अमित शाह अगर चाणक्य तो प्रियंका भी चाचा चौधरी से कम नहीं!

कांग्रेस की नई राष्ट्रीय महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी ने जिस तरह से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रोड शो कर वाहवाही लूटी, उससे साफ हो गया है कि यूपी की राजनीति में तेजपत्ते की तरह निकालकर फेंक दी गई कांग्रेस को नई जिंदगी मिलनेवाली है। लखनऊ की गली-गली से राहुल …

प्रियंका के आने से राहुल फ्लॉप हो जाएंगे!

हस्बे मामूल, राहुल गांधी ने फिर गलती कर दी। उनको प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ लखनऊ नहीं जाना चाहिए था। वहां भीड़ प्रियंका के नाम पर जुट रही है, वे ही आकर्षण का केंद्र रहेंगी। राहुल गांधी अपने को हाशिये पर पायेंगे। इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि अगर ऐसा …

प्रियंका के राजनीति में आने पर रॉबर्ट वाड्रा की प्रतिक्रिया नभाटा में!

आज के अखबारों में एक ही खबर प्रमुखता से छाई हुई है, प्रियंका राजनीति में आई। अलग अखबारों ने इसे अलग अंदाज में पेश किया है। जैसे दैनिक भास्कर ने प्रियंका की तुलना इंदिरा गांधी से की है और यह भी बताया है कि सोनिया गांधी पार्टी में कब, कैसे आईं तथा प्रमुखता से यह …

प्रियंका की सबसे कमजोर कड़ी उनके पति राबर्ट वाड्रा हैं!

प्रियंका की इंट्री से यूपी में होगा त्रिकोणीय मुकाबला, रायबरेली या फूलपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा संजय सक्सेना, लखनऊ आखिरकार कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा के रूप में अपना ट्रंप कार्ड चल ही दिया। प्रियंका को कांग्रेस का महासचिव बनाने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश कांग्रेस का पूर्वांचल प्रभारी बनाकर आलाकमान ने यह संकेत …

तो अब प्रियंका गांधी के सहारे राहुल मजबूत होंगे?

कांग्रेस अब बदलाव की तैयारी में है। अपने 131वें स्थापना दिवस से पहले कांग्रेस प्रियंका गांदी को पार्टी में पद पर लाकर राहुल गांधी को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। इससे पार्टी से युवा तो जुडेंगे ही, महिलाएं भी मजबूती से जुड़ेगी। जो, कि बीते दस साल में पार्टी से दूर होते गए हैं। मगर, ऐसा नहीं हुआ, तो फिर कांग्रेस की दशा और दिशा किधर जा रही होगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। मतलब साफ है कि नियुक्ति करे तो भी और नहीं करे तो भी, कांग्रेस फिलहाल सवालों के घेरे में है। वैसे, राजनीति अपने आप में एक सवाल के अलावा और है ही क्या?

प्रियंका गांधी ने जिन अखबारों और मीडिया हाउसों को नोटिसा भेजा, उनका नाम-पता किसी ने नहीं छापा

मीडिया वाले खबर पूरी नहीं देते. आधी अधूरी खबर से कोई भी जागरूक पाठक संतुष्ट नहीं हो पाता. प्रियंका गांधी द्वारा एक साप्ताहिक अखबार और कुछ मीडिया हाउसों को कानूनी नोटिस भेजने संबंधी खबर को ही लीजिए. इस खबर को समाचार एजेंसियों से लेकर अखबारों, चैनलों तक ने रिलीज किया, छापा, दिखाया. लेकिन किसी ने भी यह नहीं बताया कि जिन जिन मीडिया हाउसों और अखबारों को प्रियंका ने नोटिस दिया है, उनके नाम क्या हैं. सोचिए, यही प्रकरण अगर मीडिया से रिलेटेड नहीं होता तो मीडिया वाले कितना बढ़ चढ़कर उन पार्टियों के नाम बताते जिन्हें नोटिस भेजा गया है. यहां तक कि जिनको नोटिस भेजा गया है, उनका भी पक्ष छापते.