ललित मोदी से मिला, खबर से न समझौता होना था और न हुआ

मुझे याद है, राजस्थान में संपादकी कर रहा था। चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले हमारे अखबार की वजह से तिरंगा कांड हुआ और ललित मोदी के साथ शहर के एसपी के खिलाफ वारंट जारी हो गया। ललित ने मिलना चाहा और अपन मिलने से मना करने को लोकतंत्र विरोधी मानते हैं। ललित से छोटी सी मुलाकात रामबाग पैलेस होटेल के स्यूट में हुई, साफ था, खबर से ना समझौता होना था और ना हुआ। लेकिन जब और पड़ताल हुई तो शहर कलेक्टर के बारे में लोगों ने बताया किलैंड यूज चेंज के खेल में ललित के साथ कलेक्टर साहेब ने भी करीब 1200 करोड़ कमा लिए। 

इत्तेफाक से कलेक्टर मेरे सहपाठी रह चुके थे, सीधी बात की तो पता चला..लैंड यूज की फाइलों का फरमान ललित साहेब के यहां से आता है और कलेक्टर साहेब सिर्फ सरकारी खानापूरी करते हैं। बदले में अधेला भी नहीं मिलता। मामले का जिक्र सिर्फ इसलिए कर रहा हूं ताकि आप भी समझ सकें, कारोबारियों ने किस तरह से भारत की संपदा और कानून का कारोबारी इस्तमाल किया है और कर रहे हैं…और ज्यादातर मामलों में चेहरा बने अधिकारी तोहमत का शिकार होते हैं।

फाइल खुलती है तो फंदे में अधिकारी ही आते हैं। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि सारे आईएएस चोर हैं, पर ईमानदार भी हैं। कलेक्टर मित्र की मानूं तो उस वक्त लैंड यूज चेंज के खेल में 1200 करोड़ रुपए महज पांच साल में बटोरे गए। सो, अभी जो आंकड़ा सामने आया है, वो ब्रेड का छोटा सा टुकड़ा भी नहीं है।

सुमंत भट्टाचार्य के एफबी वाल से



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