तहलका हिंदी से संपादक बृजेश समेत कई पत्रकारों का सामूहिक इस्तीफा, अब अमित प्रकाश देखेंगे काम

बुरे दौर से गुजर रही तहलका हिंदी पत्रिका से सूचना है कि कई लोगों ने इस्तीफा दे दिया है. तरुण तेजपाल सेक्स स्कैंडल के बाद से ही तहलका समूह के बुरे दिन शुरू हो गए थे और अब तक जारी है. पता चला है कि तहलका हिंदी से कार्यकारी संपादक बृजेश सिंह, प्रशांत वर्मा, मीनाक्षी तिवारी, अमित सिंह, कृष्णकांत, दीपक गोस्वामी आदि ने इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे का कारण सेलरी संकट बताया जा रहा है.

बृजेश सिंह और अन्य सभी पत्रकारों ने अपना सामूहिक इस्तीफा प्रबंधन को सौंपते हुए एक मेल भी भेजा है जिसमें सेलरी संकट समेत कई मामलों का जिक्र किया गया है. तहलका हिंदी के संपादक संजय दुबे के जाने के बाद अतुल चौरसिया को तहलका हिंदी का कार्यकारी सम्पादक बनाया गया था. अतुल चौरसिया ने इस्तीफा दिया तो बृजेश सिंह तहलका हिंदी के कार्यकारी संपादक बनाए गए. अब बृजेश सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया है. जानकारी के मुताबिक तहलका मैनेजमेन्ट ने पत्रकार अमित प्रकाश सिंह को तहलका हिंदी पत्रिका का डिप्टी एडिटर बनाया है.

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पता होता तो लेख देने से पहले मैं ‘तहलका’ का पंचनामा कर डालता

कुछ माह पहले एक केस के सिलसिले में पत्रकारों के कानूनी अधिकार पर अधिवक्‍ता कोलिन गोंजाल्विस के एनजीओ एचआरएलएन में बैठक हुई। बैठक में मीडिया और पत्रकारों की आज़ादी व कानून पर एक राष्‍ट्रीय सेमिनार की परिकल्‍पना बनी। एक संगठन बनाने का आइडिया आया। दो दिन का वह प्रस्‍तावित राष्‍ट्रीय सेमिनार गत दिवस ही खत्‍म हुआ। रायसीना के जंगल में मोर नाच लिया। किसी ने नहीं देखा। जिन्‍होंने देखा, उनमें इक्‍का-दुक्‍का को छोड़ कोई किसी को नहीं जानता। 

प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया, महिला प्रेस क्‍लब, डीयूजे, मुंबई प्रेस क्‍लब, एचआरएलएन और आइएफडब्‍लूजे ने मिलकर प्रेस क्‍लब में मीडिया की आज़ादी और पत्रकारों के कानूनी अधिकार पर दो दिन का जो राष्‍ट्रीय परामर्श आयोजित करवाया, उसकी औपचारिक या अनौपचारिक कोई भी सूचना पत्रकार बिरादरी को नहीं दी गई। वक्‍ताओं में पुराने यूनियनबाज़ के. विक्रम राव, अख़बार मालिक अपूर्व जोशी, कार्टूनबाज़ असीम त्रिवेदी, एकाध सेलिब्रिटी वाम महिलाएं, उत्‍तराखण्‍ड परिवर्तन दल के पी.सी. तिवारी जैसे पत्रकारिता के लिहाज से अप्रासंगिक नाम शामिल थे। हिंदी या भाषायी पत्रकारों की नुमाइंदगी शून्‍य के करीब थी। कहते हैं आयोजन सफल रहा और संगठन भी बन गया।

एक और किस्‍सा। मुझसे चुनावी मौसम में उग आए नए चैनलों के घपले पर एक लेख लिखने को कहा गया। मैंने लिखकर दे दिया। हाथ में अंक आया तो देखा कि वह तो पत्रकारिता विशेषांक था-”प्रेस का पंचनामा”। विशेषांक की बात मुझे नहीं बताई गई थी। मुझे यदि पता होता कि पत्रकारीय नैतिकता पर सामूहिक उपदेश देने के लिए ‘तहलका’ प्रेस का पंचनामा करने जा रहा है, तो सबसे पहले मैं उसका पंचनामा करता कि वहां कर्मचारियों को कुछ महीने से वेतन क्‍यों नहीं दिया जा रहा। तरुण तेजपाल के पंक में डूबी पत्रिका आखिर किस नैतिक ज़मीन पर खड़े होकर ऐसा अंक निकाल सकती है? आश्‍चर्य, कि जिन्‍होंने भी इसमें प्रिंट पत्रकारिता पर लेख लिखे हैं, उन्‍होंने तहलका पर एक भी टिप्‍पणी नहीं की है। क्‍या उन्‍हें भी विशेषांक की सूचना देने के बजाय एक स्‍टैंड अलोन लेख की मांग की गई थी या फिर वे लेखक यह जानते हुए भी चतुराई बरत गए?

