जिस पत्रकार ने देह व्यापार का खुलासा किया, दैनिक जागरण ने उसे ब्लैकमेलर बता दिया… पीड़ित ने भेजा लीगल नोटिस

Ranjeet Yadav : मित्रों दैनिक जागरण के प्रधान संपादक / स्थानीय संपादक को मैंने लीगल नोटिस भेज दिया है. 15 दिनों के अंदर गलत ख़बर पर खेद प्रकाशित नही करेंगे तो मानहानि का मामला कोर्ट में किया जाएगा. गोरखपुर में बीते दिनों मैंने एक देह व्यापार को लेकर पोस्ट डाली थी. उस प्रकरण को मैंने बड़ी गंभीरता से उठाया था जिसे गोरखपुर पुलिस ने संज्ञान में लेते हुए कार्यवाही की और सभी अखबारों ने इस प्रकरण पर खबर लिखी. किन्तु दैनिक जागरण ने अपने खबर में मुझे ही ब्लैकमेलर बना दिया. उनकी खबर में क्या लिखा गया है, मैं बताता हूँ. साथ ही, मेरे मन मे उठे सवालों को भी आप जानिए.

(1) अखबार लिखता है कि सोशल नेटवर्क पर ये प्रकरण कई दिनों से चल रहा था।

-लेखक साहब, आखिर चल रहा था तो आपने संज्ञान में लेकर ख़बर क्यों नहीं लिखी… डेली अखबार है आपका.. समाज को जागरूक करने का दायित्व बनता है…

(2) अखबार ने लिखा है कि वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया गया।

-आखिर वीडियो जब हमने डाली ही नहीं तो आपने कहाँ से वीडियो का जिक्र किया… अगर वीडियो डाली गई तो कब, कहाँ कैसे देखी आपने.. सोशल नेटवर्क की लिंक का जिक्रक्यों नहीं किया… उसी आधार पर ब्लैकमेलर से बात करनी चाहिए थी…

(3) ख़बर में लिखा गया है कि होटल के कर्मचारी ने बताया कि वे हमें ब्लैकमेल कर रहे थे।

-भाई आपसे एक अपराधी कहता है कि वीडियो बनाने वाले ने हमें ब्लैकमेल करने का प्रयास किया तो आपने जरूर ब्लैकमेल करने वाले के खिलाफ पुख्ता सबूत लिए होंगे.. फिर आपने उन सबूतों का जिक्र अपने ख़बर में क्यों नहीं किया।

(4) अखबार ने निर्णय कर दिया कि ब्लेकमेलर पोस्ट डालने वाला ही है…

-भाई तब भी आपको मेरा पक्ष लेना बनता है… आपने एक पक्ष की ही ख़बर क्यों लिखी जबकि आप लिख रहे हैं कि मामला कई दिनों से सोशल मीडिया पर चल रहा है.. तब तो आपको मेरे बारे में विधिवत जानकारी थी क्योंकि लगातार आप मेरी पोस्ट को वाच कर रहे थे।

सबसे बड़ा सवाल —

मित्रों, पुलिस चौकी महज 200 मीटर की दूरी पर है और अखबारों ने पुलिस की कार्य प्रणाली पर अंगुली उठाई… फिर आपके अख़बार के कालम से ये विशेष हिस्सा कैसे छूट गया और जो खबर का हिस्सा ही नहीं बना। मेरे जैसे व्यक्ति ने जान जोखिम में डाल कर इतना बड़ा रिस्क इस शहर के परिवारों के लिए उठाया, फिर आपके अखबार में मेरे लिए स्थान क्यों नहीं? मित्रों ये सब प्लानिंग कर मुझे बदनाम करके होटल मालिकों के हृदय में स्थान बनाने का एक प्रयास था? हो भी सकता है कि इस संस्थान के ज़िम्मेदारों द्वारा मेरे खिलाफ कोई बड़ा षड्यंत्र रच कर फंसाया जाए या फिर हत्या भी कराई जा सकती है… जैसा कि प्रतीत होता है.. अगर कभी कोई अप्रिय घटना मेरे साथ होती है तो इसके प्रथम जिम्मेदार यह अखबार होगा.. उसके बाद कोई अन्य होगा.. इस पूरे प्रकरण के गवाह आप सभी हैं।

गोरखपुर के युवा पत्रकार रंजीत यादव की एफबी वॉल से.

