यूपी में जंगलराज : फिर निर्भया कांड, जननांग पर घाव, जलाने के निशान, बोरे में शव, फिर केस दब जाएगा!

Kumar Sauvir : बीती शाम लखनऊ की एक बेटी फिर कुछ हैवानों की शिकार बन गयी। अलीगंज के बीचोंबीच सेंट्रल स्‍कूल के पीछे बोरे में दो दिन पुरानी उसकी लाश जब बरामद हुई तो लोग गश खाकर गिर पड़े। उम्र रही होगी करीब 25 साल, कपड़े बुरी तरह फटे हुए। हाथ और पैर तार से बंधे थे। इस बच्‍ची को जलाया गया था। इतना ही नही, इसके जननांग पर दरिन्‍दों ने बहुत बड़ा घाव बना दिया था। एक मनोविज्ञानी से बातचीत हुई तो उन्‍होंने बताया कि ऐसी दरिन्‍दगी नव-धनाढ्य और इसके बल पर पाशविक ताकत हासिल किये लोगों की ही करतूत होती है। सत्‍ता का नशा भी सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण कारक तत्‍व बनता है। तो फिर कौन हैं वह लोग ? शायद एडीजी पुलिस (महिला सुरक्षा) सुतापा सान्‍याल को पूरी छानबीन के बाद इस बारे में पता चल जाए। इसके एक दिन पहले भी तेलीबाग में भी इसी तरह की एक लाश बरामद हुई थी। क्‍या वाकई लखनऊ की आबोहवा बेटियों के खिलाफ हो चुकी है? अगर ऐसा है तो हम सब के लिए यह शर्म, भय, निराश्रय, असंतोष के साथ ही साथ चुल्‍लू भर पानी में डूब जाने की बात है। बेशर्म हम।

अरे टेक इट ईजी यार, टेक इट ईजी… यह किसी युवती की लाश ही तो है ना ? मार डाली गयी है ना, हां, तो ठीक है। इसमें बवाल करने की क्‍या बात है। काहे चिल्‍ल-पों कर रहे। इसके पहले कभी ऐसी लाशें नहीं देखीं हैं क्‍या राजधानी में? बेवकूफ कहीं के… पिछले साल भी तो मारी गयी थी एक युवती। है कि नहीं रक्‍त-रंजित ? इसी तेलीबाग के पडोस में ही। इण्डिया मार्क-टू हैंडपम्‍प के हत्‍थे के पास। सीढियों पर। नंग-धड़ंग। मुंह के बल। उसका पूरा का पूरा बदन नोंचा गया था। देखते ही मेरे तो रोंगटे ही खड़े हो गये थे। बरबस आंखें भर गयी थीं। ऐसा लगा था जैसे कि हमारे आसपास की ही कोई मां-बहन-बेटी की ही लाश वहां पड़ी हो। देखनेवालों ने तो उसकी नंगी फोटो भी खींच कर उसे वायरल करा दिया था। लोगों ने तो यहां तक बताया था कि यह फोटाेग्राफी पुलिसवालो की ही करतूत थी। लेकिन इसमें हुआ कुछ? नहीं ना?

तो फिर इसमें काहे हल्‍ला कर रहे हो? खामोश रहो। दीगर लाशों की तरह यह लाश भी खामोश मौत मरेगी। ज्‍यादा हल्‍ला-दंगा करोगे तो मीडिया में बवाल होगा। अखबार और न्‍यूज चैनल गुर्रायेंगे। और फिर अपना पल्‍लू झिझकते सरकार मामले की उच्‍च-स्‍तरीय जांच करने की बात करेगी। एडीजी सुतापा सान्‍याल चूंकि अभी भी अपर महानिदेशक ( महिला सम्‍मान प्रकोष्‍ठ ) नौकरी में हैं। पिछली बार भी उन्‍होंने ऐसी ही नंग-धड़ंग और रक्‍त-रंजित महिला की लाश के मामले को बहुत गम्‍भीरता के साथ जांचा था, पूरी बारीकियों को छानबीन करने के बाद बताया था कि उस महिला के गुप्‍तांगों को बाइक की चाभी से खुरचा गया था, जिसके चलते उसकी मौत हो गयी थी। हालांकि कई लोगों का कहना था कि यह जघन्‍य और नृशंस हत्‍या थी, जिसमें इस हैंडपम्‍प के हत्‍थे को उसके गुप्‍तांग में डाल कर उसे मार डाला गया था।

