प्रिंट सहकर्मियों के संरक्षक और यारों के यार शेखर त्रिपाठी की आखिरी यात्रा की कुछ तस्वीरें स्मृतिशेष : प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया के धुरंधर खिलाड़ी शशांक शेखर त्रिपाठी नहीं रहे। यह बार बार कहने, सुनने, फोटो देखने पर भी... December 28, 2017
सुख-दुख जिंदादिल और जांबाज संपादक थे शशांक शेखर मौत तो प्रकृति का नियम है। विधि-विधान है। हर एक को इससे गुजरना है। लेकिन कुछ मौतें ऐसी होती हैं, जो भुलाए नहीं भूलतीं।... December 28, 2017
सुख-दुख हमारे कमांडर शेखर त्रिपाठी कहां रुकने वाले थे… ‘शिखर तक चलो, मेरे साथ चलो।’ यह सोच थी वरिष्ठ पत्रकार शशांक शेखर त्रिपाठी जी की। सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों के लिए वह... December 28, 2017