दस उन संपादकों की सूची जिन्होंने पत्रकारिता में नए मूल्य तय किए और जड़ता को तोड़ा

Shambhu Nath Shukla : मैं अपने दौर के दस उन संपादकों की सूची दे रहा हूं जिन्होंने पत्रकारिता में नए मूल्य तय किए और उसमें फैली जड़ता व यथास्थितिवाद को तोड़ा। ध्यान रखा जाए कि मेरी यह सूची कोई अंतिम या पूर्ण नहीं है। संपादक व पत्रकार और भी तमाम होंगे जो इस श्रेणी में आते होंगे। मैने तो उन लोगों को चुना है जिनको क्रमश: मैने जाना, उनके साथ काम किया और जिनके लिखे पर मनन किया।

जिले का नाम गाजीपुर क्यों पड़ा, गाजीउद्दीन हैदर के नाम पर या किसी मुगल गाजी के नाम पर…

Shambhu Nath Shukla : गाजीपुर का खाद-पानी… आज पुरानी किताबें निकालने के चक्कर में मैं अपनी लायब्रेरी खंगाल रहा था तो पाया कि उत्तर प्रदेश का गाजीपुर जिला बड़ा उर्वर है। सारी मिथकीय, ऐतिहासिक, साहित्यिक, पत्रकारीय और पत्रकारिक (फेसबुकीय पत्रकार) विभूतियां यहीं पैदा हुईं। मसलन मिथकीय कैरेक्टर परशुराम से लेकन पत्रकार शिरोमणि भाई Yashwant Singh तक।

शंभूनाथ शुक्ला के मुताबिक भारतीय आयुर्वेद में लीवर सिरोसिस का एकमात्र इलाज मांसाहार है

Shambhu Nath Shukla : मैं यह पोस्ट लिखकर शाकाहारियों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचा रहा है लेकिन यह विचारणीय तो है ही। मेरे एक दामाद कानपुर में रहते हैं। वे थोड़ा फक्कड़, अलमस्त तबियत के और सर्द मिजाज के आदमी हैं। मन आया तो काम किया नहीं मन आया तो नहीं किया। लेकिन वे मेडिकल के अदभुत जानकार हैं और अगर मौका मिले तो शीर्ष पर पहुंच सकते हैं। लेकिन कानपुर में कामबिगाड़ू और धूर्त लोग भी कम नहीं हैं। उनके श्रम और कौशल का फायदा उठाया और चलते बने।

विजुअल मीडिया जिस तेजी से उभरी थी उसी तेजी से एक्सपोज भी हो गई

Shambhu Nath Shukla : विजुअल मीडिया जिस तेजी से उभरी थी उसी तेजी से एक्सपोज भी हो गई। इसके विपरीत प्रिंट का डंका अभी भी बज रहा है। आज विजुअल में कौन सा ऐसा न्यूज चैनल है जिसे रत्ती भर भी निष्पक्ष कहा जा सकता है? या तो विजुअल मीडिया में मोदी की चाटुकारिता हो रही है या सोनिया एंड कंपनी की। दोनों तरह की चापलूसी में होड़ मची है और तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर परोसा जा रहा है। अब देखिए कितनी तेजी से वे चेहरे बदल दिए गए जो डिबेट में निष्पक्ष रुख अख्तयार किया करते थे।

अच्छा अखबार जनसत्ता और अच्छा एंकर रवीश कुमार

Shambhu Nath Shukla : एक अच्छा संपादक वह नहीं है जो अपने ही अखबार में धुंधाधार लिखता रहे। संपादक को अपना ही लेखन पढ़ाने की जरूरत नहीं पढ़ती और उसके विचारों की अभिव्यक्ति के लिए संपादकीय तो हैं ही, एक अच्छा संपादक वह है जो अच्छे लेखक तैयार करे। जो लोगों को लिखने के लिए विवश करे। जनसत्ता का योगदान यही है कि उसने लिखने और पढऩे वालों की एक पूरी पीढ़ी तैयार की।