हमारी-आपकी चुप्पियों के बीच एक वरिष्ठ पत्रकार का यूं अचानक चले जाना (देखें वीडियो)

वरिष्ठ पत्रकार पुनीत कुमार पचास की उमर में चल बसे… वो सहारा समय में नेशनल हेड रह चुके हैं. काफी समये से वो फ्री लांस जर्नलिज्म कर रहे थे. आईआईएमसी से पासआउट और कई चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रहे पुनीत की मृत्यु कुछ दिन पहले हुई लेकिन चर्चा बस पुनीत की एफबी वॉल तक …

राजेश शर्मा के निधन से भड़ास ने एक सच्चा शुभचिंतक खो दिया

राजेश शर्मा चले गए. दिवाली की रात. हार्ट अटैक के कारण. उमर बस 44-45 के आसपास रही होगी. वे इंडिया न्यूज यूपी यूके रीजनल चैनल के सीईओ थे. राजेश भाई से मेरी जान पहचान करीब आठ साल पुरानी है. वो अक्सर फोन पर बातचीत में कहा करते- ”यशवंत भाई, तुम जो काम कर रहे हो न, ये तुम्हारे अलावा कोई दूसरा नहीं कर सकता. मैंने मीडिया इंडस्ट्री को बहुत करीब से देखा है. यहां सब मुखौटे लगाए लोग हैं. भड़ास के जरिए तुमने आजकल की पत्रकारिता को आइना दिखाया है.”

इंडिया न्यूज यूपी-यूके रीजनल चैनल के सीईओ राजेश शर्मा का हार्ट अटैक से निधन

दीपक चौरसिया और रवि शर्मा के साथ सबसे बाएं राजेश शर्मा

एक दुखद खबर आ रही है दिल्ली से. इंडिया न्यूज समूह के रीजनल न्यूज चैनल इंडिया न्यूज यूपी यूके के सीईओ राजेश शर्मा का ऐन दिवाली की रात हार्ट अटैक से निधन हो गया. उनकी उम्र 45 वर्ष के आसपास रही होगी. जिंदादिल स्वभाव वाले राजेश बेहद मेहनती और निष्ठावान शख्सियत थे. यही कारण है कि इंडिया न्यूज में एंट्री के बाद उन्होंने लगातार तरक्की की.

निष्ठुर एचटी प्रबंधन ने नहीं दिया मृतक मीडियाकर्मी के परिजनों का पता, अब कौन देगा कंधा!

नई दिल्ली। अपने धरनारत कर्मी की मौत के बाद भी निष्ठुर हिन्दुस्तान प्रबंधन का दिल नहीं पिघला और उसने दिल्ली पुलिस को मृतक रविन्द्र ठाकुर के परिजनों के गांव का पता नहीं दिया। इससे रविन्द्र को अपनों का कंधा मिलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है।

एचटी बिल्डिंग के सामने सिर्फ एक मीडियाकर्मी नहीं मरा, मर गया लोकतंत्र और मर गए इसके सारे खंभे : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : शर्म मगर इस देश के मीडिया मालिकों, नेताओं, अफसरों और न्यायाधीशों को बिलकुल नहीं आती… ये जो शख्स लेटा हुआ है.. असल में मरा पड़ा है.. एक मीडियाकर्मी है… एचटी ग्रुप से तेरह साल पहले चार सौ लोग निकाले गए थे… उसमें से एक ये भी है… एचटी के आफिस के सामने तेरह साल से धरना दे रहा था.. मिलता तो खा लेता.. न मिले तो भूखे सो जाता… आसपास के दुकानदारों और कुछ जानने वालों के रहमोकरम पर था.. कोर्ट कचहरी मंत्रालय सरोकार दुकान पुलिस सत्ता मीडिया सब कुछ दिल्ली में है.. पर सब अंधे हैं… सब बेशर्म हैं… आंख पर काला कपड़ा बांधे हैं…

न्यूज24 के एसोसिएट प्रोड्यूसर कामता सिंह को जहर देकर और गला घोंटकर मारा गया था!

इसी साल मार्च महीने में न्यूज24 के एसोसिएट प्रोड्यूसर कामता सिंह की रहस्यमय हालात में मौत हो गई थी. जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है उसमें बताया गया है कि उन्हें जहर देकर और गला घोंटकर मारा गया. कामता चैनल से ड्यूटी करके रात 12 बजे सोने चले गए थे. साथ में पत्नी भी सो रही थीं. सुबह छह बजे वे नहीं उठे और न हलचल कर रहे थे. तब पत्नी उन्हें अस्पताल ले गईं. वहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था. फिलहाल बिसरा रिपोर्ट का आना अभी बाकी है.

