निखिल वागले ने प्राइम टाइम डिबेट के दौरान सनातन संस्था के अभय वर्तक को लाइव शो से निकाल बाहर किया

मुंबई : वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले महाराष्ट्र01 न्यूज़ चैनल पर प्राइम टाइम की एंकरिंग कर रहे थे. डिबेट का विषय विवादित और संवेदनशील था. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान विवादित बयान दिया था- “धर्मसत्ता राजसत्ता से बड़ी होती है।’ इस बयान से लोगों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. मुख्यमंत्री के इस बयान को सीधा संघ नीति से जोड़ा गया. निखिल वागले ने प्राइम टाइम में इसी विषय पर डिबेट रखा.

डिबेट में कई गणमान्य वक्ताओं ने शिरकत की. कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत, सनातन संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक आदि. गरमा गरम बहस चल रही थी. लाइव शो के दरम्यान सनातन संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक ने एक विवादित स्टेटमेंट दिया. इस पर निखिल वागले आग बबूला हो गए. लाइव शो के दरम्यान सनातन संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक को वागले ने शो से तुरंत निकल जाने को कह दिया. वागले ने कहा कि आप नहीं गए शो से तो मेरे आदमी आकर आप को यहाँ से उठा कर लेकर जाएंगे.

निखिल वागले बार बार चिल्लाकर कह रहे थे अभय वर्तक आप दंगा करवाना चाहते हैं, जल्दी से निकल जाइये, नहीं तो मुझे गेट आउट कहना पड़ेगा. अभय वर्तक शो से निकल गए. निखिल वागले ने लाइव शो के दरम्यान घोषणा कर दी कि इसके बाद मेरे शो में कभी भी सनातन संस्था का कोई नुमाइंदा नहीं आएगा. मालूम हो कि अभय वर्तक एक विवादित शख्सियत हैं.

पुणे से सुजीत ठमके की रिपोर्ट. संपर्क : sthamke35@gmail.com

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…आन एयर बाल-टाई दुरुस्त करने में जुट गए ईटीवी वाले ब्रजेश मिश्रा! (देखें वीडियो)

लखनऊ एयरपोर्ट पर अगर आपका आना जाना हुआ है तो देखा होगा कि वहां न्यूज चैनल के नाम पर सिर्फ ईटीवी उत्तर प्रदेश के विज्ञापन लगे हैं, वह भी काफी भारी भरकम ताकि नजर जरूर जाए. साथ ही इस विज्ञापन में ईटीवी यूपी के संपादक ब्रजेश मिश्र का लंबा चौड़ा फोटो है. टाटा स्काई ने पिछले दिनों अपने यहां चैनलों की नंबरिंग में काफी बदलाव किया. इससे कई सारे मेरे फेवरिट चैनल इधर-उधर हो गए. कैसे कैसे कर के नेशनल न्यूज चैनलों का नंबर फिर याद करने लगा लेकिन इस प्रक्रिया में ईटीवी यूपी उत्तराखंड चैनल कहीं खो गया था.

लखनऊ से कल दिल्ली रवाना होने से पहले करीब आधे घंटे तक लखनऊ एयरपोर्ट घूमता टहलता रहा तो बार-बार मेरी निगाह लंबे चौड़े ईटीवी यूपी और ब्रजेश मिश्र से टकरा जाती. साथ ही नीचे लिखे विभिन्न प्लेटफार्म्स पर ईटीवी यूपी की उपलब्धता की डिटेलिंग देखने लगता. इसमें सबसे पहले टाटा स्काई का जिक्र था जिसमें 1104 नंबर पर ईटीवी यूपी उत्तराखंड चैनल आता है. बार बार देखने के कारण ये नंबर मुझे याद हो गया था.

घर आकर रात में टाटा स्काई पर 1104 लगाया तो ब्रजेश जी के आठ बजे वाले प्राइम टाइम का रिपीट टेलीकास्ट हो रहा था. मुद्दा बड़ा जोरदार था. नेता लोग वैसे तो विचारधारा, वोट, जाति आदि को लेकर आपस में लट्ठ बजाते रहते हैं लेकिन जब उनकी खुद की सुख सुविधा का मामला सामने आता है तो सभी एक हो जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लखनऊ में जो पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम पर बंगाल कब्जाए गए हैं, उन्हें खाली करो. इस आदेश को अनडू यानि निष्प्रभावी बनाने के लिए सारे पूर्व मुख्यमंत्री यानि हर दल के नेता मिलकर एक हो गए लगते हैं और नया कानून बनाने वाले हैं ताकि इनसे बंगला खाली न कराया जा सके. इस डिबेट में पत्रकारों द्वारा मकान कब्जाने का भी जिक्र आया.

लेकिन सबसे जोरदार बात जो मुझे लगी, जिसके लिए इतनी लंबी चौड़ी भूमिका बनानी पड़ी वो ये कि प्राइम टाइम शुरू होने के तत्काल बाद ब्रजेश भाई आन एयर ही अपना बाल ठीक करने लगते हैं, साथ ही टाई भी. आमतौर पर ऐसे कृत्य एंकर तब करते हैं जब कैमरा उनकी तरफ मुखातिब न हो. लेकिन ये क्या, ब्रजेश जी इस प्राइम टाइम शो शुरू करने के दौरान तो खुद को टीवी पर देखने के बाद अपना बाल टाई ठीक करने में जुटे हैं, वह भी करोड़ों दर्शकों के सामने. मुझसे रहा न गया. ब्रजेश जी को फोन घुमा दिया. और, जैसा कि हमेशा होता है अति रिस्पांसिव ब्रजेश जी ने बिना देर किए खट से फोन उठा लिया.

मैंने सीधा सवाल दागा- ”अरे आप तो गजबे करते हैं महराज, आन एयर बाल टाई ठीक कर रहे हैं”. ब्रजेश भाई का हंसते हुए जवाब आया- ”यशवंत भाई, आदमी को नेचुरल रहना चाहिए. क्या छिपाना. आज जब प्राइम टाइम शो शुरू करने के बाद खुद को टीवी पर देखा तो लगा कि बाल थोड़े उखड़े बिखरे हैं, और टाई खिसकी-सी है, तो तुरंत दुरुस्त कर लिया. हमारे दर्शकों को लगना चाहिए कि शो बिलकुल बनवाटी नहीं है, सब कुछ नेचुरल है, लाइव है.”

मेरे मुंह से बस इतना निकला- ”वाह, क्या बात है”.

नीचे वो वीडियो लिंक है जिसमें ब्रजेश मिश्रा अपना बाल टाई आन एयर दुरुस्त कर रहे हैं. पूरा प्राइम टाइम देखेंगे तो आप को लगेगा कि ऐसी जोरदार बहसें तो नेशनल हिंदी न्यूज चैनलों तक पर नहीं होती. क्या खरी-खरी भाषा. क्या खूब तेवर. पूरी डिबेट के दौरान बृजेश जी हमलावर और व्यंग्यात्मक रुख अपनाए रहते हैं. प्राइम टाइम के मकान कब्जाऊ टापिक के दायरे में पत्रकारों तक को ले आया गया है ताकि बहस एकांगी यानि नेताओं तक सीमित न रहे. अफसरों की भी चर्चा आई है कि कैसे ये अफसर दिल्ली लखनऊ दोनों जगह सरकारी आवास कब्जाए रहते हैं. मेरी तरफ से मस्ट सी प्राइम टाइम है. आप भी जरूर देखिए. लिंक ये है: https://youtu.be/CyBCHgsUkW0

भड़ास के एडिटर यशवंत की एफबी वॉल से.

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लाइव : एंकर ने दी चुनौती तो महिला रिपोर्टर उतर गई समुद्र में, उतर गई उसकी बिकनी, वीडियो वायरल

रेनका। न्‍यूज चैनल के लिए बीच से लाइव रिपोर्टिंग कर रही एक न्‍यूज एंकर की सबके सामने बिकनी उतर गई। दरअसल वो समुद्री इलाके रेनका के बीच से लाइव रिपोर्टिंग कर रही थी और इस दौरान स्‍टूडियो में बैठे उसके साथी एंकर ने उसे समुद्र में नहाने की चुनौती दी थी।

एक अंग्रेजी वेबसाइट के अनुसार चिलीयन न्‍यूज रिपोर्टर बेर्नर्डिटा मिडलटन पेसिफिक सागर के बीच से मशहूर शो गुड मॉर्निग एवरीवन के लिए रिपोर्टिंग कर रही थी। इस दौरान स्‍टूडियो में बैठे न्‍यूज एंकर ने उसे चुनौती दी कि क्या वह तुरंत जाकर समुद्र के ठंडे पानी में डुबकी नहीं लगा सकती।

मिडलटन ने यह चुनौती स्‍वीकार करते हुए कपड़े उतारे और बिकनी में समुद्र में उतर गई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कैमरा चालू था। चुनौती को मंजूर करते हुए रिपोर्टर जैसे ही पानी में उतरी, तेज लहरों ने उसकी बिकनी छीन ली। हालांकि, उसने तुरंत एक्‍शन लेते हुए इसे ठीक कर लिया लेकिन यह वीडियो वायरल हो गया।

घटना के बाद मिडलटन खुद भी इस पर हंसती नजर आई। यह पहली बार नहीं है जब मिडलटन सुर्खियों में रही हो। इससे पहले इस रिपोर्टर ने प्रिंस हैरी को शादी के‍ लिए यह कहते हुए प्रपोज किया था कि उसका उपनाम मिडलटन है।

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ओमी महाराज को करारा थप्पड़ अरसे बाद किसी टीवी बहस में हुआ कोई शानदार काम है

Samar Anarya : कल आईबीएन7 की बहस में ज्योतिषी दीपा शर्मा का हिंदू महासभा के ओमी महाराज को मारा करारा थप्पड़ अरसे में किसी टीवी बहस में हुआ कोई शानदार काम है। मने, बहस करिये मगर ये क्या कि कौन पति से कितने साल से अलग रह रहा है गिनने लगिये। Deepa Sharma beating Hindu Mahasabha’s Omi Maharaj for a sexist jibe on IBN7 is best thing to happen in TV debates in a long time. Best way to tell a MCP that living separately from husband is no argument in a debate over a god- womam or anything else but for a court case on the same separation/divorce.

