अनुदानित दरों पर भूखण्ड हथियाने के बावजूद सरकारी मकानों का सुख भोग रहे पत्रकारों की लिस्ट देखें

नैतिकता के चोले में रंगे सियार (पार्ट-तीन) : सैकड़ों पत्रकार ऐसे हैं जिन्हें तत्कालीन मुलायम सरकार ने रियायती दरों पर भूखण्ड और मकान उपलब्ध करवाए थे इसके बावजूद वे सरकारी आवासों का मोह नहीं त्याग पा रहे। इनमें से कई पत्रकार ऐसे हैं जिनके निजी आवास भी लखनऊ में हैं फिर भी सरकारी आवासों का लुत्फ उठा रहे हैं जबकि नियम यह है कि सरकारी आवास उन्हीं को दिए जा सकते हैं जिनका निजी आवास लखनऊ में न हो। कुछ पत्रकारों ने रियायती दरों पर मिले मकानों को किराए पर देकर सरकारी आवास की सुविधा ले रखी है तो कुछ सरकारी आवासों को ही किराए पर देकर दोहरा लाभ उठा रहे हैं।

कम्पनी में कमाल खान, रुचि कुमार और शरत चन्द्र प्रधान का कितना शेयर है?

नैतिकता के चोले में रंगे सियार (पार्ट-दो) : हुआ यूं कि तत्कालीन मुलायम सरकार के कार्यकाल में राजधानी लखनऊ के अति विशिष्ट इलाके गोमती नगर में पत्रकारों के लिए रियायती दरों पर भूखण्डों की व्यवस्था की गयी थी। भूखण्ड पंजीकरण आवंटन पुस्तिका के 3.7 कालम में स्पष्ट लिखा हुआ है कि भूखण्ड उन्हीं पत्रकारों को दिया जायेगा जो वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 के अधीन आते हैं। गौरतलब है कि इलेक्ट्राॅनिक चैनलों को इस एक्ट में शामिल नहीं किया गया है। तत्कालीन अखिलेश सरकार के कार्यकाल में इस एक्ट में संशोधन किए जाने के लिए आवाज उठायी गयी थी, लेकिन मौजूदा समय तक इस एक्ट में कोई संशोधन नहीं किया गया है। लिहाजा खबरिया चैनल में काम करने वाले पत्रकारों को पत्रकार माना ही नहीं गया है।

कमाल खान रियायती दरों पर दो-दो प्लाट का लाभ लेने के बाद भी बटलर पैलेस के सरकारी आवास पर कब्जा जमाए हुए हैं!

नैतिकता के चोले में रंगे सियार (पार्ट-एक) : नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले तथाकथित वरिष्ठ पत्रकार स्वयं कितने अनैतिक हैं इसका खुलासा ‘दृष्टान्त’ की पड़ताल में नजर आया। मीडिया के क्षेत्र से जुड़े मठाधीश अपने जूनियर पत्रकारों को तो इमानदारी से पत्रकारिता करने की सीख देते हैं, लेकिन वे स्वयं कितने बेईमान हैं, इसकी बानगी कुछ चुनिन्दा पत्रकारों के पन्ने खुलते ही नजर आ जाती है। खबरिया चैनल से लेकर अखबारों और मैगजीन से जुड़े पत्रकारों ने सरकार की चरण वन्दना कर जमकर अनैतिक लाभ उठाया। जानकर हैरत होगी कि कोई करोड़ों की लागत से आलीशान कार्यालय और बेशकीमती कारों का मालिक है तो किसी के पास अथाह जमीन-जायदाद। कोई फार्म हाउस का मालिक बना बैठा है तो किसी के पास कई-कई मकान हैं।

चैनलों के कुछ गेस्ट रंगे सियार जैसे हैं… धन्य हैं आप देव…

Arvind K Singh : चैनलों के कुछ गेस्ट बनाम रंगा सियार…. कुछ चैनलों के कुछ गेस्ट अजीब हैं। वे बड़े लोग हैं। चैनलों पर जाकर भाषण देते हैं। कुछ जगह पैसे मिलते हैं, कुछ जगह मुफ्त में। कुछ जगह सुना है वे खुद पैसे देते है। फिर तुर्रा ये कि उनका चेहरा बिकता है। वे कहीं जाते नहीं है। जमीन से उनको लेना देना नहीं है। वे जो कहते हैं उसका उलटा होने पर भी शरमाते नहीं।