विधवा का प्रधान से लेकर सचिव तक कुल 13 ने किया यौन शोषण, सबको हुआ एड्स

Satyendra PS : यह खबर अश्लील हो चली मानवता का अजीब किस्सा है। विधवा हो गई युवती का राशन कार्ड और विधवा पेंशन बनवाने के लिए ग्राम प्रधान से लेकर सरकारी कर्मी मिलाकर 13 लोगों ने यौन शोषण किया। महिला को एड्स था और इन सभी दुष्टों को एड्स हो गया।

भयावह और दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन सबों ने अपने परिवार में भी एड्स फैला ही दिया होगा।

वरिष्ठ पत्रकार सत्येंद्र पी सिंह की एफबी वॉल से.

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यौन शोषण मामले में दैनिक जागरण के चार वरिष्ठ पदाधिकारी 13 नवंबर को कोर्ट में तलब

दैनिक जागरण कानपुर में कार्यरत रहे चार वरिष्ठ पदाधिकारी दैनिक जागरण की ही एक महिला कर्मी के यौन शोषण के मामले में तेरह नवंबर को कोर्ट में तलब किए गए हैं. इसके पहले 10 अक्टूबर को कोर्ट में डेट लगी हुई थी लेकिन चारों कर्मी हाजिर नहीं हुए. इसके बाद जज ने अगली तारीख 13 नवंबर दी है. अगर ये लगातार गैर-हाजिर रहते हैं तो इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी हो सकता है. अगर तब भी पुलिस के हत्थे न चढे़ तो कुर्की की कार्रवाई की जा सकती है.

इन चारों आरोपियों के नाम हैं- नितिन, प्रदीप, दिनेश और सन्तोष मिश्रा. माना जा रहा है कि अगर इन लोगों को जमानत नहीं मिली तो ये जेल की हवा भी खा सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि यौन शोषण के आरोप में फंसे अपने चारों वरिष्ठ कर्मियों को बचाने के लिए जागरण प्रबंधन भी लगा हुआ है. इन आरोपियों में से एक नितिन श्रीवास्तव खुद जनरल मैनेजर की हैसियत में इन दिनों दैनिक जागरण नोएडा में कार्यरत है.

दूसरा आरोपी प्रदीप अवस्थी घटना के वक्त प्रोडक्शन इंचार्ज थे कानपुर में. अब ये भी नोएडा में पदस्थ है. दिनेश दीक्षित कानपुर में फीचर विभाग में कार्यरत है. सन्तोष मिश्रा कानपुर में फोरमैन है. उधर, पीड़िता ने भड़ास4मीडिया से बात करते हुए कहा कि ये लोग कब तक बचेंगे. जब आसाराम और राम रहीम न बचे तो ये किस खेत की मूली हैं. पीड़िता का कहना है कि जागरण प्रबंधन ने केस को प्रभावित करने की खूब कोशिश की. अब भी उन लोगों का हर तरह से दबाव डालना जारी है.

पूरे प्रकरण को समझने के लिए इस खबर को पढ़ें…

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अब यह जैन मुनि निकला रेपिस्ट, हुआ अंदर!

Shishir Soni : बहुरूपिये समाज के तेजी से स्खलित होने का परिणाम है जैन मुनि का कुकृत्य और उनकी गिरफ्तारी. इन्हे जूते की माला पहना कर सार्वजनिक अभिनन्दन करना चाहिए. आये दिन ये खबरें आती हैं की फलां करोड़पति सांसारिक वैभव को छोड़ जैन मुनि बन गया. लेकिन उन तपस्वी मुनियों के बीच से ऐसी बजबजाती दुर्गन्ध आये तो समाज का स्वरुप क्या होगा? मन सिहरता है ये सोच कर.

अपने एक जैन मित्र के साथ कई जैन मुनियों से मिला. यकीन मानिये किसी से प्रभावित नहीं हुआ. बातों में कोई गहराई नहीं. वाणी में माधुर्यता का रसखान नहीं. बेहद सतही प्रवचन. कई तो स्वनामधन्य महा-मूर्ख भी मिले. हो सकता है ऐसे मुनि हों जिन्हें सुनने का अवसर नहीं मिला हो और वो अच्छा ज्ञान रखते हों. अच्छा कनेक्ट करने की विधा में पारंगत हों. लेकिन ज़्यदातर मुनियों की एक ही लालसा होती है कि हमारे चातुर्मास या अन्य धार्मिक समागम में बड़े-बड़े राजनेता आएं.

क्यों भाई! ये नेताओं की लालसा क्यों? क्यूंकि मुनियों में आपसी प्रतिद्वंता जबरदस्त है. खुद को दूसरे मुनियों से श्रेष्ठ दिखाने के लिए वीवीआईपी आमद कैसे बैढे इसकी खुशामद में वे कुछ जैन धन्ना सेठों का बगलबच्चा बने रहते हैं. उसके ऐवज में, धर्म की आड़ में वो धन्ना सेठ अपना उल्लू सीधा करने में लगा रहता है. ऐसा कमोबेश हर धर्म में प्रचलित रहा है. सादगी की प्रतिमूर्ती माने जाने वाले जैन धर्म गुरुओं और जैन धर्मावलम्बियों में ऐसी गंदगी तेजी से घर कर रही है. जो सर्वथा शर्मनाक है. वृहत समाज के लिए घातक भी.

दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सोनी की एफबी वॉल से.

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चैनल वन के एमडी मोहम्मद आरिफ और अवनि सिन्हा को देहरादून पुलिस ने किया गिरफ्तार (देखें वीडियो)

देहरादून : वर्ष 2013 में गृह विभाग में अपर सचिव जेपी जोशी की सेक्स सीडी बनाए जाने का मामला आया था. जोशी ने खुद को सेक्स सीडी के जरिए ब्लैकमेल किए जाने और पैसे न देने पर सेक्स सीडी का प्रसारण चैनल वन नामक न्यूज चैनल पर करके मानहानि किए जाने समेत कई धाराओं में पुलिस में मामला दर्ज कराया था. जोशी का अश्लील वीडियो बनाकर उसे प्रसारित करने के मामले में दो आरोपियों मोहम्मद आरिफ और अवनि सिन्हा लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से रहने में कामयाब रहे. पर अब इन्हें देहरादून की पुलिस ने दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया है.

मोहम्मद आरिफ चैनल वन नामक न्यूज चैनल के संचालक यानि चेयरमैन जहीर अहमद के पुत्र हैं और चैनल के एमडी यानि मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं. देहरादून पुलिस ने इन पर इनाम भी घोषित कर रखा था. सेक्स सीडी मामले में पहले से ही तीन-चार लोग जेल में बंद हैं. आरिफ और अवनि सिन्हा की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने एक वीडियो और प्रेस रिलीज जारी किया है, जो इस प्रकार है…

देखें वीडियो…

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आईबीएन मराठी चैनल के साउंड एक्जीक्यूटिव ने महिला पत्रकार से प्रेम में धोखा मिलने के बाद आत्महत्या की

मुंबई से एक बुरी खबर आ रही है। यहां आईबीएन के मराठी समाचार चैनल में काम करने वाले मीडिया कर्मचारी ने महिला रिपोर्टर के प्रेम में पड़कर फिर धोखा खाकर आत्महत्या करने को मजबूर हो गया. मीडियाकर्मी ने ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी. मीडिया कर्मचारी का नाम नितीन शिर्के बताया गया है। यह घटना रविवार की रात परेल में घटित हुयी है। नितीन शिर्के ने बकायदे मृत्यु से पूर्व फेसबुक पर एक पोस्ट डाली है. यह पोस्ट उसने १६ जुलाई को रात ९ बजकर ५१ मिनट पर पब्लिश की है।

नितीन शिर्के आईबीएन के मराठी समाचार चैनल में साउंड एक्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत था। नितीन शिर्के इसी समाचार चैनल में कार्यरत एक महिला पत्रकार से प्रेम करता था। मृत्यु से पूर्व फेसबुक पर किये गये पोस्ट में नितीन शिर्के ने लिखा है कि इस महिला ने प्रेम के नाम पर उसके साथ धोखा किया। उसने अपनी मृत्यु के लिये इस महिला और अन्य दो लोगों को जवाबदार बताया। मृत्यु से पूर्व उसने फेसबुक पर जो पोस्ट अपलोड किया है, उसमें लिखा है- ”इस महिला का एक पत्रकार के साथ प्रेम प्रसंग शुरू था, मगर वह तीन साल से मेरे साथ प्रेम के नाम पर खेल रही थी। उसने मेरा सिर्फ उपयोग किया है। इसलिये मैं आत्महत्या कर रहा हूं।” पुलिस फिलहाल इस मामले की छानबीन कर रही है। इस घटना से मीडिया जगत के लोग स्तब्ध हैं।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

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इंडिया न्यूज, नोएडा के पत्रकार ललित मोहन के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने यौन शोषण का मुकदमा लिखा

इण्डिया न्यूज चैनल के पत्रकार ललित मोहन के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने मुकदमा लिखा है. यह मुकदमा महिला आयोग के आदेश पर थाना सराय रोहिला पुलिस की तरफ से दर्ज किया गया. एक महिला ने नोएडा के पत्रकार ललित मोहन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. महिला शादीशुदा है और उसका आरोप है कि पत्रकार के कारण उसका पति से अलगाव हो गया.

महिला के मुताबिक यौन शोषण की शिकायत नोएडा पुलिस में की लेकिन पत्रकार के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी. यही नहीं, नोएडा पुलिस ने पीड़िता को ही डरा धमका कर शांत रहने को कह दिया. महिला के मुताबिक वह भी कभी नोएडा में एक न्यूज चैनल में पत्रकार थी. तभी उसकी ललित मोहन से मुलाकत हुई. बाद में शादी तय होने पर महिला ने नौकरी छोड़ दी. आरोप है कि ललित मोहन ने फोन और एसएमएस के जरिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. महिला के मुताबिक ललित डरा धमका कर अपने पास बुलाया और कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला कर अश्लील फोटो खींच ली.

महिला का कहना है कि वह दिल्ली से ग्रेटर नॉएडा के दादरी में एक कालेज में एक्जाम देने पहुंची तो वहां भी ललित पहुँच गया. वह महिला को परेशान करने लगा और जबरदस्ती अपनी गाडी में बैठाने लगा. इसकी शिकायत महिला ने दादरी थाने में की. ललित ने पुलिस को मैनेज कर लिया और थाने से छूट गया. महिला का कहना है कि आए दिन के उत्पीड़न से तंग आकर उसने चैनल इन्डिया न्यूज के असाइनमेंट हेड प्रशांत मिश्रा और क्राइम हेड रवि शर्मा से लिखित शिकायत की.

चैनल के इन दोनों अधिकारियों ने दोनों को आमने सामने बैठा कर लिखित रूप समझौता करा दिया. ललित मोहन ने लिखकर दिया कि वह परेशान नहीं करेगा. लेकिन कुछ दिनों बाद ही ललित मोहन फिर नए नए नंबरों से परेशान करने लगा. पीड़िता के मुताबिक ललित उसे और उसके बेटे को जान से मारने की धमकी देने लगा. महिला ने फिर नोएडा पुलिस में शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद महिला ने थक हार कर दिल्ली महिला आयोग में अपनी आप बीती सुनाते हुए ललित मोहन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. महिला आयोग के आदेश पर दिल्ली के थाना सराय रोहिला में ललित मोहन के खिलाफ 18 अप्रैल को धारा 354 (D), 506, 509 के तहत मामला दर्ज किया गया.

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हिंदी विवि वर्धा में यौन दुर्व्यवहार के आरोपी के साथ मजबूती से खड़ा है प्रशासन, पीड़िता धरने पर बैठी

महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा में विगत एक माह पूर्व 13 मार्च होली के दौरान पीएचडी शोधार्थी संजीव कुमार झा के द्वारा एम. फिल. की शोधार्थी गीता (काल्पनिक नाम) के साथ सार्वजनिक स्थल पर यौन-दुर्वय्वहार किया गया. पीड़िता पिछले एक महीने से न्याय के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के पास शिकायत लेकर जाती रही है. इसकी शिकायत उसने महिला प्रकोष्ठ में भी की, लेकिन आरोपी पर कोई कार्यवाही नहीं की गई.

