लोकसभा चुनाव से ठीक पहले टीवी9 समूह का हिंदी चैनल इन पत्रकारों के नेतृत्व में लांच होगा!

2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मुंबई का टीवी9 समूह अपना हिंदी न्यूज चैनल लांच कर देगा, ऐसी चर्चा मीडिया गलियारे में हैं. बताया जा रहा है कि टीवी9 समूह के साथ विनोद कापड़ी काफी समय से जुड़े हुए हैं. सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा और अजीत अंजुम टीवी9 का हिंदी चैनल लाने की कमान संभाले हुए हैं. Continue reading

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वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम की लिखी कविता सोशल मीडिया पर हो रही है वायरल, आप भी पढ़ें

कविता मैंने कभी लिखी नहीं . पता नहीं कुछ मिनटों पहले मन की बेचैनियों से कुछ लाइनें निकली हैं .. ये जीवन की पहली अ-कविता है जो चंद क्षणों में मन से मोबाइल पर उतर कर यूँ आकार लेती गई…. Continue reading

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अजित अंजुम ने असहमति जताई तो मृणाल पांडे ने ब्लॉक कर दिया!

Ajit Anjum :  मृणाल जी, आपने ये क्या कर दिया? कल पीएम मोदी का जन्मदिन था. देश-दुनिया में उनके समर्थक / चाहने वाले / नेता / कार्यकर्ता / जनता / मंत्री / सासंद / विधायक जश्न मना रहे थे. उन्हें अपने-अपने ढंग से शुभकामनाएँ दे रहे थे. ये उन सबका हक़ है जो पीएम मोदी को मानते-चाहते हैं. ट्वीटर पर जन्मदिन की बधाई मैंने भी दी. ममता बनर्जी और राहुल गांधी से लेकर तमाम विरोधी नेताओं ने भी दी. आप न देना चाहें तो न दें, ये आपका हक़ है. भारत का संविधान आपको पीएम का जन्मदिन मनाने या शुभकामनाएँ देने के लिए बाध्य नहीं करता.

मृणाल पांडेय का वो ट्वीट जिस पर बवाल मचा है.

आप जश्न के ऐसे माहौल से नाख़ुश हों, ये भी आपका हक़ है. लेकिन पीएम मोदी या उनके जन्मदिन पर जश्न मनाने वाले उनके समर्थकों के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करें, ये क़तई ठीक नहीं… हम-आप लोकतंत्र की बात करते हैं. आलोचना और विरोध के लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करते हैं.. लेकिन लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल के वक्त आप जैसी ज़हीन पत्रकार / लेखिका और संपादक अगर अपनी नाख़ुशी या नापसंदगी ज़ाहिर कहने के लिए ऐसे शब्दों और चित्रों का प्रयोग करेगा.. पीएम के समर्थकों की तुलना गधों से करेगा तो कल को दूसरा पक्ष भी मर्यादाओं की सारी सीमाएँ लाँघकर हमले करेगा तो उन्हें ग़लत किस मुँह से कहेंगे…

सीमा टूटी तो टूटी. कितनी टूटी, इसे नापने का कोई इंची-टेप नहीं है… सोशल मीडिया पर हर रोज असहमत आवाजों या विरोधियों की खाल उतारने और मान मर्दन करने के लिए हज़ारों ट्रोल मौजूद हैं.. हर तरफ़ / हर खेमे में ऐसे ट्रोल हैं. ट्रोल और आप में फ़र्क़ होना चाहिए… आप साप्ताहिक हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान की संपादक रही हैं. हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषा पर आपकी ज़बरदस्त पकड़ है. फिर अभिव्यक्ति के लिए ऐसी भाषा और ऐसे प्रतीक क्यों चुने आपने? सवाल आपके आक्रोश या आपकी नाराज़गी का नहीं है. अभिव्यक्ति के तरीक़े पर है.

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शुक्रिया मृणाल जी …मुझे ब्लॉक करने के लिए… अब देखिए.. मृणाल जी मुझे भी ब्लॉक कर दिया… मैंने तो शब्दों की मर्यादा नहीं खोई थी.. उन्हें लिखे पर मर्यादित ढंग से असहमति ही जताई थी… शुक्रिया मृणाल जी, आपने मुझे ब्लॉक करने के क़ाबिल समझा… अपनी इस पात्रता का अंदाज़ा नहीं था मुझे… फिर मैं आपके लोकतांत्रिक अधिकारों की क़द्र करता हूँ… आपको हक़ है ये तय करने का कि कौन आपको फ़ॉलो करे. किसे आप फ़ॉलो करें. लेकिन आप अगर अपनी थोड़ी भी आलोचना पर इतनी बौखला जाती हैं तो मैं समझ सकता हूँ कि एक संपादक के तौर पर कितनी लोकतांत्रिक रही होंगी..

अब ये बात तो ठीक नहीं न कि आप अपने लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी के पैमाने ख़ुद करके उसका इस्तेमाल इस हद तक करें कि मोदी समर्थकों को गधा घोषित कर दें और मेरा जैसा कोई आदमी मर्यादित ढंग से आपको ऐसा न करने की नसीहत दे तो आप पट से ब्लॉक कर दें… नहीं.. नहीं.. मृणाल जी.. मुझे तकलीफ़ इस बात से नहीं कि आपने मुझे ब्लॉक किया. ग़ुस्सा इस बात का है कि आप सिर्फ़ अपने लिखे पर सिर्फ़ वाह-वाह क्यों चाहती हैं? किस-किस को ब्लॉक करेंगी आप? सुना है जो भी आपसे थोड़ा भी असहमत होता है, उसे तुरंत ब्लॉक कर देती हैं..

आज मैं शिकार हुआ. इससे पहले राहुल देव सरीखे वरिष्ठों को भी आप ब्लॉक कर चुकी हैं.. जबकि वो तो इतने तमीज़ से लिखते हैं कि कई बार असहमत होकर भी मैं उनसे कुछ सीखता ही हूँ… इसका मतलब ये हुआ कि आप थोड़ी भी आलोचना नहीं सकती हैं… अगर आप अपने लिखे / बोले को ब्रह्मवाक्य मानती हैं.. अपने को आलोचनाओं से परे मानती हैं तो आपको दूसरे की आलोचना का हक़ नहीं…

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम की एफबी वॉल से.

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इंडिया टीवी से विदाई की बात अजीत अंजुम ने भी कुबूल कर ली!

सभी छोटे बड़े मसले पर तड़ाक तपाक टिप्पणी करने वाले अजीत अंजुम अपने इस्तीफे जैसे बड़े घटनाक्रम पर लंबी चुप्पी साध गए. उनकी कोशिश थी कि इंडिया टीवी से हटाए जाने की सूचना ज्यादा चर्चा में न आए क्योंकि इससे संपादक का मार्केट डाउन होता है, सो वह अपनी विदाई के मसले पर मुंह सिए रहे. पर अब उन्होंने धीरे से अपने एफबी एकाउंट में खुद को इंडिया टीवी का पूर्व मैनेजिंग एडिटर घोषित कर दिया है. इस तरह अजीत अंजुम के इंडिया टीवी से विदा होने को लेकर कायम सस्पेंस खत्म हो गया है और भड़ास पर प्रकाशित खबर सही साबित हुई.