Sanjaya Kumar Singh : एक महिला का टीवी चैनल पर लाइव चर्चा के दौरान किसी पुरुष को थप्पड़ जड़ देना (और थप्पड़ खाना भी) विरोध ही है। यह कोई मार-पीट नहीं थी। ओमी महाराज जो बोल रहे थे उसका विरोध थप्पड़ रसीद करके ही किया जा सकता है। बोलकर उसका विरोध किया जाता तो दर्ज ही नहीं होता – अनसुना रह जाता। दीपा शर्मा ने बिल्कुल ठीक किया। कुछ लोग इसे जबरदस्ती संस्कार से जोड़ रहे हैं। मुझे लगता है उनके बारे में जो गैर जरूरी टिप्पणी की गई उसपर थप्पड़ मारना अच्छे संस्कारों में ही आएगा (इससे लोग संस्कार सीखेंगे)। कोई पुरुष किसी महिला को टीवी पर कहे कि वह पति के साथ नहीं रहती है – इसपर महिला की क्या प्रतिक्रिया होगी, इसका अनुमान एंकर कैसे लगा सकता है। वीडियो देखो, जब दीपा कुर्सी छोड़कर खड़ी होती हैं, माइक निकालती हैं तो कहीं नहीं लगता कि वे पिटाई करने जा रही है। एंकर मनुष्य होता है। ज्योतिष तो ये लोग हैं।

Priyadarshan Shastri : जो भी हुआ अशोभनीय था इसके लिए टीवी चैनल जिम्मेदार है क्योंकि कई बार बहस के दौरान बोलने वालों पर कोई नियंत्रण ही नहीं रखा जाता है या कई बार एंकर किसी एक विचारधारा से जुड़े लोगों का ही साथ देता दिखता है और सर ! क्या न्यूज एवं मुद्दों के नाम पर इन्द्राणी एवं राधे माँ ही बची है?

अविनाश पांडेय समर, संजय कुमार सिंह और प्रियदर्शन शास्त्री के फेसबुक वॉल से.


लाइव मार कुटाई का वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें : https://www.youtube.com/watch?v=xblYGUAUDCo

 

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छंटनी के शिकार पत्रकार ने लाइव शो के दौरान चैनल के दो मीडियाकर्मियों को मार डाला

अमेरिका ढेर सारे अच्छे बुरे मामलों में दुनिया भर के देशों और जनता को रास्ता दिखाता है. उसने अब एक और रास्ता दिखा दिया है. छंटनी का शिकार बनो तो गोली मार दो! इस बुरे रास्ते पर जाने की सीख कोई नहीं देगा लेकिन अमेरिका में जो कुछ हुआ उसके बारे में बहस बात विमर्श जरूरी है. प्राइवेट न्यूज चैनल्स कभी भी किसी को फायर कर देने का जो कारनामा करते हैं, उससे आम मीडियाकर्मियों के मन में भारी गुस्सा रहता है. अमेरिका में गुस्से का प्रकटीकरण गोली मारने के रूप में हुआ लेकिन लोग यह सवाल कर रहे हैं कि छंटनी के शिकार पत्रकार का गुस्सा अगर चैनल मालिक से था तो उसने दो आम मीडियाकर्मियों को क्यों दंड दिया. यहां यह कहना जरूरी है कि हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है लेकिन कई बार कान आंख खोलने के लिए भगत सिंह की तरह धमाका करना पड़ता है ताकि शोषितों की कराह सुनाई पड़ सके.

छंटनी के शिकार चैनल के पूर्व कर्मी ने गोली मारने के दौरान जो वीडियो बनाया उससे ली गई एक स्टिल पिक्चर. इसमें वो रिपोर्टर पर पिस्तौल ताने हुए है.

घटनाक्रम अमेरिका के वर्जीनिया में घटित हुआ. एक टीवी शो के लाइव प्रोग्राम के दौरान एक महिला रिपोर्टर और कैमरामैन की उस शख्स ने गोली मारकर हत्या कर दी जिसे छंटनी के नाम पर चैनल से निकाल बाहर किया गया था. भागने के दौरान हत्यारे ने खुद को गोली मार ली और अस्पताल पहुंचाते समय उसने दम तोड़ दिया. हत्यारे ने रिपोर्टर-कैमरामैन का मर्डर करने के दौरान खुद भी वीडियो बनाया था, जिसे उसने हत्या के तुरंत बाद सोशल साइट पर अपलोड कर दिया था. साथ ही कई पन्नों का फैक्स उस चैनल के आफिस भेजा था, जिसने उसे निकाला था और जिसके कर्मियों को उसने गोली मारी थी.

WDBJ7 टीवी चैनल रिपोर्टर एलिसन पार्कर (24) अपने कैमरामैन एडम वार्ड (27) के साथ बुधवार सुबह वर्जीनिया शहर के मोनेटा स्थित ब्रिजवाटर प्लाजा में रिपोर्टिंग के दौरान एक महिला से बातचीत कर रही थीं. इसका प्रसारण लाइव किया जा रहा था. तभी अचानक एक हथियारबंद शख्स वहां आया और रिपोर्टर एलिसन पार्कर और कैमरामैन एडम वार्ड को गोली मार दी. स्टेशन जनरल मैनेजर जेफ मार्क ने बताया कि लाइव प्रसारण के दौरान इस वारदात को अंजाम दिया गया. हत्या करने वाला शख्स फरार हो गया. इसके बाद पुलिस ने हत्यारे का दूर तक पीछा करके उसकी गाड़ी रुकवाई. इस दौरान हत्यारे ने खुद को गोली मार ली और अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया.

वर्जीनिया के मोनेटा में बुधवार को लाइव टीवी ब्रॉडकास्ट के दौरान रिपोर्टर और कैमरामैन का गोली मारकर मर्डर करने वाला शख्स इसी चैनल का ही एक पूर्व रिपोर्टर था, जिसे दो साल पहले पहले नौकरी से निकाल दिया गया था. बदला लेने के लिए उसने इन दोनों का मर्डर किया. इसका वीडियो भी खुद ही बनाया और बाद में इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. रिपोर्टर एलिसन पार्कर (24) बुधवार सुबह कैमरामैन एडम वार्ड (27) के साथ लाइव ब्रॉडकास्ट कर रही थीं. इसी दौरान वेस्टर ली फ्लैंगमैन (41) नामक शख्स ने गोली मारकर दोनों की हत्या कर दी थी. घटना सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर हुई. चैनल ने तुरंत लाइव ब्रॉडकास्ट बंद कर दिया और ट्वीट के जरिए घटना की जानकारी दी.

रिपोर्टर और कैमरामैन के मर्डर के बाद फ्लैंगमैन वहां से भाग गया और उसने खुद का बनाया हुआ वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया. उसने चैनल को 23 पेज का सुसाइड नोट फैक्स किया, जिसमें हमले की वजह के बारे में बताया. सुसाइड नोट में उसने लिखा, “मेरी बंदूक की हर गोली पर मरने वालों का नाम लिखा था.” हमले के बाद फ्लैंगमैन पुलिस से बचते हुए तीन घंटे की ड्राइव करके वर्जीनिया की फैकिअर काउंटी पहुंचा और वहां उसने खुद को गोली मार ली. बुधवार दोपहर 1.30 बजे उसकी मौत हुई. वेस्टर ने खुद को मंकी कहे जाने पर टीवी प्रोड्यूसर के खिलाफ वर्ष 2000 में मुकदमा दायर किया था. उसने आरोप लगाया था कि टीवी चैनल का सुपरवाइजर अश्वेतों को आलसी कहता था. उसने 2012 में ‘WDBJ7-टीवी’ ज्वाइन किया था. यहां वह ब्राइज विलियम्स के नाम से काम करता था. वह न्यूज एंकर था और नाइट रिपोर्टर के तौर पर भी काम करता था. कुछ साल बाद बजट कटौती की वजह से उसे नौकरी से निकाल दिया गया था. इस वजह से नाराज चल रहा था. 

