वेबसाइट की आड़ में पत्रकार बनाने का गंदा धंधा

”पत्रकार बनने का सुनहरा मौका। आवश्यकता है देश के हर जिले में रिपोर्टर, कैमरामैन और ब्यूरो की… दिए गए नम्बर पर जल्द से जल्द सम्पर्क करें।” ये मै नहीं कह रहा हूं। आज कल धड़ल्ले से खुल रही न्यूज वेबसाइट कह रही हैं। सोशल मीडिया पर मज़ाक बनाकर रख दिया है। जिधर देखो आवश्यकता है। पता नहीं इनको कितनी आवश्यकता होती है। काफी दिनों से whatsaap के ग्रुप में संदेश देख रहा था। ”आवश्यकता है देश के हर जिले में रिपोर्टर, कैमरामैन की।” मैने भी सोचा चलों आवश्यकता की पूर्ति की जाए। तुरंत चैट पर बात करना शुरू कर दिया। मुझे आप के वेब चैनल में रिपोर्टिग करनी है। जवाब आया, अभी किस न्यूज पेपर में हैं, मेरा जवाब था कहीं नहीं बस स्वतंत्र पत्रकार हूं।

सवाल पर सवाल धागे जा रहे थे, रिपोर्टर क्यों बनना चाहते हो, जवाब मे मैने भी कोई कसर नहीं छोड़ी, मैं हमेशा रिपोर्टर बनना चाहता था, पर कहीं से शुरूआत नहीं मिल पाई है। जनाब ने कहा हमारे यहां आप को शुरूआत मिलेगी। मेरी भी खुशी का ठिकाना न रहा आखिर संवाददाता बनने जा रहा था। फटाफट 7 , 8 फोटो भेजी और कहा कि हमारे वेब पोर्टल में ऐसे खबरें चलती हैं। और हमारे साथ जुड़ने के लिए आप को 3000 रूपए जमा करना होगा। जिसमें हम आप को आई कार्ड, अथाँरिटी लेटर, माइक आई डी देगें। साथ ही विज्ञापन में 50 प्रतिशत का कमीशन देगें।

चलो ये तो रही उनकी बात। मैने भी कहा कि अगर आप इतना कुछ दे रहे हैं तो ये भी बता दें कि वेतन कितना दे सकते हैं। वेतन का नाम सुनकर उनके पांव तले की जैसे जमीन खिसक गई हो। उन्होनें कह दिया कि वेतन तो नहीं हम दे पाएगें। विज्ञापन का कमीशन ही होगा। सबसे प्यारा जवाब उनका था कि सीखने के लिए अब आप को इतना तो करना होगा। ये कोई पहला वाकया नहीं था। इससे पहले भी मुझे पत्रकार बनाने के लिए 5000 रूपए की मांग की गई थी। 5000 लो और आईडी और लेटर लो। मेरी बदकिस्मती थी कि मुझे ये सब पहले नहीं पता था, वरना लाखों रूपए खर्च कर पत्रकारिता का कोर्स क्यों करता। सस्ते में निपट जाता, 3000 हजार रूपए में या पांच हजार में और बन जाता पत्रकार।

मैने भी पूछा था कि वेतन तो दोगे नहीं तो न्यूज को कैसे कवर करेगें । तो जवाब भी था कि कमाने के बहुत धंधे है इसमें। मतलब आई कार्ड दिखाकर दलाली करो और मार खाओ। न्यूज की खुल रही लगातार वेबसाइट की आड़ में पत्रकार बनाने का गोरखधंधा बढ़ता ही जा रहा है। पत्रकार बनाने के नाम पर रकम वसूली जा रहा है। ऐसी अनेक वेबसाइट हैं और चैनल है जो पैसे लेकर आई कार्ड, माइक आईडी देते हैं। वेतन के नाम पर विज्ञापन में कमीशन और दलाली करना सिखाते हैं। अच्छा धंधा बन गया है कमाने का। दूसरों के साथ खिलवाड़ का।