सबसे अच्छी बात ये हुई है कि सभी टीवी संपादकों ने मिलकर अपने बेरोजगार साथी अजीत अंजुम को ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन का जनरल सेक्रेट्री बनाकर एक नया काम सौंप दिया है ताकि उनकी सक्रियता बनी रहे और वे बेरोजगारी जैसा कुछ फील न कर सकें. पर अजीत अंजुम प्रतिभाशाली पत्रकार हैं और ढेर सारे संबंधों-संपर्कों के धनी हैं, इसलिए वे बहुत दिन तक घर न बैठेंगे. जल्द ही वे नई पारी शुरू करने का धमाका कर सकते हैं. कुछ और नहीं तो स्टार वाले उदय शंकर ही कोई न कोई प्रोजेक्ट दे देंगे ताकि रोजी रोटी चलती रहे.

दरअसल न्यूज चैनल्स के बड़े लोगों यानि संपादकों / प्रबंधकों में आपस में खूब एकता होती है. ये एक दूसरे की जमकर तारीफ करते रहते हैं और एक दूसरे के बुरे वक्त में आड़ ढाल बनकर मदद करने को तैयार रहते हैं, हां इसके चलते मालिकों को भले ही ठीकठाक चून लग जाए. इनकी ये एकता एक तरह से हिंदी टीवी पत्रकारिता का दुर्भाग्य भी है जिसके चलते अच्छे भले प्रतिभावान पत्रकार कई बार इस संपादकों के रैकेट का कोपभाजन बन जाते हैं और अपने ठीकठाक करियर को बर्बाद कर बैठते हैं. जो लोग इस रैकेट को सलाम नमस्ते करते हुए ‘यस सर यस सर’ ठोंकते रहते हैं वह खूब तरक्की करते हैं. न्यूज चैनल्स के संपादकों पर ‘तेरा आदमी मेरा आदमी’ करने का गंभीर आरोप लगता रहा है लेकिन यही संपादक लोग पब्लिक डोमेन में किसी भी किस्म के डिसक्रिमिनेशन की मुखालफत करते पाए जाते हैं.

मूल खबर…

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सुप्रिय प्रसाद बीईए के अध्यक्ष बने, अजीत अंजुम को महासचिव की जिम्मेदारी

ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन की नई टीम गठित कर ली गई है. शाजी जमां और एनके सिंह की जोड़ी लंबे समय तक अध्यक्ष-महासचिव पद पर विराजमान रही लेकिन पिछले दिनों इस्तीफा देकर नए पदाधिकारियों के लिए रास्ता बना दिया. बीईए की बैठक में सुप्रिय प्रसाद को अध्यक्ष और अजीत अंजुम को महासचिव चुना गया. सुप्रिय प्रसाद देश के नंबर वन न्यूज चैनल आजतक के मैनेजिंग एडिटर हैं.

वहीं, अजीत अंजुम हाल-फिलहाल इंडिया टीवी में हुआ करते हैं जहां से उनके इस्तीफे को लेकर भी चर्चाएं हैं. सुप्रिय प्रसाद और अजीत अंजुम की जोड़ी अब न्यूज चैनल्स के कंटेंट को लेकर स्व-नियमन का फैसला करेगी. सुप्रिय और अजीत, दोनों ही बिहार के रहने वाले हैं और टीवी पत्रकारिता में अपने दम पर एक मुकाम हासिल कर पाने में सक्षम हुए हैं.

बीईए का उपाध्यक्ष एबीपी न्यूज वाले दिबांग और रिपब्लिक टीवी वाले अरनब गोस्वामी को बनाया गया है. कोषाध्यक्ष पद पर न्यूज नेशन वाले अजय कुमार आसीन किए गए हैं. 15 सदस्यीय नई एग्जीक्यूटिव कमेटी में क़मर वहीद नक़वी, शाज़ी ज़मां, एनके सिंह, मिलिंद खांडेकर, राहुल कंवल, संजय बरागटा, सोनिया सिंह, दीपक चौरसिया, संजीव पालीवाल, अभिषेक कपूर, रवि प्रकाश, सुकेश रंजन, नविका कुमार, भूपेंद्र चौबे और राजेश रैना शामिल हैं. बीईए से क्षेत्रीय न्यूज चैनलों के संपादकों को जोड़ने के लिए एक कमेटी बनाई गई है जिसके सदस्य संजीव पालीवाल, राहुल कंवल और संजय बरागटा हैं.

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इंडिया टीवी से अजीत अंजुम के जाने की चर्चा, रोहित विश्वकर्मा का इस्तीफा, पीयूष पदमाकर को नई जिम्मेदारी

आजतक न्यूज चैनल से इस्तीफा देकर इंडिया टीवी ज्वाइन करने वाले रोहित विश्वकर्मा के बारे में खबर है कि उन्होंने बदले हुए हालात में चैनल को गुडबाय बोल दिया है. रोहित इंडिया टीवी में आउटपुट देखते थे और अजीत अंजुम के खासमखास माने जाते थे. चर्चा है कि इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम भी चले गए हैं. हालांकि भड़ास4मीडिया ने जब उन्हें फोन किया तो मीटिंग में होने का हवाला देते हुए उन्होंने कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

सूत्रों का कहना है कि मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम और आउटपुट हेड रोहित विश्वकर्मा के जाने के बाद शाम तीन से रात बारह के शिफ्ट की पूरी जिम्मेदारी पीयूष पदमाकर को दे दी गई है. पीयूष पदमाकर अभी तक रात नौ से दस बजे वाले रजत शर्मा के शो ‘आज की बात’ को देखते थे. पीयूष पदमाकर और अजीत अंजुम की आपस में नहीं बनती थी, ऐसा बताया जाता है.

अजीत अंजुम के इस्तीफे को लेकर अभी तक इंडिया टीवी और अजीत अंजुम किसी की भी तरफ से आफिसियल बयान या मेल या स्टेटस नहीं आया है. भड़ास के पास आए दर्जनों मेल, मैसेज और फोन में बताया गया कि अजीत अंजुम का इस्तीफा हो चुका है. यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें गिरती टीआरपी की सजा दी गई है. पता चला है कि इंडिया टीवी में कुछ दिन बाद किसी एक बड़े नाम की एंट्री हो सकती है.

ज्ञात हो कि दो दिन पहले ही इंडिया टीवी के ताकतवर पत्रकार हेमंत शर्मा को जाना पड़ा था. सीबीआई ने पैसों के लेन-देन के एक रैकेट को पकड़ा तो उसी सिलसिले में हेमंत शर्मा का भी नाम आया जिसके बाद रजत शर्मा ने हेमंत को चैनल से जाने को कह दिया था. इसके ठीक बाद अजीत अंजुम और रोहित विश्वकर्मा का जाना यह बतााता है कि रजत शर्मा अब पूरे घर को बदल डालने के मूड में हैं ताकि इंडिया टीवी की गिरती हुई टीआरपी को दुरुस्त किया जा सके.

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इंडिया टीवी में जबरदस्त उथल-पुथल, संत प्रसाद का इस्तीफा

इंडिया टीवी चैनल की टीआरपी लगातार गिरने से चैनल में हड़कंप मचा हुआ है. रजत शर्मा एंड कंपनी धांय-धूंय पर आमादा दिख रही है. सबसे भारी दबाव में अजीत अंजुम हैं. अंजुम जी के खासमखास आउटपुट हेड संत प्रसाद ने इस्तीफा दे दिया है. उधर, चर्चा है कि शाजी जमां या विनोद कापड़ी में से कोई एक इंडिया टीवी आ सकता है.

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टीआरपी गिरने से बौखलाए अजीत अंजुम ने कई पत्रकारों को इंडिया टीवी से निकाल बाहर किया

इंडिया टीवी इन दिनों पागलपन के मोड में चला गया है. टीआरपी लगातार दो हफ्ते से क्या गिरी, चैनल में आंय बांय सांय फरमान आने लगे हैं जिसका खामियाजा आम पत्रकारों को भुगतना पड़ रहा है. पहले तो फाइव डे वीक को खत्म कर सिक्स डे वीक कर दिया गया. इस आदेश से कर्मी अभी उबरे भी नहीं थे कि करीब आधा दर्जन लोगों को बाहर निकालने का आदेश जारी कर दिया. जो लोग निकाले गए हैं वो इनपुट से हैं.