पीड़िता को प्रशासनिक अधिकारियों ने यह कह कर इधर-उधर दौड़ाया कि यह केस मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है. तरह-तरह से पीडिता को परेशान करने की कोशिश की गई और उस पर यह दबाव भी बनाया गया कि वह अपनी शिकायत को वापस ले ले. वहीँ दूसरी ओर आरोपी द्वारा भी पीड़िता को धमकाया गया लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसका कोई संज्ञान नहीं लिया. आरोपी अपने साथियों के साथ 17 अप्रैल को प्रशासनिक भवन पर भारी संख्या में पहुंचा और सम्बंधित अधिकारियों से मिल कर जाँच को प्रभावित करने की कोशिश की. आरोपी की इन सब गतिविधियों से परेशान होकर पीडिता ने धरने पर बैठने का निर्णय लिया.

पीडिता 09 बजे रात महिला छात्रावास के सामने धरने पर बैठी और उसका साथ देने के लिए भारी संख्या में विद्यार्थी उसके साथ आए. पीडिता से बात करने के लिए चीफ प्रॉक्टर गोपाल कृष्ण ठाकुर, कुलसचिव कादर नवाज खान, उप-कुलानुशासक चित्रा माली और महिला छात्रावास की वार्डन अवंतिका शुक्ला आईं. पीडिता पक्ष से अभी बात ही हो रही थी कि आरोपी पक्ष भी लगभग 50 छात्रों के साथ महिला छात्रावास आ पहुंचा. यह एक तरह से शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से पीडिता को डरा कर धरना प्रदर्शन से उठाने की साजिश थी.

शर्म की बात यह है कि यह सब विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों के सामने हुआ. अधिकारियों ने संजीव झा और उनके साथियों को समझा बुझा कर वापस भेज दिया और पीडिता पर भी दबाव बनाया गया कि वह अपना धरना समाप्त करे और कल ऑफिस आकर बात करे. पीडिता ने यह कहते हुए उठने से मना कर दिया कि वह पिछले एक महीने से ऑफिस में बात कर-कर के परेशान हो चुकी है. अत: सभी अधिकारी वापस चले गए.

पूरी रात पीडिता और साथी, महिला छात्रावास के सामने धरने पर बैठे रहे. ध्यान देने की बात यह है कि आरोपी संजीव कुमार पर पहले भी कई आरोप लग चुके हैं और वह उनमे दोषी भी पाया गया है. लेकिन पहले के मामलों में उसे मामूली चेतावनी देकर छोड़ दिया गया. इस केस में भी आरोपी को प्रशासन द्वारा बचाने की कोशिश की जा रही है. यह इस बात से भी स्पष्ट हो रही है कि अभी तक प्रथम दृष्टया प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की. इन सब को ध्यान में रखकर पीडिता ने मांग रखी है कि आरोपी संजीव कुमार को तत्काल हॉस्टल से एवं विश्वविद्यालय परिसर से निलंबित किया जाये जिससे कि वह पीडिता और गवाहों को प्रभावित न कर सके.

विदित हो कि प्रशासन की आरोपी के प्रति पक्षधरता इस बात से भी उजागर होती है कि जाँच-प्रक्रिया पूरी होने के पहले ही आरोपी छात्र की पीएचडी थीसिस जमा करा ली गई जबकि जाँच-प्रक्रिया के दौरान आरोपी की अकादमिक गतिविधियों पर हर किस्म की रोक लगाने का नियम है. इसलिए पीडिता ने यह भी मांग रखी है कि जब तक मामले की जाँच पूरी न हो, तब तक आरोपी की अकादमिक गतिविधियों को भी निलंबित किया जाये. रात 09.00 बजे से अभी तक सभी छात्र छात्राए अभी तक महिला छात्रावास के बहार धरने पर बैठे रही और अब विश्वविद्यालय के प्रसशानिक भवन में सुबह से बैठे हैं पर उनकी सुनने की जगह कुलपति के द्वारा धमकाया जा रहा है कि तुम सभी के खिलाफ अब अनुशासनहीनता की कार्यवाही की जाएगी क्योंकि आप सभी ने नियमों को तोड़ प्रदर्शन किया तथा रात भर छात्रावास के बहार धरने पर बैठे.

देखना है कि इस सत्य और शील की लड़ाई में किसकी जीत होती है. पूरे देश की मीडिया से छात्र-छात्राओं ने अनुरोध किया है कि महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा की अंदरुनी हालात की खबर लें और सच सबके सामने लाएं ताकि न्याय की लड़ाई लड़ने वालों को मजबूती मिल सके.

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महिला पत्रकार और उनकी बहन से बनारस में खुलेआम पांच लफंगों ने की छेड़छाड़, 100 नंबर काम न आया

Arundhati Pal : वाह रे बनारस की व्यवस्था.. वाह रे बनारस के लोग… शर्म आ गयी आज बनारसी होने पर. बड़े गर्व के साथ बनारस का नाम लेती थी लेकिन आज जब होली के मौके पर बनारस आई तो शर्म आ गयी। आज करीब 8.30 बजे लंका के पास मेरे और मेरी बहन के साथ कुछ 5 लड़कों ने मिल कर सरेआम छेड़खानी शुरू कर दी.. वहाँ मौजूद मेरे पुरुष मित्र के मना करने पर उन्होंने मारपीट गालीगलौज शुरू कर दी..

इमरजेंसी नंबर 100 न जाने कितनी बार डायल किया नबंर कनेक्ट नही हुआ और कनेक्ट हुआ भी तो किसी ने रिसीव नही किया और जब रिसीव किया भी तो उधर से हेल्लो की आवाज़ आते ही कॉल डिसकनेक्ट हो गयी..इसके बाद वहां से कॉल बैक का तो चांस ही नही.. करीब 9 बार कॉल किया मैंने..

क्या यही व्यवस्था है आप लोगो की Varanasi police ?

क्या घर की बेटीयों को भी ऐसी ही सुरक्षा देते हैं आप लोग?

और हां, वारदात के दौरान पब्लिक में खड़े 50-60 लड़कों में से सिर्फ एक लड़का हमारी मदद करने की लिए निकला उसको भी उन 5 लड़को ने पीटना शुरू कर दिया.. बाकि खुद को खांटी बनारसी कहने वाले कायर तमाशा देख रहे थे।

Narendra Modi सर, सत्ता बदलने के बाद अब व्यवस्था बदलने की उम्मीद रखते हैं.

दैनिक भास्कर समूह से जुड़ी और हरियाणा के करनाल में कार्यरत महिला पत्रकार अरुंधती पाल की एफबी वॉल से.

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लड़कियों ने मजनू का यूं भगाया भूत (देखें वीडियो)

ताजनगरी में सरेराह युवतियों ने एक मजनू पर से प्यार का भूत उतार दिया. जमकर की मजनू की पिटाई. लाइव पिटाई कैमरे में हुई कैद. मामला आगरा के थाना एत्मादपुर के बरहन चैराहे के पास का है. एक युवक को चार लड़किया मिल कर मार रही हैं. युवक कई दिनों से एक युवती को परेशान कर रहा था. उससे आये दिन छेड़छाड़ करता था.

जब युवती का धैर्य जवाब दे गया तो युवती ने अपनी सहेलियों के साथ मिल युवक के सिर से आशिकी का भूत उतार दिया. वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

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रवीश के भाई बृजेश पांडेय पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप!

Dayanand Pandey : अब बताईए कि एनडीटीवी वाले अपने रवीश कुमार के भाई बृजेश पांडेय फ़रार हो गए हैं। सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में बिहार पुलिस उन्हें खोज रही है। बृजेश पांडेय बीते बिहार विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ कर हार चुके हैं।

यूपी के वरिष्ठ पत्रकार दयानंद पांडेय के उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए ढेरों कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं…

Ashutosh Mishra Panday ji, it’s not good to give your credit, for fake news, because, after few fake Story, your credibility will be zero, at your social life. Be careful about your credibility. I am not supposed to protect any one, only questions on your credibility

Dayanand Pandey इस ख़बर को फर्जी बताने का आप के पास आधार क्या है ? या सिर्फ़ सहानुभूति भरी लफ्फाजी झोंक रहे हैं ?

Sonu Singh ये सत्य और सत्यापित खबर है।

Rizwan Khan अब भाई भागे है रवीश तो नहीं… और, भाइयों को करनी उनके साथ?

जितेंद्र दीक्षित वैसे भाई के कारनामे पर रविश कुमार पर टिप्पणी करना उचित नहीं पर अफसोस यह है कि दीपक तले अंधेरा। गांव-गांव की खाक छान कर स्टोरी करने वाले रविश साहब को अपने भाई की करतूत का संज्ञान नहीं । कहा तो यह भी जा रहा कि बिहार चुनाव में भाई का टिकट रविश ने ही पक्का कराया था।

Praveen Mishra आरोप के चलते नहीं, सिर्फ इस सवाल से घबराकर भागे हैं कि रवीश यह न पूछ लें…. कौन जात हो भाई?

असहिष्णु अरुण कौन जात हैं वे?

Haresh Kumar कान्यकुब्ज ब्राह्मण है और पांडेय टाइटल है। यह मोतिहारी जिला से बिलॉन्ग करता है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर इसका भाई चुनाव लड़ चुका है। हम बगल के ही हैं।

Praveen Mishra जहां तक मुझे जानकारी है, भूमिहार हैं लेकिन पांडेय लिखते हैं।

Shailendra Srivastava आप लोग जातिगत मानसिकता से कब उबरेंगे।

Praveen Mishra आप Shailendra Srivastava जी, इस मानसिकता से ऊबर चुके है? सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि रवीश इस सवाल को पूछते हुए सारी हद तोड़ चुके हैं।

Kailash Bajpai पांडेय जी में Rizwan Khan भाईसाहब की बात से पूरी तरह सहमत हूँ, कि भाई के किये का पाप रवीश पर थोपने का कोई औचित्य नहीं… मगर भाई स्वघोषित निष्पछ रविश कुमार जी स्क्रीन ब्लैक करने के और ग्राउंड पर माइक ले जाकर रिपोर्टिंग के माहिर हैं, तो भाई उन्हें भी तथ्यों की पड़ताल ग्राउंड पर जाकर स्क्रीन ब्लैक करनी चाहिए.

आलोक सिंह Rizwan Khan सही कहते हैं कि भाई के किये का पाप रवीश पर थोपने का कोई औचित्य नहीं, क्यूँकि ये गलत है, लेकिन भारत मे होने वाली हर घटना के लिए जब रवीश और उनके अनुयायी मोदी को दोषी ठहरा देते हैं, वो बड़ा क्रान्तिकारी पत्रकारिता होती है।

Vivek Kumar Singh कांग्रेस के बिहार उपाध्यक्ष भी है ।

Kameshwr Pandey कालिख लगाने का मौका चूकना नहीं चाहिए।

Acharya Chandrashekhar Shaastri भूमिहार ब्राह्मण है

Amrendra Ajay भूमिहार नही हैं..

Tarun Kumar Tarun इस पर रवीश से एक खोजी रपट की उम्मीद तो की ही जा सकती है!

Radhey Shyam Maurya रबिश भाई अभी रिपोर्टिंग के लिए भाई को खोज रहे है

Adarsh Shukla बागों में बहार है

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छेड़छाड़ प्रकरण मैनेज न कर पाने की सजा ‘समय’ चैनल के हेड ने कई रिपोर्टरों को दी

सहारा मीडिया के न्यूज चैनल ‘सहारा समय’ में अंधेरगर्दी मची हुई है. चैनल हेड मनोज मनु समेत कई बड़े पदाधिकारियों के खिलाफ छेड़छाड़ की एफआईआर दर्ज करने के कोर्ट के आदेश को लेकर कई रिपोर्टरों पर गाज गिरा दी गई है. इन्हें पूरे मामले को न मैनेज कर पाने की सजा सुनाई गई है. इन पत्रकारों में आलोक द्विवेदी, आलोक मोहन नायक, मृगांक, बिजेंद्र सिंह, कोमल, खालिद वसीम, ऋषिकेश आदि का नाम शामिल है.

ये पत्रकार प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय, दिल्ली सरकार से लेकर बिजनेस और एंटरटेनमेंट बीट आदि पर तैनात रहे हैं. लेकिन अब इन्हें पीसीआर में काम करना पड़ रहा है. इनसे पहले इस्तीफा मांगा गया. इस्तीफा नहीं देने पर इन सभी लोगों को प्रताड़ित करते हुए पीसीआर में डाल दिया गया. इस मामले की जानकारी कंपनी में सर्वेसर्वा बनाकर लाये गए कौस्तुब रे को भी पत्रकारों ने दी और विस्तार से अपनी समस्या बताई. लेकिन कोई भी सहारा की राजनीति में पैठ बना चुके मनोज मनु के खिलाफ मोर्चा नहीं खोलना चाहता है.

