थाईलैण्ड में कई हिंदी ब्लागरों को परिकल्पना सम्मान से किया गया सम्मानित

परिकल्पना द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाने वाला अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन 16 से 21 जनवरी के बीच थाईलैण्ड की राजधानी बैंकाक में आयोजित किया गया। नई दिल्ली, लखनऊ, काठमांडो (नेपाल) थिम्मू (भूटान) कोलम्बो (श्रीलंका) के सफल आयोजनों की श्रंृखला में थाईलैण्ड का सम्मेलन भी पूरे वैभव के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर थाईलैण्ड के प्रमुख शहर पटाया और राजधानी बैंकाक में सम्पन्न हुए सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों में कवि सम्मेलन पुस्तक लोकार्पण, परिचर्चा एवं सांस्कृतिक संध्या जैसे कार्यक्रम सम्पन्न हुए।

17 जनवरी की सायं पटाया के गोल्डन बीच होटल के सभागार में रवीन्द्र प्रभात की अध्यक्षता में एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें सुनीता प्रेम यादव, डा0 विनयदास, प्रीति, ‘अज्ञात’ डा0 निर्मला सिंह ‘निर्मल’ कुसुम वर्मा, डा0 रामबहादुर मिश्र आदि कवियों ने काव्य पाठ किया। 19 जनवरी को थाईलैण्ड की राजधानी बैंकाक के होटल सीजन स्याम के मुख्य सभागार में चार सत्रों में सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। प्रथम उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि उ0प्र0 शासन के पूर्व नगर विकास मंत्री श्री नकुल दुबे थे।

अध्यक्षता श्री रवीन्द्र प्रभात ने किया विशिष्ट अतिथि के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय बाक्सिंग कोच श्री एस0एन0 मिश्र तथा अवध ज्योति के सम्पादक डा0 राम बहादुर मिश्र थे। आयोजन की परिकल्पना पर प्रकाश डालते हुए आयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने बताया हिन्दी साहित्य और ब्लागिंग के बीच सेतु निर्माण एवं योगदान देने के उद्देश्य से संस्था द्वारा 2010 में अन्तर्जाल पर उत्सव की परिकल्पना की गयी नाम दिया गया था परिकल्पना ब्लागोत्सव। हमारा उद्देश्य है एक सुन्दर एवं खुशहाल सह अस्तित्व की परिकल्पना को मूर्त रूप देना। मुख्य अतिथि श्री नकुल दुबे ने अपने सम्बोधन में कहा कि परिकल्पना का उद्देश्य बहुत ही पवित्र है वह पूरी दुनिया की बेहतरी के लिए काम कर रही है। उसका उद्देश्य सह अस्तित्व और वसुधैव कुटुम्बकम की भावना पर केन्द्रित है।

विशिष्ट अतिथि डा0 राम बहादुर मिश्र ने कहा कि ब्लागरों की दस्तक ने साहित्य की दुनिया का स्वरूप बदल दिया है लेकिन लेखन के नाम पर कुछ सतही ब्लागरों की उपस्थिति ने ब्लागरों की छवि को नुकसान पहुंचाया है। लोकार्पण सत्र में मुख्य अतिथि ने सद्यः प्रकाशित साहित्यक कृतियों का लोकार्पण किया इनमें प्रमुख थी अवधी पत्रिका अवध ज्योति का अवधी कविता विशेषांक (सं0 डा0 राम बहादुर मिश्र) लफ्जों का सफर (काव्य संग्रह) डा0 अशोक गुलशन, अतुल श्रीवास्तव की पुस्तक फ्रंट पेज, डा0 अनीता श्रीवास्तव की पत्रिका रेवांत, डा0 निर्मला सिंह, निर्मल की पुस्तक दस्तक हमारी, अग्नि पुरूष की अंतिम उड़ान, शिखर की ओर, धरती रही पुकार।