शमशेर सिंह जो आजतक से वरिष्ठ पोजीशन पर इंडिया टीवी आए थे, उनको भी हटाए जाने की खबर है. इंडिया टीवी चैनल के क्राइम हेड विमल कौशिक और क्राइम टीम के सदस्य आशीष सारस्वत को भी प्रबंधन ने बिना वजह अचानक हटा दिया है. बीजेपी दिल्ली बीट देख रहे रिपोर्टर अभिमन्यु को भी चैनल से हटाए जाने की सूचना है. इसी तरह दो अन्य पत्रकारों को भी चैनल से हटा दिया गया है जिनका नाम नहीं मालूम हो सका है.

सबसे मजेदार ये है कि चैनल के मालिक रजत शर्मा खुद पत्रकार रहे हैं और अब पत्रकार कम चैनल मालिक के रूप में दोहरी भूमिका निभा रहे हैं. उनके बाद जो दो लोग सबसे ताकतवर हैं चैनल में वो हैं अजीत अंजुम और हेमंत शर्मा. इन दोनों को भी सरोकार और मनुष्यता पर अक्सर लिखते पढ़ते भाषण देते देखा सुना जा सकता है. लेकिन जब इनके चैनल की बात आती है तो इनके मुंह पर ताला लग जाता है क्योंकि आखिर खुद के पेट पर लात पड़ने से डर किसको नहीं लगता. इसलिए ये लोग खुद ही प्रबंधन को खुश करने वाले राय मशविरे दिया करते हैं जिसमें छंटनी से लेकर छुट्टियां खत्म करने जैसी सिफारिशें होती हैं. देखना है कि इस छंटनी और छुट्टी रद्दीकरण से चैनल की टीआरपी पहले जैसी हो जाती है या नहीं.

पूरे प्रकरण को समझने के लिए इन शीर्षकों पर क्लिक करें…

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#IndiaTvExposed : अजीत अंजुम जी, चोर की दाढ़ी में तिनका इसी को कहते हैं!

इंडिया टीवी का इतनी जल्दी डिफेंस मोड में आ जाना चौंकाने वाला है…

Sanjaya Kumar Singh : इंडिया टीवी #IndiaTvExposed से डिफेंस मोड में क्यों है? मुझे कथित अभियान, साजिश की सूचना संपादक अजीत अंजुम की पोस्ट से मिली। इमरान शेख की चिट्ठी में एक सर्वज्ञात और सबसे साधारण (आज कल के हिसाब से) आरोप के अलावा कोई खास बात नहीं है। अभी तो उसने प्रधानमंत्री से मिलकर सारी बात बताने के लिए समय भर मांगा है। मुझे नहीं लगता कि किसी विशेष संबंध या कारण के इमरान शेख को प्रधानमंत्री से मिलने का समय मिल पाएगा। फिर भी इंडिया टीवी का इतनी जल्दी डिफेंस मोड में आ जाना चौंकाने वाला है। चोर की दाढ़ी में तिनका इसी को कहते हैं।

जनसत्ता अखबार में लंबे समय तक काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह ने उपरोक्त एफबी पोस्ट में अजीत अंजुम की जिस पोस्ट का जिक्र किया है, वो इस प्रकार है…

Ajit Anjum : इंडिया टीवी के खिलाफ सोशल मीडिया पर #IndiaTVExposed का हैशटैग क्रिएट करके बेबुनियाद और तथ्यहीन Propaganda चलाया जा रहा है .. इंडिया टीवी के खिलाफ मुहिम चलाने वाले लोग इंडिया टीवी के एक पूर्व रिपोर्टर इमरान शेख की एक चिट्ठी को हथियार बनाकर सोशल मीडिया में चैनल के खिलाफ झूठा और तथ्यहीन दुष्प्रचार कर रहे हैं इंडिया टीवी से बाहर होने के एक साल बाद इमरान शेख ने पीएम मोदी के नाम चिट्ठी लिखकर चैनल पर मनगढ़ंत आरोप लगाया है कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में False and Fabricated खबरें करने को कहा गया . इससे परेशान होकर उन्होंने चैनल छोड़ दिया . इसी चिट्ठी को मुद्दा बनाकर #IndiaTVExposed हैशटैग के जरिए दुष्प्रचार करने वालों के लिए कुछ जरुरी तथ्य…

1 ) इमरान शेख मुंबई में एक साल पहले तक इंडिया टीवी के क्राइम/लोकल रिपोर्टर थे . जो लोग न्यूज चैनल की Functioning को थोड़ा भी जानते हैं , उन्हें पता होगा कि मुंबई के क्राइम रिपोर्टर का पीएम और केन्द्र सरकार की खबरों से कोई लेना-देना नहीं होता..मुंबई का क्राइम रिपोर्टर पीएम के पक्ष में न तो कई खबर कर सकता है, न ही उसे करने को कहा जा सकता है.

2 ) इंडिया टीवी से बाहर होने के एक साल तक तो इमरान शेख ने कभी ऐसी कोई बात नहीं कही. न ही ऐसा कोई आरोप लगाया. एक साल बाद अचानक ऐसा आरोप लगाना इस बात का सबूत है कि कुछ लोगों ने या तो उसे साजिश का मोहरा बनाया या फिर उनकी मंशा संदिग्ध है.

3 ) मुंबई ब्यूरो में काम करने के दौरान डियूटी में उनकी लापरवाही की कई बार शिकायत मिली थी और खबरें मिस करने पर इंडिया टीवी के सीनियर एडिटर्स की तरफ से उन्हें लिखित और मौखिक चेतावनी भी दी गई थी. बार –बार चेतावनी के बाद उन्हें 8 अक्तूबर 2015 को दो दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया था. फिर भी उनका रवैया नहीं बदला और वो अपने वरिष्ठ सहयोगियों से बदसलूकी करते रहे .

4 ) इमरान शेख को कई बार उनके काम न करने /अपनी साथियों के साथ बदसलूकी करने और डियूटी पर लापरवाही वरतने के लिए चेतावनी दी गई. ये सारे तथ्य सितंबर – अक्तूबर 2015 में दिल्ली और मुंबई के कई सहयोगियों के बीच मेल पर हुए Chain of communication में मैजूद है.

5) 17 अक्तूबर 2015 को इमरान शेख ने अपने वकील से माध्यम से एक नोटिस भेजा , जिसमें उन्होंने तीन वरिष्ठ सहयोगियों के खिलाफ परेशान करने का आरोप लगाया लेकिन उस नोटिस में भी ऐसी कोई बात नहीं लिखी गई जो इंडिया टीवी से बाहर होने के एक साल बाद उन्होंने सनसनीखेज ढंग से अपनी चिट्ठी में लिखी है. जो बात उन्होंने एक साल पहले के नोटिस और एडिटर को लिखी चिट्ठी में नहीं लिखी, वो आज क्यों लिख रहे हैं? इसके पीछे क्या साजिश है?

6 ) चिट्ठी से साफ पता चलता है कि इंडिया टीवी से अलग होने के एक साल बाद इमरान शेख किसी के इशारे पर बहकावे में आकर बिल्कुल आधारहीन आरोप लगाकर इंडिया टीवी को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा बन रहे हैं.