बहरहाल, पुलिस की आला अफसर मानी जानी वाली सुतापा सान्‍याल ने ही अपनी छानबीन में घटना स्‍थल की जांच के दौरान पहले पत्रकारों को बताया था कि कि इस हादसे में कम से कम दो हत्‍यारों की संलिप्‍तता है, लेकिन उसी शाम जब उन्‍होंने प्रेस-कांफ्रेंस किया था तो अपनी सघन जांच का ब्‍योरा देते हुए बताया था कि इस काण्‍ड को केवल एक व्‍यक्ति ने ही अंजाम दिया है। उसी जांच के बाद जिला पुलिस ने इस मामले में एक निरीह लग रहे एक गरीब और एक अदने से निजी सुरक्षा गार्ड को जेल भेज दिया था। हालांकि बाद में राज्‍य सरकार ने मामला ज्‍यादा भड़कने पर ऐलान किया था कि मामले की जांच सीबीआई को दी जाएगी, लेकिन आखिरकार यह मामला जिला पुलिस के पास ही रहा। तो ठीक है। इस युवती की मौत पर भी ऐसा हो जाएगा। हंगामा होगा तो सुतापा सान्‍याल बुलायी जाएंगे। सघन जांच करेंगे और अपनी महत्‍वपूर्ण जांच रिपोर्ट देकर किसी न किसी को अपराधी के तौर पर पहचान लेगीं। मामला खत्‍म। और कोई खास बात हो तो बताओ?

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से.

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लूट प्रदेश कह लीजिए या आतंक प्रदेश, चहुंओर मातम का नाम है उत्तर प्रदेश…. (सुनें आडियो टेप)

Yashwant Singh : गजब है उत्तर प्रदेश. भ्रष्टाचार और अराजकता का चरम है इस सूबे में. मीडिया वाले सूबे के युवा मुखिया अखिलेश यादव का चरण दबाने में लगे हैं. ज्यादातर समाजवाद का कोरस गा रहे हैं. कुछ एक जो बोल सकते थे, वे चुप्पी साधे हैं. मीडिया मालिक यूपी सरकार के भारी भरकम विज्ञापन तले दबकर एहसानमंद हैं. इन मालिकों के नौकर किस्म के पत्रकार सरकार से अघोषित रूप से मिले कैश या आवास या दलाली या अन्य सुविधाओं के कारण सरकार के खुलेआम या छिपे प्रशंसक बने हुए हैं. ऐसे में सच्चाई सामने नहीं आ रही.

एक के बाद एक जघन्य घटनाएं हो रही हैं. इस सरकार का एक मंत्री अरबों रुपये के खनन घोटाले में लिप्त पाया गया है. जाहिर है, यह पैसा सिर्फ मंत्री तक ही नहीं पहुंचता है. यह बहुत उपर तक जाता है. उन तक भी पहुंचता है जो अपनी इमानदारी के सर्टिफिकेट भांड़ पत्रकारों से जारी करवाते हैं. उन नेताजी तक भी पहुंचता है जो समाजवाद का नाम ले लेकर कई दशकों तक यूपी की सत्ता की मलाई खाते व खिलाते रहे हैं. यूपी की सत्ता पर काबिज पूरा यादव खानदान भ्रष्टाचार का खुला खेल खेलने में जुटा है. इस खानदान ने लूट के लिए इलाके बांट लिए है. विभाग बांट लिए हैं. सब अपने अपने बीट-इलाके में लगे पड़े हैं. हर किसी को इस समवेत अर्हिनिश जारी लूटकांड के बारे में पता है लेकिन कोई नहीं बोल रहा. क्योंकि सब ओबलाइज्ड हैं या ओबलाइज फील करने में मगन हैं…

ऐसे में अगर यादव सिंह जैसे लुटेरे के मामले की सीबीआई जांच यह समाजवादी सरकार कतई नहीं चाहती तो कोई बड़ी बात नहीं. ऐसे में कोई सपा नेता अगर दरोगा को जीभ काट लेने की धमकी देता हो तो कोई बड़ी बात नहीं. यूपी के भीतर जाइए. आपको अराजकता, कुंठा, हताशा, लूट, दमन, शोषण, अत्याचार की नंगी लाइव कहानियां मिल जाएंगी, हर मोड़ पर, यत्र तत्र सर्वत्र. पर देश के प्रगतिशील हिप्पोक्रेट जाने कितनी मजबूरियां गिनाकर इन्हीं लुटेरे शासकों का सपोर्ट करते मिलेंगे. कहीं दूर दूर तक कोई विकल्प नहीं.

