बिल्डर के दलाल कथित टीवी पत्रकार ने अपने ही पत्रकार साथी को कवरेज करने पर धमकाया, पढ़ें शिकायती पत्र

सेवा में,
श्रीमान उपायुक्त, दिल्ली पुलिस,
साऊथ ईस्ट जिला, सरिता विहार
नई दिल्ली।

विषय — अवैध निर्माण पर चल रहे नगर निगम के डमोलिशन की खबर को ना करने व झूठे केस में फंसाने की धमकी देते हुए । 

महोदय,

निवेदन यह है कि मैं पंकज चौहान S/O श्री राजाराम सिंह, पता– 14/ 202, दक्षिणपुरी एक्सटेंशन, डॉ. अंबेडकरनगर, नई दिल्ली -62 में रहता हूं। मैं दिल्ली से ‘सनसनी इन्वेस्टीगेटर’ नाम से अपना एक नेशनल साप्ताहिक अखबार चलाता हूं। मैंने अपने पिछले एडीशन में दक्षिणपुरी की डीडीए मार्केट नंबर-2 में स्थित दुकान नंबर- 11, 12, 13, 14 की उस समय खबर लगाई थी जब यहां पर एम.सी.डी. के बिल्डिंग विभाग के दस्ते ने तोड़फोड़ की थी। अब दिनांक- 29/03/2017 को एम.सी.डी., ग्रीन पार्क ज़ोन से भवन विभाग के दस्ते ने दोबारा इसी अवैध निर्माण पर तोड़फोड़ का कार्यक्रम किया जिसको मैं अपने साथी रिपोर्टर के साथ कवर करने के लिए पहुंचा।

थोड़ी देर कवरेज करने के बाद मेरे से एक पास योगेश गुप्ता नाम से एक शख्स आया और मुझे और मेरे साथी रिपोर्टर को धमकाने लगा और अपने आप को आज तक न्यूज़ चैनल का रिपोर्टर बताने लगा। इस अवैध निर्माण को तोड़ने के पहले इस योगेश गुप्ता के मेरे पास 8700827576 नंबर से फोन आया था और उसका कहना था कि इस खबर को आगे मत छापना और मैं आपको बिल्डर के साथ चाय पिलवाता हूँ। मैने तब भी इस बात पर योगेश गुप्ता को कोई तवज्जो नहीं दी (मोबाईल की रिकॉर्डिंग अगर आपको चाहिए तो मैं आपको दे दूंगा)। मेरी मुख्य शिकायत ये है कि योगेश गुप्ता, कथित बिल्डर के अवैध निर्माण के बाबत मेरे पास उस समय आया जब दिल्ली नगर निगम का दस्ता भारी पुलिस बल के साथ अवैध-निर्माण तोड़ रहा था, उस समय योगेश गुप्ता ने अपने को आज तक न्यूज़ चैनल का पत्रकार बताते हुए मुझे और मेरे साथी रिपोर्टर संतोष झा को जान से मारने की धमकी तो दी ही साथ ही साथ मुझे ना तो फोटो खींचने दी और ना ही वीडियो रिकॉर्डिंग करने दे रहा था। उस समय पुलिस बल भी मौके पर मौजूद था।

योगेश गुप्ता ने मेरे और मेरे साथी रिपोर्टर संतोष झा के साथ काफी अभद्र व्यवहार किया और मुझे झूठे व फर्जी केस में फंसा लेने की धमकी देते हुए जान से मारने की भी धमकी दी। मैंने तब भी योगेश गुप्ता को कुछ नहीं कहा उसके बाद योगेश ने मेरी और मेरे साथी रिपोर्टर संतोष झा की वीडियो रिकॉर्डिंग की और फोटो भी खींची और कहने लगा कि अब तुम्हारी फोटो और वीडियो मेरे पास है अब मैं तुमको मरवा दूंगा। वो मुझे खबर ना छापने के चलते मेरे अखबार को भी उल्टा सीधा कह रहा था साथ ही बार बार अभद्र भाषा की भी उपयोग कर रहा था, जिसके बाद दिल्ली पुलिस और हमने उसका आई.कार्ड उसकी असल पहचान के लिए माँगा लेकिन उसने हमें आई. कार्ड तो नहीं दिखाया बल्कि एक विज़ीटिंग कार्ड दिखाते हुए कहा कि मैं आजतक चैनल में ही हूँ।

काफी बदतमीज़ी का व्यवहार करने के बाद दिल्ली पुलिस ने योगेश गुप्ता को वहां से भगा दिया लेकिन अब मेरी फेस बुक पर यही योगेश गुप्ता गलत तरीके से कमेंट करके मेरी छवि को धूमिल कर रहा है। फेस बुक पर योगेश मेरे खिलाफ काफी गलत तरीके से एक के बाद एक कमेंट बिना किसी आधार के किए जा रहा है मेरा आपसे नम्र निवेदन है कि एसे व्यक्ति के खिलाफ ठोस कानूनी कार्यवाही की जाए। जिस समय मेरे साथ योगेश गुप्ता ने बदतमीजी की थी उस समय अंबेडकर नगर थाना इलाके के कुछ पुलिसकर्मी भी वहां मौजूद थे जिन्होने योगेश को काफी समझाया भी लेकिन जब वो नहीं माना तो उन लोगों ने उसे टूट रही बिल्डिंग के पास से योगेश को भगा दिया , आप चाहें तो उन पुलिसकर्मियों से भी बात करके जाँच कर सकते हैं । 

