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पत्रकार कहे जाने वालों का यशवंत जैसे एक निर्भीक पत्रकार पर हमला बेहद शोचनीय है : अविकल थपलियाल

Avikal Thapliyal : कोहरा घना है… बेबाक और निडर पत्रकारों पर हमले का अंदेशा जिंदगी भर बना रहता है। भाई यशवंत को भी एक दिन ऐसे घृणित हमले का शिकार होना ही था। बीते वर्षों में हुई मुलाकात के दौरान मैंने यशवंत का ध्यान इस ओर खींचा भी था। लेकिन मुझे ऐसा लगता था कि कई बार फकीराना अंदाज में सभी को गरियाने वाले यशवंत किसी अपराधी या फिर विशेष विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले हिंसक लोगों के कोप का भाजन बनेंगे। लेकिन पत्रकार कहलाये जाने वाले ही अपने बिरादर भाई यशवंत की नाक पर दिल्ली प्रेस क्लब में हमला कर देंगे, यह नहीं सोचा था।

Avikal Thapliyal : कोहरा घना है… बेबाक और निडर पत्रकारों पर हमले का अंदेशा जिंदगी भर बना रहता है। भाई यशवंत को भी एक दिन ऐसे घृणित हमले का शिकार होना ही था। बीते वर्षों में हुई मुलाकात के दौरान मैंने यशवंत का ध्यान इस ओर खींचा भी था। लेकिन मुझे ऐसा लगता था कि कई बार फकीराना अंदाज में सभी को गरियाने वाले यशवंत किसी अपराधी या फिर विशेष विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले हिंसक लोगों के कोप का भाजन बनेंगे। लेकिन पत्रकार कहलाये जाने वाले ही अपने बिरादर भाई यशवंत की नाक पर दिल्ली प्रेस क्लब में हमला कर देंगे, यह नहीं सोचा था।

यशवंत ने अपने पोर्टल के जरिये हिंदुस्तान के मीडिया जगत की खबरों के अलावा कई रचनात्मक प्रयोग किये, जिसकी प्रशंसा सभी करते हैं। साथ ही बतौर पत्रकार अपने को भी गरियाने में यशवंत कोई कोर कसर नही छोड़ते। जेल जाने पर ‘जानेमन जेल’ किताब लिख मारी। वह किताब भी एक जेल याफ्ता पत्रकार की स्वीकारोक्ति स्वागत योग्य थी। बहरहाल, यशवंत पर हुए हमले की निंदा की जानी चाहिए और हमले के आरोपी को सजा मिलनी चाहिए। पत्रकार कहे जाने वालों का एक निर्भीक पत्रकार पर हमला बेहद शोचनीय है। यशवंत की धाकड़ लेखनी सच उगलती रहे, और ये घना कोहरा छंटे…. आमीन!

उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार अविकल थपलियाल की एफबी वॉल से.

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विकास सिंह डागर : कई दिनों पहले भड़ास वाले यशवंत जी पर दो मानसिक दिवालिया तथाकथित पत्रकारों ने दिल्ली प्रेस क्लब में हमला कर दिया था।  हमला तो अकेले यशवंत जी पर हुआ लेकिन उसकी चोट शायद उन तमाम पत्रकारों को लगी जो मेहनत और ईमानदारी से अपने पेट का गुजारा कर रहे हैं। लेकिन इस घटना पर दुःख जताने वाले कम हैं, दिवाली मनाने वाले ज्यादा। कारण है यशवंत सिंह की कलम, जो आये दिन मीडिया में बैठे दलालों पर वार करती रहती है। किसी बड़े चैनल का सम्पादक हो, कोई जिले का उगाहीबाज स्टिंगर हो या रात दिन मेहनत करने वाले पत्रकारों की तनख्वाह मारने वाले मालिक। यशवंत लगातार ऐसे लोगों की पोल भड़ास डॉट कॉम के जरिये खोलते रहे हैंं और यही कारण है कुछेक पत्रकारों को छोड़कर बाकी सभी इस शर्मनाक कांड पर चुप्पी साधे हुए हैं।

मौजूदा समय मे पत्रकारिता में कुछेक ही लोग हैं जो अपने ही पेशे में फैल रही कुरूतियों के खिलाफ लिखते बोलते हैं। अगर ऐसे में सबसे बड़े भड़ासी और भड़ासियों की आवाज़ यशवंत जी पर हमला होता है तो कहीं ना कहीं हम जैसे लोग जो अपने घर की कुरूतियो से लड़ रहे हैं, उन्हें झटका लगना लाजमी है। ऐसे समय में यशवंत सिंह का साथ देना और आरोपियों का बहिष्कार कर उन्हें सजा दिलवाना हमारा कर्तव्य है। साथ ही मैं उन लोगों को सलाह दूँगा जो इस कायराना काँड पर खुशी जता रहे हैं कि यशवंत सिंह की दुश्मनी आप लोगों से नहीं थी, उन्होंने आपकी कुरूतियों को उजागर किया, जिसकी खुन्नस तुम लोग दिमाग मे लिए बैठे हो।

लेखक विकास सिंह डागर एक टीवी चैनल के रिपोर्टर हैं.

ये हैं दोनों हमलावर…

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1 Comment

1 Comment

  1. OM RATURI

    September 15, 2017 at 1:56 pm

    गुड
    अविकल भाई

    हम सब यशवंत के साथ हैं

    सादर

    ॐ रतुरी

    OM..RATURI

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