पत्रकारिता फील्ड में आने वालों, इस किताब को पढ़ लो… फिर न कहना- ‘ये कहां फंस गए हम!’

पत्रकारिता की दुनिया को ‘संजय’ की नजर से देखने-समझने के लिए ‘पत्रकारिता – जो मैंने देखा, जाना, समझा’ को पढें…

वरिष्ठ पत्रकार और उद्यमी संजय कुमार सिंह की पुस्तक “पत्रकारिता – जो मैंने देखा, जाना, समझा“ उन तमाम लोगों के लिए आंख खोलने वाली है, जो आज भी पत्रकारों में बाबूराव विष्णु पड़ारकर या गणेश शंकर विद्यार्थी देखते हैं और जो ग्लैमर से प्रभावित होकर पत्रकारिता को पेशा बनाना चाहते हैं। यह सच है कि चीजें जैसी दिखाई पड़ती हैं, उनको वैसी ही वही मान ले सकता है जिसके पास अंतर्दृष्टि नहीं होगी। पर जिसके पास अंतर्दृष्टि है वह चीजों को उसके अंतिम छोर तक देखता है। चीजें जैसी दिखती हैं, वह उसे उसी रूप में कदापि स्वीकार नहीं करता। चिंतन-मनन करता है और अपनी अंतर्दृष्टि से सत्य की तलाश करता है।

(पुस्तक लेखक संजय कुमार सिंह. उपर है संजय की किताब का कवर पेज)


इस पुस्तक के लेखक ने भी अपनी इसी अंतर्दृष्टि से तस्वीर के दूसरे पहलू को सामने लाने का प्रयास किया है और मैं कह सकता हूं कि लेखक इसमें कामयाब है। वह इस पुस्तक के माध्यम से अपने तीन दशकों से ज्यादा के पत्रकारीय अनुभवों के आधार पर नई पीढ़ी के पत्रकारों या पत्रकारिता को पेशा बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को इस पेशे की हकीकत से रू-ब-रू कराकर यह समझाने में सफल हैं कि करियर के लिहाज से यह पेशा कैसे ठीक नहीं है।

अस्सी के दशक में हिंदी पत्रकारिता को नया आयाम देने वाले “जनसत्ता” के संपादक प्रभाष जोशी ने इस पुस्तक के लेखक संजय कुमार सिंह के साथ हुई एक घटना का हवाला देते हुए संपादकीय लिखा था – “तेजाब से बची आंखें।”…और कहा था कि ये आंखें राह दिखाएंगी। उनकी यह टिप्पणी भले किसी और संदर्भ में थी। पर मैं आज देख रहा हूं कि संजय कुमार सिंह की अंतर्दृष्टि वाकई नई पीढ़ी को राह दिखा रही है।

यह आदर्श स्थिति है कि पत्रकारिता ऐसी हो जो मनुष्य के पूरे व्यक्तित्व का पोषण करे। यानी उसके शरीर, मन और आत्मा को पुष्ट करे। दूसरे शब्दों में पत्रकारिता ऐसी हो जो बेहतर मनुष्यता को निर्मित करने में संलग्न हो, सिर्फ घटनाओं के वृतांत इकट्ठे न करे। पर यह पुस्तक इस सत्य से बखूबी पर्दा हटाती है कि बदलते परिवेश में पत्रकारिता जैसी वीभत्स दिखती है, उससे भी गई-बीती है। पत्रकारों को इस स्थिति में ला खड़ा किया गया है कि उसे कुछ नकारात्मक नहीं मिलता है तो वह उसे पैदा करने की कोशिश में रहता है। कह सकते हैं कि उनके सामने हर प्रकार के झूठ निर्मित करने की मजबूरी है।

मुझे उम्मीद है कि यह पुस्तक पत्रकारिता के बाहरी स्वरूप को देखकर उसे अपना कैरियर बनाने का सपना देखने वाले युवाओं को नई दृष्टि प्रदान करेगी। इसके बावजूद जो युवा पत्रकारिता को पेशा बनाएंगे तो उन्हें इस बात का मलाल नहीं होगा कि क्या सोचा था और क्या हो गया। अच्छी बात है कि यह पुस्तक Amazon पर भी उपलब्ध है। सुविधा के लिए उसका लिंक नीचे दिया जा रहा है। लेकिन उसके पहले, description पर इस किताब के बारे में जो description दिया गया है, उसे पढ़ें…

