चंदौली के पत्रकार डीके सिंह ने आत्महत्या की

पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक दुखद खबर आ रही है. वरिष्ठ पत्रकार डीके सिंह ने आत्महत्या कर लिया है. बताया जाता है कि वे किसी पारिवारिक विवाद के चलते तनाव में थे. चंदौली जनपद के सैय्यदराजा थाना के अन्तर्गत बरठी कमरौर के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार डीके सिंह अमर उजाला समेत कई अखबारों के संवाददाता रहे हैं.

बताया जा रहा है कि डीके सिंह ने पारिवारिक विवाद के चलते अपने नौबतपुर गेस्ट हाउस में खुद के मोफलर से फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया. सूचना मिलने पर सैय्यदराजा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची.  पत्रकार द्वारा सुसाइड की इस घटना से जिले भर के पत्रकार और गणमान्य लोग स्तब्ध हैं.

चंदौली से प्रशान्त सिंह की रिपोर्ट.

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दैनिक भास्कर के मीडियाकर्मी ने सुसाइड किया, जीएम से लेकर संपादक तक पर शक की सुई

दैनिक भास्कर होशंगाबाद एडिशन से खबर आ रही है कि यहां एक मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव ने अपने वरिष्ठों की प्रताड़ना से तंग आकर सुसाइड कर लिया. मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव ने कीटनाशक पीकर जान दी. परिजनों ने आत्महत्या के लिए दैनिक भास्कर के वरिष्ठों को जिम्मेदार ठहराया है. पिता ने इस बाबत जीएम हरिशंकर व्यास, संपादक विनोद सिंह और एड एजेंसी के ओंकार कोहली का नाम लिया है जिनकी प्रताड़ना से आत्महत्या करने को बेटा मजबूर हुआ. 

चर्चा है कि इटारसी में एक बड़ा आयोजन कराया गया था जिससे मिले बिजनेस का एक हिस्सा हड़प लिया गया और मामला खुलने पर इसे मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव के मत्थे मढ़ दिया गया. इसी वजह से मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव ने डिप्रेशन में सुसाइड कर लिया. इस सुसाइड को लेकर स्थानीय अखबारों में जो कुछ खबरें छपी हैं, उसे नीचे दिया जा रहा है… इसको पढ़ने से काफी कुछ समझ में आ जाएगा….

आत्महत्या के लिए मजबूर करने वालों की गिरफ्तारी की मांग करते स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधि.

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एक कामरेड पत्रकार के शोषण से तंग आकर महिला पत्रकार ने सुसाइड की कोशिश की!

‘दी वायर हिंदी’ में काम करते हैं आरोपी पत्रकार कृष्णकांत… एक साथ कई लड़कियों को प्रेम के जाल में फांसने और उन्हें धोखा देने का आरोप…

उपासना झा : प्रियंका ने आत्महत्या का प्रयास किया था.. बहुत अवसाद में चल रही थी.. उसके माता-पिता पहुँच चुके हैं… अब ख़तरे से बाहर तो है लेकिन उसे इस हाल में पहुंचाने वाले कृष्णकांत पर जिस तरह उसके खेमे वाले (वामपंथी) चुप हैं वह बहुत लज्जास्पद है.. नीचे वो पोस्ट दे रही हूं जिसे प्रियंका ने खुद लिखकर अपनी वॉल पर पोस्ट किया है…

”The Wire Hindi लगातार महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठाता है लेकिन खुद अपने ही साथी कर्मी, एक झूठे क्रांतिकारी पत्रकार, धोखेबाज़ और धूर्त व्यक्ति का पक्षधर बना हुआ है. वायर में काम कर रहे कृष्णकांत ने एक महिला पत्रकार को इस मुकाम पर ला खड़ा कर दिया कि वह लगातार में अवसाद में रहते हुए भयानक मानसिक पीड़ा और लगातार आते अटैक्स से जूझ रही हैं. सिर्फ यही नहीं, अपनी सफाई में कृष्णकांत ने वही सब कहा जो एक अपराधी मानसिकता वाला व्यक्ति कह सकता है/कर सकता है. कृष्णकांत लगातार लोगों को मैसेज भेज कर और फोन द्वारा अपनी सफाई पेश कर रहा है कि लड़की विक्टम कार्ड खेल रही है, बदनाम कर रही है, मेरे अस्वीकार देने पर पगला गयी है. जबकि यही सारी बातें यह साबित करती हैं कि कृष्णकांत धूर्त व्यक्ति है. वह लगातार लड़की के दोस्तों को फ़ोन करके सभी पोस्टें हटा लेने को कहता है और रोने-धोने का नाटक करता है. हम हैरान हैं कि Siddharth Varadarajan जो महिला की लिस्ट में भी हैं और लगातार इस मसले से अवगत हैं वह कैसे मौन है!! कृष्णकांत की नीचता की हद यह है कि उसने यह भी कहना शुरू कर दिया है कि वायर में महिला को जॉब नहीं दी तो बदला ले रही है…यह बेहद शर्मनाक बात है कि अपनी कालीकरतूतों को छिपाने के लिए यह झूठा आदमी महिला पर अनगर्ल बातें मढ़ रहा है. कुछ दिनों पहले नेशनल दस्तक ने अपने कर्मी ओमसुधा को उसके इसी तरह के कृत्यों को जान कर उसे संस्थान से अलग किया था. ज्ञात रहे कि नेशनल दस्तक अपने तरह का एक मात्र प्रतिष्टित संस्थान है जैसा कि वायर है. हम The Wire Hindi यानी सिद्धार्थ वर्धराजन से उम्मीद करते हैं कि वह इस मसले पर अधिक देर तक और मौन नहीं रहेंगे. महिला मुद्दों पर आवाज़ उठाना और दबी चुप्पी को तोड़ना ही आपकी पहचान है जिसे आप बनाये रखेंगे ऐसी हम आशा करते हैं.”