Under the hashtag #IndiaTvExposed, a baseless and malicious propaganda is being launched on social media by some vested interests against India TV. These people are circulating false and malicious allegations against the news channel on social media by using a purported open letter posted on Facebook by a former India TV reporter Imran Sheikh. In his purported open letter, Imran Sheikh has made baseless allegation that he was asked to file false and fabricated news in favour of Prime Minister Narendra Modi, because of which he resigned from the news channel. Here are some facts which clearly debunk the malicious propaganda being made by vested interests under the hashtag #IndiaTVExposed:

1) Imran Sheikh was a crime/local reporter for India TV in Mumbai till a year ago. Any news-conscious person, who knows the bare outline of how a news channel works, understands that a crime reporter posted in Mumbai has nothing to do with filing stories related to the Prime Minister and the central government. A crime reporter posted in Mumbai can neither do a TV story in favour of the Prime Minister, nor can he be asked to do so by his seniors.

2) After quitting India TV, Imran Sheikh did not level any allegation against the channel for more than a year. The very fact, that he levelled such an allegation a year after quitting the channel, indicates that some vested interests have used him as a pawn in a nefarious game or his intentions are suspect.

3) The Mumbai Bureau received several complaints of negligence in duty against Imran Sheikh, and he was given verbal and written warnings several times by senior editors at India TV for missing news stories. Following repeated warnings, he was suspended for two days on October 8, 2015, but his attitude did not change for the better, and he continued to misbehave with his senior colleagues.

4) Imran Sheikh was warned several times for not working properly/for misbehaving with his colleagues and for negligence in duty. All these facts exist as record in the chain of mail communications between him and several colleagues based in Delhi and Mumbai during October 2015.

5) On October 17, 2015, Imran Sheikh sent a notice through his lawyer in which he levelled charges of harrassment against three of his senior colleagues, but no mention was made of the charge that he has now levelled in his open letter posted on Facebook a year after quitting. The question arises: Why did he not write a letter to the Editor on this said issue or mention it in his lawyer’s notice? What could be the motive behind this?

6) The open letter by Imran Sheikh on his Facebook wall clearly indicates that he has become part of a falsehood campaign to denigrate India TV by levelling baseless allegation at the instigation of some vested interests.

अब पढ़ें इमरान शेख द्वारा प्रधानमंत्री को भेजी गई चिट्ठी…

 

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प्रेस क्लब आफ इंडिया : किसी ज़माने में यहां का खाना अच्छा होता था, आज लगा ये मयखाना ही अच्छा…

Ajit Anjum : मैं आमतौर पर प्रेस क्लब जाता नहीं क्योंकि मैं पीता नहीं… साल में दो तीन दिन चाहे अनचाहे चला जाता हूं… कुछ दोस्तों की ज़िद पर या तो वोट देने या किसी के साथ खाने के लिए.. पिछले साल वोट देने तो नहीं जा पाया लेकिन आज अपने मित्र राजीव कुमार और शिल्पा जी के कहने पर ना ना करते हुए कुछ खाने के लिए प्रेस क्लब पहुँच गया और एक एक करके पाँच तरह का स्नैक्स मंगवाकर खाने की नाकाम कोशिश करता रहा…

मोमो, चिली पनीर, तंदूरी चिकन, फ़िश फ्राई और चिकन चिली.. एक भी आइटम ऐसा नहीं था, जो मुँह का ज़ायक़ा ख़राब करने में सक्षम न हो.. शिल्पा-राजीव को कोसता भी रहा और तय किया कि भूख से निजात का कोई दूसरा विकल्प जब तक होगा, यहाँ खाने तो नहीं आऊँगा… हाँ, पीने वालों को ये मयखाना मुबारक… किसी ज़माने में यहाँ का खाना अच्छा होता था आज लगा कि ये मयखाना ही अच्छा.. प्रेस क्लब के आसपास फुटपाथ पर या जंतर मंतर के ढाबे पर इससे लाख गुना बेहतर खाना आपको मिल जाएगा..

इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम की एफबी वॉल से.

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अजित अंजुम ने कहा- एक बार फिर टीम ‘इंडिया टीवी’ की जय हो!

Ajit Anjum : इंडिया टीवी लगातार चौथे सप्ताह नंबर वन ..और हाँ, नंबर वन ही नहीं हैं, काफी फासले से हम पहले पायदान पर हैं, बाकी सब बहुत पीछे हैं… इंडिया टीवी की टीम की मेहनत का नतीजा..

इंडिया टीवी के रिपोर्टर्स, प्रोड्यूसर्स, कैमरामैन, एडिटर्स, असाइनमेंट, आउटपुट, टेक्निकल और डिस्ट्रीब्यूशन टीम को बधाई… टीवी न्यूज़ में टीम के बगैर कुछ भी कर पाना नामुमकिन है… और जब सब जोश और ऊर्जा के साथ काम करते हैं तो ऐसे नतीजे हौसला बढ़ाते हैं… एक बार फिर टीम इंडिया टीवी की जय हो…

इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजित अंजुम के फेसबुक वॉल से.

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हिन्दी चैनलों के संपादक अपने बॉस एंकर सुषमा स्वराज की हिन्दी चिंता पर टीटीएम में लगे हैं!

Vineet Kumar : हिन्दी चैनलों के संपादक ऑब्लिक बॉस एंकर सुषमा स्वराज की हिन्दी चिंता पर जिस कदर टीटीएम में लगे हैं, एक बार पलटकर सुषमा स्वराज पूछ दें कि आपने अपने चैनलों के जरिए किस तरह की हिन्दी को विस्तार दिया तो शर्म से माथा झुक जाएगा. इन संपादकों को इतनी भी तमीज नहीं है कि ये समझ सकें कि वो जो चिंता जाहिर कर रही है, उनमे हम संपादकों के धत्तकर्म भी शामिल हैं. आखिर उन्हें लाइसेंस हिन्दी चैनल चलाने के दिए जाते हैं, हिंग्लिश के तो नहीं ही न..

ये सब शर्मो हया धोकर गटर में डाल देने वाले हिन्दी के संपादक हैं… भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हिन्दी की दुर्दशा पर चिंता जताए जाने की अदा पर राहुल देव, अजीत अंजुम, उमेश उपाध्याय जैसे संपादक, टीवी और मीडिया सेमिनारों के चमकीले चेहरे मार लहालोट हुए जा रहे हैं. बेशर्मी की हद तक जाकर वो जो अपडेट कर रहे हैं, उन्हें सुषमा स्वराज तक पहुंचाने की( वर्चुअली ही सही) पूरजोर कोशिश और नंबर बनाने में लगे हैं..लेकिन ये हिन्दी समाचार चैनलों के लिए काम करनेवाले वो दिग्गज चेहरे हैं जिन्हें आधे घंटे के एक कार्यक्रम के लिए हिन्दी के नाम तक नहीं सूझते.

अजीत अंजुम को भाषा पर महारथ हासिल है लेकिन चैनल सास, बहू और संस्पेंस के जरिए अनुप्रास अलंकार के आगे जाकर हांफने लग जाता है. इधर राहुल देव अंग्रेजी से एमए होने के बावजूद मीडिया सेमिनारों में हिन्दी की कंठी-माला जपते थकते नहीं. ये तस्वीर एक पत्रिका के पूरे पेज में छपे विज्ञापन की है. उस वक्त ये सीएनइबी के सीइओ हुआ करते थे. जो विज्ञापन आप पत्रिका में देख रहे हैं, उसकी कटआउट से पूरे शहर को पाट दिया गया था. यहां तक कि फ्लाईओवर से गुजरते हुए ये विज्ञापन दिखाई देते.

ये राहुल देव जब सीएनइबी के सीइओ रहे तो शहर को इस होर्डिंग से ऐसा पाट दिया कि कहीं से नहीं लगता था कि ये हिन्दी चैनल है..लेकिन सेमिनारों में भाषाई शुद्धता और हिन्दी प्रेम पर मार ठेले रहते हैं..