‘स्वतंत्रता मिलने के बाद देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई। प्रकारांतर में अखबारों की भूमिका लोकतंत्र के प्रहरी की हो गई और इसे कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका के बाद लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ कहा जाने लगा। कालांतर में ऐसी स्थितियाँ बनीं कि खोजी खबरें अब होती नहीं हैं; मालिकान सिर्फ पैसे कमा रहे हैं। पत्रकारिता के उसूलों-सिद्धांतों का पालन अब कोई जरूरी नहीं रहा। फिर भी नए संस्करण निकल रहे हैं और इन सारी स्थितियों में कुल मिलाकर मीडिया की नौकरी में जोखिम कम हो गया है और यह एक प्रोफेशन यानी पेशा बन गया है। और शायद इसीलिए पत्रकारिता की पढ़ाई की लोकप्रियता बढ़ रही है, जबकि पहले माना जाता था कि यह सब सिखाया नहीं जा सकता है। अब जब छात्र भारी फीस चुकाकर इस पेशे को अपना रहे हैं तो उनकी अपेक्षा और उनका आउटपुट कुछ और होगा। दूसरी ओर मीडिया संस्थान पेशेवर होने की बजाय विज्ञापनों और खबरों के घोषित-अघोषित घाल-मेल में लगे हैं। ऐसे में इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को यह बताना है कि कैसे यह पेशा तो है, पर अच्छा कॅरियर नहीं है और तमाम लोग आजीवन बगैर पूर्णकालिक नौकरी के खबरें भेजने का काम करते हैं और जिन संस्थानों के लिए काम करते हैं, वह उनसे लिखवाकर ले लेता है कि खबरें भेजना उनका व्यवसाय नहीं है।

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लेखक किशोर कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे संपर्क +919811147422 या kk2801@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह की किताब ‘राजरंग’ का गोरखपुर में विमोचन 24 सितंबर को

सहारा मीडिया के लिए दिल्ली में लंबे समय से वरिष्ठ पद पर तैनात और प्रेस क्लब आफ इंडिया के कई वर्षों से निदेशक संजय सिंह की नई किताब ‘राज-रंग’ का आगमन हो गया है. इसका विधिवत विमोचन उनके गृह जनपद गोरखपुर में होगा. इसके लिए 24 सितंबर की तारीख तय की गई है. समारोह अपराह्न तीन बजे से गोरखपुर क्लब के सभागार में होगा. इस आयोजन के मुख्य अतिथि हैं साहित्य अकादमी नई दिल्ली के अध्यक्ष विश्वनाथ त्रिपाठी.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे प्रो. रामदेव शुक्ल. मुख्य वक्ता जाने-माने साहित्यकार और आलोचक डा. ज्योतिष जोशी होंगे. संचालन की जिम्मेदारी निभाएंगे आकाशवाणी के उद्घोषक सर्वेश दुबे. इस आयोजन की जिम्मेदारी ली है गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब ने. ‘राज-रंग’ किताब के बारे में इसके लेखक संजय सिंह ने बताया कि राजनेताओं से अंतरंग बातचीत पर आधारित इस पुस्तक में ढेर सारे इंटरव्यूज है जो आज के हालात में काफी प्रासंगिक हैं.

किताब का प्रकाशन दिल्ली के लोकमित्र प्रकाशन ने किया है. इस किताब के कई अन्य पार्ट भी भविष्य में आएंगे. साथ ही किताब का विमोचन दिल्ली में भी जल्द किया जाएगा. गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के अध्यक्ष मार्कंडेय मणि त्रिपाठी ने सभी मीडियाकर्मियों, लेखकों, प्रकाशकों, सुधी पाठकों, नागरिकों से आयोजन में शिरकत कर इसे सफल बनाने की अपील की.

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संजय द्विवेदी द्वारा संपादित दो पुस्तकों का विमोचन

भोपाल, 10 फरवरी। मीडिया विमर्श के तत्वावधान में आयोजित समारोह में लेखक एवं मीडिया गुरु संजय द्विवेदी द्वारा संपादित दो पुस्तकों ‘अजातशत्रु अच्युतानंद’ और ‘मीडिया, भूमण्डलीकरण और समाज’ का विमोचन किया गया। इस मौके पर संपादक श्री द्विवेदी ने कहा कि दोनों पुस्तकें रचनात्मक और सृजनात्मक पत्रकारिता के पुरोधाओं को समर्पित हैं। पुस्तकों का विमोचन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों ने किया, जो इन दिनों देश के विभिन्न मीडिया माध्यमों में कार्यरत हैं। कार्यक्रम का आयोजन सात फरवरी को भोपाल स्थित गांधी भवन में किया गया। इस मौके पर दिल्ली, छत्तीसगढ़, पंजाब, मध्यप्रदेश, झारखण्ड, बिहार और उत्तरप्रदेश सहित अन्य शहरों से आए मीडियाकर्मी, बुद्धिजीवी एवं पत्रकारिता के विद्यार्थी मौजूद थे।

