जेपी की सम्पूर्ण क्रांति के दौरान जान की परवाह किये बिना किशन ने लाठी-गोली के बीच जीवंत तस्वीरें खींची

: बिहार में फोटो पत्रकारिता के जनक थे किशन : पूर्वी भारत के अग्रणी छाया-पत्रकारों में शुमार रहे कृष्ण मुरारी किशन के असामयिक निधन पर रामजी मिश्र मनोहर मीडिया फाउंडेशन की ओर से आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने उन्हें मरणोपरान्त पद्मश्री से सम्मानित करने की मांग की है।  बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स कान्फ्रेंस हॉल में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार फोटोग्राफी में नवीनतम तकनीक का प्रयोग कृष्ण मुरारी किशन ने किया था। सही मायने में किशन बिहार में छाया पत्रकारिता के जनक थे। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की स्व0 कृष्ण मुरारी किशन के तमाम चित्रों का संकलन प्रकाशित करे।

कृष्ण मुरारी किशन के नाम पर ‘फोटो जर्नलिस्ट एवार्ड’ शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री मांझी को पत्र लिखा

सेवा में, श्री जीतन राम मांझी, माननीय मुख्यमंत्री,

बिहार सरकार, पटना

विषय- राज्य सरकार की ओर से पटना निवासी प्रख्यात छायाकार स्व.कृष्ण मुरारी किशन जी के नाम पर प्रति वर्ष ‘के एम किशन पत्रकारिता/छायाकार सम्मान एवार्ड’ देने के आग्रह के संदर्भ में,

मान्यवर,

फोटो खींचने के लिए दस से बीस किमी तक साइकिल से ही जाते थे किशनजी

: शून्य से शिखर की यात्रा तय की कृष्ण मुरारी किशन ने : कृष्ण मुरारी किशन नहीं रहे। सुन कर अवाक रह गया। अभी दस दिन पहले ही उनसे मुलाकात हुई थी। उनके बढते पेट के आकार को लेकर हंसी मजाक का दौर भी चला। खाते पीते घर की निशानी है पेट, कह कर उन्होंने ठठाकर हंसने को मजबूर कर दिया था। कौन जानता था कि इतनी जल्दी हम लोगों से विदा ले लेंगे। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं कि सन 70 के दशक में हमने पत्रकारिता आरंभ की तो उन्होंने छायाकारिता। टूटही बिना ब्रेक की सायकिल उखड़ी सीट पर मोटा सा तकिया और कंधे पर झोला। शुरुआती यही पहचान थी किशनजी की।

मौत ने दूसरी बार कृष्ण मुरारी किशन को मौका नहीं दिया

Vinayak Vijeta : किशन जी का हंसता हुआ वो नूरानी चेहरा… जुल्फें बिखरी पर खिंची तस्वीरों का रंग सुनहरा… 1981 में किशन जी से सासाराम में हुई थी पहली मुलाकात.. एक बार मौत को मात दे दी थी हमारे बड़े भाई किशन जी ने… बिहार ही नहीं देश के दस सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफरों में शुमार कृष्ण मुरारी किशन जी से हमारी पहली मुलाकात 14 जनवरी 1981 में तब हुई थी जब वो कोलकाता से प्रकाशित और तब के सबसे चर्चित साप्ताहिक ‘रविवार’ के लिए कार्य किया करते थे। उस वक्त किशन जी की कला की इतनी धधक थी कि उन्हें इस पत्रिका द्वारा बिहार के बाहर भी फोटोग्राफी के लिए बुलाया जाता था। किशन जी से जब पहली बार सासाराम में हमारी मुलाकात हुई तो उस वक्त मैं सातवीं कक्षा में पढ़ा करता था।

स्व. कृष्ण मुरारी किशन