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह के पिताजी लालता प्रसाद सिंह का निधन

स्वर्गीय लालता प्रसाद सिंह

अमर उजाला, इंडिया टुडे, चौथी दुनिया समेत कई अखबारों मैग्जीनों में वरिष्ठ पद पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह के पिता जी लालता प्रसाद सिंह का मास्को में निधन हो गया. वे 92 वर्ष के थे. उनका काफी समय से इलाज चल रहा था और हर बार वह स्वस्थ होकर घर लौट आते थे. इस बार वह अस्वस्थ हुए तो अस्पताल से वापस नहीं लौट पाए. वह अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री समेत नाती-पोतों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. इन दिनों वह मास्को में अपने छोटे बेटे के यहां रह रहे थे.

लखनऊ के फोटो जर्नलिस्ट संजय त्रिपाठी का निधन

लखनऊ के वरिष्ठ छायाकार संजय त्रिपाठी का आज भोर में दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया. उनका अंतिम संस्कार आज दिन में दो बजे बैकुंठ धाम में किया गया. संजय के पुत्र शुभम 4PM अखबार में छायाकार हैं. 4पीएम के संपादक संजय शर्मा ने वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट संजय त्रिपाठी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि संजय जी बहुत अच्छे छायाकार थे. परमपिता परमेश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिवार को दुख सहने की क्षमता दे.

Legendary journalist, author and novelist Arun Sadhu passes away

We are very sad to inform you that a legendary journalist, author and novelist Arun Sadhu passed away on Monday morning due to illness at a city hospital. He was 76. Known for his expansive work in journalism, commentary on current affairs and politics, Sadhu has authored award winning political novel like Simhasan which was later made into a film that is still relevant and treated as a cult classic. His social novel Mukhavata, and his first novel Mumbai Dinank are considered top class.

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद नारायण सिंह का निधन

Sad news. journalist Arvind Narayan Singh, who had been associated with Nav Bharat Times, Rashtriya Sahara and Hindustan, died at his Indira Nagar, Lucknow residence on Sept. 7, Thursday. RIP

Devesh Singh : वरिष्ठ पत्रकार अरविंद नारायण सिंह हमारे बीच नहीं रहे। आज हम सब के बीच वरिष्ठ पत्रकार अरविंद नारायण सिंह नहीं रहे। प्रातः तकरीबन सवा चार बजे उन्होंने अन्तिम सांस ली। लंबे समय से वह हिपेटाइटिस से जूझ रहे थे। अन्तोगत्वा आज मौत के आगे जिंदगी ने घुटने टेक दिये। यूं तो मीडिया जगत में उनकी लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। हिन्दुस्तान अखबार से अलग होने के बाद वह कुछ बुझे-बुझे से रहने लगे थे। कभी उन्होंने अपने दर्द को बयां नहीं किया।

मनोज भी दरवीश ही की तरह कैंसर में गिरफ़्तार होकर चल बसे!

Asad Zaidi : मनोज पटेल का अचानक चले जाना अच्छा नहीं लग रहा है। हिन्दी में दुनिया भर की समकालीन कविता के अनुवाद की जो रिवायत अभी बन रही है, वह उसके बनाने वालों में एक थे। वह कविता के अत्यंत ज़हीन पाठक थे, नफ़ीस समझ रखते थे, और उनकी पसन्द का दायरा व्यापक था।

बेहतरीन अनुवादक और ब्लागर मनोज पटेल नहीं रहे

Amitaabh Srivastava : बेहतरीन अनुवादक, ब्लॉगर, फेसबुक मित्र मनोज पटेल का यूँ अचानक चले जाना! क्या कहें सिवाय इसके कि जीवन बहुत अनिश्चित है, समय बहुत क्रूर. पुस्तक मेले की मुलाकात याद आयी और मन भर आया. हम जैसों के लिए तो उनके अनुवाद एक नयी दुनिया की खिड़कियों का काम करते थे. उनका ब्लॉग पढ़ते-पढ़ते पढ़कर ही कई नामों से परिचय हुआ था. बहुत अफ़सोस है मन में, बड़ा मनहूस दिन रहा आज. विनम्र श्रद्धांजलि

टीवी पत्रकार शिवेंद्र प्रताप सिंह के पिताजी का बनारस में निधन

बनारस से मिली जानकारी के मुताबिक टीवी पत्रकार शिवेंद्र प्रताप सिंह के पिताजी राजेंद्र प्रताप सिंह का निधन हो गया है. वे 62 साल के थे और बनारस के शिवपुर के निवासी थे. पिछले 4 महीने से राजेंद्र प्रताप सिंह की तबियत खराब चल रही थी. उन्हें ब्रेन ट्यूमर हुआ था जिसका इलाज चल रहा था. 20 जुलाई को उन्होंने अंतिम सांस ली. बनारस के मणिकर्णिका घाट पर परिजनों और शुभचिंतकों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार हुआ.