मूल खबर…

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छेड़छाड़ में मनोज मनु, गौतम सरकार और रमेश अवस्थी के खिलाफ FIR के आदेश

सेक्सुअल हरासमेंट मामले में सहारा मीडिया को बड़ा झटका… मनोज मनु, गौतम सरकार और रमेश अवस्थी हैं बड़े पदों पर आसीन…

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने सेक्सुअल हरासमेंट के केस में शुक्रवार 10.1.2017 को ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है… सेक्सुअल हरासमेंट के एक मामले में सहारा मीडिया के मनोज मनु, गौतम सरकार और रमेश अवस्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं… इन पर आरोप है कि ये लोग अपनी घिनौनी करतूत छिपाने के लिए पीड़ित महिला को लगातार धमकाते रहे… साथ ही पुलिस को भी मैनेज करते रहे…

पीड़ित महिला अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के प्रकरण को लेकर सहारा मीडिया के उच्च पदों पर बैठे मोस्ट सीनियर अधिकारियों से मिलती रही और न्याय की गुहार लगाती रही लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई थी. नोएडा स्थित सहारा समूह के न्यूज चैनल कैंपस में अपने साथ हुए अभद्र व्यवहार के खिलाफ महिला इंसाफ के लिए सहारा मीडिया के एचआर से लेकर महिला आयोग और पुलिस हर दरवाज़ा खटखटाती रही. मगर किसी ने इस मामले में जांच तक करना मुनासिब नहीं समझा. यहाँ तक कि पुलिस एफआईआर दर्ज करने को राजी नहीं थी…. तब महिला अंततः कोर्ट पहुँची.. कोर्ट ने जब महिला की आपबीती सुनी तो फ़ौरन 156 के तहत एफआईआर दर्ज करने और जांच के आदेश दिए.

घटना 2016 के जून महीने की है. तब उस समय के सहारा मीडिया के एमपी चैनल हेड रहे और बाद में नेशनल हेड बने मनोज मनु ने कैंपस में सीढ़ियों पर महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया. ऐतराज़ दर्ज कराने पर उसे इतने जोर से पकड़ा कि उसकी बांहों पर नील निशान पड़ गए… हालाँकि मनोज मनु ज्वायनिंग के बाद से ही महिला के पीछे हाथ धो कर पड़ गए थे… महिला के ऑब्जेक्शन पर उसे तरह तरह की धमकियां देते थे… महिला ने इस बात की शिकायत गौतम सरकार और रमेश अवस्थी से भी की थी लेकिन उनका कहना था कि मीडिया में काम करना है तो ये सब तो बर्दाश्त करना ही पड़ेगा … मनोज मनु जो भी बोल रहा है उसकी डिमांड पूरी कर दो…

मनोज मनु द्वारा महिला के साथ हो रहे उस गंदे व्यवहार के गवाह उस समय के कुछ अन्य सीनियर्स और साथ में काम करने वाले कुछ साथी भी थे… जब उन्होंने मनोज मनु की हरकतों पर ऐतराज़ जताया तो गौतम सरकार और मनोज मनु ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया था… पीड़ित महिला ने दिल्ली महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग में इस बात की लिखित शिकायत की… महिला दिल्ली में रहती थी और उसे बार-बार धमकी दी रही थी लिहाज़ा महिला ने दिल्ली पुलिस को कंप्लेन भी. तुरंत एफआईआर दर्ज करने की गुहारिश की. मगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की… महिला को टाल मटोल करती रही… लेकिन कोर्ट ने सहारा की दबंगई व महिला के दर्द को समझा और एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए.

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पति ने बना ली पत्नी की अश्लील क्लीपिंग (देखें वीडियो)

आगरा में एक पति ने ही पत्नी को बदनाम करने की ठान ली। पत्नी के कमरे में cctv कैमरे लगा दिए और उसकी अश्लील क्लीपिंग को नेट पर अपलोड करने की धमकी भी दे दी। ये आरोप लगाया है खुद पत्नी ने। यही नहीं, जब पत्नी ने विरोध किया तो उसके साथ जमकर मारपीट की। अब पीड़िता ने आगरा एसएसपी से गुहार लगाई है। आगरा एसएसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पुलिस को कारवाही के आदेश दिए है।

थाना एत्माउदोला के गढ़ी चांदनी की रहने वाली सोनी (बदला हुआ नाम) ने आगरा एसएसपी को शिकायती पत्र देकर बताया कि उसका पति से विवाद चल रहा है। कोर्ट के आदेश पर कुछ दिन पहले पति ने उसके रहने की व्यवस्था की। शांति विहार, गढ़ी चांदनी में किराए का घर दिला दिया। इस घर की एक चाबी पति के पास रहती है। वह अपने कमरे में कपड़े बदल रही थी कि तभी उसकी निगाह कमरे में लगे कैमरे पर गई। यह देख उसके पैरों तले जमीन निकल गई। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। उसकी क्लिपिंग बन चुकी थी।

तत्काल ही उसने ससुरालियों को वहां बुला लिया। शिकायत पर पति ने बोला कि कैमरा जानबूझ कर लगाए थे, ताकि तेरी क्लिपिंग लोगों को दिखा कर तुझे बदनाम कर सकूं। नेट पर डाल लोगों को दिखाऊंगा। पति की बात सुन वह दंग रह गई। विरोध पर ससुरालियों ने उसे बेरहमी से पीटा। चीख पुकार सुन पड़ोसी आ गए। उन्होंने उसे बचाया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि वह उस दिन के बाद से थाना एत्मादुद्दौला के चक्कर लगा रही है लेकिन पुलिस ने तहरीर लेना तक उचित नहीं समझा। एसएसपी ने शिकायत को गंभीरता से लिया।

सर्किल ऑफिसर बीएस त्यागी का कहना है कि cctv की dbr कब्जे में ले ली गयी है। उसकी जाँच की जा रही है। पुलिस ने पति से पूछताछ की तो उसने बताया कि पत्नी के द्वारा आत्महत्या जैसा कोई कदम न उठाया जाए, इससे बचने के चलते cctv कैमरे लगवाए।

देखें वीडियो : https://www.youtube.com/watch?v=sihhEIUhDvE

आगरा से फरहान खान की रिपोर्ट.

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अश्लील वीडियो क्लिप कांड में मुम्बई के 27 पत्रकारों पर पुलिस की गाज़

मुम्बई। एक महिला पत्रकार के अश्लील एमएमएस को वायरल करने के आरोप में नागपुर पुलिस ने मुम्बई के 27 पत्रकारों पर शिकंजा कसा है। इन पत्रकारों पर आरोप है कि इन्होंने महाराष्ट्र विधान सभा के बजट सत्र में यह वीडियो क्लिप आपस में बांटी थी। पुलिस ने इन पत्रकारों को आज़ाद मैदान पुलिस स्टेशन में बुलाया था। अब सबको अगले माह नागपुर की अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। इन पर सायबर अपराध की धरा ५९ और ६० के तहत मामला दर्ज हुआ है।

बताया जाता है कि दैनिक भास्कर में कार्यरत आशुतोष शर्मा ने 2012 में नागपुर की एक महिला पत्रकार को शादी का वायदा कर उसके साथ सम्बन्ध बनाये। इसी दौरान उसने महिला के साथ अंतरंग क्षणों की वीडियो क्लिप बना ली और उसे एक पोर्न साइट में अपलोड कर दिया। कुछ लोगों का कहना है कि यह वीडियो क्लिप दोनों की सहमति से बने थे। आशुतोष के बारे में बताया जाता है कि वह यह सब करने के बाद मुंबई से भाग गया। बाद में वह नोयडा में एक मार्केटिंग कंपनी में काम करने लगा। सूत्रों के मुताबिक उसने किसी दूसरी लड़की से शादी कर ली। एक रोज उसकी पत्नी ने उस वीडियो क्लिप को पति के लैपटॉप में देखा तो जाने उसे क्या सूझा कि उसने इस वीडियो क्लिप को पति के फेसबुक से उस महिला पत्रकार को खोज कर दे दिया।

वह महिला पत्रकार 2013 में मुम्बई के एक हिंदी दैनिक में रिपोर्टर के बतौर काम करने लगी। विधानसभा का नागपुर सत्र कवर करने के बाद वह जब दफ्तर लौटी तो उसके लैपटॉप में उसका जीमेल खुला रहा और जीमेल ड्राइव से किसी ने वह क्लिप निकाली। बाद में बजट सेशन में वह वीडियो वायरल कर दी गयी। पीड़िता ने इस सिलसिले में कई लोगों पर शक जताया।

पुलिस ने पोर्नसाइट से क्लिप डिलीट करवाने के बाद कनाडा से वायरल वीडियो की पूरी रिपोर्ट मंगाई जिसमें यह सिद्ध हुआ कि फ़रवरी २०१६ तक क्लिप को सिर्फ ६५० लोगों ने देखा था लेकिन उसके बाद इसे एक लाख साठ हज़ार लोगों ने देखा। जिन सताईस लोगों के मोबाइल से सर्वधिक ट्रेफिक वेबसाईट में गया, उन्हें पुलिस ने आरोपित किया है। इनमें कुछ के नाम हैं यदु जोशी, विक्रांत जोशी, प्रफुल्ल सालुंखे, कमलेश सुतार, तुषार शेट्टे, मुर्तजा मर्चेन्ट, श्रीकांत जाधव, श्रीनारायण तिवारी, आदर्श मिश्र, ओमप्रकाश चौहान, हितेंद्र झा, ओपी तिवारी, चन्दन शिरवाले, नेहा पूर्व, गिरिराज सावंत, सोनू श्रीवास्तव, शशिकांत सांडभोर, दीपक कैटिके, राहुल जाधव आदि।  मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस को बिना किसी दबाव के कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं। इसी के बाद इन पत्रकारों पर गाज़ गिरी है. अन्वेषण अधिकारी ब्राह्मणकर मामले की तफ्तीश कर रहे हैं.  

वहीं खबर का एक और पहलू ये है कि पत्रकारों के पास कई किस्म के वीडियोज आते रहते हैं. यदा कदा आपस में ये वीडियोज शेयर भी करते हैं. साथ ही उनके जानने वाले जब वीडियोज के बारे में बात करके मांगते हैं तो उन्हें दे भी देते हैं. ऐसे में वीडियो बांटने के आरोप में एक साथ 27 पत्रकारों को आरोपी बनाना कितना सही है या कितना गलत है, यह मामला न्यायालय में तय होगा. बताया जाता है कि जिस शख्स ने क्लिप बनाया था वह इन दिनों नागपुर में जेल में है. इस प्रकरण में मुंबई के 27 पत्रकारों के नाम आने से मीडिया जगत में हलचल है.