आम आदमी पार्टी ने कुछ उम्मीदें जगाई थीं लेकिन इसने अपना बेड़ा गर्क खुद कर लिया. यह पार्टी भी यसमैनों के एक गिरोह में तब्दील हो चुका है जो धीरे धीरे शिशु लुटेरों के रूप में प्रकट होगा और समय के साथ भयंकरतम वाले लुटेरों के स्तर पर पहुंच जाएंगे. यूपी में राजनीतिक हालात बेहद खराब हैं. जनता किस पर भरोसा करे. कोई नागनाथ तो कोई सापनाथ तो कोई बिच्छू कुमार. सबका काम जनता को लूटना और अपनी तिजोरी भरना है. ऐसी स्थिति में आइए, हम सब कुछ देर के लिए यूपी में फैले कुशासन के मातम पर मौन रख लें. सुनिए टेप… वाराणसी जिले के सिगरा थाने के लल्लापुर चौकी के दारोगा रामसरीख को समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष राज कुमार जायसवाल ने खुलेआम जीभ काटने की धमकी किस तरह दी…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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यादव सिंह केस : सरकार की कत्तई सीबीआई जांच की मंशा नहीं

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लखनऊ वाले पत्रकार संजय शर्मा ने अखिलेश यादव के लिए इमानदारी का सर्टिफिकेट जारी किया

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अपने निजी फेसबुक और ट्विटर एकाउंट का विज्ञापन करने में जनता का पैसा लुटा रहे हैं अखिलेश यादव

सेवा में, श्री अखिलेश यादव,

मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ

विषय- सरकारी विज्ञापनों में आपके व्यक्तिगत फेसबुक और ट्विटर एकाउंट के प्रचार विषयक

महोदय,

कृपया दिनांक 04/11/2014 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न समाचारपत्रों में प्रकाशित तीन विज्ञापनों का सन्दर्भ ग्रहण करें जो दिनांक 04/11/2014 को 100 पुलिस भवन तथा 2 उपरिगामी सेतुओं तथा दिनांक 05/11/2014 को समाजवादी पेंशन योजना के उद्घाटन से सम्बंधित हैं.  इन सभी विज्ञापनों में अन्य तथ्यों के अलावा एक ट्विटर एकाउंट twitter.com/yadavakhilesh, एक फेसबुक एकाउंट facebook.com/yadavakhilesh तथा एक यू-ट्यूब एकाउंट youtube.com/user/upgovtofficial भी अंकित है. ये फेसबुक और ट्विटर एकाउंट आपके अर्थात श्री अखिलेश यादव के व्यक्तिगत एकाउंट हैं जिसके भारी संख्या में फौलोवर हैं. इन दोनों एकाउंट में आपका वेबसाइट samajwadiparty.in  अंकित है जो समाजवादी पार्टी का आधिकारिक वेबसाइट है.

चूंकि आप समाजवादी पार्टी के नेता हैं और उसी पार्टी के नेता के रूप में आपने मुख्यमंत्री पद प्राप्त किया, अतः अपने निजी फेसबुक और ट्विटर एकाउंट पर उस राजनैतिक पार्टी का वेबसाइट रखना स्वाभाविक है. आप वर्तमान में समाजवादी पार्टी के नेता के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं और इस रूप में आप द्वारा ये दोनों एकाउंट अपनी इच्छानुसार कभी सपा नेता और कभी प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रयोग किया जाता है जिसमे आप अपनी पार्टी के लोगों और प्रदेश की जनता से अपनी बात कहते हैं और उनसे इस माध्यम से संवाद करते हैं. लोग आपकी बात सुनते हैं और उसके जरिये आपसे जुड़े हैं और यह आपका पूर्ण अधिकार है.

इस पूरी प्रक्रिया में समस्या तब आ रही है जब उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक विज्ञापनों में आपके इन व्यक्तिगत फेसबुक और ट्विटर एकाउंट का उल्लेख किया जा रहा है और सरकारी तौर पर बताया जा रहा है कि आपका ट्विटर एकाउंट twitter.com/yadavakhilesh और फेसबुक एकाउंट facebook.com/yadavakhilesh है. इस तरह सराकर के खर्च पर आपके व्यक्तिगत फेसबुक और ट्विटर का विज्ञापन हो रहा है.

