इस फोटो के छापने पर दैनिक जागरण शामली आफिस पर महिलाओं ने किया हमला (देखें तस्वीर और वीडियो)

दैनिक जागरण शामली एडिशन में ट्रैक्टर ट्राला से स्कूल जा रही छात्राओं की एक तस्वीर प्रकाशित की गई. इसमें सभी छात्राएं सिर झुकाकर बैठी हुई थीं. दैनिक जागरण में गुरुवार के अंक में छपी इसी तस्वीर को लेकर शुक्रवार को कुछ महिलाओं ने शामली में दैनिक जागरण कार्यालय पर हमला बोल दिया. महिलाओं के साथ कुछ दबंग पुरुष भी थे. कार्यालय में मौजूद स्टाफ ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने एक न सुनी.

हमलावर सुबह करीब दस बजे ढेर सारी महिलाओं के साथ दैनिक जागरण कार्यालय आए. आते ही स्टाफ के साथ अभद्रता शुरू कर दी. उन्होंने गाली गलौज करने के साथ ही हमला बोल दिया. तोडफ़ोड़-लूटपाट भी की. हमले में स्टाफ के कई लोग चोटिल हो गए. मौके पर पहले से मौजूद दर्जनभर पुलिसकर्मी तमाशबीन बने रहे. पुलिस के सामने ही हमलावर हत्या की धमकी देते हुए चले गए. घटना की जानकारी मिलने पर एसपी अजय पाल शर्मा जागरण दफ्तर पहुंचे.

एसपी ने लापरवाही बरतने के कारण दो एसआई सतपाल और पंकज को लाइन हाजिर कर दिया है. पुलिस को मामले की तहरीर दे दी गई है. पुलिस ने सभी घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया है. हमलावरों का कहना है कि तस्वीर को गलत कैप्शन के साथ प्रकाशित किया गया है जिसके कारण लड़कियों की बदनामी हुई है. हमले के दौरान दैनिक जागरण शामली के ब्यूरो चीफ लोकेश पंडित सहित कई के साथ अभद्रता की गई और कपड़े फाड़ डाले गए. हमले का वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

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दैनिक जागरण को लगा झटका, रामजी के तबादले पर श्रम विभाग ने लगाई रोक

कानपुर। “स्वघोषित चैम्पियन” दैनिक जागरण के मालिकान को ताजा झटका कानपुर श्रम विभाग से मिला है। सहायक श्रम आयुक्त आरपी तिवारी ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुरूप वेतन एवं बकाये की मांग करने वाले दैनिक जागरण कानपुर में कार्यरत कर्मचारी रामजी मिश्रा के सिलीगुड़ी स्थानांतरण पर फिलहाल रोक लगा दी है। श्री तिवारी द्वारा जारी आदेश में दैनिक जागरण प्रबंधन की ओर से रामजी मिश्रा का कानपुर कार्यालय से सिलिगुड़ी किए गए तबादले को अनुचित एवं अवैधानिक करार दिया गया है।

गौरतलब है कि रामजी मिश्रा ने कानपुर श्रम विभाग में दिनांक 18 जुलाई 2017 को रिकवरी का क्लेम फाइल किया था। इससे झुब्ध होकर दैनिक जागरण के प्रबंधक ने दिनांक 24 जुलाई 2017 को रामजी का तबादला सिलीगुड़ी कर दिया था। इसके बाद रामजी ने तबादला निरस्त किए जाने की गुहार कानपुर श्रम विभाग में लगाई थी। बतातें चलें कि 19 जून 2017 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से देश के नंबर वन अखबार के मालिक सकते में आ गए थे।

कोर्ट के रुख और भविष्य की अड़चनों को सतही तौर पर ध्यान में रखते हुए मलिकान ने “कमजोर पेड़ों” को काटने की “सुपारी” प्रबंधक अजय सिंह को दे दी थी। इसके बाद अजय सिंह ने बेहद शातिराना अंदाज में उत्पीड़न करने के बाद 23 लोगों का तबादला कर दिया था। ये फैसला इन्हीं 23 कर्मचारियों में शामिल रामजी मिश्रा के मामले में आया है।

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दैनिक जागरण वालों ने भी छापा लंबा-चौड़ा माफीनामा : ‘नंबर वन का हमारा दावा गलत था’

अमर उजाला लखनऊ अखबार में पिछले दिनों एक माफीनामा छपा था कि हमने गलती से खुद को नंबर वन बता दिया. ऐसा ही माफीनामा अब दैनिक जागरण पटना अखबार में छपा है. नंबर वन होने के फर्जी दावों पर कसी गई नकेल के कारण इन अखबारों को माफीनामा छापना पड़ रहा है.

