भुलक्कड़ नितिन गडकरी (देखें वीडियो)

BALLIA में नितिन गडकरी भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र तिवारी की सभा में प्रत्याशी का नाम बार बार वीरेंद्र तिवारी लेते रहे। और, देखिए, भाषण के आखिर में कितना हवाई टाइप का वादा करते हैं गड़करी। इसी को कहते हैं चुनावी भाषण। कुछ भी बोल जाइए, कुछ भी पेल जाइए।

बीजेपी उम्मीदवार उपेंद्र तिवारी के समर्थन में आज केंद्रीय मंत्री भारत सरकार नितिन गडकरी फेफना विधानसभा के बलिया के गड़वार क्षेत्र में पहुंचे। यहाँ उन्होंने अपने बीजेपी उम्मीदवार उपेंद्र तिवारी के लिए विशाल जनसभा की। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अपने बीजेपी उम्मीदवार का नाम बार बार भूलते नजर आये। उपेंद्र तिवारी की जगह बार बार विरेंद्र तिवारी संबोधित कर रहे थे। मंत्री जी एक ही बार नहीं बल्कि कई बार अपने उम्मीदवार का नाम सही नहीं ले पाये। मैदान में बैठी जनता भी काफी आश्चर्य चकित थी।

वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

https://youtu.be/qbeaqlx4fS0

बलिया से संजीव कुमार की रिपोर्ट.


ये भी देखें….

पूरे भाषण में आलू आलू करते रहे लेकिन आलू का भाव नहीं बता पाए नितिन गडकरी, देखें वीडियो : https://youtu.be/-qI6pSh9sEE

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भाजपा का मुद्दा हिन्दू-मुस्लिम पर आकर क्यों अटक जाता है?

…आखिर कब तक काटोगे नफरत की राजनीति की फसल? उत्तर प्रदेश में चुनावी घमासान चल रहा है। वैसे तो कई संगठन चुनावी समर में हैं पर असली मुकाबला सपा-कांग्रेस गठबंधन, बसपा और भाजपा के बीच है। बसपा भापजा पर निशाना साधते हुए कानून व्यवस्था पर उंगली उठा रही है तो सपा सरकार की उपलब्धियां गिना रही है और कांग्रेस केंद्र सरकार की खामियां गिनाकर अपने को साबित कर रही है। इन सबके बीच भाजपा केंद्र में ढाई साल से ऊपर हो जाने के बावजूद भावनाओं का सहारा लेकर वोटों का ध्रुर्वीकरण करने का खेल खेल रही है।

चुनावी शुरुआत में भले ही भाजपा प्रचारकों ने कानून व्यवस्था पर उंगली उठाई हो पर हर चुनाव की तरह ही इन चुनाव में भी उसका एकसूत्रीय एजेंडा हिन्दू वोटों का ध्रुर्वीकरण करना है। जहां भाजपा अध्यक्ष  अमित शाह ने कांग्रेस, सपा व बसपा को ‘कसाब’ की संज्ञा दे दी वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कब्रिस्तान और श्मशान के लिए आवंटित जमीन पर हिन्दू वाटबैंक को रिझाने की कोशिश की वहीं और ईद व दीवाली पर लाइट को लेकर वोटों का ध्रुर्वीकरण करने का प्रयास किया। यहां तक कि अब ट्रेन हादसे को लेकर एक विशेष वर्ग पर हमला बोला।

इसमें दो राय नहीं कि चुनाव के समय वोटों के ध्रुर्वीकरण को लेकर तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं पर क्या हर चुनाव में भाजपा के पास बस भावनात्मक मुद्दे ही हैं। किसी देश का प्रधानमंत्री किसी प्रदेश की सरकार की नीतियों पर उंगली उठाए तो उससे उसका कद गिराता है। यदि किसी प्रदेश में कहीं गलत हो रहा है तो आप तो केंद्र में बैठे हैं। आप सब कुछ कर सकते हैं, तो क्यों नहीं करते। अमित शाह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार में उनकी सरकार बनते ही बूचड़खाने बंद करा दिये जाएंगे। गो हत्या नहीं होगी। प्रधानमंत्री कहते हैं किसानों का कर्जा माफ कर दिया जाएगा।

मेरी समझ में तो यह नहीं आता कि जब ये लोग केंद्र में सरकार चला रहे हैं तो केंद्र की उपलब्धि पर वोट क्यों नहीं मांगते? वैसे भी जनता ने मोदी जी को प्रचंड बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बनाया है। जहां तक कर्जा माफ करने की बात है तो आप तो पूरे देश के किसानों का कर्जा माफ कर सकते हैं। गो हत्या की बात है तो देश के आधे प्रदेशों में तो आपकी ही सरकरा चल रही है तो इतने बड़े स्तर पर मांस का निर्यात कैसे हो रहा है। बात गो हत्या की ही क्यों पशु हत्या की क्यों नहीं करते ? भैंसा, भैंस, बकरी, बकरा, सूअर क्या जीव नहीं हैं क्या?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आगरा एक्सप्रेस, लखनऊ मेट्रो, पेंशन आदि उपलब्धियां गिना तो रहे हैं पर भाजपा का मुद्दा तो बस हिन्दू मुस्लिम पर आकर अटक जाता है। बेरोजगारी की बात नहीं करेंगे। भ्रष्टाचार की बात नहीं करेंगे। शिक्षा में सुधार की बात नहीं करेंगे।  किसान आत्महत्या की बात नहीं करेंगे ? महंगाई की बात नहीं करेंगे ? नोटबंदी के चलते हुई परेशानी की बात नहीं करेंगे? भाईचारे की बात नहीं करेंगे। देश व प्रदेश को कैसे विकास के रास्ते पर ले जाएंंगे, यह नहीं बताएंगे। बस समाज में जातिवाद, धर्मवाद, हिन्दू-मुस्लिम, तेरा-मेरा का जहर खोलकर सत्ता हासिल करनी है।

देश के बंटवारे के समय गांधी जी ने मुस्लिमों को रोकते हुए यही तो कहा था कि हम देश को विभिन्न संस्कृतियों, विभिन्न जातियों व विभिन्न धर्मों का ऐसा धर्मनिरपेक्ष देश बनाएंगे जो दूसरे देशों के लिए मिसाल होगा तो फिर यह बांटने की नीति क्यों? नफरत की नीति क्यों? हमारे समाज में तो बड़ा छोटों के प्रति त्याग व बलिदान की भावना रखता है। करना आपको हिन्दुओं के लिए भी कुछ नहीं है। बस राजनीतिक रोटियां सेंकनी हैं। यदि करना है तो बताओ विवादित ढांचे के ध्वस्त होने में मरे युवाओं के लिए आपने क्या किया? मुजफ्फरनगर दंगे में मरे लोगों के लिए आपने क्या किया? किसी गरीब हिन्दू की बेटी की शादी में दो रुपए का कन्या भिजवाया।

किसी गरीब हिन्दू बच्चे की पढ़ाई में दो पैसे का  योगदान दिया। किसी गरीब बेसहाय परिवार की मदद की? आप तो भूमि अधिग्रहण कानून लागू कर किसानों की जमीन हड़पना चाहते थे। श्रम कानून में संशोधन कर मजदूर की मजदूरी गिरवी रखना चाहते थे। तो आप कैसे हुए किसान व मजदूर के हितैषी? आपको तो बस समाज को बांटने की राजनीति करनी है। कब तक काटोगे नफरत की राजनीति पर खड़ी की गई इस वोटबैंक की फसल को। इस देश को आपस में मिलकर विकास के रास्ते पर ले जाने की जरूरत है। मिलजुल कर भाईचारा कायम करने की जरूरत है।

लेखक चरण सिंह राजपूत कई अखबारों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं और मीडियाकर्मियों की हक की लड़ाई के लिए सक्रिय रहते हैं.

