गांधी और नेहरू को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की गहरी साजिश का भंडाफोड़

Rajesh Singh Shrinet : फेसबुक पर किस तरह अपने देश और देश के पुराने नेताओं के बदनाम करने की साजिश रची जा रही है, वह इन दो फोटोग्राफ से जाहिर हो जाता है। मेरी अपील है कि इस तरह की साजिश का हिस्सा न बनें। या तो इसका सही जवाब दें या फिर ऐसे गलत फेसबुकिया दोस्तों को अनफ्रेंड कर दें।

 

पत्रकार राजेश सिंह श्रीनेत के फेसबुक वॉल से.

उपरोक्त स्टेटस पर आए कई कमेंट में से एक Abhay Paprikar की टिप्पणी : These “Rashtra bhakt” do not have a history. So, the best they can do is to distort/fabricate history! They are “masters” of this art. But these “pious” people forget what Abraham Lincoln said ” you can fool some people for some time but you cannot fool all the people all the time “! These people are a disgrace!!!

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गांधी जी की अपने बेटे को चिट्ठी : ”मनु ने बताया कि तुमने उससे आठ साल पहले दुष्कर्म किया था”

लंदन। महात्मा गांधी बड़े बेटे हरिलाल के चाल-चलन को लेकर खासे आहत थे। उन्होंने हरि को तीन विस्फोटक पत्र लिखे। जिनकी नीलामी अगले सप्ताह इंग्लैंड में की जाएगी। इन पत्रों में गांधी ने बेटे के व्यवहार पर गहरी चिंता जताई थी। नीलामीकर्ता ‘मुलोक’ को इन तीन पत्रों की नीलामी से 50 हजार पौंड (करीब 49 लाख रुपये) से 60 हजार पौंड (करीब 59 लाख रुपये) प्राप्त होने की उम्मीद है। ये पत्र राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जून, 1935 में लिखे थे।

हरिलाल के अनुचित व्यवहार पर गांधी जी ने पत्र में लिखा, ‘तुम्हें यह जानना चाहिए कि मेरे लिए तुम्हारी समस्या हमारी राष्ट्रीय स्वतंत्रता से अधिक कठिन हो गई है।’ पत्र में उन्होंने कहा, ‘मनु ने मुझे तुम्हारे बारे में बहुत सी खतरनाक बातें बताई हैं। उसका कहना है कि तुमने आठ वर्ष पहले उसके साथ दुष्कर्म किया था। जख्म इतना ज्यादा था कि उसे इलाज कराना पड़ा।’ गौरतलब है कि मनु गांधी जी पोती और हरिलाल की बेटी थीं।

मुलोक द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘ये पत्र गुजराती में लिखे गए और अच्छी हालत में हैं। जहां तक हमारी जानकारी है इन्हें सार्वजनिक रूप ने पहले कभी नहीं देखा गया। इनसे गांधी जी के बेटे के संबंध में परेशानी की नई जानकारी मिलती है।’

हरिलाल पिता की तरह बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड जाकर पढ़ाई करना चाहते थे। गांधी जी ने इससे मना कर दिया। उनका मानना था कि पश्चिमी शिक्षा ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में मददगार साबित नहीं होगी। इसके बाद हरिलाल ने 1911 में परिवार से संबंध तोड़ लिया। फिर जीवनभर पिता से उनके संबंध खराब ही बने रहे। एक अन्य पत्र में गांधी जी ने कहा, ‘मुझे बताओ कि क्या तुम अब भी अल्कोहल और विलासिता में रुचि रखते हो। मेरे विचार से अल्कोहल का सहारा लेने से ज्यादा अच्छा तो तुम्हारे लिए मर जाना है।’

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गांधी जी को जब बनारस के एक पंडे ने काफी भला-बुरा कहा था…

Sanjay Tiwari : एक बार गांधी जी भी काशी गये थे. तब जब वे देश के आंदोलन का हिस्सा नहीं हुए थे. इन दिनों वे दक्षिण अफ्रीका में गिरमिटिया आंदोलन को गति दे रहे थे और उसी सिलसिले में समर्थन जुटाने के लिए भारत भ्रमण कर रहे थे. इसी कड़ी में वे काशी भी पहुंचे थे. बाबा विश्वनाथ का आशिर्वाद लेने के बाद बाहर निकले तो एक पंडा आशिर्वाद देने पर अड़ गया. मोहनदास गांधी ने जेब से निकालकर एक आना पकड़ा दिया. पंडा जी को भला एक पैसे से कैसे संतोष होता? आशिर्वाद देने की जगह बुरा भला कहना शुरू कर दिया और पैसा उठाकर जमीन पर पटक दिया.

मोहनदास तो ठहरे मोहनदास. उन्होंने वह एक पैसा उठाकर जेब में रख लिया और आगे बढ़ने को हुए कि पंडा चिल्लाया ‘क्या करता है अधर्मी.’ मोहनदास ने कहा आपको इतनी कम दक्षिणा नहीं चाहिए और मैं इससे ज्यादा दूंगा नहीं. झट पंडे ने पैंतरा बदला, एक तो कम दक्षिणा देकर तू खुद नर्क का भागी बन रहा है. तो क्या मैं भी इंकार करके तेरी तरह नर्क का भागी बन जाऊ. गांधी जी ने वह एक आना पंडे को पकड़ा दिया और वहां से बाहर आ गये.

वेब जर्नलिस्ट संजय तिवारी के फेसबुक वॉल से.

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