10% आरक्षण से कम से कम 31% को मूर्ख बनाए रखने का लक्ष्य!

Sanjaya Kumar Singh : 10% आरक्षण से कम से कम 31% को मूर्ख बनाए रखने का लक्ष्य! एंटायर पॉलिटिकल साइंस वालों- वोट की फसल तैयार होने में समय लगता है। अब खेत बोने से फसल समय पर तैयार नहीं होगी।

Amitaabh Srivastava : सालाना 8 लाख रुपए की आमदनी (यानि 50 हज़ार रुपए माहवार से ज़्यादा) , 5 एकड़ ज़मीन, 1000 स्क्वायर फीट का प्लॉट: यह किस स्तर की गरीबी का पैमाना है साहब ? और सरकारी नौकरियां हैं कहां! सरकार के मंत्री ही कह चुके हैं, नौकरियां नहीं हैं, आरक्षण देंगे कहां से? शिक्षा संस्थानों में इस सरकार के राज में लगातार सीटें घटी हैं, फिर आरक्षण के इस लॉलीपॉप का मतलब ज़मीनी स्तर पर क्या यह जाएगा?
सिर्फ चुनावी जुमला बन कर रह जाएगा , 15 लाख रुपए की तरह।

Amit Chaturvedi : भाई जब 8 लाख तक की सालाना सैलरी वालों को गरीब मान ही लिया है तो 8 लाख तक की इनकम को टैक्स फ्री करो , वो ज्यादा बड़ा मास्टर स्ट्रोक होगा.. देखो भाई ऐसा है, 90% सरकारी नौकरियां ख़त्म करके गरीब सवर्णों को 10% क्या 90% आरक्षण भी दे दोगे तो क्या फ़र्क़ पड़ने वाला है?

Manoj Malayanil : अगर आप आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हैं तो 10% सवर्ण आरक्षण के बाद आपके बच्चों के लिए सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा में अब सिर्फ 40% सीटें रह जायेंगी। क्या आरक्षण समाधान है? ख़बर तो समझिये।

Shashi Singh : ई मोदिया पगला गया है क्या? सबको भिखारी बनाकर छोड़ेगा। कहॉं तो देश में किसी भी तरह के आरक्षण की प्रासंगिकता पर गंभीर व सौहार्दपूर्ण विमर्श छेड़ने की ज़रूरत थी। जिससे उन कारणों का उन्मूलन हो सके जिससे समाज का कोई हिस्सा वंचित रहने को मजबूर हो जाता है। इसके उलट ये समाज को पूरी तरह खंड-विखंड करने पर उतारू है। मंदिर न बनवा सकने की अपनी नपुंसकता को छुपाने के लिए किया गया यह पाप तुझे बहुत भारी पड़ेगा। तू इतिहास में सबसे क्रूर शासकों में गिना जायेगा। सत्ता दंभ में चूर हे राजन, जा तेरा नाश हो! साढ़े चार साल से इनकी बनाई जलेबियां खा रहा हूं। एक भी काम ये आदमी सीधे तरीके से नहीं कर सकता। ये तीर लगने के बाद वहां जाकर निशाने का गोला बनाता है।

Ranjit Kumar : इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने सवर्णो की पीड़ा को स्थान दिया है। आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए 10 प्रतिशत कोटा देने का निर्णय कर इस सरकार ने भारत, भारतीय लोकतंत्र, भारत की एकता और अखंडता को बल प्रदान किया है। एक भारतीय नागरिक के नाते हम इस निर्णय का स्वागत करते हैं और सरकार को धन्यवाद देते हैं।

Dayanand Pandey : आर्थिक रूप से गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण का फैसला, स्वागतयोग्य फ़ैसला है। बहुत ही सैल्यूटिंग फ़ैसला। लोकसभा चुनावों में निश्चित ही यह सवर्णों को आरक्षण एक बड़ा गेमचेंजर साबित होगा। एससी एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को संसद में पलटने का बड़ा खामियाजा भुगतने के बाद लगता है भाजपा को अपने मूल वोट बैंक की सुधि आई है। तीन राज्यों में भाजपा की हार सवर्ण वोटरों की भारी नाराजगी का ही नतीजा था। अच्छा है, गलती सुधारने का सभी को हक़ होता है। अब सवर्ण वोटरों के घाव पर यह फैसला कितना मरहम लगाता है, यह देखना शेष है। वैसे भी अभी यह कैबिनेट का फ़ैसला है। अभी लोकसभा और राज्यसभा की परीक्षा भी शेष है। मोदी सरकार द्वारा सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण का फ़ैसला लगता है, कांग्रेस को बिलकुल रास नहीं आया है। चैनलों पर चल रहे इस विमर्श से कांग्रेस ने अपने को सायास अनुपस्थित कर लिया है। गुड है यह भी। यह मास्टर स्ट्रोक भी। बाकी तिलक, तराजू और तलवार, इन को मरो जूते चार वालों की स्थिति संसद में शून्य है। सामाजिक न्याय की आड़ में भ्रष्टाचार की गंगा नहाने वालों की खैर बात ही क्या करनी। उन का रुदन स्वाभाविक है।

सौजन्य : फेसबुक

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Comments on “10% आरक्षण से कम से कम 31% को मूर्ख बनाए रखने का लक्ष्य!

  • मैं भड़ास न्यूज़ चैनल की ओर से काफी अच्छे समाचार निकलते हैं मैं भड़ास न्यूज़ के साथ कार्य करने का इच्छुक हूं क्योंकि भड़ास न्यूज़ सच्चाई निकालती है और मैं ऐसे चैनल में काम करना चाहता हूं जिस सदैव सच्चाई का हिसाब दे ऐसे चैनल को काफी समय लगातार देख रहा था की सच्चाई वाला आखिर कौन सा चैनल है जो सच्चाई के साथ हमेशा खड़ा रहता है मैं एक वोटर लिस्ट पत्रकार हूं मुझे सच्चाई निकालने वाला ही चैनल की आवश्यकता है मुझे आपके चैनल में काम करने का मौका मिल सकता है क्या मेरे मोबाइल नंबर 827925357है मुझे सदैव सच्चे आदमी पसंद है

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  • देश की जनता को आरक्षण की आग से कैसे मुर्ख बनाना है ये तो सर सिर्फ राजनितिक पार्टियाँ ही जानती है 10% आरक्षण से 31% को मूर्ख बनाए रखने का लक्ष्य भाजपा ने साध लिया साथ ही बाकियों को तो बना ही चुकी आरक्षण का लॉलीपॉप थमा कर ! जाति,धर्म,समाज में लोगों को बाट कर राजनीती करना भारत में चलन हो गया है ! देश में असली मुद्दों की कोई बात न करे बस आपस में लोगों को बहस करने के लिए छोड़ दो ! देश में आरक्षण को जन्म देना कितना सही था इसका जवाब अब खोजने का समय आ गया है ? क्यों देश की तमाम सरकारे आजादी से अभी तक लोगों को इतना परिपक्व नहीं पाना पाई की किसी भी व्यक्ति विशेष को आरक्षण की जरुरत न पड़े ? क्या आरक्षण समाधान है ?

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