लोकमत प्रबंधन को तगड़ा झटका, नौकरी से निकाले २४ मीडियाकर्मियों को काम पर रखने का निर्देश

महाराष्ट्र से प्रकाशित मराठी दैनिक लोकमत को तगड़ा झटका लगा है। ७ नवंबर को  नागपुर की इंडस्ट्रीयल कोर्ट नंबर ४ ने एक आदेश जारी कर लोकमत से निकाले गये २४ स्थायी कर्मचारियों को वापस काम पर रखने का निर्देश दिया है। इस बारे में जानकारी देते हुये लोकमत श्रमिक संगठन के संजय येवले पाटिल ने बताया कि इंडस्ट्रीयल कोर्ट ने सभी २४ स्थायी कर्मचारियों को ४ सप्ताह के अंदर काम पर रखने का निर्देश कंपनी प्रबंधन को दिया है।

65 employees sacked in Lokmat Group

The premier trade union of newspaper employees in Nagpur has membership in the leading chain of newspapers “Lokmat”(Marathi), “Lokmat Samachar” (Hindi) and “Lokmat Times” (English) spread throughout Maharashtra.  It is significant to note that even journalists are members of the Union.  It has a branch of the union at Goa too.  One Shri  who is working on contract basis was elected President of the Goa Unit.

मजीठिया पर नए कोर्ट आर्डर के बाद लोकमत प्रबंधन ने 2400 मीडियाकर्मियों का कांट्रेक्ट रिनुअल लटकाया

मजीठिया वेज बोर्ड पर सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद महाराष्ट्र में सबसे बड़ा झटका लोकमत अखबार को लगा है। सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा लोकमत समूह में ठेका कर्मचारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 19 जून 2017 के आदेश में साफ कर दिया है कि ठेका कर्मचारियों को भी मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ मिलेगा। अब लोकमत प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सबसे ज्यादा सांसत में फंस गया है।

मजीठिया न देना पड़े इसलिए कर्मियों पर वीआरएस का दबाव बना रहा लोकमत

महाराष्ट्र का नंबर वन अखबार कहलाने वाला लोकमत मजीठिया वेतन आयोग की पूरी राशि कर्मचारियों को न देने के लिए हर पैंतरा अपनाने की कोशिश कर रहा है. परमानेंट स्टाफ को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए 100 से ज्यादा कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है. बता दें कि लोकमत ने अपने कर्मचारियों को अब तक मजीठिया का आंशिक भुगतान ही किया है.