यही नहीं कुछ अख़बार भी इसी श्रेणी में आते हैं। पैसे लेकर आई कार्ड बना देते हैं और उस आई कार्ड से लोग रौब झाड़ते हैं। अधिकतर गाडियों में प्रेस लिखा मिलेगा। चाहे वह पत्रकारिता कर रहा हो या नही। इससे कोई मतलब नही है। ऐसे संस्थान जो पैसे लेकर प्रेस कार्ड बनाते हैं उनके खिलाफ कार्यवाही की जरूरत है। ऐसा करके वो पत्रकारिता को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। उनकों न ख़बर से मतलब है न ही उस व्यक्ति से उनको मतलब है पैसे से। पैसे दो और प्रेस कार्ड लो।मीडिया के लोगों को भी ऐसे संस्थान के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

अगर आप न्यूज वेबसाइट चला रहे हैं, तो अपने कर्मचारी को वेतन नहीं दे सकते हैं तो उनसे वसूली भी मत करें। लोग  भी बड़े रूतबे में आकर इनके चक्कर में फंस जाते हैं। जितने पैसे का वो कार्ड बनाकर देते हैं उतने में खुद अपनी न्यूज  वेबसाइट शुरू कर सकते हैं। अगर पत्रकारिता का इतना ही शौक है तो। लेकिन पत्रकारिता कौन करना चाहता है। वो तो बस प्रेस कार्ड के दमपर पुलिस चेकिंग में बचना चाहते है, किसी सरकारी दफ़्तर में जाकर रौब दिखाना चाहते हैं। इक बार पुलिस गाड़ी का पेपर चेक कर रही थी इस दौरान एक लड़के की गाड़ी को रोका गया, उसने तुरंत प्रेस कार्ड दिखाया और चला गया। उस लड़के को मै जानता हूं।  बी फारमा की पढाई कर रखा है। मैने पूछा ये कार्ड कहा से आया तुम्हारे पास तो उसका जवाब कि उसके दोस्त ने बनाया है। जबकि पत्रकारिता से उसका कोई लेना देना नहीं है। अगर बेवसाइट, अख़बार, चैनल ऐसे ही पैसे लेकर प्रेस कार्ड बनाते रहे तो वह दिन दूर नहीं है जब पत्रकार और पत्रकारिता की कोई वैल्यू नहीं रह जाएगी।

रवि श्रीवास्तव
स्वतंत्र पत्रकार
ravi21dec1987@gmail.com

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ये मीडिया को ‘विलेन बनाने’ का दौर है

Dilnawaz Pasha : ये मीडिया को ‘विलेन बनाने’ का दौर है. भारत में ‘प्रेस्टीट्यूट’ शब्द को स्वीकार कर लिया गया है और एक धड़ा जमकर इसका इस्तेमाल कर रहा है. सरकार ने मंत्रालयों में पत्रकारों की पहुंच कम कर दी है. यहां तक कि प्रधानमंत्री अपनी यात्राओं में पत्रकारों को साथ नहीं ले जा रहे हैं, जैसा कि पहले होता था.

अमरीका में ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वो ‘मीडिया को ही विपक्ष’ बना लेंगे. डोनल्ड ट्रंप कई बार मीडिया संस्थानों के लिए भद्दी भाषा का प्रयोग कर चुके हैं और कई स्थापित चैनलों को फ़र्ज़ी तक कह चुके हैं. ऐसा करके वो अपने एक ख़ास समर्थक वर्ग को ख़ुश भी कर देते हैं.

दुनिया में नया ऑर्डर स्थापित हो रहा है. इसमें पत्रकारों को भी अपनी नई भूमिका तय करनी होगी. जब अपनी बात पहुँचाने के लिए नेताओं के पास ‘सोशल मीडिया’ है तो वो ‘स्थापित मीडिया’ से दूरी बनाने में परहेज़ क्यों करेंगे?

मुझे लगता है कि ऐसे बदलते परिवेश में वो ही पत्रकार कामयाब होंगे और पहचान पाएंगे जो संस्थानों के समकक्ष स्वयं को स्थापित कर लेंगे. ‘बाइट-जर्नलिस्टों’ की जगह ‘विषय विशेषज्ञों’ की पूछ होगी.

जिस दौर में स्थापित मीडिया को विलेन बनाया जा रहा है उस दौर में पत्रकारों के पास ज़मीनी रिपोर्टिंग करके ‘हीरो’ बनने का मौक़ा भी है.

