जानिए, निपाह वायरस से बचाव के लिए होमियोपैथिक में क्या है इलाज

जैसा कि हम सभी को पता है भय व्यक्ति के रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटा देता है. आज जब निपाह वायरस एपिडेमिक का रूप ले रहा है, सारे देश में भय का वातावरण बन गया है. ऐसी अवस्था में कुछ लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत नीचे पहुंच जाने की आशंका बनती है. इस अवस्था के लिए होम्योपैथी में एक निश्चित दवा है ‘इग्नेशिया 200’. एक बार जब सारी दुनिया में प्लेग एपिडेमिक के रूप में फैला, उस समय इस होमियोपैथिक औषधि ने उसे रोकने और लोगों को जीवनदान देने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी.

सर्वप्रथम सबको एक खुराक ‘इग्नेशिया 200’ की लेनी चाहिए. रोग प्रसार अवधि में इसकी दो बूंद हफ्ते में एक बार लेना ज्यादा उपयुक्त होगा. यह रोग बरसात की शुरुआत से पहले आया है जो मौसम बदलने का समय है एवं केरल से शुरू हुआ है जहां मानसून पूर्व की बारिश प्रारंभ हो गई है. इस अवसर के लिए होम्योपैथी में जो मुख्य दवा है वह है ‘डल्कामारा’. ‘डल्कामारा’ के बहुत से लक्षण ‘निपााह’ वायरस जैसे ही हैं एवं मौसम बदलने की संधिकाल जब दिन गर्म हों और रातें ठंडी, यह डल्कामारा के लक्षणों के बढ़ने का मुख्य कारक है.

यही समय आम के पकने का होता है जिसके लालच में गादुर (चमगादड़) जो निपाह वायरस का वाहक है, फलों तक इस वायरस को पहुंचा देता है जो बाद में सुअर जैसे गिर कर सड़ रहे फलों को खाने वाले जानवर द्वारा मनुष्य तक पहुंच जाता है, जिनसे यह पूरी कम्युनिटी में फैलना शुरू होता है.

जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि जब दिन गर्म हों और रातें ठंडी, ऐसी अवस्था में ‘डल्कामारा’ के लक्षण तेजी से पनपते हैं. इस तरह इस रोग के लिए प्रमुख रोग प्रतिरोधक औषधि होम्योपैथी की ‘डल्कामारा 200’ ही होगी जिसे रोज
एक बार पूरे एपिडेमिक पीरियड में दो बूंद लेकर निपाह के प्रकोप से बचा जा सकता है. |इसका बार-बार लेना इसलिए जरूरी है कि रोग उत्पादक निपाह वायरस का प्रकोप इस मौसम में बार-बार हो सकता है.

रोग हो जाने की अवस्था में यदि हम पहले से उपरोक्त दोनो दवाएं लिए हुए हैं तो रोग का प्रभाव ऐसा नहीं हो सकता की किसी का जीवन ले सके. उस समय एकोनाइट, आरसेनिक, नेट्रमसल्फ, ब्रायोनिया, डल्कामारा, रस टाक्स, जेल्सीमियम, जिंकम मेटालिकम, बेलाडोना, लैकेसिस, ओपियम जैसी अनेकानेक होम्योपैथिक लाक्षणिक दवाएं मिलेंगी जो निश्चित रूप से इस रोग से मुक्त भी करेंगी और जीवनदान भी देंगी.

इस तरह बचाव के लिए–
1- Ignatia 200 प्रारंभ में एक खुराक फिर हफ्ते में एक बार दो बूंद
2- Dulcamara 200 अगले दिन से दो बूंद रोज एक बार जहां रोग फैला हुआ हो

Homoeopathy for the protection of NIPAH VIRUS

As we know fear is one of the main factors responsible for lowered down the immune system of human body. Because of this when an fatal epidemic like NIPAH VIRUS spreads a panic spreads more violently with them . For this Ignatia 200 is the most powerful remedy. Much before today it has been proved its usefulness when an epidemic of plague Spreads most part of the world.. At that time Ignatia 200 checked the Plague and saved the numerous lives as well.

Ignatia should be given to everyone living in the area of a epidemic at the start of protective treatment one dose first and should be repeated weekly till the out break up epidemic at least one time. it may be given as two drops of the dilution of 2ooth potency or in some globules.

Transaction Period of the weather change creates so many types of disorders in the susceptible persons . Sudden change in weather and temperature make some imbalance in acclimatization of human body . This condition favours to the symptoms of so many homeopathic medicines Dulcamara is one of them. Pre rainy weather gives unique modality to Dulcamara symptoms . When days are hot and nights are cold with raised humidity the perfect cause written for Dulcamara symptoms .

This weather condition is much more favourable for reproduction and spread of some viruses and NIPAH VIRUS is one of them. fruits eating Bats are the vector of this virus. There is in the Kerala free any weather has been started and fruits of mango and banana are also at their full growth. When vector Bats eaten fruits taken by human directly or some pet animal like Pig may become the source of infection for this fatal virus NIPAH . Susceptible persons to these atmospheric conditions may become easily infected.

Dulcamara is the remedy which symptoms are greatly nearer to the NIPAH virus symptoms in this atmospheric conditions. When Dulcamara one dose daily in 2oo potency will be taken regularly in epidemic areas and some doses other than that areas may give emunity from this VIRUS.

After taking these two remedies if this infection anyhow take place will never be fatal and there are so many Homoeopathic remedies to cure this infection successfully.
They may be AconitteNap,Belladonna ,Arsenic Alb,NatrumSulph,Rhus tox,Gelsemium ,Elaps car,Zincum Met Opium and Helliborus etc.

So for the protection from the nipah virus these two homeopathic remedies will be taken –

1- Ignatia200 one dose at first , then after weekly.

2- Dulcamara 2oo one dose daily in between..

Dr M D Singh
Managing Director
M D Homoeo Lab Pvt Ltd Maharajganj Ghazipur U.P India

एमडी होमियो लैब, गाजीपुर यूपी द्वारा जनहित में जारी.

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