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महिला बंदी ने एटा के जेल अधीक्षक अनूप सिंह पर वसूली और छेड़छाड़ समेत कई गंभीर आरोप लगाए (देखें वीडियो)

यूपी के एटा जिला जेल से जमानत पर बाहर आकर एक महिला ने एटा जेल अधीक्षक अनूप कुमार पर जेल में अवैध वसूली, छेड़छाड करने और शारीरिक सम्बन्ध बनाने का प्रयास करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। उसने अपनी शिकायत मुख्यमंत्री, महिला आयोग, डीजी जेल, मानवाधिकार आयोग, डीएम, एसएसपी से की है। डीआई जी जेल आगरा और महिला आयोग की टीम ने एटा जेल पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। 

एटा जेल में एक मामले में निरुद्ध रही और अब जमानत पर बाहर आयी एक महिला बंदी ने जेल के खेल की जो हैरतअंगेज दास्ता बताई उससे हर कोई हैरान है। इस महिला का आरोप है कि वो १३ अप्रैल २०१६ को एक मामले में न्यायालय में हाजिर होकर एटा जिला कारागार गयीं जहां उससे जेल की महिला बंदी रक्षक पुष्पारानी ने ६०० रुपये की अवैध वसूली की मांग की। उसने कहा कि यह वसूली जेल अधीक्षक अनूप सिंह द्वारा सभी से कराइ जाती है। इस महिला के पास जेल में रुपये न होने के कारण ये ६०० रुपये नहीं दे सकी। इस महिला का आरोप है कि जेल अधीक्षक द्वारा उसे खुद अपने कार्यालय में तलब करके पैसा मंगाने के लिए दबाव दिया गया। हद तो तब हो गयी जब इस महिला बंदी रक्षक द्वारा अवैध वसूली के ६०० रुपये न देने पर जेल की महिला बंदी रक्षक पुष्पा रानी ने इसका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न शुरू कर दिया और कहा कि आप एक बार जेल अधीक्षक अनूप सिंह से शारीरिक सम्बन्ध स्थापित कर लो तो यह रुपया आपको नहीं देना पड़ेगा।

इस महिला बंदी का आरोप है कि इसके बाद जेल अधीक्षक अनूप सिंह ने इसे अपने ऑफिस में बुलाकर अपनी इच्छापूर्ति हेतु दबाव डाला और इच्छापूर्ति की बात न मानने पर प्रार्थिनी की जेल की अन्य बंदियों से पिटाई करवाने की धमकी दी। इस बात की शिकायत जब पीड़िता ने जेलर पीके सिंह से की तो उन्होंने भी जेल अधीक्षक के दबाव में आकर चुप्पी साध ली। इस महिला का आरोप है कि २ मई को जेल अधीक्षक अनूप सिंह ने जेल की महिला बंदी रक्षक पुष्पारानी से जेल कार्यालय में बुलवाकर बदनीयती से दबोच लिया। पीड़िता द्वारा चीखने व विरोध करने पर महिला बंदी रक्षक और जेल अधीक्षक द्वारा पीड़िता की बेरहमी से मारपीट की गयी जिससे पीड़िता के कपडे फट गए और वह अर्धनग्न हो गयी।

पीड़िता ने इस घटना को जेल के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को बताया परन्तु जेल अधीक्षक के दबाव के कारण पीड़िता की फ़रियाद किसी ने भी नहीं सुनी। पीड़िता का आरोप है कि एटा जेल में प्रत्येक महिला बंदी के साथ इस प्रकार का आर्थिक और शारीरिक शोषण किया जाता है। पीड़िता जब ९ मई को जेल से रिहा होकर बाहर आयी तब उसने महिला आयोग, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग, एटा के जिला अधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, डीजी जेल से शिकायत की जिस पर डीआई जी जेल और महिला आयोग की टीम ने जेल में आकर मामले की जांच शुरू कर दी है। 

पीड़ित महिला ने बताया कि अब जेल अधीक्षक अनूप सिंह के गुंडे उसे अनूप सिंह से समझौता करने का दबाव बन रहे हैं और धमकी दे रहे हैं कि यदि तुमने फैसला नहीं किया तो तुम्हें जान से मरवा देंगे और मुक़दमे लगवा देंगे। पीड़ित महिला को इन गुंडों ने दो दिन पूर्व घेरा भी था परन्तु टॉयलेट के बहाने किसी तरह से वो अपनी जान बचा कर भाग आयी। उसने मुख्य्मंत्री से अपनी सुरक्षा किये जाने और जेल अधीक्षक अनूप सिंह को सस्पेंड कर उसके खिलाफ जांच करवाकर कार्यवाही करने की अपील की है।

इस पीड़ित महिला के अतिरिक्त तीन अन्य महिला बंदी रही महिलाओ प्रेमवती, उषा रानी और शहनाज ने भी जेल में महिला बंदियों से जेल अधीक्षक अनूप सिंह द्वारा जबरन ६०० रुपये अवैध वसूल किए जाने की शिकायत एटा के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, महानिदेशक कारागार उत्तर प्रदेश और महिला आयोग से की है जिसकी जांच की जा रही है। इस पूरे मामले में जब एटा के जिला अधिकारी अजय यादव और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय शंकर राय से बात करने की कोशिश की गयी तो इन लोगों ने मामले पर पर्दा डालने की कोशिश करते हुए कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ़ इनकार कर दिया। इस मामले में जब एटा जेल के अधीक्षक अनूप सिंह से बात की गयी तो उन्होंने सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। 

इस प्रकरण से संबंधित वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=csoYUYTai7Q

एटा से धनंजय की रिपोर्ट.

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भारतीय मोहतरमा को एक पाकिस्तानी के प्यार में पड़ने की ये सजा मिली, न्यूड तस्वीरें आनलाइन हो गईं

Yashwant Singh : एक भारतीय मोहतरमा ने एक पाकिस्तानी से चैट किया और प्यार में पड़कर अपनी कई न्यूड तस्वीरें भेज डालीं. उन परदेसी भाई साहब ने एक रोज सब कुछ आनलाइन कर दिया. साथ ही मोहतरमा के सारे एफबी मित्रों के पास उस आनलाइन फोटोज के लिंक भेज दिए. मेरे पास भी आई हैं कुछ नंगी तस्वीरें लेकिन मैंने एक आंख से देखा और दूसरी आंख से डिलीट का बटन दबा दिया. सुना है वस्त्र विहीन तस्वीरें देख कुछ करीबियों की जुगलबंदियां टूट गईं और दिल इधर उधर छटपटाते बिखरे पाए गए.

पर सवाल वही है कि अगर मर्द की न्यूड फोटो लीक हो तो मर्दों वाली बात, लेकिन औरत की हो तो वो क्यों हो गई बेसवा? प्यार में सारा खेल शरीर का ही क्यों रखते हो, कुछ दिमाग का भी रखा करो. शरीर दागी हो गया (चलो मान लेते हैं) तो दिमाग तो क्रिएटिव है, सेंसेटिव है, कुछ नया रचेगा, फिर से वो छपेगा और फिर चल निकल सकती हैं जुगलबंदियां.

ये पूरा खारिज और पूरा कुबूल वाला खेल मुझे समझ नहीं आता. जितना अच्छा है, उसे प्यार करो. जो खराब लगे, उसे इगनोर करो. और वैसे भी, पत्थर वो मारे जिसने पाप न किया हो. देह के दायरे में उम्र के आखिरी पड़ाव तक डूबे रहना कहां की होशियारी है. पाप करिए, लेकिन उससे सबक लेकर आगे बढ़िए, रिपीट मत करिए, अटकिए मत.

का कहूं, कछु कहा नहीं जाए. बिन कहे भी रहा नहीं जाए.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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उपमन्यु पर लगा रेप का आरोप झूठ का पुलिंदा साबित हुआ

मथुरा। ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष, उपजा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट पर आरोप लगाने वाली एमबीए की छात्रा न्यायालय में हुए अपने बयानों एवं लगाए शपथ पत्रों में अपनी पूर्व की कहानी से पल्ला झाड़ते हुए उपमन्यु को निर्दोष करार दिया है। कोर्ट में उसने शपथ पत्र दाखिल कर कहा है कि उसके साथ बलात्कार एवं छेडख़ानी जैसी कोई वारदात नहीं हुई थी। अपने भाई को एक मामले में जेल जाने से बचाने के लिए तथा कुछ लोगों की सलाह पर उसने कमलकांत उपमन्यु पर आरोप लगाया था जो गलत था। वादिया का 5/01/2016 को न्यायालय में शपथ बयान हुआ है। इसमें उसने अंतिम आख्या पर अपनी सहमति जताते हुए कहा है कि वह इस संबंध में न्यायालय में पूर्व में बिना किसी प्रलोभन एवं बिना किसी दबाव के अपने शपथ पत्र भी दे चुकी है।

बलात्कार के आरोप को झेल रहे कमलकांत उपमन्यु एक बार फिर पाक साफ साबित हुए हैं। आरोप लगाने वाली लड़की ने कोर्ट में अपने बयानों में खुद स्वीकार किया कि विरोधियों के कहने पर श्री उपमन्यु को फंसाने के लिए रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। कोर्ट में वादी द्वारा मामले को आगे न बढ़ाने का हलफनामा दे खुद कहा कि उसके साथ कुछ नहीं हुआ था।  जो आरोप लगाए गए वह गलत थे और लोगों के कहने पर लगाए थे। उसने यहां तक कहा कि हाइवे थाने में जो रिपोर्ट दर्ज हुई उस तहरीर पर बिना पढ़े हस्ताक्षर किए थे। यहां तक कि न्यायालय में उसने दबाव में अपने बयान दिए थे। कुछ लोगों ने उनसे कहा था कि यदि उपमन्यु के खिलाफ बयान नहीं दिए तो उसे जेल जाना पड़ेगा, लेकिन अब वह सारी घटना का सच  फिरोजाबाद के आईओ को दिए शपथ पत्र एवं न्यायालय एसीजेएम (चतुर्थ) के सम्मुख दिए गए शपथ पत्रों एवं अपने बयान में भी बता चुकी है। वह इस मुकद्मे को आगे लडऩा नहीं चाहती है। पीडि़ता के अनुसार इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जो पीआईएल की गई है उसमें उसकी सहमति नहीं है तथा उसमें दर्शाए गए साक्ष्य निराधार एवं मनगढ़ंत हैं।

दो जून 2015 को न्यायालय में दिए शपथ पत्र में पीडि़ता ने कहा कि उसके पडौस में रहने वाले मुकेश शर्मा  पुत्र लक्ष्मीनारायण निवासी नटवर नगर मथुरा से वाद-विवाद हो गया था। उसके पिता ने इस मामले को निपटाने के लिए कमलकांत उपमन्यु से कहा तो कमलकातं उपमन्यु ने मुकेश शर्मा का सहयोग किया। इसके साथ ही उसके भाई अतुल के विरूद्ध एक तहरीर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दो दिसम्बर 2014 को दे आये थे। इस पर एसएसपी ने जांच कर गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश भी कर दिये। एक अन्य शिवकुमार शर्मा के प्रार्थना पत्र जो हमारे परिवार के ही विरूद्ध था, को दे आये उस पर भी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदया ने संज्ञान ले लिया था।

उसके घरवालों को इस बारे में जानकारी मिली कि मेरे भाई अतुल के विरूद्ध मुकद्दमा कायम कराने का प्रयास चल रहा है और इस प्रयास में कमलकांत उपमन्यु की भूमिका है। कमलकांत उपमन्यु ने हमारे विरूद्ध रिपोर्ट करवाने व जेल भिजवाने को कहा, तो इस मामले पर मैने तथा मेरे परिवारीजनों ने समाज के लोगों से राय ली। इसी आधार पर समाज के लोगों द्वारा टाइप कागज को बिना पढ़ाये व सुनाये एक प्रार्थना पत्र एसएसपी कार्यालय में दिलाया। इसके आधार पर रिपोर्ट संख्या कमलकांत उपमन्यु के खिलाफ  बलात्कार का मामला थाना हाईवे में दर्ज हुआ।

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कुछ लोगों ने उसे तहरीर को पढ़ाया और कहा कि यदि तहरीर के मुताबिक बयान नहीं दिए तो तुमको जेल जाना पड़ेगा। इसी दबाव में उसने कागज में लिखे अनुसार अपने बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए।  न्यायालय में दर्ज कराये गए बयान दबाव में दिये थे मेरे साथ ना ही बलात्कार हुआ, न ही मुख मैथुन, ना ही अप्राकृतिक मैथुन व ना ही कोई छेडखानी हुई थी और आज यही बात लिखकर बिना किसी दबाव के पढ़ व सुनकर शपथ पत्र दे रही हूं। यह सत्य है।

उसने कहा कि अपने परिवार व अपने इकलौते भाई को कुछ न हो और वह मुकद्दमे में जेल न जाये इस मानसिक दबाव में वह समाज के लोगों के दबाव में न्यायालय में बयान दिया था और शपथकर्ती को कानून के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उसने बयान हलफी में अपनी स्वेच्छा से बिना किसी भय, दबाव अथवा प्रलोभन के इस कारण दे रही हूं कि सच्चाई श्रीमान जी के समक्ष आये और अन्याय होकर कोई गलत व्यक्ति न फंसे। मुझ शपथकर्ती द्वारा इसी संबंध में अपना बयान व शपथपत्र उपरोक्त मुकद्दमे के विवेचनाधिकारी को पूर्व में दिया जा चुका है। उसकी निजी जानकारी के अनुसार उपरोक्त मुकद्दमे में विवेचनाधिकारी द्वारा विवेचना के उपरांत मुकद्दमे में अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गयी है। इस अंतिम रिपोर्ट में वह पूर्ण रूप से सहमत है। वह इस मुकद्दमे को आगे लडऩा नहीं चाहती है।

इसके बाद वादिया/पीडि़ता ने 19 अगस्त 2015 को एसीजेएम चतुर्थ के यहां पुन: शपथ पत्र/प्रार्थना पत्र देकर कहा-