मेरे इस शिकायती पत्र पर तत्काल प्रभाव से कार्यवाही करते हुए आप इस मामले की निष्पक्ष जाँच करें ताकि मेरी जो छवि धूमिल हुई है और मेरे को और मेरे साथी रिपोर्टर संतोष झा को जो धमकी मिली है उस पर योगेश गुप्ता के खिलाफ ठोस कानूनी कार्यवाही की जा सके । 

प्रार्थी
पंकज चौहान पुत्र श्री राजाराम सिंह
चीफ एडीटर
सनसनी इन्वेस्टीगेटर
नेशनल हिन्दी न्यूज़ पेपर
दिल्ली

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महिला पत्रकार ने अपने स्टेट हेड पर लगाए कई गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ में चैनल और अखबार बने उगाही का जरिया… न्यूज चैनल /अखबारों के रिपोर्टर व पत्रकार हो रहे शोषण के शिकार… पत्रकार संगठनों की भूमिका पर भी उठे सवाल..

स्टेट हेड/ एडिटर की आड़ में न्यूज चैनल करते हैं उगाही… छत्तीसगढ़ बना चारागाह… छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के जनसम्पर्क विभाग से डीपीआर लेने के फेर में छत्तीसगढ़ में कुकुरमुत्ते की तरह न्यूज चैनलों की बाढ़ आ गई है. न तो अधिकतर चैनल प्रदेश में सभी जगह दिखाई देते हैं न ही चैनल में कार्य करने वाले जिला रिपोर्टरों एवं ब्लॉक के स्ट्रिंगरों को मानदेय मिलता है. ये रिपोर्टर और स्ट्रिंगर प्रदेश की पल-पल की घटनाओं को ब्रेकिंग, स्क्रॉल, एंकर विसुसल, बाइट के माध्यम से भेजते हैं. विभिन्न ब्रेकिंग न्यूज के ग्रुपों एवं एफटीपी के माध्यम से चैनल के इनपुट तक पहुंचाते हैं. मेल से खबरों को भेजते हैं. लेकिन क्या वो सभी खबरे चलती हैं? नहीं. आखिर क्यों नहीं चलती हैं?

ब्लॉक एवं जिला स्तर पर कार्य करने वाले रिपोर्टरों एवं स्ट्रिंगरों को चैनल दुर्घटना बीमा का लाभ तक नहीं देते हैं. स्ट्रिंगरों और रिपोर्टरों को खबरों के बदले कोई पारिश्रमिक सैलरी नहीं दिया जाता है. एक-दो चैनलों को छोड़ दें तो बाकी सभी चैनल शोषण, उत्पीड़न और उगाही का अड्डा हैं. ये लोग न रिपोर्टरों को मोबाईल एलाउंस देते हैं न ही पेट्रोल एलाउंस, न ही वीडियो कैमरा, न ही किसी प्रकार की कोई सैलरी. लेकिन जब उन रिपोर्टरों से कोई खबर चूक जाये या किसी कारण से कोई फोन अटेंड नही कर पाए तो तुरंत चैनल हेड / एडिटरों का फोन आते ही रिपोर्टरों एवं स्ट्रिंगरों से ऐसे बात किया करते हैं जैसे वो उनके बंधुआ मजदूर हों। यदि कोई खबर किसी बड़े नेता / मंत्री या उद्योगपतियों से जुडी हो तो फिर पूछिए मत. आपसे फोनों के लिए सम्बंधित व्यक्ति अथवा नेता / अधिकारी का नम्बर मंगाया जायेगा. फिर आप टीवी के स्क्रीन पर समाचार का इंतिजार करते हुए बैठे रहिये. आपका समाचार चलेगा ही नहीं. लेकिन दिनभर मेहनत करके आपके द्वारा भेजे गई खबर को नहीं चलने का कारण आप पूछ भी नहीं सकते. यदि आपने पूछ भी लिया तो आपको कोई सन्तुष्टिजनक जवाब नहीं मिलेगा.

स्टेट हेड एवं एडिटर रायपुर में बैठ के लगा रहे आईडी की बोली… हालाँकि सुनने में ये बात थोड़ी अजीबो गरीब लगेगी लेकिन रायपुर में बैठे चैनल के ठेकेदार आपके जिला में स्थित उद्योगों एवं आर्थिक स्थिति के अनुसार आपसे आईडी का सौदा करेंगे. जिला रिपोर्टर बनना है तो 50 हजार… ब्लॉक रिपोर्टर बनना है तो 20 से 30 हजार रुपया… ये पैसे बाकायदा आपसे डोनेशन के तौर पर लिया जायेगा… पहले तो आपको यह राशि कार्य छोड़ने के वक्त वापसी की बात की जायेगी… लेकिन भला अख़बार या चैनल से किसी को पैसा वापस मिला है किसी को… इतना ही नहीं, आई डी एवं पीआरओ लेटर जारी करते ही आपका शोषण प्रारम्भ हो जाता है.. फिर शुरू होता है टारगेट का खेल…. 26 जनवरी, 15 अगस्त, दीपावली, नेताओं की जयंती, पुण्य तिथि, मंन्त्री मिनिस्टरों के आगमन… इन सभी अवसर पर उन्हें चाहिए विज्ञापन. भले ही आपका समाचार चले न चले, चैनल दिखे न दिखे, लेकिन आपको विज्ञापन देना ही पड़ेगा.