पत्रकार दिलनवाज पाशा की एफबी वॉल से.

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वेबसाइट और एप्प की तकनीकी दुनिया : बहुत कठिन है डगर पनघट की…

आजकल इन्टरनेट का ज़माना है. जिसे देखो वो वेबसाइट खोल रहा है. एप्प लांच कर रहा है. बड़ी और कारपोरेट कंपनियों की बात अलग रखिए जिनके पास खूब पैसा है और वो मार्केट के ब्रेस्ट ब्रेन और बेस्ट टेक कंपनी को अपने पोर्टल व एप्प के लिए हायर करते हैं. मैं बात कर रहा हूं उन साथियों की जो कम पूंजी में वेबसाइट, एप्प आदि लांच तो कर देते हैं लेकिन उनके टेक्निकल सपोर्टर ऐसे नहीं होते जो एक लेवल के बाद वेंचर को नई उंचाई पर ले जा सकें. वेबसाइट बना देना, चला देना बिलकुल अलग बात है. इसे मेनटेन रखना, इसे हैक से बचाना, इसे ज्यादा ट्रैफिक के दौरान संयत रखना, इसे लगातार सर्च इंजन फ्रेंडली बनाए रखना, इसे मजबूत सर्वर से जोड़े रखना दूसरी बात होती है.

इन्टरनेट की सबसे बड़ी खूबी ये है कि कोई भी फेसबुकिया अपने आप को इन्टरनेट का एक्सपर्ट मानता है. ठीक वैसे ही जैसे कि इंडिया का मैच होने पर वे खुद सबसे बड़े क्रिकेट एक्सपर्ट बन जाते हैं. आज मैं इस मुद्दे पर प्रकाश डालना चाहता हूँ कि कैसे आजकल लोग ऑनलाइन और इन्टरनेट के नाम पर ठग लिए जाते हैं. हरेक सर्विस की तरह इन्टरनेट की सर्विस के भी दो पहलू हैं. एक है सर्विस देने वाला और दूसरा सर्विस लेने वाला. दोनों मिलकर कैसी खीचम-खांच मचाते हैं और अपने आप को सर्वज्ञानी मानते हुए खुद बेवकूफ बन जाते हैं वो बता रहा हूँ.  अपन इसी धंधे में हैं तो थोडा बहुत जानते हैं. इसलिए पढ़ते चले जाइये, मज़ा आएगा.

सेवा प्रदाता द्वारा बेवकूफ बनाना

कोई भी बिज़नस अच्छे से करने के लिए आपको कुशलता और बुद्धि की आवश्यकता होती है. आजकल इन्टरनेट और ऑनलाइन सर्विस देने वाले एक-दो लडकों को भर्ती करके धंधा शुरू कर देते हैं. ठीक भी है, इस धंधे में कोई दुकान नहीं चाहिए, कोई कच्चा माल नहीं चाहिए. बस अपना कंप्यूटर लेकर बैठ जाइये. दुकान चालू. पर ये इतना आसान नहीं. इन्टरनेट के व्यवसाय में तमाम तरह की समस्याओं को रोजाना सुलझाना होता है. आप लम्बी रेस के घोड़े तभी बनेंगे जब आपके पास थोडा ज्ञान भी हो.

ग्राहकों को लूटना

ज्ञान न होने पर भी आप ग्राहक को भारी भरकम बिल तो थमा ही सकते है. एक उदाहरण से समझाता हूँ कि कैसे. चाय बेचने वाला दो तरह का होता है. एक स्टेशन पर चाय बेचने वाला और दूसरा आपके पड़ोस में चाय बेचने वाला. स्टेशन वाला आपको रेगुलर कस्टमर नहीं मानता. आपने उससे आज चाय ली है तो ज़रूरी नहीं कल भी लें. पर पड़ोस वाला आपको एक ग्राहक के रूप में अधिक सम्मान देता है. वो इसलिए कि कल को आप फिर से उसके पास आयेंगे. वो आपको बेवकूफ नहीं बनाएगा. यही सब हमारी इंडस्ट्री में भी है. अधिकतर वेबसाइट डेवलपर स्टेशन के चाय वाले हैं. पैसा लूटा और फिर राम राम. उनको आपसे दोबारा पैसा लेने की जरूरत नहीं क्योंकि उनका काम है रोज नए शिकार फंसाना. विडम्बना ये की आप ऐसे सेवा प्रदाता को तभी पहचानते हैं जब वो आपको चूना लगा चुका होता है.

