दो बददिमाग और विक्षिप्त कथित पत्रकारों द्वारा यशवंत पर हमले के बाद हमारी बिरादरी को सांप क्यों सूंघ गया?

Padampati Sharma : क्या किसी पत्रकार के समर्थन में मोमबत्ती दिखाने या विरोध ज्ञापित करने के लिए उसका वामपंथी या प्रगतिशील होना जरूरी है? यदि ऐसा नहीं है तो सिर्फ पत्रकार हित के लिए दिन रात एक करने वाले यशवंत सिंह पर दो बददिमाग मानसिक रूप से विक्षिप्त कथित पत्रकारों द्वारा किये गए हमले पर हमारी बिरादरी को क्यों सांप सूंघ गया? यशवंत के बहाने पत्रकारों की आवाज दबाने का कुत्सित प्रयास करने वाले की मैं घोर निंदा करता हूं.

सच तो यह है कि उन अपराधियों के अंत्राशय पर इतने प्रहार किए जाते कि वे महीनों न सो पाते और न बैठ पाते. मगर हम जिस बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं वहां कलम ही तलवार है और मेरी ओर से सजा यही कि अगर वे दोनो शख्स मेरी फ्रेंड लिस्ट में हुए तो न सिर्फ उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दूंगा वरन ब्लाक भी करूंगा. यशवंत! डटे रहना भाई. आ गया है सोशल मीडिया का दौर. मुख्य धारा के मीडिया का यही हाल जारी रहा तो उसकी दुकान बंद होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा. तब यशवंत जैसे जाबांज पत्रकारों का ही वर्चस्व होगा. जुझारू पत्रकार Yashwant Singh पर हमले की निंदा करता हूँ। शायद कुछ लोग शर्म से सर झुका सकें।

(कई अखबारों और न्यूज चैनलों में खेल संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार पदमपति शर्मा की एफबी वॉल से.)

फेसबुक पर आईं कुछ अन्य प्रमुख प्रतिक्रियाएं यूं हैं…

Surendra Pratap Singh : जिस दिन यशवंत पर हमले वाली घटना घटित हुई थी उसी दिन किसी ने इस पर पोस्ट लगाई थी लेकिन किसी पत्रकार ने कोई नोटिस नहीं लिया… और, तभी लंकेश वाली वारदात हुई और लंका में लगी आग मचा हाहाकार… सभी पत्रकार बंधु अपनी अपनी बाल्टी का पानी लेकर उधर ही दौड़ लगाने लगे… फिर क्या, यशवंत जी समाचारों से गायब। धन्य हो।

Sarvesh Singh : पिछले दिनों भड़ास 4मीडिया के संपादक Yashwant Singh सर पर हमला हुआ।हमला किसी और ने नहीं बल्कि पत्रकारिता को कलंकित करने वाले दो दिमागी दिवालियों ने किया। उस हमले से जुड़ा एक वीडियो यशवंत सर ने फेसबुक पर साझा किया। इसमें उन्होंने साफ तौर पर उन दोनों को माफ़ करने की बात कही। पीत पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों और सरकार की गोद में झूलने वाले मीडिया समूह की काली करतूतों को देश के सामने निष्पक्षता और निडरता से रखने वाले यशवंत सर के प्रति मेरे मन में अनन्त सम्मान बढ़ गया है। उन्होंने उन पर हमला करने वालों को माफ किया। और कुछ ऐसी बातों का जिक्र किया जो मेरे मानस पटल पर सदैव सदैव के लिए अंकित हो गया।

ये हैं दोनों हमलावर…

यशवंत ने भूपेंद्र सिंह भूप्पी और अनुराग त्रिपाठी को माफ करते हुए कहा कि “मेरे पास कलम की ताकत है सच्चे पत्रकार के लिए कलम ही सब कुछ है।कलम ही तोप होती है, कलम ही बंदूक होती है, बशर्ते उसे कलम का इस्तेमाल करने आता हो”।”प्रकृति न्याय करती है। हम कौन होते हैं न्याय करने वाले”। आपके इस वाले वीडियो को देखकर आपकी बातों को सुनकर मैं बहुत भावुक हुआ। बड़ी आसानी से आपने उन दोनों सनकी और तथाकथित पत्रकारों को माफ कर दिया। शायद यह आप जैसा बड़े और महान व्यक्तित्व वाला ही कर सकता है। एक बात तो तय है कि उन दोनों पागलों का न्याय प्रकृति ही करेगी।आप के सच्चे व निडर व्यक्तित्व का मैं हमेशा से कायल रहा हूं। पर आप की सहजता, सहनशीलता, विशाल हृदयता वाले आपके इस महान व्यक्तित्व को मैं हजार बार सलाम करता हूं। और, हां सर! चश्मा तो निर्जीव वस्तु है वह टूटेगा भी और जुड़ेगा भी। पर आप के अदम्य साहस, बेबाक सच्चाई, साफगोई को भूपेंद्र सिंह भूप्पी और अनुराग त्रिपाठी जैसे हजारों आसूरी प्रवृत्ति के लोग कभी दबा नहीं पाएंगे।