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पंजाब में आतंकी अटैक के लाइव टीवी प्रसारण पर सूचना मंत्रालय ने दी कार्रवाई की चेतावनी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों को आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन की कवरेज के संबंध में जारी एक तात्कालिक हिदायत में कहा है कि आज पंजाब के गुरदासपुर में आतंकवाद विरोधी अभियान का कुछ न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों ने प्रसारण किया। यह प्रसारण वहां नियुक्त अधिकारी के अनुमति के बिना उस समय प्रसारित किया गया, जब ऑपरेशन उस समय चल रहा था।   

गौरतलब है कि केबल टेलिविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2015 में कहा गया है कि सुरक्षा बलों द्वारा यदि किसी आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा हो तो उसकी लाइव मीडिया कवरेज नहीं की जाएगी बल्कि टेलिविजन चैनल सिर्फ अभियान की समाप्ति के बाद सरकार की तरफ से नियुक्त अधिकारी द्वारा समय-समय पर दी जाने वाली जानकारी को ही दिखा सकते हैं।

मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह का प्रसारण केबल टेलिविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2015 का स्पष्ट उल्लंघन है। इस आधार पर ये कार्रवाई के लिए उत्तरदायी है। मंत्रालय ने चैनलों से इस तरह की हरकतों को तुरंत प्रभाव से बंद करने को कहा है।

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मत भूलिएगा कि हम पीपली लाइव के दौर में जी रहे हैं

दक्षिण वियतनाम की एक सड़क पर नंगी भागती किम फुक (Kim Phuc) की उस तस्वीर को कौन भूल सकता है। नौ साल की किम के साथ कुछ और बच्चे भाग रहे हैं। सड़क के अंतिम छोर पर बम धमाके के बाद उठा हुआ काले धुएं का गुबार है। युद्ध की तबाही का यह काला सच दुनिया के सामने नहीं आता, अगर फोटोग्राफर निक ने हिम्मत करके वह तस्वीर न ली होती। निक ने न सिर्फ तस्वीर ली, बल्कि किम को उठाकर अस्पताल भी ले गए। जहां किम का इलाज हुआ और वह बच गई। आज किम के दो बच्चे हैं और वो टोरंटो में रहती हैं। किम ने अपने चालीसवें जन्मदिन पर कहा था कि इस तस्वीर के जरिये मैं दुनिया के लिए उम्मीद हूं। इस फोटो को पुलित्ज़र पुरस्कार मिला था।

एक और तस्वीर है सूडान की। भूख ने एक छोटी बच्ची को चलने से भी लाचार बना दिया है। वह ज़मीन पर पड़ी हुई है और उससे कुछ दूरी पर एक बड़ा सा गिद्ध (vulture) घूर रहा है। केविन कार्टर की यह तस्वीर जब 1993 में न्यूयार्क टाइम्स में छपी तो दुनिया भर में हंगामा मच गया। लोग पूछने लगे कि उस बच्ची का क्या हुआ। क्या फोटोग्राफर ने उसे बचाने का प्रयास किया। यह पत्रकारिता के इतिहास का सबसे विवादित प्रसंग है, जिसके कई पहलू हैं। इस फोटो ने भूख की भयावह तस्वीर पूरी दुनिया के सामने रख दी थी। कार्टर को भी इस फोटो के लिए पुलित्ज़र पुरस्कार मिला।

ये दो अलग-अलग स्थितियां हैं। एक स्थिति में फोटोग्राफर अपने किरदार की मदद करता है और दूसरी स्थिति में मदद नहीं करता, मगर दोनों को पुलित्ज़र पुरस्कार मिलता है। दोनों ही स्थितियों में पूरी दुनिया हिल जाती है। जैसे जंतर-मंतर पर गजेंद्र की आत्महत्या ने किसानों की आत्महत्या के प्रति पूरे देश की उदासीनता को झकझोर दिया है। सब के सब एक्सपोज़ हो गए हैं। ढाई लाख से ज्यादा किसानों की आत्महत्या के सरकारी रिकार्ड को हम बस एक कागज़ का आंकड़ा मानने लगे थे। गजेंद्र की तस्वीरों ने आत्महत्या करने वाले लाखों किसानों को पूरे देश के सामने ज़िंदा कर दिया है।

मैंने जिन दो तस्वीरों का ज़िक्र किया है, उन्हें भारतीय जनसंचार संस्थान (Indian Institute of Mass Communication) के प्रोफेसर आनंद प्रधान प्राइम टाइम के एक शो में लेकर आए थे। हम चर्चा कर रहे थे कि इस तरह के मौके पर किसी पत्रकार को क्या करना चाहिए। यह हमारे पेशे की नैतिकता (ethics) की सबसे बड़ी दुविधा है। इसका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं हो सकता है। पत्रकार रिपोर्टर या फोटोग्राफर से पहले इंसान भी है, लेकिन यह उसका काम भी है कि वह मौके की तस्वीर को ठीक उस तरह से दर्ज करता चले, जो इंसानियत के लिए काम आ सकती है। कई प्रकार की स्थिति हो सकती है। स्थिति तय करेगी कि पत्रकार क्या करेगा, न कि कोई किताब।

जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी की किसान रैली में गजेंद्र सिंह ने सबके सामने आत्महत्या कर ली। वह किसी संमदर के बीच नहीं था या किसी बाढ़ में या किसी पुल के नीचे भी नहीं था या वह किसी बहुमंज़िला इमारत की छत पर नहीं या वह चलती ट्रेन के बिल्कुल नीचे नहीं आ गया था। वह पहले से पेड़ पर बैठा था, जिसे उतारने की अपील भी हुई। जिसे कैमरे से लेकर वहां मौजूद सैंकड़ों लोगों ने देखा। पुलिस ने भी देखा, जिसके पास ज़रूरी साधन होने चाहिए, खासकर तब, जब मुख्यमंत्री की सभा हो रही हो। एहतियात के तौर पर फायर ब्रिगेड से लेकर एम्बुलेंस की गाड़ी तो होनी ही चाहिए। अब यह दिल्ली सरकार को बताना चाहिए कि एम्बुलेंस पुलिस भेजेगी या सरकारी अस्पताल का काम है। क्या मुख्यमंत्री कार्यालय ने रैली के इंतज़ाम को लेकर ये सब सवाल पूछे थे। मीडिया में यह तो खबर आई थी कि पुलिस से कहा गया है कि मुख्यमंत्री को पत्रकारों से दूर रखा जाए। मैं इसकी पुष्टि नहीं कर सकता, लेकिन किसी भी रैली से पार्टी और पुलिस के बीच कई स्तर पर संवाद होता है। आमने-सामने की बैठक भी होती है।

अब बहस हो रही है कि वहां खड़ी मीडिया को गजेंद्र की जान बचाने का प्रयास करना चाहिए था। मैं जंतर-मंतर पर नहीं था और न ही वहां मौजूद किसी पत्रकार से बात हुई है। फिर भी यह बहस बता रही है कि लोग मौके पर हम पत्रकारों के व्यवहार को लेकर कितने संजीदा हैं। वहां मंच पर बैठे राजनेताओं ने बचाने के लिए आवाज़ तो लगाई, मगर दौड़ नहीं लगाई। उनके पास तो माइक भी था, पुलिस को आवाज़ लगाई, मगर पुलिस ने गजेंद्र को नहीं उतारा। वहां खड़े सैकड़ों पत्रकारों को क्या करना चाहिए था। अगर सबको या किसी भी एक को अपने कैमरे में दिख रहा है कि कोई आदमी फंदा डाल रहा है तो क्या करना चाहिए। क्या पता, किसी पत्रकार ने आवाज़ लगाई भी हो, या क्या पता, किसी ने परवाह ही नहीं की हो।

इसका जवाब इतना सरल नहीं है। हम यह सवाल पूछने से पहले ज़रूर देखें कि स्थिति क्या है। अगर किसी पुल से कोई फोटोग्राफर तस्वीर ले रहा है तो वह क्या करे। तैरना नहीं आता है, फिर भी डूब जाए या तैरना आता भी है तो तेज़ धारा में कूद जाए। वहां खड़े कितने पत्रकारों को पेड़ पर चढ़ना आता होगा, इसे लेकर मैं आश्वस्त नहीं हूं, मगर यह एक ज़रूरी सवाल है। अगर किसी झोंपड़ी में आग लगी है तो फोटोग्राफर को क्या करना चाहिए। क्या उसे राजेंद्र कुमार की तरह झोंपड़ी में कूद जाना चाहिए और बच्चे को उठाकर लाना चाहिए। बहुत मुश्किल है यह सब कहना, क्योंकि पत्रकार सक्षम है या नहीं, यह एक सवाल तो है। पत्रकार का एक काम तो यह होना ही चाहिए कि रिपोर्ट करते हुए वह तमाम एजेंसियों को अलर्ट करता रहे।

