दैनिक जागरण हिसार के 49 मीडियाकर्मियों की लड़ाई जीत की ओर, देखें नोटिस की कापी

Brijesh Pandey : मजीठिया केस रिकवरी का मामला… दैनिक जागरण हिसार के 49 साथियों ने मजीठिया के तहत एक्ट की धारा 17 (1) के अंतर्गत रिकवरी फाइल किया था..  अब तक की कार्यवाही में सरकार ने यह पाया कि दैनिक जागरण की देनदारी बनती है,…

सरकार ने दैनिक जागरण हिसार को शो-काज नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि 30 दिन के भीतर क्लेम राशि का भुगतान कर दे या कुछ कहना है तो 30 दिन के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करें… अगर ऐसा नहीं किया गया तो रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करके वसूली की कार्यवाही अमल में लायी जायेगी… नोटिस की कॉपी ये है…

दैनिक जागरण हिसार में मैनेजर पद पर कार्यरत ब्रिजेश पांडेय की एफबी वॉल से.

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भास्कर ग्रुप को धूल चटाने वाली इस लड़की का इंटरव्यू देखें-सुनें

मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ने में बहुत बड़े बड़े पत्रकारों की पैंट गीली हो जाती है लेकिन भास्कर समूह में रिसेप्शनिस्ट पद पर कार्यरत रही एक लड़की ने न सिर्फ भास्कर ग्रुप से कानूनी लड़ाई लड़ी बल्कि अपना हक हासिल करने की अग्रसर है.

कोर्ट के आदेश पर भास्कर ग्रुप ने मजीठिया वेज बोर्ड के तहत इसे मिलने वाले लाखों रुपये अदालत में जमा करा दिए हैं. लतिका चह्वाण नामक यह लड़की डीबी कार्प के मुंबई आफिस में रिसेप्शनिस्ट हैं. इनसे बातचीत की आरटीआई एक्सपर्ट और मजीठिया क्रांतिकारी शशिकांत सिंह जी ने.

इंटरव्यू देखने सुनने के लिए नीचे दिए वीडियो पर क्लिक करें :

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कोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर हिन्दुस्तान टाईम्स से वसूली किए जाने पर लगी रोक हटायी

टर्मिनेट कर्मचारी पुरुषोत्तम सिंह के मामले में शोभना भरतिया को लगा तगड़ा झटका, एडवोकेट उमेश शर्मा ने लगातार दो दिन की थी जोरदार बहस….  जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में हिन्दुस्तान टाईम्स की मालकिन शोभना भरतिया को एक बार फिर मंगलवार १९ /२/२०१८ को दिल्ली उच्च न्यायलय में मुंह की खानी पड़ी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़े वसूली मामले में लगायी गयी रोक को हटा लिया। इससे हिन्दुस्तान प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड मामले में लगाये गये १७ (१) के मामले में वसूली का रास्ता साफ हो गया है।

१७ (१) का यह क्लेम हिन्दुस्तान टाईम्स दिल्ली से जबरन टर्मिनेट किये गये डिप्टी मैनेजर पुरुषोत्तम सिंह ने लगाया था जिस पर कंपनी को बकाया देने के लिये नोटिस गयी तो हिन्दुस्तान प्रबंधन ने उस नोटिस पर स्टे ले लिया। लगभग तीन साल तक चली लंबी लड़ाई के बाद आखिर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस पर लगी रोक को हटा लिया है। पुरुषोत्तम सिंह का मामला जाने माने एडवोकेट उमेश शर्मा ने रखा। उन्होंने लगातार दो दिन तक बहस किया और यह रोक हटवा लिया।

बताते हैं कि हिन्दुस्तान टाईम्स दिल्ली में डिप्टी मैनेजर पद पर कार्यरत पुरुषोत्तम सिंह को वर्ष २०१५ में कंपनी ने टर्मिनेट कर दिया। उसके बाद उन्होंने  एडवोकेट उमेश शर्मा से मिलकर अपने टर्मिनेशन के खिलाफ एक केस लगवाया। पुरुषोत्तम सिंह ने २०१५ में ही दिल्ली सेंट्रल के डिप्टी लेबर कमिश्नर लल्लन सिंह के यहां १७(१)का केस लगाया जिस पर पदाधिकारी ने २१ लाख की रिकवरी का नोटिस भेजा। उसके बाद कंपनी दिल्ली हाईकोर्ट गयी और वहां दिल्ली हाईकोर्ट की जज सुनीता गुप्ता ने इस नोटिस पर एकतरफा कारवाई करते हुये रोक लगा दिया।