यह अपने आप में अनुचित और नियमविरुद्ध है क्योंकि सरकारी खर्च पर किसी व्यक्ति विशेष के फेसबुक आदि का और उनके व्यक्तिगत कार्यों, व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रचार नहीं किया जा सकता. इससे भी अनुचित और विधिविरुद्ध यह तथ्य है कि आपके फेसबुक और ट्विटर एकाउंट में तमाम राजनैतिक बातें भी लिखी गयी हैं. इसमें समाजवादी पार्टी का प्रचार, समाजवादी पार्टी के कार्यक्रम, सपा को वोट देने के लिए आमंत्रित करना, श्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने से रोकने जैसी तमाम बातें लिखी हुई हैं. जाहिर है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस तरह की बातें आधिकारिक रूप से प्रचारित नहीं कर सकती. सरकार किसी पार्टी विशेष के कार्यक्रम, उसकी उपलब्धियां, किसी पार्टी को वोट देने, किसी अन्य पार्टी को वोट नहीं देने जैसी बातें आधिकारिक रूप से नहीं कर सकती.

इसके बावजूद ऐसा इसीलिए हो रहा है क्योंकि सरकार में बैठे कुछ अफसर नियमों को ताक पर रख कर इस प्रकार के विधिविरुद्ध कार्य कर रहे हैं. मुझे पूर्ण विश्वास है कि ये चापलूस अफसर आपको खुश करने के लिए नियमों को ताक पर रख ऐसे नियमविरुद्ध कार्य कर रहे हैं जिससे आप व्यक्तिगत रूप से आरोपित हो रहे हैं और यह विधिविरुद्ध कार्य सीधे आपके नाम और आपके व्यक्तित्व से जुड़ा हुआ है. इसी प्रकार यूट्यूब पर सरकार के कथित आधिकारिक चैनेल पर आपके समाजवादी पार्टी पर झंडा फहराने जैसे पूर्णतया राजनैतिक कार्यक्रमों को भी प्रचारित किया जा रहा है.

मैं ऐसे तमाम राजनैतिक टिप्पणी यहाँ तारीख सहित प्रस्तुत कर रही हूँ जिसमे आपने राजनैतिक बातें कही हैं जो आप सपा नेता के रूप में कह सकते हैं पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में नहीं लेकिन इन चापलूस अफसरों के चक्कर में आपकी ये राजनैतिक बातें भी आपके फेसबुक और ट्विटर के प्रचार से सरकारी अभिलेख और सरकारी प्रचार का हिस्सा बन जा रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है. मैं जानती हूँ कि जब ये बातें आपके संज्ञान में आएँगी तो आप यह स्थिति तत्काल रुकवाने के आदेश देंगे क्योंकि आप कभी भी अपने नाम पर इस प्रकार के गैरकानूनी काम नहीं होने या करने देंगे जिसमे आगे चल कर आपको अपयश मिले और आप सरकारी धन के व्यक्तिगत हित में उपयोग करने के दोषी करार दिए जाएँ.

अतः मैं उपरोक्त समस्त तःयों के दृष्टिगत आपसे निम्न दो निवेदन करती हूँ-

1.  कृपया तत्काल यह स्थिति रोकने के आदेश देने की कृपा करें ताकि आपके व्यक्तिगत फेसबुक और ट्विटर एकाउंट आधिकारिक प्रचारों में सम्मिलित नहीं हों और आप सरकारी धन से अपना प्रचार करने के दोषी नहीं कहे जाएँ

2.  इस प्रकार का अनुचित और अवैध कार्य करने और इसके जरिये आपकी स्थिति खराब करने वाले सभी चापलूस अफसरों के खिलाफ कठोरतम कार्यवाही करने की कृपा करें ताकि भविष्य में कोई आपको ऐसी असहज स्थिति में ना लाने की हिमाकत करे

पत्र संख्या- NT/Complaint/13/14
दिनांक-06/11/2014

भवदीय
(डॉ नूतन ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34525
nutanthakurlko@gmail.com

वर्ष 2014 में अब तक फेसबुक पर लिखी तमाम राजनैतिक टिप्पणियाँ (तारीख सहित)

23/02/2014 Today, I flagged off our Cycle Rally from Jantar Mantar, Delhi.

