तो अब प्रियंका गांधी के सहारे राहुल मजबूत होंगे?

कांग्रेस अब बदलाव की तैयारी में है। अपने 131वें स्थापना दिवस से पहले कांग्रेस प्रियंका गांदी को पार्टी में पद पर लाकर राहुल गांधी को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। इससे पार्टी से युवा तो जुडेंगे ही, महिलाएं भी मजबूती से जुड़ेगी। जो, कि बीते दस साल में पार्टी से दूर होते गए हैं। मगर, ऐसा नहीं हुआ, तो फिर कांग्रेस की दशा और दिशा किधर जा रही होगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। मतलब साफ है कि नियुक्ति करे तो भी और नहीं करे तो भी, कांग्रेस फिलहाल सवालों के घेरे में है। वैसे, राजनीति अपने आप में एक सवाल के अलावा और है ही क्या?

निरंजन परिहार

कांग्रेस के भीतर अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा और देश की राजनीति ने कोई बहुत बड़ी करवट नहीं ली, तो आनेवाले साल से पहले, मतलब 31 दिसंबर 2016 से पहले राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष और प्रियंका गांधी पार्टी की महासचिव होगी। सोनिया गांधी ने इसके लिए अपनी हामी दे दी है और अब सिर्फ वक्त का इंतजार है। नोटबंदी के बाद राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता की परख हो चुकी है और पार्टी के भीतर जो हालात हैं, उनको देखकर साफ लगने लगा है कि राहुल और प्रियंका के सामूहिक नेतृत्व में ही कांग्रेस को आसानी से आगे बढ़ाया जा सकता है। जो नेता कांग्रेस की नीतियां तय करते हैं, उनमें से एक वरिष्ठतम नेता की मानें, तो पार्टी ने इसकी मानसिक तैयारी कर ली है। बहुत संभव है कि सोमवार यानी 26 दिसंबर के बाद इस बारे में कभी भी अधिकारिक ऐलान किया जा सकता है। यह भी हो सकता है कि राहुल गांधी फिलहाल उपाध्यक्ष के रूप में ही अध्यक्ष के सारे अधिकारों का उपयोग करने के लिए अधिकृत कर दिए जाएं और सोनिया गांधी पार्टी की सर्वेसर्वा बनी रहे। 28 दिसंबर को कांग्रेस का स्थापना दिवस है और बहुत संभव है, उसी दिन कांग्रेस देश को यह नई खबर दे दे। 

दरअसल, कांग्रेस की कमान पूरी तरह राहुल और प्रियंका के हाथ सोंपने की मंशा के पीछे पार्टी की मान्यता यह है कि कांग्रेस को इससे बहुत बड़ा फायदा होगा। सबसे पहली बात तो, युवा मतदाता, जो कि पिछले एक दशक में पार्टी से दूर हो चुका है, वह कांग्रेस से फिर से जुड़ेगा। और इससे भी बड़ा फायदा होगा, प्रियंका गांधी के पार्टी में ताकतवर होने से। माना जा रहा है कि प्रियंका के पार्टी में पद पर आने से महिलाओं को जोड़ने का जो काम सोनिया गांधी अब तक नहीं कर सकीं, वह काम बहुत आसानी से हो सकता है। प्रियंका की युवा वर्ग में तो अपील है ही, महिलाएं भी बड़ी संख्या में उन्हें पसंद करती है, जो कि कांग्रेस से फिर से जुड़ेंगी। दरअसल, इंदिरा गांधी के बाद महिलाओं को अपने से जोड़ने के काम में कांग्रेस कभी बहुत सफल नहीं रही। लेकिन वह काम प्रियंका के जरिए आसानी से हो सकता है, क्योंकि देश की जनता उनमें इंदिरा गांधी की छवि देखती है। पार्टी का एक धड़ा नता है कि राहुल गांधी को अभी भी नेतृत्व की अपनी योग्यता को साबित करना बाकी है। मगर, प्रियंका गांधी के पार्टी में पद पर आने के बाद यह काम आसानी से हो सकता है, क्योंकि तब राहुल गांधी अकेले नहीं होंगे। इस पूरी प्रकिया में, जहां तक सोनिया गांधी का सवाल है, उन्हीं के मार्गदर्शन में राहुल और प्रियंका पार्टी को नई दिशा देंगे। 