तीसरा सत्र परिचर्चा का था। डा0 राम बहादुर मिश्र की अध्यक्षता में सम्पन्न हुए प्रथम सत्र का विषय इंटरनेट पर सृजनात्मक साहित्य का विस्तार था। विषय प्रवर्तन किया डा0 संदीप रमाभाऊ ठोकल (महाराष्ट्र) ने मुख्यवक्ता डा0 रमाकांत कुशवाहा ने मुख्य विषय पर बोलते हुए कहा अभिजन की भाषा जन की भाषा पर शासन करना चाहती है किन्तु इण्टरनेट ने जन भाषा को विशेष प्रोत्साहन दिया। परिचर्चा में रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी डा0 विनयदास, डा0 विजय प्रताप श्रीवास्तव, डा0 उमेश कुमार पटेल आदि ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। परिचर्चा का दूसरा सत्र साहित्य की समृद्धि में महिलाओं का योगदान विषय पर केन्द्रित था जिसकी अध्यक्षता डा0 निर्मला सिंह ने की। इस सत्र में प्रीति अज्ञात सुनीता प्रेम यादव तथा डा0 अनीता श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे, संचालन कुसुम वर्मा ने किया।

अंतिम सत्र सम्मान पुरस्कार अलंकरण में मुख्य अतिथि श्री नकुल दुबे ने प्रतिभागियों को सम्मानित किया जिसका विवरण इस प्रकार है- परिकल्पना सार्क सम्मान 2015 कुसुम वर्मा, परिकल्पना साहित्य सम्मान 2015 प्रीति अज्ञात (अहमदाबाद), परिकल्पना ब्लाग सम्मान 2015 अतुल श्रीवास्तव (छत्तीसगढ़), परिकल्पना सृजन सम्मान 2015 डा0 निर्मला सिंह (लखनऊ), परिकल्पना अभिव्यक्ति सम्मान 2015 डा0 विनयदास (बाराबंकी), परिकल्पना हिन्दी प्रसार सम्मान 2015 डा0 विजय प्रताप श्रीवास्तव (कुशीनगर), परिकल्पना हिन्दी गौरव सम्मान 2015 रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी (गोरखपुर), परिकल्पना हिन्दी भूषण सम्मान 2015 डा0 रमाकान्त कुशवाहा (देवरिया), परिकल्पना शब्द शिखर सम्मान 2015 डा0 उमेश कुमार पटेल (महराजगंज उ0प्र0) परिकल्पना पत्रकारिता सम्मान 2015 डा0 अनीता श्रीवास्तव (लखनऊ उ0प्र0)।

सांय 6 बजे से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया एक शाम कुसुम वर्मा के नाम इस सांस्कृतिक संध्या में भारत और थाईलैण्ड के प्रतिभागियों की उपस्थिति में कुसुम वर्मा की मोहक प्रस्तुति ने समां बांध दिया। इस प्रकार मुख्य समारोह अपने विविध आयोजनों की वैभवशाली प्रस्तुति से सम्पन्न हुआ। अगले दिन विश्व प्रसिद्ध सफारी वल्र्ड के अनेक कार्यक्रमों में पूरा दिन व्यस्त रहा और अंतिम दिन 21 जनवरी को थाईलैण्ड के धार्मिक स्थलों एवं मन्दिरों के दर्शनोपरान्त सांय 4 बजे थाईलैण्ड के सुवर्ण भूमि एयरपोर्ट से उड़ान भरते हुए प्रतिभागियों ने विदा ली।

बैंकाक से डा0 रामबहादुर मिश्र की रिपोर्ट.

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फिर सक्रिय होगा भड़ास Blog, पुराने निष्क्रिय हटेंगे, नयों को मिलेगा स्थान

Yashwant Singh : जागरण ग्रुप के बच्चा अखबार आई-नेक्स्ट के कानपुर संस्करण की लांचिंग कराने के बाद इसके संपादक पद से इस्तीफा देकर कई महीने तक अपने गांव में रहा. जी भर खुली हवा में सांस लेकर छाती मजबूत बनाने और घूम घूमकर ताड़ी पीकर गला तर करने के बाद नई नोकरी खोजने नोएडा पहुंचा. शराब न पीने और झगड़ा न करने टाइप कई किस्म की शर्तों को मुझसे मनवाए जाने के बाद अंतत: कामकाज के मेरे पुराने अच्छे रिकार्ड को देखते हुए दैनिक जागरण नोएडा में नौकरी दे दी गई. इसी दौरान सुना कि हिंदी में ब्लागिंग का दौर शुरू हुआ है और किसिम किसिम के हिंदी ब्लाग बन चल लिखे जा रहे हैं. अपन लोगों ने भी मिलकर एक ब्लाग बनाया. भड़ास नाम से. इसका आनलाइन पता WWW.Bhadas.Blogspot.COM रखा गया.