फेसबुक पर महिलाओं के मुद्दे को लेकर सक्रिय लेखिका उपासना झा की वॉल से.

उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं…

Naveen Raman शर्म आती है ये कहते हुए कि ये हमारे परिचित हैं। मुझे तो नफरत हो गयी है वामपंथियों से।

उपासना झा इस आदमी पर केस दर्ज होना चाहिए। एक साथ न जाने कितनी लड़कियों को बेवकूफ बना रहा था। उसे जेल जाना चाहिए।

Mamta Pandey हाँ…पर इस तरह मरने से बेहतर है उसे ही मार देती!

Suyash Deep Rai वो प्रियंकाके लिए प्रेस क्लब नही जाएँगे। फुटेज नहीं मिलेगा न। क्रांतिकारी पत्रकार थोड़े न हैं, अभिनेता हैं सारे के सारे। ख़ासतौर पर ये ब्रिगेड।

Sarjana Sharama nothing new. this is way communist and all left leaning people behave. They have double standards. Sidhrath vardrajan is leftist . These people believe in freedom of body freedom of kiss on the road. For them women are just to be used and abused. Though they –hathi ke daant khaney ke aur dikhaney ke aur

Apoorva Pratap Singh आप खेमेबंदी देखिये ! अभी कुछ और मामला होता, जनता इंसाफ दिलाने निकल पड़ती । इनके टुच्चेपन को देख के लगता है कि इनकी दुर्गति सही ही हो रही है

उपासना झा डेढ़ महीने से ये बड़े लोग चुप हैं। मौन व्रत कर रहे। पिछले साल योगिता को इसने इसी हाल में पहुंचाया था। अगर प्रियंका परसों रात में मर जाती तो!

Nishant Yadav इसकी पोस्ट देखी थीं कितना आदर्शवादी बनता था, यार जो आदमी रिश्तों में ईमानदार न हो वो काहे का आदर्शवादी, यहां फ़ेसबुक पे ऐसे ऐसे पोस्ट लिखते हैं कि ये दुनिया बदल देंगे, और खुद वहीं उसी कीचड़ में पड़े हैं

उपासना झा एक नहीं, कई लड़कियों को उल्लू बनाया

Nishant Yadav हाँ मेने प्रियंका के पोस्ट पढ़ें हैं पहले वो मित्र थीं अब पता नही कैसे अनफ्रेंड हो गई तो पढ़ नही पाया, आज पढ़े, कई लड़कियों को धोखा दिया, और मेने तो देखा है लड़कियाँ अक्सर शादी और प्यार के झांसे में आजाती हैं मैन कई ऐसे केस देखें हैं.. बाकी ये तो ऐसे ऐसे क्रांतिकारी पोस्ट करता था, और खुद के जीवन मे ये हाल है

Shams Hussain दुःखद! कृष्णकांत को अच्छा साथी समझता था मैं. बेहद वाहियात किश्म का टुच्चा आदमी निकला. आज प्रियंका के अवसाद में जाने का दोषी सिर्फ और सिर्फ कृष्णकांत हैं.

अनु प्रिया जल्द ठीक हो जाओ प्रियंका..!! कृष्णकांत को सजा मिलनी चाहिए !!

