अब अगला इनाम जस्टिस अरुण मिश्र को मिलेगा!

Vijay Shanker Singh : मशविरा… अब अगला इनाम अरुण मिश्र को मिलेगा। उन्हें चाहिए कि गवर्नरी से कम पर राजी न हों। सीजेआई की रैंकिंग ऑर्डर ऑफ प्रेसिडेंस में 6 ठे नम्बर पर है औऱ सांसद की 21 वें नम्बर पर। ऊपर से नीचे आने को ही हमारे यहां, भोजपुरी में, हाथी से उतर कर गदहे पर बैठना कहा जाता है।

Shyam Singh Rawat : रंजन गोगोई ने ऐसे ही किसी पुरस्कार प्राप्ति की प्रत्याशा में सत्ता के अनुकूल जो निर्णय दिए—

  1. जज लोया की हत्या की जांच
  2. राफेल सौदा
  3. भीमा-कोरेगांव हिंसा
  4. सबरीमाला मंदिर
  5. बाबरी मस्जिद मामला
  6. CBI में आलोक वर्मा केस
  7. ट्रिपल तलाक
  8. ईवीएम मामला
  9. मोदी-अमित शाह चुनाव आचार संहिता उल्लंघन
  10. कश्मीर अनुच्छेद-370 व 35-A मामला
  11. संजीव भट्ट केस
  12. कन्हैया कुमार पर हमले की जांच के लिए एसआइटी गठित करने की याचिका खारिज

70 साल में पहली बार ऐसा हुआ है मितरों, भैनों और भाइयों। यह हमने कर दिखाया। ‘गोदी’ सिर्फ मीडिया ही नहीं है, न्याय देने वाले भी सारे नियम, कानून, मर्यादा, आदर्श, सिद्धांत, परंपरा, लाज-शरम छोड़कर सत्ता से सैटिंग करने लगे।

अब बोलो, क्या उखाड़ लोगे?

Drbn Singh : एनआरसी : रंजन गोगोई का सरकार को तोहफा

इस आदमी का कर्म ,कुकर्म पढ़ते पढ़ते मै थक गया, इसीसे आप सोच सकते हैं कि ये आदमी कैसा है….भारतीय न्यायपालिका का काला धब्बा….

Dear friends.

Please recall some of the judgments passed by Ranjan Gogoi as Chief Justice of India:

1-Rafale scam – no investigation despite evidence.

2- Triple Talaq

3- Judge Loya’s murder investigation- no investigation despite evidence

4- Kashmir Article 370 revocation – didn’t hear quoting other priorities

5- Dismissed petition to constitute SIT to investigate attack on Kanhaiya Kumar

6- Kerala’s Sabarimala temple

7- Electoral Bond Scheme

8- Removal of CBI Chief Alok Verma

You can add judgments to this list which I may have missed and now look at his nomination to the Rajya Sabha.

Mahendra Mishra : मी लॉर्ड, इससे अच्छा आप राष्ट्रपति के दरबान बन जाते… अनायास नहीं है कि जब पूरे देश में लोकतंत्र की अर्थी उठ रही है और संविधान को सरकारें पैरों तले रौंद रही हैं। तब उसका संरक्षक न केवल मौन है बल्कि इन सब करतूतों का खुला भागीदार बन गया है। और अगर उसमें जस्टिस मुरलीधर और इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस गोविंद माथुर सरीखे कुछ जज पहल भी कर रहे हैं तो उनके साथ सर्वोच्च अदालत किस तरह का व्यवहार कर रही है वह जगज़ाहिर है।

पूर्व पुलिस अधिकारी विजय शंकर सिंह, श्याम सिंह रावत, डॉ बीएन सिंह और महेंद्र मिश्र की एफबी वॉल से.

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हिन्दी अखबारों में रंजन गोगोई के नामांकन को सही बताने की कोशिश

Quid Pro Quo : काश! माई लॉर्ड्स, इतनी सी बात समझ पाते!

भारतीय न्यायपालिका में रंजन गोगोई जैसा यौन विकृत, बेशर्म और लज्जास्पद जज मैंने नहीं देखा- जस्टिस काटजू

क्या पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ब्लैकमेल किए गए थे?

हैव यू नो ऑनर, योर ऑनर?

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