इस ब्लाग में करीब एक हजार संपादक बनाए गए. यानि जो भी इसका मेंबर बना उसको डायरेक्ट पोस्टिंग का राइट दे दिया गया. इस कारण कभी कभार ये भी होता कि मैं सो कर उठता तो देखता कि भाई लोग मुझे ही गालिया लिख लिखकर भड़ास पर छापे हुए हैं. खैर. कई किस्म की लंबी उठा पटक बहस झगड़ा होड़ कंपटीशन कंप्लेन मुंहफुलव्वल आदि के बाद ब्लागिंग की आग धीरे धीरे शांत होने लगी. शौकिया ब्लागर निष्क्रिय होने लगे. कुछ ही प्रतिबद्ध ब्लागर फील्ड में जमे रहे. कई लोग ब्लागिंग के आगे की राह देखने समझने लगे. कुछ लोग इधर उधर हुए तो कुछ ने फेसबुक ट्विटर आदि की राह पकड़ी. कइयों ने डाट काम को अपनाया. समय हर चमकीली चीज पर धूल की परत चढ़ाकर उसे पुराना कर देता है और कुछ नया चमकता पेश कर देता है.

अब जबकि ब्लागिंग लगभग न के बराबर है और हर कोई अपनी बात टेक्स्ट आडियो वीडियो के रूप में फेसबुक व ट्विटर जैसे मंचों पर पोस्ट पब्लिश करता है तो हम लोग एक बार फिर भड़ास ब्लाग को सक्रिय करने की तैयारी कर रहे हैं. पुराने निष्क्रिय (ज्यादातर निष्क्रिय ही हैं) को हटाकर नयों को शामिल करने की तैयारी चल रही है. मुझे यह स्वीकारने में गर्व है कि भड़ास ब्लाग के संचालन के दिनों में मिले ज्ञान समझ रगड़े झगड़े आदि के कारण विकसित हुई परिपक्वता से भड़ास4मीडिया का कांसेप्ट दिमाग में आया जो शुरुआती कठिन संघर्षों के बाद चल निकला. अन्यथा हम जैसे हिंदी पट्टी के देहातियों अराजकतावादियों मुंहफटों के लिए उन दिनों दिल्ली नोएडा में नौकरियों के सारे दरवाजे बंद किए जा चुके थे और सरवाइवल मुश्किल था. पर नौकरी के परे खुद के पैशन को प्रोफेशन बनाने की जो धुन सवार हुई तो भड़ास4मीडिया के जरिए परवान चढ़ता चला गया. लेकिन इस भड़ास4मीडिया को पैदा किया असल में भड़ास ब्लाग ने ही. एक बार आप भी भड़ास के सबसे शुरुआती, अनगढ़, ओरीजनल और देसज मंच को देखें. लिंक ये है: Bhadas.BlogSpot.com

भड़ास के संस्थापक यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

फेसबुक पर उपरोक्त पोस्ट पर आए कुछ कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Journalist Atul Tiwari Ab ye btao ki apni bhdas hum kha nikale

गुप्ता सेल्स राहुल गुप्ता सर कुछ लिखने के मौका दे Bhadas.Blogpost.com पर सबूत और पक्के साक्ष्य के साथ, पहले आप उनको जस्टिफाई और वेरिफाई कर ले उसके बाद उसको आगे प्रकाशित करे। उम्मीद है आप मौका देंगे।
राहुल गुप्ता
बदायूं।

Vishesh Shukla mai bhi gawah hu sir un dino ka

Harshvardhan Tripathi अब जबकि ब्लागिंग लगभग न के बराबर है Yashwant Singh आपकी इस बात से पूर्ण रूप से असहमत। नए बच्चे दे दनादन ब्लॉग ठेल रहे हैं। गोता लगाइए। अजब-गजब मोती मिल जाएंगे। हां, ये जरूर है कि उस समय के हमारे आपके जैसे लोग कुछ ठंडा गए हैं। और आपने तो उसे आगे ही बढ़ाया है। बाकी सुखद समाचार।

Shailesh Bharatwasi आप चंद टिके रहनेवाले लोगों मे रहे, ये बड़ी और प्रेरणास्पद बात है।

