केजरीवाल ने माफी मांगने का जो रास्ता ढूंढा है, मेरी राय में वह सर्वश्रेष्ठ है : डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पहले विक्रमसिंह मजीठिया और अब नितिन गडकरी से माफी मांगकर भारत की राजनीति में एक नई धारा प्रवाहित की है। यह असंभव नहीं कि वे केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और अन्य लोगों से भी माफी मांग लें। अरविंद पर मानहानि के लगभग 20 मुकदमे चल रहे हैं। अरविंद ने मजीठिया पर आरोप लगाया था कि वे पंजाब की पिछली सरकार में मंत्री रहते हुए भी ड्रग माफिया के सरगना हैं।

अरविंद केजरीवाल ने मीडिया मालिकों को ब्लैकमेलर कह दिया, देखें वीडियो

जनता का रिपोर्टर डाट काम नामक वेबसाइट के एक कार्यक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मीडिया मालिकों को खुलेआम ब्लैकमेलर कह दिया. साथ ही ये भी बताया कि मजीठिया वेज बोर्ड से बचने के लिए अखबारों के मालिक लगातार दिल्ली सरकार पर दबाव बना रहे हैं.

केजरीवाल यानि हर रोज नया बवाल

अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी में इन दिनों जो कुछ चल रहा है, उससे राजनीतिज्ञों के प्रति अविश्वास और गहरा हुआ है। वे उम्मीदों को तोड़ने वाले राजनेता बनकर रह गए हैं। साफ-सुथरी राजनीति देने का वादा करके बनी आम आदमी पार्टी को सत्ता देने में दिल्ली की जनता ने जितनी तेजी दिखाई, उससे अधिक तेजी केजरीवाल और उनके दोस्तों ने जनता की उम्मीदें तोड़ने में दिखाई है।

एक था केजरीवाल… एक थी आम आदमी पार्टी…

Sheetal P Singh : आम आदमी पार्टी…  वे चौराहे पर हैं और उनकी याददाश्त जा चुकी है। चौराहे पर कोई साइनबोर्ड नहीं है न किसी क़िस्म का मील का पत्थर! भारतीय मध्यम वर्ग के २०११-२०१७ के दौरान जगमगाये और बुझ रहे दियों के मानिंद दिवास्वप्न हैं। उनकी समस्यायें अनंत हैं पर उनमें संभावनायें भी कम नहीं पर निश्चित ही वे एक ऐसी बारात हैं जिनमें कोई बूढ़ा नहीं जो बिना साइनबोर्ड के चौराहे पर फँस जाने पर रास्ता सुझा सके। उन्होंने ऐतिहासिक काम हाथ में लिये पर उनके सारे काम अधूरे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य में उनके आउट आफ बाक्स फ़ैसलों से वामपंथी तक एकबारगी चकरा गये पर उनके पास फालोअप न था और ब्यूरोक्रेसी वे पहले ही मोदी के हाथ LG को हार चुके थे।

इन 10 कारणों से MCD चुनाव हारेंगे केजरीवाल

एक कहावत है अति भक्ति, चोरस्य लक्षणम्। यानी बहुत विनम्र इंसान, घातक
होता है। अरविंद केजरीवाल इस कहावत के लिए बिल्कुल सटीक उदाहरण बन गए
हैं। कैसे ? जनता को ऐसा लगता है कि उन्होंने जो कहा, वह किया नहीं।
मसलन, बेहद लाचार व शरीफ बन कर बार बार खांसते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार
और नेताओं की मनमानी से अजिज आ चुकी दिल्ली की जनता को कहा कि हम लाल
बत्ती वाली गाड़ी नहीं लेंगे। सरकारी मकानों में नहीं रहेंगे।
सुरक्षाकर्मियों का घेरा नहीं रखेंगे। जनता का पैसा बर्बाद नहीं करेंगे।
लाेकपाल लाएंगे। सरकार के कामकाज में पारदर्शिता लाएंगे। शीला दीक्षित
काे जेल पहुंचवाएंगे। आैर क्या क्या गिनवाएं..आप खुद ही गिन लीजिए।
दिल्लीवाले उनके झांसे में आ गए।

केजरीवाल महोदय को ये एक श्रेय तो जरूर जाता है….

