अतुल माहेश्वरी की पुण्य स्मृति : इतनी विनम्रता और संकोच शायद ही किसी मालिक में रहा होगा…

Shambhunath Shukla : नौकरी छोड़े भी चार साल हो चुके और अमर उजाला में मेरा कुल कार्यकाल भी मात्र दस वर्ष का रहा पर फिर भी उसके मालिक की स्मृति मात्र से आँखें छलक आती हैं। दिवंगत श्री अतुल माहेश्वरी को गए छह वर्ष हो चुके मगर आज भी लगता है कि अचानक या तो वे मेरे केबिन में आ जाएंगे अथवा उनका फोन आ जाएगा अरे शुक्ला जी जरा आप यह पता कर लेते तो बेहतर रहता। इतनी विनम्रता और संकोच शायद ही किसी मालिक में रहा होगा।

संस्कृत संस्थान में अनियमिता, स्मृति ईरानी से गुहार

लखनऊ स्थित सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सलाहकार नियुक्त किये गए चमुकृष्ण शास्त्री द्वारा राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में अनुचित और अवैधानिक हस्तक्षेप की कथित शिकायत की जांच कराये जाने की मांग की है. 

यही हाल रहा तो ‘आज तक’ के मंच पर जो हुआ, वो हर मंच पर होगा

सवाल ये कि ऐसी डिबेट्स में पार्टी कार्यकर्ताओं, नेता व प्रतिष्ठित लोगों को ही क्यों रखा जाता है। आम आदमी रिक्शे वाला, ढकेल वाला या युवा छात्र, गृहिणी व अन्य जमीन से जुड़े लोगों की राय कोई मायने नहीं रखती क्या? उन लोगों के बीच जाकर बहस क्यों नहीं करायी जाती। 

स्मृति ईरानी की मामूली सी खबर को मीडिया ने इतना क्यों उछाला, भाजपा की ही सांसद रिएक्ट

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी का गोवा टूर और खुफिया कैमरा पकड़ने का मामला अब नए विवाद का सबब बन रहा है। आलतू-फालतू की सूचना को इतना मीडिया-महत्व देने पर भाजपा के अंदर ही तरह तरह की बातें होने लगी हैं। भाजपा की ही एक महिला सांसद ने इसका ट्विटर पर त्वरित प्रतिवाद किया है।

सालों, इतनी जल्‍दी भूल गए… अभी बताता हूं…

Abhishek Srivastava : कुछ लोग जीते-जी पीछा नहीं छोड़ते, लेकिन ऐसे लोग कम हैं जो जाने के बाद भी जबरन अपनी याद दिलाते रहते हैं। मुझे वाकई नहीं याद था कि चार साल पहले 20 मार्च को ही आलोकजी की मौत हुई थी। किसी ने दिन भर याद भी नहीं दिलाया, लेकिन रात ढलते-ढलते आलोकजी ने सोचा, ”सालों, इतनी जल्‍दी भूल गए… अभी बताता हूं।”