यह देखिए हरियाणा के मुख्यमंत्री की खबर हिन्दुस्तान टाइम्स, दिल्ली में विज्ञापन की शक्ल में

Sanjaya Kumar Singh : यही अच्छे दिन हैं क्या। पर किसके लिए? ना खाउंगा ना खाने दूंगा तो ठीक है। पर जायज पैसे भी नहीं देंगे और अपनी मर्जी से दान के पैसे उड़ाएंगे – यह कैसे ठीक हो सकता है। यह देखिए हरियाणा के मुख्यमंत्री की खबर हिन्दुस्तान टाइम्स, दिल्ली में विज्ञापन की शक्ल में। यह खबर है और खबर के रूप में छप सकती थी, छपनी चाहिए थी और छपवाने के लिए जारी की जानी चाहिए थी। नहीं छपती तो इसमें ऐसा कुछ नहीं है कि पैसे खर्च कर विज्ञापन के रूप में छपवाया जाए। चंदे के पैसे विज्ञापन में उड़ाने का कोई मतलब नहीं है।

हो सकता है, इस विज्ञापन में जो कहा गया है वह प्रेस विज्ञप्ति के रूप में जारी किया गया हो और मुफ्त में हिन्दुस्तान टाइम्स में नहीं छपा हो। पर देश में हजारों लाखों अखबार हैं, हरियाणा से भी ढेरों अखबार निकलते हैं और प्रेस विज्ञप्ति जारी करके इन्हें कायदे से अखबारों में संबंधित लोगों तक भेजकर खबर के रूप में मुफ्त छपवाया जा सकता था। पर ये क्या? खबर भी विज्ञापन के रूप में। यह पैसों की बर्बादी है माननीय मुख्यमंत्री जी। अगर मुख्य मंत्री शिलान्यास करे, उद्घाटन करे और उसकी खबर ना छपे तो क्या कहा जाए।

अव्वल तो ऐसा होना नहीं चाहिए पर अगर दो चार अखबारों में यह खबर नहीं छपी हो तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके लिए पैसे बर्बाद किए जाएं और खबर को विज्ञापन की शक्ल में छपवाया जाए। आखिर क्या है इस खबर में जो इसका छपना इतना जरूरी था। अभी तक तो मीडिया को ही कहा जाता था कि उसे खबरों की तमीज नहीं है और सिर्फ बिकने वाली खबरें महत्त्व पाती हैं। पर यहां तो ‘बिकने वाली’ खबर भी पैसे की ताकत से छप रही हैं। अगर विज्ञापन के पैसे उस संस्थान वालों ने दिए जिनकी खबर है तो यह और निराशाजनक है। मुख्यमंत्री का मीडिया विभाग और पूरा ताम झाम किस लिए होता है।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

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सात सौ रुपये, हजार रुपये, ढाई हजार रुपये… ये है सेलरी… बदले में 50 लाख से अधिक की विज्ञापन की वसूली

दैनिक हिन्दुस्तान से जुड़े रामगढ जिला अन्तर्गत गोला संवाददाता मनोज मिश्रा ने हिंदुस्तान अखबार को अलविदा कह दिया है. श्री मिश्रा ने इस बाबत एक आवेदन प्रधान संपादक श्री शशिशेखर और झारखण्ड के वरीय संपादक श्री दिनेश मिश्र को प्रेषित किया है. मनोज ने कहा कि सन 2000 से हिन्दुस्तान से जुड़ा. पत्रकारिता में काफी उतार-चढ़ाव देखे. जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले पत्रकारों का आज भी काफी शोषण किया जा रहा है. उन्हें अखबार प्रबंधन से सम्मानजनक पारिश्रमिक नहीं मिलता है. इस कारण पत्रकार आर्थिक तंगी से जूझते रहते हैं. सभी का परिवार है. खर्चे भी काफी हैं. पारिवारिक दायित्व होने और आर्थिक तंगी के कारण ही अखबार को अलविदा कह दिया.

हिन्दुस्तान रामगढ जिला कार्यालय में कार्यरत पत्रकार व्यास शर्मा ने कार्यालय जाना बंद कर दिया है क्योंकि श्री शर्मा को पिछले आठ महीनों से वेतन नहीं मिला. उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा. कार्यालय के पुराने पत्रकार अशोक मेहता को एक हजार रूपया और राजकुमार सिंह को मात्र सात सौ वेतन मिलता है। इसके अलावा जिले के अन्य संवाददाताओ को मात्र 2500 रुपया वेतन दिया जाता है. कई को आज तक पैसा नहीं मिला. इस थोड़े से पैसे के एवज में साल भर में 50 लाख से अधिक विज्ञापन की वसूली करवाई जाती है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

मूल खबर :

आर्थिक तंगी से परेशान हिंदुस्तान अखबार के स्टिंगर मनोज मिश्र ने पत्रकारिता को गुडबाय कहा

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HT, IE among 47 Delhi newspapers have dared not to implement Majithia Award

Except four newspapers namely; The Hindu, The Tribune, The Decan Herald and Bennet Coleman & Company (publishers of The Times of India, Economic Times and Navbharat Times) and one news agency i.e. the Press Trust of India no newspaper/news agency being published from Delhi has implemented the Majithia Award. This has been revealed in the affidavit of the Government of Delhi submitted by Dr. Madhu Teotia, Labour Commissioner of Government of NCT of Delhi.

According to the report, the Labour Department carried out the inspection in 77 newspaper establishments and 2 news agencies, which included 26 one-man establishments in which Wage Boards are not applicable. Out of remaining 53 newspapers, establishments/news agencies only four above named newspapers establishments have implemented the Award. Other newspapers have not at all implemented the Award.

Strangely, three important newspapers namely; Dainik Jagran, Dainik Bhaskar and Hind Samachar have skirted the implementation in the name of Section – 20j of the Majithia Wage Board recommendations. It will be interesting to know that according to Section – 20j of the Majithia Wage Board recommendations, the employees could exercise the option of not taking the advantage of the Wage Revision provided they were satisfied with wages, they have already been getting. The wages, which are being given to the employees of Dainik Jagran, and Dainik Bhaskar are less than 1/3rd of the Wage Boards recommendations.

It is all the more interesting to know that the option was to be utilised by the employees within three weeks of the notification of the Award. However, if the employees were highly satisfied with the ‘princely amount’ of wages given by these newspapers, then what was the need for these newspapers to have filed Writ Petitions in the Supreme Court of India against the Award? Further, if the employees were so satisfied with the ‘handsome’ salaries, then why did they approach the Hon’ble Supreme Court of India for the implementation of the Award? And if the Hon’ble Supreme had accepted their version then what was the need for it to appoint the special labour Inspectors to find out the status? Thus, it appears that these newspapers are telling the blatant lie with no fear to the law or law enforcing agencies.

What is highly baffling is that the important newspapers like the Hindustan Times (H.T. Media Ltd.), Hindustan Media Venture Ltd., the Statesman, India Today, Amar Ujala and Sahara India have openly dared to have not implemented the Award. Indian Express is another major newspaper, which has been audacious enough not to provide any information to the Labour Department.

Meanwhile, the Government of Jharkhand has also filed its status report and the same will be shared tomorrow.

Parmanand Pandey

Secy. Gen.

IFWJ

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आसाराम से संबंधित गलत खबर छापने के बाद हिंदुस्तान टाइम्स ने मांगी माफी

3 अगस्त को कई समाचार पत्रों में ये समाचार छपा कि आसाराम की तस्वीर NCERT की कक्षा 3 की पुस्तक में महान संतों के बीच में प्रकाशित है. इस खबर की सच्चाई की पोल तब खुली जब मानव संसाधन व विकास मंत्रालय (HRD Ministry) द्वारा हिंदुस्तान टाइम्स को इस बाबत नोटिस जारी हुआ कि इस प्रकार की कोई पुस्तक NCERT द्वारा नहीं छापी गई है.

इसके बाद हिंदुस्तान टाइम्स ने माफीनामा छापा. मानव संसाधन व विकास मंत्रालय (HRD Ministry) द्वारा नोटिस जारी होने पर हिंदुस्तान टाइम्स ने जो माफीनामा छापा, उसे आजकल आसाराम के भक्त आपस में खूब सरकुलेट कर रहे हैं और मीडिया पर पूर्वाग्रह रखने की तोहमत लगा रहे हैं. देखिए संबंधित डाक्यूमेंट्स…

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हिन्दुस्तान के पत्रकारों पर हमला करने वालो पर गैंगेस्टर एक्ट लगाया जाय : हेमंत तिवारी

लखनऊ : हिंदुस्तान अखबार के कार्यालय पर अराजक तत्वों द्वारा हमले की उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है. समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने घटना की जानकारी होते ही डीजीपी से बात की और कड़ी कार्यवाई की मांग की.    

समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने कहा है कि जिस तरह से अराजकतत्वों ने हिंदुस्तान के कार्यालय तक पहुंचने का दुस्साहस किया है, उसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए कम है. उत्तर प्रदेश सरकार को पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमले का संज्ञान लेते हुए इस तरह के मामलों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. घटना के बाद पिटते हुए राहगीरों को बचने के लिए जिस तरह की सहृदयता का परिचय हिंदुस्तान के पत्रकारों ने दिया है, वह काबिले तारीफ़ है लेकिन इसकी प्रतिक्रिया में एक सभासद और उसके गुंडों ने जो गुंडागर्दी की है, उसके खिलाफ गंगेस्टर एक्ट की कारवाई होनी चाहिए.

