आजादी अभी बाकी है मेरे दोस्त!

अभिषेक कांत पाण्डेय भड्डरी
आजादी का मतलब जब तक देश के असहाय, गरीब व हर तबके  के लाोगों को उनका हक नहीं मिलेगा तब तक हमारी आजादी अधूरी है। भ्रष्ट राजनीति, सरकारी अस्पतालों की जमीनों पर कहराते मरीज, जर्जर स्कूल की छत की से टपकने वाली बूंदों के नीचे पढ़नेवाले गरीबों के बच्चे, रोजगार की तलाश में महानगरों की खाक छानता हुआ युवा, बाहर काम करनेवाली महिलाओं की सुरक्षा न कर पाने वाले सरकारों के मंत्री का आपत्तिजनक बयान, जातिवाद के आधार पर वोट मांगते नेता, धर्म के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण करने वाले नेता तो वहीं देश के टुकड़े करने की बात करनेवाले देश के गद्दारों से अभी आजादी पाना बाकी है।

यदि हमने गलत रास्ता ही चुना तो आजादी क्या करे!

शिवेन्द्र कुमार पाठक
सचिव प्रेस क्लब
गाजीपुर

आज आजादी से उलाहाना कैसा और क्यों? : सैकड़ों वर्षों की गुलामी को झेल चुके इस देश के लिए वस्तुतः वह गौरव पूर्ण दिन था जो अब राष्ट्रीय समारोह दिवस बन चुका है। 15 अगस्त 1947। यह वह ऐतिहासिक दिन है, जिस दिन भारत ब्रितानिया हूकुमत की गुलामी से आजाद हुआ था। कालान्तर से से शासन-प्रशासन इस दिन को अब राष्ट्रीय समारोह दिवस के रूप में मनाने का पुरजोर प्रयास न करे, तो बहुतो का पता भी न लगे कि यह 15 अगस्त कब आया- कब गया और इसका महत्व क्या है।

स्वतंत्रता दिवस या ARVIND KEJRIWAL दिवस!

पूरा देश आज स्वतंत्रता दिवस मना रहा था लेकिन अरविंद केजरीवाल खुद आज अपना दिवस मनाने में जुटे थे, वह भी स्कूली बच्चों और सरकारी पैसों के जरिए. स्वाधीनता दिवस के मौके पर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में सीएम अरविंद केजरीवाल ने जनता को संबोधित किया. लेकिन, इस मौके पर स्टेडियम में कुछ ऐसा भी हुआ, जिससे केजरीवाल विवादों में घिर गए. स्टेडियम की दर्शक दीर्घा में बच्चों को इस तरह बिठाया गया था, जिससे इंग्लिश में ‘ARVIND KEJRIWAL‘ लिखा दिखाई दे रहा था.