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शशि शेखर जी, आपके अखबार ने ‘इंसाफ इंडिया’ संग जो नाइंसाफी की है, क्या उसकी भरपाई करेंगे?

‘इंसाफ इंडिया’ एक समाजिक न्याय पर काम करने वाला संगठन है. लेकिन दैनिक हिन्दस्तान अखबार ने इसे सिमी की तर्ज पर उभरता हुआ संगठन बता कर लंबा चौड़ा आर्टकिल छाप दिया. इस संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि हिंदुस्तान अखबार ने खबर में संगठन पर कई गंभीर, मंगढ़त और बेबुनियाद आरोप लगाए हैं. इसके चलते अखबार प्रबंधन को लीगल नोटिस भेजा गया है.

संगठन से जुड़े मुस्तकीम सिद्दीकी बताते हैं-

”इंसाफ इन्डिया अधिकारिक रूप से 14/10/2016 को बनी. कम समय में ही स्वार्थरहित एवं निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने इसे दरवाजे-दरवाजे तक न्याय, अधिकार, मानवता एवं समानता के लिए काम करने वाले संगठन के रूप में स्थापित किया. झारखंड राज्य के कई ज़िलों में आज इंसाफ इन्डिया को एक बड़ा बदलाव लाने वाले संगठन / मुहिम के तौर पर देखा जा रहा है. इंसाफ इन्डिया ने कई मुद्दे उठाए. धर्म, जाति एवं समुदाय से ऊपर उठकर आवाजें बुलंद की. यह मुहिम हर उस परिवार, समुदाय, जाति एवं धर्म के लोगों के साथ है जो किसी भी तरह के अत्याचार, अन्याय एवं जुल्म के शिकार हो रहे हैं. इंसाफ इन्डिया किसी भी धार्मिक या राजनीतिक संगठन द्वारा समर्थित या प्रायोजित मुहिम नहीं है. यह देश के हर आम नागरिक का, आम नागरिक द्वारा, आम नागरिक के लिये एक मुहिम है. इंसाफ इंडिया ने पिछले कुछ दिनों में बिहार, झारखण्ड व पश्चिम बंगाल में दलितों-अल्पसंख्यकों व महिलाओं के हिंसा-उत्पीड़न व बलात्कार की घटनाओं को अहिंसक-लोकतांत्रिक तरीके से उठाने का काम किया है. सांकृतिक राजधानी देवघर की 5 साल की नन्ही कुमारी का अपहरण, बलात्कार एवं हत्या का मामला हो या अमेठी की 17 साल की सरिता मौर्या का अपहरण, ब्लातकार एवं हत्या, चाहे गिरीडिह के 20 साल के राजकुमार हेंबरम की पुलिस लापरवाही से मौत या कोडरमा के 52 साल के प्रदीप चौधरी की पुलिस द्वारा हत्या, इंसाफ इंडिया ने मुखर होकर इन सभी मामलों में आवाज उठाई है. बिहार के नवादा में रामनवमी के वक्त बीजेपी सांसद-केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के इशारे पर भगवा गुंडों व पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से की गई साम्प्रदायिक हिंसा और बिहार-झारखण्ड के दर्जनों जगहों पर हुई इस किस्म की घटनाओं के खिलाफ इंसाफ इंडिया के संयोजक मुखर रहे हैं. हाल के दिनों में जारी मॉब लिचिंग व साम्प्रदायिक आधार पर नफरत फैलाये जाने के खिलाफ भी इंसाफ इंडिया सक्रिय रहा है. यही सब सक्रियता ही इस संगठन का गुनाह बन गया है. गौ-आतंकियों और साम्प्रदायिक नफरत-हिंसा के सौदागरों को खुली छूट देने वाली सत्ता और इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से इंसाफ की आवाज बुलन्द करने वालों को आतंकी बताया जाना इस देश के लोकतंत्र का दुर्भाग्य है.”

