‘नया लक्ष्य’ अखिलेश के हाथों लांच कराने वाले संजय ने लखनऊ के पत्रकारों को दिखाया उद्यमिता और सफलता का चरम लक्ष्य

शानदार, शानदार और शानदार… ‘नया लक्ष्य’ और संजय शर्मा के लिए सिर्फ यही कहा जा सकता है. लखनऊ की पत्रकारिता में संजय ने वो मुकाम हासिल कर लिया है जहां तक पहुँचना असंभव नहीं तो मुश्किल बहुत है. संजय की पत्रकारिता उन लोगों के लिए प्रेरणा जरूर बन सकती है जो अपने दम पर कुछ करना चाहते हैं. दस साल पहले जब संजय ने वीकएंड टाइम्स शुरू किया था तब लोगों ने इसे हलके में लिया था मगर इस साप्तहिक ने देश भर में अपनी अच्छी रिपोर्टिंग से एक ख़ास मुकाम बना लिया. मई में संजय ने अपना अखबार 4PM लॉन्च किया और छह महीने में ही इस अखबार ने लोकप्रियता के वो रिकॉर्ड बना लिए जिसके लिए लोग तरसते हैं.

इस अखबार की हेडिंग और तीखी खबरों ने लखनऊ में उन बड़े अखबारों के पसीने छुड़ा दिए जिनकी सत्ता के खिलाफ लिखने में हवा खराब होती है. यूपी के माध्यमिक शिक्षा मंत्री पंडित सिंह ने जब एक नौजवान को गाली दी तो संजय ने 4PM में वही गालियां छाप कर एक नई बहस को जन्म दे दिया. केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने अपनी साइट पर यह अखबार लगा दिया. इस एक खबर पर 4PM की वेबसाइट पर साढ़े तीन लाख हिट आये जो एक रिकॉर्ड है. यही नहीं, यह खबर वायरल हो गई और फेसबुक पर दो हजार से अधिक लोगों ने इसे शेयर किया.

लखनऊ में सब जानते हैं कि खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ कोई नहीं लिखता मगर संजय के अखबार ने लगातार खनन मंत्री के कारनामों पर खबर लिखी जिससे बौखलाए मंत्री के गुर्गो ने अखबार के हॉकर को पीट दिया. मगर इसके बाद भी 4PM में इसी शैली की खबरें लगातार छपती रहीं और अखबार सुर्ख़ियों में बना रहा. ‘डीजीपी बिकता है बोलो खरीदोगे’ जैसी पहले पेज की ख़बरों ने संजय को बहुत उचाइयां दे दी. लोग हैरान थे कि संजय दो दो अखबार कैसे मैनेज करते हैं तभी संजय ने एक और धमाका कर दिया. उन्होंने ‘पाक्षिक’ प्रतियोगी पत्रिका निकालने का एलान कर दिया. लोग चौंके और उससे भी ज्यादा तब चौंके जब यह पता चला कि इसका विमोचन खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने घर से कर रहे हैं. इस मैगजीन की लॉन्चिंग के लिए संजय ने एक और रिकॉर्ड बना दिया. आज तक किसी अखबार या मैग्जीन के इतने होर्डिंग नहीं लगे जितने संजय ने अपनी इस मैग्जीन के लगा दिए. पूरा लखनऊ इन होर्डिंग से भर गया.

मुख्यमंत्री निवास पर इस तरह की शानदार लॉन्चिंग शायद पहले कभी नहीं हुई होगी. यह पहला मौका था जब मुख्यमंत्री के सामने पत्रकारों ने पत्रकारिता के मुद्दे पर भाषण दिया. नवभारत टाइम्स के संपादक सुधीर मिश्रा, बीबीसी के हेड रहे रामदत्त त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार और न्यूज़ वर्ल्ड के यूपी हेड ज्ञानेन्द्र शुक्ल ने बहुत बढ़िया मुद्दे उठाये. मुख्यमंत्री भी शायद ही किसी कार्यक्रम में इतने खुश नजर आये हों. खुद सीएम ने कहा कि संजय इस पत्रिका की लॉन्चिंग कहीं और करना चाहते थे लेकिन मैंने ही कहा कि मेरे घर से करो. बेहद विनम्र स्वर में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके घर पर कार्यक्रम है इसलिए वो सबका स्वागत कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 4PM जब आने का समय होता है तब लंच के बाद उबासी और नींद आती है मगर संजय के अखबार की हेडिंग सबकी नींद उड़ा देती है. जाहिर है आज की तारीख में संजय ने खुद को मीडिया जगत का एक बड़ा ब्रांड बना लिया है.

लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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राष्ट्रीय पत्रिका ‘सिर्फ जनपक्ष’ का उत्तराखंड मुख्यमंत्री ने किया भव्य विमोचन

राष्ट्रीय पत्रिकाओं में एक और नाम जुड़ गया. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने अपने निवास पर ‘सिर्फ जनपक्ष’ नामक राष्ट्रीय पत्रिका का विमोचन किया. हरीश रावत का मानना है कि यह राष्ट्रीय पत्रिका समाज के अनछुए पहलुओं को उजागर करने में अग्रसर होने वाली है और पूरे देश को इससे बहुत आशाएं हैं.

इस विमोचन कार्यक्रम में हरीश रावत के साथ कई गणमान्य मंत्री भी मौजूद रहे. इसमें पत्रिका के संस्थापक मुकेश कुमार कश्यप और संपादक पवन वर्मा समेत पूरी टीम मौजूद रही. यह पत्रिका उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर से प्रकाशित हुयी है.

इस शुभ अवसर पर हरीश रावत ने पत्रिका और उसके मोमेंटो पर हस्ताक्षर कर पत्रिका की टीम का उत्साहवर्धन किया. साथ ही पूरी टीम को उन्नति की शुभकामाएं दीं. 

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‘कला स्रोत’ त्रैमासिक पत्रिका का लोकार्पण 29 को

पत्रकार और कला समीक्षक आलोक पराड़कर द्वारा सम्पादित ‘कला स्रोत’ त्रैमासिक पत्रिका का लोकार्पण 29 अप्रैल को अपराह्न 4.30 बजे लखनऊ के अलीगंज स्थित कला स्रोत केन्द्र परिसर में होगा।  कला, संगीत और रंगमंच पर आधारित इस पत्रिका के लोकार्पण समारोह  के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं फिल्मकार रंजीत कपूर होंगे जबकि अध्यक्षता वयोवृद्ध रंग अध्येता कुंवर जी अग्रवाल करेंगे। गौरतलब है कि ‘जाने भी दो यारो’, ‘कभी हां कभी ना’, ‘लीजेण्ड आफ भगत सिंह’, ‘बैण्डिट क्वीन’ सहित कई लोकप्रिय फिल्मों के संवाद एवं पटकथा लेखक रंजीत कपूर ने ‘चिण्टू जी’ के बाद हाल में ही ‘जय हो डेमोक्रेसी’ फिल्म का निर्देशन किया है।

राजनीति पर चुटीले व्यंग्य से परिपूर्ण इस फिल्म को उत्तर प्रदेश सरकार और छतीसगढ़ सरकार ने टैक्स फ्री कर दिया है। कुंवर जी अग्रवाल को इस बात का श्रेय है कि उन्होंने ही वाराणसी में पहले हिन्दी नाटक ‘जानकी मंगल’ के मंचन की खोज की जिसके बाद से हिन्दी रंगमंच दिवस को मनाने की शुरूआत हुई। वे प्रसिद्ध नाट्य समीक्षक हैं। लोकार्पण के अवसर पर नगर के कई प्रसिद्ध साहित्यकारों, रंगकर्मियों, चित्रकारों-मूर्तिकारों, संगीतकारों  की उपस्थिति रहेंगी।

रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, उर्मिल कुमार थपलियाल, आतमजीत सिंह, जुगुल किशोर, मृदुला भारद्वाज, ललित सिंह पोखरिया, राजेश कुमार, जितेन्द्र मित्तल, चित्रकार जयकृष्ण अग्रवाल, योगेन्द्र नाथ योगी, शरद पाण्डेय, एन.खन्ना, राजीव मिश्र, शीला, पंकज गुप्ता,  कला महाविद्यालय के प्राचार्य पी.राजीव नयन, छायाकार अनिल रिसाल सिंह, रवि कपूर, आजेश जायसवाल, साहित्यकार शिवमूर्ति, नरेश सक्सेना, वीरेन्द्र यादव, अखिलेश, हरेप्रकाश उपाध्याय, विजय राय, लखनऊविद् योगेश प्रवीन, रवि भट्ट, गायक अग्निहोत्री बन्धु, पखावज वादक राज खुशीराम सहित कई प्रमुख संस्कृतिकर्मी समारोह में भाग लेंगे।

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‘जिया इंडिया’ मैग्जीन के बुरे दिन, मीडियाकर्मियों को तीन महीने से वेतन नहीं

पिछले दिनों पत्रकार एसएन विनोद के नेतृत्व में ‘जिया इंडिया’ नामक एक राष्ट्रीय हिंदी मैग्जीन लांच हुई थी. इस मैग्जीन को लांच करने से पहले जिया न्यूज नामक चैनल को बंद कर सैकड़ों मीडियाकर्मियों को पैदल कर दिया गया था. उन्हीं विवादों और आरोपों के बीच जिया इंडिया नामक मैग्जीन लांच हुई थी. अब खबर है कि जिया न्यूज की तरह हाल जिया इंडिया का भी होने जा रहा है. तीन-तीन महीने से यहां सेलरी नहीं मिली है. पत्रकारों का हाल बेहाल है.

बड़े बड़े दावे करने वाले पत्रकार एसएन विनोद पत्रकारों के शोषण पर चुप हैं. वे कभी जिया इंडिया को अपने जीवन की अति महत्वाकांक्षी पत्रिका कहा करते थे. लेकिन कनिष्ठ और वरिष्ठ पत्रकारों को बीते तीन महीने से सैलरी न देकर वह संकेत दे रहे हैं कि मैग्जीन का भविष्य अच्छा नहीं है. बता दें कि नवंबर की सैलरी जनवरी में दी गई और दिसंबर की सैलरी फरवरी 18 तक भी नहीं दी गई,  एसएन विनोद की टीम में वरिष्ठ पत्रकार गुंजन सिन्हा, विभूति कुमार रस्तोगी, अर्चना तिवारी, एआर आजाद सहित ग्राफिक्स डिजायनर मो. अनवारूल हक आदि हैं. सेलरी न मिलने से सभी पत्रकारों के सामने बड़ा संकट खडा हो गया है.

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नहीं पहुंचे प्रमुख अतिथि, ‘जिया इंडिया’ मैग्जीन की लांचिंग फ्लॉप

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‘ओपन’ मैग्जीन का ये अंक खरीदकर रख लीजिए

Vineet Kumar : ओपन मैगजीन का नेहरू पर ये अंक कई मायने में खास है. एक तो इसलिए भी कि नेहरू पर एक साथ जितनी सामग्री आपको चालीस रूपये में मिल जाएगी, उतनी किसी किताब में कम से कम तीन से चार सौ रूपये में मिलेंगे.

दूसरा कि इसमे एम जे अकबर जैसे पत्रकार के विशेष लेख हैं जिन्होंने कभी नेहरू पर बेहद संतुलित किताब लिखी थी और अब प्रधानसेवक के उत्प्रेरक मटीरियल की हैसियत से सक्रिय हैं. पटेल के बरक्स नेहरू को खड़ी करने और मिथकों का साम्राज्य कायम करने की जो कवायदें चल रही है, ऐसे दौर में इस अंक को पढ़ने, खरीदकर रख लेने की जरूरत इसलिए भी है कि हम आगे देख सकेंगे कि प्रधानसेवक के जमाने के देश के पहले प्रधानमंत्री कैसे नजर आते थे?

युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

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