पढ़िए दैनिक जागरण पटना का माफीनामा…

अमर उजाला का माफीनामा पढ़ने के लिए नीचे दिए शीर्षक पर क्लिक करें :

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दैनिक जागरण ने मेरा पैसा नहीं दिया तो हाईकोर्ट जाऊंगा

पटना के बाढ़ अनुमंडल से दैनिक जागरण के पत्रकार सत्यनारायण चतुर्वेदी लिखते हैं-

मैं सत्यनारायण चतुर्वेदी दैनिक जागरण बिहार संस्करण के स्थापना व प्रकाशनकाल से बाढ़ अनुमण्डल से निष्ठा व ईमानदारी पूर्वक संवाद प्रेषण का कार्य करता रहा हूँ. नये सम्पादक जी के आने के कुछ ही महीने बाद वर्ष 2015 के अक्टूबर माह से अचानक मेरी खबरों के प्रकाशन पर रोक लगा दी गयी जो अब तक जारी है। इस बारे में मैंने रोक हटाने का निवेदन श्रीमान सम्पादक जी से किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

मेरा जून 2015 से अक्टूबर 2015 तक का पारिश्रमिक सहित सभी खर्च का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। दैनिक जागरण के महाप्रबंधक श्रीमान आनन्द त्रिपाठी जी भी स्थापना काल से हमें अच्छी तरह से जानते हैं। नये सम्पादक जी के यहां आने से पहले श्रीमान महाप्रबंधक जी एवं पूर्व के सम्पादक जी हर माह मुफस्सिल सम्वाददाताओं के साथ बैठक करते थे। पर नए सम्पादक जी के आने के बाद कोई बैठक नहीं हुई। मेरी खबरों के प्रकाशन पर से तत्काल रोक नहीं हटाई गयी और सरकार द्बारा निर्धारित पारिश्रमिक की भुगतान नहीं किया गया तो बाध्य होकर वाजिब हक पाने के लिये उच्च न्यायालय, पटना से गुहार लगायेंगे। मेरे जैसे कई पत्रकार पीड़ित हैं।

Satya Narayan
stnarayan00@gmail.com

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इन दोनों बड़े अखबारों में से कोई एक बहुत बड़ा झुट्ठा है, आप भी गेस करिए

हिंदुस्तान और दैनिक जागरण अखबारों ने एक रोज पहले पन्ने पर लीड न्यूज जो प्रकाशित की, उसके फैक्ट में जमीन-आसमान का अंतर था. हिंदुस्तान लिख रहा है कि यूपी में सड़कों के लिए केंद्र ने पचास हजार करोड़ रुपये का तोहफा दिया वहीं दैनिक जागरण बता रहा है कि सड़कों के लिए राज्य को दस हजार करोड़ रुपये मिलेंगे. आखिर दोनों में से कोई एक तो झूठ बोल रहा है.

आप भी गेस करिए, इन दो में से बड़ा वाला झुट्टा कौन है….

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हे जागरण वालों! फर्जी विज्ञापन के जरिये मीडियाकर्मियों का माखौल उड़ाना बंद करो

अक्टूबर 2015, अगस्त 2016, जनवरी 2017 और अभी मई 2017… इतने लम्बे समय से दैनिक जागरण विज्ञापन जारी करके मीडिया कर्मी ही ढूंढ रहा है। अरे भई साफ लिखो न कि हमको पत्रकार नहीं, मजदूर चाहिए जो न तनख़्वाह मांगे और न ही मजीठिया वेज बोर्ड। नौकरी के लिए जारी विज्ञापनों में दैनिक जागरण ने बायोडाटा भेजने के लिए पहले तो मेल आईडी hr@nda.jagran.com देता रहा, अब career@jagran.com पर रिज्यूम मांग रहा। लेकिन career@jagran.com पर कोई भी मेल सेंड नहीं कर पा रहा।

जागरण में प्रकाशित वो विज्ञापन जिसमें बायोडाटा भेजने के लिए जिस मेल आईडी का उल्लेख किया गया है, वह काम नहीं कर रहा. 

बहुत सारे लोगों ने जागरण के जाब वाले विज्ञापन में फर्जी मेल आईडी होने की शिकायत की है.