07/03/2014 http://www.ndtv.com/video/player/candidates-2014/the-whole-country-knows-bjp-s-character-says-akhilesh-yadav/312172?hp

15/03/2014 Today, I have completed two years in office. During this time, one of my most important objective was to empower the women of Uttar Pradesh. We have launched many schemes to achieve this goal.  Today, I am proud to present our first commercial for the Lok Saba election, honoring the women of India. (samajwadi party)

25/03/2014 Metro Rail Projects, IT Cities, Expressways, Parks, Hospitals, Medical Colleges, Stadiums
Samajwadi Party-रोज़ नया कदम

02/04/2014 Today we released our party’s manifesto for the upcoming Lok Sabha elections

17/04/2014, 24/04/2014, 12/05/2014- समाजवादी पार्टी को वोट देने का आह्वान

09/05/2014 Last few hours of campaigning.

20/05/2014 Hindi, Urdu and all National languages are a part of our cultural heritage. Samajwadi Party believes in all the National languages.

27/07/2014 www.samajwadiparty.in

13/09/2014 Vote for Cycle. Vote for Samajwadi Party.

07/10/2014 Socialism = Prosperity + Equality- The start of the Samajwadi Party Convention 2014 will be marked by the inauguration of the Janeshwar Mishra statue.

08/10/2014 Day One of Samajwadi Party’s 9th Conclave.

09/10/2014 Day Two of Samajwadi Party’s 9th Conclave.

10/10/2014 Final Day of Samajwadi Party’s 9th Conclave.

19/10/2014 Congratulations to the Samajwadi Party workers for their win in Kairana.

उपरोक्त टिप्पणी ट्विटर पर भी हैं. इसके अतिरिक्त ट्विटर पर वर्ष 2014 में कुछ अन्य अतिरिक्त राजनैतिक टिप्पणियाँ (तारीख सहित)

21/03/2014 Samajwadi Party initiates, India’s largest Social Security movement with Samajwadi Pension Scheme.

07/04/2014 ‘We will do better than 2009 elections’ – Akhilesh Yadav, Hindustan Times

23/04/2014 Happy to see the Samajwadi Party flag flying high all the way in Seattle, USA. Thank you for sharing.

01/05/2014 Samajwadi Party would stop Modi’s model in UP. His model of dividing India.

यू-ट्यूब पर कथित UP Government Official Channel पर प्रस्तुत आपके द्वारा सपा कार्यालय पर झंडारोहण का वीडियो है जिसमें लिखा गया है कि- ”मा0 मुख्यमंत्री जी द्वारा स0पा0 कार्यालय में झण्डा रोहण करते हुए। दिनांक 15 08 2014”

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अखिलेश, ये हाल है तुम्हारे (जंगल)राज में… पुलिस रिश्वत लेकर देती है डेडबाडी!

Harendra Singh : बीती (23 सितंबर 2014) रात मेरे बेटे हर्षित का करीब 1.45 am पर फोन आया। मैंने फोन उठाया, तो घबराहट में बोला, पापा मैं चारबाग स्टेशन पर हूँ, आप जानते हैं सनबीम में मेरा सहपाठी आशीष था, वह अपने पापा को इलाज के लिए पटना से एम्स दिल्ली ले जा रहा था, पर रास्ते चारबाग से पहले ही अंकल का देहांत हो गया है, और जीआरपी पुलिस के लोग उनकी डेडबाडी नहीं दे रहे हैं, जबकि अंकल का treatment file व reference form मैं दिखा रहा हूं।

पहले तो मुझे हर्षित पर बहुत गुस्सा आया कि 26 सितम्बर से इसका exam है, और ये महोदय रात के डेढ़ बजे चारबाग स्टेशन पर हैं। तुरन्त आभास हुआ कि वह एक अच्छे उद्देश्य के लिए समय दे रहा है, यह निश्चित रूप से अच्छा कार्य है। बातचीत में पता चला कि अन्त में जीआरपी चारबाग के लोगों ने बच्चों से 5000 रुपये लेकर उसके पिता के शव को रात्रि में ही जाने दिया। मैं यह विषय सोशल मीडिया पर इसलिए लिखा रहा हूँ कि आपलोग ज्यादा से ज्यादा शेयर कर विषय को सरकार व उच्च अधिकारियों तक पहुंचायें ताकि भविष्य में किसी बेटे को अपने पिता का शव प्राप्त करने के लिए पुलिस को घूस न खिलाना पड़े।

जौनपुर निवासी हरेंद्र सिंह के फेसबुक वॉल से.