”मैं अपनी स्वेच्छा से हलफिया बयान, बिना किसी भय, दबाव अथवा प्रलोभन के इस कारण दे रही हूं ताकि सच्चाई श्रीमान जी के समक्ष आय आये और अन्याय होकर कोई गलत व्यक्ति न फंसे। मुझ शपथकर्ती द्वारा इसी संबंध में अपना पूरा सच का बयान व शपथपत्र उपरोक्त न्यायालय में एवं विवेचनाधिकारी को पूर्व में दिया जा चुका है। मुझ शपथकर्ती द्वारा दिनांक ०२.०६.२०१५ को एक प्रार्थना पत्र मय शपथपत्र न्यायालय में स्वयं उपस्थित होकर प्रस्तुत कर दिया गया था जिसके बावजूद मेरे अधिवक्ता द्वारा मुझे सूचित किया गया है कि कुछ लोग मुझे तंग व परेशान करने की नीयत से प्रार्थनापत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर रहे हैं जिससे उपरोक्त मुकद्दमें के निस्तारण में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है उन प्रार्थनापत्रों में मुझ शपथकर्ती की कोई सहमति नहीं है तथा वह २१.०७.२०१५ को भी न्यायालय में स्वयं उपस्थित होकर एक प्रार्थना पत्र देकर मुकद्दमें के निस्तारण की प्रार्थना कर चुकी है। मुझ शपथकर्ती को मेरे अधिवक्ता द्वारा मुझे यह भी जानकारी दी गयी है कि उपरोक्त मुकद्दमे के संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा एक पी.आई.एल. नम्बर ३८८३/२०१५ माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गयी है जिसमें मुझ शपथकर्ती की किसी प्रकार की कोई सहमति नहीं है तथा पी.आई.एल. से पूर्व पी.आई.एल.कर्ता को मेरे पिता स्वयं पत्र देकर यह सत्य बता चुके थे कि पहले दिया गया प्रार्थना पत्र गलत फहमी मे दिया गया है। फिर पीआईएल के बाद दिये गये लेटर को छिपाते हुए पूर्व में दिये पत्र को दर्शाया गया है। पीआईएल का अवलोकन करने के उपरांत यह भी जानकारी में आया है कि उसे प्रस्तुत करने में जो भी आधार लिये गये हैं वह नितांत असत्य व गलत हैं। इस प्रकरण सत्यता यह है न तो हमारा कोई समझौता हुआ है औ रन ही होर्सट्रेडिंग जैसी कोई बात। कुछ लोग इस प्रकरण को उलझाये रखने के लिए इस तरह की बेबुनियाद और असत्य बातें कर रहे हैं। उनमें कोई न कोई दम न सच्चाई है। शपथकर्ती स्वयं ने प्रार्थना पत्र डीजीपी महोदय लखनऊ कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर प्रस्तुत किया था जिसके आधार पर विवेचना को फिरोजाबाद ट्रांसफर  किया गया था। अब इसमें अंतिम रिपोर्ट लग चुकी है और वह उससे पूर्ण रूप से सहमत है। वादिया को विवेचनाधिकारी द्वारा उपरोक्त मुकद्दमें में दी गई अंतिम रिपोर्ट पर कोई भी आपत्ति नहीं है तथा वह पूर्ण रूप से सहमत है। वह इस मुकद्दमे को आगे लडऩा नहीं चाहती है। कानून की जानकारी न होने एवं भाई को बचाने प्रार्थिया सामाजिक, गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है। अत: इस मामले को लेकर प्रार्थिया के विवाह में भी अड़चनें आ रही हैं।”

ज्ञात हो कि इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई है, जिस पर पीडि़ता ने एसीजेएम चतुर्थ न्यायालय में कहा कि उसकी पीआईएल में कोई सहमति नहीं है और उसमें जो तथ्य दर्शाये गये हैं वह निराधार  और मनगढंत हैं। इस मामले में मथुरा न्यायालय में विजयपाल तोमर द्वारा प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल किया गया, जिस पर अदालत द्वारा यह लिखा गया कि उनको प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार नहीं है। इधर न्यायालय में पीडि़ता ने कई बार उपस्थित होकर अपने प्रार्थना पत्र एवं शपथ पत्र दिये तथा न्यायालय में उपस्थित होकर सशपथ बयान दिया कि उक्त मुकद्दमें पुलिस द्वारा दाखिल एफआर पर मैं इसका विरोध नहीं करना चाहती और इसको स्वीकार कराने के लिए मैंने स्वेच्छा से एवं बिना किसी दबाव के ही शपथ पत्र दिये हैं।  और वह अंतिम आख्या स्वीकार कराना चाहती हूं। अब इस मामले में न्यायालय ने १६ फरवरी २०१६ नियत करते हुए आदेशित किया कि पीआईएल में दोनों पक्ष उपस्थित होकर उसका निस्तारण करायें।

मथुरा से Vivek Priya Arya की रिपोर्ट. संपर्क : Mobile : +91-9719910557

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पत्रकार रमेश ठाकुर ने ‘कालगर्ल’ होने का आरोप लगाया तो लड़की बोली- ‘अश्लील चैट करता था’

पत्रकार रमेश ठाकुर पर एक लड़की ने बदनाम करने का आरोप लगाया है. उसने वो चैट सार्वजनिक कर दिया है जिसमें रमेश ठाकुर लड़की से अश्लील बातें कर रहे हैं. इससे पहले लड़की पर रमेश ठाकुर ने मदद मांगने के नाम पर पुलिस व पत्रकार को भ्रमित करने, पैसे मांगने, चीटिंग करने समेत कई किस्म के गंभीर आरोप लगाए थे. बाद में जब ये आरोप लड़की तक पहुंचे तो उसने पत्रकार पर अश्लील बातें करने का आरोप लगाया और पूरे चैट को सार्वजनिक कर दिया.

पत्रकार रमेश ठाकुर का कहना है कि लड़की खुद को दिल्ली निवासी और देहरादून में बीबीए की पढ़ाई करने वाली बता रही थी. उसने फेसबुक पर संपर्क कर खुद को छेड़छाड़ की पीड़ित बताया और मदद मांगी. रमेश के मुताबिक उनने देहरादून के पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर मामले के बारे में जानकारी दी. रमेश का कहना है कि एसएसपी ने लड़की से संपर्क किया और उसके बताए जगह पर पुलिस पहुंची लेकिन वहां लड़की नहीं मिली.

रमेश के मुताबिक इसके कुछ देर बाद फिर लड़की का फोन आया. उसने बताया कि वह वहां से जान बचाकर भाग गई है. उसने खुद के फोन को दिल्ली से 497 रुपये से रिचार्ज कराने की मदद मांगी ताकि वह पैरेंट्स से संपर्क कर सके. रमेश ने बताया कि उन्होंने लड़की का फोन रिचार्ज करा दिया. उसके बाद उसने कोई संपर्क नहीं किया. पुलिस काफी समय तक परेशान रही. रमेश आगे बताते हैं कि 24 जनवरी को रात चार बजे फिर लड़की ने फोन किया. लड़की ने बताया कि उसका फोन टूट गया है और 6500 सौ रुपए किसी तरह भिजवा दो.

रमेश के मुताबिक वह समझ गए कि लड़की चीट कर रही है. उन्होंने दिल्ली साइबर सेल में संपर्क कर पूरी कहानी बताई. साइबर सेल ने लड़की के फोन नंबर को ट्रैक किया तो पता चला उसकी लोकेशन दिल्ली की है. रमेश यहीं आगे नहीं रुकते. वह आरोप लगाते हैं कि लड़की के नंबर की डिटेल निकाली तो पता चला कि यह किसी स्कार्ट यानी कालगर्ल का नंबर है.

उधर, लड़की ने भड़ास से संपर्क कर आरोप लगाया कि उसके साथ पत्रकार रमेश ठाकुर गंदी बातें करता था. वह जब उसकी गंदी बातों के जाल में नहीं आई तो उसने बदनाम करने के वास्ते एक गंदी कहानी गढ़ी और ह्वाट्सएप समेत कई जगहों पर भेज दिया. लड़की ने रमेश ठाकुर के चैट के कुछ अंश सार्वजनिक किए हैं जिससे पता चलता है कि पत्रकार रमेश ठाकुर वाकई अश्लील बातें कर रहे हैं. लड़की ने जो मैसेज भड़ास को भेजा है, वह नीचे दिया जा रहा है: 

bhaiya mjhe esne bdnam kar dia plz help me.

kal raat ko isne mjhse bat k. me mana nahi kar rahi k maine help mangi, bt isne mjhe kaha kbhi apni nangi pic do or dost k naam par mjhe bolta mere sath rat guzaro, malamal kar dunga.

agar mjhe aisa karna hota na me ye msg nh karti but isne mjhe ye sab karne par majbur kia sir.

meri koi galti nh h.

wait.

mere iski kch chat h. me send karti hu.

ye dekho chat.

isko kya kahoge jo isne mjhse kaha.

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मदरसे में उस्‍ताद ने मुझ समेत क्‍लास के सभी बच्‍चों संग किया था कुकर्म : फिल्‍ममेकर अली अकबर

एक मलयालम फिल्‍ममेकर अली अकबर ने दावा किया है कि मदरसे में तालीम हासिल करने के दौरान उस्‍ताद ने उनका यौन उत्‍पीड़न किया था। उन्‍होंने बताया कि जब वह चौथी जमात में थे तब  उस्‍ताद ने उनके साथ अप्राकृतिक सेक्‍स किया। अली अकबर ने यह भी बताया कि उस्‍ताद ने सिर्फ उन्‍हीं के साथ ऐसा नहीं किया बल्कि क्‍लास के सभी छात्रों का यौनशोषण किया था।

डायरेक्‍टर ने बताया, ”वो मदरसा कांथापुरम मुसलियार की ओर से ही चलाया जाता था। अगर वे इस मामले में दखल देने को राजी हैं, तो मैं उस उस्‍ताद से जुड़ी जानकारियां देने के लिए तैयार हूं।” अकबर के मुताबिक, घटना के बाद वे कभी मदरसे नहीं गए। उन्‍होंने कहा, ”70 के दशक के शुरुआती दिनों में हुई उस घटना ने मुझे सालों तक डर के साए में रखा। इसके बाद, मैंने अपने बच्‍चों को कभी भी मदरसे में तालीम के लिए न भेजने का फैसला किया।”

अकबर ने बताया कि मदरसों में मुस्‍ल‍िम स्‍टूडेंट्स को छोटी उम्र में समलैंगिकता अपनाने के लिए उस्‍तादों की ओर से जोर जबरदस्‍ती की जाती थी। उन्‍होंने कहा, ”उस्‍ताद से इस तरह के अनुभव पाने के बाद बहुत सारे स्‍टूडेंट्स क्‍लास के दूसरे बच्‍चों का उत्‍पीड़न शुरू कर देते थे। मैंने भी इस तरह के हालात सहे हैं।”

इससे पहले, मुस्‍ल‍िम महिला जर्नलिस्‍ट वी पी राजीना ने भी खुलासा किया था कि उनके बचपन में किस तरह मदरसे के उस्‍ताद लड़के और लड़कियों का यौन शोषण करते थे। जर्नलिस्‍ट के इस दावे को लेकर खासा बवाल मचा हुआ है। महिला जर्नलिस्‍ट के दावों के बाद से ही मदरसों में बच्‍चों की जिंदगी पर बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग अपने अनुभव शेयर कर रहे हैं। बहुत सारे लोग सामने आए हैं, जिन्‍होंने बताया कि मदरसों में उनका कैसे शोषण हुआ। हालांकि, केरल के प्रभावशाली सुन्‍नी लीडर कांथापुरम अबू बकर मुसलियार ने जर्नलिस्‍ट के दावों को खारिज करते हुए कहा था कि राज्‍य के मदरसों में किसी तरह का यौन उत्‍पीड़न नहीं होता। मुसलियार वहीं शख्‍स हैं, जिन्‍होंने कहा था कि औरत और मर्द को बराबरी का हक देना इस्‍लाम के खिलाफ है।

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स्टिंग से सामने आई पत्रकार हसन सुरूर की असलियत, बच्ची का यौन शोषण करने की नीयत रखने के आरोप में अरेस्ट

नई दिल्ली। भारतीय मूल के ब्रिटिश जर्नलिस्ट हसन सुरूर को एक बच्ची का यौन शोषण करने की मानसिकता रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार उन्हें एक चाइल्ड राइट्स ग्रुप द्वारा हसन का स्टिंग ऑपरेशन किए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया। स्टिंग में सुरूर ने बच्ची से मिलने की बात को स्वीकार किया है। 65 वर्षीय हसन कई भारतीय तथा अन्तरराष्ट्रीय मीडिया ग्रुप्स के लिए रेगुलर कॉलम लिखते हैं।