समिति के सचिव सिद्धार्थ कलहंस ने कहा कि सरकार और प्रशासन को इस बात को गंभीरता से लेने की जरूरत है और एक ठोस नीति बना कर पत्रकार बिरादरी की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाये. यदि सभी दोषियों के खिलाफ फ़ौरन कार्रवाई नहीं होती है तो राजधानी के पत्रकार मुख्यमंत्री से मिलेंगे. 

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लखनऊ में दैनिक हिंदुस्तान के दफ्तर पर भीड़ के साथ सभासद का हमला, कई घायल, फोर्स तैनात

लखनऊ : दबंग सत्ताधारियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब पत्रकार ही नहीं, प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान भी उनके निशाने पर आ गए हैं। लखनऊ में गोमतीनगर स्थित दैनिक हिन्दुस्तान के कार्यालय पर सभासद के भाई ने अपने समर्थकों के साथ हमला कर दिया। हमले में एचआर हेड आशीष मित्तल का सिर फट गया। कई अन्य कर्मियों को भी चोटें आई हैं। 

बताया गया है कि आफिस के सामने सभासद के भाई की बाइक स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी से भिड़ गई थी। उसे हिन्दुस्तान के कर्मचारी बचा कर दफ्तर के अंदर ले आए थे। इसी बात पर भीड़ ने पहले हिंदुस्तान कार्यालय, फिर लोहिया अस्पताल में इलाज कराने पहुँचे कर्मचारियों पर हमला कर दिया। 

कहा जा रहा है कि हिंदुस्तान कार्यालय के पीछे ही यादव समुदाय की बस्ती है। सभासद के उकसावे पर वहीं के लोगों ने धावा बोला। रीजनल एचआर हेड को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दो रिपोर्टरों सहित कई कर्मी चोटिल हैं। सहीं संख्या का अभी पता नहीं चल सका है। अस्पताल और हिंदुस्तान कार्यालय दोनों जगह फोर्स तैनात कर दिया गया है।

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चुनाव से पहले हिंदुस्तान के ब्यूरो प्रमुखों पर गिर सकती है गाज

आगामी विधानसभा और पंचायत चुनावों से पहले हिंदुस्तान लखनऊ में बड़े फेरबदल की खबरें आ रही हैं। स्थानीय संपादक के के उपाध्याय ने लोकसभा  की तरह पंचायत चुनावों और  उसके बाद  होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बेहतर टीम बनने की तैयारी कर ली है। सबसे ज्यादा बदलाव ब्यूरो लेवेल पर होने की चर्चा है। 

तत्कालीन संपादक नवीन जोशी के समय में कई पेज बनाने वाले (आपरेटर) को सब एडिटर बनाकर ब्यूरो का प्रभार दे दिया  था। इनमें रुद्राशिव मिश्रा को श्रावस्ती और राजीव शुक्ल को बलरामपुर भेजा गया था। उपाध्याय से काफी मिन्नतों के बाद रुद्राशिव बाद में सीतापुर आ गए। सीतापुर में तैनात आदर्श शुक्ल को सीतापुर फिर रायबरेली भेजा गया। बाद में राजीव शुक्ल ने सेटिंग कर लखनऊ में तैनाती पा ली। 

इसी तरह 20 साल से अखबार में पन्ना लगाने वाले राकेश यादव को नीलमणि लाल चलते चलते बलरामपुर का प्रभारी बना गए॥ नवीन जोशी के समय  हिंदुस्तान  लखनऊ में  नीलमणि लाल की हैसियत हमेशा नंबर दो की थी। बाद में नीलमणि लाल ने इस्तीफा दे दिया तो राकेश यादव  रंजीव से सेट हो गए लेकिन चुनाव से पहले सीतापुर में रुद्र शिव और बलरामपुर में राकेश पर गज गिरना तय माना जा रहा है क्यों कि रुद्राशिव की छवि ढीले ढाले आदमी की बन चुकी  है। 

राकेश यादव और स्थानीय मार्केटिंग हेड अवनीश त्रिपाठी में छत्तीस का आंकड़ा शुरू से रहा है। लोक सभा चुनाव में दोनों के बीच काफी तनातनी भी देखने को मिली थी। इसके अलावा राकेश यादव प्रॉपर्टी डीलिंग का भी काम करते हैं और हफ्ते में तीन दिन लखनऊ में देखे जाते हैं। इसी वजह से नवीन जोशी ने अपने रहते कभी आपरेटर से सब एडिटर भी नहीं बनाया था लेकिन नवीन जोशी के जाते ही नीलमणि लाल को राकेश यादव में क्या ‘लाल’ नजर आया कि आपरेटर से सब एडिटर बनाकर बलरामपुर भेज दिया। चर्चा यह भी है कि जातीय समीकरण को भी देखा जा रहा है। ताकि स्थानीय कंडीडेट से ठीक ठाक डील कराई जा सके। लोक सभा चुनावों में भी सभी ब्यूरो को वसूली का ठेका दिया गया था।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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वाह- वाह : ‘हिंदुस्तान’ की कसम, खबरें रिपीट करेंगे हम !

लगता है कि दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान ने पुराना मैटर रिपीट करने की कसम खा रखी है। हिन्दुस्तान के 31 जुलाई के अंक के पेज नंबर 11 (हेल्थ तरक्की) में जो सुडोकू 3503 नंबर से प्रकाशित किया गया है, वही सुडोकू 27 जुलाई के पेज नंबर 11 (जीने की राह) पर 3499 नंबर से पहले ही प्रकाशित किया जा चुका है। इतना ही नहीं सुडोकू नं. 3499 का जो उत्तर 28 जुलाई के पेज नं. 11 (धर्मक्षेत्रे) पर छपा है, वही उत्तर 01 अगस्त के पेज नं 11 (मनोरंजन) पर 3503 नंबर से प्रकाशित किया गया है।

हिन्दुस्तान में मैटर रिपीट करने का यह कोई पहला केस नहीं है। इससे पहले भी सुडोकू रिपीट हो चुका है। मार्च 2015 में भी हिन्दुस्तान एस्टेट सप्लीमेंट में 2013 में छपा एक पूरा का पूरा पेज ज्यों का त्यों छाप दिया गया था। इस संदर्भ में दो लोगों का नाम सामने आया था, हिन्दुस्तान एस्टेट पेज के प्रभारी विजय मिश्रा और उनको मैटर सप्लाई करने वाले विभाग के ही एक पत्रकार राजीव रंजन। 

इसकी सजा के तौर पर हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक आदरणीय श्री शशि शेखर जी ने दो पत्रकारों को रिजाइन करने के लिए मजबूर कर दिया था, पर श्रीमान राजीव रंजन फीचर विभाग की प्रभारी की कृपा दृष्टि के चलते साफ-साफ बच गए थे। बाद में इन्हीं राजीव रंजन साहब को प्रमोशन दे कर चीफ सब एडिटर भी बना दिया गया। 

ज्ञात हो कि हिन्दुस्तान फीचर विभाग की प्रभारी जयंति रंगनाथन हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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टीवी पत्रकार ने जागरण और हिंदुस्तान को थमाया तीन करोड़ की मानहानि का नोटिस

 आगरा के मून टीवी चैनल के पत्रकार शशिकांत गुप्ता ने एक खबर से अपनी मानहानि होने पर दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान को तीन करोड़ रुपए अदा करने का नोटिस दिया है। शशिकांत गुप्ता के खिलाफ बीते अप्रैल माह में जागरण और हिन्दुस्तान ने एक खबर प्रकाशित की थी। एक खबर, जो 24 अप्रैल को छपी थी, उसमें एक शराबी युवक द्वारा बिजली घर पर तोड़फोड़ का उल्लेख किया गया था। अगले दिन 25 अप्रैल को फिर खबर छपी कि बिजली घर पर तोड़फोड़ करने वाला युवक शशिकांत गुप्ता है, जिसके विरुद्ध थाने में मुकदमा लिखाया गया है।

गौरतलब है कि बिजलीघर की लॉगसीट में ट्रिपिंग होना और मशीन में कोई तोड़फोड़ नहीं हुई थी लेकिन इन अखबारों ने फर्जी खबर छापकर विभाग के अफसरों पर दबाव बनाया। इसके बाद 30 अप्रैल को एनसीआर दर्ज कराई गई। इस मामले को लेकर अखबार के स्थानीय संपादक से एत्मादपुर के विचपुरबियाना निवासी पत्रकार शशिकांत गुप्ता ने मुलाकात कर अपना पक्ष रखा लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। इसके बाद शशिकांत को वॉटसएप पर धमकी तक दी गई कि शांत रहें, नेतागिरी न करें। 

इतने बड़े अखबारों की ओछी हरकत से आजिज आकर आखिरकार शशिकांत ने कोर्ट के माध्यम से प्रबंधन को नोटिस दिया है। दोनो अखबारों को प्रेषित नोटिस में कहा गया है कि जब तोड़फोड़ की ऐसी सूचना न बिजली विभाग के पास है, न थाना पुलिस के पास तो खबर किस आधार पर प्रकाशित की गई है। इससे शशिकांत की सामाजिक प्रतिष्ठा नष्ट हुई है। इसके एवज में तीन करोड़ रुपए का भुगतान करें वरना वह केस करने के लिए बाध्य होंगे। 

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एचटी मीडिया की शुद्ध कमाई में इजाफा

हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स लि. (एचएमवीएल) का एकल आधार पर शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 23.11 प्रतिशत बढ़कर 41.71 करोड़ रुपये रहा।