Dhananjay Singh : ”थोड़ा मारने दो इसे,बहुत खबरें छापता है” कहते हुए दिल्ली के प्रेस क्लब में भड़ास वाले Yashwant भाई को दो पत्रकारों ने ही पीट दिया…. जाहिर है इस घटना के गवाह भी कई एक रहे ही होंगे… निर्भीक पत्रकारिता पर खुद पत्रकारों की तरफ से हुए इस हमले की मैं निंदा करता हूँ….खम्भों की यह लड़ाई निंदनीय है… आप भी छापिये न भाई… असहमति है तो किसी को पीट देंगे? ऐसे ही कमजोर पलों में निहायत ही कमजोर लोग पिस्टल भी निकाल लेते हैं और परिणाम अत्यंत भयानक होता है… आशा है देश की राजधानी के प्रेस क्लब में हुई इस घटना के विरोध में तमाम एक्टिविस्ट्स से लगायत प्रधानमंत्री भी संज्ञान लेंगे.. ऐसी हरकत निंदनीय है, अभी निंदा करिए, सिर्फ देखिए और इंतजार करिए की रणनीति पर न चलिए…

पूरे मामले को समझने के लिए इन्हें भी पढ़ सकते हैं….

 

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हमलावर नंबर एक भुप्पी भी मिल गया फेसबुक पर, देखें-जानें इसकी हकीकत

Yashwant Singh : फेसबुक पर मिल गया हमलावर नम्बर एक भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी। हमलावर नंबर दो अनुराग त्रिपाठी की तरह इसने भी मुझे फेसबुक और ट्विटर पर ब्लॉक कर रखा है ताकि खोजने पर ये न मिले। हमले के अगले ही दिन दोनों ने मुझे सोशल मीडिया पर ब्लाक कर दिया। क्यों? शायद उस डर से कि उन लोगों को खोजा न जा सके और उनकी करनी जगजाहिर न की जा सके। मुझे वाकई सोशल मीडिया पर खोजते हुए भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी नहीं मिले। फिर मैंने दोस्तों को टास्क दिया। इसके बाद पहले अनुराग त्रिपाठी की कुंडली मिली। अब भुप्पी का भी पता चल गया है।

इस भुप्पी के बारे में फिलहाल थोड़ा-सा बता दूं। यह आजतक न्यूज चैनल से ब्लेकमेलिंग के आरोपों में निकाला गया था। चार पांच साल पहले की घटना है। तब उसकी खबर भड़ास पर विस्तार से छपी थी। उसके बाद भुप्पी ने महुआ न्यूज चैनल में दलाली परवान चढ़ाने के लिए कदम रखा। इसकी और अनुराग की हरकतों के कारण इन दोनों को न सिर्फ महुआ न्यूज से जाना पड़ा बल्कि महुआ न्यूज को बंद हो जाना पड़ा। बताया जा रहा है कि ये भुप्पी फिलहाल किसी करेस्पांडेंट टीवी नामक एक वेबसाइट को चलाता है और इसी नाम से कोई पत्रिका प्रकाशित करता है, चंडीगढ़ से। फिलहाल इस डरपोक तक संदेश भेजकर इसको गेट वेल सून कहने का अभियान शुरू किया जाए।

इसका फेसबुक पता ये है https://www.facebook.com/bhupendranarayan.singh.54

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

इसे भी पढ़ें..

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यशवंत सिंह पर कैसे हुआ हमला, सुनिए उनकी जुबानी (देखें वीडियो)

प्रेस क्लब आफ इंडिया के गेट पर भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर दो लफंगानुमा पत्रकारों ने हमाला किया. इनमें से एक का नाम भूपेंद्र सिंह भुप्पी है और दूसरा अनुराग त्रिपाठी है. प्रेस क्लब के भीतर ये दोनों यशवंत को देखने के बाद अपनी टेबल से उठकर यशवंत की टेबल पर आ गए और बैठकर यशवंत की तारीफें किए जा रहे थे, गले मिल रहे थे. बाहर निकलने पर धोखे से हमला कर दिया.