नवगछिया के वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार झा उर्फ सुनील झा नहीं रहे

शुक्रवार को चार बजे सुबह पटना के आईजीआईएमएस में ली अंतिम सांस… बिहार के भागलपुर जिले के बिहपुर के दयालपुर ग्राम के निवासी सुनील कुमार झा का शुक्रवार को पटना के आईजीआईएमएस में इलाज के दौरान निधन हो गया. वे कैंसर से पीड़ित थे. कुछ दिनों पूर्व जब उन्हें परेशानी हुई तो उन्हें इलाज के लिए भागलपुर के जेएलएनएमसीएच में भर्ती कराया गया था. उन्होंने अन्न जल लेना पूरी तरह से बंद कर दिया था.

वेद उनियाल यानि एक ‘संघर्ष’ का ‘संघर्षमय’ अंत…

Yogesh Bhatt : एक ‘संघर्ष’ का ‘संघर्षमय’ अंत. आज की पीढ़ी में बहुत कम लोग होंगे जो वेद भाई (वेद उनियाल) के नाम से परिचित होंगे। वेद भाई संघर्ष का वो नाम है , जो जिया भी संघर्ष में और विदा भी संघर्ष करते करते हुआ। वेद उनियाल उत्तराखंड राज्य आंदोलन का वो नाम है, जिसने इस आंदोलन को उम्र भर जिया। न कोई कारोबार, न कोई सियासत, न कोई रोजगार, सिर्फ और सिर्फ संघर्ष। राज्य आंदोलन के दौर में वह सिर्फ प्रथम पंक्ति के योद्धा ही नहीं, बल्कि चिंतक, विचारक और प्रमुख रणनीतिकार भी रहे। अस्सी-नब्बे के दशक के दौरान जनांदोलनों, जन सरोकारों से जुड़े लोग बखूबी वेद उनियाल से वाकिफ हैं।

कवि-गद्यकार अजित कुमार का निधन

‘चांदनी चन्दन सदृश’: हम क्यों लिखें? / मुख हमें कमलों सरीखे / क्यों दिखें? / हम लिखेंगे: / चांदनी उस रुपये-सी है / कि जिसमें / चमक है, पर खनक ग़ायब है.” नयी कविता के ग़ैर-रूमानी मिज़ाज की ऐसी प्रतिनिधि पंक्तियां लिखनेवाले कवि-गद्यकार श्री अजित कुमार हमारे बीच नहीं रहे. आज सुबह 6 बजे लम्बी बीमारी से संघर्ष करते हुए 84 साल की उम्र में दिल्ली के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया.

मुम्बई के जाने माने प्रेस फोटोग्राफर राजू उपाध्याय का दुर्घटना में निधन

मुम्बई के जाने माने फ़िल्म प्रेस फोटोग्राफर राजू उपाध्याय का वाराणसी से सटे गोपीगंज थाना इलाके के छतमी में एक ट्रक से हुई दुर्घटना में गुरुवार की सुबह निधन हो गया। वो मूलतः भदोही जिले के रहने वाले थे। वो सोमवार को भदोही आए थे। उनकी पत्नी यहां सीतामढ़ी में शिक्षिका हैं। हादसे के वक्त राजू सीतामढ़ी स्थित आवास से दवा लेने के लिए बाइक द्वारा गोपीगंज बाजार जा रहे थे।

पठानिया जी का अंतिम संदेश- ”जिंदगी बहुत खूबसूरत है, लेकिन अपनों के बिना तू अच्छी नहीं लगती”

भला ऐसे भी कोई जाता है… : जिंदगी बहुत खूबसूरत है, लेकिन अपनों के बिना तू अच्छी नहीं लगती। मेरे व्हाट्सएप पर वरिष्ठ पत्रकार पठानिया जी का अंतिम संदेश यही था। पत्रकारिता में अपना जीवन खपा देने वाले बड़े भाई समान मित्र राकेश पठानिया अंतिम समय में मुझे याद करते रहे। (जैसा पारिवारिक सदस्यों ने आज अल सुबह बताया)। पता नहीं दोस्ती के कई कर्ज चुकाने बाकी रह गए।