पर ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम नेताओं, पुलिस और लोगों से पूछते-पूछते थक जाएं तो उल्टा प्रेस से ही पूछने लगें। इस स्थिति में मैं इतना ही कह सकता हूं कि जंतर-मंतर पर कोई असाधारण स्थिति नहीं थी। पेड़ पर चढ़ने का जोखिम न लेते हुए भी लोगों को अलर्ट किया जा सकता था। अगर किसी ने अपने कैमरे से ऐसा होते हुए देखा है, तो उसे हंगामा करना चाहिए था। प्रेस के बाकी साथियों का ध्यान आकर्षित करना चाहिए था और रिकॉर्डिंग रोककर वहां व्यवधान पैदा करना चाहिए था, ताकि सब गजेंद्र की जान बचाने के लिए तत्पर हो सके। सबकी नाकामी में प्रेस की भी नाकामी है, लेकिन इसके लिए यह तथ्यात्मक रूप से जानना होगा कि क्या वाकई वहां किसी ने किसी को अलर्ट नहीं किया। मैं वहां था नहीं, इसलिए दावे से नहीं कह सकता।

अगर आप यह कहें कि प्रेस ने जिस तरह से रिपोर्टिंग की, क्या वह उचित था, तो इसके निश्चित जवाब दिए जा सकते हैं और जवाबदेही तय की जा सकती है। गजेंद्र तो उस पेड़ पर अब नहीं है, मगर कैमरों के लिए अब भी वह पेड़ ज़िंदा है, जिसके नीचे खड़े होकर रिपोर्टर अब भी न्यूज़ रूम के आदेश पर नाटक कर रहे हैं कि यही वह पेड़ है, जिसकी एक टहनी से गजेंद्र लटक गया था। यही वह पेड़ है, जिसे मंच पर बैठे नेता देखते रहे। एक दिन हमारे चैनल पेड़ को ही कसूरवार ठहरा देंगे। यही वह पेड़ है, जिसने गज़ेंद्र को लटकने दिया। यही वह पेड़ है, जिसने गजेंद्र की जान ले ली। मत भूलिएगा कि हम पीपली लाइव के दौर में जी रहे हैं।

कस्बा से साभार

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अमेरिका में खबरों को बेचने के लिए उन्हें झूठ के आंसुओं से नहीं सींचा जाता

साथी Sanjay Sinha ने अमेरिका के ट्विन टावर पर हमले की खबर से संबंधित एक टिप्पणी आज सवेरे फेसबुक पर लिखी और पांच घंटे में 400 शेयर 913 लाइक और 274 कमेंट आए। इनमें ज्यादातर सकारात्मक या पक्ष में हैं। टिप्पणी में उसने मुझे भी टैग किया है क्योंकि उन दिनों हिन्दी में ई-मेल तभी संभव था जब दोनों जगह हिन्दी के एक ही फौन्ट हो। संजय अमेरिका से अपनी खबरें मुझे भेजता था और मैं प्रिंटआउट दफ्तर में देता था जिसे दुबारा कंपोज कर जनसत्ता में छापा जाता था। टिप्पणी मेरी वाल पर भी है और अगर आपने पूरी पोस्ट नहीं पढ़ी तो यह हिस्सा पढ़िए…

…. लेकिन अमेरिका में इतना बड़ा हादसा हो गया। एक भी लाश नहीं दिख रही थी। टीवी वाले कह रहे हैं कि दस हजार लोग मर गए। दस हजार मर गए तो लाशों को कौन ले भागा? यहां के टीवी वाले मूर्ख हैं। बस दो विमानों के टकराने की खबरें दिखाए जा रहे हैं। एक भी लाश नहीं? कोट-पैंट-शर्ट पर लाल निशान वाली तस्वीरें कहां हैं? लोगों के जूते? वो मातमी धुन? मैं एक-एक कर सारे चैनल बदल चुका। कहीं कुछ नहीं। बस इतनी सी खबर कि अमेरिका पर सबसे बड़ा आतंकवादी हमला हुआ है। बुश ने ये कहा है। इसके अलावा न किसी और का कोई बयान न खून से रंगी कोई तस्वीर।

आपको सिर्फ बताने के लिए बता रहा हूं कि जिस वक्त ट्वीन टावर पर हमला हुआ था, उस वक्त सीएनएन वहां अपनी एक फिल्म शूट कर रहा था। क्योंकि उनकी शूटिंग चल रही थी, इसीलिए ट्वीन टावर से विमान के टकराने की घटना शूट हो गई। वो करीब-करीब लाइव विजुअल था, जिसे आपने यहां टीवी पर बार-बार देखा। लेकिन आपने दस हजार मौत में से एक भी लाश अपने टीवी स्क्रीन पर नहीं देखी होगी।

वहां के लोग खबरों को जुगुप्सापूर्ण नहीं बनाते। वहां खबरों में थ्रिल नहीं पैदा किया जाता। वहां खबरों में मौत का ड्रामा नहीं रचा जाता। वहां खबरों को बेचने के लिए उन्हें झूठ के आंसुओं से नहीं सींचा जाता। वहां किसी बच्चे की कापी पर खून के पड़े छींटों को सनसनीखेज नहीं बना कर उस तरह उन पर कविताएं नहीं गढ़ी जातीं, जिस तरह पाकिस्तान में एक स्कूल में बच्चों पर हुए हमले के बाद हम सबने दिखाई हैं। वहां मौत को थ्रिल नहीं माना जाता। उनके लिए ज़िंदगी थ्रिल है। वो आसमान से कूदते हैं, पहाड़ पर चढ़ते हैं, समंदर में गोते लगाते हैं। ये सब उनकी खबरें हैं। वो ज़िंदगी को लाइव जीते हैं। हमारी तरह मौत को नहीं।

आप अपने दिमाग पर जोर डालिए। मैं भी डाल रहा हूं। मुझे न्यूयार्क में उतने बड़े हमले में मौत की एक भी तस्वीर नहीं दिखी थी। मैं तो वहीं था। जब मुझे नहीं दिखी तो आपको भी नहीं ही दिखी होगी। मैंने उस घटना के बारे में अपने बेटे से उस दिन सिर्फ इतनी बात की थी कि तुम परेशान मत होना। ऐसी घटनाएं हो जाती हैं।

संजय की खबर उस दिन “अमेरिका को डर है कि बच्चे कहीं डर न जाएं” शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। खबर छपने के बाद शीर्षक की चर्चा हुई थी और अमेरिका के रुख की तारीफ भी। मुझे लगा था कि भारतीय मीडिया कुछ सीखेगा पर सब बेकार रहा। अब सोशल मीडिया पर तो लोग और आगे निकल गए हैं। दोष किसे दिया जाए। कोई लाशें बेच रहा है, कोई मनोरंजन कर रहा है और कोई टाइमपास।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

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टीवी न्यूज रूम से मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि : एक दुई ठो संघी भी सेट करो.. मुल्ला-संघी भिड़ेंगे तब्बै ना मजा आई…

अबे ओए..उतार करीना ससुरी को…
आ गई खबर मोरे बाप…
का बे…?
डेढ़ सौ बच्चो हलाक ..
कहां बे..?
अऊर कहां पाकिस्तान में. बे…
सच्चे..?

अऊर का झुट्ठे…ई देख….पीटीआई का फ्लैश आवा है…
ई साले कटुए ना सुधरेंगे कब्बो..
अबे चला..चला ..ब्रेकिंग न्यूज चला…
फुल्ल्ल स्क्रीन प्लेट….डेढ़ सौ बच्चे हलाक…
विजुअल नहीं है अभी तक,,
अमां नेट से निकाल,स्टिल…मरे बच्चे
के पहचानी बे,…मयानमार वाला ले ले..बच्चे तो बच्चे..
अबे टाइम्स नाऊ को काट…वूका मिल गवा है विजुअल…
…..
सर चला दिया.
मुंह का ताक रहा है बे..?
एंकर बदल…फीमेल एंकर भेज..
किसको,,?
स्वाति को भेज…
आवाज का माड्यूलेशन अच्छा करती है..
नौटकीबाज है.पूरी….
धुर्र बे…पक्की छिनाल है …बॉस की..
बोलना सेंटी लुक दे…खेलती रहे दस मिनट तक…
और सुन…बोलना कि बाल थोड़ा बिखेर ले,
ई नाही कि मॉडल बनकर पहुंचे..
पार्लियामेंट से लाइव ले…राहुलवा होगा वहां पर
अऊर सुन
दुई चार मौलाना को फोनों पर ले,.
पाकिस्तान का मामला है…
एक आध गो कटुआ तो चाही ना
और इनपुट को बोल,, पैनल सेट करे..छह बजे लाइव डिस्कशन….
एक दुई ठो संघी भी सेट करे..
मुल्ला संघी भिड़ेंगे तब्बै ना मजा आई…

सर..एक मेल एंकर भी चाहिए, स्वाति अकेले संबाल ना पाएगी
तो हैदर को भेज..मुसल्लों का मामला है ….
वो सही रहेगा….

फ्रेम काट बे..
चल,..
अब..?
अब का बे..?
दिन भर खेलेंगे इस पर..
हां सर कल भी खेल चलेगा,,
चलो..बाहर
सुट्टा मार कर आते हैं…
सर आप तो बस गजैबे हैं..
अऊर का बे..इत्ते साल टीवी में काम किया है..पिछल्ला खूंटे पर थोड़े रगड़े हैं बे…

वरिष्ठ पत्रकार Sumant Bhattacharya के फेसबुक वॉल से.