Rajiv Nayan Bahuguna : अरविन्द केजरीवाल को एक श्रेय तो जाता है कि उसने धुर विरोधी कांग्रेस और भाजपा को कम से कम एक मुद्दे पर एकजुट कर दिया। एक दूसरे से फुर्सत पाते ही वे दोनों केजरीवाल पर टूट पड़ते हैं। क्यों? उदाहरण से समझाता हूं।

चेहरा चमकाने के लिए लाइक्स पाने का चक्कर : केजरीवाल जनता के लाखों रुपये रोजाना देते हैं गूगल और फेसबुक को!

प्रशांत भूषण ने खोली पोल…. दिल्ली सरकार ने टॉक टू एके नामक जो प्रोग्राम कराया, उसके लिए सोशल मीडिया पर पूरे 1.58 करोड़ रुपये लुटाए. ये पैसे आम आदमी पार्टी के नहीं बल्कि जनता के थे. केजरीवाल सोशल मीडिया पर लाइक्स खरीदने के लिए हर दिन 10-10 लाख रुपये गूगल और फेसबुक आदि को दिए. इसी तरह केजरीवाल ने ताज पैलेस होटल से 12 हजार रुपये प्रति थाली के हिसाब से सैकड़ों थाली खरीद कर अपने नेताओं कार्यकर्ताओं को दिल्ली सरकार के दो साल पूरे होने पर पार्टी दी थी. यहां भी जो पैसा खर्च हुआ वह जनता का था, आम आदमी पार्टी का नहीं.

केजरीवाल जी, नई राजनीति करने की बात करते हुए सत्ता में आए थे इसलिए आप तो मिसाल कायम कीजिए

Amitabh Thakur : क्या दिल्ली के पूर्व परिवहन मंत्री गोपाल राय ‘सत्ता भ्रष्ट करती है और पूर्ण सत्ता पूरी तरह भ्रष्ट करती है” के एक और उदहारण हैं या अभी अंतिम टिप्पणी देना जल्दीबाज़ी होगी? इस मामले में सच्चाई का सामने आना नितांत आवश्यक है, अतः मैं एसीबी दिल्ली से जाँच के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करता हूँ.

राहत का सोमवार : odd-even फॉर्मूले ने तौबा करवा दी

Sarjana Sharama : इस बार सोमवार राहत का सोमवार होगा। ऑटो या टैक्सी खोजने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के श्री अरंविंद केजरीवाल के odd-even फॉर्मूले ने तौबा करवा दी। इतनी भीषण गरमी में लोग तपती धूप में 20-20 मिनट ऑटो का इंतज़ार करते रहे। रेडियो टैक्सी के अपने नखरे हैं। अभी इस रूट पर कोई टैक्सी नहीं मिल सकती। दो घंटे से पहले नहीं आ सकते आदि आदि।

केजरीवाल जी, आपभी मोदी की तरह जुमलेबाजी की सियासत कर रहे हो?

Vishwanath Chaturvedi : जुमले बाजों ने बिगाड़ा देश मिज़ाज़. बड़े मिया तो बड़े मिया छोटे मियां सुभानल्लाह. जुमलेबाज़ो ने बदरंग किया सियासी चेहरा. केजरीवाल की दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा सरकार को समर्थन करते हुए दिल्ली की जनता का कर्ज उतार दिया. अब बारी थी पंजाब चुनाओं में लड़ रही पार्टी के लिए फर्ज पूरा करने की. सो केजरीवाल ने शाम होते-होते वकील को बलि का बकरा बनाते हुए यू टर्न लिया और कहा ये वकील तो कांग्रेसी था, इसे मैंने हटा दिया.