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काटजू ने ऐलान किया- बिहार में होगी महागठबंधन की एकतरफा जीत

Sweep in favour of the Mahagathbandhan in Bihar

Markandey Katju : I predict not just a bare victory but a sweep in favour of the Lalu-Nitish alliance in the coming Bihar elections. This is based on simple mathematics. As I had said in an earlier post, voting in most states in India, including Bihar, is on the basis of caste and religion. The exception to this rule is when there is a wave.

In the May 2014 elections there was a Modi wave, as people, particularly the youth, were captivated by the magic slogan of ‘vikas’, which promised millions of jobs to our huge population of unemployed youth, whose voting age had been reduced from 21 to 18 by a Constitutional amendment of 1988.

This slogan, however has proved hollow, as jobs have not been created, and the youth have been left high and dry. While there has been a lot of big talk, hardly anything has been done by Modi except stunts like ‘Swatchata Abhiyan’ ( I visited Varanasi yesterday and found it as dirty as ever, and I spoke to many citizens there who said the same ), Yoga Day, etc and meaningless foreign trips which must have cost a huge amount of money and whose end result is ‘ khoda pahaad, nikli chuhiya’.

So the Modi wave has totally dissipated, and now voting in Bihar will be on the traditional lines of caste and religion.
Here are the caste demographics of Bihar which I got from the net :

Population (%)

OBC/EBC 51% ( Yadavs -14%, Kurmis- 4%,[24][25]( EBCs – 30%[26][27][28][29][30] -includes

kushwahas – 6% Koeris -8%,[31] Teli-3.2%))

Mahadalits* + Dalits(SCs) 16%[32][33]

Muslims 16.9%[10]

Forward caste 15% [34](Bhumihar -3%, Brahmin-5%,[35] Rajputs- 6%, Kayasth- 1%)

Adivasis(STs) 1.3% [36][37]

Others 0.4% (include Christians,Sikhs,Jains)

As per, 2011 Census of India , Scheduled Castes constitute 16% of Bihar’s 104 million population.[38] The census identified 21 of 23 Dalit sub-castes as Mahadalits.[39] Mahadalit community consists of the following sub castes – Bantar, Bauri, Bhogta, Bhuiya, Chaupal, Dabgar, Dom (Dhangad), Ghasi, Halalkhor, Hari (Mehtar, Bhangi), Kanjar, Kurariar, Lalbegi, Musahar, Nat, Pan (Swasi), Rajwar, Turi, Dhobi, Pasi, Chamar and Paswan (Dusadh).[40] Paswan caste was initially left out of the Mahadalit category.[41][42] Adivasis (Scheduled Tribes) constitute around 1.3% of Bihar population.[43][44] Tribals include Gond, Santhal and Tharu communities in Bihar.[45][46]

Extremely Backward Class (EBCs) are also sometimes referred to as Most Backward Class(MBCs). There are 130-odd EBC castes in Bihar. Yadavs and Kurmis constituting 19% and Muslims about 17% will solidly vote for the Lalu-Nitish alliance, which makes it 36%. Muslims will vote for it ( despite Owaisi, who is regarded as a BJP vote splitter by Muslims, and who will therefore not be misled by him ) because Muslims are feeling very insecure after love jihad, ghar wapasi, speeches of Adityanath, Sadhvi Niranjan Jyoti ( calling them haramzadas) and incidents like in Muzaffarnagar, Ballabhgarh, and the latest one at Dadri.. So they will solidly vote for the alliance. A section of the other backward castes, say 8-10%, will also vote for the alliance, as Lalu has successfully described it as a fight between the backwards and the forward castes. Thus the tally of the Nitish-Lalu aalliance comes to about 45% votes, which represents a sweep ( BJP got a majority in the Lok Sabha with only 31% votes )

As regards, the NDA, its support is from the upper castes, and a section of EBCs( also called MBCs ) and a section of dalits, because of Paswan, Manjhi and Upendra Kushwaha. The upper castes in Bihar, as can be seen from the above chart, are altogether only 15%. Paswan does not have the support of all the dalits ( who are divided into a large number of sub castes) in Bihar, unlike Mayawati who has the support of almost all the dalits in U.P. So he may get the NDA about 6-7% votes. Manjhi may get 7-8% MBC votes, and Kushwaha may get 4%votes.

Thus the total tally of NDA votes is 15+7+8+4=34%

There is clearly going to be a sweep in favour of the Mahagathbandhan in Bihar.

सुप्रीम कोर्ट के चर्चित जज रहे और प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के चेयरमैन रह चुके बेबाक शख्सियत मार्कंडेय काटजू के फेसबुक वॉल से.

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एक्सप्रेस यूनियन से नायडू-नंदू गुट का सूफड़ा साफ, पीयूष-बीएन पैनल भारी जीत

नई दिल्ली । इंडियन एक्सप्रेस न्यूपेपर्स वर्क्स यूनियन के चुनाव में नायडू-नंदू गुट का सूफड़ा साफ। नायडू-नंदू गुट की यह लगातार दूसरी हार है। यूनियन के कल हुए चुनाव में कार्याकारिणी के तीन स्थानों को छोड़कर बाकी सभी पदों पर पीयूष-बीएन पैनल के उम्मीदवारों ने नायडू-नंदू गुट के उम्मीपदवारों को भारी अंतर से पराजित किया। अध्यक्ष पद पर बीएन पांडेय ने नंदू पाठक को तीस मतों से अधिक से हरा दिया। नायडू गुट के पाठक को 88 जबकि बीएन पांडेय को 118 मत मिले।

इसी तरह महासचिव पद के लिए पीयूष वाजपेयी को 118 जबकि नायडू को 81 मत मिले। पिछले चुनाव में भी नायडू को बुरी तरह हार मिली थी। इसके अलावा पीयूष –बीएन पैनल ने उपाध्याक्ष के दोनों पदों पर कब्जा कर लिया। वीरेंद्र नौटियाल और इंद्रजीत वर्मा को उपाध्यक्ष चुना गया है। कोषाध्यक्ष पद के लिए राजेंद्र गोयल ,संयुक्त सचिव के लिए श्यामनंद ,संगठन सचिव के लिए राजकुमार पांडेय, सचिव के लिए रमेश नेगी को चुना गया है। इसके अलावा कार्याकारिणी के नौ सदस्य निर्विरोध चुने गए हैं बाकी के तीन पद नायडू-नंदू के खाते में गया । चार अन्य पर पीयूष-बीएन पैनल के सदस्य चुने गए।

मजीठिया//पीटीआई महाप्रबंधक हाजिर हो

नई दिल्‍ली। पीटीआई में पूरी तरह मजीठिया वेज बोडर्स की सिफारिशों को लागू नहीं करने और इस संबंध में संस्थान के प्रबंधन द्वारा दावा किए गए कोई दस्ताीवेज नहीं दिखा पाने की शिकायत श्रम विभाग ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के यहां की है। इस पर 24 तारीख को सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया संस्थान में संशोधित वेतनमान 1 अप्रैल 2014 से दिया जा रहा ।संस्थान का निरीक्षण 5 जून को किया गया। बताया गया है कि जो बकाया एरियर हे वो फेडरेशन के साथ समझौते के अनुसार नहीं दिया गया। निरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार प्रबंधन ने वह कथित समझौता पत्र पेश नहीं कर सका। निरीक्षक ने पीटीआई के महाप्रबंधक शकिल अहमद को दस्तावेज पेश करने को कहा था। अब इस आरोप में श्रम विभाग ने सक्षम अदालत से शिकायत की है।

फेसबुक पेज ‘मजीठिया मंच’ से साभार.