रायपुर से बैठ के होता है खबरों का सौदा… जी हां सुनने में थोड़ा अजीब लगे लेकिन रायपुर में बैठे चैनल हेड/ एडिटर खबरों के ठेकेदार अपने नफा नुकसान के आधार पर खबरों का चयन एवं सौदेबाजी करते हैं… यदि खबर मंत्री जी से जुडी कुनकुनी 300 एकड़ आदिवासी भूमि घोटाले की हो, खनन माफियाओं से जुडी खबर हो, भ्रष्ट अधिकारियो से जुडी खबर हो या फिर देश के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया ग्रुप डी बी पॉवर से जुडी आदिवासी भूमि घोटाला की खबर जिस पर प्रधानमंत्री कार्यलय से कार्यवाही का आदेश हो… इसे रोक करके उल्टे दलाली की जाती है… ऐसे ही मामले में एक जिले की महिला रिपोर्टर आरती वैष्णव को धमकी देते हुए चैनल से निकाले जाने एवं आईडी जमा करने की बात कहता है साधना चैनल का स्टेट हेड आरके गांधी. साधना न्यूज छत्तीसगढ़ के स्टेट एडिटर आरके गांधी की पोल जब महिला पत्रकार ने खोल दी तो महिला पत्रकार को बदनाम करने के लिए खनिज माफियाओं से कर लिया सांठगांठ.

श्री माँ प्रकाशन की आड़ में पूरे छत्तीसगढ़ को लूटा… जी हां अपने आपको स्टेट हेड बताने वाले दलाल श्री आर के गांधी ने श्री माँ प्रकाशन के नाम से मुझसे लिया विज्ञापन… 25 हजार नगद एवं 25 हजार का स्टेट बैंक खरसिया का चेक लिया… अंबिकापुर, बिलासपुर, भिलाई, दुर्ग, जाजंगिर, कोरिया सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से जिला रिपोर्टर के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपये लिए. संभाग हेड के लिए 1 लाख से 5 लाख तक लिए… ब्लॉक स्तर के लिए 30 हजार की राशि स्ट्रिंगरों से वसूल किया गया… बदले में श्री माँ प्रकाशन का आईडी एवँ पीआरओ जारी किया गया… अब जबकि श्री माँ प्रकाशन का अनुबंध साधना न्यूज से समाप्त हो गया है तो लोगों को उनका डिपॉजिट वापस करने में आनाकानी किया जा रहा है…

डीबी पावर प्रिंट मीडिया समूह द्वारा खरसिया तहसील जिला रायगढ के विभिन्न ग्रामों में गरीब आदिवासियों की जमीन कब्जाने की खबर का प्रसारण करने के बजाय उल्टे डीबी पॉवर के जीएम धनंजय सिंह के साथ सांठ गांठ करके मुझे मोबाईल में तत्काल चैनल छोड़ने एवं आईडी जमा करने की धमकी आर के गांधी द्वारा दी गई. मेरे द्वारा जमा डिपॉजिट वापस मांगने पर बदनाम करने एवं कैरियर खराब करने की धमकी दिया गया है. आर के गांधी द्वारा आज भी श्री माँ प्रकाशन के नाम से आईडी एवं पीआरओ को बेचा जा रहा है.

विज्ञापन प्रसारित किये बिना बिल की मांग एवं प्रत्येक महीना वसूली करके कभी 30 हजार कभी 50 हजार देने का दबाव बनाया जाता है. ऐसे में भला कोई व्यक्ति कैसे कार्य करेगा… आर के गांधी के इस अपमान जनक बातों एवं अवैध उगाही के कारण छत्तीसगढ़ में साधना न्यूज अपनी पहचान खो चुका है…

अब एक बार फिर से नई नियुक्ति के नाम से रिपोर्टरों से वसूली की तैयारी आर के गांधी द्वारा की जा रही है. किसी भी रिपोर्टर को सैलरी तो दूर, साल भर कार्य करने के बाद भी प्रेस कार्ड तक जारी नहीं किया गया है… आज छत्तीसगढ़ में साधना न्यूज के पतन का मुख्य जिम्मेदार आर के गांधी ही है… ऐसा दलाल जो रायपुर में बैठकर आई डी बेच रहा है और रिपोर्टरों को धमकाता है… हर माह पैसे देने को कहता है…. रिपोर्टर को बंधुवा मजदूर की तरह समझता है…  ऐसा व्यक्ति है ये दलाल आर के गांधी… कई प्रताड़ित पत्रकार उक्त मामले में जल्द ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की शरण में जाने को तैयार हैं…

सुनिए दलाल आरके गांधी से मेरी बातचीत… इस टेप से समझ में आ जाएगा कि जो मैंने आरोप लगाए हैं वो निराधार नहीं हैं…

आरती वैष्णव
जिला रिपोर्टर
साधना न्यूज
रायगढ़

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धंधेबाज ‘समाचार प्लस’ चैनल : रिपोर्टरों को उगाही का टारगेट, पूरा न करने पर कइयों को हटाया

समाचार प्लस राजस्थान में सभी स्टिंगरों को दिया गया एक लाख से 2 लाख रुपये उगाही का लक्ष्य. नहीं देने वाले रिपोर्टरों को निकाला. 26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस के नाम पर उगाहने हैं लाखों रुपये. समाचार प्लस में मैं कई सालों से कार्य कर रहा था.  5 हजार रुपये मुझे मेरी मेहनत के मिलते थे. काम ज्यादा था, पैसे कम. लेकिन चैनल को कुछ और ही प्यारा था. समाचार प्लस राजस्थान टीम ने मुझे फ़ोन कर कहा-