चैनल की भाषा भी हिन्दी थी और उसके सीईओ भी हिन्दी पर जान लुटा देनेवाले लेकिन विज्ञापन अंग्रेजी में. मतलब ये कि ये जिन कुर्सियों पर बैठकर काम करते आए हैं, चाहते तो चैनलों के जरिए लोगों के बीच हिन्दी का एक बेहतर रूप पेश कर सकते थे. कुछ नहीं तो इसे गैरजरूरी ढंग से हिंग्लिश होेते जाने से रोक सकते थे लेकिन नहीं..ऐसा करते तो फिर बाजार की पिछाड़ी बर्दाश्त करने की ताकत कैसे जुटा पाते.. अब सुषमा स्वराज हिन्दी भाषा को लेकर जिस तरह की चिंता जाहिर कर रही है, ये उनके आगे लहालोट हो जाने और नंबर बनाने का मुद्दा नहीं है, शर्म से सिर झुकाकर चुप मार जाने का है..अपने किए पर अफसोस करने का है. लेकिन शर्म भी जो एक चीज होती तब न..

मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त पोस्ट पर आए कई कमेंट्स में से एक मुख्य कमेंट यहां पेश है :

Som Prabh : राहुल देव बहुत पहले से संदिग्ध हो चुके हैं. यह एक वक्त में हिंदी के खत्म होने की भविष्यवाणी कर रहे थे. भोपाल में एक कार्यक्रम में भास्कर को भाषा के लिए शाबासी देने लगे. सभा में मैंने उठकर टोका कि कुछ भी कहें लेकिन गलत बयानी न करें. यह देख लें कि भास्कर लिख क्या रहा है. बहुत ही अति उत्साह से भरा कार्यक्रम था. प्रियदर्शन सर ने बढ़िया बोला था और भाषा के प्रति रवैये को लेकर खुले मन से आलोचना की थी. यह भी दिलचस्प है कि टीवी रिपोर्टर होकर अखिलेश शर्मा ने अपने ब्लॉग पोस्ट में टीवी की भाषा पर टिप्पणी नहीं किया. क्या अखबार ही खराब किस्म की भाषा इस्तेमाल कर रहे हैं.

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एबीपी न्यूज की बहादुर रिपोर्टर प्रतिमा मिश्रा, ऐसे ही काम करती रहो, डरना मत कभी : अजीत अंजुम

Ajit Anjum : ABP की बहादुर रिपोर्टर प्रतिमा मिश्रा…. ऐसे ही काम करती रहो.. डरना मत कभी… झुकना मत कभी… तुम्हारे जैसी रिपोर्टर और पत्रकार की देश को ज़रूरत है… उन्मादी भीड़ में शामिल हुए लोगों को ये हक़ किसने दिया कि वो सबको देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटे… ये देश जितना उनका है, उतना ही तुम्हारा और हमारा… आप भी सरेआम गुंडागर्दी करने वाले इस वकील को देखिए… इसका वश चले तो सवाल पूछने वाली इस युवा रिपोर्टर को मौके पर ही देशद्रोही घोषित कर दे…

वीडियो लिंक नीचे है, क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=N-TQuCuuWz0

मैं भारत माता की जय बोलता हूँ और बोलूंगा …
मैं वंदे मातरम् बोलता हूँ और बोलूंगा …
मैं जय हिन्द बोलता हूँ और बोलूंगा …

कहीं दूर से भी अगर जन गण मन की आवाज़ सुनाई देती है तो उसके सम्मान में तब तक खड़ा रहता हूँ, जब तक खत्म न हो जाए … ये सब मैं करता हूँ और करूँगा लेकिन आपके डर से या आपसे देशभक्ति का सर्टिफिकेट लेने के लिए नहीं करूँगा …

9 साल की मेरी बेटी भी सिनेमा हॉल में जन गण मन सुनते ही सबसे पहले खड़ी होती है… पठानकोट पर हमले के वक़्त वो भी अपनी पढाई और कार्टून देखना छोड़ मेरे साथ घंटों न्यूज़ चैनल देखती है और बार-बार यही पूछती है- ”पापा, ये टेररिस्ट कब मारे जाएंगे…” इसलिए आपको ये हक़ किसने दिया कि आप बार बार हमारा इम्तेहान लें और आपके हिसाब से… आपके सिलेबस के हिसाब से हम सर्टिफिकेट के तलबगार हों… नहीं चाहिए हमें आपसे देशभक्ति का सर्टिफिकेट….

यही हाल रहा तो देश के हर जिले में देशभक्ति प्रमाण पत्र वितरण केंद्र खुलेगा… हर नागरिक को nationalist के टेस्ट में पास करने के इम्तेहान से गुजरना होगा और देशभक्त व देशद्रोही का सर्टिफिकेट देने वाले लोग आपकी हर असहमति पर आपको देशद्रोही कहेंगे.. देशप्रेम का ठेका ऐसे लोगों ने खुद ही ले लिया है जो उनके साथ नारे और उनके मुताबिक जयकारे नहीं लगाएगा, वो देशद्रोही करार कर दिया जाएगा.

इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम के फेसबुक वॉल से.

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अखिलेश राज में ये सब क्या हो रहा है, मंदिर के लाउडस्पीकर से भीड़ को उन्मादी कौन बना रहा है : अजीत अंजुम

Ajit Anjum :  दिल्ली से सटे यूपी के दादरी इलाके में जो हुआ, उसे आप क्या कहेंगे? मंदिर के लाउडस्पीकर से ये अफवाह फैलाई गई की फलां घर में गोमांस है और उग्र भीड़ ने उस घर पर धावा बोल दिया और एक बुजुर्ग की हत्या कर दी गई. सरेआम उसे पीटा जाता रहा. कुछ लोग उसे पीट रहे थे और कुछ तमाशा देख रहे थे. बेटी-पत्नी और परिवार बचाने की गुहार लगा रहा था लेकिन कोई सुनने वाला नहीं. थी तो सिर्फ हत्यारी भीड़ या खामोश तमाशबीन.

अख़लाक़ नाम के उस शख्स की बेटी साजिदा कातिलों की भीड़ में से 10-12 को पहचानती थी. पहले उसने उन सबके हाथ पाँव जोड़े कि मेरे पिता को छोड़ दो लेकिन जब उनपर कोई असर नहीं हुआ तो वो दौड़ती हुई अपने आस पड़ोस के घरों में गई. उन लोगों के दरवाजों पर उसने दस्तक दी, जिन्हें वो बचपन से भैया, चाचा, ताऊ कहती थी. सबसे उसने कातिल भीड़ से पिता को बचाने की गुहार लगाई लेकिन किसी को न तो उस पर तरस आया न ही मौत की तरफ बढ़ते उसके पिता पर. और, वही हुआ, जो भीड़ ने चाहा.

अखिलेश राज में ये क्या हो रहा है और कौन हैं जो मंदिर के लाउडस्पीकर से भीड़ को उन्मादी बना रहे हैं? कैसी मानसिकता है ये? आज जब उस गांव में हमारे रिपोर्टर मनीष प्रसाद ने हिन्दू परिवारों से बात की तो कई लोगों ने कहा कि अख़लाक़ के घर ईद-बकरीद में वो सेवइयां और मटन खाने जाते थे. इस बार भी गए. उन्हें अफ़सोस है कि वो अख़लाक़ को बचा नहीं पाए. आज रात 8.30 बजे आप देखिए इंडिया टीवी पर पूरी खबर.

इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम के फेसबुक वॉल से.

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‘न्यूज़ किलर एडिटर एसोसिएशन’ अंत की ओर!