उपासना झा हाँ अनु जी, सज़ा मिलनी चाहिए

Neera Jalchhatri शुक्रिया उपासना ….प्रियंका की खबर देने के लिए….कई दिनों से कुछ पता नही चल रहा था…ये सूचना बहुत दुखद है. उसे हिम्मत से काम लेना होगा…..और अपने आपको कष्ट देने के बजाय कानूनी लड़ाई की तरफ़ जाना चाहिए…

सरस जैन ऐसे लोगों के सामाजिक बहिष्कार की जरूरत हैं, इनको लज्जित करना जरूरी।

Aparna Anekvarna He should be booked for this.. I met her once at the book fair. A well mannered, sweet girl who helped me choose books. I am unable to associate that bubbly girl with this trauma.. how this stress has affected her.. more power to her!

उपासना झा अपर्णा जी, उसने इस हाल में मदन योगिता को भी पहुँचाया था।

Manisha Choudhary हर चीज़ को अपने वाद से ही तौलने की कोशिश करेंगे लोग तो इंसानियत जियेगी कैसे

Amarendra Kishore जो भी हुआ दुखद है।प्रियंका हिम्मत से काम ले।किसी के बगैर भी ज़िन्दगी चलती है–इसलिए उसे अपना मन मजबूत रखना होगा।आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है।इस मामले को आपी या वामी से जोड़ने का घटिया प्रयास खेदपूर्ण है।यह समस्या है जिसका समाधान समाज के स्तर पर कानून के रास्ते से हो।
उपासना झा यह इसलिए कि अगर किसी संघी ने किया होता तो इनका उत्साह देखते आप।

Amarendra Kishore करनेवाला न संघी होता है और न आपी, न कांग्रेसी।करनेवाला सिर्फ करनेवाला होता है।किये जाने के बाद जनता ही कुछ करती है। गर्भवती शिवानी भटनागर को मां बनानेवाला पहले इंसान था तब वह किसी पार्टी से था।कर्ता अपने कर्म के बाद झंडे का इस्तेमाल अपने बचाव में करता है।डेरा सच्चा सौदा इसका उदाहरण है। उसे किसका संरक्षण था। उसके साथ किसने गठबंधन था? क्या गठबंधन करनेवाले राजनीतिक दल ने उसे अनाचार की छूट दी थी? शायद नहीं।

Rakesh Singh ए बात आज प्रियंका प्रकरण मे उसके पोस्ट पर कही जा रही है, जो एक तरह से आवरण सदृश दिखता है| अगर यही विचार सामने वाले प्रकरणो मे भी अपनाए जाय ,तो हम सब संयुक्त रूप से अपराधियो पर ज्यादा प्रहार कर सकते हैं | अमरेन्द्रजी विचार सही है आपका पर इसका प्रयोग पूर्वाग्रही रूप में ही हुआ है |उपासना जी आपके इस सहज प्रयास को बहुत बधाई व शुभकामनाएँ |

उपासना झा पिछले डेढ़ महीने से इस मुद्दे पर बड़े लोग चुप्पी साधे हुए हैं।

Amarendra Kishore आप इस मामले को वामी होने से क्यों जोड़ रहीं हैं। और इतनी बड़ी दो घटनाओं आसाराम और डेरा सच्चा सौदा के बाद? इस समस्या के मानवीय पहलू को समझिए। हां,कानून अपना काम करे, ये जरूरी है।

Nishant Yadav मैंने आज प्रियंका के सारे पोस्ट पढ़े, पहले वे मित्र सूची में थी , कृष्णकांत मेरे भी सूची में है कितना कमज़र्फ निकला, लोगों के कई चेहरे होते हैं उसकी पोस्ट कितनी क्रांर्तिकारी , होती थी, जातिवाद, ऑनर किलिंग, प्रेम सबके ऊपर, लेकिन खुद ही इसमें डूबा हुआ है ये सब पत्रकारों का यही हाल है क्या , यहां लिखते कुछ हैं और जीवन मे होते कुछ हैं

Sarjana Sharama Leftist will talk about women rights and most them leave their wife or husband for another male or female. Shabana azami and sitaram yetury are two major example. But I love the honey irani attitude . She said— let jawed akhtar marry shabana who will fight for this Buddha ( old man)

Amarendra Kishore पत्नी को छोड़ने की परंपरा किसी एक राजनीतिक दल की नहीं है। एक महिला और मानवीय होकर लिखिए,बोलिये।पार्टी प्रवक्ता बनने की जरूरत शायद अब नहीं है।खास तौर से इस मामले में।

Sarjana Sharama It is not your wall do not teach me I stand by my statement leftists talk about child labour bring minors as domestic help from Bengal and Bihar. Suppose u.s.a but their children study in U.S on American scholarship . They wear lives jeans smoke 555 talk about women rights and practice multi relations. When I come on your wall you can object