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पत्रकार समिति का चुनाव : घोषणा पर कुकुरझौं-झौं, भड़की हेमंत एंड कम्‍पनी का शिगूफा – सजनी हम भी राजकुमार

लखनऊ : उप्र मान्‍यताप्राप्‍त संवाददाता समिति की नयी कार्यकारिणी का चुनाव कार्यक्रम घोषित हो गया है। पूरी प्रक्रिया 21 दिनों में सम्‍पन्‍न होने वाली है। इस चुनाव कार्यक्रम की शुरूआत 17 अगस्‍त 15 को होगी। इस दिन समिति के विभिन्‍न पदों के लिए नामांकन की शुरू हो जाएगा, जो 22 अगस्‍त तक चलेगा। इस समिति के लिए मतदान छह सितम्‍बर को होगा, जो मतगणना तक जारी रहेगा। चुनाव परिणामों की घोषणा उसी दिन कर दी जाएगी।

उप्र मान्‍यता प्राप्‍त संवाददाता समिति की चयन समिति के चयन को लेकर जैसे ही कार्यक्रम घोषित किया गया, पिछले तीन साल से इस काबिज पर काबिज पुरानी कमेटी के लोग भड़क गये। नये चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही हेमंत-कलहंस गुट ने एक बयान जारी करके कहा कि यह बेईमानी है। इस गुट ने कहा कि अब यह चुनाव कराने के लिए तेज कार्रवाई की जाएगी। इस समिति का कहना है कि उस गुट के लोग अब 21 अगस्‍त को बैठक करेंगे। 

उधर हेमंत-कलहंस कम्‍पनी के विरोधी गुट का कहना है कि हेमंत-कलहंस का यह पैंतरा दरअसल बेईमानी, भ्रष्‍टाचार, कदाचार और असंवैधानिकता पर पिछले तीन साल से कुर्सी पर जबरियन कब्‍जाई अपनी पुरानी रणनीति का ही एक अंग हैं। उनका कहना है कि चुनाव तो अब तयशुदा वक्‍त पर होंगे।

इस नये निर्वाचन के लिए निर्धारित निर्वाचन समिति के सदस्‍य शिवशंकर गोस्‍वामी, विजय शंकर पंकज, किशोर निगम, संजय राजन और मनोज छाबडा का कहना है कि ताजा चुनाव के तहत 23 को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 24 को नामांकन वापसी हो सकेगी। नामांकन सूची का प्रकाशन 25 को और सदस्‍यता शुल्‍क जमा करने की आखिरी तारीख 28 को है। मतदाता सूची का प्रकाशन 30 अगस्‍त को होगा, जबकि मतदान 6 सितम्‍बर को होने के बाद मतगणना के बाद परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी। 

उधर, पिछले तीन साल से समिति की कुर्सियों से बर्खास्‍तशुदा कमेटी के लोगों ने नये चुनाव की कार्रवाई पर अपनी अंगड़ाई तोड़ी है और कहा है कि यह अवैध है। ये बर्खास्‍तशुदा लोग हैं। इसमें पत्रकारों को बांटनेकी साजिश है और मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भ्रमित करने की साजिश है। बर्खास्‍तशुदा समिति के लोगों ने कहा कि क्रियाकलापों, उपलब्धियों, आगामी चुनाव, उसकी प्रक्रिया, तारीख व समस्त कार्यक्रम पर चर्चा के लिए आम सभा की अधिकृत बैठक शुक्रवार 21 अगस्त को आहूत की है। 

बर्खास्‍तशुदा लोगों का दावा है कि समिति की कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष सत्यवीर सिंह, सचिव सिद्धार्थ कलहंस, संयुक्त सचिव देवकी नंदन मिश्रा, सदस्य टीबी सिंह, दिलीप सिन्हा, अरुण त्रिपाठी, जितेश अवस्थी, नायला किदवई, प्रदीप शाह कुमांया, श्रीधर अग्निहोत्री व अन्य वरिष्ठ जनों से चर्चा हो चुकी है।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर के फेसबुक वाल से

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उ.प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए कमेटी गठित

लखनऊ : वर्षों बाद उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए गत दिवस लखनऊ में आपसी सहमति हो जाने के बाद पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। 

गौरतलब है कि संगठन के अध्यक्ष एवं महासचिव समेत अन्य पदाधिकारियों एवं कमेटी सदस्यों द्वारा स्वयंभू तरीके से सारी प्रक्रिया संचालित की जा रही थी। सत्ता और शासन के बीच अपनी धमक के लिए येन-केन प्रकारेण अपना प्रभुत्व बनाए रखते हुए पदाधिकारी दो सत्र से संगठन पर मनमाना तरीके से हावी थे। इसके खिलाफ लगातार पत्रकारों में गुस्सा बढ़ता जा रहा था। 

यहां गत दिवस चुनाव के संबंध में हुई विजय शंकर पंकज की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में कमेटी का गठन कर दिया गया। इस पांच सदस्यीय कमेटी में विजय शंकर पंकज, शिवशंकर गोस्वामी, किशोर निगम, संजय राजन महान एवं मनोज छाबड़ा को चुनाव प्रक्रिया संबंधी निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है। 

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बाराबंकी प्रेस क्लब चुनाव में अखिलेश अध्यक्ष और कृष्ण कुमार महामंत्री निर्वाचित

बाराबंकी। आखिरकार शनिवार को बाराबंकी प्रेस क्लब का चुनाव सर्वसम्मति से जिला पंचायत सभागार में सम्पन्न हो गया। इस दौरान पत्रकारों ने अखिलेश ठाकुर को अध्यक्ष, रमेश वर्मा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा कृष्ण कुमार द्विवेदी राजू भैया को महामंत्री चुन लिया। उपाध्यक्ष पद के लिए सरफराज, ऑडीटर के लिए परवेज अहमद तथा कोषाध्यक्ष पद पर चन्द्रकांत मौर्या चुने गये। पत्रकारों ने सभी पदाधिकारियों को माला पहनाकर बधाई दी। 

जिला पंचायत सभागार में पूरे जनपद से जुटे पत्रकारों ने बाराबंकी प्रेस क्लब का गठन करके उस पर अपनी अन्तिम मोहर लगा दी। लगभग तीन घंटे चली हंगामी बैठक के बीच पत्रकारों ने बाराबंकी प्रेस क्लब के गठन को तो अन्तिम रूप दे ही दिया, क्लब के पदाधिकारियों का चयन भी चुनाव प्रक्रिया को परे धकेल कर सर्वसम्मति से कर दिया। इस दौरान पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि क्लब का गठन आज ही हो जाना चाहिए तथा हमें पूर्व में घोषित चुनाव प्रक्रिया से अलग हटकर एकता के साथ इसे जन्म देना चाहिए। 

पत्रकारों की मंशा को भांपते हुए चुनाव अधिकारी प्रदीप सारंग ने तत्काल चुनाव कराये जाने की घोषणा कर दी। आखिरकार जब अध्यक्ष पद की बात आयी तो पत्रकारजनों ने अखिलेश ठाकुर के नाम का प्रस्ताव किया, जिसे सभी ने सर्वसम्मति से अपना समर्थन दिया। इसके उपरान्त ठाकुर प्रेस क्लब अध्यक्ष चुन लिए गए। महामंत्री पद के लिए कृष्ण कुमार द्विवेदी राजू भैया के नाम का प्रस्ताव पत्रकारों ने रखा। ध्वनिमत से ये प्रस्ताव भी पारित हो गया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर रमेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष पद पर मो. सरफराज, ऑडिटर पद पर परवेज अहमद तथा कोषाध्यक्ष पद पर चन्द्रकांत मौर्य को सर्वसम्मति से चुना गया। 