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यूपी में जंगलराज : मंत्री के बेटे ने कब्जायी तहसील की सरकारी जमीन, वकील गुस्से में

वीवीआईपी कहे जाने वाले अमेठी जिले में तहसील की सरकारी जमीन पर कब्ज़ा किये जाने का एक मामला प्रकाश में आया है. कब्ज़ा कोई और नहीं कर रहा बल्कि सरकार के एक कैबिनेट मंत्री के बेटे द्वारा किया जा रहा है. एक ओर जहाँ सूबे की सपा सरकार सूबे में नई नई योजनाये लाकर उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की कोशिश में जुटी है वहीं मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले एक कैबिनेट मंत्री ही खुद सरकार की इज्जत में बट्टा लगा रहे हैं. कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के बेटे पर बैनामे के कागजात में हेराफेरी करने व स्टाम्प चोरी करने के साथ ही तहसील की खाली पड़ी जमीन पर जबरन कब्ज़ा कर निर्माण करने का आरोप है.

मंत्री के बेटे द्वारा सरकारी जमीन पर जबरन कब्ज़ा कर निर्माण किये जाने से स्थानीय अधिवक्ता संघ आक्रोशित होकर अपने कार्य से विरत है. फिलहाल ये पूरा मामला सरकार के मंत्री के बेटे से जुड़ा है. लिहाजा प्रशासन के आलाधिकारी भी कोई कार्यवाही करने से कतराते नजर आ रहे हैं. लेकिन मामला तहसील की सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करने का है लिहाजा अधिवक्ता इस पूरे प्रकरण को लेकर न्यायालय पहुँच गए हैं. यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के बेटे अनिल प्रजापति पर जमीन कब्जाने का ये कोई पहला आरोप नहीं लगा है. इसके पहले अमेठी की एक विधवा महिला की जमीन पर कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति द्वारा कब्ज़ा किये जाने का आरोप था, जिसकी गुहार लेकर पीड़ित विधवा महिला अपने परिवार के साथ लखनऊ में धरने पर बैठ गयी थी. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से न्याय की गुहार लगा रही थी.

इसके पहले कई बार गायत्री प्रजापति पर सरकारी जमीन व अन्य जमीनों को कब्जाने का आरोप लग चुका है. पहले का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और जमीन कब्जाने का मामला सामने आ गया है. बताते चलें कि तकरीबन दो माह पहले अमेठी तहसील के बगल टाउन एरिया में रहने वाले प्रदीप श्रीवास्तव से यूपी के कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति के बेटे अनिल प्रजापति ने लाइफ क्योर मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर नामक अपनी एक एनजीओ के नाम पर जमीन ख़रीदा है. इस एनजीओ का डायरेक्टर खुद कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति का बेटा अनिल प्रजापति है. चार दिन पूर्व अनिल प्रजापति ख़रीदे गए जमीन के बगल में खाली पड़ी अमेठी तहसील की जमीन पर कब्ज़ा करके निर्माण कार्य शुरू करा दिया. इस पर तहसील के अधिवक्ताओं ने इस ऐतराज जताते हुए इसकी शिकायत उपजिलाधिकारी अमेठी आरडी राम से की. लेकिन मामला कैबिनेट मंत्री के बेटे से जुड़ा था, लिहाजा उपजिलाधिकारी आरडी राम ने मामले में तहसीलदार से आख्या मांगकर खुद को किनारे कर लिया.

सत्ता की हनक में जब अधिवकताओं की बात को आलाधिकारियों ने अनसुना कर दिया तो आक्रोशित अधिवक्ता अपने कार्य से विरत होकर इस पूरे प्रकरण को सुल्तानपुर जिला न्यायलय में लेकर पहुँच गए जहाँ से जिला न्यायलय सुल्तानपुर की कोर्ट नंबर 19 ने मंत्री के बेटे अनिल प्रजापति द्वारा कागजातों में किये गए फर्जीवाड़ा को देखते हुए उक्त भूखंड पर निर्माण कार्य को रोकने का आदेश दे दिया. शिकायतकर्ता बार अध्यक्ष अधिकारियों पर सत्ता के दबाव में काम करने का आरोप लगा रहे हैं. दूसरी तरफ जमीन विक्रेता प्रदीप श्रीवास्तव खाली पड़ी तहसील की जमीन को वो अपनी पुश्तैनी जमीन बता रहे है. साथ ही अधिवक्ताओं पर साजिश कर मामले को उलझाने का आरोप लगा रहे हैं. 

निखिल श्रीवास्तव की रिपोर्ट. संपर्क: nikhilsrivastava021@gmail.com

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