एंटी-पीडोफिलिया ग्रुप अननोन टीवी नामक इस ग्रुप ने अपने फेसबुक पेज पर हसन का स्टिंग वीडियो जारी किया था। वीडियो में हसन ने स्वीकार किया कि वह नौ नवंबर को चेल्सी से लंदन के डेप्टफोर्ड ब्रिज के डीएलआर स्टेशन में 14 साल की एक बच्ची से मिलने गए थे। वीडियो में स्टिंग कार्यकर्ता हसन पर आरोप लगा रहे हैं कि वह बच्ची का यौन शोषण करना चाहते थे। परन्तु हसन ने अपनी सफाई में कहा कि वह बच्ची से यह कहने की कोशिश कर रहे थे कि हसन उससे उम्र में काफी बड़े हैं। उनके मुताबिक उन्होंने सेक्स करने की कोई बात नहीं की थी।

ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार हसन ने बच्ची का शोषण नहीं किया। वे सिर्फ बच्ची से मिलने गए थे जो बाद में नाबालिग निकली। परन्तु एंटी-फिडोफिलाया ग्रुप की शिकायत पर ब्रिटेन की पुलिस ने हसन को बच्ची से गलत नीयत से मिलने के आरोप में अरेस्ट किया। ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट पुलिस ने बताया कि हसन को अरेस्ट कर लिया गया है। उन्हें गुरुवार को वेस्ट मिंस्टर मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया जाएगा।

ब्रिटेन और यूएस में अननोन टीवी जैसे कई सोशल ग्रुप्स एक्टिव हैं जो सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट्स पर खुद को नाबालिग बताकर पुरुषों से बातचीत बढ़ाते हैं। बाद में पुरुष उनसे मिलने पहुंचते हैं तो उनके बातों को टेप कर वीडियो को ऑनलाइन जारी कर दिया जाता है तथा पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी जाती है। पुलिस ने इन ग्रुप्स को कई बार वॉर्निंग भी दी है कि उनका काम करने का तरीका गलत है।

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क्लीवेज दिखाना एंकर को पड़ा महंगा, चैनल ने किया सस्पेंड

अल्‍बीनिया में एक टीवी रिपोर्टर को न्‍यूज प्रजेंट करते समय क्‍लीवेज दिखाना और प्‍लेब्‍वॉय मैग्जीन ज्‍वाइन करना काफी महंगा पड़ गया। चैनल के नाराज अधिकारियों ने उसे तुरंत ही सस्‍पेंड कर दिया। साथ ही उसे अभी अपनी पढा़ई और जर्नलिज्‍म पर ध्‍यान देने की नसीहत दी। टीवी रिपोर्टर ने जिस समय ऐसा हाटॅ शूट दिया उस समय वह अंतरराष्‍ट्रीय खबरें पढ़ रही थी। अल्‍बीनिया में एक समाचार चैनल के लिए 21 साल की एन्‍की ब्रैकाज इंटरनेशनल लेवल की न्‍यूज पढ़ रही थीं, लेकिन अपने इस काम के दौरान उसने कुछ ऐसा कर दिया कि बाकी सभी लोग सन्न रह गए।

एन्‍की ब्रैकाज ने अपने सीनियर को इंप्रेस करने के लिए व अचानक से खुद को हाईलाइट करने के लिए अपने दोनों स्तन के काफी हिस्से उघाड़ दिए। काफी खुले हुए आउट फिट्स पहनने के कारण स्तन का अधिकांश हिस्सा दिख रहा था। वह अपने स्‍क्रीन टेस्‍ट को प्रभावशाली बनाना चा रही थी। उसका सपना था वर्ल्‍ड न्‍यूज चैनल में धमाकेदार एंट्री करने का। हुआ भी ऐसा ही। एंकर को प्‍लेब्‍वॉय फोटोशूट का ऑफर मिल गया और उन्‍होंने इसे ज्‍वाइन कर लिया। उसे और भी कई धमाकेदार ऑफर मिले।

एन्‍की ब्रैकाज इस बात से काफी खुश है कि एक स्‍क्रीन टेस्‍ट में वह क्‍लीवेज दिखाकर अचानक से पूरे अल्‍बीनिया में छा गई। सोशल साइट्स पर भी उसकी चर्चा होने लगी। मेललाइन को उसने बताया कि उसे लगता है कि टीवी की दुनिया में जर्नलिस्‍ट के लिए जॉब मिलना काफी रिस्‍की है। ऐसे में उसे अचानक से फेमस होने का यही रास्‍ता नजर आया। यह काफी असान और लोगो के बीच छाने का चांस था। हालांकि उनके इस ऑडीशन से टीवी चैनल के अधिकारी उनसे काफी नाराज हो गए। चैनल हेड ने रिपोर्टर की इस हरकत पर उसे काफी डांट लगाई। इसके बाद उसे बाहर का रास्‍ता दिखा दिया। इस दौरान उन्‍होंने उसे अपनी पढाई पर ध्‍यान देने और जर्नलिज्‍म के एथिक्‍स पढने की भी सलाह दी।

चैनल हेड का कहना है कि वह अल्‍बीनिया में एक लोकल चैनल जजार चला रहे हैं। इसके लिए उन्‍होंने कुछ दिन पहले एन्‍की ब्रैकाज की कुछ पिक्‍स वगैरह देखी तो वह उन्‍हें काफी ठीक लगी। उन्‍हें कैमरे के सामने जिस फेस की जरूरत थी वह उसके हिसाब से फिट बैठ रही थी। सबसे खास बात तो यह है कि अल्‍बीनिया की राजधानी तिराना की रहने वाली एन्‍की ब्रैकाज पब्‍लिस रिलेशन की पढाई यूनिवर्सिटी से कर रही है। इस पर उन्‍होंने उसे न्‍यूज पढ़ने का आफॅर दे दिया, लेकिन उसने प्रोफेशन की सीमाएं तोड़ दी। ज्ञात हो कि अल्‍बीनिया में लगभग 60 फीसदी मुस्‍लिम कम्‍युनिटी है इसलिए यहां नंगापन को काफी बुरा माना जाता है।

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होशंगाबाद भास्कर के जीएम सुरेंद्र राय के खिलाफ लड़कीबाजी के चक्कर में हुई एफआईआर

अपने रंगीनमिजाज अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले होशंगाबाद दैनिक भास्कर के जीएम सुरेंद्र राय पर भोपाल में एफआईआर दर्ज हुई है। जीएम ने दैनिक भास्कर में कार्यरत एक पूर्व महिला कर्मचारी के इश्क में पड़कर उसके मंगेतर को जान से मारने की धमकी दे डाली। भोपाल के कमला नगर थाने में हुई रिपोर्ट के अनुसार जीएम ने मंगेतर को महिला कर्मचारी से शादी करने पर जान से मारने व अन्य प्रकार की धमकियों के लिए कई बार फोन किया था।

जानकारी के अनुसार जीएम के साथ भास्कर के ही दो लोगों ने भी फोन लगाकर धमकी दी थी। महिला उत्पीड़न रोकने के लिए भास्कर संबंधितों पर तत्काल एक्शन लेने की बात करता है। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में भास्कर संस्थान जीएम जैसे बड़े अधिकारी पर कार्यवाई करेगा।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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‘सेक्स रैकेट में हम दोनों पत्रकारों की कोई संलिप्तता न होने की खबर आप प्रकाशित करें’

संपादक,

भड़ास4मीडिया

सर,


कुछ दिन पहले आपने ये खबर डाली थी कि किस तरह ग्रेटर नॉएडा में पकड़े गए सेक्स रैकेट में कुछ पत्रकारों के नाम आये हैं जो अपने संरक्षण में इस सेक्स रैकेट को चला रहे थे. इसमें रमन और गौरव का नाम जबरदस्ती डाला गया था. महोदय मैंने पहले भी उस मामले में आपको अवगत कराया था कि कुछ पत्रकारों की साजिश के तहत हम दोनों का नाम इस मामले में डाला गया था.  महोदय सेक्स रैकेट में पकड़े गए जिन दो लड़कों सजल और सत्यम की तथाकथित गवाही के बाद मेरा (रमन) और गौरव का नाम इस मामले में घसीटा गया था, वो लड़के अब जेल से भी बाहर आ गए हैं.

मैं आपको उनके द्वारा दिया गया शपथ पत्र भेज रहा हूं. एसएसपी नॉएडा को हम लोगों ने एक शिकायत भी दी है कि किस तरह साजिशन हम दोनों पत्रकारों का नाम पुलिस और कुछ पत्रकारों की साजिश द्वारा सेक्स रैकेट के मामले में घसीटा गया था. पूरे मामले में जबरन रमन और गौरव का नाम घसीटा गया था.  इसमें एसएसपी को दोनों लड़को द्वारा दिए गए शिकायती पत्र और शपथ पत्र की कापी अटैच है. अतः हमारी इस मामले में कोई संलिप्तता न होने की खबर आप प्रकाशित करें.

धन्यवाद
रमन ठाकुर
पत्रकार
ग्रेटर नोएडा
9818713345

डाक्यूमेंट्स देखने के लिए नीचे लिखे Next पर क्लिक करें>>

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‘समाचार प्लस’ के पत्रकार पर छेड़खानी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज

उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में समाचार प्लस नामक चैनल द्वारा जिला संवाददाता उन्हीं को बनाया गया है, जो केबिल ऑपरेटर थे। इसी के चलते ललितपुर जिले में भी केबिल ऑपरेटर शैलेन्द्र जैन को समाचार प्लस का जिला संवाददाता बनाया गया था। लेकिन शैलेन्द्र जैन साहब खबरों के अलावा अन्य सभी कार्यों के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं कार्यो के चलते कल इनके खिलाफ ललितपुर कोतवाली में एक लड़की के साथ छेड़खानी और लड़की के साथ मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया है।

 

लड़की की शिकायत के अनुसार वह एक लेडीज कपड़ों की दुकान पर कार्य करती है। वहां से रोजाना आते जाते समय शैलेन्द्र जैन का भतीजा मोहित जैन उसके साथ छींटाकशी और छेड़खानी किया करता था। इसका विरोध उसके द्वारा कई बार किया गया, लेकिन दबंग पिता मनोज जैन और पत्रकार चाचा शैलेन्द्र जैन की शह के चलते मोहित जैन उर्फ़ मनु जैन के हौसले बढ़ते गये। एक दिन जब लड़की अपनी दुकान से घर जा रही थी तो उसके द्वारा उसका वीडियो बनाया गया और व्हाट्सऐप पर डालकर वायरल कर दिया। साथ ही विरोध करने पर और अधिक बदनाम करने की धमकी दी।

जब लड़की ने इस पर आरोपी मोहित जैन को उलाहना दी तो उसने लड़की के साथ मारपीट शुरू कर दी। यही नहीं, अपने पिता और चाचा को बुलाकर उनके साथ मिलकर भी मारपीट की। समाचार प्लस के पत्रकार शैलेन्द्र जैन ने अपनी पत्रकारिता का रौब दिखाते हुये पूरे शहर में बदनाम करने और शादी नहीं होने देने की धमकी तक दे डाली। इसकी शिकायत लड़की ने हिम्मत कर ललितपुर पुलिस अधीक्षक से की। शिकायत पर ललितपुर पुलिस अधीक्षक ने समाचार प्लस के जिला संवाददाता शैलेन्द्र जैन, आरोपी मोहित जैन उर्फ़ मनु जैन और मनोज जैन के खिलाफ धारा 294, 323, 504 67 आईटी ऐक्ट में मुकदद्मा दर्ज कर लिया है।  फिलहाल अब महाशय अपने रसूख और दबंगई के दम पर पीड़ित लड़की से राजीनामा करने का प्रयास कर रहे हैं।

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sexual harassment of a female PhD. scholar in DU by a Prof. of St. Stephens college

New Delhi : Disha Student organisation organized a protest demonstration at Arts Faculty, University of Delhi, North campus to protest against the sexual harassment of a female PhD. scholar by her guide, a Prof. in St.Stephens College. The matter of sexual harassment came forward after the victim lodged an F.I.R against the teacher. The Scholar had reported the incident with the college authorities but she added that when she took the matter up with the internal affairs committee of the college, the principal tried to persuade her to drop the charges.