Riyaz Hashmi वह गालियों का मंच था और संभवतः इसीलिए उसका नाम भड़ास रखा गया था, जिसका मैं भी शुरूआती हिस्सा था। खूब बहस होती थी उस मंच पर।

Roy Tapan Bharati आपका ब्लाॅग पहले से और ज्यादा लोकप्रिय होगा

Yashwant Singh हर्षवर्द्धन सर, संभव है नए लोग जो ब्लाग चला रहे हों, उसके बारे में मुझे पता न हो. या डाट काम में अति व्यस्तता के कारण मैंने खुद ही ब्लाग की दुनिया के बारे में ज्यादा खैर खबर नहीं ली, न रखी. आपसे संपर्क कर नए सक्रिय ब्लागरों को जोड़ता हूं. ये एक अच्छा संकेत है. आपने ठीक जानकारी दी. शुक्रिया.

Anil Sakargaye प्रेम है रे,,,,तुमसे,,
बोले तो,,,,लाड,,,,
कईयो को पढा,,,कईयो को ललकारा
पर तुम्से न जाने क्यों,,,प्यार हो गया,,,
तुम्हारी,,,आग को सलाम,,,
उस आग को,,,उस ज्वाला को,,जो
तुम्हने,,,,जलायी/ लगाई तो,,,??
पर वो,,,रौशनी बिखेर रही है,,
सलाम प्रणाम,,,सब कुछ,,

Neelabh Ashk यशवन्त, न बिकना कोई बड़ी बात नहीं, न बिकते रहना बड़ी बात है. क्योंकि जो कहता है कि मैं पैसे पर नहीं बिकता, वो साला पद पर बिक जाता है, प्रतिष्ठा पर बिक जाता है, प्यार पर बिक जाता है, मजबूरियों के नाम पर बिक जाता है, नेता की लटकन बनने पर बिक जाता है. सम्मान पर बिक जाता है. हमारे यहां गृहस्थ जीवन को क्षुरस्य धार यानी छुरे की धार पर चलने की मानिन्द ठहराया गया है, पत्रकार बड़ा गृहस्थ होता है, उसका परिवार सारा समाज होता है, उसका जोखिम खांडे की धार पर चलने के बराबर है. जो इसे पूरा कर सके वो असली वरना गां–ऊ तो बहुत-से हैं.

Mayank Saxena सब याद है…. 🙂

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हिंदी में गूगल एडसेंस आ गया, हिंदी ब्लागरों के लिए खुशखबरी

अगर आप ब्लॉगर हैं और ब्लॉग और वेबसाइट से पैसा कमाना चाहते हैं तो इंटरनेट पर कमाई के कई तरीके मौजूद है। इन तरीकों को अपनाकर आप आराम से कुछ रूपल्ली से हजारों रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। लेकिन निःसन्देह विभिन्न देशों के ब्लॉगर के बीच कमाई को सबसे लोकप्रिय तरीका है गूगल एडसेंस। लेकिन अब तक गूगल द्वारा हिन्दी भाषा को एडसेंस पर समर्थन ना देने से हिन्दी पट्टी के ब्लॉगर अपने इंटरनेट का खर्च भी नहीं निकाल पा रहे थे जोकि लेखन के आगे के चरण में उदासीनता का सबसे बड़ा कारण बना हुआ था।

सबसे खुशी की बात यह है कि अब हिन्दी भी गूगल एडसेंस की समर्थित भाषा में शामिल कर ली गई है। आज से गूगल की एडसेंस समर्थित भाषाओं में हिन्दी को भी देखा जा रहा है।  आप स्वयं यहाँ जाकर इसकी पुष्टि कर सकते हैं। मतलब कि अब हिन्दी ब्लॉगर भी अपनी रचनाधर्मिता के चलते अपने खर्चे निकाल सकेंगे, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

गूगल एडसेंस- अपने ब्लॉग पर गूगल एडसेंस का विज्ञापन लगाकर आप हर महीने हजारों कमा सकते हैं। गूगल एडसेंस का विज्ञापन टेक्स्ट, इमेज और वीडियो के रूप में होता है। इसके कोड को ब्लॉग पर डालने के बाद विज्ञापन दिखने लगता है। जब भी कोई पाठक आपके ब्लॉग पर डाले गए गूगल एडसेंस के विज्ञापन को क्लिक करेगा। उस क्लिक के बदले आपको पैसा मिलेगा. लेकिन आपको यह ध्यान रखना होगा कि खुद के कंप्यूटर, आईपी से विज्ञापन क्लिक ना हो।