अनुभवी स्टाफ की कमी

इन्टरनेट के व्यवसाय में तमाम तरह के अनुभव की आवश्यकता होती है. ग्राहक की ज़रूरत को टेक्नोलॉजी में ढालना आसान नहीं है. हाथी बनाते-बनाते भैंस बन जाती है, अगर अनुभव न हो. सर्वर को संभालना आसान नहीं. हज़ारों अलग-अलग किस्म की समस्याएं आती हैं, जिनका समाधान अनुभव से ही आता है. अधिकतर वेबसाइट सर्विस प्रदाता अनुभवी स्टाफ के बिना ही धकापेल ग्राहकों की सेवा में जुटे हुए हैं. राम बचाएं इनसे.

ग्राहकों द्वारा खुद का बेवकूफ बनाना

सेवा देने वाले ही गलत काम करते हैं, ऐसा भी नहीं. सेवा लेने वाले भी खुद का बेवकूफ बनाते रहते हैं. कैसे ये देखिये: अपने आप को सर्वज्ञानी मानना… जब सेवा देने वाला सर्वज्ञानी नहीं तो आप एक ग्राहक होते हुए सर्वज्ञानी नहीं हो सकते, अगर आप खुद इस टेक्नोलॉजी पर काम न कर चुके हों. पर मित्रों यही तो समस्या है. हमारे यहाँ हम अलिफ़ बे पे ते सीखकर अपने आपको अरबी घोडा समझने लगते हैं. मेरे अनुभव से लगभग 30 प्रतिशत ग्राहक इस बीमारी से ग्रसित हैं. वो ये नहीं जानते कि अगर आप सेवा प्रदाता पर भरोसा करके उसका काम उसको शांति से करने दें, और अपनी विद्वता की बत्ती बनाकर अपने पास रखे रहें, तो आप कहीं बेहतर सेवा पा सकते हैं बशर्ते सेवा देने वाला इस फील्ड का हो व थोड़ा बहुत ज्ञान रखता हो.

ज़रूरत से ज्यादा मोलभाव करना

आजकल एक नया चलन चल गया है. एक ग्राहक वेबसाइट या मोबाइल एप्प बनाने के लिए २० कम्पनीज से कोटेशन मांगेगा. रद्दी कंपनी ५ रुपये, ठीक ठाक कंपनी २० रुपये और धांसू लगने वाली कंपनी ५० रुपये का कोटेशन देगी. अब भाई साहब ५० वाली कंपनी के पास जायेंगे और बोलेंगे कि हमारे पास सारे कोटेशन २ रुपये से ४ रुपये के बीच में है. आप इत्ता पैसे काहे मांग रहे हो? अब बेचारा ५० रुपये वाला रो पीटकर ३०-३५ तक आता है, पर अंत में ग्राहक ५ वाले से १ रुपये में काम करवाता है और बेवकूफश्री बनता है, क्योंकि १ रुपये में वो काम हो ही नहीं सकता था.

कम पैसे में और ज्यादा, और ज्यादा की चाहत

जब वेबसाइट या एप्प का प्रोजेक्ट शुरू होता है तो सेवा लेने वाला और देना वाला दोनो मिलकर जो भी काम होता है उसकी डिटेलिंग करते हैं. पर कुछ अति उत्साही और अत्यंत स्मार्ट ग्राहक तय किये हुए काम से १० गुना काम चाहते हैं. आपको कुछ न कुछ नया बताते रहेंगे, बिना ये सोचे कि पैसा उस काम का लिया गया है जो पहले फाइनल हुआ था. सो काम करते करते बेचारा डेवलपर फ्रस्टिया जाता है और ग्राहक श्री फिर भी संतुष्ट नहीं हो पाते.

