आपके पत्रकार ने मेरे खिलाफ खबर प्रकाशित करने से पूर्व मेरा पक्ष क्यों नहीं लिया?

सेवा में,
समूह संपादक महोदय,
राजस्थान पत्रिका
विषय- राजस्थान पत्रिका के पत्रकार द्वारा पेड न्यूज प्रकाशित करने व जबरन धमकाने बाबत्।
महोदय,

मैं राजस्थान पत्रिका जैसे विश्वसनीय समाचार पत्र का पिछले करीब 15 सालों से नियमित पाठक रहा हूं। क्योंकि यह अखबार अब तक प्रमाणों के आधार पर खबर प्रकाशित करने के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन आज मेरे से संबंधित एक खबर प्रकाशित होने पर ऐसा महसूस हुआ कि यह भ्रम मात्र है। आपके समूह के पत्रकार पेड न्यूज प्रकाशित करने में विश्वास रख रहे है। महोदय, मैं भारतीय सेना से सेवानिवृत्त कर्मचारी हूं।

मैं आपका ध्यान राजस्थान पत्रिका कोटा संस्करण में दिनांकर 10 अक्टूबर को पृष्ठ संख्या 5 सिटीजन पर सबसे उपर की ओर ‘चुंगी नाके की जगह पर खड़ा हो गया मकान’ शीर्षक से प्रकाशित खबर की ओर दिलाना चाहूंगा। महोदय, क्या मैं जान सकता हूं कि आपके पत्रकार रणजीत सिंह सोलंकी ने इस खबर को प्रकाशित करने से पूर्व मेरा पक्ष क्यों नहीं लिया गया? इस एकतरफा खबर को किस आधार पर प्रकाशित किया गया? जबकि इस जमीन से जुड़े समस्त दस्तावेज मेरे पास सुरक्षित है।

क्या किसी भी तरह की विवादित खबर को एकतरफा प्रकाशित करना पत्रकारिता के नियमों के खिलाफ नहीं है? पत्रकार सोलंकी कोटा में बीजेपी बीट देखते हैं जबकि उन्हें आपके प्रबंधन ने ग्रामीण एडिशन का इंचार्ज बनाया हुआ है। जोकि स्थानीय भूमाफियाओं के साथ मिलकर इस तरह की खबरें प्रकाशित कर रहा है। वे काफी लंबे समय से बीजेपी बीट देख रहे हैं और अब निगम देखने लगे हैं, जहां भी बीजेपी के जनप्रतिनिधियों का बोलबाला है, जिनकी मिलीभगत से ऐसी खबरें प्रकाशित की जा रही है।

अब इस खबर की वजह से मुझे मानसिक प्रताड़ना उठानी पड़ रही है और इसके आधार पर स्थानीय निकाय यदि कोई कार्यवाही करता है तो इसका आर्थिक नुकसान भी मुझे वहन करना पड़ेगा। क्या आप इसकी भरपाई कर पाएंगे?  मैं आपके स्थानीय संपादक विजय चौधरी से मिलने गया था, लेकिन उन्होने भी त्वरित कार्रवाई करने की जगह दस्तावेज अपने पास रख लिए और खंडन प्रकाशित करने का आश्वासन दिया। जबकि आपका समाचार पत्र समूह खंडन प्रकाशित करने की नीति रखता ही नहीं है। बावजूद इसके यह आश्वासन मुझे दिया गया। अब मुझे यह बताइए कि इस एकतरफा खबर के लिए न्याय पाने के लिए मैं कहां जाउं? मैं बाहर नौकरी करता हूं और घर पर वृ़द्ध माता-पिता अकेले रहते हैं।