एचएमवीएल ने बंबई शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि कंपनी का एकल आधार पर शुद्ध लाभ इससे पूर्व वित्त वर्ष 2014-15 की इसी तिमाही में 33.83 करोड़ रुपये था।आलोच्य तिमाही में कंपनी की शुद्ध बिक्री 6.93 प्रतिशत बढ़कर 221.51 करोड़ रुपये रही जो एक वर्ष पूर्व इसी तिमाही में 207.14 करोड़ रुपये थी।

बिजनेस स्टैंडर्ड से

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भास्कर छोड़ मतिकांत, गुंजेश गए हिंदुस्तान, लोकेंद्र ने दबंग दुनिया को ठुकराया

बिहार में भास्कर की लांचिंग से हिंदुस्तान ने भास्कर रांची यूनिट के कई शीर्ष पत्रकारों को अपने खेमे में शामिल कर लिया है। आठ साल से भास्कर का साथ निभा रहे और भास्कर के फाउंडर मेंबर में से एक मतिकांत सिंह ने भास्कर को बाय-बाय कर दिया। मतिकांत सिंह भास्कर के उन चुने गिने पत्रकारों में हैं, जिन्होंने झारखंड में अखबार को मजबूती प्रदान की। झारखंड के सभी संस्करणों के लिए झारखंड और बिहार डेस्क इंचार्ज रहे।

माना जा रहा है कि वे अपना ट्रांसफर भागलपुर चाहते थे, लेकिन उन्हें मैनेजमेंट के द्वारा उचित रिस्पांश नहीं मिला। इससे वे नाराज चल  रहे थे। सूत्र बताते हैं कि वे दैनिक भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल के काफी करीबी थे। उधर गुंजेश कुमार ने भी भास्कर को इस्तीफा भेज दिया है। वे भी दैनिक हिंदुस्तान भागलपुर के साथ जुड़ गए हैं।  वहीं भास्कर के करीब और दस लोग हिंदुस्तान की संपर्क में हैं। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इन लोगों को हिंदुस्तान उस समय अपने यहां ज्वाइनिंग कराने की तैयारी में है, जब भास्कर, भागलपुर और मुजफ्फरपुर लांचिंग को फाइनल टच दे रहे होंगे।

वहीं यह खबर आ रही है कि भागलपुर भास्कर के संपादक अपने रिश्तेदारों को बुला बुलाकर अखबार में भर रहे हैं। कई ऐसे लोगों को हिंदुस्तान से भास्कर में शामिल किया गया, जो किसी काम के नहीं थे और मोटी रकम लेकर भास्कर की टीम में शामिल हुए। 

उधर, दबंग दुनिया के ग्रुप सर्क्युलेशन हेड लोकेंद्र जैन ने संस्थान से इस्तीफा दे दिया है। वह अहमदाबाद दिव्य भास्कर में ऑपरेशन हेड के पद पर 1 अगस्त से ज्वाइन करेंगे। उन्होंने ये इस्तीफा दबंग दुनिया के वैभव शर्मा एवं एचआर के तानाशाह रवैये के कारण दिया है। चेयरमैन किशोर वाधवानी भी इनकी तानाशाही को रोक नहीं पा रहे हैं। तानाशाही और अड़ियल रवैये के कारण आगे भी दबंग दुनिया से कई लोगों के इस्तीफे दिए जाने की संभावना है।

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जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान ने महेंद्र मोहन और संजय गुप्ता के खिलाफ समन नहीं छापा

मुरादाबाद  : दूसरों के बारे में बड़ी बड़ी हांकने वाले प्रमुख मीडिया घराने अपनी करतूतें छापने से कैसे कतराने लगते हैं, इसकी ताजा मिसाल है मुरादाबाद के इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह राना का मामला। कोर्ट में दैनिक जागरण के मालिक महेंद्र मोहन गुप्ता और प्रधान संपादक संजय गुप्ता के खिलाफ एक गलत खबर प्रकाशित करने का मामला चल रहा है। गत दिनो जब राना के वकील उस केस का समन प्रकाशित कराने जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान और आज अखबारों के दफ्तर पहुंचे तो चारो ने उसे प्रकाशित करने से साफ मना कर दिया। अंत में सिर्फ दैनिक केसरी ने समन को प्रकाशित किया।   

दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता और एमडी महेंद्र मोहन गुप्ता के खिलाफ दायर ये मामला तीन साल पुराना है। तीन साल पहले बिलारी क्षेत्र में एक युवक की लाश लटकी मिली थी। इस मामले में दायर कोर्ट केस में संजय गुप्ता और महेंद्र मोहन गुप्ता को पार्टी बनाया गया है। कोर्ट सम्मन छपवाने के लिए अखबार का नाम अदालत से ही तय होता है। समन प्रकाशन के लिए अदालत से जागरण का नाम तय हुआ। 

सब इंस्पेक्टर राना के वकील संजीव चौधरी और नीतेश कुमार सबसे पहले दैनिक जागरण के मुरादाबाद में कांठ रोड स्थित कार्यालय पहुंचे। सम्मन में संजय गुप्ता और महेंद्र मोहन गुप्ता का नाम और पद लिखा था, इसलिए जागरण आफिस में हड़कंप मच गया। संपादक ने ये कह कर समन प्रकाशित करने से मना कर दिया कि हम अपने ही खिलाफ इसे कैसे छाप सकते हैं। वहां से तुरंत नोएडा और कानपुर जागरण कार्यालयों को बताया गया। उधर से मामला कोर्ट के बाहर निपटाने को कहा गया तो संपादक ने जमकर जोर लगाया और जब सफलता हाथ नहीं लगी तो नोएडा कह दिया कि मामला उनसे पुराना है। इसलिए वो इसमें कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने बता दिया कि खबर ज्ञानेंद्र सिंह ने प्रदीप शुक्ला के कार्यकाल में लिखी थी। ज्ञानेंद्र अब जागरण इलाहाबाद में और प्रदीप शुक्ला बरेली जागरण में तैनात हैं।

इसके बाद संजीव चौधरी और नीतेश कुमार समन लेकर हिंदुस्तान कार्यालय पहुंचे। हिंदुस्तान ने भी छापने से मना कर दिया। वहां से दोनो वकील अमर उजाला कार्यालय गए। रिसेप्शनिस्ट ने पहले तो छापने के लिए स्वीकारते हुए समन ले लिया। फिर बिलबुक लेने के बहाने आफिस के अंदर गया। लौट कर उसने भी समन लौटाते हुए छापने से मना कर दिया। दोनो वकीलों ने किसी के माध्यम से समन आज अखबार में छपवाना चाहा तो वहां से भी इनकार कर दिया गया। आखिर स्थानीय दैनिक केसरी ने समन को छापा।

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मुलायम-अमिताभ प्रकरण : दैनिक हिन्‍दुस्‍तान लखनऊ ने पहली खबर दबा दिया, दूसरी खिलाफ खबर छाप दिया!

अच्‍छा, इस हालत को क्‍या कहा-माना जाए कि एक खबर को दबा लिया गया है। इतना ही नहीं, इस असल खबर से जुड़ी एक दूसरी खबर उस खबर के खिलाफ छाप दी गयी। इतना भी होता तो बर्दाश्‍त कर लिया जाता। सम्‍पादक ने उससे जुड़ा एक साक्षात्‍कार छाप दिया है। सम्‍पादक है। यह कमाल किया है दैनिक हिन्‍दुस्‍तान के सम्‍पादक केके उपाध्‍याय ने। अरे जनाब, यह करने से पहले आप जरा इतना तो सोच लेते कि आप सम्‍पादन कर रहे हैं या तेल-चटाई का धन्‍धा खोले बैठे हैं। 

वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर

मामला है, आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और उनकी वकील पत्‍नी डॉ नूतन ठाकुर का। परसों समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अमिताभ को फोन कर धमकी दी थी। लेकिन यह बात खुल जाने के बावजूद लखनऊ के किसी भी अखबार ने इस खबर को नहीं छापा। केवल नवभारत टाइम्‍स ने इसे सूचना के तौर पर प्रकाशित किया। लेकिन उसी ग्रुप के टाइम्‍स ऑफ इण्डिया ने एक शब्‍द तक नहीं बोला।

अगले दिन अमिताभ ठाकुर ने तय किया कि इस धमकी पर वह पुलिस में एमआईआर दर्ज करायेंगे। अमिताभ हजरतगंज थाने पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज करायी। लेकिन किसी भी अखबार ने यह खबर नहीं छापी है। मगर अमिताभ-नूतन पर बलात्‍कार करने वाली मामले में रिपोर्ट दर्ज किये जाने की सूचना हर अखबार में सुनहरे हर्फों में दर्ज कर दी गयी है। एक भी अखबार ने इस खबर में मुलायम सिंह यादव वाली धमकी का एक शब्‍दत तक नहीं छापा। जबकि दैनिक हिन्‍दुस्‍तान ने तो पूरा अखबार ही सरकार के चरणों पर अर्पित कर दिया। 

इस अखबार के स्‍थानीय सम्‍पादक केके उपाध्‍याय ने रेप वाली खबर दो-दो बार छापी। दोनों बार डबल कॉलम। फोटो सहित। पहली खबर तो फ्रंट-पेज पर है, जबकि दूसरी पृष्‍ठ दस पर है। लेकिन उसी पेज पर बैनर लीड छापी गयी है। शीर्षक है:- केंद्र हमें न रोके, हम उन्‍हें नहीं रोंकेंगे: अखिलेश। तीन फोटो के साथ छापी गया है यह साक्षात्‍कार। इंटरव्‍यू करने वाले का नाम है केके उपाध्‍याय। 