इसके साथ ही सदन ने चुने गये पदाधिकारियों को ये अधिकार भी सौंप दिया कि वे क्लब की पूरी कार्यकारिणी का गठन आपस में विचार विमर्श करके करें। इस कार्यकारिणी में तहसील स्तर के नुमाइंदों को भी प्रमुखता के साथ शामिल किया जायेगा और आने वाले समय में तहसील स्तर पर भी तहसील प्रेस क्लबों का चुनाव किया जायेगा। अखिलेश ठाकुर ने कहा कि पत्रकारों के विश्वास पर वह खरा उतरने का प्रयास करेंगे तथा उनके स्वाभिमान के लिए हर सम्भव संघर्ष भी करेंगे। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द जिला मुख्यालय पर प्रेस क्लब के जमीन की व्यवस्था का प्रयास किया जायेगा। महामंत्री ने कहा कि जिले के सभी पत्रकारों के स्वाभिमान के लिए बाराबंकी प्रेस क्लब हमेशा बेहतर कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होगा कि कोई भी पत्रकार साथी पीछे न छूटे बल्कि हम सभी एकजुट होकर आगे बढ़ें। 

चुने गये पदाधिकारियों को पत्रकारों ने फूल मालाओं से लाद दिया। इस मौके पर पत्रकार महंत बीपी दास, रिजवान मुस्तफा, हरिप्रसाद वर्मा, संजय शर्मा, तारिक खान, आसिफ हुसैन, एसपी सिंह, डीके गोस्वामी, मो. अतहर, विषम सिंह, प्रेम शुक्ला, महेन्द्र श्रीवास्तव, दिनेश पंडित, मनीष ठाकुर, पाटेश्वरी प्रसाद, श्रुतिमान शुक्ला, कवेन्द्र पाण्डेय, बबलू शर्मा, अरूण पाठक, अमित पाण्डेय, मो0 अकील अहमद, सरदार सतनाम सिंह, सरदार त्रिपाठी, सुहेल अहमद, विनय ठाकुर, आरबी सिंह, दीपक मिश्रा, दीपक निर्भय, कामरान अल्वी, यासिर अराफात, शमीम अंसारी, देवेन्द्र मिश्रा, डीपी तिवारी सहित सैकड़ों पत्रकार उपस्थित थे।

संरक्षक मण्डल गठित : पत्रकारों के जनरल हाउज में आज प्रेस क्लब के उपरोक्त पदाधिकारी तो चुने ही गए, इस दौरान संरक्षक मंडल में वरिष्ठ पत्रकार हसमत उल्लाह, केपी शुक्ला तथा सतीश श्रीवास्तव का भी चयन किया गया। 

नीतू कांड की सीबीआई जांच की मांग : पत्रकारों के जनरल हाउज में आज उपस्थित खबरनवीशों ने एक स्वर में शासन द्वारा नीतू अग्निकांड की सीबीसीआईडी जांच को खारिज कर दिया। इस दौरान चुने गये पदाधिकारियों व अन्य कलमकारों ने इस मामले की सीबीआई से जांच कराये जाने की जोरदार मांग की। पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि जब तक इस मामले की सीबीआई जांच नहीं होगी। तब तक सही तथ्य सामने नहीं आ पायेंगे। दरअसल सीबीसीआईडी जांच आरोपियों को बचाने के लिए है, जिसकी सभी पत्रकार निन्दा करते हैं। 

पल्लवी को दी श्रद्धांजलि : लखनऊ से प्रकाशित एक हिन्दी समाचार पत्र के बदोसरायं पत्रकार श्याम मनोरथ रावत उर्फ रामू की पुत्री पल्लवी की सड़क हादसे में हुई मौत की सूचना पर पत्रकारों ने आज चुनावी प्रक्रिया के सम्पन्न होने के उपरान्त दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि भी दी। 

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इन्‍दौर प्रेस क्‍लब अध्यक्ष खारीवाल की सदस्यता समाप्त, चुनाव की अटकलें तेज

इंदौर प्रेस क्लब के चुनाव को लेकर इन दिनो घमासान छिड़ा हुआ है। प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। उन्हें वर्ष 2010 में निगोशिएबल इंस्टूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत कोर्ट उठने तक की सजा सुनाई गई थी। खालवाल की सदस्यता समाप्ति का आदेश प्रेस क्लब के महासचविव अरविंद तिवारी ने जारी की है। 

रविवार को जारी आदेश में कोर्ट के प्रकरण का हवाला दिया गया है। महासचिव के मुताबिक खारीवाल को 27 अगस्त 2010 को चेक अनादरण के एक मामले में न्याययिक मजिस्ट्रेट संगीता तिवारी ने सजा सुनाई थी। 

मदनलाल राठौर विरुद्ध खारीवाल प्रकरण में यह फैसला दिया गया था। इसी मामले में आईपीसी कीधारा 357-3 के तहत सात हजार रुपये प्रतिकर देने के भी आदेश थे, ऐसा न रने पर तीन माह जेल भेजने के आदेश दिये गए थे। तिवारी का कहना है कि कुछ सदस्यों ने मामला 20 जून को उनके संज्ञान में लाया। प्रेस क्लब के विधान की धारा 8-ग के अनुसार किसी भी आपराधिक मामले में सदस्य को सजा होने पर उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। कोर्ट के आदेश और विधान के मुताबिक खारीवाल की सदस्यता समाप्त हो गई है। 

प्रवीण खारीवाल का कहना है कि महासचिव की कार्रवाई विधान प्रक्रिया के अनुसार नहीं है। मामले में सुनवाई का अवसर दिए बिना ही सदस्यता समाप्त कर दी गई। यह चेक अनादरण का मामला है जबकि प्रेस क्लब का नियम आपराधिक प्रकरणों से संबधित है। 

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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के चुनाव में राहुल जलाली का पूरा पैनल भारी मतों के अंतर से जीता

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के चुनाव में राहुल जलाली भारी मतों के अंतर से अध्यक्ष निर्वाचित हो गए। उन्हें 206 मतों के मुकाबले कुल 792 मत मिले। उनके अलावा उपाध्यक्ष पद पर 323 मतों के जवाब में श्री कृष्णा 842 वोटों से विजयी घोषित किए गए। जनरल सेक्रेटरी पद पर नदीम 389 मतों के समानांतर 884 वोट से निर्वाचित हुए। विनीता यादव 370 के मुकाबले 828 मतों से ज्वाइंट सेक्रेटरी चुन ली गईं। कोषाध्यक्ष पद पर अरुण जोशी को 443 मतों के मुकाबले 870 वोट मिले। 

गौरतलब है कि इस बार चुनाव मैदान में दो पैनल एक गौतम लाहरी का और दूसरा राहुल जलाली का आमने सामने थे। राहुल के पैनल में जहां, कई पुराने चेहरे मैदान में थे, वही लाहरी का पैनल बदलाव के लिए ताकत आजमाने मैदान में उतरा था। इस बार के चुनाव की एक और खासियत रही कि पहली बार उम्मीदवारों को एक-एक लाख रुपये जमानत राशि के रुप में जमा करने पड़े थे। गौतम लाहरी के पैनल के सभी प्रत्याशी पराजित हो गए सिवाय एक महिला प्रत्याशी के।

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दिल्ली प्रेस क्लब चुनाव 30 को, लाहरी और जलाली पैनल आमने-सामने

दिल्ली प्रेस क्लब का चुनाव 30 मई को है। दो पैनल मैदान में हैं। एक गौतम लाहरी का और दूसरा राहुल जलाली का। राहुल के पैनल में जहां, कई पुराने चेहरे मैदान में हैं, लाहरी का पैनल बदलाव के ताकत आजमा रहा है। इस बार चुनाव में पहली बार उम्मीदवारों का एक लाख रुपये जमानत राशि के रुप में जमा करना पड़ रहा है जिसको चुनाव में मुद्दा बनाया गया है। दोनों पैनलों के अपने-अपने दावे हैं। 