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गोवा डीडी एंकराइन कांड : कान खोलकर सुनो मैडम, माथा गरम मत करो

गोवा में आयोजित फिल्म फेस्टीवल की ‘लाइव-रिपोर्टिंग-एंकरिंग’ में ‘गवर्नर ऑफ इंडिया’ अलाप कर दुनिया भर में डीडी की दुर्गति करा चुकी मैडम सामने आ गयी  हैं। माफी मांगने से ज्यादा, हवावाजी और ज्ञान बांटने के लिए। मैडम का नाम आयनाह पाहूजा है (इस लेख में अगर मोहतरमा का नाम अंग्रेजी से हिंदी में लिखने पर कुछ त्रुटि हो, तो मैडम जी कहीं इस मुद्दे पर भी जांच के लिए तुम मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के पास मत चली जाना, जैसे अपनी एतिहासिक गोवा एंकरिंग का वीडियो यू-ट्यूब से हटवाने की कोशिशों में तुमने मुंबई पुलिस को पसीना ला दिया है)। मैडम का नाम भी उन्हीं के एक वीडियो से पता चला है। मैडम को भी उसी यू-ट्यूब का सहारा लेना पड़ा है, जिस पर उनका गोवा में की गई एंकरिंग “गवर्नर ऑफ इंडिया” वाला वीडियो मौजूद है।

मतलब मैडम जी अपनी कारस्तानी का वीडियो हटवाने के लिए तो मुंबई पुलिस की क्राइम-ब्रांच के पास जा पहुंची। इस दलील के साथ कि यू-ट्यूब पर जब तक उनकी एतिहासिक गोवा एंकरिंग का वीडियो मौजूद रहेगा, डीडी न्यूज में भर्ती करने वालों और उसके कर्ता-धर्ताओं की नाक में सोशल-मीडिया नकेल कसे रहेगा। साथ ही मैडम को भी इस वीडियो से काफी दिक्कत महसूस होती रहेगी। यहां उल्लेखनीय है कि, अब मैडम ने अपनी सफाई के लिए उसी यू-ट्यूब का इस्तेमाल किया है, जिससे वे अपनी और डीडी की फजीहत वाला वीडियो नेस्तनाबूद कराने पर तुली हुई थीं। अरे क्यों मैडम ऐसा क्यों? हम तो आपको तब ईमान मजबूत जिगर वाला मानते, जब आप यू-ट्यूब से कहतीं कि-

‘गोवा से आपकी गवर्नर ऑफ इंडिया वाली एतिहासिक लाइव एंकरिंग का वीडियो भी यू-ट्यूब पर पड़ा दुनिया की नजरों में ‘बजबजाते’ रहने के लिए मौजूद रखा जाये और उसके बाद उठे तूफान-तमाशे पर आपने जो सफाई दी है या अपनी अज्ञानता के बाद फिर उसके ऊपर जो “ज्ञान” बांटा है, वो वीडियो भी यू-ट्यूब पर मौजूद रहे।’ आयनाह पाहूजा जी के सफाई वाले वीडियो से साफ जाहिर है कि वे, यू-ट्यूब पर वही वीडियो देखने की तमन्ना रखती हैं, जिसमें डीडी के काले इतिहास के लिए उनके द्वारा गोवा में की गई लापरवाहीपूर्ण एतिहासिक एंकरिंग को लेकर  ‘सफाई’ दी गयी है। न कि वो वीडियो जिसमें उन्होंने भारतीय पत्रकारिता की आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मनहूस उदाहरण का अध्याय जोड़ा है।

मोहतरमा आप समाज से न्याय चाहती हो….तो तुम्हें भी तो समाज के साथ न्याय करना चाहिए। गोवा में अपनी तथाकथित काबिल लाइव एंकरिंग वाला वीडियो भी यू-ट्यूब पर मौजूद रखो और इस थू-थू कराने वाले वीडियो के बदले में जो तुमने अपनी साफाई दी है, वो वीडियो भी यू-ट्यूब पर मौजूद रखो। तब तो जमाना भी जानेगा कि, हां मैडम जी वाकई बड़ी ज्ञानी और ईमानदार हैं अपने और समाज के प्रति।

मैडम अपनी सफाई वाले वीडियो में आगे फरमाती हैं, कि- ‘मेरा मजाक उड़ा लो आगे ऐसा किसी और के साथ मत करना’। इस पर मोहतरमा बस इतना सुन लो कि तुमसे अपने किये का खामियाजा को अभी तक भुगता नहीं जा रहा है। दूसरे के साथ या किसी और के साथ ऐसा न करें, इसकी नसीहत दे रही हो। पहले अपना हाल तो दुरुस्त कर लो। फिर सब-कुछ अगर सही-सलामत रहे तो उसके बाद बाकियों की ‘नंबरदारी/ झंडाबरदारी’ भी कर लेना। अभी तो तुमसे अपना किया हुआ ही नहीं संभल रहा है। इस पर तुम बाकियों के साथ वैसा कुछ न हो जैसा तुम्हारे साथ हुआ, नसीहत भी भांज रही हो। अरे पहले अपना देखो। बाकियों का बाकियों पे छोड़ दो। ज्ञान गुरु ही बांट सकता है। चेला नहीं। पहले इस लायक तो बना लो इस जिंदगी में खुद को कि लोग तुम्हारे ज्ञान को पचायें। गोवा एंकरिंग की तरह तुम्हारे ज्ञान का “बैंड” न बजायें।

अब आखिर में यह भी जेहन में दर्ज कर लो, कि गोवा में तुम्हारी कम-अक्ली और लाइव एंकरिंग के चलते डीडी और तुम्हारी काबिलियत का जितना भी सोशल मीडिया में ‘लेखा-जोखा’ दर्ज हुआ है, उसके लिए न तो इयरफोन की खराबी, न तुम्हारा प्रोग्राम प्रोड्यूसर और न ही कोई और जिम्मेदार था। इस सबकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर तुम्हारी, तुम्हारी अनुभवहीनता और डीडी के उन उस्तादों की थी, जिन्होंने आंख मूंदकर तुम्हें गोवा फेस्टीवल में ‘गवर्नर ऑफ इंडिया’ जैसी शर्मनाक एंकरिंग के लिए ले जाकर ‘जंग-ए-लाइव-एंकरिंग’ में उतार दिया। लाइव एंकरिंग का तुम्हें अनुभवी पत्रकार बनाने की उम्मीद में।

लेखक संजीव चौहान वरिष्ठ खोजी पत्रकार हैं.

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डीडी एंकर सामने आई, बोली- ”मेरा मजाक उड़ा लो, आगे किसी दूसरे के साथ ऐसा मत करना”

गोवा से डीडी के लिए लाइव देने वाली एंकर / रिपोर्टर Aayenah Pahuja ने सामने आकर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा है. एक वीडियो इंटरव्यू में पाहूजा कहती हैं- “By now all of you know me as a dumb DD anchor. It might be entertaining for you guys, but it’s very depressing for me and lately I have felt suicidal because my career is at stake; my contracts, assignment have been snatched away from me.”

आगे वो कहती हैं- “I am not here to defend myself or neither am I here to blame somebody, but to tell you the truth. First of all, the other day what happened was I was not made to rehearse thoroughly, then I did not know most of the dignitaries present at this prestigious event. Five minutes before the event started, the instruction mike stopped working. Producer did not have any way to tell me who’s coming next, that was one big mistake. Yes, I did make mistake. I apologise for the same.”

मृदुला सिन्हा को गर्वनर आफ इंडिया कहने पर पाहूजा बताती हैं- “The governor of India wasn’t intentional, but I was nervous at that point of time and it was a slip of tongue. There was a massive technical crash out there.”

वीडियो इंटरव्यू के आखिर में पाहूजा अपील करती हैं – “मेरे साथ जो हुआ वो हो गया. आप हंसते रहोगे. मेरा मजाक बन चुका है. आने वाले फ्यूचर में कोई लड़के-लड़की के साथ ऐसा मत करना. (Whatever had to happen to me has happened. I have become a butt of jokes. In the future, please spare boys or girls who commit a similar blunder. Don’t be harsh to them)

आखिर में वो कहती हैं- “My career is at stake I don’t know where I’m headed now,” she signs off.

वीडियो देखने के लिए क्लिक करें:

https://www.youtube.com/watch?v=k24MlS3jkwQ

इनपुट- इंडियन एक्सप्रेस.