यशवंत ने हमले के दो दिन बाद पूरी कहानी इस वीडियो के जरिए विस्तार से बताई. साथ ही ऐसे हमलों को लेकर अपनी सोच का इजहार भी किया. नीचे दिए वीडियो पर क्लिक करें:

यशवंत ने उपरोक्त वीडियो के लिंक को फेसबुक पर साझा करते हुए जो लिखा है, वह इस प्रकार है :

उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं :

Alok Singh : बहुत दुःखद है इस तरह का विरोध करना। मारपीट और हाथापाई कायराना हरकत है जो कि निंदनीय है। शुक्र है कि आपको ज्यादा चोटें नहीं आई। आपका चश्मा टूट गया। कोई बात नहीं। मिलिये मैं आपको उस से बढ़िया वाला चश्मा दिलवाने का प्रयत्न करूँगा। जल्द स्वस्थ होकर पुनः अपने जीवन का आनंद लें।

Rishabh Yadav : bhaiya lage raho…prerna de raha hai aapka yeh video। भैया आप जब समय मिले तो यह भी बताये की किन कारणों से जेल यात्राएं हुई और ओर नौजवान लोगों के लिए क्या सावधानियां रखना चाहिए। थोड़ा कोर्ट कचहरी का अनुभव भी साझा करें तो बढ़िया रहेगा। लिखें पूरे सिलसिलेवार ढंग से, अगर आप उचित समझें तो।

Hemant Jaiman Dabang : यशवन्त सर आपको कुछ नही होगा। हजारो लोगो की दुआएं आपके साथ है।

Qamer Baig : भड़ास है तो निकलेगी ही किसी के कायराना हरकत के लिए तो भड़ास भर भर के निकले कलम की तेज धार से भड़ास निकालते रहिये सतर्क रहिये होशियार रहिये खुश रहिये और ज़िंदादिली से सभी से मिलते रहिये।

अंशुमान मिश्रा : सर ये कोई आम हमला नहीं बल्कि नाक पर हमला है। अब सवाल नाक का है तो कुछ न कुछ करना ही चाहिए।

Dhananjay Singh : ”थोड़ा मारने दो इसे,बहुत खबरें छापता है” कहते हुए दिल्ली के प्रेस क्लब में भड़ास वाले Yashwant भाई को दो पत्रकारों ने ही पीट दिया……… जाहिर है इस घटना के गवाह भी कई एक रहे ही होंगे… निर्भीक पत्रकारिता पर खुद पत्रकारों की तरफ से हुए इस हमले की मैं निंदा करता हूँ ….खम्भों की यह लड़ाई निंदनीय है… आप भी छापिये न भाई,असहमति है तो किसी को पीट देंगे? ऐसे ही कमजोर पलों में निहायत ही कमजोर लोग पिस्टल भी निकाल लेते हैं और परिणाम अत्यंत भयानक होता है… आशा है देश की राजधानी के प्रेस क्लब में हुई इस घटना के विरोध में तमाम एक्टिविस्ट्स से लगायत प्रधानमंत्री भी ट्विट करेंगे. ऐसी हरकत निंदनीय है, अभी निंदा करिए.

Shahid Naqvi : जब खबर छापने के विरोध में पत्रकार ही पत्रकार पर हमलावर हो तो सच के नज़दीक पहुंचना मुश्किल है। पत्रकार पर किसी भी तरह के हमले की मैं घोर निन्दा करता हूं।

Vaibhav Agrawal : यशवंत जो पत्रकारिता की पोल खोल राजनीती करते है वो निश्चित ही प्रसंशक कम दुश्मन अधिक बनाती है! .. इस ढंग से मार पीट कर इन लोगो ने पत्रकारिता को और अधिक कलंकित किया है! दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, इसमें राजनीतिक लाभ का कोई एंगल न होने की वजह से अधिकतम बिरादरी चुप है! 🙁

Abdul Noor Shibli : shandar. dono se ab bhi nafrat nahin. wah.

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भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर प्रेस क्लब गेट पर भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी ने किया हमला

(कोबरा पोस्ट में प्रकाशित यशवंत पर हमले की खबर का स्क्रीनशाट)

भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह पर चार सितंबर की रात करीब साढ़े दस बजे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के गेट पर जानलेवा हमला हो गया. यशवंत को बुरी तरह से मारा-पीटा गया और गालियां दी गई. भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने अपनी फेसबुक वाल पर घटना की जानकारी देते हुए लिखा, ”अटैक हो गया गुरु। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के गेट पर। बहुत मारा पीटा मुझे। पार्ट ऑफ जॉब ही है। भूपेंद्र सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी की कारस्तानी है। जाने किस खबर की बात करके पीटा उसने।” इस हमले में यशवंत का चश्मा टूट गया और नाक, कान, गर्दन, होंठ पर चोट आई है.