मुझे नहीं पता कि आप न्यूज चैनलों में होने वाली एक बड़ी आहट को पढ़ पा रहे है या नहीं। ‘न्यूज़ किलर एडिटर एसोसिएशन’ (अजीत अंजुम, विनोद कापड़ी, सतीश के सिंह, आशुतोष, मिलिंद खांडेकर आदि का गैंग) अपने अंत की ओर बढ़ रही है। इस बात की आहट न्यूज़ 24 चैनल के एक नये फैसले में झलकती है। न्यूज़ 24 ने इंडिया टीवी के प्रखर श्रीवास्तव को अपना नया आउटपुट हेड बनाने का फैसला लिया है। अगर आप ध्यान से देखें तो पिछले एक साल में ये चौथी बार हो रहा है जब किसी मेन स्ट्रीम के चैनल ने नए युवा लोगों पर भरोसा किया है। पिछले एक साल के अंदर आजतक ने मनीष कुमार, ज़ी न्यूज ने रोहित सरदाना, आईबीएन 7 ने आर सी शुक्ला और अब न्यूज़ 24 ने प्रखर श्रीवास्तव को आउटपुट हेड बनाया है।

वहीं इनमें से दो चैनलों ने अपने हेड भी युवा बनाए हैं, न्यूज़ 24 ने दीप उपाध्याय और आईबीएन 7 ने सुमित अवस्थी। यानि साफ है कि चैनल के मालिक भी अब इस ‘न्यूज़ किलर एडिटर एसोसिएशन’ से छुटकारा पाना चाहते हैं। नई पीढ़ी के टीवी प्रोफेशनल्स अब तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और चैनल मालिक भी अब नये लोगों पर भरोसा जता रहे हैं। जहां तक ‘न्यूज़ किलर एडिटर एसोसिएशन’ की बात है तो विनोद कापडी पहले ही मार्केट से आउट होने के बाद फिल्म बनाने के धंधे में लग गए हैं, आशुतोष आप की राजनीति करने में लगे हैं, सतीश के सिंह की सत्ता अब लाइव इंडिया जैसे छोटे से चैनल तक सिमट कर रह गई है, एनके सिंह के पास तो नौकरी के भी लाले हैं, बस बचे हैं तो अजीत अंजुम। लेकिन ‘न्यूज़ किलर एडिटर एसोसिएशन’ के इस असली खिलाड़ी के बचे खुचे दिन ही बाकी हैं। जिस तरह से इन्होने इंडिया टीवी में लाखों रुपये देकर लोगों की भर्तियां की है उसके बाद चैनल के मालिक रजत शर्मा इनसे परफॉरमेंस की उम्मीद करेंगे जो अजीत अंजुम के लिए बहुत कठिन है।

ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि अजीत अंजुम के पास इंडिया टीवी में सिर्फ छ महीने का समय है। और अगर अजीत अंजुम बाहर हो जाते हैं तो न्यूज़ चैनलों में खबर की हत्या करने वाले इस ‘न्यूज़ किलर एडिटर एसोसिएशन’ (अजीत अंजुम, विनोद कापड़ी, सतीश के सिंह, आशुतोष, मिलिंद खांडेकर आदि का गिरोह) का अंत तय है। जब इनका समय था तो इन लोगों ने ना सिर्फ ख़बरों की हत्या की बल्कि अपनी जगह बचाने के लिए मालिकों को धोखा देकर अपने-अपने चैनल के सीक्रेट भी एक दूसरे को लीक किए। यहां तक कि कोई इनके पास नौकरी के लिए इंटरव्यू देने आता था तो ये दूसरे चैनल के अपने एडिटर दोस्त को बता देते थे। अपनी जगह बचाने के लिए इन्होने कभी नये लोगों को आगे नहीं बढ़ने दिया। पर लगता है कि इनका समय गुज़र चुका है। आजतक के सुप्रिय प्रसाद इसलिए बचे हैं कि वो कभी इस चौकड़ी का हिस्सा नहीं रहे। 

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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इंडिया टीवी को पांच नंबर का चैनल बताने पर भड़क गए अजीत अंजुम, निकाली जमकर भड़ास

Ajit Anjum : टीवी रेटिंग को लेकर भ्रम फैलाने वालों के लिए जरुरी सूचना… पहले डाटा देखें… समझें… फिर विश्लेषण करें…. BARC (नया रेटिंग सिस्टम) का डाटा पहली बार आ गया है और तकनीकी खराबी की वजह से पहले तीन दिन और कुछ घंटों के लिए चौथे दिन भी इंडिया टीवी की रेटिंग दर्ज नहीं हो सकी. नतीजा ये हुआ कि तीन दिन तक रेटिंग में इंडिया टीवी जीरो दिख रहा है और चौथे दिन 6.7 फीसदी, जबकि बाकी तीन दिन की रेटिंग में दो दिन इंडिया टीवी नंबर वन भी है, यानी आजतक और एबीपी न्यूज से आगे. कुछ चैनल दावा कर सकते हैं कि इंडिया टीवी पांचवें नंबर पर पहुंच गया है, जो कि गलत और भ्रम फैलाने वाला है. मैं यहां सात दिन के चैनल शेयर का डाटा पोस्ट कर रहा हूं ताकि सनद रहे. शनिवार से शुक्रवार तक का डेली डाटा देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं… बाकी तो जो है सो है ही है…

INDIA TV DATA IS FOR FOUR DAYS (DUE TO SOME WATER MARKING PROBLEM) OTHER CHANNELS DATA FOR ALL 7 DAYS

Wednesday, April 29, 2015 7:51 PM

Source: BARC, Wk 16, 4+, Daywise, Time Band: 0600Hrs to 2359Hrs

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न्यूज 24 और इंडिया न्यूज की तो रेटिंग भी नहीं आई, जितनी मेरी जानकारी है, उनकी भी तकनीकी वजहों से रेटिेंग दर्ज नहीं हो सकी. तो क्या मान लिया जाए कि दोनों चैनल जीरो पर पहुंच गए और फलां चैनल आसमान में छेद करने में कामयाब हो गया? जो चैनल इंडिया टीवी को पांचवें नंबर का चैनल बता रहा है, उसे सातों दिन के चैनल शेयर को भी प्रोमो में डाल देना चाहिए. अरे भाई, तकनीकी खराबी की वजह से तीन दिनों तक अगर इंडिया टीवी की BARC के नए रेटिंग सिस्टम में नहीं दर्ज हो पाया तो इस तथ्य को तोड़ मरोड़कर गलतफहमी क्यों पैदा कर रहे हैं आप….

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आजतक के एक वरिष्ठतम सज्जन घूम घूम कर ..ऐंठ ऐंठकर और इठला इठलाकर कहते और फोनियाते फिर रहे हैं कि ये देखो – इंडिया टीवी पाँच नंबर का चैनल हो गया …साहब बहादुर ने अपने दूतों को इस काम में लगा दिया है जो सबको फोन कर करके बता रहे हैं कि इंडिया टीवी नंबर पाँच हो गया. जबकि सच क्या है, मैं अपने पोस्ट में लिख चुका हूँ. उन्हें अपने चैनल के नंबर वन होने की उतनी ख़ुशी नहीं, जितनी इंडिया टीवी को फ़र्ज़ी डाटा के ज़रिए पाँचवे नंबर का चैनल बताने में है. चलिए .. ख़ुश रहिए. आबाद रहिए. लड्डू -जलेबी-समोसे खाइए, अपने चैनल के नंबर वन बने रहने का जश्न मनाइए लेकिन भ्रम और अफ़वाह मत फैलाएँ कि इंडिया टीवी नंबर पाँच हो गया …बाकी तो सच ये है कि नए रेटिंग सिस्टम में इंडिया टीवी की तीन दिन की रेटिंग नहीं दर्ज हुई, जिसका नतीजा ये हुआ कि इंडिया टीवी का चैनल शेयर ज़ीरो हो गया. न्यूज़ 24 और इंडिया न्यूज़ की तो रेटिंग ही नहीं आई. रेटिंग -वेटिंग तो अपनी जगह है, हो सकता है आप हमेशा नंबर वन रहें लेकिन चौड़े होकर दुष्प्रचार तो न करें. बाक़ी आप ख़ुद देख ले कि तीन दिनों से डाटा में तो इंडिया टीवी भी नंबर वन है.

इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम के फेसबुक वॉल से.


मूल खबर…

टीआरपी का नया सिस्टम : TAM खत्म, BARC शुरू, 5वें स्थान पर लुढ़का इंडिया टीवी

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आजतक के पत्रकारों को तोड़ने में जुटा इंडिया टीवी, समीप राजगुरु गए

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न्यूज24 से अरुण पांडेय ने इस्तीफा दिया, दो अन्य के चर्चे

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न्यूज24 से अरुण पांडेय ने इस्तीफा दिया, दो अन्य के भी इंडिया टीवी जाने के चर्चे

खबर है कि अजीत अंजुम News24 चैनल से अपने खास लोगों को इंडिया टीवी ले जा रहे हैं. इंडिया टीवी की लगातार गिरती टीआरपी के बाद चैनल प्रबंधन दूसरे चैनलों के योग्य लोगों को लाने के लिए अजीत अंजुम को इशारा कर चुका है. इसी क्रम में स्टाफ तोड़ने के लिए आजतक समेत न्यूज24 तक पर अजीत अंजुम धावा बोल रहे हैं. आजतक से समीप राजगुरु को तोड़ने के बाद अंजुम ने New24 चैनल के Assignment Head अरूण पांडे को भी तोड़ लिया है.

अरुण पांडेय के बारे में सूचना मिल रही है कि उन्होंने India TV जाने की तैयारी कर ली है और न्यूज24 से इस्तीफा दे दिया है. अरुण पांडेय न्यूज24 में लंबे समय से थे. वे प्रिंट मीडिया में भी काफी समय तक काम कर चुके हैं. रवि शुक्ला और अनूप कुमार के भी न्यूज24 से इस्तीफा देने की सूचना है. ये दोनों भी इंडिया टीवी जा रहे हैं.

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आजतक के पत्रकारों को तोड़ने में जुटा इंडिया टीवी, समीप राजगुरु गए

लगातार गिरती टीआरपी से परेशान इंडिया टीवी प्रबंधन अब आजतक न्यूज चैनल में कार्यरत लोगों को तोड़ने में जुट गया है. लंबे समय से स्पोर्ट्स देख रहे आजतक के पत्रकार समीप राजगुरु अब इंडिया टीवी के हिस्से हो गए हैं. इन्हें अच्छे खासे पैकेज पर इंडिया टीवी लाया गया है. सूत्रों के मुताबिक अजीत अंजुम को ‘आपरेशन आजतक’ के लिए लगाया गया है. उन्होंने आजतक के दसियों पत्रकारों से बातचीत की. साथ ही कई अन्य चैनलों के पत्रकारों को भी इंडिया टीवी में लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं.

गौरतलब है कि इंडिया टीवी का बैंड सबसे ज्यादा खुद रजत शर्मा बजा रहे हैं जो इस चैनल के मालिक हैं और कभी पत्रकार हुआ करते थे. मोदी और भाजपा के भोंपू की छवि बना चुके इंडिया टीवी को सीरियस न्यूज चैनल के रूप में नहीं देखा जाता. खुद मोदी ने रजत शर्मा को साहित्य श्रेणी में पदम पुरस्कार देकर दुनिया को यह बता दिया कि रजत से मोदी की गहरी यारी है और दोनों एक दूसरे को ओबलाइज करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान रजत शर्मा ने मोदी का एक प्रायोजित इंटरव्यू ‘आपकी अदालत’ नामक शो में इंडिया टीवी पर दिखाया था. इस इंटरव्यू को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हुए थे क्योंकि इंटरव्यू में मोदी से कोई मुश्किल सवाल पूछा ही नहीं गया था. तब उस वक्त के इंडिया टीवी के न्यूज डायरेक्टर कमर वहीद नकवी ने इस शो पर आपत्ति करते हुए इस्तीफा दे दिया था. तब भी रजत शर्मा और इंडिया टीवी की काफी थू थू हुई थी लेकिन रजत शर्मा नहीं माने.

मोदी सरकार जब भारी बहुमत से सत्ता में आई तो इंडिया टीवी बढ़चढ़ कर मोदी और भाजपा की तारीफें दिखाने लगा. कई मोर्चों पर विफल मोदी सरकार के खिलाफ लोगों में गुस्सा भड़कने लगा लेकिन रजत शर्मा व इंडिया टीवी ने मोदी का गुणगान जारी रखा. इसका नतीजा हुआ ये कि रजत शर्मा दर्शकों की नजर में बेहद अविश्वसनीय चेहरा बन गए और इनके शो का ग्राफ भी नीचे गिरने लगा. दूसरी तरफ अजीत अंजुम को प्राइम टाइम एंकरिंग से दूर रखा गया. साथ ही अजीत अंजुम को चैनल में सीमित आजादी दी गई जिसके कारण वह अपने मन मुताबिक कार्यक्रम शो नहीं बना रहे.

इन सभी कारणों से इंडिया टीवी की दुर्गति जारी है और कभी नंबर दो तो कभी नंबर एक कैटगरी का चैनल रहा इंडिया टीवी आजकल नंबर पांच पर लुढ़क गया है. अब आजतक और अन्य न्यूज चैनलों के पत्रकारों को तोड़कर टीआरपी हासिल करने की रणनीति बनाई गई है लेकिन इंडिया टीवी वालों को कौन समझाए कि चैनल अच्छे पत्रकारों के साथ-साथ अच्छी पालिसीज से भी आगे जाता है और पत्रकारिता की असली पालिसी तटस्थता होती है.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क: 09999 3300 99

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अजीत अंजुम की बिटिया जिया ने मोदी की बजाय केजरी पर मुहर मारा (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : अजीत अंजुम ‘इंडिया टीवी’ चैनल में मैनेजिंग एडिटर हैं. इनकी एक प्यारी सी बिटिया है. नाम है- जिया. लगभग साढ़े आठ साल की होंगी. एक रोज यूं ही जिया ने अपने पापा से बातचीत के दौरान केजरीवाल और मोदी को लेकर जिक्र किया. अजीत अंजुम के भीतर का पत्रकार जगा और उन्होंने जिया से सहज भाव से बातचीत करते हुए सब कुछ मोबाइल में रिकार्ड कर लिया. जिया की मम्मी हैं गीताश्री जो खुद जानी-मानी महिला पत्रकार हैं. पत्रकार मां-पिता की बिटिया होने से उन्हें घर में बहस और विचार का माहौल मिलेगा ही. और, इस माहौल में अगर बच्चा अपनी कोई ओपीनियन बनाए तो वह सुनने जानने लायक होगा.