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की मानें, तो प्रियंका गांधी को पार्टी का महासचिव नियुक्त किए जाने के बारे में फैसला लगभग हो चुका है। दिल्ली के 10 जनपथ की दीवारों के दायरों का हाल जाननेवाले एक वरिष्ठ नेता की राय में देश के वर्तमान राजनीतिक हालात में कांग्रेस की हालत देखकर खुद प्रियंका गांधी भी पार्टी में अपनी नई भूमिका के लिए मन बना चुकी है। वैसे, इससे पहले भी प्रियंका को कांग्रेस  संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने की पेशकश तीन बार की गईं थी। लेकिन हर बार वे इसे टालती रहीं। और, राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने के लिए प्रियंका गांधी सोनिया गांधी के चुनाव क्षेत्र रायबरेली और राहुल गांधी की संसदीय सीट अमेठी तक ही खुद को सीमित रखे हुए रहीं। मगर, हाल ही में पंजाब और यूपी चुनाव में प्रचार के लिए प्रियंका के जिम्मेदारी लेने की हामी भरते ही कांग्रेस को लगा कि उन्हें पार्टी में पद पर आने का फिर से प्रस्ताव दिया जाना चाहिए। बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में प्रियंका को भी लगने लगा है कि उनको कोई तो फैसला घोषित करना ही पड़ेगा। इसीलिए उत्तरप्रदेश, पंजाब, गोवा और फिर गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें कोई फसला लेना ही होगा। यह सही अवसर है और खबर है कि सोनिया गांधी ने खुद उन्हें मनाया है। 

राहुल गांधी की उपाध्यक्ष से पदोन्नति के बारे में अंदर की खबर यह है कि फिलहाल उन्हें पार्टी अध्यक्ष के तौर पर पदोन्नति देने के मामले में कांग्रेस में मतभेद है। पार्टी नेताओं का एक बड़ा धड़ा यह मानता है कि 131 साल पुरानी किसी पार्टी के सर्वेसर्वा के रूप में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्रिक राष्ट्र में जो नेतृत्व परिपक्वता किसी नेता में होनी चाहिए, वह राहुल गांधी में हैं तो सही, लेकिन अब तक उभर कर सामने नहीं आ पाई है। इसलिए फिलहाल अध्यक्ष पद तो सोनिया गांधी ही सम्हाले। लेकिन पार्टी में युवा वर्ग के नेता मानते हैं कि राहुल गांधी सफलतम अध्यक्ष साबित होंगे। उनके अध्यक्ष बनने से देश का युवा वर्ग पार्टी से जुड़ेगा। महिलाओं का मामला प्रियंका गांधी सम्हाल ही लेंगी। सो, सहारा भी मिल जाएगा।   

आनेवाली 28 दिसंबर को कांग्रेस की स्थापना के 131 साल पूरे हो रहे हैं। देश भर में हर गां इकाई तक कांग्रेस का उत्सव मनेगा और पार्टी नए सिरे से नई ताकत के साथ देश भर में अपना बिगुल फूंकेगी। लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व की तस्वीर में अगर कुछ भी नहीं बदला, तो इस उत्सव का कोई असर नहीं होगा। इसीलिए तस्वीर में ये दो नए फोटो फिट करने के बारे में निर्णय हुआ माना जा रहा है। खबर है कि 28 दिसंबर से पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों की ही नियुक्तियों का ऐलान किया जा सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि 131 साल बाद कांग्रेस फिर से नई उर्जा से समाहित होकर मैदान में उतरेगी। हर पार्टी खुद को मजबूत करने और लंबे चलने के लिए जो कोशिशें करती है, वहीं कांग्रेस भी कर रही है। तस्वीर साफ है कि प्रियंका को साथ लाकर राहुल को मजबूत करने की यह कोशिश है। लेकिन यह भी तय है कि ऐसा हुआ, तो कांग्रेस और कांग्रेसियों पर एक बार फिर वंशवाद को नमन करने के आरोप भी लगेंगे, जिनका किसी भी स्तर पर जवाब देना किसी के लिए भी कोई आसान खेल नहीं होगा ! और अगर बिना नियुक्ति हुए कांग्रेस में सब कुछ वैसा ही चलता रहा, जैसा कि फिलहाल चल रहा है, तो पार्टी का विकास कैसे होगा, युवा कैसे जुड़ेंगे, महिलाएं कैसे कांग्रेस के नजदीक आएंगी और संगठन की तस्वीर कैसे बदलेगी, ये सबसे बड़े सवाल हैं !

निरंजन परिहार
राजनीतिक विश्लेषक
niranjanparihar@gmail.com
09821226894

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प्रियंका गांधी ने जिन अखबारों और मीडिया हाउसों को नोटिसा भेजा, उनका नाम-पता किसी ने नहीं छापा

मीडिया वाले खबर पूरी नहीं देते. आधी अधूरी खबर से कोई भी जागरूक पाठक संतुष्ट नहीं हो पाता. प्रियंका गांधी द्वारा एक साप्ताहिक अखबार और कुछ मीडिया हाउसों को कानूनी नोटिस भेजने संबंधी खबर को ही लीजिए. इस खबर को समाचार एजेंसियों से लेकर अखबारों, चैनलों तक ने रिलीज किया, छापा, दिखाया. लेकिन किसी ने भी यह नहीं बताया कि जिन जिन मीडिया हाउसों और अखबारों को प्रियंका ने नोटिस दिया है, उनके नाम क्या हैं. सोचिए, यही प्रकरण अगर मीडिया से रिलेटेड नहीं होता तो मीडिया वाले कितना बढ़ चढ़कर उन पार्टियों के नाम बताते जिन्हें नोटिस भेजा गया है. यहां तक कि जिनको नोटिस भेजा गया है, उनका भी पक्ष छापते. 