हद हो गयी है। अरे यही सब करना ही था, तो दो-चार दिन का आगा-पीछा ही कर लेते। कम से कम आपके ऊपर यह तो तोहमत नहीं लगती कि आप ने पत्रकारीय मूल्‍यों की हत्‍या कर दी। भविष्‍य में आपके जूनियर्स को यह कहने का मौका तो नहीं मिलता कि:- हमें तो विरासत में काली पत्रकारिता ही मिली है।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से

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नोएडा हिंदुस्‍तान में एक और विकेट चटका, दो और के अखबार छोड़ने की अटकलें

दैनिक हिंदुस्‍तान नोएडा कार्यालय में इन दिनों हताशा का माहौल है। इन्‍क्रीमेंट में उपेक्षा और भेदभाव का शिकार हुए लोग लगातार संस्‍थान का दामन छोड़ रहे हैं। इस माह अब तक तीन लोग संस्थान छोड़ चुके हैं, जिनमें विनीत राय, प्रभात उपाध्‍याय और मनोज द्विवेदी शामिल हैं। 

इस कड़ी में चौथा नाम जुड़ गया है अतुल का। अतुल स्‍पोर्ट्स डेस्‍क पर कार्यरत थे। उन्‍होंने अब दैनिक जागरण नोएडा का दामन थाम लिया है। वह जागरण में भी स्‍पोर्ट्स डेस्‍क पर ही सेवाएं देंगे। बताया जा रहा है कि अतुल ने हिंदुस्‍तान स्‍पोर्ट्स डेस्‍क पर पिछले कुछ माह से बदले हालात के चलते यहां से जाने में भलाई समझी। यहां कुछ दिनों पूर्व स्‍पोर्ट्स डेस्‍क एडिटर ने अपने एक करीबी को उंचे पैकेज पर एंट्री कराई है। इसे लेकर असंतोष का माहौल था। हाल में हुए इन्‍क्रीमेंट ने यह असंतोष और भड़का दिया। संपादक के चेलों की इस इन्‍क्रीमेंट में भी चांदी रही, जबकि चुपचाप काम करने वाले लोग हाशिये पर डाल दिए गए हैं। यहां से अभी दो विकेट और गिरने के संकेत हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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रामपुर हिन्दुस्तान ब्यूरो चीफ बने विपिन शर्मा

हिन्दुस्तान ने रामपुर में एक बार फिर फेरबदल किया है। यहीं स्टि्ंगर रहे विपिन कुमार शर्मा को उनकी मेहनत को देखते हुए मार्च माह में ऑनरोल लेते हुए स्टाफर बना दिया गया। अब बीते दिन उन्हें रामपुर में ही ब्यूरो चीफ बनाकर प्रोन्नति दे दी। जबकि पूर्व में ब्यूरो चीफ रहे संतोष सिंह के बाद आए संजय सिंह को फिर से मुरादाबाद रिपोर्टिंग टीम का हिस्सा बना दिया गया।

विपिन कुमार शर्मा करीब 15 साल से मीडिया जगत से जुड़े हैं। वर्ष 1999 में उन्होंने अमर उजाला से अपने कॅरियर की शुरूआत की। इसके बाद दैनिक जागरण में भी करीब आठ साल रहे। अमरोहा, संभल, बरेली में अपनी सेवाएं दीं। हिन्दुस्तान की मुरादाबाद मंडल में लॉचिंग के दौरान ही वह हिन्दुस्तान से जुड़़े।

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हिंदुस्‍तान नोएडा को छोड़ प्रभात और मनोज पहुंचे दैनिक जागरण

हिंदुस्‍तान प्रबंधन की भेदभाव पूर्ण नीतियों और दमनकारी माहौल से खफा होकर दो कर्मियों ने जागरण का दामन थाम लिया है। दैनिक हिंदस्‍तान नोएडा में कार्यरत प्रभात उपाध्‍याय एजुकेशन बीट देखते थे। प्रभात ने स्‍थानीय संपादक के बेहूदापूर्ण व्‍यवहार से नाराज होकर पिछले दिनों दैनिक जागरण का दामन थाम लिया। 

संपादक के ही रवैये से नाराज ट्रांस हिंडन ब्‍यूरो में कार्यरत मनोज द्विवेदी ने भी संस्‍थान को अलविदा कहकर दैनिक जागरण की राह पकड़ ली है। मनोज और हिंदुस्‍तान के ट्रांस हिंडन ब्‍यूरो प्रभारी महकार ढिल्‍लन के बीच पिछले दिनों कहासुनी हुई थी। महकार को प्रताप सोमवंशी का खास आदमी बताया जाता है। 

बताया जा रहा है कि हिंदुस्‍तान नोएडा और गाजियाबाद ब्‍यूरो से बडी संख्‍या में लोग दैनिक जागरण के नोएडा कार्यालय से संपर्क में जुटे हैं। हिंदुस्‍तान के नोएडा कार्यालय से अभी तीन विकेट और गिरेंगे। सूत्रों के अनुसार स्‍थानीय संपादक ने इस बार फिर इन्‍क्रीमेंट देते अपने चेलों को ठीक-ठाक वृद्धि दी, जबकि जो उनके करीबी नहीं थे उन्‍हें उपेक्षा का शिकार बनाया गया। संपादक के चेलों के चलते कार्यालय में काम क माहौल बिल्‍कुल नहीं रह गया है।

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खबर का खंडन छापने के बाद हिंदुस्तान के रिपोर्टर ने माफी भी मांगी

पाकुड़ (झारखण्ड): पाकुड़ में हिन्दुस्तान समाचार पत्र के ब्यूरो चीफ कार्तिक कुमार रजक ने पहले तो गलत खबर छापी लेकिन, खबर गलत होने के बाद वकील द्वारा प्लीडर नोटिस मिलते ही रिपोर्टर महोदय ने न सिर्फ खबर का खंडन निकाला बल्कि हाथ से लिख कर माफ़ी भी मांगी ।

वकील को इतने से संतोष न हुआ तो रिपोर्टर महोदय से टाइप करके माफ़ी मंगवाई । दरअसल, पत्रकार को लगा कि ये खबर छापकर पार्टी पर दबाव बनाकर उनसे कुछ जमीन की ब्लैकमेलिंग करेंगे लेकिन बात कुछ उल्टी हो गई । अब हिन्दुस्तान के ये पत्रकार महोदय खबर छापने के रोज हाथ-पांव जोड़ रहे हैं और रहम की भीख मांग रहे हैं ।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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जागरण के जिंदा और हिन्दुस्तान-अमर उजाला के मुर्दा पत्रकार

दैनिक जागरण नोएडा में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन इन दिनों मीडिया कर्मियों के बीच सबसे बड़ी खबर है। जागरण कर्मियों ने जो तेवर, उत्साह प्रबंधन के दमनात्मक रवैये के खिलाफ दिखाया है, वह दर्शाता है कि वाकई जागरण के कर्मी जर्नलिस्ट हैं, अन्यथा हिंदी अखबारी मीडिया में हिंदुस्तान  अखबार के भड़ैत पत्रकार भी हैं, जिनकी शशि शेखर के आगे बोली नहीं निकलती। कमोबेश यही हाल अमर उजाला के भी ज्यादातर पत्रकारों का हैं, जो सिर्फ पेट पाल रहे हैं। 

मित्रो, बात शुरू हुई थी जागरण कर्मियों की बहादुरी से। जागरण के कर्मचारियों ने अपने विरोध प्रदर्शनों से साबित कर दिया है कि उनमें वाकई अपने हक के लिए लड़ने की चेतना है। वे अगर समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बनने माध्यम हैं तो अपनी आवाज बुलंद करना भी उन्हें आता है। उनकी बहादुरी की चर्चा के साथ ही सहज ही नजर जाती है। देश के बड़े व्यापारिक घराने के अखबार, उसके संपादक और पत्रकारों पर। मजीठिया को लेकर एक ओर देशभर के पत्रकार ताल ठोंक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हिंदुस्तान के पत्रकारों की हरकत पर शर्म आती है। इन्हें न तो इससे कोई फर्क पड़ता है कि उन्हें मजीठिया मिलने जा रहा है या नहीं, उनके पदनाम में प्रबंधन किस तरह से खेल कर रहा है, उनकी प्रोन्नति में किस तरह का भेदभाव बरता जा रहा है आदि आदि। 

यहां तो जैसे मुर्दों की एक बस्ती बसती है जो ठंडी निष्क्रियता ओढ़े, चुपचाप उस यमराज के इशारे पर बोलती, चलती, देखती, सुनती है​ जिसका नाम शशि शेखर है। इस यमराज का एक चित्रगुप्त है। नाम है सुधांशु श्रीवास्तव। यमराज की भक्ति से दस साल में इन महानुभाव ने कहां से कहां तक का सफर तय क​र लिया। संस्थान के ​कर्मियों के हक मारने में यह चित्रगुप्त सबसे आगे है। शशि शेखर नामक यमराज के दूसरे सहयोगी, यानि जो शरीर से उसकी आत्मा को निकालने का काम करता है, उस यमदूत का नाम है प्रताप सोमवंशी। हिंदुस्तान के कर्मचारियों के हकों के ये तीन हत्यारे खुश हैं, प्रसन्न हैं, स्वतंत्र हैं, मस्त हैं, अघाये हैं, मोटाये हैं, चर्बियाए हैं। 