महोदय, मैं भारतीय सेना से सेवानिवृत्त कर्मचारी हूं। कोटा में रावतभाटा रोड़ पर गोदवरी धाम के सामने निवास करता हू। खबर में जिस चुंगी नाके शब्द का प्रयोग किया गया है, वह सर्वथा गलत है। क्योंकि चुंगी नाका तो वर्ष 1991 में सड़क के चौड़ीकरण में मर्ज हो चुका है। शेष जमीन को हमने उसके मालिक से खरीदा था। जिसके क्रय संबंधी समस्त दस्तावेज, मौका नक्शा एवं अन्य दस्तावेज हमारे पास मौजूद हैै। बावजूद इसके किस आधार पर मेरे निर्माण कार्य का फोटो प्रकाशित कर चुंगी नाके पर अतिक्रमण बताया जा रहा है?
आपसे नम्र निवेदन है कि इस मामले में आप संबंधित पत्रकार के खिलाफ कठोर कार्यवाही करते हुए समस्या का निदान कराएं जोकि इस खबर के प्रकाशित होने से पैदा हुई है। अन्यथा मुझे आपके प्रतिष्ठित समाचार पत्र के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। क्योंकि इससे मुझे काफी परेशानी हुई है।  यदि इसी तरह आपके पत्रकार पेड न्यूज प्रकाशित करते रहे और संपादक आंखें बंद कर जिम्मेदारी का निर्वहन करते रहे तो बहुत जल्द इस प्रतिष्ठित समाचार समूह की साख गिर जाएगी जिसके जिम्मेदार आपके कर्मचारी ही होंगे।

प्रार्थी

ओमप्रकाश राजपुोहित,

निवासीः गोदावरी धाम के सामने, कोटा                   

प्रतिलिपि-
संपादकः भुवनेश जैन
राज्य संपादकः हरीश पाराशर
जोनल हैडः अमित वाजपेयी

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‘राजस्थान पत्रिका’ अखबार का एक और कारनामा… ‘श्रीमती राहुल गांधी’ छाप डाला!

सीधी बात तो यह है कि ‘पत्रिका’ अखबार खुद में ब्लंडर्स का स्पेशल एडिशन है। इसी फेहरिस्त में चुरु से निकलने वाला ‘पत्रिका’ का एडिशन भी पीछे नहीं रह गया है। दरअसल 15 अगस्त के मौके पर कांग्रेस पार्टी की ओर से मिले बड़े से विज्ञापन में वहां के होनहार कर्मियों ने सोनिया गांधी के साथ राहुल गांधी को भी “श्रीमती” लगाकर बड़े में छाप दिया। अब पत्रिका या कोठारी जी को गलतियां भूलकर आगे बढ़ने की आदत होगी लेकिन उनका क्या, जिनको लगता है कि गलतियां सबक लेने के लिए होती हैं, न कि एक लेवल ऊपर होकर फिर से करने की चीज।

इसके पहले भी पत्रिका ने “उल्टा तिरंगा” पकड़ी युवती को बड़े में छापकर देशभक्ति की मिसाल दी थी। और तो और, छत्तीसगढ़ वालों ने तो फुल पेज विज्ञापन में CM रमन सिंह को PM रमन सिंह बताकर छाप दिया था। तो भई ऐसा है कि किसी कार्यक्रम में माइक मिलने के बाद ज्ञान देना या खुद से खुद को महान बताने का काम कोई भी कर सकता है। अगर आपका वजूद मीडिया क्षेत्र से है तो नमूना से आगे बढ़कर ब्रांड बनने पर जोर लगाइये।

आशीष चौकसे
ब्लागर और पत्रकार
ashishchouksey0019@gmail.com

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‘समाचार प्लस’ चैनल का दिवालियापन : अमित शाह की रैली में मुलायम सिंह यादव को पहुंचा दिया!

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड केंद्रित रीजनल न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ की कोई क्रेडिबिल्टी नहीं रह गई है. यह ओछी और घटिया पत्रकारिता पर उतर आया है. ऐसी ऐसी खबरें यह चैनल दिखा रहा है कि लोग माथा पकड़ ले रहे हैं. इस चैनल ने अपने यहां लिख दिया कि अमित शाह की रैली में मुलायम सिंह यादव पहुंच गए. बताइए भला, क्या यह संभव है कि भाजपा नेता अमित शाह की रैली में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव पहुंच जाएं?

पिछले दिनों अमित शाह जब भाजपा की इटावा रैली में शामिल होने के लिए रैली स्थल नुमाइश पंडाल पहुंचे तो समाचार प्लस चैनल ने ब्रेकिंग न्यूज चलाया और यह भी लिखा कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव भी हुए शामिल. यकीन न आ रहा हो तो देखिए ये वीडियो : https://youtu.be/fkybMjoD6W8

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित.

इसे भी सुनें :

Ufff इतना घटिया कोई कैसे बोल सकता है अपने शहीद जवानों के बारे में!

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Blunder by HT : Mitali is not the only women gallantry awardee…

Dear Mr Singh,

Hope you doing well!

This mail is in regards to the misinterpretation of facts by HT which has defamed an army officer (Capt CR Leena) from being the first Indian lady to get a gallantry award in the Indian Army.