यशवंत ने बताया कि भूपेंद्र सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी प्रेस क्लब के अंदर तो काफी अच्छे मिले. तारीफ की. लेकिन वे पूरी योजना से थे. बाहर गेट पर इंतजार कर रहे थे. जब यशवंत बाहर निकले तो भूपेंद्र सिंह भुप्पी ने हाथ मिलाने के बहाने पास बुलाया और हमला कर दिया. इस दौरान अनुराग त्रिपाठी मोबाइल से वीडियो बनाने लगा. वहां मौके पर वरिष्ठ पत्रकार रुबी अरुण भी मौजूद थीं जो हमलावर को बार बार रोक रही थीं लेकिन भुप्पी और अनुराग दोनों लगातार कह रहे थे कि ‘इसे मार खाने दो, बहुत खबरें छापता है’. इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से यशवंत हक्के बक्के थे और लगातार भुप्पी से कह रहे थे कि आखिर गुस्सा किस बात पर है, प्रेस क्लब के अंदर तो तुम ठीक थे, बाहर अचानक क्या हो गया?

भुप्पी हमले के दौरान कुछ बरस पुरानी छपी भड़ास की खबरों का जिक्र कर रहा था. ज्ञात हो कि भूपेंद्र सिंह भुप्पी रहने वाला गाजीपुर का है लेकिन चंडीगढ़ में केपीएस गिल की खानदान की एक लड़की से शादी करने के बाद अब नोएडा और चंडीगढ़ सेटल हो गया है. आजतक के लिए पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के ब्यूरो चीफ के बतौर एक जमाने में काम करता था पर किन्हीं कारस्तानियों के कारण उसे निकाल दिया गया. फिर उसने महुआ न्यूज चैनल ज्वाइन किया जहां वह फिर अपनी कारस्तानियों के कारण असफल साबित हुआ और अब मीडिया से ही बाहर हो चुका है. उन दिनों इसी से संबंधित खबरें भड़ास पर छपा करती थीं.

अनुराग त्रिपाठी भी महुआ में भुप्पी के साथ था और आजकल खुद को तहलका / न्यूज लांड्री के साथ कार्यरत बताता है. यशवंत ने प्रेस क्लब आफ इंडिया के प्रबंधन को हमले के बाबत लिखित शिकायत दे दी है. साथ ही एक लिखित कंप्लेन पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दी है. यशवंत ने पहले एफआईआर न करने का निर्णय लिया था लेकिन अपने देश भर के हजारों साथियों समर्थकों के अनुरोध पर थाने में लिखित कंप्लेन देने का फैसला कर लिया.

यशवंत का कहना है कि दो पत्रकारों का किसी खबर को लेकर एक पत्रकार पर हमला करना पत्रकारिता के आजकल के निम्नतम स्तर को दर्शाता है. जब हम पत्रकार खुद ही मानसिक लेवल पर सामंती / आपराधिक सोच रखते हैं तो कैसे इस लोकतांत्रिक देश में मीडिया की निष्पक्षता की बात सोच सकते हैं. कलम का जवाब कलम ही हो सकता है, हथियार या हमला नहीं. यशवंत ने भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी को बेहद कमजोर आदमी करार देते हुए कहा कि ये माफी के योग्य हैं, इन्हें खुद नहीं पता कि ये क्या कर बैठे हैं. ये लोग सामने कुछ कहते-बोलते हैं और पीठ पीछे छुरा घोंपने को तैयार रहते हैं. ऐसे दोहरे व्यक्तित्व और आपराधिक मानसिकता के लोग अगर मीडिया में हैं तो यह मीडिया की दयनीयता / दरिद्रता को ही दिखाता है. एक आदमी जो अकेले और निहत्था है, उस पर अचानक से घेर कर हमला कर देना कहां की बहादुरी है. उम्मीद करते हैं कि भुप्पी और अनुराग में अगर थोड़ी भी पत्रकारीय सोच-समझ होगी अकल आएगी और अपने किए पर पश्चाताप करेंगे. 

यशवंत ने अपने पर हमले को लेकर फेसबुक पर दो पोस्ट्स डाली हैं, जो इस प्रकार हैं-

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