Amarendra Kishore ऐसा लिखना शायद आपकी विवशता हो मगर यहां कौन कम है।गरीबों और जरूरतमंदों की चिंता करनेवाला कोई एक भी हो तो बताएं।किसी भी दल का। आपको 555 और जीन्स दिख गया।विदेश में पढ़ते बच्चे दिख गए लेकिन उन दलों का हाल भी बयाँ करें जहां जूतों में दाल बांटे जा रहे हैं।

Sarjana Sharama I have many leftist friends I have seen the reality this is my experience . They I read something and themselves practice something else. I can not give their names and detail . Do not undermine others.. One should follow what you preach . Leftist only preach

Ramashish Kumar ये वही कृष्णकांत है क्या जो गले में गमछा लपेट कर सात्र हुआ करता था/है? कितनी बड़ी बड़ी बातें करता था/है वो ! इसीलिये जरुरी है कि लेफ्ट के इस चिंतन से परहेज करना चाहिये कि मनुष्य सिर्फ देह है । खास कर स्त्रियों को ! लेकिन सुनता कौन है ! और ये भी जरुरी है कि उन्हें किसी भी के लिखे को बहुत धीरे धीरे पढ़ना चाहिये, शब्द में नहीं उलझन चाहिए । लिखे के पीछे के भाव को समझना चाहिए । धीरे धीरे व्यक्तित्व समझने में मदद मिलेगी।

Rustam Hayat Khan Koi us krishnkant ka ek pic to share karo…

Animesh Mukharjee मेरा एक विनम्र सवाल है, सम्भव हो तो समझाएं। दोनों लंबे समय से एक रिलेशन में थे, कई कारणों से जिनमें कृष्णकांत की गलतियां ज़्यादा होंगी, ये रिश्ता नहीं चल पाया। प्रियंका खुद भी इससे बाहर ही जा चुकी हैं। कृष्णकांत भी शायद ऐसा कुछ चाहते हैं। ऐसे में वायर क्यों दोषी है, कृष्णकांत अपराधी क्यों हैं? क्या kk किसी तरह से ब्लैकमेल कर रहा है। क्या बिना कंसेंट के कुछ करने का मामला है। अगर kk सीरियल मोलेस्टर है तो और लड़कियां सामने आएं, वरदराजन से मिलें। अपराध क्या है मुझे अभी तक समझ नहीं आया।

उपासना झा अनिमेष एक साथ कई लड़कियों को बेवकूफ़ बनाना अपराध ही है। शादी के नाम पर सम्बन्ध बनाना भी

Amarendra Kishore सवाल सहमति का नहीं है।सवाल उसकी निजता को असुरक्षित करने का है। किनाराकशी अन्याय है।लेकिन इस अन्याय का प्रतिकार हो।प्रियांका गलत कर रही है।उसे सहानुभूति चाहिए। लेकिन मामले को समझना होगा– जब जैविक रिश्ते में दरार आ सकता है तो ऐसे रिश्तों का वजूद तो कपूर के धेले के माफिक होता है। कृष्णकांत को जेल भेजना समाधान नहीं है।

उपासना झा हाँ, मैंने प्रियंका को यही कहा था कि सब लड़कियाँ एकसाथ केस करो

Amarendra Kishore चोर दरवाजे या सहमति या शादी के इरादों से बने विवाहपूर्व संबंध शायद ही सकारात्मक दिशा और निश्चित मुकाम हासिल कर पाते हैं। शादी से पहले सम्बन्ध बन जाना आज की तारीख में एक आम बात है शहरों में। ज़्यादातर लोग इसके बाद शादी न होने को सहजता से लेते हैं। शादी का वादा करके सम्बन्ध बनाने में में पीड़ित की गलती ज़्यादा मानता हूं। अगर लड़की को बाद में लगे कि लड़का सही नहीं तो? तब वो बाहर नहीं जाएगी रिश्ते से? विवाहपूर्व या विवाहेत्तर संबंध केवल शहरी ज़िन्दगी का मौकापरस्त मनोवृति नहीं है।सहमति दोनो की होती है,समाज की नहीं।लेकिन एक पक्ष को बाद संबंध रास नहीं आकर रिश्ते से खुद को अलग कर लेना और दूसरे का ठगा महसूस होना केवल लड़का या केवल लड़की के साथ नहीं होता।समाज से अलग हटकर या उसके प्रारूप को धता बताकर बने ऐसे सहमतिमूलक संबंध एक दूसरे से लाजमुक्त हो चुके होते हैं।गलती दोनों पक्षों की होती है।