एक पैनल में गौतम लाहरी स्वयं अध्यक्ष पद की लड़ाई लड़ रहे हैं, उनके अलावा अबंतिका घोष उपाध्यक्ष, प्रदीप श्रीवास्तव महासचिव, राकेश आर्य संयुक्त सचिव, संजय कुमार कोषाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं। कमेटी सदस्यता की चुनावी टक्कर में हैं अन्नपूर्णा झा, रमन कुमार, श्याम सुंदर, अशीत कुनाल, मिथिलेश कुमार सिंह, हिमांशु मिश्रा, दीपक कुमार और एसएस शम्स। 

राहुल जलाली के पैनल में अध्यक्ष पद के लिए वह स्वयं संघर्षरत हैं, उनके अलावा श्रीकृष्णा उपाध्यक्ष, नदीम अहमद काजमी महासचिव, विनिता यादव संयुक्त सचिव, अरुण जोशी कोषाध्यक्ष पद के लिए लड़ रहे हैं। कमेटी सदस्य पद के लिए प्रफुल्ल कुमार सिंह, अजय झा, सीएस लूथरा, उज्जवल कुमार, अजय अग्रवाल, दिनेश तिवारी, कोमल शर्मा, मानस प्रतिम गोहन, मनन कुमार, नीरज ठाकुर, संजय सिंह, विश्व रमन केसर, सुधी रंजन सेन, विजय शंकर चतुर्वेदी, रवि बत्रा, मृंगाक प्रभाकर मैदान में हैं। 

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दिल्ली प्रेस क्लब चुनाव में राहुल जलाली-नदीम पैनल की तरफदारी

दिल्ली : प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का 30 मई, 2015 को चुनाव होने जा रहा है। चुनाव में राहुल जलाली-नदीम पैनल के लिए वोट मांग रहे पैरोकारों का कहना है कि इस बार का चुनाव काफी अहम है। इस साल प्रेस क्लब की नई इमारत की नींव रखी जानी है। पैनल का दावा है कि क्लब की बेहतरी के लिए कार्यकारिणी के तहत कई उप-समितियां गठित करेंगे और उनमें कर्मठ सदस्यों को मनोनीत करेंगे। मीडिया से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएग। फिल्म क्लब, गोष्ठियां, सेमीनार और खेलों से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रेस क्लब में कीमतों को तर्कसंगत बनाए रखने के लिये गंभीर प्रयास किये जाएंगे। वैट, सेल टैक्स, सर्विस टैक्स जैसे सरकारी करों में रियायत के लिए सरकार से बातचीत की जाएगी।

दावा है कि पिछले चार साल में प्रेस क्लब के नए भूखंड के लिए पूरा भुगतान केंद्र सरकार को कराने में वे सफल रहे हैं। वे इस निरंतरता को बनाए रखना चाहते हैं ताकि एक भव्य और आधुनिक प्रेस क्लब इमारत का निर्माण कर अपने सदस्यों को गौरवान्वित होने का सुखद मौका दे सकें। नई इमारत का निर्माण एन.बी.सी.सी., सी.पी.डब्लू.डी अथवा दिल्ली मेट्रो जैसी सरकारी संस्थाएं ही करेंगी ताकि भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश ही न रहे। वैसे भी नई दिल्ली के लुटियन जोन में प्राइवेट बिल्डर्स को निर्माण की अनुमति नहीं है। 

इस साल (2015) के चुनाव में कंपनी अधिनियम 25 के तहत सभी उम्मीदवारों को एक-एक लाख रुपय की राशि जमानत के तौर पर देनी पड़ी है। सरकार के इस निर्णय का विरोध किया गया और इसे निरस्त रखने के कई प्रयास किये। इस निर्णय में संशोधन लाने का अधिकार केवल संसद को ही हैं।

संसद ने सभी कंपनियों के लिये ये कानून 2013 में पारित किया था। प्रेस क्लब की स्थापना 1957 में कंपनी एक्ट के तहत हई थी। इसलिए यह कानून मानने के लिये बाध्य हैं। दिल्ली जिमखाना और चेम्सफोर्ड समेत कई क्लब, सामाजिक संगठन और चैरिटबल संस्थानों में भी यह कानून लागू हो गया है। कोशिश होगी कि इस संगठनों के साथ मिलकर एक लाख रुपये की जमानत राशि को निरस्त बनाने के लिए सरकार पर कानून में संशोधन करने के लिये दबाव डालें। 

इस वर्ष की कार्यकारिणी के प्रमुख कार्यों का ब्योरा देते हुए बताया गया है कि क्लब को आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा किया गया। क्लब के नए भवन के लिये सरकार को पूरा भुगतान किया गया। सभी सदस्यों के लिये स्वास्थ्य बीमा जारी रखा गया। क्लब में कम्प्यूटरों पर काम करने के लिये टर्मिनलों की व्यवस्था की गई। पूरे क्लब में वाई-फाई की व्यवस्था की गई। क्लब का सुन्दरीकरण किया गया। रविवार को विशेष व्यंजन और पकवानों की व्यवस्था की गई। सदस्यों के लिए समय-समय में स्वास्थ्य संबंधी जांच की व्यवस्था की। बाहरी और अनावश्यक लोगों को क्लब परिसर में आने से रोकने के लिये रेल आरक्षण केंद्र का स्थान बदला गया। प्रेस क्लब की त्रैमासिक “The Scribes World” पत्रिका के सफलता पूर्वक 3 अंकों का प्रकाशन हुआ। पहली बार क्लब में पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। 

इस पैनल ने आगामी कार्यों का ब्योरा देते हुए बताया है कि क्लब की नई इमारत का काम शुरू करवाया जाएगा। नई इमारत का निर्माण सिर्फ सरकारी कंपनियों से ही करवाया जाएगा। चुनाव लड़ने के लिये एक लाख रुपये की कानून जमा राशि का निरस्त करने के लिये सरकार से बातचीत की जाएगी। क्लब में कीमतों को और तर्कसंगत बनाने पर जोर रहेगा। स्टॉफ की कार्यशेली में और गुणात्मक सुधार पर बल दिया जाएगा। मीडिया संबंधी कार्यक्रमों में और वृद्धि की जाएगी। सदस्यों के लिये बीमा योजना का और विस्तार किया जाएगा। RNI से रजिस्टर्ड प्रेस क्लब की त्रैमासिक पत्रिका “The Scribes World” का अबाध गाति से नियमित प्रकाशन की व्यवस्था की जाएगी।  

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मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का चुनाव जल्द कराने पर रायशुमारी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त संवाददाता प्रभात त्रिपाठी अपने सभी साथियों के सामने उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के असंवैधानिक कार्यकाल और शीघ्र से शीघ्र नये चुनाव कराने के एलान के लिये राय लेना चाहते हैं। वह जानना चाहते हैं कि क्या वक्त नहीं आ गया कि इसका एलान जल्द से जल्द किया जाये। वह लिखते हैं कि मैंने अपने सभी साथियों के सामने कुछ सवाल रखे हैं, क्या यह सवाल सही है, अगर सही है तो मुझे मेल के माध्यम से अपनी राय दें कि इस कार्य के लिये आगे की रणनीति क्या रखी जाये और क्या होनी चाहिये। इस सप्ताह सभी की राय से कोई बैठक का आयोजन हो जाये तो सभी पत्रकारों के हितों के लिये अच्छा होगा। 

”मै कुछ अहम मुद्दे आप लोगों के सामने रखना चाहता हूं कि आखिर उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का महत्व दिन पर दिन क्यों गिर गया है? इस समिति को कुछ लोगों ने जबरदस्ती हाईजैक क्यों कर लिया है? पत्रकारों के हितो में कोई काम क्यों नहीं होते है? हर बार समिति का कार्यकाल दो साल के लिये होता था उसे हेमंत तिवारी की कमेटी ने बिना एजीएम की बैठक बुलाये कार्यकाल तीन साल का कैसे कर लिया? 