‘आप’ तो ऐसे न थे : केजरी वही सब टोटके कर रहे जो भ्रष्ट नेता करते रहे हैं

-मनोज कुमार-

एक साथ, एक रात में पूरी दुनिया बदल डालूंगा कि तर्ज पर दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी के हुक्मरान जनाब अरविंद केजरीवाल ने मुझे तीन दिनों से परेशान कर रखा है। आगे और कितना परेशान करेंगे, मुझे नहीं मालूम लेकिन हाल-फिलहाल मेरी बड़ी शिकायत है। सुबह अखबार के पन्ने पलटते ही दो और चार पन्नों का विज्ञापन नुमाया होता है। इन विज्ञापनों में केजरीवाल अपनी पीठ थपथपाते नजर आते हैं। केजरीवाल सरकार इन विज्ञापनों के जरिये ये साबित करने पर तुले हैं कि उनसे बेहतर कौन? ऐसा करते हुए केजरीवाल भूल जाते हैं कि दिल्ली के विकास को जानकर मध्यप्रदेश का कोई भला नहीं होने वाला है और न ही उनके इस ‘पीठ खुजाऊ अभियान’ से मध्यप्रदेश में कोई सुधार होगा। बार बार भोपाल और मध्यप्रदेश की बात इसलिए कर रहा हूं कि इससे मुझे इस बात की परेशानी हो रही है कि मेरे पढ़ने की सामग्री गायब कर दी जा रही है। केजरीवाल के इस ‘पीठ खुजाऊ अभियान’ में मेरी कोई रूचि नहीं है।

केजरीवाल को खबर मिल चुकी है कि कुमार विश्वास भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं!

कुमार विश्वास ने कल यानि 10 फरवरी को दिल्ली के एनडीएमसी क्लब में अपनी हाई प्रोफाइल बर्थडे पार्टी को सेलीब्रेट किया. इसमें सब आए लेकिन केजरीवाल नहीं आए. मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय से लेकर आम आदमी पार्टी के ढेरों विधायक और दर्जनों बड़े छोटे पत्रकार. सबको इंतजार था तो बस अरविंद केजरीवाल का. लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ और पड़ोस में रहकर भी केजरीवाल पार्टी में नहीं पहुंचे.

ऑड-इवन से दिल्ली की सड़कों पर क्या फायदा हुआ?

Arvind Shesh : इति “ऑड-इवन” स्वाहा…! इति ‘कार-सेवा’ स्वाहा…! पंद्रह तारीख के साथ ही ऑड-इवन खत्म… और साथ ही दिल्ली में बसों को सहज तरीके से चलने वाली अकेली बीआरटी को खत्म करने का काम शुरू। यानी पंद्रह दिनों की ऑड-इवन कार-सेवा खत्म होने के साथ ही कार वालों की सेवा शुरू…! अब अचानक दिल्ली से प्रदूषण छू-मंतर हो जाएगा… और अगर कहीं से प्रदूषण आएगा तो वह तंदूर चूल्हे से आएगा… और उससे आगे खाना बनाने के लिए जलाई गई आग से आएगा…!

उतर गया चोला… अमीरों का आदमी साबित हुआ केजरीवाल, समझा रहे हैं यशवंत सिंह

Yashwant Singh  : कई लोग कहते मिले कि दिल्ली सुधर गई, केजरीवाल का फार्मूला पास हो गया, दिल्ली वाले बिना चूं चपड़ किए हंसते खेलते नया नियम मान लिए, प्रदूषण घट गया, ट्रैफिक स्मूथ हो गया… ब्ला ब्ला ब्ला…

odd-even : केजरीवाल जैसा मूर्ख मुख्यमंत्री इस देश में दूसरा नहीं देखा…

Nadim S. Akhter :  अरविन्द केजरीवाल जैसा मूर्ख मुख्यमंत्री इस देश में दूसरा ने नहीं देखा, जिसन वाहवाही बटोरने के चक्कर में बिना सोचे-समझे पूरी जनता को odd-even की खाई में धकेल दिया। पहले से ही मरणासन्न दिल्ली का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम इतनी बड़ी आबादी के सफ़र को कैसे झेलेगी, इस पर एक पल भी नहीं सोचा। ऊपर से ये महामूर्ख मुख्यमंत्री स्कूल में बच्चों के बीच जाकर कह रहे हैं कि बेटे, अपने मम्मी-पाप को इस नियम का पालन करने की सीख देना, उनसे जिद करना। लेकिन ये नहीं बता रहे कि जब टाइम से ऑफिस न पहुचने पे पापा की सैलरी कटेगी और ऑटो लेकर जाने में उनकी जेब से दोगुने नोट ढीले होंगे, घर का बजट बिगड़ेगा, तो पापा घर कैसे चलाएंगे?