आइए, यमराज और उसके दो गुर्गों की दिनचर्या पर थोड़ी बातचीत करते हैं। 

यमराज की मर्जी हुई तो सुबह ही आफिस में आकर बैठ गया। इसके बाद तो न्यूजरूम में मजाल है किसी पत्रकार की कि वह मुंह खोल दे। बोले तो जुबान खींच ली जाएगी। यमराज के कानों तक आवाज पहुंची तो खाल उधेड़ने के अंदाज में वह चिघाड़ेगा। उसकी यह काया देखकर कभी—कभी तो शक होता है कि पत्रकार के वेश में यह शख्स जिंदगी कैसे गुजार आया। प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर वाले अंदाज में वह सभी पत्रकारों को अपना शिष्य समझता है। वह एक बार आवाज दे तो सारे मुर्दे उठकर दौड़ने लगते हैं।

यमराज का चित्रगुप्त। इसकी नीयत बहुत गुप्त है। गुप्त रूप से इसके कई चेले—चेलियां हैं। वह उनका खास ख्याल रखता है और चेले—चेलियां उसका ख्याल रखते हैं।​ जिसने खुश किया, उसे ओहदा ​तो मिला ही पैसे भी मिले। बाकी को बाबा जी का ठुल्लू यानि कि सब उल्लू। यह सबका बरोबर हिसाब रखता है। ​पेज पर खबरों की साइज से लेकर हिंदुस्तान के हर कर्मी के औकात की साइज तक का हिसाब। यमराज का जैसा हुक्म, वैसा हिसाब। पत्रकारिता जगत की आत्मा का कत्ल करने वाले आधुनिक यमराज का आधुनिक चित्रगुप्त। काइयांपन से भरपूर।

यमराज का दूसरा सहयोगी यमदूत। इस नगरी का सबसे रोचक, रोमांचक शख्स है। सोते, जागते, हगते, मूतते उसके श्रीमुख से बस ज्ञान टपकता है। ऐसा ज्ञान जिसे समेटने की कुव्वत रखने वाले अपनी हिंदुस्तान नगरी में बस दो-तीन लोग ही हैं। ये सभी दो-तीन खास लोग इस यमदूत के दरबान हैं, यानि आजकल उसके केबिन के ठीक सामने एक पांव पर खड़े रहते हैं। यमदूत को छींक भी आए तो वह उसमें भी तुक बैठाकर एक गजल पोंक मारता है। यह यमदूत कवि हृदय है, लेकिन संवेदना सिरे से गायब है। पत्रकारीय मूल्यों की आत्मा का हरण करने वाला यह यमदूत हिंदुस्तान नगरी में सबसे खतरनाक है। मजीठिया की आत्मा दरअसल इसी ने हर रखी है। 

साथियों जगो, आओ ​हम भी मिलकर आवाज बुलंद करें। आपका एक साथी।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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HT media are not paying the right wages

‪‎journalists‬ in HMVL are a harassed lot what to talk of ‎nonjournalists‬. If the managers had power they could have made the poor sweepers as executive and peon as senior executives so that they don’t have to bother for paying the wages as recommended by the highest court of the land Supreme Court New Delhi. 

No newspaper managements are in a mood to give any thought on the SC order come what may. Had there been any respect for the law they should have implemented the order in toto.

When the largest profit making HTMEDIA Ltd and Hindustan Media Ventures Ltd are not paying the right wages what to mention of the smaller companies. 

NOW IT IS TIME THE READERS SHOULD STOP BUYING NEWSPAPERS ON A FIXED DATE SO THAT THE MEDIA MANAGEMENT COMPANY SHOULD REALISE THEIR MISTAKES AND GIVE DUE SALARY TO ALL EMPLOYEES.

JARA SOCHIYE AUR SUJHAO DIJIYE.

Manara Zizi Majithiasangharshsamiti

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मजीठिया वेतनमान के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे एचटी मीडिया के पांच कर्मियों की सेवा समाप्त

पिछले सप्ताह हिन्दुस्तान टाइम्स नोएडा-दिल्ली में इंकऱीमेंट के लैटर सबको बांट दिए गए, लेकिन साथ ही यहां के एचटी आफिस दिल्ली से 4-5 लोगों को तुरंत प्रभाव से नौकरी से टरमिनेट भी कर दिया गया। इन लोगों का एक कसूर था कि इन बेचारे भोले कर्मचारियों ने पिछले दिनों यहां प्रबंधन के खिलाफ मजीठिया वेतनमान न देने पर सुप्रीम कोर्ट में शिकायत कर दी थी, जो कि यहां कि उच्च प्रबंधकीय वर्ग को कतई पसंद नहीं। 

प्रबंधन मान बैठा है कि कर लो, क्या कर लोगे, हम मजीठिया के हिसाब से वेतन आदि नहीं देंगे। और वाकई उसने ऐसा कर भी दिखाया। किसी को भी मजीठिया के हिसाब से एचटी और एचएमवीएल में भी वेतन नहीं दिया जा रहा है। मानना पड़ेगा कि इन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भी बढ़कर खुद का न्याय ठीक लगता है। 

अब सवाल ये है कि क्या किसी में दम बाकी है, जो कि यहां के शोषित कर्मचारियों को मजीठिया के अनुसार वेतन दिलवा पाए। न तो मोदी सरकार में और न ही खुद कांग्रेस में ऐसा कोई दिखता है, जो इसको लागू करवाने की ताकत रखे। सब डरते हैं भाई। किसी में भी हिम्मत नहीं। सवाल यह भी उठता है कि फिर क्या फायदा ऐसे कानून का और क्या फायदा सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिसे वो लागू भी नहीं करवा पाए। क्या किसी के पास इन सवालों के जवाब हैं?

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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नहीं सम्‍पादक जी, नहीं, ऐसा मत कीजिए

वैसे भी आपकी विश्‍वसनीयता पिछले कई बरसों से बुरी तरह खतरे में हैं, इसके बावजूद अगर आपने अपना रवैया नहीं सुधारा तो अनर्थ ही हो जाएगा। अब देख लीजिए ना, कि आपके संस्‍थान में क्‍या-क्‍या चल रहा है। राजधानी से प्रकाशित अखबारों पर एक नजर डालते ही हर पाठक को साफ पता चल जाता है कि मामला क्‍या है और खेल किस पायदान पर है। 

हिन्‍दुस्‍तान और अमर उजाला ने बिजली कम्‍पनियों द्वारा की गयी कई-कई सौ रूपयों की धोखाधड़ी की खबर को लीड छापी है। नभाटा ने कुमार विश्‍वास को लीड बनाया है। लेकिन दैनिक जागरण ने मोदी की जान पर खतरे को लीड बना दिया है। 

क्‍या वाकई नरेंद्र मोदी की जान को खतरा है ? अगर हां, तो इस खबर की अनदेखी करके बाकी अखबारों ने वाकई गम्‍भीर चूक की है। शर्मनाक चूक।

लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो आपको यह स्‍पष्‍ट करना होगा कि इस खबर की विश्‍वसनीयता क्‍या है।

कुमार सौवीर के एफबी वॉल से

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मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : शोभना भरतिया और शशि शेखर को शर्म मगर नहीं आती… देखिए इनका कुकर्म…

हिंदुस्तान अखबार और हिंदुस्तान टाइम्स अखबार की मालकिन हैं शोभना भरतिया. सांसद भी हैं. बिड़ला खानदान की हैं. पैसे के प्रति इनकी भूख ऐसी है कि नियम-कानून तोड़कर और सुप्रीम कोर्ट को धता बताकर कमाने पर उतारू हैं. उनके इस काम में सहयोगी बने हैं स्वनामधन्य संपादक शशि शेखर. उनकी चुप्पी देखने लायक हैं. लंबी लंबी नैतिक बातें लिखने वाले शशि शेखर अपने घर में लगी आग पर चुप्पी क्यों साधे हैं और आंख क्यों बंद किए हुए हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए. आखिर वो कौन सी मजबूरी है जिसके कारण वह अपने संस्थान के मीडियाकर्मियों का रातोंरात पद व कंपनी जबरन बदले जाने पर शांत बने हुए हैं.

शोभना भरतिया अपने इंप्लाइज की पद व कंपनी इसलिए बदल रही हैं ताकि मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से उन्हें सेलरी न देनी पड़े. पर कुछ हिंदुस्तानियों ने तय किया है कि वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएंगे. इन लोगों ने इस दिशा में पहला कदम भड़ास को सारे डाक्यूमेंट्स भेजकर उठाया है. जो दस्तावेज यहां दिए गए हैं, उसे आप ध्यान से देखिए और पढ़िए. दूसरों की आवाज उठाने वाले पत्रकारों के साथ रातोंरात कितना बड़ा छल हो जाता है लेकिन वे चुप्पी साधे रहने को मजबूर रहते हैं.

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि हिन्दुस्तान अखबार ने अपने एडिटोरियल के लोगों के पदनाम और कंपनी के नाम बदल दिए हैं. सूत्रों के मुताबिक ये संपादकीयकर्मी 28 अप्रैल 2015 को समस्त गलत व झूठे दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में दे देंगे. बताते चलें कि शोभना भरतिया और शशि शेखर दस्तावेजों में हेरफेर करके फर्जी तरीके से सैकड़ों करोड़ रुपये का सरकारी विज्ञापन छापने और इसका पेमेंट लेने के मामले के आरोपी भी हैं जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.  