इंसाफ इंडिया के पदाधिकारी मुस्तकीम सिद्दीकी हिंदुस्तान अखबार के झारखंड के संपादकों / रिपोर्टरों से पूछते हैं कि आखिर वे किस आधार पर सिमी के समानांतर इंसाफ इंडिया को खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. कोई एक गतिविधि बताएं जिससे इंडिया इंडिया के क्रियाकलाप को संदिग्ध गतिविधी के रूप में दर्ज किया जा सके. इस संगठन ने कौन-सा सरकार विरोधी किया कार्य किया है? सांप्रदायिक तौर पर भड़काने का कोई एक उदाहरण दें हिंदुस्तान अखबार के संपादक और रिपोर्टर. इंसाफ इंडिया ने मुस्लिम एकता मंच का साथ कब और कैसे दिया, कोई एक सबूत पेश करें. 24 परगना का दौरा क्या कोई समाजिक संगठन नहीं कर सकता, यहां दौरा करने पर प्रतिबंध का उल्लेख कहां लिखा है? 17 जुलाई को बिहार के नालंदा में इंसाफ इंडिया की कोई सभी नहीं थी. पुलिस के साथ कभी भी या कहीं भी संगठन के लोग नही भिड़े हैं. अगर भिड़े होते तो संगठन के लोगों पर एफआईआर दर्ज होती. इन सारे सवालों का जवाब हिंदुस्तान अखबार को देना चाहिए अन्यथा उन्हें पहले पन्ने पर उतना ही बड़ा माफीनामा छाप कर माफी मांगनी चाहिए जितना बड़ा उन्होंने इंसाफ इंडिया को बदनाम करने के लिए प्रकाशित किया है.

आखिर में मुस्तकीम कहते हैं-

”मेरा सवाल हिंदुस्तान अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर जी से है कि आपके अखबार ने जो नाइंसाफी ‘इंसाफ इंडिया’ संगठन के साथ की है, क्या आप उसकी भरपाई कर सकेंगे? क्या दोषी संपादकों और रिपोर्टरों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? क्या माफीनामा छाप कर इंसाफ इंडिया के दिल पर लगे घाव-दाग को धोने-खत्म करने की कोशिश करेंगे?”

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खबर छपने पर पश्चिम बंगाल के सांसद ने रिपोर्टर को भेजा नोटिस

द संडे गार्जियन के संवाददाता कुंदन झा ने एक खबर का प्रकाशन किया. इसके बाद पश्चिम बंगाल के सांसद अभिषेक बनर्जी ने रिपोर्टर को धमकाया कि वो उसके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा करेंगे. अपने कहे पर अमल करते हुए सांसद ने अखबार और रिपोर्टर को कानूनी नोटिस भी भेज दिया है. कुंदन झा का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर की गई खोजबीन और मिली जानकारियों के आधार पर खबर का प्रकाशन किया. पर सांसद ने जिस तरीके से उन्हें धमकाया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है.

नीचे है सांसद द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस की प्रति…

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‘गौ आतंकी’ शीर्षक से कार्यक्रम प्रसारित करने पर इंडिया टुडे ग्रुप को विहिप ने लीगल नोटिस भिजवाया

विश्व हिंदू परिषद ने इंडिया टुडे ग्रुप को एक लीगल नोटिस भिजवाया है. यह नोटिस ‘गौ आतंकी’ नाम से एक कार्यक्रम ‘इंडिया टुडे’ पर प्रसारित करने को लेकर था. लीगल नोटिस में कहा गया है कि इस कार्यक्रम के जरिए विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा बजरंग दल की छवि को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया गया है. लीगल नोटिस की एक कापी सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भी भेज दिया गया है.

लीगल नोटिस की एक प्रति भड़ास के पास भी है, जिसे नीचे दिया जा रहा है….