” कोई नियम कानून होता है। अगर नियम कानून नहीं है तो समिति का संवैधानिक महत्व क्या रह जाता है। क्या मेरे सभी साथी इस तरह के कृत्य का समर्थन करते है तो आखिर मजबूरी क्या है? क्यो न जल्द से जल्द एजीएम की बैठक बुलाकर वर्तमान कमेटी को भंग करके नये चुनाव का एलान किया जाये। यह सभी सवाल आज उन सभी पत्रकारों के हैx जिन्होंने पिछले चुनाव में कमेटी का चयन तो किया था लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनके मतों का भद्दा मजाक उड़ाया जायेगा और चुनी हुई कमेटी बिना एजीएम की बैठक बुलाये कोई ऐसा निर्णय सभी मतदाताओं पर थोप देगी जो संवैधानिक तौर पर सही नहीं है। बिना बताये कमेटी का कार्यकाल तीन साल का कर लेना कहा तक न्याय संगत है।” 

प्रभात त्रिपाठी लिखते हैं कि ”मेरे यह सभी सवाल अपने यूपी के सभी राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त संवादददाताओं व फोटो ग्राफरों से हैं। चाहे प्रिंट मीडिया हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। फूट लोकतंत्र को कमजोर करती है। मैं यह भी सवाल उठा रहा हूं कि वर्तमान असंवैधानिक समिति को एजीएम की तत्काल बैठक बुलाकर क्यों न भंग करके नया जनादेश लेने के लिये नये चुनाव की घोषणा कर दी जाये। 

प्रभात कुमार त्रिपाठी संपर्क : 9450410050 / samajwadkauday@gmail.com

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इंडियन फेडरेशन ऑफ मीडिया के अध्यक्ष बने राधावल्लभ और चौकसे महासचिव

बिलासपुर / भोपाल : इंडियन फेडरेशन ऑफ मीडिया की अंतरप्रांतीय बैठक में पदाधिकारियों का निर्वाचन किया गया। मध्यप्रदेश के राधावल्लभ शारदा को राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिल्ली के शिवकुमार शर्मा को सेकेट्री जनरल बनाया गया। राधावल्लभ शारदा ने भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार राम मोहन चौकसे को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है। चौकसे राष्ट्रीय अध्यक्ष का सह-प्रभार भी संभालेंगे।   

इसके अलावा सुरेन्द्र साहू उड़ीसा, राज गोस्वामी छत्तीसगढ़, आर.एस.बाबू तमिलनाडु के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, विनोद पांचाल हरियाणा के कोषाध्यक्ष, अशोक नेहरू जम्मू-काश्मीर, निशांत कांबले महाराष्ट्र के महासचिव, देवेन्द्र शर्मा उत्तर प्रदेश, महेश कुमार तिवारी छत्तीसगढ़, अविनाश मिश्रा उड़ीसा, अरुण जैन म.प्र. के लिए सचिव चुने गए हैं। कार्यकारिणी सदस्य के रूप में अशोक टण्डन दिल्ली, मीना विनोदिया जबलपुर म.प्र., अवतार नेहरु उत्तरांचल, रितेश चौरसिया बिहार, रविकुमार हिमांचल प्रदेश, व्ही.व्ही.पी.वेल्यू पुंदीचेरी, लीलाधर शर्मा फजिल्का पंजाब, अशोक पण्डा भिलाई, हर्ष सिंग शहगल जम्मू-काश्मीर, दिग्विजय सिंह जबलपुर, महेश शर्मा महाराष्ट्र , अनिल ज्यानी पंजाब, मनोज मेहता झाबुआ से निर्वाचित किए गए हैं। 

बैठक में पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं पर विचार-विर्मश किया गया। बैठक में चौथे स्तंभ को खबरपालिका के रूप में भारतवर्ष के संविधान में स्थान दिलाने, ग्रामीण अंचल में कार्यरत पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड दिलाने, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ की तरह सभी राज्यों में 60 वर्ष से अधिक उम्र के पत्रकारों को पेंशन और 10 हजार रुपये जीवन यापन भत्ता दिए जाने, रेलवे में अधिमान्य पत्रकारों को ऑनलाईन रिजर्वेशन की सुविधा संबंधी प्रस्ताव रख गए। प्रस्तावों को क्रियान्वित करवाने के लिए एक कोर कमेटी का गठन किया गया। बैठक की अध्यक्षता राधावल्लभ शारदा ने और संचालन उपाध्यक्ष राज गोस्वामी ने किया। बैठक में दिल्ली सहित 21 राज्यों के संगठन प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 

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इंडियन वुमेन प्रेस कार्प (IWPC) के चुनाव में सभी पदाधिकारी निर्विरोध निर्वाचित

 

इंडियन वुमेन प्रेस कार्प यानि IWPC का वर्ष 2015-16 के लिए चुनाव संपन्न हो गया. टीके राजलक्ष्मी, शोभना जैन और रविंदर बावा सहित सभी पदधिकारी व कार्यकारिणी निर्विरोध निर्वाचित घोषित की गई है. महिला पत्रकारों के इस संगठन की स्थापना का 21वां वर्ष चल रहा है. इस संगठन में करीब 700 से अधिक महिला पत्रकार सदस्य हैं. इस वर्ष के लिये घोषित टीम इस प्रकार है…

अध्यक्ष- टीके राजलक्ष्मी (फ्रंटलाइन)
उपाध्यक्ष- शोभना जैन (वीएनआई), मंजरी चतुर्वेदी (नभाटा)
महासचिव- रविंदर बावा (बीबीसी)
कोषाध्यक्ष- अन्नपूर्णा झा (फ्रीलांसर)

कार्यकारिणी- अदिती कपूर (फ्रीलांसर), अंबिका पंडित (टीओआई), अमिती सेन (हिन्दू बिज़नेसलाइन), अरुणा सिंह (साउथ एशियन इन्साईडर), इश्पिता बैनर्जी (फ्रीलांसर), कमलजीत कौर संधु (हेडलाइन्स टुडे,) माधवीश्री (फ्रीलांसर), नारायणी गणेश (टीओआई), प्रीति प्रकाश (फेस एन फैक्ट्स.कॉम), प्रीतपाल कौर (फ्रीलांसर), रंजना सक्सेना (फ्रीलांसर), संतोष मेहता (फ्रीलांसर), सर्जना शर्मा (कबीर कम्युनिकेशन्स), सीमा कौल (न्यूज़ एक्स), श्वेता रश्मि (ललकार), सुमन कंसरा (फ्रीलांसर), सुनीता वकील (समाचार पोस्ट), सुषमा वर्मा (फ्रीलांसर), विभा जोशी (ग्रोथ स्टोरी), विमल इस्सर (फ्रीलांसर).

प्रबंध समिति का चुनाव 18 अप्रैल 2015 को कोर के नई दिल्ली स्थित कार्यालय 5, विंडसर पैलेस में संपन्न हुआ.