सम्मान नहीं देना

मेरे कुछ ग्राहक हैं जो बहुत ऊंची पढाई करके आये हैं, बड़े बिजनेसमैन भी हैं. लन्दन में होते हैं तो सड़क पर थूकते भी नहीं, पर यहाँ केले का छिलका फेंकने के लिए उनको सड़क ही सबसे मुफीद जगह नज़र आती है. उसी तरह से, वहां एक बढई को ४ घंटे के १०० यूरो दे देंगे, पर भारतीय इंजीनियर को ८ घंटे के हजार रुपये भी देने को तैयार नहीं. ऊपर से उनको जी साहब जी साहब करके न चाटो तो बहुत दुखी होंगे. ऐसे लोगों को ये नहीं पता कि भारतीय टैलेंट का थोड़ा सम्मान करेंगे तो बंदा उन्हें क्या क्या काम करके नहीं दे सकता.

…जारी…

लेखक दिवाकर सिंह नोएडा की कंपनी Qtriangle Infotech Pvt Ltd के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. वेबसाइट डेवलपमेंट, मोबाइल एप्लीकेशन डेवलपमेंट और ई-कॉमर्स पोर्टल डेवलपमेंट का काम करते कराते हैं. साथ ही साथ भड़ास4मीडिया डाट काम के तकनीकी सलाहकार भी हैं. अगर आपको इनसे कुछ जानना-समझना, पूछना-जांचना या सलाह लेना-देना हो तो इनसे संपर्क dsingh@qtriangle.in के जरिए किया जा सकता है.

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कृपाशंकर के SarajhanLive.com की लांचिंग अनिल चमड़िया के हाथों हुई

झमाझम बारिश के बावजूद हिंदी न्यूज़ पोर्टल www.sarajhanlive.com की लॉन्चिंग इंडिया गेट पर सोमवार की शाम सम्पन्न हुई। पोर्टल की लॉन्चिंग करते हुए हिंदी के वरिष्ठ जुझारू पत्रकार अनिल चमड़िया ने कहा कि वेबसाइट की दुनिया बहुत बड़ी है और इसका सरोकार काफी लम्बा-चौड़ा है। आने वाले वक़्त में इसकी जरुरत ज्यादा महसूस की जाएगी। वेबसाइट दृष्टि और मेहनत का खेल है, जिसने इस सूत्र को जाना, वह मीर।

इस अवसर पर पोर्टल के प्रधान संपादक कृपाशंकर ने फरमाया कि अँधेरे के खिलाफ, रौशनी की जंग के साथ यह पोर्टल सातो दिन, 24 घंटे खड़ा रहेगा। इतना ही नहीं, नवंबर में युवाओं के लिए एक अन्य वेबसाइट लांच करने की घोषणा की गई। लॉन्चिंग के समय वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश अखिल, विनोद विप्लव, कृष्ण मोहन झा, पंकज पाण्डेय, डॉ वाज़दा खान, मीनू जोशी, अभिनव रंजन, राघवेन्द्र शुक्ल, मोहन कुमार आदि बारिश और लॉन्चिंग का मजा लेते रहे।

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गोरखपुर में वेब मीडिया कंटेंट मानेटाइजेशन वर्कशाप 15 मई को, आप भी आएं

गोरखपुर प्रेस क्लब ने 15 मई को नेटवीरों के लिए कंटेंट मानेटाइजेशन वर्कशाप का आयोजन किया है. वेब मीडिया फील्ड में सक्रिय लोग इस वर्कशाप में शिरकत कर अपने कंटेंट के माध्यम से पैसे कमाने का गुर सीख सकते हैं. कार्यक्रम का आयोजक गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब है. आयोजन स्थल है प्रेस क्लब सभागार. आयोजन तिथि 15 मई और समय 11 बजे दिन है. आयोजन के मुख्य वक्ता यशवंत सिंह हैं जो दिल्ली स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं. साथ ही चर्चित वेबसाइट भडास4मीडिया डाट काम के सीईओ और एडिटर हैं. यशवंत सिंह इससे पहले दिल्ली में देश भर के नेटवीरों के लिए कंटेंट मानेटाइजेशन वर्कशाप का आयोजन कर चुके हैं जिसकी सराहना प्रत्येक भागीदार ने की.

गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के अध्यक्ष अशोक चौधरी और महामंत्री पंकज श्रीवास्तव ने एक बयान जारी गोरखपुर और आसपास के जिले के सभी पत्रकारों, ब्लागरों, नेटवीरों से इस आयोजन में शिरकत करने का अनुरोध किया. आयोजन हेतु मामूली रजिस्ट्रेशन फीस रखा गया है.  अशोक चौधरी और पंकज श्रीवास्तव ने बयान जारी कर कहा- ”साथियों, इस आयोजन में आप सभी पत्रकार साथियों की भागीदारी जरूरी है। आयोजन का लक्ष्य वेब की दुनिया में अपनी क्षमता के बेहतर प्रकाशन के लिए साथियों को एक मंच उपलब्ध कराना जहां कीर्ति के साथ साथ अर्थोपार्जन के अवसर भी हैं। इस आयोजन में गैर पत्रकार साथी भी भागीदार हो सकते हैं। आयोजन में शामिल होने के इच्छुक साथी इन फोन नंबरों 09415356434 (अशोक चौधरी) और 08858548721 (पंकज श्रीवास्तव) पर संपर्क कर अपना पंजीयन करा लें।”

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वेब मीडिया पर संगोष्‍ठी 16 अक्‍टूबर को, दस वेब लेखक होंगे सम्‍मानित

विचार पोर्टल प्रवक्‍ता डॉट कॉम ‘वेब मीडिया की बढ़ती स्‍वीकार्यता’ विषय पर एक संगोष्‍ठी का आयोजन करने जा रही है। यह संगोष्‍ठी 16 अक्‍टूबर 2014 को स्‍पीकर हॉल, कांस्टिट्यूशन क्‍लब, नई दिल्‍ली में सायं 4.30 बजे आयोजित होगी। ‘प्रवक्‍ता’ के छह साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्‍वविद्यालय, रायपुर (छत्‍तीसगढ़) द्वारा संचालित कबीर संचार अध्‍ययन शोधपीठ के सहयोग से संपन्‍न होगा।

इस संगोष्‍ठी के मुख्‍य अतिथि हैं- केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री प्रकाश जावडेकर, वक्‍तागण हैं- यथावत पत्रिका के संपादक श्री रामबहादुर राय, वरिष्‍ठ लेखक एवं स्‍तंभकार श्री ए. सूर्यप्रकाश, कबीर संचार अध्‍ययन शोधपीठ के निदेशक डॉ. आर. बालशंकर, साहित्‍यशिल्‍पी डॉट कॉम के संपादक श्री राजीव रंजन प्रसाद तथा कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करेंगे कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार वि‍श्‍वविद्यालय, रायपुर (छत्‍तीसगढ़) के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी।

उपरोक्‍त जानकारी देते हुए प्रवक्‍ता डॉट कॉम के संपादक श्री संजीव सिन्‍हा ने बताया कि वेब मीडिया रेडियो, प्रिंट और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया का विकल्‍प बनकर उभरा है। सुदूर देहात में जहां अभी भी समाचार-पत्र नहीं पहुंच पाते, वहां मोबाइल के जरिए समाचार पहुंचने लगे हैं। वेब मीडिया की बढ़ती स्‍वीकार्यता पर जहां संगोष्‍ठी में चर्चा होगी वहीं गत वर्ष की भांति इस बार भी दस लेखकों को प्रवक्‍ता सम्‍मान से सम्‍मानित किया जाएगा, जिनमें सर्वश्री पंडित सुरेश नीरव, श्री अशोक गौतम, श्री विजय कुमार, श्रीमती बीनू भटनागर, श्री गौतम चौधरी, श्री शादाब जाफर ‘शादाब’, डॉ. सौरभ मालवीय, सुश्री सारदा बनर्जी, श्री हिमांशु शेखर एवं श्री शिवानंद द्विवेदी ‘सहर’ के नाम उल्‍लेखनीय हैं। इसके साथ ही तृतीय प्रवक्‍ता ऑनलाइन लेख प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्‍कृत भी किया जाएगा।

प्रेस विज्ञप्ति

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