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चर्चित मैग्जीन ‘इकनामिक एंड पोलिटिकल वीकली’ को गौतम अडानी की तरफ से भिजवाया गया लीगल नोटिस

इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली यानि ईपीडब्ल्यू मैग्जीन के संपादक जाने माने पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता हैं. ईपीडब्ल्यू पत्रिका में 17 जून के अंक में एक स्‍टोरी केंद्र सरकार के वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय के खिलाफ छपी. इसमें मंत्रालय द्वारा नियम कायदे बदलकर अडानी समूह को फायदा पहुंचाने के बारे में विस्तार से बताया गया. Continue reading

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इनाडु डिजिटल के एमडी, जीएम, एचआर और डेस्क इंचार्ज को लीगल नोटिस

सेवा में

१. श्रीमान मैनेजिंग डायरेक्टर
किरन राव

२. श्रीमान जनरल मैनेजर
प्रसनजीत राय

३. श्रीमान डेस्क इंचार्ज
अजीज अहमद खान

५. श्रीमान एग्जीक्यूटिव एचआर​
मुरलीधर बंदारू

एसपी २ बिल्डिंग, फोर्थ फ्लोर
हिंदी डेस्क​, ईनाडु डिजिटल
रामोजी फिल्म सिटी
हैदराबाद
तेलंगाना
५०१५१२

मैं अधिवक्ता मेहुल पी गोंडलिया बीए एलएलबी​ निवासी गांव भेंकरा में तहसील सावरकुंडला जिला अमरेली के और मेरे मुवक्किल भट्टी ज़हीर रुस्तमभाई निवासी ४७, लीमडी चोक, तलीनाका तहसील सावरकुंडला कि सूचना और फरमाइश के मुताबिक उक्त चारों लोगों को नोटिस देकर सूचीत किया जा रहा है कि लीगल नोटिस में मेरे मुवक्किल को काम न करने देने, मानसिक अवसाद, मानसिक प्रताड़ना, मानहानि करने के बिंदु पर प्रकाश डालेंगे…

१. आप चारों पक्षकार ईनाडु डिजिटल नाम की प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है। और आप उस कंपनी में न्यूज़ और एडवर्टाइजमेंट जैसे काम​ कर रहे हैं। इस प्राइवेट कंपनी को जरुरत पड़ने पर वैसे कर्मचारियों की भर्ती भी करते हैं, जो आपके लायक हैं।

२. मेरे मुवक्किल गुजरात राज्य के अमरेली जिले के सावरकुंडला तहसील का निवासी है। वे नौकरी की तलाश में आपकी कंपनी में आए और आपकी कंपनी में आपने उनको दिनांक ०१ / ११ / २०१६ के दिन हिंदी डेस्क में कंटेंट एडिटर और सोशल मीडिया के पद पर नियुक्त किया। कंपनी की ओर से हमारे मुवक्किल को मासिक १९०८८ रुपये दिए जा रहे हैैं।

३. मेरे मुवक्किल को आपकी कंपनी में जिस पद पर नियुक्त किया गया है, वे उस पद पर पूरी निष्ठा के साथ प्रमाणिकता से काम करते थे। उसके अलावा संस्थान के हीत में जो भी कार्य था वो भी उन्होंने अच्छे से किया। उसके अलावा मेरे मुवक्किल का कोई कार्य नहीं था वे भी ईमानदारी से किया मेरे मुवक्किल कंपनी के समयानुसार ओवरटाइम भी करके कंपनी का नाम और इमेज पर आंच न आए इसलिए दिन रात काम करते रहे।

४. बावजूद दिनांक ०७/०५/२०१७ के दिन मेरे मुवक्किल डी१ शिफ्ट में काम कर रहे थे। उस दिन कई सहकर्मियों का साप्ताहिक अवकाश होता है। मैनेजमेंट की गाइडलाइंस पर हमेशा हमारे मुवक्किल सिखाए गए कार्य अनुसार काम करते हैं। लेकिन उसी दिन मनोरंजन और फिचर न्युज की खबरें फेसबुक के सभी स्टेट पेज पर शेयर होनी है इस बात की जानकारी न तो शिफ्ट इंचार्ज, डेस्क इंचार्ज,जनरल मैनेजर ने बताई। जिस कारण वह कार्य नहीं हो सका। डेस्क के बीच कम्युनिकेशन गैप के कारण वह सूचना मुझ तक नहीं पहुंच पाई। जिस सूचना को आपने मेरे मुवक्किल को बताया ही नहीं वो काम करने का उनको कैसे पता चलेगा? ऐसी परिस्थितियों​ में हमारे मुवक्किल के बेस्ट काम करने के बावजूद उनके काम कि कंपनी के किसी भी कर्मीने दरकार नहीं की। उल्टा उसी दिन करीब ३:३० या ४:३० बजे हिंदी डेस्क के लैंडलाइन पर जनरल मैनेजर​ प्रसनजीत राय का फोन आता है और हमारे मुवक्किल को अमर्यादित शब्द सुनाएं, और कहा कि नहीं कर सकते हो घर चले जाओ। उनके इस व्यवहार से मेरे मुवक्किल कि मानहानि हुई और मानसिक प्रताड़ित​ करनेेे के कारण वे गहरेेे मानसिक अवसाद में चले गए हैं। जबकि मेरे मुवक्किल का कोई दोष नहीं था।

