पीवी चंद्रन आईएनएस के नए अध्यक्ष (देखें नई कार्यकारिणी के सदस्यों की पूरी सूची)

बेंगलुरु : इंडियन न्यूज पेपर सोसायटी (आईएनएस) की शुक्रवार को हुई वार्षिक आम बैठक में मातृभूमि समूह के पीवी चंद्रन को साल 2015-16 के लिए आईएनएस का अध्यक्ष चुना गया। चंद्रन, किरण बी वडोडारिया की जगह लेंगे। वह मातृभूमि समूह के प्रबंधक निदेशक और पूर्णकालिक निदेशकों में से एक हैं। वह ‘गृहलक्ष्मी’ का कामकाज देखते हैं जो महिलाओं पर एक विशिष्ट पत्रिका है।

राष्ट्रदूत साप्ताहिक के सोमेश शर्मा आईएनएस के नए डिप्टी प्रेजिडेंट जबकि बिजनेस स्टैंडर्ड के अकीला उरनकर वाइज प्रेजिडेंट होंगे। इकॉनमिक टाइम्स के मोहित जैन को मानद कोषाध्यक्ष और वी शंकरन को महासचिव चुना गया है। आईएनएस की नई कार्यकारिणी के अन्य सदस्य हैं :

  1. एल अदिमूलम (हेल्थ एंड द एंटीसेप्टिक)
  2. एस बालसुब्रह्मण्यम आदित्यन (डेली थांथी)
  3. पवन अग्रवाल (दैनिक भास्कर, भोपाल)
  4. समाहित बल (प्रगतिवादी)
  5. के बालाजी (द हिंदू वीकली)
  6. वीके चोपड़ा (दैनिक असम)
  7. विजय कुमार चोपड़ा (पंजाब केसरी जालंधर)
  8. विजय जवाहरलाल दर्डा (लोकमत)
  9. जगजीत सिंह दर्डी (छाड़दिकला डेली)
  10. विवेक गोयनका (द इंडियन एक्सप्रेस मुंबई)
  11. महेंद्र मोहन गुप्ता (दैनिक जागरण)
  12. प्रदीप गुप्ता (डेटा क्वेस्ट)
  13. संजय गुप्ता (दैनिक जागरण वाराणसी)
  14. शैलेष गुप्ता (मिड-डे)
  15. राज कुमार जैन (नवभारत टाइम्स)
  16. सीएच किरन (विपुल और अन्नदाता)
  17. आर लक्ष्मीपति (दिनामलार)
  18. राजुल माहेश्वरी (अमर उजाला)
  19. जयंत मामेन मैथ्यू (मलयाला मनोरमा)
  20. विलास ए मराठे (दैनिक हिंदुस्तान, अमरावती)
  21. नरेश मोहन (संडे स्टेट्समैन)
  22. अनंत नाथ (गृहशोभिका, मराठी)
  23. डीडी पुरकायस्था (आनंद बाजार पत्रिका)
  24. आर एम आर रमेश (दिनाकरन)
  25. के राजा प्रसाद रेड्डी (साक्षी, विशाखापट्टनम)
  26. इंद्रानिल रॉय (आउटलुक)
  27. राकेश शर्मा (आज समाज)
  28. मनोज कुमार सोंथालिया (द न्यू इंडियन एक्सप्रेस)
  29. किरन डी ठाकुर (तरुण भारत, बेलगांव)
  30. एम वेंकटेश (हिंदुस्तान टाइम्स)
  31. विनय वर्मा (द ट्रिब्यून)
  32. प्रताप जी पवार (सकाल)
  33. एम पी वीरेंद्रकुमार (मातृभूमि)
  34. जैकब मैथ्यू (वनिता)
  35. बाहुबलि एस शाह (गुजरात समाचार)
  36. होरमुसजी एन कामा (बॉम्बे समाचार वीकली)
  37. कुंदन आर व्यास (व्यापार मुंबई)
  38. आशीष बग्गा (इंडिया टुडे)
  39. के एन तिलक कुमार (डेक्कन हेराल्ड और प्रजावाणी)
  40. रविंद्र कुमार (द स्टेट्समैन)
  41. किरन बी वडोडारिया (समभाव मेट्रो)।
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अखबार मालिकों के संगठन ‘आईएनएस’ की मांग- पत्रकारों के लिये वेतनबोर्ड की व्यवस्था खत्म हो