”आप ब्यूरो हैं, आपको हम 1 लाख से 2 लाख रुपये का लक्ष्य दे रहे हैं. हमे जल्दी विज्ञापन दे दो. नहीं दे सकते हो तो टीवी में दिखना कम हो जाओगे और हमें कई स्टिंगरों को इस वजह से बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा. आप पर भी गाज गिर सकती है, इसलिए आप भी खबरें कम कर दो और विज्ञापन दो. नहीं दे सकते तो मैनेजमेंट आपको हटा देगा.”

उन लोगों ने फोन पर ही बताया कि अजमेर के ब्यूरो चीफ संतोष सोनी और उदयपुर के अब्बास रिजवी को बाहर का रास्ता टारगेट पूरा न करने के कारण दिखा दिया गया है. इनको हटाने की वजह यह कि इन्होंने पैसे देने से मना कर दिया. उसी दिन हटाकर नए स्टिंगरों को लगा दिया गया. राजस्थान के सारे स्टिंगरों को मेल पर 1 से 2 लाख रुपये देने का आदेश दे दिया गया है. आखिरकार मैनेजमेंट ने हमें बाहर क्यों निकाला. हम उन्हें हर ओकेजन पर विज्ञापन देते थे. लेकिन जब बार-बार विज्ञापन समाचार प्लस राजस्थान टीम मांग रही है तो हम कहां से दें.

अभी दीपावली पर ही लाखों रुपये के विज्ञापन दे चुके हैं. उनका ही पेमंट नहीं हुआ. लेकिन अब फिर से 1-2 लाख रुपये विज्ञापन के नाम पर मांग लिए. धंधेबाजी और उगाही की हद होती है. आप से गुजारिश है कि आप इस दुःखद मेल को अच्छे से लगायें और मीडिया कर्मियों का साथ देवें. यह सबको जानना जरूरी है कि रिपोर्टर अब चैनल के लिए कमाई करेगा. यही कारण है कि अब समाचार प्लस ग्रुप के दावे फेल होने लगे हैं. यह साबित होने लगा है कि इसका मालिक उमेश कुमार पहले से ही धंधेबाज रहा है और फिर से अपने ओरीजनल रूप में आ गया है. इसकी धंधेबाजी के चर्चे उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत पूरे राजस्थान में होने लगे हैं. इसकी नेताओं अफसरों सरकारों की दल्लागिरी के कारण एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया.

ग्रुप ने जिला स्तर पर राजस्थान में जो संवाददाता रखे थे, रिटेनर, उन पर मार्केटिंग का भारी दबाव बनाया जा रहा है. अब रिपोर्टर खबरें करे या विज्ञापन मांगता फिरे, समझ ही नहीं आ रहा. चैनल ने कमाई न करके देने पर बीकानेर, अजमेर समेत कई जिलों के रिपोर्टरों को हटा कर वहां स्ट्रिंगर रख दिए हैं. अब 26 जनवरी के लिए 1 लाख का टार्गेट दिया है. समझ नहीं आ रहा है कि इस चैनल के मार्केटिंग विभाग वाले क्या कर रहे हैं. बड़ी तनख्वाह पर काम कर रहे हैं और दबाव रिपोर्टर पर बना रहे हैं. सरकार के खिलाफ खबर नहीं चलाते, भले ही कुछ भी हो जाए. धमकी दी जा रही है कि रुपए नहीं उगाहे तो हटा दिया जाएगा. नीचे वो मेल है जो चैनल की तरफ से सभी को भेजा गया है>

Dear All,

this is a reminder regarding spot/scroll advt on 26 jan-2016 (Republic day ) as per instructions of Channel Head- Mr. Ajay Jha
District head quarter – advt Amount should be Rs. 1 lakh
Tahsil and others advt Amount should be Rs. 50,000 /-

Plz make sure for this target.

Thanks
Manoj Gotherwal
Manager Marketing
Samachar Plus Channel- Raj.
08233229289

भड़ास के पास राजस्थान के कई टीवी जर्नलिस्टों द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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इन मीडिया वालो की तो हथियारों के दलालों से भी साठगांठ : वी के

नई दिल्ली : विदेश राज्यमंत्री वी. के. सिंह ने मीडिया पर एक और प्रहार करते हुए कहा है कि कुछ मीडिया कर्मियों की भ्रष्ट हथियार डीलरों से साठगांठ है। उल्लेखनीय है कि हाल के दिनो में वीके सिंह ने मीडिया को ‘प्रेस्टिच्यूड’ कहा था। 

थल सेना अध्यक्ष रहे विदेश राज्य मंत्री ने कहा है कि यही वजह है कि वे मीडिया कर्मी उन्हें बदनाम करने पर तुले हुए हैं। उनका कहना है कि उनकी शुरू से ही हथियार लॉबी, डीलर व तथाकथित देश के दलालों से अदावत चली आ रही है। इसलिए ये लोग मुझे पसंद नहीं करते और इन लोगों में कुछ मीडिया के लोग भी शामिल हैं। 