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Newspapers readership IRS 2014 Download

Download Topline Newspapers Readership numbers… देश के बड़े अखबारों, मैग्जीनों आदि की लैटेस्ट या बीते वर्षों की प्रसार संख्या जानने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों या लिंक्स पर क्लिक करें…

IRS 2014 Topline Findings
https://bhadas4media.com/pdf/irs2014.pdf

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IRS 2013 Topline Findings
https://bhadas4media.com/pdf/irs2013.pdf

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IRS 2012 Q4 Topline Findings
https://bhadas4media.com/pdf/irs2014q4.pdf


इन्हें भी पढ़ें….

कई दिन चुप्पी साधे रहे जागरण और अमर उजाला का आज एक साथ आईआरएस रिपोर्ट पर अटैक, निशाने पर ‘हिंदुस्तान’

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See list of top publications / dailies, top language dailies, top english dailies and top magazines in india

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रीडर सर्वे : जागरण, हिंदुस्तान, भास्कर की शीर्ष अग्रता बरकरार, पत्रिका चौथे, अमर उजाला पांचवें पायदान पर

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अमर उजाला ने लखनऊ में दैनिक जागरण को पटका, बना नंबर वन

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हिंदुस्‍तान ने लिखा – बड़े अखबारों का विरोध बेकार, इंडियन रीडरशिप सर्वे की रिपोर्ट सही

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मजीठिया वेज बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई, भविष्य की रणनीति और लड़ने का आखिरी मौका… (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : सुप्रीम कोर्ट से अभी लौटा हूं. जीवन में पहली दफे सुप्रीम कोर्ट के अंदर जाने का मौका मिला. गेट पर वकील के मुहर लगा फार्म भरना पड़ा जिसमें अपना परिचय, केस नंबर आदि लिखने के बाद अपने फोटो आईडी की फोटोकापी को नत्थीकर रिसेप्शन पर दिया. वहां रिसेप्शन वाली लड़की ने मेरा फोटो खींचकर व कुछ बातें पूछ कर एक फोटो इंट्री पास बनाया. पास पर एक होलोग्राम चिपकाने के बाद मुझे दिया. जब तक कोर्ट नंबर आठ पहुंचता, केस की सुनवाई समाप्त होने को थी.

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में भड़ास यानि Bhadas4Media.com की पहल पर दायर सैकड़ों याचिकाओं की सुनवाई आज थी. जो साथी छुपकर लड़ रहे हैं, उनको मैं रिप्रजेंट कर रहा हूं. कोर्ट नंबर आठ में आइटम नंबर तीन था. दूसरे कई पत्रकार साथी और उनके वकील भी आए हुए थे. मामले की सुनवाई शुरू होते ही टाइम्स आफ इंडिया की तरफ से आए एक वकील ने कहा कि उनके खिलाफ जिस कर्मचारी ने याचिका दायर की थी, उसने वापस लेने के लिए सहमति दे दी है. इस पर कर्मचारी के वकील ने विरोध किया और कहा कि ये झूठ है. इसको लेकर न्यायाधीश ने लड़-भिड़ रहे दोनों वकीलों को फटकार लगाई और इस प्रकरण को अपने पास रोक लिया. इसी तरह वकील परमानंद पांडेय के एक मामले में जब दूसरे पक्ष के वकील ने कहा कि मजीठिया मांगने वाला कर्मी इसके दायरे में आता ही नहीं तो न्यायाधीश ने परमानंद पांडेय से पूछ लिया कि क्या ये सही है. पांडेय जी फाइल देखने लगे. तुरंत जवाब न मिलने पर न्यायाधीश ने इस मामले को भी होल्ड करा लिया. बाकी सभी मामलों में  कोर्ट ने सभी मालिकों को नोटिस भेजने का आदेश दिया है. इस नोटिस में कहा गया है कि क्यों न अखबार मालिकों के खिलाफ अवमानना का मुकदमा शुरू किया जाए. मामले की सुनवाई की अगली तारीख 28 अप्रैल है.

दोस्तों, एक मदद चाहिए. सभी अखबारों की डीएवीपी में दिखाई जाने वाली प्रसार संख्या, आरएनआई में दायर किए जाने वाले रिटर्न का डिटेल और कंपनी बैलेंस शीट आदि के आंकड़े चाहिए. जो साथी इसे मुहैया करा सकता है वह मुझे yashwant@bhadas4media.com पर मेल करे. अखबार मालिक अपने बचाव के लिए जो नई चाल चल रहे हैं, उसका काउंटर करने के लिए ये आंकड़े मिलने बहुत जरूरी हैं ताकि आम पत्रकारों को उनका हक दिलाया जा सके. मालिकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख बहुत तल्ख है. आज की सुनवाई से यह लग रहा है कि 28 अप्रैल की डेट पर सुप्रीम कोर्ट अखबार मालिकों के खिलाफ कोई कड़ा आदेश जारी कर सकता है. अगली डेट पर मालिकों की तरफ से क्या क्या नई चाल चली जाने वाली है, इसके कुछ डिटेल हाथ लगे हैं. उसी के तहत आप से सभी अखबारों की डीएवीपी में दिखाई जाने वाली प्रसार संख्या, आरएनआई में दायर किए जाने वाले रिटर्न का डिटेल और कंपनी बैलेंस शीट आदि के आंकड़े मांगे जा रहे हैं. आप लोग जिन-जिन अखबारों में हो, उन उन अखबारों के उपरोक्त डिटेल पता लगाएं. मैं भी अपने स्तर पर इस काम में लगता हूं.

दोस्तों बस कुछ ही दिनों का खेल है. जी-जान से सबको लग जुट जाना है. ये नहीं देखना है कि उसका वकील कौन है मेरा वकील कौन है. जो भी हैं, सब अच्छे हैं और सब अपने हैं. जो साथी अब तक इस लड़ाई में छुपकर या खुलकर शरीक नहीं हो पाए हैं, उनके लिए अब कुछ दिन ही शेष हैं. आप सिर्फ सात हजार रुपये में सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से बनने वाली अपनी सेलरी व अपना एरियर का हक पाने के लिए एडवोकेट Umesh Sharma​ के मार्फत केस डाल सकते हैं. एडवोकेट उमेश शर्मा से उनकी मेल आईडी legalhelplineindia@gmail.com या उनके आफिस के फोन नंबर 011-2335 5388 या उनके निजी मोबाइल नंबर 09868235388 के जरिए संपर्क कर सकते हैं.

आज यानि 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई को लेकर एडवोकेट उमेश शर्मा ने जो कुछ मुझे बताया, उसे मैंने अपने मोबाइल से रिकार्ड कर लिया ताकि आप लोग भी सुनें जानें और बूझें. क्लिक करें इस लिंक पर: https://www.youtube.com/watch?v=KTTDbkReQ1k

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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भड़ास की पहल पर दायर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार, 27 मार्च को होगी सुनवाई

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Dainik Hindustan 200 cr Government Advt Scam : SC to hear SLP of Shobhana Bharatia on 24 March

New Delhi : 200 crore Dainik Hindustan Government Advertisement scandal, the Supreme Court of India(New Delhi) has listed the Special Leave Petition (Criminal) No. 1603 / 2013 (Shobhana Bhartia Vs State of Bihar & another) for hearing on March, twenty four 2015 next. Meanwhile, the Superintendent of Police, Munger (Bihar), Mr. Varun Kumar Sinha has submitted the Counter-Affidavit on behalf of the Bihar Government to Mr.Rudreshwar Singh, the counsel for the Bihar Government in the Supreme Court in the Special Leave Petition (Criminal) No. 1603 of 2013. Now, the Counsel for the Bihar Government, Mr. Rudreshwar Singh has to file the Counter-Affidavit in the Supreme Court and has to argue on behalf of the Bihar Government in this case.

Reliable sources in New Delhi said that the Police Superintendent, Munger (Bihar), Mr.Varun Kumar Sinha, in the Counter-Affidavit to the Supreme Court, had clearly exposed the financial scandal of M/S. H.T.Media Ventures Limited (New Delhi). The Police Superintendent,Munger (Bihar) in his Counter-Affidavit said,” During police investigation and supervision, the Munger(Bihar) police have found ”facts” crystal -clear that theMunger edition of Dainik Hindustan is being printed and published, violating the rules and provisions of the Press & Registration of Books Act, 1867 and getting the government advertisements illegally. On the basis of facts ,coming in course of investigations,supervisions and available documents, the police find sufficient evidences against all the named accused persons in the Munger Kotwali Police Case No.445/2011 including the Chairperson of M/S. H.T.Media Ventures Limited (New Delhi) Shobhana Bhartia. I pray to the Hon’ble Supreme Court to reject the petition of the petitioner,Shobhana Bhartia in this instant case.”

It is worth mentioning that the senior lawyer of Bihar,ShriKrishna Prasad on January 13,2014 last, appearing on behalf of the O.P No.02, Mantoo Sharma (Munger, Bihar), had completed his argument in the court of Hon’ble Mr.Justice H.L.Dattu and Hon’ble Mr.Justice S.A.Bobde. The lawyer, ShriKrishna Prasad told the court of Hon’ble Mr.Justice H.L.Dattu and Hon’ble Mr.Justice S.A Bobde,” My Lord, this is one of the rarest cases of forgery,cheating and loot of the government revenue on behalf of the powerful media house of India,M/S H.T.Media Ventures Limited (New Delhi).On the order of the Munger Chief Judicial Magistrate, an F.I.R has been lodged with the Munger Kotwali P.S.,bearing case No.445/2011.After investigations and supervisions, the Dy.S.P and the S.P,Munger(Bihar) have submitted their ”Supervision- Reports No.01 & 02 in which they have found all charges against the named accused persons ‘prima-facie true’ And the investigations in this instant case is in full progress.The Hon’ble High Court of Patna has also rejected the prayer of the Chairperson of M/S H.T.Media Ventures Limited,Shobhana Bhartia in the Criminal Miscellaneous Case No.2951 and 16763 of 2012.So, I pray to the Hon’ble Court to reject the prayer of the petitioner,Shobhana Bhartia, and direct the Munger police to expedite the police investigations in this instant case.”