नहीं रहे धर्मशाला के वरिष्ठ पत्रकार राकेश पठानिया

(स्व. राकेश पठानिया)

एक कलमकार की मौत और सौ सवाल : कहने को तो अब हिमाचल प्रदेश का शहर धर्मशाला प्रदेश की दूसरी राजधानी है और स्मार्ट सीटी भी बनने जा रही है, मगर आज से दो दशक पहले भी धर्मशाला की प्रदेश की राजनीति में काफी अहमियत थी। तब की पत्रकारिता आज के दौर से कहीं अलग और काफी मुश्किल भरा टास्क थी। कुछ गिनी चुनीं अखबारें प्रदेश के बाहर से छपकर आती थीं और इनके पत्रकारों के तौर पर घाघ लोगों का कब्जा था। किसी नए खबरनवीस के लिए अखबार में जगह तलाशना कोयले के खान में हीरा तलाशने जैसा मुश्किल काम था। सीनियर भी ऐसे थे, जो उस समय के दौर में मिलने वाली तबज्जों और आवभगत के चलते किसी को करीब फटकने नहीं देते थे, और शागिर्द की बात करें तो ऐसा सांप सूंघ जाता था कि मानो वह एकलव्य बनकर उनके लक्ष्य को भेदने को तैयार हो।

लोकस्वामी मैग्जीन के संपादक रजनीकांत वर्मा का निधन

लोकस्वामी समूह के ग्रुप एडिटर रजनीकांत वर्मा नहीं रहे. हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया. वे पचपन साल के थे. वे पिछले कुछ समय से बीमार भी चल रहे थे जिसके कारण उनका इलाज चल रहा था. उत्तराखंड के हल्द्वानी (नैनीताल) के रहने वाले रजनीकांत ने करियर का काफी लंबा अरसा इंदौर में व्यतीत किया.

सन्मार्ग अखबार के संपादक आनंद बहादुर सिंह का बनारस में निधन

वाराणसी। राजा टोडरमल के वंशज और पत्रकारिता के युग पुरुष सन्मार्ग अखबार के संपादक अनंदबहादुर सिंह का इलाज के दौरान शनिवार को तड़के 4 बजे निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। श्री सिंह की 87 वर्ष कीअवस्था थी। उनके निधन की जानकारी जैसे ही समाज के बुद्धिजीवी, पत्रकारों और उनके शुभचिंतकों को लगा जो जैसे था उनके भदैनी स्थित आवास की ओर दौड़ पड़ा। श्री सिंह का जन्म 29 अगस्त 1930 (लोलार्कछठ) के दिन हुआ था। वह शुरु से धार्मिक प्रवृत्ति और काशी के गंगो-जमुनी यकजहती के संवाहक थे। उनका श्री संकटमोचन मंदिर के महंत परिवार से ताल्लुकात होने की वजह से उनकी रूचि गोस्वामी तुलसीदास जी में रही। वह रामचरित मानस में जबरदस्त पकड़ रखते थे। इतना ही नही वह काशी के इतिहास के बारे में भी अच्छी जानकारी रखते थे।

आगरा-मथुरा के वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्रवाल का निधन

मथुरा के नियति हास्पीटल में आज सुबह करीब सवा आठ बजे वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्रवाल जी ने आंखें मूंद ली। उन्होंने आज अखबार में लंबे समय तक क्राइम रिपोर्टर और फिर सिटी इंचार्ज के तौर पर सेवा दी। इससे पहले उन्होंने विकासशील भारत में बतौर क्राइम रिपोर्टर काम किया। आज अखबार छोड़ने के बाद वे डीएलए से जुड़ गए। यहां उन्होंने बतौर सीनियर क्राइम रिपोर्टर काम किया।

मुंबई की वरिष्ठ फिल्म पत्रकार पिरोज वाडिया का निधन

SAD DEMISE OF SENIOR JOURNALIST PIROJ WADIA

Dear Member,

With great sorrow and regret we have to inform you that Piroj Wadia, a senior film journalist and Press Club member passed away today in Mumbai after a brief illness. Piroj, aged 67 was in journalism for almost four decades with Free Press Journal, The Daily, Indian Express and Cine Blitz.