इस मामले में पुरुषोत्तम सिंह ने देश भर के मीडियाकर्मियों की तरफ से माननीय सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा से अपना पक्ष रखने का अनुरोध किया। लगभग तीन साल तक चले इस केस में १९ फरवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में उमेश शर्मा ने पुरुषोत्तम सिंह का पक्ष जोरदार तरीके से रखा। न्यायाधीश विनोद गोयल के सामने हमेशा की तरह हिन्दुस्तान प्रबंधन नई तारीख लेने के प्रयास में जुटा लेकिन उमेश शर्मा ने विद्वान न्यायाधीश से निवेदन किया कि इस बहस को लगातार जारी रखा जाये क्योंकि नोटिस पर स्टे देना पूरी तरह गलत है। मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट सबकुछ क्लीयर कर चुका है।

इसके बाद विद्वान न्यायाधीश ने सुनवाई अगले दिन भी जारी रखने का आदेश दिया। २० फरवरी को फिर दिल्ली हाईकोर्ट में बहस हुयी और उसके बाद न्यायाधीश विनोद गोयल ने नोटिस पर लगी रोक हटा लिया। यानि अब हिन्दुस्तान प्रबंधन के खिलाफ आरआरसी जारी होने का रास्ता साफ हो गया है। इस मामले में पुरुषोत्तम सिंह ने हिन्दुस्तान टाईम्स की मालकिन शोभना भरतिया और एचआर डायरेक्टर शरद सक्सेना को पार्टी बनाया था। पुरुषोत्तम सिंह को मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे देश भर के मीडियाकर्मियों ने बधाई दी है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
९३२२४११३३५

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मजीठिया वेज बोर्ड मुद्दे पर सीनियर एडवोकेट मदन तिवारी का जोरदार इंटरव्यू, देखें वीडियो

बिहार के गया जिले के सीनियर एडवोकेट मदन तिवारी मजीठिया वेज बोर्ड मुद्दे पर गया के ही दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार पंकज जी का फ्री में मुकदमा लड़ रहे हैं और जागरण प्रबंधन के हर दांव को न्यायालय में फेल करते हुए विजयश्री दिलाने की ओर अग्रसर हैं. पत्रकार पंकज ने मजीठिया वेज बोर्ड के मुद्दे पर मदन तिवारी से विस्तार से बातचीत की ताकि देश भर के मजीठिया क्रांतिकारी इस मामले के विभिन्न बिंदुओं को बारीकी से समझ कर अपने संघर्ष के हथियार को पैना कर सकें.

देखें वीडियो इंटरव्यू….

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सुरक्षा गार्ड लेकर डीएलसी आफिस पहुंचे एचआर मैनेजर

बरेली से खबर आ रही है कि मजीठिया क्रांतिकारियों के गुस्से व आक्रोश से हिन्दुस्तान प्रबंधन अनहोनी को लेकर डरा-सहमा है। यही वजह है कि मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर वेतन-भत्तों व एरियर के केस की सुनवाई के दौरान हिन्दुस्तान बरेली की सहायक प्रबंधक (एचआर) सत्येंद्र अवस्थी कंपनी के दो निजी सुरक्षा गार्ड लेकर उपश्रमायुक्त कार्यालय पहुंचे।

दरअसल केसों की सुनवाई की पिछली तारीख पर हिन्दुस्तान बरेली के सहायक प्रबंधक (एचआर) को उपश्रमायुक्त कार्यालय के कैम्पस में मजीठिया क्रांतिकारियों ने घेर लिया था, सहायक प्रबंधक (एचआर) को पिटाई से बचने के लिए डीएलसी के कक्ष में छिपना पड़ा था। मजीठिया क्रांतिकारियों ने पीटने के लिए हाथ में जूता निकाल लिया था। मौके पर तमाम भीड़ इकट्ठा हो गई थी, उस समय सहायक प्रबंधक (एचआर) की काफी फजीहत हुई। बताते हैं कि सुनवाई के दौरान सहायक प्रबंधक (एचआर) के आँखे तरेरने से मजीठिया क्रांतिकारी भड़क गए थे और बाहर निकलते ही हिन्दुस्तान की ओर से पैरवी में आये सहायक प्रबंधक (एचआर) को पकड़ लिया।

सूत्र बताते हैं कि सहायक प्रबंधक (एचआर) ने यूनिट हेड को सारी स्थिति बताई और मजीठिया केसों की पैरवी में लेबर आफिस जाने से मना कर दिया। तब हिन्दुस्तान प्रबंधन ने सहायक प्रबंधक (एचआर) को कंपनी की ओर से सुरक्षा मुहैया कराने का निर्णय लिया। इसी के तहत हिन्दुस्तान के सहायक प्रबंधक (एचआर) जब मजीठिया केसों की सुनवाई में पैरवी को डीएलसी ऑफिस पहुंचे तो उनके साथ सुरक्षा में दो गार्ड भी थे।

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भास्कर के दो प्रतिनिधियों ने अपने ही प्रिंसिपल करेस्पांडेंट को डराया-धमकाया