What is the F.I.R ?- On the basis of a Munger court complainant No.993(C)/2011 of the complainant,Mantoo Sharma,s/o Late Ganesh Sharma, resident -Puraniganj,P.S.- Kasim Bazar,District-Munger, an F.I.R has been lodged against (1) the Principal accused Shobhana Bhartia(Chairperson ,Hindustan Publication Group,Hindustan Media Ventures Limited,Head Office,18-20,Kasturba Gandhi Marg, New Delhi,(2) Shashi Shekhar,the Chief Editor, Dainik Hindustan(New Delhi), (3) Aakku Srivastawa,Acting Editor, Patna edition of Dainik Hindustan, (4) Binod Bandhu, Regional Editor, Bhagalpur edition of Dainik Hindustan and (5) Amit Chopra,Printer & Publisher of M/S Hindustan Media Ventures Limited,New Delhi.All of them have been accused of violating sections 8(B),14 & 15 of the Press & Registration of Books Act, 1867, and Sections 420/471 & 476 of Indian Penal Code, printing and publishing Bhagalpur and Munger editions of Dainik Hindustan ,using wrong Registration No. and obtaining the government advertisements of the Union and the State governments in crores in the Advertisement Head by presenting the forged documents of registration.

Statements under section 164 of Cr.P.C in the Munger Judicial Court: In the process of investigation, the Investigating Police Officer,Munger Kotwali,Bihar, has got the statements of the complainant,Mantoo Sharma, and other witnesses,(1) ShriKrishna Prasad,(2) Kashi Prasad,(3) Bipin Kumar Mandal under section 164 of Cr.P.C in the Munger judicial court on April, 14,1012.All the witnesses in their statements before the court have fully supported the allegations against the accused persons in the F.I.R ,bearing No. Munger Kotwali P.S Case No.445/2011.

I, here, annex  the court documents that   have been submitted to the Hon’ble Supreme Court by the Respondent No.02 of the S.L.P(Criminal) No.1603/2013,Mantoo Sharma of Munger(Bihar)

Here, I have annexed the (1)the Synopsis,(2) The List of Important Dates and(3)  the Counter-Affidavit of the Respondent No.02,Mantoo Sharma,Munger,Bihar in PDF files. 

By ShriKrishna Prasad
a senior advocate
Munger
Bihar
M-09470400813                                     

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हिंदुस्तान टाइम्स् ने आरटीआई एक्टिविस्ट की इज्जत उछाल दी

हेलो सर, नमस्‍कार, मेरा नाम सुमेर लाल शर्मा है. मेरा मोबाइल नंबर 09983148394 है. मैं एक आरटीआई एक्‍टीविस्‍ट हूं. हिन्‍दुस्‍तान टाईम्‍स ने दिनांक 18 दिसम्‍बर 2014 को जयपुर एडिशन में मुख्‍य पेज पर मेरे खिलाफ अपुष्‍ट, मुझ से बिना किसी व‍िषय पर बात किये, निराधार, झूठी व मेरी इज्‍जत तार तार करने वाली खबर छाप दी. इस अंग्रेजी अखबार ने मेरी व उन सभी लोगों की जो आरटीआई एक्‍टीविस्‍ट एवं व्हिसल ब्लोअर्स हैं, की इज्‍जत सरेआम नीलाम कर दी.

मसाला छापने के चक्‍कर में मेरे बारे में सब कुछ मनगढंत छाप कर मेरी छवि खराब करने की कोशिश की है. गैर-कानूनी रूप से मेरी बातचीत की वॉईस भी रिकोर्ड की जिसमें इन्‍हें कुछ भी हासिल नहीं हुआ. इस रिकार्डिंग के आधार पर उन्‍होंने मेरे खिलाफ न्‍यूज चलाई है. हिंदुस्तान टाइम्स में मेरे खिलाफ ”Barmer man turns RTI into a business, authorities struggle to find fault” शीर्षक से प्रकाशित न्‍यूज इस प्रकार है….

Barmer man turns RTI into a business, authorities struggle to find fault

THE RTI MIDDLEMAN CHARGES` 15 FOR INFO THAT WOULD OTHERWISE COST` 2

BARMER: On sale in Rajasthan’s Barmer district are government documents dug up with the help of Right to Information Act (RTI). An RTI activist has put up an advertisement, asking people to contact him for any kind of official record from gram panchayats in the district. The document he gets through RTI route is sold to information-seekers, at a premium.

RTI middleman Sumerlal Sharma of Barmer calls himself a whistleblower, has an office outside the court campus in Balotra and is amazingly fast — he gets you the documents within 2 hours, sparing one the official 30-day wait for official response.

When Hindustan Times contacted Sharma, he said he could get hold of any type of official records for the past fifteen years in gram panchayats through RTI. However, through Sharma, a page of the document will cost ` 15. If you had done it yourself, the documents would have cost you ` 2 a page.

Sabal Singh Bhati, a resident of Harsani village of Barmer district, said he had contacted Sumerlal Sharma for the official record of Harsani gram panchayats. Bhati said Sharma provided the records he asked for in an hour at ` 15 per page.Officials believe putting up RTI documents for sale is an offence, but were at loss to explain what law Sharma broke.

Barmer district collector Madhusudan Sharma said when the Act was approved even lawmakers wouldn’t have anticipated such a misuse. Sharma said he would look into the matter and take appropriate action. Chief executive officer of Barmer zila parishad Gopalram Birda said that as per his knowledge, government record couldn’t be sold this way. He was misusing the act.

सुमेर गौड़
sumer gaur
sumergaur4@gmail.com

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Dainik Hindustan Advt Scam : next hearing date 13 January

New Delhi : 200 crore Dainik Hindustan Government Advertisement  scandal, the Supreme Court has listed the Special Leave Petition (Criminal) No.1603/2013 (Shobhana Bhartia Vs State of Bihar & another) for  hearing on January thirteen, 2015 next. Meanwhile, the  Superintendent of Police,Munger(Bihar), Mr.Varun Kumar Sinha has submitted the Counter-Affidavit on behalf of the Bihar Government to Mr.Rudreshwar Singh, the counsel  for the Bihar Government in the Supreme Court in the Special Leave Petition (Criminal) No. 1603 of 2013 .Now, the Counsel for the Bihar Government, Mr. Rudreshwar Singh  has to  file the Counter-Affidavit  in the Supreme Court and has to argue on behalf of the Bihar Government in this case.

Meanwhile, reliable sources  in New Delhi said that the Police Superintendent, Munger (Bihar), Mr.Varun Kumar Sinha, in the Counter-Affidavit to the Supreme Court, had clearly exposed the financial scandal of  M/S. H.T. Media Ventures Limited (New Delhi).

The Police Superintendent, Munger(Bihar) in his Counter-Affidavit said, “During police investigation and supervision, the Munger (Bihar) police have found ”facts”  crystal -clear that the Munger edition of Dainik Hindustan is being printed and published, violating the rules and provisions of the Press & Registration of Books Act, 1867 and getting the government advertisements illegally. On the basis of facts, coming in course of investigations,supervisions and available documents, the police  find sufficient evidences against all the named accused persons  in the Munger Kotwali Police Case No.445/2011 including the Chairperson of M/S. H.T.Media Ventures Limited(NewDelhi) Shobhana Bhartia. I pray  to the Hon’ble Supreme Court  to reject the petition of the petitioner,Shobhana Bhartia in this instant case.”

It is worth mentioning that the senior lawyer of Bihar, ShriKrishna Prasad on January 13,2014 last, appearing on behalf of the O.P No.02, Mantoo Sharma (Munger, Bihar),  had completed his argument in the court of Hon’ble Mr.Justice H.L.Dattu and Hon’ble Mr.Justice S.A.Bobde.

The lawyer,ShriKrishna Prasad told  the court of Hon’ble Mr.Justice H.L.Dattu and Hon’ble Mr.Justice S.A Bobde,” My Lord, this is one of the rarest cases of forgery,cheating and loot of the government revenue on behalf of the powerful media house of India,M/S  H.T.Media Ventures Limited( New Delhi).On the order of the Munger Chief Judicial Magistrate, an F.I.R has been lodged with the Munger Kotwali P.S.,bearing case No.445/2011.After investigations and supervisions, the Dy.S.P and the SP Munger (Bihar) have submitted  their ”Supervision- Reports No.01 & 02 in which  they have found  all charges against the named accused persons ‘prima-facie true’ And the investigations in this instant case is in full progress.The Hon’ble High Court of Patna has also rejected the prayer of the Chairperson of M/S H.T.Media Ventures Limited,Shobhana Bhartia  in the Criminal Miscellaneous Case No.2951 and 16763 of 2012.So, I pray to the Hon’ble Court to reject the prayer of the petitioner,Shobhana Bhartia, and direct the Munger police to expedite the police investigations in this instant case.”