Sudipti Satyanand यही मुझे भी लगता है। प्रियंका को पहले दिन से सपोर्ट करने, समझाने के बाद भी यही कि अगर रिश्ते में इतनी बार दरारें आईं, खामियां रहीं और बाहर आ गए तो ऐसे आदमी के।लिए जान क्यों देना? शादी अगर हो भी जाए तो नहीं चलती है तो लोग अलग होते हैं न? संबंध नहीं चला, अलग हो गए, उसकी धूर्तता भी सामने लायी गयी पर अब उस लड़की को बाहर आना चाहिए न? शादी नहीं चलती तो लोग तलाक लेते हैं जान नहीं देते।

Amarendra Kishore आप बिलकुल सही कह रहीं हैं–किसी ने कहा भी है कि आँसुओं में धुली खुशी की तरह,रिश्ते होते हैं शायरी की तरह।रिश्ते निभाने की अंदर से ज़िद्द होती है। डंडे के बूते न रिश्ता चलता है और न ही कानून का भय दिखाकर रिश्तों की मिठास लौटाती है।यदि कल तक प्रेम था तो आज प्रतिकार क्यों? जो भी वक़्त गुजार लिया उसके अच्छे पलों को याद कर आगे बढिये– वह तुम्हारा नहीं था, लिहाजा नहीं लौटा, तुम्हारा होता तो कहीं नहीं जाता। कल तक सहमति थी यानी दोनो की इच्छा थी।परस्पर संतुलन रख पाना दोनो के बूते की बात नहीं थी।इसलिए गलती भी दोनो की रही होगी।

Gunjan Jhajharia दी कल से सोच रही हूँ, प्रियंका को कुछ मैसेज करूँ, लेकिन समझ नही आ रहा क्या लिखूँ। वामपंथ विचारधारा आइडियल है, लेकिन इसके फॉलोवर्स आइडियल नहीं हैं। कृष्णकान्त को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन दी प्रियंका का इश्क़ पाक था, उसको सज़ा मिलने से भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, बस इसे समय चाहिए। जरूर ये मुश्किल समय होगा, लेकिन हिम्मत रखनी होगी। खुद का साथ देना होगा प्रियंका तुम्हें, तुम अपने आपको नहीं छोड़ सकती। तुम ये समझ लो, ऐसा हर दूसरे आदमी के साथ होता है, जब उनके जज्बातों से खिलवाड़ किया जाता है, और फिर बदनाम करने की कोशिश की जाती है।
तुम उन सभी से कमज़ोर नहीं हो,
खुद को कमज़ोर साबित मत करो,
उसे छोड़ खुद पर ध्यान दो, उसके साथ क्या हो क्या नहीं, कुछ भी कहे वो, सच्चाई तुमसे बेहतर कौन जानता है। तुम खुद से इस कीमती जिंदगी के अच्छे पल नहीं छीन सकती। प्रियंका तुम्हें अभी बहुत कुछ करना है दूसरों के लिए भी। सबको तुमसे उम्मीदें हैं। कम से कम मुझे तो हैं।

DrAjit Pandey वामपंथ का पाखण्ड यही है। जिन मुद्दों पर दूसरों को कटघरे में खड़ा करते हैं, उन्हीं मुद्दों पर वे अमल करते हैं। BHU के प्रोफेसर कृष्णमोहन सिंह ने 2014 में अपनी महिला मित्र के साथ मिलकर अपनी पत्नी की खुलेआम पिटाई की थी। उनकी पत्नी ने उनके इस अवैध सम्बन्ध का विरोध किया था लेकिन प्रोफेसर अपने घर में महिला मित्र को ले आये थे। वस्तुतः हर वाद के समर्थकों में ऐसे लोग मिल जाते हैं जिनकी कथनी और करनी में अन्तर होता है।

Mrinal Ashutosh पहले प्रियंका जी को ठीक होने दीजिये। फिर इस मामले को सही से ठीक करिये। @#$कांत से भी पूछ लीजिये कि जनाब, क्या है यह? अपना विचार जल्दी बताओ। नहीं तो दूसरा विचार किया जाएगा।

Majdoor Jha मैं अपने निजी अनुभव में द वायर और नेशनल दस्तक के अलोकतांत्रिक रवैये को महसूस कर चुका हूं। विस्तार से इस पर जरूर लिखूंगा। लेकिन एक बात जरूर कहना चाहूंगा वह ये कि हमारे तमाम सामाजिक सरोकार के कार्यक्रमों के बावजूद हमें जनता से शिकायत रहती है कि वह इतना अलोकतांत्रिक शक्तियों को ही क्यों चुनती है। तो इसका जवाब है कि जब जब आपको अपने और सच में से एक को चुनना होता है आप सच का गला घोंट देते हैं और ये बात वह जनता भी जानती है जिसे आप बेवकूफ समझते हैं ।