The college authorities seemed reluctant to take any action regarding the accused teacher after which the scholar withdrew the complaint from the Internal affairs of the college and lodged an F.I.R against the teacher who sexually harassed her. Delhi University is one of the reputed universities of India and when such heinous acts of violence against women can take place here clearly the state of affairs elsewhere can be imagined. Disha student Organization strongly condemned the incident and demanded that strict action be taken against the teacher. Baby from Disha Student organization said while addressing the students gathered outside arts faculty that such acts of violence against women in a seat of learning raise the ever pertinent question that why is gender equality still an illusory dream, such acts indicate that the ingrained patriarchal values have not been done away with.

Women today need to be articulate and raise their voice against any such acts, silence against such acts of violence only encourage anti-women crimes. We are proud of the Scholar who didnt give in to the pressure put on her by the college authorities regarding delay in getting her PhD degree if the matter is made public. The courage of the girl needs to be applauded and made an example of. However the fight against anti-women crimes will not won if one confines themselves to the premises of the university. The women students should form squads among themselves and go the the common people and urge them to join this fight only then can we have a fair chance of winning this fight. The people who perpetuate such acts think that they can get away with such acts because the victim will not make the incident public out of shame and societal pressure. This very attitude fuels the patriarchal machinery. To fight the patriarchal value system the culprit needs to be shamed and not the other way round. Students from different colleges participated in the protest demonstration. Stree Mukti league and Naujawan Bharat sabha also joined the protest in solidarity.

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सुदर्शन न्यूज में काम कर रही एक लड़की ने पूरे ऑफिस के सामने महेश का भांडा फोड़ दिया (सुनें टेप)

आज मैं सुदर्शन न्यूज की एक खबर से आपको रुबरु करवाना चाहता हूं… वैसे तो खुद को राष्ट्रवादी बोलने वाले सुदर्शन न्यूज चैनल में आए दिन कुछ न कुछ घटिया-सा किस्सा होता ही रहता है.. पर अभी आपको जल्दी का ही एक किस्सा सुनाता हूं… कुछ दिन पहले सुदर्शन न्यूज से कई कर्मचारियों को निकाला गया और कई नए लोगो की नियुक्तियां भी की गईं… यह सब किया जा रहा था आउटपुट हेड महेश चतुर्वेदी के कहने पर..

असल में महेश एक ऐसा माहौल बनाना चाहता था जिसमें वो लड़कियों का इस्तेमाल कर सके. जो लड़की उसके झांसे में नहीं आती उस पर काम का प्रेशर डाल कर रिज़ाइन देने पर मजबूर कर देता… इसकी वजह से कई लड़कियों ने तंग आकर सुदर्शन से रिज़ाइन दे दिया… पर उसका ये सिलसिला ज्यादा दिन नहीं चल सका.. सुदर्शन न्यूज में ही काम कर रही एक लड़की ने पूरे ऑफिस के सामने यह बात बोल दी और महेश का भांडा फोड़ दिया… इसका ऑडियो मैंने इस मेल में अटैच कर दिया है…

क्या हर न्यूज चैनल में इसी तरह काम होता है… आखिर कब तक महेश जैसे लोग लड़कियों को टॉर्चर करते रहेंगे… कब तक लड़कियां इन सबसे जूझती रहेंगी… आज नहीं तो कल ऐसे लोगों को जवाब तो देना ही होगा… आज यह भी पता चला कि अब महेश ने सुदर्शन से अपना इस्तीफा तो दे दिया पर उसने a2z ज्वाइन कर लिया है… पर क्या जॉब चेंज करने से उसकी नीयत सही हो जाएगी… या वहां भी लड़कियों को इसी तरह से टॉर्चर किया जाएगा… अंत में आपसे एक ही प्रार्थना है कि कृपया करके मेरी पहचान गोपनीय रखा जाए…

सुदर्शन न्यूज में कार्यरत एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर आप उपरोक्त आडियो टेप नहीं सुन पा रहे हैं तो इस लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं: (सुनें डाउनलोड करें सुदर्शन आडियो टेप)

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शामली में गैंगरेप से डरे मां-पिता ने बेटी के पैर में जंजीर डाल दिया!

एक स्टोरी लिख रहा था ‘बेटी के पैर में जंजीर’..आप भी सोच रहें होंगे कि आखिर एक बेटी के पैर में भला किसने और क्यों जंजीर डाल दी। सुनकर किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाएगा। घटना यूपी के शामली की है लेकिन पूरे देश को प्रतिबिंबित करती है। खुद माता पिता ने ही बेटी की अस्मत बचाने के लिए उसके एक पैर में जजीर बांध दी। वाकई माता पिता ने वो किया जिसे कानून इजाजत नहीं देता है लेकिन सोचिए लाचार माता पिता और क्या करते। महज 16 साल की उनकी बेटी मानसिक तौर से कमजोर है और कुछ दिन पहले उसे अज्ञात अपराधी घर के पास से बहकाकर ले गए और उसके साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दे दिया।

बेटी को बदहवासी की हालत में पाकर माता पिता पर जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा। इलाके के पुलिस थाने से लेकर जिले के एसएसपी तक से मुलाकात की लेकिन आरोपी पकड़ना तो दूर की बात है उनका सुराग तक नहीं मिल सका। अपराधी बेखौफ और आजाद घूम रहे हैं। ऊपर से बेटी की मानसिक हालत ठीक नहीं है। उम्र भले बढ़ गई हो लेकिन दिमाग किसी छोटे बच्चे की तरह। कब कहां चली जाए, कहा नहीं जा सकता।

अब बताइए कि लाचार मां बाप और क्या करते। बेटी को बचाने के लिए उसके पैर में जंजीर ही पहना दी। दुख होता है ये सब देखकर। क्या ऐसे ही बेटियों की रक्षा होगी। हमारे आस पास इंसान से ज्यादा दरिंदे मौजूद हैं। ऊपर से कहीं चले जाओ, पुलिस का रवैया बिलकुल लापरवाही भरा। आपकी पकड़ है तो पुलिस चाय ठंडा सब पिलाएगी और मदद भी करेगी और यदि आप कमजोर हैं तो लगाते रहो थाने के चक्कर..और अपराधियों से बचाने के लिए बेटियों को भी जंजीर लगा के रखो।

ऐसी ही एक घटना मुंबई के करीब वसई में भी हुई थी, जहां बेटियों को बचाने के चक्कर में एक पिता ने कई सालों तक उन्हें घर में कैद कर रखा था। यहां तक कि पड़ोसियों को भी भनक नहीं लगी और जब लगी भी तो बहुत देर हो चुकी थी। बेटियां महज हड्डियों का ढांचा भर रह गई थीं। बेहद ही शर्मनाक घटनाएं हैं और जब तक ये होता रहेगा, हम लाख दुनिया जीत लेने का दंभ भरें, हमारा सिर शर्म से झुका रहेगा।

अश्विनी शर्मा की रिपोर्ट.

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एम्स की महिला डाक्टर ने जान देने से पहले फेसबुक पर समलैंगिक पति से रिश्ते रखने वालों का नाम लिखा

सुसाइड करने वाली एम्स की महिला डाक्टर प्रिया बेदी ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं अपने पति कमल से बेइंतहा प्यार करती थी लेकिन मुझे अफसोस है कि वो कभी भी मेरे प्यार को समझ नहीं पाया। शादी के 6 महीने बाद ही मुझे एहसास हो गया कि मेरा पति गे है, उसने झूठ बोलकर मुझसे शादी की है, उसके कई लोगों से समलैंगिक रिश्ते हैं लेकिन जब मैंने उससे सच्चाई जाननी चाही तो उसने मेरे साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया। मैं अपने गे पति की मानसिक और शारीरिक टॉर्चर के ही कारण आज मरना बेहतर समझती हूं। प्रिया ने फेसबुक पर उन लोगों का नाम भी लिखा है जिससे उसके पति कमल के शारीरिक रिश्ते थे।

प्रिया ने लिखा है कि अगर हमारे समाज में ऐसे लोग हैं तो कभी उनसे शादी मत कीजिए। गौरतलब है कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की एक 31 वर्षीया महिला डॉक्टर प्रिया बेदी ने शनिवार रात को अपनी कलाई काटकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने उसका शव पहाड़गंज में एक होटल के कमरे से बरामद किया। पुलिस ने कमरे से सुसाइड नोट भी बरामद किया है। प्रिया एम्स में सीनियर एनेस्थेटिस्ट के तौर पर कार्यरत थीं। सुसाइट नोट के आधार पर पुलिस ने रविवार शाम प्रिया के पति कमल बेदी को गिरफ्तार कर लिया। बेदी भी एम्स में बतौर त्वजा विशेषज्ञ कार्यरत है। प्रिया का पति खुद एक डॉक्टर है। पुलिस के अनुसार प्रिया के पति ने शनिवार को अपनी पत्नी के गुमशुदा होने की रिपोर्ट लिखाई थी। इसके बाद पुलिस ने प्रिया की खोजबीन शुरू की। पुलिस ने बताया, अभी हम मामले की और जांच कर रहे हैं। सुसाइट नोट के आधार पर हमने प्रिया के पति को गिरफ्तार कर लिया है और आज पुलिस उन्हें कोर्ट में पेश करेगी।

मूल खबर….

डाक्टर पति के ‘गे’ होने, शादी के 5 साल तक फिजिकल रिलेशन न बनने और टार्चर से परेशान एम्स की महिला डाक्टर ने जान दी

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डाक्टर पति के ‘गे’ होने, 5 साल तक फिजिकल रिलेशन न बनने और टार्चर से परेशान एम्स की महिला डाक्टर ने जान दी

दिल्ली के एम्स अस्पताल के एनस्थीसिया विभाग में कार्यरत सीनियर रेजीडेंट 31 वर्षीय महिला डॉक्टर प्रिया वेदी ने हाथ की नस काटकर आत्महत्या कर ली. प्रियका का शव दिल्ली पुलिस ने रविवार की सुबह पहाडगंज के होटल प्रेसीडेंसी से बरामद किया. प्रिया का शव बेड पर पड़ा हुआ था और हाथ की नस कटी हुई थी. पुलिस को शव के पास ही एक सुसाइड नोट मिला.

सुसाइड नोट में प्रिया ने लिखा है- ”पति कमल वेदी के साथ मेरी शादी को 5 साल हो गए हैं और अब तक हमारे बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं है. शादी के 6 महीने बाद मैंने अपने पति के लेपटॉप पर एक फर्जी जीमेल अकाउंट पाया जिसमें उसके कई गे दोस्तों के मोबाइल नंबर, उनकी तस्वीरें और वीडियो थे. जब मैंने अपने पति से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि किसी ने मेरा ईमेल अकाउंट हैक कर लिया है. मैंने पति के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की, लेकिन मेरे पति ने ऎसा करने से मना कर दिया और किसी न किसी बहाने से मेरा और मेरे परिवार का उत्पीडन किया जाने लगा. एक महीने पहले ही मेरे पति ने माना कि वो गे हैं. पिछली रात मेरे पति का मुझसे झगडा हुआ. मैं परेशान होकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रही हूं.”

पुलिस के मुताबिक प्रिया जयपुर की रहने वाली हैं और उनके पति कमल राजस्थान के सीकर का रहने वाला है. कमल भी एम्स के चर्म और त्वचा रोग विभाग में सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर हैं. दोनों एम्स के सरकारी फ्लैट में रह रहे थे. प्रिया ने शनिवार की रात करीब 11:45 होटल प्रेसीडेंसी में कमरा बुक कराया पहचान पत्र के रूप में उसने अपना लाइसेंस दिया. पुलिस ने प्रिया का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उसके पति से पूछताछ चल रही है. इस मामले की जांच एसडीएम कर रहे हैं.

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जान देने से पहले फेसबुक पर समलैंगिक पति से रिश्ते रखने वालों का नाम लिखा

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अमेरिकी महिला से रेप के आरोपों पर लेनिन रघुवंशी के संगठन की तरफ से विस्तृत बयान जारी

(अमेरिकी महिला से रेप के आरोपी सोशल एक्टिविस्ट लेनिन रघुवंशी की फाइल फोटो)


1)  Dr. Lenin herein is the CEO and Founder of an organization called “People’s Vigilance Committee on Human Rights” (PVCHR) started in 1996 as a membership based human rights movement in Varanasi (Uttar Pradesh), one of the most traditional, conservative and segregated regions in India. PVCHR works to ensure basic rights for marginalized groups in the Indian society, e.g. children, women, Dalits and tribes and to create a human rights culture based on democratic values.

