वृन्दावन में सिटी मजिस्ट्रेट राम अरज यादव कंस जैसी भूमिका में था!

14 अक्टूबर की सुबह नास्तिक सम्मेलन में शामिल होने को वृन्दावन के लिए निकला था और करीब 11 बजे वहाँ पहुँच भी गया था। लेकिन श्री बिन्दु सेवा संस्थान के परिसर में जाने का रास्ता लगभग पौन किलोमीटर पहले अटल्ला चौकी पर ही अवरुद्ध कर दिया गया था। गलियों में हो कर वहाँ पहुँचा तो हालात देख कर स्तब्ध रह गया।

बालेंदु स्वामी के नास्तिक सम्मेलन का यूं ठुस हो जाना स्वाभाविक था!

Shamshad Elahee Shams : नास्तिक सम्मेलन ‘बस ऐवैंई’ का यूं ठुस हो जाना स्वाभाविक था. तुम इस काबिल नहीं थे कि इस झिलझिली सोच के साथ तुम नास्तिक सम्मलेन कर लोगे, बिना यह समझे कि इर्द गिर्द वातावरण में एक भी चीज ऐसी नहीं जो अराजनैतिक हो. फिर बिना राजनीति किये तुम अपना नास्तिक झंडा भला कैसे बुलंद कर सकते हो? बावजूद इसके कि बालेन्दु साहब से मेरे गहरे वैचारिक मतभेद थे जिसके चलते मैंने उनसे दूरी बना ली, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें उनके मानवीय अधिकारों से वंचित कर दिया जाए.

वृन्दावन में नास्तिक सम्मेलन निरस्त, बालेन्दु स्वामी ने माफी मांगी

आखिर वृन्दावन में नास्तिकता को आस्था ने घुटने टेकने को मजबूर कर ही दिया। नास्तिक सम्मेलन निरस्त कर दिया गया है। नास्तिक सम्मेलन आयोजन को रोकने लिये सभी संत एवं प्रबुद्धजन एकत्रित हुये तो प्रशासन ने भी किसी अनहोनी की आशंका के चलते इसकी अनुमति नहीं दी। संतों समाज का प्रतिनिधिमण्डल बालेन्दु स्वामी से मिला और विरोध प्रकट किया। बालेन्दु स्वामी ने ना केवल माफी मांगी है बल्कि भविष्य में ऐसा कोई आयोजन नहीं करने की बात कही जिससे लोगों की भावना और आस्था को ठेस पहुंचे।