वीके सिंह का कहना है कि चुनाव के दौरान भी उन्होंने कहा था, हथियार डीलर चुनाव में अपना पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं। अब जब विवाद सामने आया है तो मुझे लगता है कि इसमें भी इन्हीं डीलरों का हाथ है। मुझे इसलिए निशाना बनाया जा रहा है कि वह बिक नहीं सकते। 

उन्होंने कहा, मुझे खरीदा नहीं जा सकता। मैं बाजार में बिकने वाली चीजों में से नहीं हूं। इसलिए खरीददार चाहते हैं कि कुछ ऐसा किया जाए, जिससे या तो मुझे खरीदा जा सके या बुरी तरह तोड़ा जा सके। 

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प्रशासन, नेताओं और धन्नासेठों का दलाल बनने से बचें पत्रकार : आनंद स्वरूप वर्मा

पौड़ी (उत्तराखण्ड) : आज के दौर में लोगों तक सही सूचनाएं नहीं पहुंच रही हैं। पत्रकार पुलिस और प्रशासन के स्टेनो बन गये हैं। जैसी सूचनाएं वह देते हैं, पत्रकार उसी को अपने अखबार/चैनल को भेज देते हैं। अपने स्तर पर सूचनाओं की पुष्टि करने तथा उससे अलग तथ्य खोजने की मेहनत से बचते हैं। यह बात उमेश डोभाल स्मृति रजत जयंती समारोह में आयोजित व्याख्यान ‘बदलते परिवेश में जन प्रतिरोध’ विषय पर मुख्य वक्ता वरिष्ठ लेखक-पत्रकार और समकालीन तीसरी दुनिया के संपादक आनंद स्वरूप वर्मा ने कही। 

उन्होंने कहा कि लोगों में जागरूकता लाने में मीडिया की अहम भूमिका है और सुझाव दिया कि पत्रकारों को प्रशासन, नेताओं और धन्नासेठों का दलाल बनने से बचना चाहिए। बताया कि किस प्रकार से सरकारें, प्रशासन और पूंजीपति जनता को भ्रमित कर रहे है। ऐसे में पत्रकारों की जिम्मेदारी है कि वह जनता तक सही सूचनाएं पहुंचाएं और उसे जागरूक करें। उन्होंने सरकारी दस्तावेजों के हवाले से बताया कि छत्तीसगढ़ में सरकार और निजी क्षेत्र लोगों को उजाड़ रहा है और उत्पीडि़त कर रहा है।   

श्री वर्मा ने कहा कि वर्तमान परिवेश में पूंजीवाद हावी हो रहा है। ऐसे में लोगों में जागरूकता लाना जरूरी है। बताया कि 1990 के विश्व बैंक के एक दस्तावेज में कहा गया कि राज्य को कल्याणकारी योजनाएं बंद कर सारे जनकल्याणकारी काम-काज निजी क्षेत्र को सौंप देने चाहिए। उसके इस सूत्र को दुनिया भर की सरकारों ने बाइबिल की तरह अपना लिया। 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने पीएम काउंसिल ऑन ट्रेड एंड इंडस्ट्री बनाई जिसके तहत सरकारी योजनाएं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य आदि का कार्यभार रिलायंस आदि कॉरपोरेट घरानों को सौंप दिए गये। 

उन्होंने वैश्वीकरण को साम्राज्यवाद का बदला हुआ रूप बताया। आज पत्रकारिता और सांस्कृतिक आन्दोलन दयनीय स्थिति में हैं। वर्मा ने कहा कि सरकारें चाहती हैं कि जनता हिंसा करे ताकि वह इस बहाने जनता के अधिकारों में कटौती कर कारपोरेट के लिये रास्ता साफ सके। इसलिये जनता को हिंसक प्रतिरोध से बचना चाहिए। निरंतर जनता को जागरूक करने और उसे गोलबंद करने के प्रयास व्यापक स्तर पर होने चाहिए। बताया कि आम जनता में कोई हथियार तभी उठाता है जब सभी तरह के लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के माध्यमों को सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा अनसुना कर दिया जाता है। कहा कि कोई भी आमजन मामूली बातों में हथियार उठाने की हिम्मत नहीं करता। सामान्यतया तो धन्नासेठों के बिगड़ैल बच्चे हथियार उठाते हैं जो एक पैग शराब न मिलने पर भी गोली चला सकते हैं। उल्लेखनीय है कि वर्मा उन पत्रकारों में से एक थे जिन्होंने  उमेश डोभाल के गुम हो जाने के समय दिल्ली में शराब माफिया के खिलाफ लोगों को गोलबंद करने में अहम भूमिका निभा कर दबाब बनाया गया था।  

वरिष्ठ पत्रकार और नैनीताल समाचार के संपादक राजीव लोचन शाह ने कहा कि जन प्रतिरोध के लिए सही बातों को सामने लाना जरूरी है। आज पूंजीवाद विभिन्न तरीकों से हमारे सोचने-समझने की क्षमता पर प्रतिकूल असर डाल भ्रमित कर रहा है। लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि हर व्यक्ति को प्रतिरोध के स्वरों को अपने तरीके से व्यक्त करना चाहिए। डा. उमा भट्ट ने कहा कि समाज को महिलाओं के प्रति सोच बदलने की जरूरत है। उन्होंने रामपुर तिराहा कांड के दोषियों को सजा नहीं मिलने पर दुख व्यक्त किया और आंदोलनकारियों द्वारा इस मामले को विस्मृति के गर्त में डालने पर क्षोभ व्यक्त किया। इस मौके पर खुले सत्र एवं परिचर्चा कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने विचार रखे। संचालन योगेश धस्माना ने किया। 