What is the F.I.R ?- On the basis of a Munger court complainant No.993(C)/2011 of the complainant,Mantoo Sharma, s/o Late Ganesh  Sharma, resident -Puraniganj, P.S.- Kasim Bazar,District-Munger, an F.I.R has been  lodged against (1) the Principal accused Shobhana Bhartia (Chairperson, Hindustan Publication Group, Hindustan Media Ventures Limited,Head Office,18-20,Kasturba Gandhi Marg, New Delhi, (2) Shashi Shekhar,the Chief Editor, Dainik Hindustan (New Delhi), (3) Aakku Srivastawa,Acting Editor, Patna edition of Dainik Hindustan, (4) Binod Bandhu, Regional Editor, Bhagalpur  edition of Dainik Hindustan and (5)  Amit Chopra,Printer & Publisher of M/S Hindustan Media Ventures Limited,New Delhi. All of them have been accused of violating  sections  8(B),14 & 15  of the Press & Registration of Books Act, 1867,  and Sections 420/471 & 476 of Indian   Penal Code, printing and publishing  Bhagalpur and  Munger editions of Dainik Hindustan ,using wrong  Registration No. and obtaining  the government advertisements of the Union and the State governments in crores in the Advertisement Head  by presenting the forged  documents of registration.
Statements under section  164 of Cr.P.C in the Munger Judicial Court: In the process of  investigation, the Investigating Police Officer,Munger Kotwali,Bihar,    has got the statements of the complainant,Mantoo Sharma, and other witnesses,(1) ShriKrishna Prasad,(2) Kashi Prasad,(3) Bipin Kumar Mandal under section 164 of  Cr.P.C  in the Munger judicial court on April, 14,1012.All the witnesses   in their statements   before the court  have fully supported  the allegations against  the accused  persons  in the F.I.R ,bearing No. Munger Kotwali P.S Case No.445/2011.(EOM)

By ShriKrishna Prasad
senior advocate
Munger
Bihar
Mob: 09470400813

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सड़क हादसे में हिंदुस्‍तान के पत्रकार अमरेश मिश्र की मौत

इलाहाबाद यूनिट के अंतर्गत आने वाले प्रतापगढ़ जिले में तैनात हिन्दुस्तान’ के पत्रकार अमरेश मिश्र की सोमवार रात सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसा प्रतापगढ़ के लालगंज अझारा में रात तकरीबन आठ बजे हुआ। अमरेश प्रतापगढ़ कार्यालय से काम निपटाकर बाइक से कौशाम्बी स्थित अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल अमरेश काफी समय पर सड़क पर ही पड़े रहे। बाद में सड़क किनारे तड़प रहे अमरेश को एक एंबुलेंस चालक ने देखा तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई।

जांच के बाद डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कौशाम्बी के दारानगर के रहने वाले अमरेश मिश्र की छवि तेज तर्रार पत्रकार की थी। कम समय में ही उन्होंने पत्रकारिता जगत में अपनी लेखन शैली से अलग पहचान बनाई थी। लंबे समय से ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े हुए थे। अमरेश इन दिनों प्रतापगढ़ ब्यूरो में कार्यालय संवाददाता के तौर पर तैनात थे। अमरेश के निधन पर पत्रकारों ने गहरा दुख व्‍यक्‍त किया है। 

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फर्जी बिल लगाने पर हिंदुस्‍तान ने अनिल के. अंकुर को फोर्स लीव पर भेजा

हिंदुस्‍तान, लखनऊ में कार्यरत एक पत्रकार को गलत तरीके से फर्जी बिल-बाउचर लगा‍कर प्रबंधन से पैसा ऐंठने की कोशिश महंगी पड़ गई. प्रबंधन ने शक होने पर पूरे मामले की जांच अपने स्‍तर से कराई और लगभग साठ हजार का घपला सामने आने के बाद उक्‍त पत्रकार को फोर्स लीव पर भेज दिया गया है. यह पत्रकार लंबे समय से हिंदुस्‍तान से जुड़ा हुआ था. यह भी खबर आ रही है कि प्रबंधन ने उससे इस्‍तीफा भी मांग लिया है. 

जानकारी के अनुसार हिंदुस्‍तान में विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत अनिल के. अंकुर को प्रबंधन ने लोकसभा चुनाव के दौरान रिपोर्टिंग करने के लिए कई प्रदेशों में भेजा था. अनिल ने रिपोर्टिंग भी की. उनके साथ कुछ अन्‍य रिपोर्टरों को भी इसी तरह रिपोर्टिंग के लिए प्रबंधन ने भेजा था. बताया जा रहा है कि सभी रिपोर्टरों ने इस दौरान हुए खर्च के बिल-बाउचर जमा किए, लेकिन अनिल के. अंकुर का बिल बाउचर सबसे ज्‍यादा था. पर्सनल और फाइनेंस विभाग को बिल-बाउचर के फर्जी होने का संदेह हुआ. 

बताया जा रहा है कि इसके बाद प्रबंधन ने इस पूरे बिल-बाउचर की अपने स्‍तर से जांच कराई, जिसमें सामने आया कि लगभग पचास से साठ हजार रुपए का गलत बिल-बाउचर अंकुर ने लगाया था. इस कारण प्रबंधन ने उन्‍हें फोर्स लीव पर भेज दिया. प्रबंधन को इसके पहले भी अंकुर की कई शिकायतें मिल चुकी थीं, लेकिन पकड़ होने के चलते उन्‍हें अभयदान मिलता रहा, लेकिन इस बार मामला वरिष्‍ठ अधिकारियों तक पहुंच जाने के चलते उनके बचने की गुंजाइश खत्‍म हो गई. 

खबर यह भी आ रही है कि प्रबंधन ने अब अनिल के अंकुर से इस्‍तीफा देने को कह दिया है. देर सबेर उनसे इस्‍तीफा देना पड़ सकता है. गौरतलब है कि अनिल के अंकुर अपने किसी परिजन के नाम से अखबार भी निकालते हैं. हिंदुस्‍तान में काम करने की हनक के नाम पर उन्‍होंने अपने अखबार के लिए भी काफी विज्ञापन बटोरे. इस संदर्भ में अनिल के अंकुर से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. 

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हिंदुस्‍तान, अलीगढ़ में फाइनेंस अधिकारी ने महिला कर्मचारी से की छेड़छाड़, जांच की तैयारी

हिंदुस्‍तान, अलीगढ़ में एक महिला कर्मचारी से छेड़छाड़ के मामले को लेकर घमासान मचा हुआ है. अखबार के फाइनेंस डिपार्टमेंट के एक अधिकारी की हरकत ने पूरे समूह को शर्मसार किया है. इसकी सूचना आगरा, मेरठ होते हुए दिल्‍ली तक पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक आरोप अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. खबर आ रही है कि मामले की जांच के लिए टीम गठित किए जाने की तैयारी है.

 

बताया जा रहा है कि अखबार में सर्कुलेशन डिपार्टमेंट में लगभग चार महीने पूर्व एक युवती ने नौकरी ज्‍वाइन की. उसकी ड्यूटी लोगों से अखबार पहुंचने के बारे में जानकारी आदान प्रदान करने की है. बताया जाता है कि इस युवती के नौकरी ज्‍वाइन करने के बाद से ही यूनिट में बैठने वाला फाइनेंस विभाग का अधिकारी सिटी ऑफिस में दिखाई पड़ने लगा. सूत्र बताते हैं कि वो युवती के पीछे कई दिनों तक पड़ा रहा.युवती ने उसे कभी भाव नहीं दिया. इसके बाद भी उसके हरकत में कोई कमी नहीं आई. 

तीन दिन पहले की बात है. युवती जब बाथरूम की तरफ गई तो लंबे समय से नजर गड़ाए उक्‍त फाइनेंस अधिकारी भी उसके पीछे-पीछे बाथरूम की तरफ चला गया तथा उसे पकड़ लिया. उसके साथ छेड़खानी और बदतमीजी करने लगा, जिस पर युवती बड़ी जोर से चीखी. चीख सुनकर उस दौरान मौजूद लोग भी हतप्रभ रह गए. इसके बाद युवती ने फाइनेंस अधिकारी पर आरोप लगाते हुए जमकर भड़ास निकाली. अन्‍य सहयोगियों ने किसी तरह बीच बचाव कर मामले को तात्‍कालिक तौर पर बढ़ने से रोका.

खबर है कि पीडि़त युवती ने इसकी शिकायत आगरा और मेरठ के वरिष्‍ठ और जिम्‍मेदार अधिकारियों से की. यह मामला इसके बाद दिल्‍ली तक भी पहुंच गया है. हालांकि अभी तक आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है. बताया जा रहा है कि इस मामले की जांच के लिए प्रबंधन एक टीम भेजने वाला है. उसकी रिपोर्ट के बाद ही उक्‍त फाइनेंस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इस बीच भुक्‍तभोगी युवती दो दिनों तक ऑफिस नहीं आई. तीसरे दिन वह ऑफिस आई है, जिससे माना जा रहा है कि प्रबंधन के लोगों ने कार्रवाई का आश्‍वासन दिया है. 

गौरतलब है कि इसके पहले लखनऊ में भी ऐसा ही एक वाकया सामने आया था. एनई के पद पर तैनात एक पत्रकार ने एक महिला कर्मचारी के साथ छेड़खानी की थी. प्रबंधन ने इस पूरे मामले की जांच कराई थी. जांच में सभी आरोप सही पाए जाने के बाद उक्‍त एनई को हिंदुस्‍तान प्रबंधन ने अखबार से बाहर निकाल दिया था. प्रबंधन को भी ऐसे मामले शर्मसार करने वाले हैं. एक तरफ अखबार मलाला दिवस मनाता है तो दूसरी तरफ उसके ही कर्मचारी महिला सहयोगियों के साथ ऐसी हरकत करने पर उतारू रहते हैं. 

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