आपको अपने जिस हिन्दी ब्लॉग पर एडसेंस को चालू करना हो उस ब्लॉग को ब्लॉगर डैशबोर्ड पर जाकर खोलें।  उसके बाद बाएँ ओर दिख रहे Earning टैब पर क्लिक करके  क्लिक करें और एडसेंस को चालू करने का ऑप्शन स्वीकार कर लें। उसके बाद लेआउट मे जाकर विभिन्न जगह add a gadget क्लिक करके एडसेंस की यूनिट ब्लॉग पर लगा दें।

एक बात ध्यान रखें कि विज्ञापन का प्लेसिंग सही हो। विज्ञापन वहां लगाएं जहां लोगों की नजर जरूर जाए और लोग उसे क्लिक करने से खुद को रोक ना पाए। अगर आपके ब्लॉग में फोटो और वीडियो नहीं के बराबर है या कम है तो सिर्फ टेक्स्ट एड लगाना आपके लिए बेहतर होगा।

एक बात ध्यान रखिएगा कि Google Adsense जैसे साधन आपको क्लिक के हिसाब से भुगतान करते हैं. इसे PPC यानी Pay Per Click कहते है। जबकि कुछ साइट आपके ट्रैफिक के अनुसार आपको पैसा देते हैं। जितना ज्यादा हिट उतना ज्यादा भुगतान। इसे CPM कहते हैं यानी Cost Per Mille (Thousand)। इसलिए आपकी कोशिश ये होनी चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा लोग आपके ब्लॉग पर आए।

इसके लिए आपको रोज पाठकों के लिए ऑरिजीनल पोस्ट लिखने होंगे। इससे लोगों को प्रतिदिन कुछ ना कुछ नया पढ़ने के लिए मिलेगा। जब नया मिलेगा तो वह रोज आएंगे और आपके ब्लॉग, साइट का ट्रैफिक, रैंकिंग बढ़ेगा. जितना ट्रैफिक बढ़ेगा आपके पास उतना पैसा आएगा।

क्या करें और क्या ना करें?

    स्वयं अपने Google विज्ञापनों पर क्लिक न करें।
    किसी अन्य व्यक्ति को अपने Google विज्ञापनों पर क्लिक करने के लिए न कहें।
    अपने विज्ञापनों के लिए स्थान का चयन सावधानी से करें।
    इस बात के प्रति सावधान रहें कि आपकी साइट का प्रचार कैसे किया जा रहा है।
    Google Analytics  का उपयोग करें। 
    Google विज्ञापन प्रदर्शित करने वाले पृष्ठों/साइटों पर सामग्री प्रतिबंध लागू होते हैं।
     अद्वितीय और प्रासंगिक सामग्री युक्त साइटें बनाएं।
    AdSense कोड के साथ छेड़छाड़ न करें.
    पॉप-अप संकेतों या स्वचालित सॉफ़्टवेयर इंस्टॉलेशन का उपयोग न करें।
    Google ट्रेडमार्क का सम्मान करे।

आपकी वेबसाइट पर दिख रहे विज्ञापनों पर यदि  किसी पाठक ने क्लिक किया तो इस क्लिक के लिए गूगल विज्ञापन देने वाली कम्पनी से पैसे लेगा और इस आय का एक हिस्सा आपको भी देगा। आप यदि यह जानना चाहें  कि आपको कितना हिस्सा मिलता है तो इसका जवाब कोई नहीं बता सकता। गूगल यह जानकारी किसी से साझा नहीं करता है। किसी विज्ञापनकर्ता से गूगल खुद कितने पैसे लेता है, आपकी कमाई भी इसी बात पर निर्भर करती है। ज़ाहिर है कि गूगल सभी कम्पनियों से एक जैसे पैसे नहीं लेता। इसलिए किसी विज्ञापन पर क्लिक होने की स्थिति में आपको जहां अधिकतम 4 डॉलर भी मिल सकते हैं और किसी अन्य क्लिक पर 0.006 डॉलर भी!

प्रवीण त्रिवेदी के ब्लाग प्राइमरी का मास्टर का हिंदी ब्लाग से साभार.

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