इस वीडियो में जिया ने कितने प्यार से बताया कि मोदी खुद का टीवी में विज्ञापन चलवा चलवा कर वोट पाए हैं. मोदी और केजरीवाल में से किसी एक के चुनने के सवाल पर जिया पहले तो दोनों को अच्छा बताती है, साथ ही यह भी कहती है कि किसी एक को अच्छा कहूंगी तो दूसरा बुरा मान जाएगा. लेकिन जब पपा अजीत अंजुम ने उनसे कहा कि आप एक पर राय बनाइए और बताइए तो जिया ने केजरीवाल का नाम लिया और केजरीवाल को चुनने का कारण बताया. जरूर देखने लायक वीडियो है. राजनीतिक रूप से हम किसी से सहमत या असहमत हो सकते हैं लेकिन इस वीडियो में जो खास बात देखने समझने लायक है वह एक बच्ची का मनोविज्ञान. वह राजनीतिक रूप से अपने हम उम्र बच्चों से काफी सचेत है. उसकी पूरी बातचीत इन्नोसेंस से भरी पड़ी है. वीडियो देख कर मैं तो यही कह उठा कि पुत्री के पांव पालने में दिख रहे हैं. यानि ये बिटिया पक्का एक दिन मां-पिता और देश-समाज का नाम रोशन करेगी. लव यू जिया. हजारों साल जियो.

वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…

https://www.youtube.com/watch?v=X7FG3Y58QM4

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

उपरोक्त स्टेटस / वीडियो पर वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की टिप्पणी कुछ यूं है… Sanjaya Kumar Singh : अच्छे जवाब के लिए अजीत ने जिया को गुड कहा है। अच्छे आईडिया के लिए अजीत भी गुड कहलाने के पात्र हैं। वाकई पॉलिटिकली काफी जागरूक है जिया।

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विनोद कापड़ी की फिल्म को लेकर परेशान तमाम अशुभचिंतकों और विघ्नसंतोषियों के लिए कुछ जरूरी खबरें…

Ajit Anjum : विनोद कापड़ी की फ़िल्म को लेकर परेशान तमाम अशुभचिंतकों और विघ्नसंतोषियों के लिए ये ज़रूरी ख़बर है. विनोद की फ़िल्म को FOX STAR रिलीज़ करेगा, स्टार इंडिया ने सेटेलाइट का अधिकार ख़रीद लिया है, ये कम बड़ी उपलब्धि नहीं है. न्यूज़रूम से निकलकर फ़िल्म बना लेना उसकी क्रिएटिविटी का एक मुक़ाम है. मैं विनोद कापड़ी को क़रीब बीस सालों से जानता हूँ. क़रीब दस साल तक दूर-दूर से सिर्फ़ उनके काम के बारे में सुनकर और देखकर जानता रहा.

दस सालों से एक दोस्त के नाते बेहद क़रीब से देखा और समझा. इस शख्स में औरों से कुछ अलग करने का एक जुनून है. अपने मन की करने के लिए रिस्क लेने की हिम्मत है. तभी तो न्यूज़रूम में रहते हुए फ़िल्म बनाने की ठान ली और जब ठान लिया तो उसे पूरा करने के लिए कहानी, कैमरा और क्रू लेकर किसी गुमनाम लोकेशन पर निकल पड़ा, अपनी फ़िल्म की शूटिंग के लिए. साल दो साल पहले पहले मैंने ट्विटर पर मैंने अजय ब्रहमात्मज का एक स्टेटस पढ़ा था, जो मुझे आज भी याद है- ”इससे पहले कि कोई आपको अपने सपने पूरे करने लिए जोत दे, आप अपने सपने पूरा करने में जुट जाओ”. सार यही था, शब्द हो सकता है बदल गए हों. तो विनोद ने अपने सपने को पूरा करने का फ़ैसला किया. दिन-रात ख़ुद को झोंक दिया और तमाम अशुभचिंतकों की शुभेक्षाओं को ख़ारिज करते हुए फ़िल्म भी पूरी कर ली और अब रिलीज़ की तैयारी भी हो रही है. फ़िल्म चले न चले ये तो बाद की बात है. महान फ़िल्मकारों की फ़िल्में भी पहले दिन ही दर्शकों के लिए तरसती रह गई हैं. इसकी मिसाल सैकड़ों में हैं. विनोद को कामयाबी मिले, सपने पूरे हों, एक दोस्त के नाते हम तो यही दुआ करेंगे. उम्मीद है विनोद नए साल में बहुत कुछ नया करेंगे, मिस टनकपुर तो हाज़िर हो ही जाएगी.

रजत शर्मा के ‘इंडिया टीवी’ चैनल में नौकरी कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम के फेसबुक वॉल से.

Vinod Kapri : BIG Day and here comes the BIG News. Sharing two good news. One of the top International studio FOX STAR STUDIOS( company owned by 20th Century Fox Studios ), which has released films like Marley and me, Life of Pi, Slumdog Millionaire, Knight and day , 127 hours , Predators , Titanic 3D , Jolly LLB , Bullet Raja Hawa Hawaii , City lights , Finding Fanny , Bang Bang is releasing and Presenting your OWN film MISS TANAKPUR HAAZIR HO . Fox Star Studios will announce release date next month. And second news is STAR TV has acquired Satellite rights of the film, which means after theatrical release – you will be able to watch MISS TANAKPUR on Star Network Channels. Proud Moment for all involved in making of Miss Tanakpur Haazir Ho. It was really really very tough process and testing time for all of us involved. But Charm and Charisma of MISS TANAKPUR saved us. Thanks a ton Miss TANAKPUR !!! We all love you so so much. We are deeply in love with you. We live you 24 hours !!! And thanks a ton friends for all your love , trust and support. Special thanks to my dearest Sakshi Joshi Kapri for having faith on me and allowing me take biggest risk of my career. Dad, aaryaman , Ahaan , uma thanks for bearing with me. Love you all. Madhu Ganesh Shastri thanks for that PPT .

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I am overwhelmed and touched with your support and love for MISS TANAKPUR HAAZIR HO. कुछ एहसास बयान ही नहीं किए जा सकते। और अब भी सब किसी सपने से कम नहीं लग रहा। यक़ीन नहीं होता कि पहली फ़िल्म को मुंबई में इस तरह का रिस्पांस मिलेगा। ख़ासतौर पर कई दौर की screening के बाद Fox Star Studios का फ़िल्म के साथ जुड़ना। पर्दे के पीछे अभी कई लोगों की बड़ी बड़ी भूमिका के बारे में बताना बाक़ी है। जो धीरे धीरे आप से साझा करूँगा। कहना बस इतना है कि ये सब आपके प्यार और शुभकामनाओं की बदौलत ही है। प्यार बना कर रखिएगा। P.S – फ़िल्म बनने में बहुत समय लगता है। 15-16 बार अब तक edit हो चुकी है । अब भी काफ़ी काम बाक़ी है। आपको update करता रहूँगा।

रजत शर्मा के इंडिया टीवी चैनल में नौकरी कर चुके और ‘मिस टनकपुर’ फिल्म बनाने वाले पत्रकार विनोद कापड़ी के फेसबुक वॉल से.

Umesh Kumar : Happy To Announce That My Picture Miss Tanakpur Hajir Ho….will Be Released By One Of The Top International Company Fox Star Studios…Which Has Produced Or Presented Movies Life Of Pi, Marley and Me, 127 Hours, Predators, Slumdog Millionaire, Knight and Day, jolly LLB, Bullet Raja, Finding Fanny, Titanic 3D And Bang Bang… Fox Star Studios Will Announce The Dates Next Month…. Star Tv Acquired The Satelite Rights Which Means You Will Watch Miss Tanakpur On All The Star Tv Channels After Releasing On Theatre…… Thanks Vinod Kapri Ji For Your Endless Efforts…. Thx Vinay Tiwari ji.

समाचार प्लस चैनल के डायरेक्टर और चीफ एडिटर उमेश कुमार के फेसबुक वॉल से. उमेश कुमार समेत कुल छह लोगों ने ‘मिस टनकपुर’ फिल्म में पैसा लगाया है.

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