मुझे लगता है कि हमारे जैसे लोग वामपंथी कारसेवक बनकर रह गए हैं। हम लिखेंगे, नारा लगाएंगे, धरने में जाएंगे, लेकिन राष्‍ट्रीय सेमिनार/संगठन आदि में चुपके से भुला दिए जाएंगे। हमसे आइडिया लिया जाएगा, लेख लिखवाया जाएगा, लेकिन बगैर यह बताए कि सारी कवायद उलटे चोर को कोतवाल बनाने के लिए की जा रही थी। इस देश में संघर्ष कोई करेगा, संघर्ष पर लिखेगा कोई और जबकि संघर्ष के लिए नीतियां कोई तीसरा बनाएगा। सबका काम तय कर दिया गया है। नारे लगाने वाले को संघर्ष की रणनीति बनाते समय पूछा जाएगा, इस गफ़लत में न रहें। इसके उलट नारे लगाने वाले को बदनाम ज़रूर कर दिया जाएगा। सब मिले हुए हैं। सब के सब…।

अभिषेक श्रीवास्तव के एफबी वाल से

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Tehelka scribe refuses to reveal source in sensational fake encounter case

IMPHAL : The star witness of the sensational July 23 Kwairamband Keithel fake encounter case, Teresa Rehman of the `Tahelka Magazine`, refused to reveal the identity of her sources citing security problem besides terming it unethical. Teresa Rehman, who filed the news reports of the July 23 incident along with a number of pictures as evidence, gave her statement before the court Chief Judicial Magistrate, Kamrup (Metro) Guwahati, D Thakuriaa on January 6 as prosecution witness number 66.

In her statement, she confirm to have filed the article `Murder in plain sight` appeared at the Tehelka Magazine (dated 8.08.09) about the murder of Sanjit by Manipur police commandos on July 23. She said that the article was written on the basis of the reports and photographs received on her e-mail ID adding that she did not know the person who took the photographs.

Rehman revealed that she collected the information to write the articles from various sources including Rakesh Meihoubam, the legal advisor of the mother of deceased Sanjit. According to her it was from Rakesh she came to know that the deceased Sanjit was a former member of the outlawed group. She further revealed that she was told that Sanjit was earlier arrested by the Police and got bail and was living as free man before he was killed in the sensational fake encounter case.

`I did not visit Imphal for the preparation of my article and I had not received any video footage of the incident,` claimed Rehman.

Soon after the receipt of the photographs through her e-mail ID she reportedly forwarded the same to her then editor in chief, Tarun Tejpal. Subsequently, she received instruction from Delhi office to go ahead and prepare the article. However, she clarified that she did not tamper with the photographs. She further maintained that she no longer has the photographs with her after forwarding the same to the Tehelka weekly magazine office, the photographs became the property of Tehelka Weekly Magazine.

`I am not ready to reveal the names of my source for fear their lives will be at risk and further it will be unethical on my part on revealed my sources`, said Rehman.

It may be recalled that Teresa Rehman was summoned to physically appear before the district and session Judge Manipur East. However, she was later granted permission on December 6 last to give her statement at a designated special court of CBI Guwahati by the concerned court following her plea to make the appearance in Guwahati citing security reason.

Meanwhile, the cross examination of witness of the case was also held today before the district and session Judge Manipur East. Advocate Rakesh Singh Meihoubam, the legal advisor of Sanjit`™s mother appeared before the court as prosecution (no.67). In his statement, the advocate revealed that he did not know Teresa Rehman before the BT road incident.

He came to know with Rehman through Babloo Loitongbam, a fellow activist, who told him that Rehman wanted to talk to her over phone. Meihoubam further revealed that he talked to Rehman twice after the death of Sanjit wherein she inquired about the status of Sanjit before his death. Accordingly, he mentioned that Sanjit was earlier arrested by Manipur police and was later released on bail but clarified that he was not the counsel in the criminal case involving the deceased.

He was approached by the deceased mother for filing a writ petition before the then Guwahati high court only after her son was killed. Subsequently, Meihoubam claimed that he filed the petition after receiving the copy of the magazine from Rehman who sent him a copy following his request.

साभार- Imphal Free Press

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