अपने आप से संवाद : काश आप जैसे सभी मुसलमान हो जाएँ

मुसलमान अनपढ़ और जाहिल होते हैं. लेकिन मैं ऍम.ए, पी-एच.डी हूँ. मुसलमान अधिक बच्चे पैदा करते हैं. मेरा तो एक ही बेटा है. मुसलमान देश का नहीं, पाकिस्तान का झंडा फहराते हैं. मैंने पाकिस्तान पर किताब लिखी है. आप उसे पढ़ लें. समझ लेंगे कि मैं किसका झंडा फहराता हूँ.  मुसलमान टैक्स नहीं देते. टैक्स तो मेरे वेतन से कटा करता था. रिटायर होने के बाद पेंशन से कटता है. मुसलमान आतंकवादी होते हैं. मैं हर तरह के आतंक का विरोधी हूँ.

मुसलमान भारतीय संस्कृति से प्रेम नहीं करते. मैंने जीवन भर देश, विदेश में हिंदी पढ़ाई हैं. बीस से अधिक किताबें हिन्दी में लिखी हैं. काश आप जैसे सभी मुसलमान हो जाएँ. क्यों नहीं हो सकते. उन्हें शिक्षा मिले, रोज़गार मिले, सुरक्षा मिले, सम्मान मिले तो सभी मुसलमान मेरे जैसे हो सकते हैं… 

देखो..मेरी पोस्ट को करीब डेढ़ हज़ार लोगों ने ‘लाइक’ किया है… १०-१५ ने घोर असहमति दर्ज कराई है…. बातचीत आगे बढाने का काम तो हो ही सकता है. याद है मुसलमान औरतों के परदे पर जब तुमने लिखा था तो कुछ मुस्लिम संगठनों ने तुम्हें मुसलमान मानने से इनकार कर दिया था… तुम फिर से मुसलमान हो गए हो.. बधाई हो…

ज़हिदे-तंग नज़र( संकुचित द्रष्टिकोण वाले मुल्ला) ने मुझे काफ़िर समझा . और काफ़िर ये समझता है मुसलमा ( मुसलमान ) हूँ मैं. वो सब छोड़ो…. यार मेरी आँखें खुल गयी है कुछ भाई लोगों के कमेंट्स पढ़ कर. क्या? हमारे देश में शिक्षा सब के लिए उपलब्ध है… जो चाहे पढ़ ले … नौकरियां कम्पटीशन से मिलती हैं…जो पास हो जाये कर ले.. हमारे देश में सब सुरक्षित हैं… हर सांप्रदायिक दंगे की शुरुआत मुसलमान करते है…(ताकि अच्छी तरह पिट सकें).. इस्लाम के मूल में हिंसा है (पूरा कुरान शरीफ और हदीस उन्होंने पढ़ा है)… मुसलमान पूरी दुनिया को मुसलमान बनाना चाहते हैं…. हर मुसलमान मदरसों में पढ़ना चाहता हैं… जो उवैसी कहता है वही सब मुसलमान कहते हैं…जो ओसामा बिन लादेन करना चाहता था वही सभी मुसलमान करना चाहते हैं… इसलिए सभी मुसलमान घ्रणा के पात्र है…

– ये सब बातें इन लोगों को कौन बताता , समझाता है… कि ये लोग इतने बढे- बढ़े ‘फतवे’ कैसे दे देते हैं…आज हमारे देश में हिन्दू और मुसलमान दोनों धर्मों के कट्टरपंथी… राजनीति में सफलता पाने के इच्छुक….हर तरह की नफरत,हिंसा और द्वेष फैला रहे हैं… इन्हें देश ,समाज, मानवता से कोइ मतलब नहीं है…ये केवल सत्ता चाहते है..किसी भी कीमत पर… ये कुछ सोचना, समझना भी नहीं चाहते… क्योंकि उनका एजेंडा साफ़ है… फूट डालो, लड़वाओ और राज करो…

फिर किया क्या जाए… शांति,दोस्ती, प्रेम, सद्भाव और सहयोग पर विश्वास करने वाले हिन्दू मुसलमान साथ आयें…ग़ैर धार्मिक गैर राजनीतिक शुरुआत हो… मोहल्ला स्तर पर… जिला स्तर पर …।

प्रसिद्ध लेखक असगर वजाहत के एफबी वाल से



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