लेखक एवं संपादक श्री संजय द्विवेदी लगभग दो दशक से पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा कई मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। वर्तमान में वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं। श्री द्विवेदी निरंतर लेखन और संपादन में कार्यरत हैं। उनके द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘अजातशत्रु अच्युतानंद’ का लोकार्पण संयुक्त रूप से सात पूर्व विद्यार्थियों ने किया, जिनमें आर जे अनादि (रेड एफएम, भोपाल), प्राची मजूमदार (हिंदुस्तान टाइम्स, भोपाल), राहुल चौकसे( पीपुल्स समाचार, भोपाल),पंकज कुमार साव( भास्कर डाट काम, रांची), मनीष अग्रवाल (नई दुनिया, इंदौर), हेमंत पाणिग्राही (जगदलपुर) और पंकज गुप्ता (जनजन जागरण, भोपाल) शामिल हैं।

इसी तरह दूसरी किताब ‘मीडिया, भूमण्डलीकरण और समाज’  का विमोचन सर्वश्री का लोकार्पण संयुक्त रूप से सात पूर्व विद्यार्थियों ने किया जिनमें संयुक्ता बनर्जी( भास्कर डिजिटल, भोपाल), अमित सिंह (आजतक,दिल्ली) चैतन्य चंदन ( डाउन टू अर्थ, दिल्ली),  राजीव कुमार गांधी (साधना टीवी, रायपुर), कौशल वर्मा (दिल्ली), प्रेम राम त्रिपाठी (स्टार समाचार, सतना), दीपक कुमार (बिहार पुलिस) शामिल हैं। दोनों पुस्तकें नई दिल्ली के प्रकाशक यश पब्लिकेशंस ने प्रकाशित की हैं। ‘अजातशत्रु अच्युतानंद’ पुस्तक जनसत्ता के पूर्व संपादक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अच्युतानंद मिश्र पर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। पुस्तक में विभिन्न विद्वानों के लिखे 30 आलेख शामिल हैं। सर्वश्री रामबहादुर राय, विश्वनाथ सचदेव, पद्मश्री रमेशचंद्र शाह, पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर, कैलाशचंद्र पंत, रघु ठाकुर, प्रो. बृजकिशोर कुठियाला, रमेश नैयर, डॉ. सच्चिदानंद जोशी, अभय प्रताप, संत समीर सहित कई प्रमुख लोगों ने अच्युतानंद मिश्र के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला है।

दूसरी पुस्तक ‘मीडिया, भूमण्डलीकरण और समाज’ समूची पत्रकारिता के क्षेत्र में आए बदलावों को उजागर करती हुई दिखती है। संपादक संजय द्विवेदी कहते हैं कि “भूमण्डलीकरण के बाद देश के मीडिया की स्थितियों में बहुत बदलाव आए हैं। सच कहें तो पूरी दुनिया ही बदल गई है। ऐसे में भूमण्डलीकरण के चलते विविध क्षेत्रों में पड़े प्रभावों का आकलन मीडिया प्राध्यापकों, पत्रकारों, चिंतकों और विद्वानों ने इस पुस्तक में किया है।” पुस्तक में विभिन्न विद्वानों के 34 आलेख 203 तीन पृष्ठों में समाहित हैं। डॉ. रामगोपाल सिंह, पी. साईंनाथ, अष्टभुजा शुक्ल, प्रो. कमल दीक्षित, डॉ. सुशील त्रिवेदी, आनंद प्रधान, डॉ. श्रीकांत सिंह, डॉ. वर्तिका नंदा, अनिल चमडिय़ा, डॉ. हरीश अरोड़ा, डॉ. सुभद्रा राठौर, अंकुर विजयवर्गीय, लोकेन्द्र सिंह और ऋतेश चौधरी सहित अन्य विद्वानों ने इस पुस्तक में मीडिया में आए बदलावों को रेखांकित किया है। दोनों पुस्तकें निश्चित ही पत्रकारिता से जुड़े बौद्धिक जगत और पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित होंगी।

पुस्तक परिचयः

1. अजातशत्रु अच्युतानंद, संपादकः संजय द्विवेदी,

प्रकाशकः यश पब्लिकेशंस, 1 /11848, पंचशील गार्डन, नवीन शाहदरा

दिल्ली-110032

मूल्यः 395/-   पृष्ठः144

2. मीडिया, भूमंडलीकरण और समाज, संपादकः संजय द्विवेदी,

प्रकाशकः यश पब्लिकेशंस, 1 /11848, पंचशील गार्डन, नवीन शाहदरा

दिल्ली-110032

मूल्यः 495/-   पृष्ठः207

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