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सोशल मीडिया से ही सुना-पढ़ा है कि गोवा फिल्म फेस्टीवल में डीडी नेशनल का बैंड बजवा चुकी महिला एंकराइन को लेकर संस्थान में ही कई गुट हो गये हैं। प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सिरकार इस सवाल के जवाब को लेकर व्याकुल हैं, कि इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम की कवरेज के लिए इन भद्र और अनुभवहीन महिला एंकर को गोवा भेजा ही क्यों गया? इस सवाल की पड़ताल के लिए प्रसार भारती ने अतिरिक्त महानिदेशक स्तर के आला-अफसर को दिल्ली से मुंबई भेजा है। साथ ही प्रसार भारती ने इस सब कलेश को ‘सिस्टम फेल्योर’ मान लिया है।

सुना है कि, डीडी की मट्टी पलीत कराने वाली आरोपी एंकराइन सदमे में हैं। मेरी समझ में नहीं आता, कि गल्ती मानने के बजाये और एंकरिंग से अपने पांव खुद ही पीछे खींचने के बजाये, मैडम सदमे में क्यों चली गयी हैं? दुनिया भर में डीडी की थू-थू कराने वाली इन अनुभवहीन मैडम के परिवार ने मुंबई पुलिस की शरण ली है। परिवार चाहता है, कि मैडम ने जो कुछ किया है। मैडम के कारनामे का जो वीडियो दुनिया में फैला है। उस वीडियो को यू-ट्यूब से गायब करा दिया जाये। ताकि न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। मतलब जब वीडियो ही गायब हो जायेगा, तो फिर लल्ली के कारनामे पर जमाना हंस ही कैसे पायेगा? बहुत सही। क्या रास्ता अख्तियार किया है परिवार और डीडी की मट्टी पलीत कराने वाली महिला एंकराइन ने। अरे अगर थीड़ी सी भी समझ है, तो मैडम को ऐसी थू-थू-मय पत्रकारिता और इतनी घटिया स्तर की एंकरिंग को लात मार देनी चाहिए। यह तो कुछ कर नहीं पायीं। परिवार उतर आया है मैडम के कारनामे को ‘ज़मींदोज’ कराने पर। इस रणनीति के तहत कि पुलिस से तुर्रेबाजी कराके वीडियो हटवा दो…और जो कुछ जमाने भर के सामने आ चुका है हमेशा-हमेशा के लिए उसे सुपुर्द-ए-खाक करा दो।

वाह बहुत खूब। क्या शानदार और निर्लज्जता का रास्ता अख्तियार कर रही हैं मोहतरमा और उनके शुभचिंतक परिवारीजन। इतना सब डीडी का मजाक उड़वाने के बाद परिवार का यह तुर्रा कि, मैडम इसलिए बीमार हो गयी हैं, क्योंकि उनका वो वीडियो यू-ट्यूब पर है, जिसमें उनकी कथित काबिलियत का सबसे बड़ा नमूना क़ैद हो चुका है (हकीकत में असलियत)। अरे मैडम और मैडम के परिवार वालो तुम चाहते हो कि, तुम्हारी और तुम्हारी लल्ली, और डीडी में बैठे तुम्हारी लल्ली जैसे नाकाबिलों के खैर-ख्वाहों की खुशी की खातिर तमाम जमाना अपनी आंखों को गरम सूजों से फोड़ ले। ऊं हूं….न कतई नहीं। तुम्हारी यह डिमांड बहुत गलत है। तुम अपनी खुशी के लिए तो मुंबई पुलिस से सबको गलत साबित कराने पर तुली बैठी हो। सबकी आंखों और जुबां बंद कराने की तमन्ना संजो रही/रहे हो। जरा एंकराइन (अधकचरी एंकराइन) मैडम और उनके शुभ-चिंतको यह तो सोचो और देखो ठंडे-संतुलित दिमाग से, कि डीडी के इतिहास में किस हद तक का ‘काला-पन्ना’ दर्ज करा बैठी हैं, यह अनुभवहीन और अल्पज्ञानी एंकराइन जी।

अब आओ डीडी के मुंबई प्रमुख कोई मुकेश शर्मा से भी दो-टूक बात कर लें। इस ‘एंकर-नामा’ या ‘एंकरिंग-एंकराइन-कांड’ के लिए सीधे तौर पर जबाबदेही इन्ही शर्मा जी की बनती है। वजह, श्रीमान जी मुंबई डीडी के सिरमौर मतलब सर्वे-सर्वा यह शर्मा साहब ही हैं। डीडी में कैसे-कैसे ‘नव-रत्न’ तराश कर ‘फिट’ किये या कराये जाते हैं…या अब तक किये जाते रहे हैं…इसका नमूना मैडम एंकराइन के ‘श्रीमुख’ से निकली वो ‘एंकर-धारा’ है, जो किसी भी पत्रकार/ मीडिया से जुड़े इंसान के दिमाग को पिघलाकर उसमें ‘मट्ठे’ का सा असर कर सकती है। मैडम की तरफदारी में गलतियों को घोटकर पीने के लिए मैदान में उतरे शर्मा जी फरमा रहे हैं कि, मोहतरमा की एंकरिंग के दौरान तकनीकी परेशानियां थीं। मसलन…..

1-मैडम का ‘इयरफोन’ सुचारु रुप से काम नहीं कर रहा था।

2-सरकारी चैनल में सरकारी स्तर का ‘धक्कम-धक्का’ इयरफोन बीमार होने के चलते एंकराइन-मैडम शो-प्रोड्यूसर से निर्देश नहीं ले पा रही थीं।

3-गोवा में फिल्म फेस्टीवल की भीड़ देखकर अल्पज्ञानी एंकर मैम ‘नर्वस’ हो गयी थीं।

इन अज्ञानी (अ-प्रैक्टिशनर) एंकराइन की बेजा ‘कलाकारी’ के चलती जिस डीडी नेशनल दुनिया भर में अपनी ऐसी-तैसी करानी पड़ गयी, उसके मुंबई प्रमुख शर्मा जी अंत में फरमाते हैं कि (फिजूल में चर्चित हुईं) महिला रिपोर्टर की रिपोर्टिंग स्तरीय नहीं थी।

सुनो शर्मा जी अब आप मेरी सुनो। आप खुद ही मान रहे हैं कि, मैडम एंकराईन ‘इयरफोन’ पर ‘शो-प्रोड्यूसर’ से ज्ञान ‘गटक’ कर (लेकर, ग्रहण करके) आगे (डीडी के दर्शकों को) लाइव एंकरिंग में ज्ञान ‘बघारकर’ खुद को काबिल जताने में जुटी थीं। मतलब एंकरिंग और एंकराईन दोनो की ज़मीन “बैसाखियों” (शो-प्रोड्यूसर) पर चिपकी/ लिपटी पड़ी थी। मुंबई डीडी के शर्मा जी ‘प्रमुख’ आप होंगे, लेकिन बताना चाहूंगा, कि एक अच्छे एंकर/ रिपोर्टर के लिए लाइव के दौरान खुद ही अपने मुंह, हासिल अनुभव और ज्ञान से दर्शकों को ज्ञान देना होता है। इसमें शो-प्रोड्यूसर कुछ नहीं करता। मैडम ने अपने अल्पज्ञान के चलते लाइव में ही ‘गवर्नर ऑफ इंडिया’ धर पेला। इसमें इयरफोन, स्वंय आप, मैं, शो-प्रोड्यूसर या कोई और (जो मैडम के अलावा आपकी नजर में जिम्मेदार हो) जिम्मेदार नहीं हो सकता।

डीडी के मुंबई प्रमुख मुकेश शर्मा जी के मतानुसार- समारोह की भीड़ देखकर मोहतरमा ‘नर्वस’ हो गयीं। अब इसका जबाब भी आपको ही देना होगा, कि नर्वस होने वाली इतनी कमजोर कर्मचारी को लाइव एंकरिंग के लिए क्यों, आपके किस चहेते अधीनस्थ ने गोवा में जबरिया लाइव कराके डीडी नेशनल की इस कदर ‘बैंड’ बजवाने के लिए भेजा। और आपने अब तक उसका क्या ‘हिसाब-किताब’ फाइनल किया? अपनी पूरी ‘सफाई-रामलीला’ के अंत में शर्मा जी मोहतरमा की रिपोर्टिंग को स्तरीय नहीं मानते हैं। तो शर्मा जी अब आप बताईये कि, इसमें सोशल-मीडिया यह हमारे जैसे ‘कम-अक्ल’ दो-चार लाइनें आपकी और आपकी एंकर मैडम की काबिलियत पर लिख-धरने वाले कहां और क्यों जिम्मेदार हैं? शर्मा जी अपना ‘गिरहवान’ झांकिये, सब-कुछ मसाला तुम्हें वहीं दिखाई दे जायेगा। जरुरत है तो बस सिर्फ-और-सिर्फ आपको, मैडम को, मैडम को परिवार वालों को एक अदद “ईमान” की नजर से देखने भर की। मेरी ईमान भरी नज़र में तो इस पूरे तमाशे के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार स्वंय आप और आपके वे तमाम अधीनस्थ (जी-हजूरी करने वाले) हैं, जो आपकी हां-में-हां मिलाकर, आपकी तरह ही इस तरह की ‘गुस्ताखियों’ को ‘कफन-दफन’ करके इस तरह के अल्पज्ञानियों को सजा देने के बजाये उन्हें उल्टे बचाकर उनका भविष्य ‘खाई-खंदकों’ में दबाने के रास्ते तलाशते हैं।

बताईये भला..जिन मैडम की एंकरिंग का वीडियो दुनिया में ‘गदर’ मचाये हुए है। जो वीडियो और मैडम, मीडिया के लिए ‘माथा-पच्ची’ का कारण बने हुए हैं। जिन मैडम ने इतना बड़ा ‘बलंडर (ब्लंडर)’ मीडिया और अपने देश के सबसे सम्मानित समझे जाने वाले ‘डीडी नेशनल चैनल’ की झोली में जबरिया ही धर-फेंका हो, उन मैडम के इस सब करे-धरे पर ‘सही-बयानी’ करने पर भी खुद मैडम और उनका परिवार अब हमारी (पाठक-लेखकों) आंखों पर जबरिया काली पट्टी और मुंह पर सिलाई लगवाने की जुगत मे है, मुंबई पुलिस से। क्या यह उससे भी ज्यादा घातक साबित नहीं होगा, जितना मैडम गोवा फिल्म फेस्टीवल में “गवर्नर ऑफ इंडिया” परोस और पेश करके वापिस मुंबई लौट आई हैं!