बेंगलुरु : देश के समाचारपत्रों के सबसे बड़े संगठन इंडियन न्यूज़पेपर्स सोसाइटी (आईएनएस) ने सरकार से अपील की कि वे प्रिंट मीडिया की आर्थिक व्यवहार्यता के लिये अखबारों के पत्रकार एवं गैरपत्रकार कर्मियों के लिये वेतनबोर्ड की प्रणाली समाप्त कर दे और सरकारी विज्ञापनों की दरों में वृद्धि करे. आईएनएस की 76वीं वार्षिक महासभा को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष किरण बी वडोदरिया ने कहा कि सरकार को प्रिंट मीडिया की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये सकारात्मक कदम उठाने चाहिये. मजीठिया वेतनबोर्ड की सिफारिशों के कारण वेतन में असहनीय वृद्धि और सरकारी विज्ञापनों के बजट में कटौती के कारण देश के तमाम छोटे एवं मझोले प्रकाशनों के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है. श्री वडोदरिया ने कहा कि दशकों पुरानी वेतन निर्धारित करने की संवैधानिक प्रणाली को जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है.

उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व श्रम मंत्री रवीन्द्र वर्मा की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय श्रमिक आयोग ने भी 2002 में सिफारिश की थी कि किसी भी उद्योग में कर्मचारियों के वेतन तय करने के लिये किसी वेतनबोर्ड अथवा कोई अन्य संवैधानिक व्यवस्था की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि आईएनएस का मानना है कि चूँकि किसी भी उद्योग में वेतनबोर्ड की व्यवस्था नहीं है तो फिर प्रिंट मीडिया में इसके होने का कोई औचित्य नहीं है. इसलिये भविष्य में पत्रकार एवं गैर पत्रकार कर्मियों के लिये कोई वेतन बोर्ड नहीं गठित किया जाना चाहिये. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के दृश्य एवं श्रव्य प्रचार विभाग (डीएवीपी) के विज्ञापनों की अत्यंत कम दरों से भी अखबारों की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हो रही है. बहुत से छोटे एवं मझोले अखबारों के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है. विज्ञापन दर निर्धारण समिति को प्रिंट मीडिया के लिये आकर्षक दरें निर्धारित करनी चाहिये और डीएवीपी को नियमों का पालन करते हुए छोटे मझोले एवं बड़े अखबारों को समानता से विज्ञापन आवंटित करने चाहिये.

वडोदरिया ने यह भी कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की व्यवस्था में अखबारों से संबंधित सामग्री पर कर का बोझ नहीं बढ़े. उन्होंने पेड न्यूज को लेकर प्रस्तावित प्रेस और पुस्तक एवं प्रकाशन पंजीकरण विधेयक 2015 में किये जा रहे कड़े प्रावधानों का विरोध करते हुए कहा कि इससे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के कामकाज पर सीधा दुष्प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने महाराष्ट्र में राज्य सरकार द्वारा पत्र पत्रिकाओं में सरकार के खिलाफ लिखने पर पुलिस कार्रवाई के अधिकार संबंधी 27 अगस्त को जारी आदेश को वापस लिये जाने की माँग की और कहा कि यह संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है. महासभा में आईएनएस के उपाध्यक्ष पी वी चंद्रन एवं सोमेश शर्मा, मानद् कोषाध्यक्ष मोहित जैन, निदेशक एच एन कामा और नरेश मोहन भी उपस्थित थे.

 

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Kiran Vadodaria elected INS president

Kiran B. Vadodaria of Sambhaav Metro was elected president of Indian Newspaper Society (INS) for 2014-15 at its 75th annual general meeting on Friday. P.V. Chandran (Grihalakshmi) will be the deputy president, Somesh Sharma (Rashtradoot Saptahik) the vice-president, Mohit Jain (Economic Times) the honorary treasurer and V. Shankaran the secretary-general of INS.