Devesh Pandey घटना दुःखद है….. पर कहीं ना कहीं दुख के कारण को इन लोगों ने स्वयं चुना है। धोखा देने वाला दोषी है पर जो धोखा खाते जा रही हैं उनको भी विचार करना चाहिए

Ritu Tiwary घरवाले उसको लेकर गाँव चले गये। वो जल्दी आये सब प्रार्थना कीजिए।

सुलोचना लड़कियों को कुछ क्रांतिवीर बेवकूफ समझते हैं और एक साथ एक से अधिक अफेयर चलाते हैं जैसे कि उन्हें कुछ पता ही न चलेगा

Arvind Arora अपने विषैले ज़हनों की गंदगी लीप-पोत कर आरोपी को मौक़े पर ही ‘क्लीन चिट’ दे रहे और प्रियंका को क़ानूनी कार्यवाही से रोकने का हर जतन घिनौना प्रयास कर रहे दरिंदों के कमेंट पढ़ रहा हूँ और घिन से भर रहा हूँ उपासना झा. यही वह लोग हैं जो कुछ दिनों से BHU मामले पर स्त्रीवाद का झंडा फहराते घूम रहे थे!? थू है इस बेशर्मी पर. कैसे-कैसे हैवान घूम रहे हैं आसपास की दुनिया में इंसान की पहचान और सरोकारों का नक़ाब ओढ़े!

Arvind Arora  इस पोस्ट को और कुछ वक़्त ख़र्च कर के सारे कमेंट्स को भी पढ़िए और हो सके तो इस पर लिखिए भी Shobha Shami. अभी परसों ही आपने पोस्ट लिखी थी कि कैसे ख़ुद को Politically Correct रखने के लिए आपकी एक मित्र ने आपको ही उलाहनों भरी ‘शिक्षा’ दी थी, यहाँ तो बड़ी संख्या में प्रियंका को आगे कार्रवाई न करने की ताक़ीद के साथ ही आरोपी को अभी से ही ‘क्लीन चिट’ देने वाले लोग दिख जाएँगे आपको. और ध्यान रहे यह सब अभी तक BHU वाले मसले पर हायतौबा मचा कर स्त्रीवाद के सर्टिफिकेट जीतने वाले लोग हैं.

उपासना झा विभा रानी नाम की एक महिला में मेरे इनबॉक्स में पहुँच गयी। बोल रही कि आप केस करिये मैं बेल कराऊंगी।

Arvind Arora ऐसा!? बताओ, यह लोग गिरोहबंद अपराधियों से कैसे कम हैं!?

Arti Varma yakeen nahi hota priyanka jaisi strong ladki aisa kar sakti hai..kis hadd tak aahat thi tum dost:'( jaldi niklo isse aasaan nahi hai par namumkin bhi nahi

Pragya Pande यह क्या मामला है । अभी आपकी वाल से पता चला। ईश्वर प्रियंका को जल्दी स्वस्थ करे।

Shreekant Satyadarshi U have unravelled many masks Upasanaji,i hope culprit heads will roll,sincere accolades to u

Qamrul Hasan Siddiqui The Wire को इसपर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए वर्ना उनकी छवि को धूमिल होने में समय नहीं लगेगा।

Mamta Pathak Sharma वामपंथी अपनी सुविधानुसार बोलते हैं उपासना झा…प्रियंका स्वस्थ हों और घर आयें…ऐसी कामना है…

Chandrakala Tripathi मध्यवर्गीय सुविधापरस्ती के फ्रेम में ज्यादातर हैं। उन्हें इसका भाष्य चतुराई से करने भी आता है। स्त्री के लिए भी वही निरंकुशता उसके स्पेस का फायदा उठाना। कोई भी घटना उठा कर देखो इनके पैतरे दिख जाएंगे। यहां वाम दक्षिण सब एक से दिखेंगे। जरूरी है कि प्रियंका को साहस में लौटाया जाए। मुकाबला करना चाहिए इसका।

Ritu Tiwary किसी का चरित्र उसका व्यक्तिगत होता है..उसका किसी विचारधारा से सम्बंध नहीं..।कृष्णकांत का जो चरित्र वर्णन मैंने देखा ये ज़रूर उम्मीद करूँगी कि उनके मित्र जो उनके साथ उठते बैठते थे उन्हें मामले में पड़ना चाहिए..आख़िर समाज का भय कहाँ चला गया। इतनी उद्दंडता वो इसी वजह से करने का साहस कर रहा है क्योंकि उसे परिवार, दोस्त, रिश्तेदार और समाज का भय नहीं। ये भय लोगों में ख़त्म होगा तो अराजकता बढ़ेगी।

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मौत का दर्शन सुनाते इस आईएएस अफसर ने दे ही दी अपनी जान (देखें वीडियो)