नहीं रहे लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार केसी खन्ना

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्लूजे) के दशकों पुराने सहयोगी केसी खन्ना का निधन हो गया है। अंग्रेजी दैनिक दि पॉयनियर के उप समाचार संपादक रहे केसी खन्ना आईएफडब्लूजे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी व यूपी प्रेस क्लब की गवर्निंग बाड़ी के सदस्य रहे थे। दिवंगत पत्रकार केसी खन्ना की रस्म पगड़ी …

बनारस के वरिष्ठ पत्रकार रत्न शंकर व्यास का निधन

Ak Lari : वरिष्ठ पत्रकार रत्न शंकर व्यास का निधन। वह ‘आज’ अखबार से जुड़े थे। वह ‘आज’ अखबार में संपादक रहे लक्ष्मी शंकर व्यास के बड़े पुत्र थे। अवस्था करीब 76 साल थी। रिटायर्ड होने के बाद ‘आज’ अखबार में संम्पादकीय लेखन का दायित्व निभा रहे थे। जानकारी के अनुसार रत्न शंकर जी तीन दिन से कार्यालय नहीं आ रहे थे। अस्वस्थ थे। घर पर ही इलाज चल रहा था।

कैंसर से पीड़ित वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्रपाल सिंह का निधन

Jaishankar Gupta : करीब चार दशकों की दोस्ती को एक झटके में तोड़ कर धर्मेंद्रपाल सिंह का इस तरह असमय चले जाना भारी दुख दे गया। 1980 में हमारी मुलाकात लोदी एस्टेट में स्थित असली भारत के दफ्तर में हमारी मुलाकात हुई थी। हम वहां संवाददाता सह उप संपादक थे। धर्मेंद्र हिन्दुस्तान अखबार में कार्यरत थे लेकिन हमारे संपादक, पूर्व सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री रहे अजय सिंह से करीबी के कारण धर्मेंद्र वहां आते जाते या कहें सलाहकार सहयोगी की भूमिका में थे। 1997 में जब हम हिन्दुस्तान से जुड़े तब वह वहां वरिष्ठ और पुराने सहयोगी के रूप में मिले। कुछ बातों को लेकर मतभेद भी होते थे लेकिन मनभेद कभी नहीं हुए। कम मिलते थे लेकिन निजी रिश्तों में प्रगाढ़ता में कमी कभी नहीं आई। कैंसर से वह जूझ रहे थे। और कुछेक अवसरों पर और खासतौर से आपरेशन के बाद तो लगा कि उन्होंने अपराजेय कहे जानेवाले कैंसर को परास्त कर दिया है लेकिन कल रात वह इस लड़ाई को हार गए। मन बोझिल और सदमें में है। अपने बेलौस ठहाकों के लिए मशहूर मित्र को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि। शोक की इस घड़ी में हमारी सहानुभूति और संवेदना सुषमा जी और उनके परिवार के साथ है।

वाराणसी में हिन्दुस्तान अखबार के वरिष्ठ छायाकार मंसूर आलम का निधन

वाराणसी से एक दुखद खबर आ रही है। यहां हिंदुस्तान अखबार के वरिष्ठ फोटोग्राफर मंसूर आलम का निधन आज सोमवार की सुबह हो गया। वे कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि उन्हें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुन्दर लाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। रविवार को मंसूर आलम की हालात एकदम से खराब हो गयी और उन्हें सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में ले जाने की जरूरत पड़ गयी लेकिन सघन चिकित्सा कक्ष उस समय खाली नहीं था और अंततः सोमवार की सुबह मंसूर आलम ने दुनिया को हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

जाने-माने फिल्म पत्रकार और अपने किस्म के अदभुत इंसान ब्रजेश्वर मदान नहीं रहे

Prabhat Ranjan : अचानक बहुत दुखी और अकेला महसूस कर रहा हूँ. आज मैंने अचानक वेबसाईट जानकीपुल.कॉम पर एक कमेन्ट देखा. कमेन्ट कल शाम का था. बस एक लाइन लिखी थी- brajeshwar madan is no more! कमेन्ट आदित्य मदान का था, जो उनका भतीजा है. पढ़कर सन्न रह गया. हालाँकि बरसों से उनसे कोई संपर्क नहीं था. आखिरी बार जब उनसे बात हुई थी तो लकवे के कारण उनके मुंह से आवाज नहीं निकल पा रही थी. उनको उस तरह से बोलते देख मैं इतना डर गया कि मैंने फिर कभी उनसे बात करने की कोशिश भी नहीं की. लेकिन मन में यह संतोष था कि वे जीवित हैं. लेकिन इस कमेन्ट को पढने के बाद वह जाता रहा.

(ये तस्वीरें कई बरस पहले मदान साहब की बीमारी के बाद स्वास्थ्य लाभ की है.)