डी. बी. कॉर्प लिमिटेड में मजीठिया वेज बोर्ड मामले को लेकर हताशा साफ देखी जा सकती है। यह वह मीडिया समूह है, जो हिंदी में ‘दैनिक भास्कर’ सहित गुजराती में ‘दिव्य भास्कर’ और मराठी में ‘दिव्य मराठी’ नामक अखबारों का प्रकाशन करता है।  पता चला है कि मुंबई स्थित बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में ‘दैनिक भास्कर’ के दो प्रतिनिधियों द्वारा अपने ही संस्थान के एक प्रिंसिपल संवाददाता को डराने-धमकाने का बेहूदा प्रयास किया गया। इसके उपरांत कंपनी के प्रतिनिधियों ने प्रताड़ित करने के वास्ते संवाददाता के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी है। कहते हैं न, जबरा मारे और रोवे भी न दे। प्रिंसिपल संवाददाता ने कंपनी के इन प्रतिनिधियों की हरकत के खिलाफ स्थानीय पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दी है।

प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह इस संस्थान में 22 वर्षों से कार्यरत हैं। सन् 2016 के जून महीने में जब इन्होंने  प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड के तहत अपने वेतन व बकाए की मांग की तो कंपनी ने पहले इनका मुंबई से सीकर (राजस्थान) ट्रांसफर कर दिया। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा इंडस्ट्रियल कोर्ट से स्टे हासिल कर लेने के बाद कंपनी ने इन्हें माहिम वाले पुराने कार्यालय में प्रवेश नहीं दिया। फिर श्री सिंह ने प्रबंधन के खिलाफ लेबर कोर्ट में कंटेम्प्ट का मुकदमा दायर करवा दिया। अपनी हर चाल में घिरते देख प्रबंधन ने 10-11 महीने बाद इन्हें बीकेसी ऑफिस में बुलाकर काम पर तो रख लिया, मगर मजीठिया मामले में महाराष्ट्र राज्य में श्री सिंह का जब पहला आरआरसी  (रेवेन्यू रिकवरी सर्टीफिकेट) जारी हो गया तो कंपनी सन्न रह गई!

भास्कर समूह के दुर्व्यवहार से पीड़ित प्रिंसिपल करेस्पांडेंट धर्मेंद्र प्रताप सिंह

कंपनी ने आरआरसी पर स्टे लेने के लिए मुंबई हाई कोर्ट का रुख किया, पर श्री सिंह द्वारा वहां पहले से कैविएट लगा रखने के कारण प्रबंधन को जबर्दस्त झटका लगा। माननीय हाई कोर्ट ने जब सबसे पहले मूल धन की 50 फीसदी राशि कोर्ट में जमा करने का आदेश सुना दिया, तब उसे रुकवाने की खातिर प्रबंधन के लोग देश के सर्वोच्च न्यायालय में जा पहुंचे। यह बात महत्वपूर्ण है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी इनकी एक न सुनी और डी. बी. कॉर्प लिमिटेड के पिटीशन को खारिज करते हुए प्रबंधन को मुंबई हाई कोर्ट में उक्त धनराशि जमा करने के लिए मजबूर कर दिया।

आखिर इस संस्थान को ऐसा ही करना पड़ा। किंतु अपने वकील एस. पी. पांडे के जरिए श्री सिंह ने जैसे ही इस राशि को प्राप्त करने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया, प्रबंधन की त्यौरियां चढ़ गईं। इसी के परिणाम स्वरूप अक्षता करंगुटकर (एजीएम- एचआर एंड एडमिन) कल दोपहर में श्री सिंह को लेकर बोर्ड रूम में गईं, जहां दिल्ली से आए सचिन गुप्ता (लीगल डिपार्टमेंट) द्वारा श्री सिंह पर न केवल तमाम तरह के अनाप-शनाप आरोप लगाए गए, अपितु उन्हें डराने-धमकाने का असफल प्रयास भी किया गया। आखिर श्री सिंह उस मीटिंग को बीच में छोड़ कर बाहर निकल गए। मगर कंपनी के इन प्रतिनिधियों ने जाकर बीकेसी पुलिस थाने में एनसी करवा दी। अपनी ड्यूटी खत्म होने के बाद लिखित शिकायत लेकर श्री सिंह जब थाने में पहुंचे, तब उन्हें अपने विरुद्ध हुई एनसी के बार में पता चला।

अब समझ में नहीं आता कि दुनिया को आदर्शवाद का पाठ पढ़ाने वाला यह अखबार (प्रबंधन) क्या सिद्ध करना चाहता है? श्री सिंह का मामला जब देश की विभिन्न अदालतों में अलग-अलग स्टेज पर चल रहा है, तब क्या उसके बीच में इन प्रतिनिधियों द्वारा अपने बरसों पुराने कर्मचारी को इस तरह प्रताड़ित करना उचित है? फिलहाल धर्मेंद्र प्रताप सिंह द्वारा भी बीकेसी पुलिस स्टेशन में इस मामले की लिखित शिकायत की गई है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार, आरटीआई एक्टिविस्ट व महाराष्ट्र समन्वयक (नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट)
9322411335

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