सम-विषम के नाम पर आम जनता को परेशान करने के लिए अड़ गई आम आदमी पार्टी की सरकार

Sanjaya Kumar Singh : पत्नी और सरकार के आगे तर्क!! दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए जांच के तौर पर शुरू की जा रही सम विषम नंबर की कारों को सम विषम तारीखों को ही चलने देने के फैसले की घोषणा में इतनी छूट है कि – यह प्रयोग सफल हो या असफल कोई खास मतलब नहीं है। सम-विषम नंबर के नाम पर असल में दिल्ली की आबादी को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। एक आबादी जो इससे बेसर है। चाहे वह वीआईपी हो या मोटरसाइकिल चलाने वाली या महिलाएं। दूसरी आबादी इससे प्रभावित होने वालों की है और यह दिल्ली में रोज दफ्तर आने जाने वालों का है जो सबसे ज्यादा परेशानी झेलेगी। चूंकि मामला स्थायी नहीं है इसलिए परेशानी और ज्यादा है। वरना परेशान होने वाला अपने लिए कोई इंतजाम करता।

अरविंद केजरीवाल ने किस्सा सुनाने के बहाने कह दिया- ”टीवी चैनल वालों को तो मोदी ने खरीद रखा है”

Arvind Kejriwal : अभी अभी बिहार गए हुए एक रिपोर्टर से बात हुई। उसने एक बड़ा दिलचस्प किस्सा सुनाया। रिपोर्टर ने बिहार के एक गाँव में एक रिक्शा वाले से बात की। दोनों के बीच हुई बात इस प्रकार है –

‘आप’ सरकार ने दिल्ली में श्रम विभाग के अफसरों को चोर मीडिया मालिकों को सबक सिखाने की खुली छूट दी

Yashwant Singh : दिल्ली राज्य में कार्यरत मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड न दिए जाने को लेकर श्रम विभाग ने मीडिया हाउसों को धड़ाधड़ चांटे मारना शुरू कर दिया है. ऐसा दिल्ली की केजरीवाल सरकार की सख्ती के कारण हो रहा है. सूत्रों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने श्रम विभाग के अफसरों को साफ-साफ कह दिया है कि किसी का मुंह न देखें, कानूनन जो सही है, वही कदम उठाएं.

दिल्ली में डेंगू से लड़ने का ठेका सिर्फ अरविन्द केजरीवाल ने लिया है!

Sanjaya Kumar Singh : दिल्ली में डेंगू से लड़ने का ठेका सिर्फ अरविन्द केजरीवाल ने लिया है। बाकी देश में तो ना मच्छर हैं ना डेंगू होता है। गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुड़गांव में भी नहीं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री पिछली दफा बिहार चुनाव के उम्मीदवारों की घोषणा कर रहे थे और माननीय उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के अफसरों को बता रहे हैं कि उन्हें किसका आदेश मानना है, किसका नहीं।

स्वतंत्रता दिवस या ARVIND KEJRIWAL दिवस!

पूरा देश आज स्वतंत्रता दिवस मना रहा था लेकिन अरविंद केजरीवाल खुद आज अपना दिवस मनाने में जुटे थे, वह भी स्कूली बच्चों और सरकारी पैसों के जरिए. स्वाधीनता दिवस के मौके पर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में सीएम अरविंद केजरीवाल ने जनता को संबोधित किया. लेकिन, इस मौके पर स्टेडियम में कुछ ऐसा भी हुआ, जिससे केजरीवाल विवादों में घिर गए. स्टेडियम की दर्शक दीर्घा में बच्चों को इस तरह बिठाया गया था, जिससे इंग्लिश में ‘ARVIND KEJRIWAL‘ लिखा दिखाई दे रहा था.

‘आप’ सोशल मीडिया हेड की पत्नी बोली- केजरीवाल ने बर्बाद कर दिया फेमिली लाइफ

आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया हेड अंकित लाल की पत्नी प्रेरणा प्रसाद ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पर अपना फेसबुक अकाउंट बंद करवाने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, यह कहने में बुरा लग रहा है, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने अपना करियर कई लोगों के करियर और मेरे जैसे यंगस्टर्स की फैमिली लाइफ को बर्बाद कर बनाया है। प्रेरणा ने केजरीवाल को एक मैनिपुलेटर (जोड़तोड़ करने या अपनी बात मनवाने वाला) करार दिया है।