लेखक संजीव चौहान वरिष्ठ खोजी पत्रकार हैं. उनसे संपर्क 09811118895 के जरिए किया जा सकता है.

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डीडी महिला रिपोर्टर के बचाव में उतरे मुंबई हेड मुकेश शर्मा, लेकिन सीईओ जवाहर सिरकार नाराज, जांच शुरू

गोवा फिल्म फेस्टिवल की घटिया रिपोर्टिंग करने वाली दूरदर्शन की महिला रिपोर्टर के बचाव में उतर गए हैं डीडी के मुंबई ऑफिस के हेड मुकेश शर्मा. रिपोर्टर का बचाव करते हुए मुकेश ने कहा है कि उसके साथ कुछ तकनीकी दिक्कतें थीं, उसका इयरफोन काम नहीं कर रहा था, जिस वजह से वह शो के प्रोड्यूसर से निर्देश नहीं ले पा रही थी. वहां इतनी भीड़ थी जिसे देखकर वह नर्वस हो गई थी. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि महिला रिपोर्टर की रिपोर्टिंग स्तरीय नहीं थी.

उधर, प्रसार भारती ने पूरे घटनाक्रम को ‘सिस्टम फेल्योर’ करार दिया और जांच के लिए एडीजी यानि एडिशनल डायरेक्टर जनरल को मुंबई भेजा है. प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सिरकार का कहना है कि वह जानना चाहते हैं एक अप्रशिक्षित व्यक्ति को ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को लाइव कवर करने के लिए क्यों भेजा गया? पिछले 7 महीनों में दूरदर्शन की यह चौथी गलती है. यह बहुत दुखद और अपमानजनक है. कैजुअल कर्मचारियों के लिए जब स्किल टेस्ट लागू किया जाता है तो इसका विरोध शुरू हो जाता है. लेकिन अब इसे लागू करना ही पड़ेगा.

अब बात खराब रिपोर्टिंग करने वाली महिला रिपोर्टर की. वीडियो वायरल होने के बाद महिला रिपोर्टर अवसाद में चली गई है. अखबार द टेलीग्राफ में छपी खबर के मुताबिक सोशल मीडिया पर अपना मजाक बनाए जाने की वजह से रिपोर्टर ने खाना-पीना भी छोड़ दिया है. उसके घरवाले बहुत परेशान हैं. रिपोर्टर की मां कहती हैं कि मेरी लड़की बहुत परेशान है और बार-बार यही कह रही है कि उसकी जिंदगी और करियर खत्म हो गया. वह 2 दिन से खाना नहीं खा रही है. अब मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच में शुक्रवार को शिकायत दर्ज कराई गई है, ताकि वह वीडियो ब्लॉक किया जा सके. ज्ञात हो कि वह महिला रिपोर्टर डीडी की कैजुअल एंकर है. वह पेशेवर पत्रकार नहीं है. उसे नियमित एंकरों से कम तनख्वाह मिलती है.

मूल खबर…

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डीडी नेशनल की एंकराइन का फूहड़पन छोड़ो, इसे भर्ती करने वाले की तलाश करो

गोवा में चल रहे 45वें इंडिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल को कवर करने के लिए डीडी नेशनल की तरफ से सजा-धजाकर भेजी गयी महिला एंकर की काबिलियत भारत के गली-कूंचों में जाहिर हो चुकी है। इस बिचारी पर अब रहम खाओ। यू-ट्यूब से लेकर दुनिया भर की बेवसाइटों ने इसकी कथित काबिलियत जमाने भर को दिखा, सुना और पढ़वा दी है। इस बिचारी के पीछे पड़ने से भला क्या हासिल होने वाला है। जो थोड़ी-बहुत हिंदी- अंग्रेजी बोलनी सीखी थी। बिचारी सबका सब भाषा ज्ञान गोवा में चल रहे इस फेस्टीवल में “ओक” (उल्टी कर आई) आई। लाइव एंकरिंग में कैसे हिलते-डुलते-मचलते हैं? कैसे कमर और पांव का हिला-डुलाकर संतुलन करते हैं। कैसे खींसें (दांत) निपोरते हैं? किस तरह पहने हुए कपड़ों का कलर-मैचिंग किया जाये…आदि-आदि…सब में मोहतरमा फिट्ट दिखाई दे रही हैं।

अगर कहीं कमी रह गयी इस हिंदी-अंग्रेजी की मिक्चर-महिला एंकरिन में तो बस अधकचरे ज्ञान की। वो हम नहीं कह रहे हैं। कैमरे पर बोलने से कहीं ज्यादा हिलती हुई दिखाई दे रही मोहतरमा ने खुद ही साबित कर दिया है, कि डीडी नेशनल जैसे सम्मानित सरकारी संस्थान को किस स्तर के काबिल एंकर और एंकरिनों की जरुरत है? जरुरत से ज्यादा स्मार्ट बनने के फेर में मोहतरमा ने, ‘गवर्नर ऑफ इंडिया’ ही बक डाला। मैंने सुना सो सुना, जमाने से भी नहीं छिप सका। मोहतरमा ने साबित कर दिया कि “बुद्धू” बक्सा, वाकई में आखिर होता क्या बला है? मोहतरमा लाइव के समय जितने हाथ-पांव फेंक रही हैं, अगर उसका एक अंश भी ज्ञानार्जन करके “लाइव” के लिए खड़ी हुई होतीं, तो शायद इतिहास के पन्नों में आज मेरे इस लेख को दर्ज होने की जगह न मिल पाती। मोहतरमा ने कभी 45-48 डिग्री तापमान में दिन भर खड़े रहकर पहले कभी देश के गली-कूंचों में लाइव रिपोर्टिंग की होती, तो आज मोहतरमा को समर्पित मेरा यह लेख जमाने को पढ़ने को नसीब न हुआ होता।

मोहतरमा ने लाइव के दौरान गोवा फिल्म फेस्टीवल में जो करा-धरा, वो आने वाले भविष्य में उनके साथ-साथ चलेगा, रोयेगा, नाचेगा-गायेगा, चीखेगा-चिल्लायेगा। मतलब मीडिया की आने वाली तमाम पीढ़ियों तक किसी डरावने साये की मानिंद पीछा करेगा। छोड़िये इस सबसे मुझे कोई खास सरोकार नहीं होना चाहिए। मैडम की एंकरिंग और उनका करा-धरा उन्हें ही अर्पण करता हूं। उन्हें मुबारक हो। मैं क्यों बे-वजह खीझूं या यूं ही माथा-पच्ची करुं?

मुझे तो अब सिर्फ उसकी तलाश है, जिसने इन एंकराइन मैडम की एंकरिंग को ‘सलाम’ ठोंककर इन्हें डीडी नेशनल में एंकरिंग करने की झंडाबरदारी सौंपी । मुझे तलाश है उस कथित उस्ताद की, जो डीडी नेशनल में इस तरह के एंकर/एंकरनियों की भर्ती पर “ओके टेस्टिड” की मुहर लगाता है। मुझे तलाश है उस न-मुराद सिफारिशी की, जिसने इन मैडम को डीडी नेशनल में एंकरिंग के लिए बायोडाटा भेजने के लिए प्रोत्साहित किया था। मुझे तलाश है, डीडी नेशनल के उस चैनल/कार्यक्रम मॉनिटरिंग प्रभारी की, जो अभी तक इन मैडम की कथित-काबिलियत का ‘लेखा-जोखा’ आगे और ‘उस्तादों’ तक नहीं सरका पाया है। अगर इनका यह वीडियो माननीय मोदी जी ने देख लिया होता, तो यह मैडम अब तक न मालूम कब की सिरे लग ली होतीं। सिर्फ इसी बिंदु पर कि यह “गवर्नर ऑफ इंडिया” नाम का ‘जिन्न’ मोहतरमा की जुबान पर कहां से सवारी कर गया? भारतीय मीडिया की आने वाली पीढ़ियों तक की मिट्टी पलीत करने के लिए।

लेखक संजीव चौहान वरिष्ठ खोजी पत्रकार हैं. उनसे संपर्क 09811118895 के जरिए किया जा सकता है.

