एबीपी न्यूज मोदी के चरण चापन में अब जी न्यूज को मात देने में जुटा (देखें वीडियो)

एक चैनल था एबीपी न्यूज. था, इसलिए क्योंकि कभी इस पर तटस्थ पत्रकारिता होती थी. सिस्टम की बखिया उधेड़ने वाली पत्रकारिता होती थी. लेकिन अब यह भगवा रंग में रंग गया है. शाजी जमां के जाने के बाद या यूं कहिए को शाजी जमां को भगवा लाबी द्वारा जबरन हटवाए जाने के बाद जो संपादक मिलिंद खांडेकर इसे देखकर रहे हैं, लगता है उन्होंने सारे आंख कान नाक बंद कर लिए हैं. वे बस ये देखते हैं कि ये खबर मोदी के पक्ष में है या खिलाफ. साथ ही ये भी देखते हैं कि ये खबर केजरीवाल के पक्ष में है या खिलाफ.

जिस देश ने अपने 19 जवान ज़िंदा जलते देखा है, वो अपनी सरकार से जवाब तो मांगेगा!

सावधान… आगे अंधा मोड़ है! :  कस्तूरी जब असली हो तो गवाही के लिए साथ में हिरण लेकर घूमने की जरुरत नहीं होती। ये कहावत बेहद पुरानी है और मौजूदा दौर के लिए मौजू भी। राष्ट्रवाद अगर असली होता तो उसके लिए चीखने की ज़रुरत शायद नहीं पड़ती। असली राष्ट्रवाद या देशप्रेम कर्मों से परिलक्षित होता है नारों से नहीं। मौजूदा दौर में मैं देश की बड़ी आबादी को भावनाओं की लहरों पर बहता देख रहा हूं। ये लहर उस आबादी को कहां पहुंचाएगी उसे नहीं मालूम लेकिन जिस दिन किनारे लागाएगी वहां से रास्ता नहीं सूझेगा। देश भावुक हुआ जा रहा है। जवानों की शहादत पर सबको गर्व होना चाहिए। लेकिन क्या हम सिर्फ शहादत पर गर्व करते रहेंगे?