. फेसबुक पर नीलाभ के कई जानने वालों ने उनके निधन की खबर पोस्ट की है. पत्रकार और समालोचक संगम पांडेय ने लिखा है- ”अभी-अभी ‘रंग प्रसंग’ के संपादक नीलाभ जी के अंतरंग रूपकृष्ण आहूजा ने बताया कि नीलाभ जी नहीं रहे।”

WHEN SAUMIT SINGH NEEDED HELP, NONE OF YOU WERE THERE….

सौमित सिंह की फाइल फोटो

I clearly remember that conversation with Saumit Singh. It was just after Independence Day in 2013. He was goading me to be more aggressive in my writing. “Tu Bohot Soft Hai. This is not journalism. You should say it the way it should be said,” he said.