2) The brief facts of the present case in the present case are as follows:

a) That on 22.4.2012, the complainant, An American girl approached the Applicant via email. She introduced herself as an individual concerned with the rights of the Dalits and Adivasis and expressed desire to visit PVCHR in Varanasi and get involved with the activities of the organization. (Annex 1)

b) That in response to the complainant’s e-mail, Shabana, who is a Senior Member of the management Committee of PVCHR wrote to her inviting her to Varanasi and also told her that she can stay with Shruti i.e. Applicant’s wife during her visit to Varanasi. Complainant was further informed that the Applicant would be reaching Varanasi on the evening of May 1, 2012 and would be leaving again on May 3, 2012.The complainant willingly agreed to stay with the Applicant’s wife and confirmed that she would be reaching Varanasi on April 28, 2012 and would leave on May 1, 2012 and expressed hope to meet the  Applicant during this time. To this, the Applicant wrote to the complainant that he would be reaching Varanasi on April 28, 2012 and leaving again on April 29, 2012 and hence they can meet on April 28, 2012. A tentative schedule was also prepared for her by the organization and e-mailed to her. Copies of the e-mails dated 22.4.2012, 23.4.2012, 24.4.42012, 25.4.2012, 27.4.2012 and 28.4.2012 exchanged between them in this time are attached herewith and marked as Annexure 2

c) That on 28.4.2012, the complainant reached Varanasi from Bombay and stayed with Applicant’s family there. The Applicant herein had also reached Varanasi on 28.4.2012 from Delhi and on 29.4.2012, left for Delhi the next day for a dinner with the EU Ambassador. This was the first time that the Applicant had met the complainant. Annexure 3

d) The complainant stayed with the Applicant’s wife, Shruti Nagwanshi for 4 days i.e. 28.4.2012 to 1.5.2012. They became friendly with each other and shared an amicable relationship.

e) As the purpose of the complainant’s visit was to get involved with the activities of the organization, during her stay in Varanasi, she had key meetings with the staff of the organization and she also visited the Bhagwanala slum area where the organization does field work. On 1.5.2012, when her visit came to an end, she donated Rs.10,000/- to PVCHR, before leaving for Mumbai.(Annex 4)

f) That after this visit to Varanasi, the complainant made all efforts to remain in touch with the Applicant. She used to chat with the Applicant online and most of the conversation was regarding work of the Applicant. Complainant was always appreciative of his work and they used to discuss various social issues. On May 8, 2013, the complainant asked the Applicant (over online chat) if they can meet in Varanasi on May 13, 2013. She told him that it was her birthday on May 14 and would love to spend it in Varanasi. As the Applicant had to catch a flight to Seoul on May 14, 2013 from New Delhi, they decided to meet in Delhi on May 13, 2013. A copy of the online chat between the Applicant and complainant is attached herewith as Annexure – 5

g)  That on May 13, 2013, Applicant checked in at Hotel Nancy Delux, Delhi at 7 PM. The complainant reached there around 10 PM.

h)  That though a room was booked for her in the same hotel by the Applicant, the complainant refused to fill up the form that has to be filled up by foreign citizens staying in that hotel. She also did not like the room offered to her and so her booking was cancelled and she moved to another location. She suggested that the Applicant also goes along with her but the Applicant did not go and stayed back where he had made his booking.

i) That the next day, i.e. on May 14, 2013, the Applicant left for Seoul from Delhi and the complainant went to Varanasi to visit PVCHR again.  This was the second and last time that the Applicant met the complainant. The ticket for the complainant was booked by Applicant’s organization and she later paid the amount for that ticket to the organization. A true copy of this ticket of the complainant from Delhi to Varanasi is attached herewith as Annexure 6-. A copy of the ticket and boarding pass of the Applicant from New Delhi to Seoul is attached herewith as Annexure 7.

j) That after her meeting with the Applicant in New Delhi, the complainant reached Varanasi on May 14, 2013. As it was her birthday that day, she celebrated the same with the Applicant’s wife, Applicant’s son and one of the office staff, Rohit. Photographs of the same are annexed herewith and marked as Annexure 8.

k) That she was very friendly with Applicant’s wife and during this visit also, she stayed at Applicant’s house with his wife and son.  The Applicant was not in Varanasi during this time even for a day.

l) That on May 18, 2013, it was the Applicant’s birthday and though he was not there, the complainant joined the family celebrations for the birthday with the Applicant’s wife and son. It can thus be seen that after the complainant’s visit to Delhi and meeting with the Applicant, she continued to maintain extremely friendly and cordial personal relationship with his family. See Video: https://www.youtube.com/watch?v=FO85MTg7JfU

m)  That during her stay in Varanasi, the complainant met Sapna, a victim of domestic violence who was being supported by the Applicant’s organization. The complainant took a lot of interest in her case. Sapna was being physically and mentally exploited by her husband and PVCHR had been helping and supporting her. Sapna’s husband had been threatening the Applicant, his family and the organization and in the past had even gone to the extent of making a life-threatening attack on the Applicant when 3 armed men had reached Applicant’s house with guns and knives. Fortunately the Applicant survived the attack with some injuries. An FIR was registered regarding this incident and the same is annexed herewith as Annexure 10.  He also had made various false and baseless allegations against the organization to the effect that his wife was being pressurized and exploited by members of PVCHR. Allahabad High Court had passed an order in favour of the organization, holding all allegations of Sapna’s husband to be false and baseless.  A copy of this judgment is annexed herewith and marked as Annexure 11.

n) That shockingly, the complainant, during her visit to Varanasi in May, 2013, while she was staying with the Applicant’s family, started keeping in touch with Sapna’s husband and used to meet him at his brother in law’s guest house regularly. Complainant never shared the reason and nature of these meetings with Sapna’s husband with anyone in the organization. The complainant for reasons unknown had also been instigating Sapna to go to Bangalore and seek help from the NGOs working there.

o) That the complainant left Varanasi on May 20, 2013 and soon thereafter, a false FIR came to be lodged by Sapna’s husband against the Applicant herein under Sections 342, 384 and 498 of Indian Penal Code regarding Sapna. It is suspected that the same was filed in connivance with the complainant. The said FIR was baseless and Sapna in her statement given to the magistrate under Section 164 of Criminal Procedure Code stated that the Applicant’s organization has been supporting her and the allegations made in the FIR were false and it was her husband who has been harassing and exploiting her. Copies of the said FIR and statement of Sapna under Section 164 of Criminal Procedure Code are annexed herewith and marked as Annexure 12.

p) That on June 4, 2013 Shruti, i.e. wife of the Applicant received an absurd email from the complainant asking why she (Shruti) told Sapna that the complainant was a bad girl and that the complainant loved the Applicant and because he refused her, she blamed him. In this e-mail, the complainant alleged that Sapna was not being treated properly by her and PVCHR. She also made an allegation that the Applicant had done her wrong in New Delhi and that the complainant had told this to Shruti. A copy of this e-mail dated June 4, 2013 is annexed herewith and marked as Annexure 13.

q) As Shruti (Applicant’s wife) had lost her e-mail password, she checked her e-mail after a long time and was shocked to read complainant’s e-mail. She replied to the complainant’s e-mail on September 19, 2013 and clarified to her that she had not said anything bad about her to Sapna. She also told her that PVCHR were not forcing Sapna for anything and were doing everything they can to make her life better.  A copy of this email dated September 19, 2013 is annexed herewith Annexure 14.

r)  That in November, 2013, Sapna was living with her relatives and decided to go back to her husband and did so without even informing the Applicant’s organization. That Sapna shared an amicable relationship with the members and staff of PVCHR and had always been grateful to them for their support. It thus came as a shock when the Applicant got to know that Sapna had given a complaint to the police against PVCHR for mental and physical exploitation. The same was filed clearly on instigation and pressure from her husband. As the complaint was baseless and without any merits, all allegations were found to be false. A true copy of the report by police on this complaint is annexed herewith Annexure 15.

s) That on December 26, 2014, Shabana had, on behalf of the organization sent a mass appeal through e-mail regarding barbaric crimes against women. As the same was sent to a pre-formed mailing list consisting of e-mail ids of people associated with the NGO, the mail got sent to the complainant as well.

t) The very next day, the complainant replied asking why Shabana had sent her that e-mail, to which Shabana wrote to her that as she was a part of the mailing list, the e–mail went to her as well and that her name would be removed from the mailing list.

u) On December 28, 2014, the complainant wrote to Shabana alleging that the Applicant had raped her and had lost her trust and once again mentioned that the organization was ill-treating Sapna. Shabana by her email dated December 29, 2014 clarified to the complainant that Sapna and members of the organization were on amicable terms. It was further clarified that her allegations against the Applicant were an attempt of character assassination and all the communication between the Applicant and the complainant as well as the photographs of her birthday celebration were being scrutinized by a committee of the organization. Copies of these emails dated 27.12.2014, 28.12.2014 and 29.12.2014 are annexed herewith as Annexure 16.

v) That in view of the allegations made by the complainant in her e-mails, the organization called for a sexual harassment committee meeting and on January 2, 2015, after considering the vague and baseless nature of the allegations, gave a report exonerating the Applicant. A copy of this report is annexed herewith as Annexure 17.

w) That to Applicant’s utter shock on April 9, 2015, he got to know through a news report shared on face book that an FIR has been registered against him by the complainant at Paharganj Police Station, New Delhi A copy of these newspaper reports are annexed herewith as Annexure 18

x)  That after enquiring from the concerned Police Station, the Applicant’s Advocate got to know that the case has been registered under Sections 376 and 328 of the Indian Penal Code. Even after giving an application for providing a copy of the FIR, the same was not supplied to the accused.

4.  That the Applicant herein is apprehending arrest in relation to the above-mentioned FIR and is seeking anticipatory bail on the following amongst other grounds:

A. That the Applicant is innocent and the FIR has been filed maliciously solely for the purpose of harassing and maligning the reputation of the Applicant.

B. That as per the newspaper report, the alleged incident happened in 2013 and there is no explanation for a delay of over 2 years in filing the present FIR and it is clearly an afterthought and an attempt to harass and falsely implicate the Applicant. After her meeting with the Applicant in Delhi, no information regarding any untoward incident was given by her to the hotel staff or the police. In fact, after their meeting, she visited Varanasi and stayed with Applicant’s family there.

C. That the Applicant has met the complainant only on two occasions. First time was on April 28, 2012, when the complainant was visiting Varanasi and staying at Applicant’s house with his family and the second time was on May 13, 2013 in New Delhi. Both the times the meeting was brief and mainly because of insistence from the complainant herself.

D. That the Applicant had gone to Varanasi and stayed with Applicant’s wife and son after her meeting with the Applicant in New Delhi. She even celebrated her own birthday as well as the Applicant’s birthday with Applicant’s family during her stay in Varanasi. Her relationship with Applicant’s family was friendly and affectionate.

E. That as depicted in the facts hereinabove, Sapna’s husband had made several and repeated efforts to harass the Applicant in the past as well and the Applicant believes that they were also instigated by the present complainant, who seems to be determined to tarnish the image of the Applicant herein. As depicted in the facts hereinabove, the complainant was in contact with Sapna’s husband and they in connivance with each other have been making all possible efforts to harass and malign the image of the Applicant and his organization.

F. That recently, the Applicant has been nominated for Roland Berger Human Dignity award. The process to select the awardee consists of a background check of all the nominees and the present allegation against the Applicant seems to be an attempt by a competitive NGO also working in Varanasi to ensure that the Applicant does not get that award. One of the NGOs functioning in Varanasi has been taking unduly keen interest in pursuing the present case against the Applicant which has given rise to such suspicion in the mind of the Applicant.

G. That the Applicant is a law-abiding and a respectable citizen and has no previous criminal antecedents. He is an individual whose contribution in the social sector has been commendable and the filing of the present FIR is merely an attempt of character assassination and harassment of the Applicant and his family.

H. That the facts narrated above clearly depict the baseless and malicious nature of the FIR against the Applicant and has been filed by the complainant to seek some unknown personal vendetta against the Applicant and in connivance with competitive organizations with the objective of tarnishing the image and reputation of the Applicant as well as his organization-PVCHR.

Shirin Shabana Khan
Program Director
People’s Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR)
An initiative of Jan Mitra Nyas ISO 9001:2008
SA 4/2 A Daulatpur, Varanasi – 221002 India
Email:  shabana@pvchr.asia


मूल खबर….

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