लेकिन भारतीय मीडिया, खासकर कार्पोरेट मीडिया, जिसका दूसरा नाम करप्ट मीडिया है, अक्सर खबरें छापता नहीं बल्कि छुपाता है. लीजिए, वह खबर पढ़ लीजिए जिसे न्यूज एजेंसी ने रिलीज किया और लगभग हर जगह इसका प्रकाशन हुआ पर किसी ने यह छापने या पता करने की कोशिश नहीं की कि आखिर नोटिस पाने वाले साप्ताहिक अखबार का नाम क्या है, उसका मालिक कौन है, किसने रिपोर्ट लिखी आदि इत्यादि. अगर आपको इस बारे में पता हो तो भड़ास को बताएं, नीचे दिए गए कमेंट बाक्स में कमेंट करके या फिर भड़ास को bhadas4media@gmail.com पर मेल करके.

-एडिटर, भड़ास4मीडिया


प्रियंका गांधी ने अखबार और मीडिया संस्थानों को कानूनी नोटिस भेजा

भाषा

प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक साप्ताहिक अखबार और कुछ अन्य मीडिया संस्थानों को उस खबर के लिये कानूनी नोटिस भेजे हैं जिसमें कहा गया था कि वह और उनके पति अपने बेटे को राहुल गांधी को गोद दे रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि प्रियंका ने अपने बेटे की ‘मानहानि’ के लिए आपराधिक और दीवानी कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा है कि वह अपने परिवार के बारे में झूठे आरोपों के खिलाफ कानूनी कदम उठाने को प्रतिबद्ध हैं. अखबार की खबर में दावा किया गया था कि राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका के बेटे रेहान को गोद ले रहे हैं ताकि उसका उपनाम गांधी हो सके.

प्रियंका ने इसे मनगढ़ंत दुर्भावनापूर्ण सोच बताकर खारिज करते हुए नोटिस में कहा, ‘यह कहना कि कोई अभिभावक अपने बच्चे को स्वेच्छा से किसी और को दे देगा मानो कि वह भावहीन वस्तु है, यह अपने आप में बहुत खराब बात है. इसे किसी तरह की वंशवाद की राजनीतिक आकांक्षा के इरादे से जोड़ना तो और भी ज्यादा दुखद है.’

प्रियंका ने इस खबर पर भी कड़ी आपत्ति जताई है कि उनके बेटे के स्कूल प्रवेश फॉर्म में उसके अभिभावक का नाम राहुल गांधी है. प्रियंका ने पिछले दिनों कांग्रेस में अपनी बड़ी भूमिका को लेकर चल रही अटकलों को भी पुरजोर तरीके से खारिज किया था. उन्होंने इस तरह की खबरों को निराधार अफवाह बताकर खारिज कर दिया था. प्रियंका ने इस साल मई में एसपीजी प्रमुख को पत्र लिखकर कहा था कि उन्हें और उनके परिवार को हवाईअड्डों पर सामान्य सुरक्षा जांच से प्राप्त छूट वापस ले ली जाए. उनकी यह मांग इन खबरों की पृष्ठभूमि में आई थी कि सरकार प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा को मिली इस तरह की सुविधा को समाप्त करने का विचार कर रही है. इससे पहले भी प्रियंका गांधी को लेकर मीडिया में अटकलें रहीं हैं.

देखने में आया है कि आजकल प्रियंका इस तरह की अटकलों को नजरअंदाज नहीं कर रहीं बल्कि उनका जवाब दे रहीं हैं. हालांकि पहले ऐसा नहीं होता था. अपने बेटे के स्कूल प्रवेश फॉर्म में उसके अभिभावक के तौर पर राहुल गांधी का नाम होने संबंधी खबर का कड़ा विरोध करते हुए प्रियंका ने इसे गलत और मनगढ़ंत बताया. उन्होंने कहा, ‘मेरे बेटे के दिमाग में कभी अपना उपनाम बदलने की बात नहीं आएगी.’ उन्होंने कहा कि यह आरोप न केवल दुर्भावनापूर्ण है बल्कि झूठा है. यह उनके बेटे की निजता का हनन भी है. प्रियंका ने कानूनी नोटिस में कहा है कि इस दुखदायी झूठ का मकसद साफ तौर पर उनके परिवार को गहरी तकलीफ देना है और यह उनके मातृत्व और चरित्र पर लगाया गया अस्वीकार्य कलंक है.

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