भोजनकाल के बाद तीसरे खुले सत्र में विषय पर व्यापक चर्चा हुई। इसकी अध्यक्षता ओंकार बहुगुणा मामू ने की। इसमें बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने कहा कि मात्र पत्रकारिता से व्यवसथा नहीं बदल सकती है। इसके लिये अच्छे लोगों को राजनीति में आना ही होगा, तभी सरकार को जगाया जा सकता है। सरकार चाहती है कि प्रतिरोध ही न हो क्योंकि ऐसा करने से उनको अपनी मनमानी करने की छूट मिल जाती है। उन्होंनें कहा कि उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट ने 25 सालों से आयोजन के जरिये प्रतिरोध की धारा को जिंदा रखा है। इसलिये इसके साथ जुड़ें। जनवादी लेखक त्रेपनसिंह वौहान ने कहा कि जनप्रतिरोध आज दबता जा रहा है। आज श्रमिक यूनियन नहीं बन सकते हंै इसीलिये आज श्रमिकों का जबरदस्त शोषण हो रहा है। रुद्रपुर से आये रूपेश कुमार सिंह ने कहा कि राज्य में 15 साल हो चुके हैं लेकिन में कोई भी राज्यस्तरीय राजनीतिक ताकत नही उभर सकी है। यहां पर राज कर रहे दल सही मायनों में जनआकाक्षाओं के अनुरूप कार्य ही नहीं कर रहे हैं। राज्य बनने के बाद पहाड़ ही नहीं तराई भी कई प्रकार की समस्या से जूझ रही है। उन्हानें सुझाव दिया कि राज्य के तराई क्षेत्र की समस्याओं को जानने के लिए भी पदयात्रा की जानी चाहिए।

देहरादून से आई पत्रकार मीरा रावत ने कहा कि आज प्रतिरोध के स्वरों को कुचला जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक समय जिस आईटी पार्क को लेकर यहां पर रोजगार के सपने दिखाये गये थे उस आईटी पार्क की हालत देखकर रोना आता है। इस पार्क की जमीन का एक हिस्सा बिल्डरों को दे दिया गया है जो अपने एक-एक फ्लैट एक से सवा करोड़ में बेच रहे हैं। दिल्ली से आये लीलाधर काला ने कहा कि तकनीकी से आज काफी कुछ बदल गया है। सरकारें और पूंजी की ताकतें इसका अपने हित और जनता के खिलाफ इस्तेमाल कर रही हैं, हम कैसे इसका प्रयोग आम जन के हित में कर सकते हैं इस पर सोचा जाना चाहिए। चकबन्दी नेता गणेश सिंह गरीब ने कहा कि आज गांव खण्डहर हो रहे हैं समय रहते यदि सरकार और हम नहीं चेते तो वह पूरी तरह से खाली हो जायेंगे। यह राज्य एक प्रतिरोध के आन्दोलन बनने से ही बना लेकिन उसके बाद हम यह भूल गये कि हमने वह किसलिये मांगा था। हमारी प्राथमिकतायें क्यों बदल गई? इस पर हमें आत्मालोचना कर समान विचार वालों से संवाद बढ़ाना चाहिए। 

दिल्ली से आये वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया एक्टीविष्ट भूपेनसिंह ने मीडिया और जनप्रतिरोध के सच को समाने रखा। उन्होंने बताया कि आज की पत्रकारिता कारपोरेट के हाथों में ही है। जिनकी प्राथमिकता केवल पूंजीपतियों के मुनाफे को बढ़ाने की है। हम आम जन के हित में कैसे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, इसका रास्ता हम आपसी संवाद से निकाल सकते हैं। प्रखर पत्रकार और भाकपा माले नेता इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि मुख्यधारा का मीडिया बड़ी पूंजी से संचालित है, जिसके द्वारा वह अपने उत्पादों का प्रचार करता है, और पूंजीपति घरानों के सुरक्षा कवच का काम करता है। पूंजीवादी व्यवस्था के पक्ष में जनमत का निर्माण करता है। इसके उपभोक्ता और इसमें काम करने वाले प्रयास करें तो इसका इस्तेमाल एक हद तक आम जन के लिए भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही जनपक्षीय लोगों को वैकल्पिक मीडिया खड़ा करने के प्रयास करने चाहिए। मैखुरी ने जनपक्षीय कार्यक्रमों में मुख्य/विशिष्ट अतिथियों के रूप में पूंजीवादी दलों के नेताओं को बुलाने से परहेज करने की सलाह दी। 

इस दौरान कुछ प्रस्ताव भी सामने रखे गये –

 1- कई बार यह सामने आ रहा है कि किस प्रकार उच्च अधिकारी और नेता अपने हितों के लिये नीतियां साध रहे हैं। राज्य में सत्ताधारी दलों और अधिकारियों का गठजोड़ इस नवोदित राज्य के लिये बेहद खतरनाक है। इसका प्रतिकार हो। 

2- सिडकुल की जमीनें औने-पौने दाम पर बिल्डरों व होटलेयर को देना बन्द हो। जिस प्रयोजन के लिये जमीने दी गई हो उसमें वही कार्य हो। राज्य में लैंड यूज बदलने का गेम बंद हो।

