एक फेसबुक पोस्ट पर IIMC में घमासान, दलित छात्रों ने की कंप्लेन, कमेटी गठित

आईआईएमसी छात्रों के बीच एक फेसबुक पोस्ट से घमासान मच गया है. दलित छात्रों ने पूरे मामले की एससी-एसटी एक्ट में शिकायत की है. इस पूरे मामले की जड़ में एक टीचर का हाथ होने की बात कही जा रही है. एक टीचर द्वारा छात्र को धमकी दिए जाने का घटनाक्रम भी हो गया है. दरअसल IIMC में पढ़ने वाले एक छात्र ने कुछ दिनों पहले रोहित वेमुला की आत्महत्या पर सोशल मीडिया में सवाल उठाने वालों की नीयत पर एक फेसबुक पोस्ट लिखी थी. इस पोस्ट पर कुछ छात्रों ने आपत्ति जाहिर की और इसे लेकर कॉलेज के साथ ही एससी-एसटी कमीशन, आदिवासी मामलों के मंत्रालय, और सामाजिक न्याय मंत्रालय तक शिकायत कर दी.

दलित छात्रों कहना है कि उस पोस्ट से उनकी भावनाएं आहत हुईं और वो संबंधित छात्र के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहते हैं. उनकी शिकायत के बाद कॉलेज ने इस मामले की सुनवाई के लिए एक कमेटी का गठन किया, जिसमें आरोपी छात्र के विभागाध्यक्ष को ही नहीं शामिल किया गया. अब आरोपी छात्र का कहना है कि उसे कुछ बोलने नहीं दिया जा रहा और उसे ऐसे माहौल में बहुत डर लग रहा है. ऐसा बताया जा रहा है कि बुधवार शाम को IIMC के ही एक छात्र ने अंग्रेजी पत्रकारिता विभाग के टीचर अमित सेनगुप्ता को दूसरे पक्ष के लोगों को भड़काते हुए सुना. उसने इस बात की लिखित शिकायत ओएसडी अनुराग मिश्रा और अन्य विभागाध्यक्षों से की. इस शिकायत के बाद कथित आरोपी टीचर अमित सेनगुप्ता ने छात्र को कैंपस में ही घेर लिया और शिकायत वापस लेने की बात कहने लगे.

छात्र के मुताबिक टीचर ने कहा कि अगर वो शिकायत वापस नहीं लेता है, तो वो उस पर मानहानि का मुकदमा कर देंगे. इस मुद्दे पर उनकी और कुछ छात्रों की तीखी बहस भी हुई. अब सुनने में आ रहा है कि टीचर ने छात्र को देख लेने की धमकी दी है. प्लेसमेंट का वक्त करीब होने के चलते छात्र घबराया हुआ है और उसने इस बात की फिर से शिकायत करने की बात कही है. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला यह संस्थान में बीते कुछ समय से चर्चा में है. पहले तो संस्था के डीजी पर सवाल उठे थे और फिर उनकी विदाई के बाद अभी तक नया डीजी ना आने के चलते पिछली बैच के छात्रों का दीक्षांत समारोह भी काफी देरी से हो रहा है.

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सारे चैनल, बड़े अखबार और मैग्जीन ब्राह्मणवादी सवर्णों के नियंत्रण में हैं, कोई अपवाद नहीं है

Dilip C Mandal : आप लोग मेरे स्टेटस को Like करना बंद कीजिए प्लीज. अपना लिखिए. जैसा बन पड़े, वैसा लिखिए. लिखना क्राफ्ट है. करने से हाथ सध जाता है. फोटो और वीडियो लगाइए. यहां संघियों को अपना टाइम लगाने दीजिए. देश को लाखों बहुजन फुले-आंबेडकरवादी लेखक और कम्युनिकेटर चाहिए. भारत के सारे चैनल और बड़े अखबार और मैगजीन ब्राह्मणवादी सवर्णों के नियंत्रण में हैं. कोई अपवाद नहीं है. वहां कुछ लोग सहानुभूति का नाटक कर रहे हैं. पर वे दूसरों की तरफ से ही खेल रहे हैं. निर्णायक क्षणों में वे आपके साथ नहीं होंगे. भारतीय मीडिया को लोकतांत्रिक बनाने के लिए आपका लेखक बनना जरूरी है. आपके लाइक्स का मैं क्या करूंगा? लिखिए.