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पिंकसिटी प्रेस क्लब चुनाव नतीजे घोषित, राधारमण शर्मा अध्यक्ष और हरीश गुप्ता महासचिव निर्वाचित

जयपुर : पिंकसिटी प्रेस क्लब लि. जयपुर की प्रबन्ध कार्यकारिणी वर्ष 2015-16 के चुनाव नतीजे घोषित कर दिए गए है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल.एल.शर्मा ने बताया कि अध्यक्ष पद पर श्री राधारमण शर्मा और महासचिव पद पर श्री हरीश गुप्ता निर्वाचित घोषित किए गए है। श्री शर्मा अध्यक्ष पद पर लगातार दूसरी बार चुने गए है। श्री हरीश गुप्ता राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के भी अध्यक्ष है।

इसी प्रकार उपाध्यक्ष पद पर श्री मुकेश कुमार मीणा और राहुल जैमन तथा कोषाध्यक्ष पद पर श्री डी. सी. जैन निर्वाचित घोषित किए गए है। जैन कोषाध्यक्ष पद पर तीसरी बार निर्वाचित हुए है। श्री जैमन पूर्व में कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। कार्यकारिणी के दस पदों के लिए श्रीमती जूही औदिच्य, श्रीमती बबीता शर्मा, श्री मुकेश चौधरी, श्री जयसिंह गौड़, श्री निखलेश कुमार शर्मा, श्री बाबूलाल भारती, श्री अभिषेक सिंह तंवर, श्री महेन्द्र कुमार शर्मा, श्री अशोक कुमार भटनागर और छगन लाल शर्मा निर्वाचित घोषित किए गए है।

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नदीम अहमद काजमी ने बिल्डर से कांट्रैक्ट साइन करने की इच्छा के कारण प्रेस क्लब इलेक्शन टलवाया?

: Raise a voice against delay in elections and demand immediate elections : New Delhi : On March 23, 2015, the office bearers and managing committee of the PRESS CLUB OF INDIA (PCI) held a meeting in which it was decided to postpone the Club’s elections, which were originally scheduled to take place in March. 

It is learnt that this is all the game-plan of the Club’s current Secretary General Nadeem Ahmad Kazmi, who wants to inordinately postpone the elections, so that he gets the chance to sign the contract with a builder to construct the new building for the Press Club, and, pocket hefty commission amount. I urge upon all the Press Club members to raise a voice against this (delay in elections), and demand immediate elections.

Press Club’s Assange… a whistle-blower…

(एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित)

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सहारा समय चैनल ने दिया चुनाव में वसूली का टार्गेट

झारखण्ड में चल रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र मीडिया में चुनावी खर्चे की वसूली की चर्चा शुरू हो गयी है। इस कड़ी में सबसे बड़ा नाम है इन दिनों विवादों से ग्रस्त कंपनी के चैनल सहारा समय बिहार झारखण्ड का। विगत चार नवम्बर को रांची कार्यालय में हुई बैठक में सभी रिपोर्टरों को चुनाव में टार्गेट का टास्क दिया गया था। इस बैठक में बिहार झारखण्ड के चैनल हेड भी उपस्थित थे।

 

ज्ञात हो कि झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के समय हुए भ्रष्टाचार के मामले में सहारा चैनल के तत्कालीन हेड संजय मिश्रा और उस समय के उनके सहयोगी अरूप चटर्जी की भी संलिप्तता की खबर प्रकाशित हुई थी। विवाद में फंसने के बाद अरूप चटर्जी ने सहारा छोड़कर रांची से न्यूज़ 11 नाम के एक चैनल की शुरूआत की और संजय मिश्रा की सहारा से विदाई के बाद कुछ दिनों तक पी 7 और इन दिनों पटना के एक बिल्डर के चैनल आर्यन में इन दिनों रांची में ही अपना ठिकाना बनाये हुए है। यानि चुनाव के समय पैसे वसूलने के दौड़ में न सिर्फ सहारा बल्कि अन्य चैनल भी अपनी दुकानदारी खोल छूकर हैं।

सबसे बड़ी बात यह कि इन चैनलों को न ही स्व नियमन करना है और न ही इन्हें पेड न्यूज़ या ब्रॉडकास्टर एडिटर्स एसोसिएशन से ही किसी प्रकार का भय है। उस पर तुर्रा यह कि इन चैनलों द्वारा बिलिंग में भी गोरखधंधा किया जा रहा है। उम्मीदवारों से ज्यादा पैसे लेकर कम बिल उन्हें थमा दिया जा रहा है यानि प्रत्याशियों के काला धन का भी खुल्लम खुल्ला इस्तेमाल किया जा रहा है। झारखण्ड के बुद्धिजीवियों ने इस मसले पर अपनी नाराजगी प्रकट की है और इन तरह के मामलों की सीबीआई जांच की भी मांग की है।

अनंत झा की रिपोर्ट.

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चुनाव खत्म होने के बाद ‘साधना न्यूज हरियाणा’ में भी छंटनी का दौर शुरू

‘साधना न्यूज़ हरियाणा’ में भी छंटनी का दौर शुरू हो गया है. कुछ मीडियाकर्मियों की नींद तब उड़ गई जब उन्हें एचआर डिपार्टमेंट के तरफ से फोन करके कहा गया कि आप कल से ऑफिस मत आना, आपको ऑफिस के तरफ से निकला जा रहा है. कारण पूछने पर बताया गया कि हमें कुछ भी पता नहीं, ऊपर से आर्डर है. जब ऊपर के लोगों से बात की गई तो पता चला कि उनके पास बजट नहीं है इतने लोगों को सेलरी देने के लिए. अजीब बात ये है कि छंटनी की लिस्ट में जिन लोगों के नाम है उनकी सेलरी दस हजार रुपये से भी कम है और ये वही लोग हैं जिनका इलेक्शन से पहले वीकली आफ तक कैंसल कर दिया गया था. इन लोगों से 8 घंटे के शिफ्ट में 10 घंटे तक काम लिया जाता था.

अंदर के लोगों से पता चला है कि मैनेजमेंट ने चैनल के कुछ वरिष्ठ लोगों को छंटनी की लिस्ट देने को कहा तो इन लोगों ने आपसी खुन्नस निकालते हुए कुछ सीधे साधे लोगों का नाम आगे कर दिया और खुद की नौकरी बचा ली. मैनेजमेंट को ये नहीं पता कि वो जिन लोगों को निकाल रहे हैं उनकी सेलरी कितनी है. इस चैनल में ऐसे लोग भी लोग हैं जिनकी सेलरी 25 से 30 हज़ार है और काम के नाम पर ऑफिस की महिला कर्मियों के साथ हँसी मजाक के साथ शिफ्ट की समाप्ति करते हैं. साधना हरियाणा के मैनेजमेंट को इन इन लोगों की करतूत नहीं दिखती. सबसे बड़ा सवाल ये है कि अब जो लोग बेरोजगार होने वाले हैं, वो करें भी तो क्या करें. किसे सुनायें अपनी फरियाद. आखिर कब तक यूं ही चलती रहेगी चैनल मालिकों की मनमानी.

साधना न्यूज हरियाणा में कार्यरत एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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इत्ता सारा सफ़ेद धन आवे कहाँ से जो हर अख़बार टीवी ख़रीद लेवे?

Om Thanvi : इसके बावजूद समर्थन के लिए दोस्तों और दुश्मनों के सामने याचक बने बैठे हैं? … और मितरो, इतना (सफेद) धन आवे कहाँ से है?

Sheetal P Singh : कहानी तो यहाँ है! इत्ता सारा सफ़ेद धन आवे कहाँ से जो हर अख़बार टीवी ख़रीद लेवे?

Manoj Dash : Manufacturing consent and opinion with in home black money. How can I trust the intent? This is the reason why black money issue is bound to stay in cold storage till next election.

Vandan Kumar : इसीलिए तो स्विस बैंक से वापस लाने लायक कुछ बचा ही नहीं… ‘पाई – पाई’ में से कुछ पाईयाँ ही मिलेंगी!