Other members of the executive committee are L. Adimoolam (Health & The Antiseptic), S.B. Aditiyan (Maalai Malar), Pawan Agarwal (Dainik Bhaskar, Bhopal), Samahit Bal (Pragativadi), K. Balaji (The Hindu), V.K. Chopra (Dainik Asam), Vijay Kumar Chopra (Punjab Kesari, Jalandhar), Rishi Darda (Lokmat, Ahmednagar), Vijay Darda (Lokmat), Jagjit Singh Dardi (Charhdikala daily), Ravindra Dhariwal (Navbharat Times), Viveck Goenka (The Indian Express, Mumbai), Mahendra Mohan Gupta (Dainik Jagran), Pradeep Gupta (Dataquest), Sanjay Gupta (Dainik Jagran, Varanasi), and Shailesh Gupta (Mid-Day).

Also on the executive committee are C.H. Kiron (Vipula & Annadata), R. Lakshmipathy (Dinamalar), Rajul Maheshwari (Amar Ujala), Jayant Mammen Mathew (Malayala Manorama), Vilas A. Marathe (Dainik Hindusthan, Amravati), Naresh Mohan (Sunday Statesman), Abhijit Pratap Pawar (Gomantak, Goa), RMR Ramesh (Dinakaran), K. Raja Prasad Reddy (Sakshi, Vishakhapatnam), Rakesh Sharma (Aaj Samaj), Manoj Kumar Sonthalia (The New Indian Express), Akila Urankar (Business Standard), Kiran D. Thakur (Tarun Bharat, Belgaum), M. Venkatesh (Hindustan Times), Vinay Verma (The Tribune), Pratap G. Pawar (Sakal), M. P. Veerendrakumar (Mathrubhumi), Jacob Mathew (Vanitha), Bahubali S. Shah (Gujarat Samachar), Hormusji N Cama (Bombay Samachar weekly), T. Venkttaram Reddy (Deccan Chronicle), Kundan R. Vyas (Vyapar, Mumbai), Ashish Bagga (India Today), K.N. Tilak Kumar (Deccan Herald & Prajavani), and Ravindra Kumar (The Statesman).

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New law needed to govern salary in print media : Ravindra Kumar

New Delhi: Outgoing president of Indian Newspaper Society (INS) Ravindra Kumar today (Friday) said a new law is required to govern salary and other issues relating to print media and called the wage boards “life-threatening disease” as their recommendations have put a “crippling burden” on the industry. In his Presidential address at the 75th annual general meeting of INS, Kumar said implementation of recommendations of the Majithia Wage Board has badly hit all newspaper establishments and urged the government to do away with them.

“The wage board has already placed a crippling burden on all newspaper establishments, and its weight will affect us more with each passing year,” he said.

Demanding immediate scrapping of the “wholly one sided” Working Journalists and Other Newspaper Employees Act, he said a new law should be enacted taking on board views of all stakeholders. INS was founded in 1939 and it comprises the owners, proprietors and publishers of print media. Kumar said it was time to press for a new law when the NDA government was revisiting “all institutional frameworks including erstwhile holy cows such as Planning Commission”.

Kumar said the INS has long maintained that government must do away with Wage Boards because they are “anachronistic, unrealistic and wholly arbitrary in their scope and ambit”.

“The time to resist the infliction of Wage Board is now, not once they are announced because then a fait accompli will be presented to us,” he said. Kumar also expressed concern over “paid news” and said the situation must change if press is to remain “vibrant, free and relevant”.

“It is time to accept that a practice as reprehensible as ‘paid news’ — an oxymoron foisted upon Indian society by the greed of some of us — is the inevitable consequence of a situation where the reader pays a fraction of the cost of a newspaper,” he said.

The outgoing INS president also called upon the members to deal with policy decisions concerning newsprint, wages and taxation in a “united fashion”. Referring to revenue collection, he said some state governments have been playing “ducks and drakes” with newspapers withholding advertisements to some and stopping payments to others.

He also slammed West Bengal Government for “obdurate position” taken by it in settling newspaper bills, particularly for refusing to settle bills of the previous regime. Kumar also delved on issues concerning newsprint imports and DAVP tariffs. Kiran B Vadodaria of Gujarati newspaper Sambhaav Metro was today elected as the new President of the INS for 2014-15, succeeding Kumar.

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