फेसबुक समेत सोशल मीडिया में RSS की दादागीरी टूट चली है. सोशल मीडिया के लाखों लोकतांत्रिक बहुजनों, SC, ST, OBC, माइनॉरिटी, उदार – प्रगतिशील सवर्ण लेखकों और लेखिकाओं ने संघ के इस किले को भेद दिया है. इंटरनेट पर एकचटिया संघी गुंडागर्दी का जमाना गया. संघ को अब उसी की भाषा में जवाब मिल रहा है. कोई रियायत नहीं. जैसा हमला, उसी जोड़ का जवाब. क्रिया के बराबर और कई बार ज्यादा प्रतिक्रिया. संघी गाली गलौज का भी मुकम्मल जवाब लोग दे रहे हैं. बहुजनों के पास संघ की तरह कॉल सेंटर और पेड वर्कर नहीं हैं. पर संख्या बल है, तर्क है, न्याय और इंसानियत की ताकत है.

सोशल मीडिया में पहली बाजी RSS के हाथ लगी थी. लोकसभा चुनाव में. संघ जीता, क्योंकि मुकाबला कांग्रेस से था, जिसने कॉल सेंटर का जवाब कॉल सेंटर से देने की कोशिश की. लेकिन संघ के पास कॉल सेंटर के अलावा भक्त भी थे. बीजेपी के हिंदु बनाम मुस्लिम खेल में कांग्रेस का सोशल मीडिया छटपटा कर रह गया. उस समय के खेल में बहुजन शामिल नहीं सके थे. बाजी पलटने की शुरुआत बिहार से हुई. बहुजनों ने पहली बार अपना दम दिखाया. संसाधन संघ के पास थे, पर सोशल मीडिया के मैदान में उसे पसीने छूट गए. आरजेडी के सोशल मीडिया प्रबंधक SanJay Yadav की कोई काट बीजेपी के पास नहीं थी. देश भर के बहुजन लेखकों ने मिलकर बाजी पलट दी. और अभी तो खेल शुरू हुआ है….सारे संघी सोशल मीडिया पर हैं. वहीं बहुजनों का बड़ा हिस्सा तो अभी स्मार्ट फोन खरीदने की तैयारी कर रहा है. देखते जाओ.

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल के फेसबुक वॉल से.

दिलीप मंडल के लिखे कुछ हालिया पोस्ट्स पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें>

प्रधान संपादक शशिशेखर चतुर्वेदी जी, आपका रिपोर्टर दरअसल निकम्मा और मुफ्तखोर है

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मोदीजी, नागपुर में बैठे पेशवा लोग बहुत डेंजरस हैं, उन्होंने चुनाव न जिता पाने पर आडवाणी जी को नहीं छोड़ा

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‘आजतक’ और ‘हेडलाइंस टुडे’ में क्या दलित विरोधी मानसिकता वाले सवर्ण भरे पड़े हैं?

Ajitesh Mridul : This is how Headlines Today depicted Bihar’s CM Jiten Manjhi. I just want to tell them that sucking up to Bhajappa and all is OK, but at least hire people who understand the social construct. Mushars, don’t eat rats just for the heck of it. Read and learn about their sufferings.

Mayank Saxena : ‘आज तक’ चैनल ने अपनी एनीमेशन श्रृंखला में जिस तरह बिहार के मुख्यमंत्री की जाति का उपहास किया है, उसे आजतक व हेडलाइंस टुडे पर चलाए गए विडियो में देखा जा सकता है. इसे देखकर समझिये की समाचार चैनल में काम करने वालों की मानसिकता और समझ क्या है! मैं बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू का समर्थक नहीं लेकिन किसी की भी जाति का इस प्रकार उपहास करना संविधान और समरसता पूर्ण राज्य के सिद्धांत के खिलाफ़ है… ‘आज तक’ क्या आप को पता है कि मुसहर चूहा शौक में नहीं खाते…थूकता हूं आप पर और खुद पर भी कि मैं कभी इस मीडिया का हिस्सा था! आप को क्या लगता है कि इस एनीमेशन को लेकर आज तक और टीवी टुडे पर एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए कि नहीं? कृपया आज तक की इस शर्मनाक हरक़त के खिलाफ व्यापक अभियान को गति दें!

अजीतेश मृदुल और मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.

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