Zafar Ali : जब तक अम्बानी की मेहर है? कालाधन विदेश से आएगा नहीं चुनाव सामाग्री पे खर्च होगा बस

Kamal Joshi : क्या दादा आप भी….रिलायंस के गैस के दाम ऐसे ही बढ़ गए क्या ? कुछ एक अखबारों में विज्ञापन तो मित्र लोग दे ही सकते है…

फेसबुक से.

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पोलिंग बूथों में जबरदस्ती घुसने पर जी ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा पर केस दर्ज

हिसार : विधानसभा चुनाव में मतदान के दौरान 15 अक्टूबर को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन में एस्सेल समूह के चेयरमैन और जी मीडिया कारपोरेशन के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ पुलिस ने मुकद्दमा दर्ज किया है। जी ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा को मतदान के दिन दो बूथों में जबरदस्ती घुसना और पोलिंग एजेंट्स के आईकार्ड चेक करना महंगा पड़ गया है। इंडस्ट्रियल एरिया के बूथ नंबर 114 और 115 के रिटर्निंग ऑफिसर और जीएम रोडवेज कुशल कटारिया ने शुक्रवार को सिविल लाइन थाने में सुभाष चंद्रा के खिलाफ केस दर्ज करवाया है।

पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में मतदान के दिन बुधवार को सुभाष चंद्रा पोलिंग बूथों में जबरदस्ती घुसे और पोलिंग एजेंटों के आईकार्ड चेक किए। सुभाष चंद्रा ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है। उनके खिलाफ धारा 131 व 132 के तहत केस दर्ज किया गया है। शिकायत में रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि आजाद उम्मीदवार राजन चांदना और कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री जिंदल ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने की शिकायत की है। इस मामले में एक चैनल ने सुभाष चंद्रा के जबरदस्ती बूथ में घुसने व जांच करने संबंधी सीडी भी पुलिस को मुहैया करवाई थी।

हिसार सिविल लाइस थाने में भारतीय आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा के तहत दर्ज मुकद्दमे के अनुसार निर्दलीय प्रत्याशी राजन चांदना ने सुभाष चंद्रा पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए बतौर सबूत सीडी के साथ चुनाव अधिकारी कुशल कटारिया से लिखित शिकायत की थी। इस शिकायत की जांच के बाद कटारिया ने सुभाष चंद्रा के खिलाफ चुनाव कार्यालय की ओर से आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने का मामला थाना सिविल लाइंस में दर्ज कराया। राजन चांदना ने चुनाव अधिकारी कुशल कटारिया को पूरे प्रकरण की एक डीडी सौंपते हुए इस गुंडागर्दी के लिए सुभाष चंद्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

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जी मीडिया के मालिक सुभाष चंद्रा ने पोलिंग बूथ पर दिखाई दादागिरी

जी मीडिया के मालिक सुभाष चंद्रा व उनके समर्थकों ने हिसार पोलिंग बूथ पर दादागिरी दिखाकर पोलिंग एजेंट को हड़काते नजर आए। सुभाष चंद्रा खुद अपने चैनल के कैमरामैन के साथ पोलिंग बूथ पर पहुंचे और उनके साथ आए हुए लोग पोलिंग एजेंटों को धमकाते हुए मतदान पहचान पत्र की जांच करने लगे। जब इस तरह का बर्ताव बाकी अन्य चैनल के पत्रकारों ने देखा तो उनसे सवाल किया कि वे किस हैसियत से किसी के मतदान पत्र की जांच कर रहे हैं।

गौरतलब है कि जी न्यूज चैनल के मालिक सुभाष चंद्रा बीजेपी के साथ जुड़े हुए हैं। हिसार विधानसभा सीट के लिए बीजेपी से टिकट देने के लिए भी उनके नाम की चर्चा प्रमुखत से रही है। मौके पर अन्य चैनलों के सवाल से बचते हुए सुभाष चंद्रा अपने साथियों के साथ भाग खड़े हुए। वहीं सुभाष चंद्रा की तरफ से वहां पर फर्जी वोटरों के होने के आरोप लगाए जा रहे थे। मीडिया कर्मी एक पास के माध्यम से ही पोलिंग बूथ में अपनी रिपोर्टिंग कर सकता है लेकिन उसे दखल देने का अधिकार नहीं रहता लेकिन एक मीडिया हाऊस के मालिक होने के नाते सभाष चंद्रा नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आए। सुभाष चंद्रा के पोलिंग बूथ में घुसने के मामले में चुनाव आयोग ने लिया संज्ञान। हिसार डीसी से मांगी रिपोर्ट।

हिसार से रविंद्र सिंह की रिपोर्ट

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भाजपा का चुनावी वादा, सत्ता में आने पर महाराष्ट्र के पत्रकारों को मिलेगी पेंशन

महाराष्ट्र बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में राज्य के वयोवृध्द पत्रकारों को हर माह 1500 रूपये पेन्शन देने का वादा किया है। महाराष्ट्र पत्रकार हमला विरोधी कृती समिती के ओर से राज्य के सभी प्रमुख राजनैतिक दलों को एक पत्र लिखकर पत्रकारो के मांगों के विषय में अपनी भूमिक चुनाव घोषणा पत्र के माध्यम से स्पष्ट करने की मांग की थी।

महाराष्ट्र पत्रकार हमला विरोधी कृती समिती की इसी मांग के चलते आज बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में पत्रकार पेन्शन योजना शुरू करने का आश्वासन दिया है। समिती के अध्यक्ष एस.एम. देशमुख ने बीजेपी की इस घोषणा का स्वागत किया है।

उन्होने कहा कि बीजेपी ने 1500 रूपये पेन्शन देने की बात कही है। यह रकम पर्याप्त नहीं है, इस पर चर्चा हो सकती है लेकिन बीजेपी ने यह बात मान ली है इसका स्वागत होना चाहिए।

देशमुख ने इस बात पर दुख जताया कि पत्रकार सुरक्षा कानून के विषय में बीजेपी ने कोई वादा नहीं किया है।

शिवसेना का चुनाव घोषणा पत्र भी जारी कर दिया गया है लेकिन इसमें पत्रकारों की मांगे अनदेखी की गई है। कांग्रेस, एनसीपी, एमएनएस ने भी पत्रकारों के मांगो के विषय में अपने घोषणा पत्रों में कोई आश्वासन नहीं दिया है।

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पत्रकारों को चुनावी मौसम में जो कुछ मिले रख लेना चाहिए : गडकरी

मुंबई : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पत्रकारों से यह कह कर विवाद छेड़ दिया है कि पत्रकारों को चुनावी मौसम में जो भी (रकम) मिले उन्हें रख लें। गडकरी ने तटीय कोंकण के सावंतवाडी में शनिवार को एक चुनाव रैली में कहा, ‘अगले 10..12 दिनों में पत्रकारों को लक्ष्मी दर्शन होंगे।’ भाजपा नेता ने कहा, ‘चाहे वे संवाददाता हों या संपादक, संवाददाताओं, अखबारों और उनके मालिकों के लिए अलग..अलग पैकेज हैं।’

उन्होंने कहा, ‘दिवाली आ गई है। मेरा एक अनुरोध है, आपको जो कुछ भी मिले उन्हें रख लें। जो कुछ भी आप खा सकते हैं खाएं।’ हालांकि, राज्य सचिवालय एवं विधानमंडल पत्रकार एसोसिएशन ने गडकरी की टिप्पणी की आलोचना की है। मंत्रालय विधानमंडल वर्तहार संघ के अध्यक्ष प्रवीण पुरो ने यहां कहा, ‘गडकरी की टिप्पणी काफी आपत्तिजनक है।’ पुरो ने कहा, ‘गडकरी ने कहा है कि पत्रकार पैकेज स्वीकार करें (चुनाव कवरेज के लिए)। ऐसे बयानों से पत्रकारों की छवि दागदार होती है।’

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