I came to know about this blunder by HT when i met Major Sanjay Dhadhwal, office manager for an MNC in India and also  defamed officer’s husband. He showed me the article written by Bhadra Sinha of Hindustan times on oct 16th 2015 stating “Lt Col Mitali Madhumita is the Army’s only woman gallantry awardee in the country”.  If going according to facts she is not the only women gallantry awardee in our country in-fact she is second to Capt (Miss)C R Leena.

Mails have been already sent to HT and also to the journalist seeking corrigendum but they are not replying back. I would be highly obliged if you can be of any help in this matter.

I am attaching with mails the link of the article by HT and some facts, which proves that Capt C R Leena was felicitated with the award before Lt Col Mitali.

Hope you will be help the officer in getting back her pride.

Thanks and Regards,

Darshan Pandey

dp1495@gmail.com

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शर्मनाक : गायकी के उस्ताद अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन को दैनिक जागरण ने पाकिस्तानी फ़नकार बताया!

शर्म से डूब मरने की बात है। हिंदी के सबसे बड़े अख़बार होने का दावा करने वाले दैनिक जागरण ने जयपुर की माटी में खिलकर, गायकी के उस्ताद बने अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन को पाकिस्तानी फ़नकार बताया है। यह हाल है पराड़कर जी के शहर वाराणसी की पत्रकारिता का। नाक़ाबिले माफ़ी यह है ग़लती, क्योंकि सवाल किसी वर्तनीदोष या छपाई का नहीं है..इन उस्ताद भाइयों के परिचय में कुछ जोड़ा गया है यानी संपादनकला का परिचय दिया गया है…!

वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं>

Latif Kirmani पंकज जी, दरअसल आजकल के कथित बड़े अख़बारों के बड़े पत्रकार भारतीय मुसलमान नेताओं और कलाकारों के नाम और परिचय से वाकिफ नहीं है या होना नहीं चाहते। नवभारत टाइम्स जैसे अख़बार में जब जामा मस्जिद के शाही इमाम अब्दुल्लाह बुखारी के देहांत की खबर छपी तो तस्वीर उनके बेटे अहमद बुखारी की लगा दी थी बाद में सहयोगी अखबार सांध्य टाइम्स में गलती के लिए खेद प्रकट किया गया। इसी तरह और भी उदाहरण है। जबसे ग़ुलाम अली का शो रद्द हुआ है तबसे पत्रकारों के दिमाग़ में हर मुसलमान फनकार पाकिस्तानी नज़र आता है…भाई हिंदी के पत्रकारों से अनुरोध करूँगा कि वो मुस्लिम फनकारों और नेताओं के बारें में जानकारी के लिए भी अध्ययन कर लिया करें…

Bhim Prakash जब मैंने पहली दफा इनकी ग़जल सुनी तो लगा ये एक ही गा रहे हैं फिर पता चला कि ये तो दो गा रहे हैं।कमाल की ताजगी है इनकी गायकी में।जो इनकी भारतीयता पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगा रहे हैं वो सबसे पहले खुद को जान लें फिर दूसरों से कहें।

Abdulwali Shabi इनको हर मुसलमान पाकिस्तानी नज़र आता है.

Aziz Waqaar Khan और आज तीन दिन हो गए इन्होंने अभी तक माफ़ी नही मांगी ।।

Prafulla Prabhakar जागरण के सम्पादक शायद उत्तर प्रदेश से बाहर की कोई जानकारी नहीं रखते….

Jawed Mohd इनको हर मुसलमान पाकिस्तानी नज़र आता है.

Tanweer Farooque यह आजकी नई युग की पत्रकारिता है जहाँ खबर कि गहराई से दुर दुर तक का कोई वास्ता नही है बस छापते जाओ। और इस देश को बाँटते जाओ।

Uttam Singh पत्रकारिता का स्तर दिनों दिन गिरता जा रहा है चाहे वह प्रिन्ट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया. कमरे में बैठ कर पत्रकारिता की जायेगी तो यही तो मिलेगा. जनाब, यह तो ग़नीमत है, ये लोग तो ये भी लिख सकते थे कि दो ‘पाक आतंकवादी’ ग़ज़ल भी गाते हैं.

Sayed Wajih Ul Haque हम तो दैनिक जागरण की मानसिकता को रोज़ झेलते हैं , कुत्सित मानसिकता के साथ पत्रकारिता होती है।

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