इस सदी के स्वघोषित सबसे बड़े महानायक केजरीवाल की नाक जड़ से कट गई…

Samarendra Singh : जिसका अंदेशा था वही हुआ. अभय कुमार दुबे की बात सही निकली. किसी एक की नाक जड़ से कटनी थी और इस सदी के स्वघोषित सबसे बड़े महानायक की नाक जड़ से कट गई. कमाल के केजरीवाल जी दुखी हैं. बोलते नहीं बन रहा है. इसलिए अदालत के फैसले का इंतजार किये बगैर उन्होंने अपने क्रांतिकारियों को अपने बचाव में आगे कर दिया है. तोमर की डिग्री फर्जी है, यह मानने के लिए अब उन्हें किसी अदालत के फैसले की जरुरत महसूस नहीं हो रही है. अब उनके क्रांतिकारी कह रहे हैं कि माननीय को गहरा सदमा लगा है. तोमर ने उन पर जादू कर दिया था. फर्जी आरटीआई दिखा कर भ्रमित कर दिया था. हद है बेशर्मी की. बार-बार झूठ बोलने पर जरा भी लाज नहीं आती.

लगता है मोदी जी एक दिन केजरीवाल को देश का प्रधानमंत्री बनवाकर ही मानेंगे… कीप इट अप भाजपाइयों…

Yashwant Singh : नरेंद्र मोदी ने केजरीवाल पर तरह तरह से नकेल कस कर खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने का काम कर दिया है. दिल्ली सरकार के प्रति मोदी जी की चीप किस्म की हरकतों से एक तो खुद मोदी और दूसरे भाजपाई एक्सपोज हो रहे हैं. इस कारण अरविंद केजरीवाल को भारी मात्रा में जन सुहानभूति प्राप्त हो रही है. हाल के दिनों में केजरीवाल ने मोदी के लगाए अवरोधों और उसका डटकर कर रहे प्रतिरोध के कारण जो सिंपैथी गेन की है उससे योगेंद्र यादव -प्रशांत भूषण निष्कासन प्रकरण के घाव भुलाकर लोग फिर से केजरी के साथ खड़े होने लगे हैं. उनमें से एक मैं भी हूं.

अब राजनीति में भड़ास, 7वें स्थापना दिवस पर लांच कर दी जाएगी नई राजनीतिक पार्टी

Yashwant Singh : अब राजनीतिक पार्टी मुझे बनाना ही पड़ेगा. देश चलाने के लिए हम सबों को आगे आना ही पड़ेगा. क्यों न भड़ास के सातवें स्थापना दिवस के मौके पर एक नई राजनीतिक पार्टी लांच कर दी जाए. कांग्रेस के खात्मे, मोदी के पतन, केजरी की चिरकुटई, क्षेत्रीय दलों के करप्शन आदि के कारण पूरे देश में फिर से निराशा का चरम माहौल है. नागनाथ और सापनाथ के बीच चुनने के मजबूरी के कारण हालात बहुत दूर दूर तक बदलते नहीं दिख रहे.

मोदी और केजरी : आइए, दो नए नेताओं के शीघ्र पतन पर मातम मनाएं…

Yashwant Singh : यथास्थितिवाद और कदाचार से उबी जनता ने दो नए लोगों को गद्दी पर बिठाया, मोदी को देश दिया और केजरीवाल को दिल्ली राज्य. दोनों ने निराश किया. दोनों बेहद बौने साबित हुए. दोनों परम अहंकारी निकले. पूंजीपति यानि देश के असल शासक जो पर्दे के पीछे से राज करते हैं, टटोलते रहते हैं ऐसे लोग जिनमें छिछोरी नारेबाजी और अवसरवादी किस्म की क्रांतिकारिता भरी बसी हो, उन्हें प्रोजेक्ट करते हैं, उन्हें जनता के गुस्से को शांत कराने के लिए बतौर समाधान पेश करते हैं. लेकिन होता वही है जो वे चाहते हैं.

अपने गिरेबान में झांकने की बजाय सुभाष चंद्रा ने केजरीवाल के खिलाफ निकाली भड़ास

सुपारी पत्रकारिता को संगठित तरीके से अंजाम देने वाले सुभाष चंद्रा बजाय अपनी गिरेबान में झांकने के, दूसरों को ही समझाने पर उतारू हो जाते हैं. अबकी उनके निशाने पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल हैं. जी मीडिया पर बार-बार आम आदमी पार्टी को बदनाम करने का आरोप लगाने वाले दिल्ली के सीएम केजरीवाल के खिलाफ भड़ास निकालते हुए जी मीडिया के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ट्विट कर लिखा है, ‘सीएम केजरीवाल को लगता है कि मीडिया किसी को भी बना और बर्बाद कर सकता है पर ये गलत है, मैं उनसे ये रिक्वेस्ट करता हूं कि वह न सिर्फ जी बल्कि किसी भी मीडिया से अपने दुश्मन जैसा बर्ताव नहीं करें.