शांति प्रिय और आध्यात्मिक स्वभाव वाले आईएएस अफसर मुकेश पांडेय बिहार में बक्सर के जिला मजिस्ट्रेट हुआ करते थे. एक शाम वे सर्किट हाउस में अकेले रुकते हैं और खुद का एक वीडियो रिकार्ड करने लगते हैं. यह वीडियो अब उनके जीवन का अंतिम वीडियो बन चुका है. यह वीडियो उनकी निजी जिंदगी की दिक्कतों और जीवन के प्रति उनके नजरिए का गवाह बन जाता है. सुसाइड से ठीक पहले रिकार्ड किए गए इस वीडियो में उन्होंने पांच मिनट में ही काफी सारी बातें कही हैं.

इस वीडियो को बनाने के बाद वे दिल्ली जाकर एक होटल में रुकते हैं. वहां से गाजियाबाद की तरफ निकलते हैं और एक ट्रेन से कटकर जान दे देते हैं. नीचे दिए गए वीडियो को गौर से देखिए और सुनिए. ये अफसर यूनिवर्स की बात कर रहा है. जीवन के मकसद की बात कर रहा है. शांति और अध्यात्म की बात कर रहा है. अपने स्वभाव और परिजनों के व्यवहार की बात कर रहा है.

यह आईएएस अफसर धरती और यूनिवर्स में मनुष्य के होने की किसी सार्थकता को खारिज करता है. इस दुनिया को खुद के लिए रहने लायक नहीं पाता है. वह खुद को यहां मिसफिट बताता है. भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2012 बैच का यह अधिकारी अंत में इस नतीजे पर पहुंच जाता है कि आत्महत्या का उसका चुनाव बेहद सही रास्ता है, सबसे उचित तरीका है, सभी समस्याओं-दुखों से निजात पाने का.

मौत को गले लगाना ही एक जीवन के लिए मंजिल नजर आने लगे, वह भी इस नतीजे पर कोई युवा आईएएस अफसर पहुंच जाए, ऐसा उदाहरण शायद ही कहीं मिले.

श्रद्धांजलि मुकेश पांडेय.

आप जिस भी दुनिया में चले गए हों, वहां आप को अपने स्वभाव के अनुरूप शांति और प्रेम मिले.

आत्महत्या करने से पहले बक्सर के सर्किट हाउस में रिकार्ड किए गए मौत के दर्शन वाला वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की रिपोर्ट.

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राहुल इतने संजीदा और साफ दिल थे कि अगर किसी ने कुछ बोल दिया तो आंखों में आंसू आ जाते

Abhimanyu Shitole राहुल ने आत्महत्या कर ली… ! यह दुखद खबर जब से सुनी है मन उदास है। राहुल और मैं करीब साढ़े तीन-चार साल tv9 में एक साथ रहे। tv9 लॉन्च होने से पहले से वह मेरे साथ टीम में था। बेहद सौम्य, शालीन और अतंरमुखी लड़का। आंखों में हजार सपने पाले हुआ था। बोलता कम था, बस जो काम दो, वह पूरे मन से करता था। वह मेरे साथ प्रोडक्शन में था। कभी डे शिफ्ट, कभी नाइट शिफ्ट, कभी डे-नाइट दोनों एक साथ… नाराज होता था, लेकिन अपनी नाराजगी भी मन में ही दबा कर रखता था।

संजीदा और साफ दिल इतना था कि अगर किसी ने कुछ बोल दिया था तो उसकी आंखों में आंसू आ जाते थे। काम के प्रति जिम्मेदार और कुछ अच्छा करने की ललक उसमें भरी थी। एक दिन राहुल मेरे पास आया बोला, सर मुझे भी स्क्रिप्ट लिखना सिखा दो। उस दिन उसे स्क्रिप्टिंग की कुछ बुनियादी बातें बताई थी। बाद में वह लिखने लगा। उसे स्क्रिप्टिंग में मजा आने लगा। कुछ दिन बाद आकर बोला आपको मेरी लिखी स्क्रिप्ट कैसी लगती है? मैंने कहा टेक्निकली तो ठीक है, लेकिन शब्दों से खेलना भी सीख लो तो मजा आ जाएगा।

स्वर्गीय राहुल शुक्ला

धीरे-धीरे वह शब्दों से खेलना भी सीख गया। अब वह प्रोडक्शन के साथ-साथ स्क्रिप्टिंग भी करने लगा। उसकी लगन ने उसे पर्दे के पीछे से निकाल कर ऑन स्क्रीन कर दिया। हमारा राहुल एंकर भी बन गया। उस दिन मैं बहुत खुश हुआ था। पहली बार जब राहुल ने एंकरिंग की थी मैंने राहुल को उस दिन दिल से बधाई दी थी और कहा था, अब तुम्हारे लिए रास्ता खुल गया है, पीछे मत पलटना… राहुल ने जबाव में इतना ही कहा था, ‘सर! मैं पूरी मेहनत करूंगा।’

