बीजेपी शिवपाल की पार्टी को भी बड़का वोटकटवा बनाने की जुगत में है!

Navneet Mishra : सियासी गलियारे मे अफवाह थी कि शिवपाल को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह दो सौ करोड़ फ़ाइनेंस कर रहे। इस डील में अमर सिंह और कुछ बड़े उद्योगपतियों का सहारा लिया जा रहा। तय हुआ है कि बैनर सेकुलर मोर्चा का होगा और पैसा बीजेपी( शुभचिंतक धन्नासेठों) का। कृपया हमें अनुसरण करें और …

दिवाली पर भतीजे से चचा को मिला सियासी अंधेरा!

अजय कुमार, लखनऊ

दीपावली खुशियां बांटने का त्योहार है। हर तरफ खुशियांे का आदान-प्रदान देखा जा सकता है,लेकिन सियासी दुनियां यह सब बातें मायने नहीं रखती हैं। इसी लिये दीपावली के दिन एक भतीजे ने चाचा की जिंदगी में ‘सियासी अंधेरा’ कर दिया। बात समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव की हो रही है। पिछले वर्ष तो भतीजे ने चाचा की दीवाली ‘काली’ की ही थी,इस बार भी ऐसा ही नजारा देखने को जब मिला तो लोग आह भरने को मजबूर हो गये।

शिवपाल यादव की सिफारिश पर पत्रकार योगेश मिश्र को मिला था यश भारती!

यूपी में अपने मुख्यमंत्रित्व काल में अखिलेश यादव ने 2012 से 2017 के बीच 200 से ज्यादा लोगों को यश भारती पुरस्कार बांटा. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने एक आरटीआई से मिली जानकारी के बाद जिन लोगों को यश भारती मिला, उनको किस मापदंड या सिफारिश के आधार पर दिया गया, इसका खुलासा किया है. लिस्ट देखने से पता चलता है कि कहीं कोई मापदंड नहीं था. सिर्फ सिफारिश ही काम आई. यश भारती पुरस्कारों के लिए सत्ता की मर्जी ही मानक थी.

बंटवारे की ओर बढ़ती सपा में बगावत

संजय सक्सेना, लखनऊ

उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के तेवर हल्के होने का नाम नहीं ले रहे हैं। बाप-चचा की तमाम ‘घुड़कियों’ और ‘अपनों’ के खिलाफ कार्रवाई से तिलमिलाए अखिलेश ‘जख्मी शेर’ बनते जा रहे हैं। विकास और स्वच्छता की राजनीति के कायल अखिलेश से जब उनके बुजुर्गो ने यही दोंनो ‘हथियार’ उनसे छीन लिये तो अखिलेश के पास कहने-सुनने को कुछ नहीं बचा। दागी अमनमणि को टिकट दिये जाने पर तो उन्होंने यहां कह दिया,‘मैंने सारे अधिकरी छोड़ दिये हैं।’

लखनऊ में सपाई साइकिलों की खटर पटर और ताज होटल में टिप टिप बरसा पानी…

Yashwant Singh : अखिलेश यादव अदूरदर्शी और बकलोल नेता हैं. उन्हें जमीनी हालत की समझ ही नहीं है. पूर्वांचल में कौमी एकता दल के पास ठीकठाक जनाधार है. मुसहर, जुलाहा टाइप हिंदू मुस्लिम्स की बेहद पिछड़ी या यूं कहिए अति दलित जातियों का माई बाप कौमी एकता दल ही है. सपा में इस पार्टी के विलय से सपा को जबरदस्त फायदा होता. लेकिन मीडिया और दूसरी पार्टियों के नेताओं के ‘अपराधीकरण अपराधीकरण’ के हो हल्ले के जाल झांसे में फंसकर अखिलेश न सिर्फ इस विलय को रद करा बैठे बल्कि जमीनी स्तर पर सपा संगठन को मजबूती देने वाले शिवपाल को भी नाराज कर दिया.