केजरीवाल से एक और समर्थक का मोहभंग, अपने ब्लाग पर लिखा: ”Kejriwal, You Have Failed Us”

“Not even the king has the right to subordinate the interests of the state to his personal sympathies or antipathies.”

AAP “leader” Ashutosh started his blog with this statement to defend the expulsion of four AAP leaders from the party. If there is one person who needed to be reminded of this sentence today, it is none other than Arvind Kejriwal.

Kejriwal has no moral ground to remain as the convener of AAP and here are the reasons.

आम आदमी पार्टी के आशुतोष को रवीश कुमार का खुला पत्र

आशुतोष जी,

मैं आज दिल्ली में नहीं था। देवेंद्र शर्मा के साथ रिकॉर्डिंग कर रहा था कि किसानों की इस समस्या का क्या कोई समाधान हो सकता है। हम गेहूं के मुरझाए खेत में एक मायूस किसान के साथ बात कर रहे थे। हमने किसान रामपाल सिंह से पूछा कि आपके खेत में चलेंगे तो जो बचा है वो भी समाप्त हो जाएगा। पहले से मायूस रामपाल सिंह ने कहा कि कोई बात नहीं। इसमें कुछ बचा नहीं है। अगर आपके चलने से दूसरे किसानों को फायदा हो जाता है तो मुझे खुशी होगी। वैसे भी अब इसका कोई दाम तो मिलना नहीं है, कुछ काम ही आ जाए। ये उस किसान का कहना है जो चाहता है कि उसकी बर्बादी के ही बहाने सही कम से कम समाधान पर बात तो हो। शायद गजेंद्र ने भी इसी इरादे से जान दे दी जिस इरादे से रामपाल सिंह ने हमारे लिए अपना खेत दे दिया।

गजेन्द्र चुनाव लड़ चुका था, सैकड़ों वीआईपियों को साफा बांध चुका था, आत्महत्या की कोई वजह नहीं थी…

दिनेशराय द्विवेदी : मेरे ही प्रान्त राजस्थान के एक किसान ने आज दिल्ली में अपनी जान दे दी, तब आआपा की रैली चल रही थी। उस के पास मिले पर्चे से जिसे हर कोई सुसाइड नोट कह रहा है वह सुसाइड नोट नहीं लगता। उस में वह अपनी व्यथा कहता है, लेकिन उस नें घर वापसी का रास्ता पूछ रहा है। जो घर वापस लौटना चाहता है वह सुसाइड क्यों करेगा? जिस तरह के चित्र मीडिया में आए हैं उस से तो लगता है कि वह सिर्फ ध्यानाकर्षण का प्रयत्न कर रहा था। उस ने हाथों से पैर से भी कोशिश की कि वह बच जाए। पर शायद दांव उल्टा पड़ गया था। वह अपनीा कोशिश में कामयाब नहीं हो सका। हो सकता है उसे उम्मीद रही हो कि इतनी भीड़ में उसे बचा लिया जाएगा। पर उस की यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।

‘आप’ की प्री-प्लांड स्क्रिप्ट थी गजेंद्र का पेड़ पर चढ़ना और फंदे से लटकना!

Abhai Srivastava : गजेंद्र की चिट्ठी की आख़िरी लाइन, ‘कोई मुझे बताओ, मैं घर कैसे जाऊंगा?’ जाहिर है कि ये सुसाइड नोट नहीं। मीडिया क्लिप में साफ सुनाई पड़ रहा है कि जब कुमार विश्वास भाषण दे रहा था तब आवाज़ आई, ‘लटक गया’, फिर विश्वास हाथ के इशारे जैसे कह रहा है कि ‘लटक गया है, स्क्रिप्ट के अनुसार नाटक पूरा हुआ’.  भाइयों AAP ने एक व्यक्ति की हत्या की है। ये भी ध्यान देने की बात है कि गजेंद्र के घर में 2 भतीजियों की आज शादी है, इसका मतलब उसके घर में ऐसा आर्थिक संकट नहीं जैसा प्रोजेक्ट हुआ है। भाई, ये बहुत बड़ी साज़िश है।