सोमवार की सुबह लखनऊ से विनय शुक्ला का फोन आया। विनय भी हमारा tv9 का पुराना साथी है। वह मुझसे राहुल की खबर की पुष्टि करना चाहता था। उसे भी मेरी तरह राहुल की आत्महत्या वाली बात पर भरोसा नहीं हो रहा था। हालांकि वह मुझसे पहले गिरीश गायकवाड से इस खबर की पुष्टि कर चुका था। इस खबर के बाद से मन बिल्कुल खिन्न है। tv9 छोड़ने के कुछ महीनों बाद सबसे संपर्क टूट गया था।

कुछ साथी अब भी फोन करके याद करते हैं, लेकिन राहुल का कभी फोन नहीं आया और अब इसके लिए उसे डांटने या शिकायत करने का मौका भी नहीं है। रविवार को जब से यह मनहूस खबर सुनी है, बारबार राहुल का चेहरा आंखों के सामने आ रहा है। भगवान जाने क्या वजह रही होगी कि उसने खुद को खत्म करने का फैसला लिया। अब तो सिर्फ इतनी ही प्रार्थना है कि हे भगवान उसकी अशांत आत्मा को जरूर-जरूर-जरूर शांति देना। और हाँ एक प्रार्थना और है इस बार उसे इतना कलेजा जरूर देना कि वह अपनी परेशानी से लड़ सके, अपना मन अपने दोस्तों के सामने खोल सके।

लेखक अभिमन शितोले मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

इन्हें भी पढ़ें…

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जी न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता राहुल शुक्ला ने आत्महत्या के पहले फेसबुक पर लिखी थे ये कविता

Ashwini Sharma : बावरा मन देखने चला एक सपना… आखिर ऐसा कौन सा सपना था जिसे देखने की ख्वाहिश लिए जी न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता राहुल शुक्ला ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया..उसने मुंबई के चांदिवली में फांसी लगाकर जान दे दी..राहुल की खुदकुशी की जानकारी मेरी पूर्व सहयोगी हर्षा ने मुझे कल रात को दी और तब से ही मेरा मन बेचैन हो उठा..साल 2009 में पहली बार राहुल मुझसे टीवी9 महाराष्ट्र में काम करने के दौरान मिला था..

राहुल की पहली नौकरी थी..कभी भी मैंने राहुल के मुरझाए चेहरे को नहीं देखा था..हमेशा मुस्कराता हुआ किसी भी टास्क को करने के लिए तैयार रहता..यही वजह है कि वो अपने सहकर्मियों का चहेता था..और बड़ी लगन से काम करते हुए वो जी न्यूज में वरिष्ठ संवाददाता के पद पर पहुंचा था..लेकिन आज राहुल नहीं है और मैं ही नहीं उसके वो तमाम साथी सदमे में हैं जो कभी ना कभी राहुल के साथ काम कर चुके हैं..

सब यही कह रहे हैं कि आखिर सबके दुखों का साथी राहुल इतना अकेला क्यों था..उसने खुदकुशी से पहले फेसबुक पर कई ऐसी कविताएं पोस्ट की जो उसके गहरे विशाद में होने का भाव पेश करती हैं..राहुल ने चंद दिन पहले एक कविता लिखी जिसमे किसी परछाई का जिक्र है..वो परछाई आखिर क्या थी..आखिर वो क्यों राहुल का पीछा कर रही थी..राहुल ने लिखा था..

एक परछाई पीछे भागती है..
ना जाने कहां से आती है..
मैं रूकता हूं वो छिप जाती है..
मैं दौड़ता हूं वो दबे पांव फिर आती है..
हर दिन छलती है, हर दिन हंसती है..
शाम होते ही छिप जाती है..

पूरी कविता का स्क्रीनशाट ये है…

मलाल इस बात का भी है कि आभासी दुनिया और रीयल दुनिया में अनगिनत दोस्त होने के बाद भी किसी को राहुल का दर्द क्यों नहीं दिखा…राहुल ने किसी से अपना दर्द खुलकर क्यों नहीं शेयर किया और अगर ऐसा हो जाता तो आज राहुल हमारे बीच होता…ईश्वर से यही प्रार्थना है राहुल की आत्मा को शांति दें…

मुंबई समेत कई शहरों में कई न्यूज चैनलों के लिए काम कर चुके और इन दिनों लखनऊ में पदस्थ टीवी पत्रकार अश्विनी शर्मा की एफबी वॉल से.

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