3- राज्य की खनन नीति ऐसी बने कि खनन माफिया न पनप सके।

4- केदारनाथ आपदा के बाद से सरकार को इस त्रासदी से सबक लेना चाहिये था। लेकिन सरकार अब भी नहीं चेती है और उसने फिर से विकास का वही पुराना राग अलापना आरम्भ कर दिया है। इससे फिर राज्य को दूसरी त्रासदी झेलनी पड़ सकती है। सरकार इसकी गम्भीरता को समझे।  

5- राज्य में पत्रकारों के वेतन के लिये मजीठिया आयोग लागू हो ताकि पत्रकारों का शोषण बंद हो। इसी प्रकार 60 साल पूरे कर चुके पत्रकारों को दूसरे राज्यों की तरह पेंशन दी जाए।

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रीढ़-न-जमीर, नाम ‘संपादक’

जिस संस्थान के लिए पत्रकार जीतोड़ मेहनत करते हैं, ख़बर लिखते हैं, सामाजिक सरोकारों और जनता के हक़ की लड़ाई लड़ते हैं, गरीबों को न्याय दिलाते हैं, बेसहारों का सहारा बनते हैं, उन्हीं संस्थानों का का संपादक प्रतिष्ठान पतन की हद तक आत्मजीवी और बाजारवादी हो चुका है। पत्रकारों की ही लेखनी की बदौलत मीडिया संस्थान तरक्की करते हैं, ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग पत्रकारों की ही लिखी खबरें पढ़ते हैं, उन्हीं पत्रकारों की बदौलत वाहवाही लूटने के लिए अखबार आत्मप्रचार करते हैं कि हमारी  “खबर का असर”, सबसे पहले हमने उठाई थी ये आवाज, हमने दिलाया न्याय, आदि आदि। लेकिन इस खोखलेपन का पता उस समय चलता है, जब उन पत्रकारों पर मुसीबत पड़ती है, कोई आफत आती है।

 स्वयं को प्रतिभावान, तेज-तर्रार और ख़बरों से समझौता न करने का दम भरने वाले ऐसे रीढ़हीन संपादकों और ब्यूरो प्रमुखों की स्वामिभक्ति और चाटुकारिता पर हजारों बार लानत है। उन्हें चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए। बड़े नाम वाले अखबारों से तो कम प्रसार संख्या वाले अखबार और उनके संपादक, पत्रकार ज्यादा मिशनरी हैं। वे पत्रकारों के गर्दिश के दिनों में कम से कम उनकी आवाज तो बनते हैं, उनकी मुश्किलों और उत्पीड़न पर खबर तो प्रकाशित कर देते हैं। पूंजीपतियों के हाथ के कठपुतली संपादकों का हाल ये है कि पत्रकारिता पर बड़ी ऊंची-ऊंची बातें करते हैं, बड़े बड़े और आदर्श और नैतिकता का पाठ पढ़ाते डोलते हैं, लेकिन मालिकानों के आगे दुम दबाकर चापलूसी की पराकाष्ठा कर देते हैं। तब संदेह होता है कि उनमें कोई जमीर या रीढ़ नाम की चीज है भी कि नहीं। 

हर पत्रकार को नाज होता है कि उसका संस्थान उसके पीछे खड़ा है, उसके सुखदुख का साथी है। अगर सम्पादक रीढ़ वाला हो तो उसके पत्रकार को कोई आँख नहीं दिखा सकता, मार-पीट तो बड़ी दूर की बात है, लेकिन लगता है, आज के ज्यादातर संपादकों ने कलम गिरवी रख दी है, सिर्फ गुलामी कर रहे हैं, गुलामों की जिंदगी जी रहे हैं, मोटा माल कमाने में लग गए हैं, कथित बड़े-बड़े लोगों के साथ उठने-बैठने की लत पाल लिये हैं। वे भी तो कभी छोटे पत्रकार रहे होंगे, नये पत्रकारों जैसी पीड़ा या जुनून से गुजरे होंगे, तमाम झंझावातों से लड़े होंगे। फिर कैसे सब भूल कर पूरी बेशर्मी से मालिकों के चरणों में लोट लगाने लगे हैं। 

कहते हैं, इंसान को अपने पुराने दिन नहीं भूलने चाहिए और एक पत्रकार को तो संवेदनशील भी माना जाता है, फिर संपादक कैसे भूल जाते हैं कि आधुनिक मीडिया मालिकों ने मोटी पगार के बदले उन्हें सिर्फ दलाली के लिए कुर्सी दे रखी है। पुलिस और नेताओं पर रोब गांठने वाले ये संपादक अपने गिरेबान में झांकने से डरते हैं। सुविधाएं छिन जाने का डर रहता है। जब कोई पत्रकार किसी माफिया, समाजविरोधी तत्वों के हाथ मारा जाता है, संपादक उस पर एक लाइन खबर भी देने से डर जाते हैं। लानत है ऐसे संपादकों और उनकी दलाल पत्रकारिता पर। 

(लेखक से संपर्क : फोन – 9919122033, ई-मेल – dinksri@gmail.com)

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‘न्यूज नेशन’ चैनल दलालों को पत्रकारिता का प्रमाण-पत्र बांट रहा है!