५. इससे पहले भी मेरे मुवक्किल के साथ कई बार प्रसनजीत रोय और अज़ीज़ अहमद खान बेअदबी कि है, लेकिन उन्होंने उस समय नजरअंदाज कीया। उस समय से ही मेरे मुवक्किल कि मानसिक स्थिति खराब हो न लगी। जिससे उसका पूरा परिवार तनाव में है। आप किसी को काम करने के लिए नियुक्त करते हैं या ज़लील करने के लिए रखते हैं?

६.मेरे मुवक्किल को काम नहीं करने दिया जा रहा। उनका CMS भी षड्यंत्र कर बंद कर दिया गया जिसका स्क्रीन शॉट उनके मेल पर उपलब्ध है

७. आपने मेरे मुवक्किल कि मानहानि क्यों​ की?

८. इस पूरे घटनाक्रम​ के बाद मेरे मुवक्किल मानसिक रुप से गहरे सदमे में है। और सोच रहे हैं कि मेरा कोई दोष नहीं होने के कारण ऐसा क्यों हुआ? सदर इस बाबत मेरे मुवक्किल​ मानसिक रुप से टूट चुके हैं। इस कारण उन्होंने एग्जीक्यूटिव एचआर और ग्रुप एडिटर को लिखित में सूचित किया और सुझाव मांगा कि मेरा​ क्या दोष है। मेरे साथ इस तरह का बर्ताव क्यों किया जा रहा है। तो एचआर ने मुझे नौकरी से निकाल दिया। हमारे मुवक्किल ने कहा कि मेरी कोई गलती है तो इस संबंध में मुझे कुछ कहने का मौका दीजिए। लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ और हमारे मुवक्किल का आईकार्ड जबरन ले लिया गया और इस्तीफा देने के लिए मानसिक दबाव देने लगे।

९. इस संबंध में मेरे मुवक्किल ने चेयरमेन, मैनेजिंग डायरेक्टर, एचआर वाइस प्रेसिडेंट तक को चिट्ठी लिखी हैं। लेकिन किसी ने अब तक उनके वाजिब सवालोंं का प्रत्युत्तर देने की​ जहमत नहींं उठाई हैं। पूरा मैनेजमेंट एकतरफा होकर काम कर रहा है।

१०. मानहानि, काम न करने देना, जनरल मैनेजर डेस्क इंचार्ज, एचआर का तानाशाही भरा रवैया इस संस्थान के लोगों कि विशेषता है!

११. इसके अलावा भी मुझे एक दो तरह से डेस्क इंचार्ज के साथ-साथ मैनेजमेंट द्वारा प्रताड़ित कीया गया। जिस संबंध में मैं आने वाले समय में उचित अथॉरिटी से संपर्क करने जा रहा हूं।

१२. इस घटना के कारण मेरे मुवक्किल मानसिक रुप से खूब पीड़ित, तनाव में हैं। मेरे मुवक्किल को आपने अपनी कंपनी में रखा लेकिन किसी के गलतफहमी के कारण आपने उनको निकाल दिया। परंतु हकीकत में मेरे मुवक्किल का कोई दोष नहीं है। आपने समस्या का निवारण किए बिना ही यह कदम उठा लिया है। जिस कारण हमारे मुवक्किल मानसिक रूप से अस्वस्थ है।
 