बहुत सारे लोगों ने शिकायत की है कि दैनिक जागरण ने मीडियाकर्मियों की भर्ती के लिए जिस मेल आईडी पर बायोडाटा मांगा है, वह काम नहीं कर रहा। इसे क्या समझा जाए। यह मीडियाकर्मियों से मजाक नहीं तो और क्या है। वैसे भी कहा जाता है कि जिस अखबार में डिजाईनर मजदूर भरे हों वहां टैलेंट की क्या जरूरत। इधर एक नई जानकारी भी सामने आई है कि खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का पैरोकार बताने वाला दैनिक जागरण अपने ही आफिस में दूसरी वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगा रखा है ताकि उसके इंप्लाई कहीं बागी न हो जाएं। दैनिक जागरण ऑफिसों में भड़ास4मीडिया डाट काम समेत कई वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाना दरअसल दैनिक जागरण के मालिकों और संपादकों की सामंती मानसिकता को दर्शाता है जो लेखन, विचार और समाचार के जिस पेशे में हैं, उसी पेशे पर कुठाराघात करने में जुटे हुए हैं।

फर्जी मेल आईडी देकर बेरोजगारों का माख़ौल उड़ाने वाला जागरण ग्रुप एक ओर तो छंटाई करने में जुटा है ताकि मजीठिया न देना पड़े, वहीं नए कर्मियों की भर्ती के लिए बेचैन दिख रहा है पर इसके लिए सही मेल आईडी तक नहीं दे पा रहा है। यह है देश के कथित सबसे बड़े अखबार का अलोकतांत्रिक और अराजक चेहरा।

आशीष चौकसे
पत्रकार एवं ब्लॉगर
ashishchouksey0019@gmail.com

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दैनिक जागरण आफिस में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम पढ़ना मना है!

अभिव्यक्ति की आजादी का झूठा ढिंढोरा पीटता है दैनिक जागरण… मीडिया वालों की खबर देने वाले पोर्टल भड़ास4मीडिया पर लगा रखा है प्रतिबंध… बड़े-बड़े लेखों और मंचों के जरिए दैनिक जागरण के संपादक-मालिक लोग हमेशा से आवाज उठाते रहते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी पर कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए. ये लोग अपने मीडिया कर्मचारियों को भी नसीहत देते हैं कि तथ्य के साथ बातों को रखा जाए, लोकतंत्र में हर खंभे को सम्मान दिया जाए. लेकिन वास्तविकता कुछ और भी है. आज उस समय बहुत बुरा फील हुआ जब पत्रकारिता जगत की खबर देने वाले पोर्टल भड़ास4मीडिया के बारे में पता चला कि इस पर दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ऑफिस में पूर्णत प्रतिबंधित लगाया हुआ है.

पत्रकारों के सुख-दुख की खबरों को देने वाले और मीडियाकर्मियों के हित की आवाज उठाने वाले भड़ास4मीडिया की आवाज को कुचलने का प्रयास अखबार मालिक हमेशा से करते आये हैं मगर अखबार मालिक ये क्यों नही जानते कि सभी पत्रकारों के पास आज कल टच स्क्रीन वाला मल्टी मीडिया फोन है, स्मार्ट फोन है, घर में लैपटाप है. आपने ऑफिस में भले ही भड़ास पर पाबंदी लगा दी है लेकिन पढ़ने वाला तो अपने मोबाइल में भी पढ़ लेगा.

लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ से जुड़े सभी लोगों को हर पहलू पर अपनी बात कहने का अधिकार होता है. स्वस्थ वातावरण का निर्माण तभी सम्भव है जब सबकी बात सुनी जाए. अगर बात संवैधानिक रूप से रखी जा रही है तो उसे सबको सुनना चाहिए. मगर यह पूर्णत: गलत है कि आप समाज में नारा तो लगाओ कि सभी को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन सामने वाले की आवाज को चुपचाप कुचल दो.. शायद इसे ही बोलते हैं मुंह में राम बगल में छूरी…. भड़ास4मीडिया पर से दैनिक जागरण प्रबंधन को पाबंदी हटानी चाहिए और उसे कोशिश करनी चाहिए कि वह अपने मीडियाकर्मियों को सभी कानूनी लाभ दे.

लेखक नवीन द्विवेदी गाजियाबाद के अखबार शिप्रा दर्पण के संपादक हैं. उनसे संपर्क 9910091121 या naveendwivedi.pimr@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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