बुलंदशहर में न्यूज नेशन चैनल दलालों को पत्रकारिता का प्रमाण-पत्र बांट रहा है। 26 जनवरी तक मोहित गौमत नाम के एक शख्स को न्यूज नेशन ने पत्रकार बना रखा था जो इंटरलाक टाइल्स मामले में फैक्ट्री संचालकों से रुपये वसूलते हुए पकड़ा गया। केस में जिलाधिकारी से शिकायत होने पर रिपोर्ट शासन को भेजी गयी और सीएम अखिलेश यादव के हस्तक्षेप के बाद मोहित गौमत को चैनल के मालिकों ने तत्काल प्रभाव से हटा दिया। अब नया कारनामा सुनिये। नदीम खान नाम के एक व्यक्ति को अब न्यूज नेशन की ‘आईडी’ देकर पत्रकार बना दिया गया है।

नदीम बुलंदशहर में सैक्स ताकत बढ़ाने की दवायें बेचने का कारोबार करता है। 3-4 साल पहले पुलिस और प्रशासन से अपने धंधे को बचाने के लिए उसने ‘बुलंद सुनामी’ नाम का अखबार रजिस्टर्ड कराया और पत्रकार के बजाय संपादक बनकर पुलिस और प्रशासन के अफसरों के आसपास नजर आने लगा। 2013 में नदीम का एक कांड खुला। नदीम ने कई महीनों तक सिटी में देहव्यापार का धंधा चलाने वाली बाला नामक वेश्या को ब्लैकमेल किया और उससे हजारों रुपये भी वसूले। (कृपया वीडियो http://goo.gl/BxutjE देखे)।

9 जून-2013 को पुलिस ने छापा मार कर इस सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया था जिसमें दर्जनभर से ज्यादा महिलाएं सेक्स के धंधे में लिप्त मिलीं और करीब 3 दर्जन ग्राहक मौका ए वारदात से गिरफ्तार हुए थे। बाला के पास से मिली डायरी में नदीम खान की काली करतूतों का चिठ्ठा दर्ज था। पकड़ी गयी वैश्या बाला ने बताया कि नदीम खान उसे कई महीने से ब्लैकमेल कर रहा था और उससे लगातार वसूली करने के अलावा फ्री में उससे ‘सेवाएं’ भी लेता था। नदीम के 4 साथी भी इस ब्लैकमेलिंग में शामिल थे। पुलिस की जांच में भी नदीम के नाम की पुष्टि हुई है।

उस समय एसएसपी रहे आईपीएस गुलाबसिंह अब मुरादाबाद में डीआईजी जोन हैं। वर्तमान में मुरादाबाद के एसपी रेलवे वैभवकृष्ण इस मामले के विवेचक (तत्कालीन एएसपी सिटी) थे।  यादवसिंह के काले धन से चलने वाले इस चैनल के एडीटर और अधिकारियों ने वेश्याओं से ब्लैकमेलिंग करने वाले नदीम खान को पत्रकार की उपाधि दे दी। अब आप सोच सकते हैं कि इस चैनल में किस तरह के लोग काम करते हैं। इस नदीम खान को पत्रकारिता का क से कबूतर भी नही आता। कैमरा, कापी के मामले में एकदम से अंजान नदीम खान अब चंद दलाल टाइप के पत्रकारों की मदद से जर्नलिस्ट बन चुका है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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जमीन घोटालेबाज प्रफुल्ल सकलेचा और मिठाई दुकानदार पंकज शर्मा को इंदौर प्रेस क्लब की सदस्यता दिलाने की तैयारी!

इंदौर प्रेस क्लब में इंदौर के कुल पत्रकारों से दोगुना ज्यादा सदस्य हैं। इस मामले को लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है। जब भी प्रेस क्लब के चुनाव आते हैं, नए सदस्यों की भर्ती शुरू हो जाती है। ये सदस्य जरूरी नहीं कि पत्रकार हों। इंदौर के करीब सभी छुटभये नेता, जमीन के घोटालेबाज और दलाल टाइप के लोग भी प्रेस क्लब के सदस्य हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इसकी आड़ में कुछ धंधेबाज पत्रकार भी पैदा हो गए हैं, जो सदस्य बनाने के नाम पर वसूली करने से बाज नहीं आते।

ताजा मामला जमीनों के एक घोटालेबाज प्रफुल्ल सकलेचा और उसके एक साथी पंकज शर्मा, जो मिठाई की दुकान चलाते हैं, को प्रेस क्लब की सदस्यता दिलवाने का। सकलेचा ने 23 फर्जी कम्पनी बनाकर जमीनों का फर्जीवाड़े किया और विभिन्न अदालतों में 38 मामले विचाराधीन हैं। सकलेचा ने कुछ दिन पहले एक शाम का अखबार निकाला, फिर बंद कर दिया। जब कुछ मामलों में सकलेचा के खिलाफ आवाज उठी, तो वो फरार हो गए। प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए प्रफुल्ल सकलेचा ने प्रेस क्लब का सदस्य बनने की चाल चली है। इस काम में उनकी मदद ‘दबंग दुनिया’ का एक रिपोर्टर नुमा पत्रकार कर रहा है।  आरोप है कि उसने प्रफुल्ल सकलेचा और पंकज शर्मा की सदस्यता के लिए रुपए भी लिए हैं। इस आश्वासन के बाद कि जब भी प्रेस क्लब की मीटिंग होगी, इन दोनों जमीन घोटालेबाजों को प्रेस क्लब की सदस्यता मिल जाएगी। लेकिन, बात खुल जाने के बाद मामला उलझ गया।

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