१३. आपने हमारे​ मुवक्किल को जब नौकरी से निलंबित किया तब आपके द्वारा लिखित मैं कोई जाानकारी​ नहीं दी गई। और न ही नियम के तहत कार्रवाई हुई। जब आपने काम पर रखा तो कंपनी द्वारा उनको एक कंफर्मेशन लेटर देकर नौकरी में रखा। आज दिन तक उनको टर्मिनेशन लेटर नहीं दिया है। जिसका मतलब है कि हमारे मुवक्किल को षड्यंत्र से आपकी कंपनी से निलंबित कर दिया है। उनका अपराध क्या है? और न ही ऐसा कोई कारण कि आप उसे निकाल दें। यह एक मात्र हमारे मुवक्किल के प्रति आपका और अपने कर्मचारियों का पूर्वाग्रह और षड्यंत्र है​। मेरे मुवक्किल का आप मानसिक शोषण करना चाहते हैं।

१४. मेरे मुवक्किल से आईकार्ड ले लेने के लिए इन लोगों ने दूर-दूर से गार्ड को भी बुलवा लिया था अगर वे आईकार्ड नहीं देते तो यह लोग उनके​ साथ मारपीट भी कर सकते थे। डर के मारे मुवक्किल ने आईकार्ड दे दिया और मुश्किल से वहां से भाग निकले। क्योंकि अगर वे ऐसा नहीं करते तो यह लोग उनके साथ कुछ भी कर सकते थे।

१५. १०/५/१७ को ये लोग मेरे मुवक्किल को बार-बार खोज रहे थे। चूंकि ऑफिस शहर से दूर ऐसी जगह लोकेटेड है कि वे पुलिस को भी इन्फॉर्म भी नहीं कर सकते थे। आप किसी को काम करने के लिए रखते हैं या बंधक बनाने?

१६. मेरे​ मुवक्किल को इस बात का खेद है कि ईनाडु भी बाकी संस्थानों की तरह उस रास्ते चल पड़ा है।

१७. ऑफिस में किस तरीके की तानाशाही फैली है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि आप फोन पर बात नहीं कर सकते, डेस्क पर किसी मिल नहीं सकते, वॉटररूम में नहीं जा सकते, नाश्ता करके १० मिनट में लौटना शामिल है।

१८. बार-बार मेरे मुवक्किल को एक्सट्रा रुकने के लिए धमकाया जाता था। प्रताड़ना के ५०० तरीके​ होते हैं। इनमें से ये भी उनका तरीका है।

१९. किसी भी कर्मचारी को कैसे प्रताड़ित करना है ? ये सीखना है तो कोई ईनाडु से सीख सकता है!

२०. लगातार कई लोगों के साथ इनका व्यवहार ऐसा ही रहा है। जिसमें सीनियर से लेकर जूनियर तक शामिल है। मेरे मुवक्किल तो आत्म सम्मान के साथ जीने वाले हैं, जिस कारण वह गहरे मानसिक अवसाद में चले गए हैं।

२१. आपको आगाह किया जाता है कि क्यों ना आपको खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूं?

२२. कर्मचारियों की शिफ्ट भी इस तरीके से लगाई जाती है जिससे वे बीमार पड़े। इसके चलते एक कर्मी की मौत भी हो चुकी है।

२३. एचआर के लोग कातिलाना तरीके से मुझसे आईकार्ड मांगते हैं। इसके दो दिन बाद एचआर अनुराग कौशिक मेरे मुवक्किल को रिजाइन न देने की बात करते हैं। मेरे मुवक्किल से मुरलीधर​ बंदारु ने रिजाइन मांगा। बताइए आखिर किस तरह का षड्यंत्र किया जा रहा है। इस संबंध में जरूरी चीजें मैं आपके सामने रख सकता हूं।

२४.मुवक्किल ने बताया कि ये लोग मानसिक दबाव देकर उनके पर्सनल ईमेल और पर्सनल facebook का भी ऑफिसियल​ इस्तेमाल करवाते हैं। बता दें कि कायदे से हर संस्थान में हर व्यक्ति का ऑफिसियल मेल बनता है।

२५. बार-बार डेस्क इंचार्ज किसी की पर्सनल लाइफ में हस्तक्षेप करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं! उनको यह अधिकार किसने दिया?