मूल खबर….

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‘न्यूज 59’ के एंकर डैन थोर्न ने ऑन कैमरा किया डांस, वीडियो वायरल

पश्चिमी वर्जिनिया के ’59 न्यूज’ चैनल का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एंकर डैन थोर्न टेलर स्विफ्ट के गाने ‘शेक इट ऑफ..’ पर डांस करते हुए दिखाई दे रहे हैं. साथ में उनकी महिला सहकर्मी भी बैठी हुई हैं, लेकिन उनके हाव भाव को देखने से लगता है कि डैन का डांस उन्हें पसंद नहीं आया.

डैन थोर्न अपनी कुर्सी पर बैठे हुए महिला सहकर्मी को बीच-बीच में अपने हाव भाव से छेड़ते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को एंकर के यूट्यूब चैनल से जारी किया गया है. वीडियो को मिली जुली प्रतिक्रिया मिल रही है, साथ ही कुछ लोग उनकी साथी सहकर्मी की आलोचना भी कर रहे हैं. हालांकि वीडियो चैनल की व्यूअरशिप बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा दिख रहा है.

वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…

https://www.youtube.com/watch?v=jzc3Ndk5x8w

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पीएम, सीएम, डीएम और लोकल थानेदार को बचा लेना, बाकी किसी के भी खिलाफ लिख देना

आज से 35 साल पहले जब आज के ही दिन मैने अखबार की नौकरी शुरू की तो अपने इमीडिएट बॉस ने सलाह दी कि बच्चा पीएम, सीएम, डीएम और लोकल थानेदार को बचा लेना। बाकी किसी के भी भुस भरो। पर वह जमाना 1979 का था आज का होता तो कहा जाता कि लोकल कारपोरेटर, क्षेत्र के एमएलए और एमपी के खिलाफ भी बचा कर तो लिखना ही साथ में चिटफंडिए, प्रापर्टी दलाल और मंत्री पुत्र रेपिस्ट को भी बचा लेना। इसके अलावा डीएलसी, टीएलसी, आईटीसी और परचून बेचने वाले डिपार्टमेंटल स्टोर्स तथा पनवाड़ी को भी छोड़ देना साथ में पड़ोस के स्कूल को भी और टैक्सी-टैंपू यूनियनों के खिलाफ भी कुछ न लिखना। हां छापो न गुडी-गुडी टाइप की न्यूज। पास के साईं मंदिर में परसाद बटा और मां के दरबार के भजन। पत्रकारिता ने कितनी तरक्की कर ली है, साथ ही समाज ने भी। सारा का सारा समाज गुडी हो गया।  

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आज बहुत दिनों बाद एनडीटीवी प्राइम टाइम में रवीश कुमार दिखे। अच्छा लगा। रवीश अपने विषय पर पूरी स्टडी करते हैं और कहीं भी नहीं लडख़ड़ाते। इसी तरह उनकी टीम भी उम्दा होती है। अभय कुमार दुबे हिंदी के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जिनकी जिनकी जमीनी समझ लाजवाब है। अभय जी के अपने कुछ पूर्वाग्रह हो सकते हैं पर इसमें कोई शक नहीं कि अभय जी राष्ट्रीय राजनीति को समझने में निष्णात हैं। वे हर जटिल से जटिल समस्या का भी ऐसा समाधान पेश कर देते हैं कि लगने लगता है अरे ऐसा तो सोचा ही नहीं था। आज भी उन्होंने महाराष्ट्र में भाजपा के ढोल की पोल खोल दी। भाजपा लगातार एक देश एक जाति एक धर्म की बात करती है जबकि भारत जैसे बहुजातीय, बहुधर्मी और बहु संस्कृति वाले देश में ऐसा नामुमकिन है। यही कारण है कि भाजपा अपनी पूरी ताकत लगाकर भी महाराष्ट्र में मोदी के व्यक्तित्व को तेज हवा में भी नहीं बदल सकी। इतने धुंआधार प्रचार के बावजूद कोई ऐसी लहर नहीं पैदा कर सकी कि बहुमत के करीब तक पहुंच पाती। उसे जो भी सीटें मिली हैं वे मोदी की सोच और तैयारी के मुकाबले बहुत कम हैं। यहां तक कि वह लोकसभा में जो सीटें जीती थी वह भी नहीं जीत पाई। नीलांजल मुखोपाध्याय और संजय कुमार भी अपनी बात ढंग से रख सके तथा भाजपा कोटे से आर बालाशंकर भी और भाजपा के प्रच्छन्न चिंतक सुधींद्र कुलकर्णी भी। आज रवीश के आने पर प्राइम टाइम देखा और उनकी टीम का वाक् कौशल सुनकर अच्छा लगा। कल से लगातार टीवी पर विश्लेषण हो रहे हैं लेकिन 50 मिनट के इस कार्यक्रम से ही पता चला कि हकीकत क्या है बाकी में तो प्रवचन ही चल रहा था।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.

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न्यूज चैनल ‘जिओ टीवी’ के डिबेट में नशा करके आए मौलवी साहब (देखें वीडियो)

पाकिस्‍तान के एक मौलवी ने खूब दारू पीने के बाद न्‍यूज चैनल की डिबेट में शिरकत की. अपने इस कृत्‍य से मौलवी साहब ने पाकिस्‍तान और विश्‍वभर में रहने वाले मुसलमानों को शर्मिंदा किया है. इस्‍लाम में शराब पीने को हराम यानि गलत माना गया है. यही कारण है कि मौलवी साहब के शराब पीकर न्यूज चैनल डिबेट पर आने को इतना तूल दिया जा रहा है. पाकिस्‍तानी के एक बड़े न्‍यूज चैनल जिओ टीवी पर नशेबाज मौलवी ने अपनी हरकत से अपने देश की नाक कटा दी. मौलवी नशा करने के बाद न्‍यूज चैनल डिबेट पर ऑन एयर चले गए. नशे में उन्‍होंने इमरान खान को काफी खरी-खोटी सुनाई.

जिओ टीवी के इस शो में मौलवी साहब को नशे में देखकर पहले पहल तो एक महिला एवं पुरुष एंकर सकपका गए. लेकिन इसके बाद मौलवी साहब ने नशे की हालत में तहरीके पाकिस्‍तान के सुप्रीमो इमरान खान को खरीखोटी सुनाना शुरू कर दिया. गौरतलब है कि पुरुष एंकर मौलवी जी को नशे की हालत में लड़खड़ाता देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पा रहा था. हालांकि महिला एंकर इस पुरे वाक्‍ये के दौरान शांत दिखाई दी. नशे की हालत में मौलवी सा‍हब ने इमरान खान पर व्‍यक्तिगत हमलों की झड़ी लगा दी. मौलवी साहब ने कहा कि उन्‍हें अपनी बेटी पर फख्र है और दुनिया के सभी पिताओं को अपनी बेटियों पर फख्र करना चाहिए. इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि जब इमरान खान ने अपनी बेटी को पहचान नहीं दी तो वे पाकिस्‍तान-एक मुल्‍क को कैसे अपनी पहचान देखेंगे.

संबंधित वीडियो…

https://www.youtube.com/watch?v=-HTOTVvwf9k

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जब निजी चैनल भागवत के संबोधन का सजीव प्रसारण कर सकते हैं तो दूरदर्शन क्यों नहीं: जावड़ेकर

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नई दिल्ली: कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं और नेताओं ने रविवार को दिल्ली में प्रदर्शन कर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के इस्तीफे की मांग की। पार्टी का आरोप है कि जावड़ेकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के भाषण का नागपुर से सीधा प्रसारण दिखाने के लिए दूरदर्शन को मजबूर किया था।

दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली की अगुवाई में प्रदर्शन कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं को मध्य दिल्ली स्थित दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय के बाहर उस वक्त हिरासत में ले लिया गया जब उन्होंने दूरदर्शन कार्यालय की तरफ मार्च करने की कोशिश की।

लवली ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘सरकार दूरदर्शन को मजबूर कर रही है कि वह भगवाकरण के आरएसएस के एजेंडा का प्रसार करे। कांग्रेस पार्टी यह बर्दाश्त नहीं करेगी और हम सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के इस्तीफे की मांग करते हैं।’

वहीं नागपुर में सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दूरदर्शन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन के सजीव प्रसारण का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार मीडिया को व्यावसायिकता सिखाना चाहती है। प्रेसवार्ता में एक सवाल के जवाब में जावड़ेकर ने कहा कि दूरदर्शन एक स्वायत्त संगठन है और हमारा इसकी कार्यप्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं है।

भाजपा इसका यह कहकर बचाव किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देशभक्ति में वास्तविक तौर पर योगदान दिया है और उसके दर्शन में सभी के लिए न्याय शामिल है। कांग्रेस और माकपा की आलोचना पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमने दूरदर्शन पर लगा प्रतिबंध हटा लिया है। उन्होंने सवाल किया कि जब निजी चैनल भागवत के संबोधन का सजीव प्रसारण कर रहे थे, तो दूरदर्शन के इसे दिखाने में क्या बुराई थी।

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