२६. डेस्क इंचार्ज पीठ पीछे सिनीयर-जूनियरों को अपशब्द बोलते हैं।

२७. भारत लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन यहां कुछ ऐसी भी चीजें हैं जिससे मुझे प्रताड़ित किया गया है। मैं संबंध  में पता कर रहा हूं कि क्या वाकई आपके ऑफिस में ऐसा माहौल व्याप्त हैं?

२८. यह बात सच है कि md ऑफिस में कम आते हैं। लेकिन यह सारे काम करवाने की जिम्मेदारी इन 2-4 लोगों​ की ही है जिसका ये गलत फायदा उठाते है।

२९. कुल मिलाकर आपकी ऑफिस में काम करना का माहोल नहीं है। लोगों​ को बेइज्जत करते हैं, अपशब्द बोलते हैं, ज़लील करते हैं। जबकि गलती आपकी होती है। मैं अपना मानसिक संतुलन खो रहा हूं।

३०. उक्त तमाम बाबत को लेकर मेरे मुवक्किल गहरे​ मानसिक अवसाद में हैं। उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके ऊपर घर की तमाम जिम्मेदारियां होने के कारण आप उन्हें बिना कारण निलंबित​ कर देंगे तो मेरे मुवक्किल कोई गलत कदम उठा लेते हैैं, तो उसकी तमाम जिम्मेदारियां आपके सिरे रहेंगी। मेरे मुवक्किल​ को आपने​ बिना कारण अपनी कंपनी में से निलंबित कर दिया है, जिससे मुवक्किल का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और बीमार है। अगर उसको कुछ भी हुआ तो तमाम तरह की जवाबदेही आपकी रहेगी। मेरे मुवक्किल को पहले की तरह बाइज्जत मान मरतबा लौटा कर गहरे अवसाद में से निकाल स्वस्थ करें। अगर आप ऐसे न करने में कसूरवार पाए गए तो सारी जवाबदेही आपकी रहेगी।

आपको आखिरी नोटिस देकर चेतावनी दि जा रही है कि नोटिस मिलने के तीस दिन में आप हमारे मुवक्किल को आप उनके समाधान हेतुु न्यायसंगत एवं न्यायोचित कारवाई करें। और आज दिन तक का हर्जाना सुपरत करें। अगर ऐसा न करने में कसूरवार पाए गए और आप को दि गई मुद्दत गुजर जाने के बाद मेरे मुवक्किल आपके विरुद्ध फौजदारी​ एवं दीवानी कोर्ट में क्रिमिनल केस दायर करनेे की कार्रवाई हाथ धरेंगे। अगर ऐसा होगा तो उसका तमाम खर्च और परिणाम कि जिम्मेदारी आपके सिरे रहेगी, जिससे इस नोटिस को गंभीरता से लें।

यह नोटिस आपके कसूर के कारण देनी पड़ी है। नोटिस का खर्च आपके सिरे रहेगा।

सावरकुंडला
दिनांक

मेरे मुवक्किल की सूचना और माहिती के आधार पर

एमपी गोंडलिया
(अधिवक्ता)

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लड़की के साथ फोटो छापने पर नवाजुद्दीन सिद्दकी ने फिल्मफेयर मैग्जीन पर मुकदमा कर दिया

चर्चित युवा एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फिल्मफेयर मैग्जीन पर मुकदमा करने की तैयारी कर ली है. इसके तहत सबसे पहले मैग्जीन को लीगल नोटिस भेज दिया गया है. फिल्मफेयर मैग्जीन के इसी महीने के शुरुआती हफ्ते वाले अंक में प्रकाशित एक आर्टकिल में नवाज की एक लड़की के साथ दिखाया गया और लिखा गया है कि वे इस लड़की के साथ डेट कर रहे हैं.

नवाजुद्दीन ने अपने नोटिस में कहा है कि फिल्मफेयर की तरफ से उनके बारे में झूठी, अपुष्ट, भ्रामक और बेहूदा लेख को छापा गया है. इस लेख के कारण उन्हें मानसिक पीड़ा और आघात से गुजरना पड़ रहा है. नवाजुद्दीन ने फिल्मफेयर मैगजीन को सात दिन में माफी मांगने और खंडन छापने को कहा है.

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