ये भाषा है खुद को देश का सबसे बड़ा हिंदी अखबार बताने वाले भास्कर की

-गाली छापा, तो भास्कर रायपुर में दो लोगों की गई नौकरी, मची है खलबली

इन दिनों दैनिक भास्कर रायपुर में जबरदस्त खलबली मची है। एक तरफ दैनिक भास्कर, रायपुर में कोई ज्वाइन नहीं करना चाह रहा है, तो दूसरी तरफ यहां से लोग भी जाते जा रहे हैं। ताजा मामला तो काफी दिलचस्प है। यहां अखबार में अश्लील शब्दों के इस्तेमाल के कारण दो रिपोर्टरों की नौकरी चली गई है। सिटी भास्कर के इंचार्ज तन्मय अग्रवाल और एक रिपोर्टर के खिलाफ सीधे एमडी सुधीर अग्रवाल ने कार्र्वाई की  है। बताया जा रहा है कि 14 अक्टूबर शनिवार के सिटी भास्कर में भास्कर का ही एक आयोजन था, जिसमें यूट्यूबर भुवन को बुलाया गया था। वे अपने कार्यक्रम में यूथ के हिसाब से कुछ गंदे बोलचाल के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इन सारे शब्दों को भास्कर में जस का तस छाप दिया गया। ऊपर इसकी शिकायत पहुंची, तो इस पर सीधी कार्रवाई हुई और दोनों को टर्मिनेट करने का आर्डर जारी किया गया।

वास्तव में दबी जुबान में यह कहा जा है कि एमडी श्री सुधीर अग्रवाल जी ने जितनी आजादी पत्रकारिता करने के लिए दी है, यहां के लोग उसका उतना ही फ़ायदा उठा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से रायपुर दैनिक भास्कर में दो-तीन स्थानीय लोगों का वर्चस्व है। संपादकीय विभाग में सारे बड़े पदों पर ये लोग ही हैं। तो वो लोग मनमानी भी कर रहे हैं। अफसरों, मंत्रियों से इनके संबंधों और संबंधों के कारण खबरों के किस्से रायपुर में तो काफी चर्चित हैं। रायपुर का हर पत्रकार इनके बारे में जानता है। यहां खबरें दबाई जाती हैं और उठाई भी जाती हैं, लेकिन पत्रकारिता के कारण नहीं, संबंधों को देखकर। आरोप तो और भी बड़े बड़े हैं, लेकिन बोलेगा कौन? और सुनेगा कौन? भास्कर रायपुर में भी सब इसके बारे में जानते हैं, लेकिन बोलता कोई नहीं। खैर, नीचे उस दिन के अखबार की कटिंग को पढ़िए और देखिए कि आखिर भास्कर ने क्या छापा था, जिसके कारण श्री सुधीर अग्रवाल को रिपोर्तरों को टर्मिनेट करना पड़ा।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक भास्कर में ये क्या छप गया! गई दो पत्रकारों की नौकरी

हैडिंग में कोई शायरी नहीं है। बल्कि हकीकत है दैनिक भास्कर के रायपुर एडिशन की। आनंद पांडे जी के जाने के बाद जब से शिव दुबे को रायपुर भास्कर का संपादक बनाया गया है। भास्कर की छीछालेदर होती जा रही है। ताजा उदाहरण है कि 14 अक्टूबर के सिटी भास्कर में खबर में ऐसे शब्द शामिल हैं जिन पर कड़ी आपत्ति आते ही 2 कर्मियों तन्मय अग्रवाल और सुमन पांडे की विदाई कर दी गई है।

दरअसल गलती खबर बनाने वालों की नहीं है क्योंकि उन्हें तजुर्बा ही नहीं… उन्हें पता ही नहीं कि किसी ने अपने किरदार का नाम “गाली” रखा हो तो उसे घुमाकर परोसा जाता है। उन्होंने तो सीधे-सीधे किरदारों के नाम लिखकर छाप दिए थे। अब हुआ यूं कि जब ऊपर से शिव दुबे की सिंकाई हुई तो उसने दोनों कर्मियों को तत्काल रिलीव कर दिया।

अंदर की बात यह है कि तन्मय अग्रवाल, शिव दुबे का खास बन्दा था। दुबे को पता था सिटी भास्कर को निकालने और पब्लिक के टेस्ट को पकड़ने का हुनर उसके किसी और खास आदमी में नहीं है। इसीलिए उसने तन्मय को सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर भास्कर से जाने नहीं दिया था। लेकिन जब माई बाप से प्रेशर पड़ा तो उसी ने तन्मय की विदाई कर दी। वैसे यह वही शिव दुबे हैं जो सन्डे के दिन IIT का रिजल्ट डिक्लेयर होने की खबर बनवा रहा था जिसे मैंने रुकवाया था। क्योंकि सन्डे को एग्जाम तो कंडक्ट हो सकते हैं लेकिन रिजल्ट डिक्लेयर नहीं हुआ करते।

नमूनों से भरी है नई टीम

24 अक्टूबर के रायपुर सिटी भास्कर के फ्रंट पेज की लीड खबर में ट्रांसपेरेंट शब्द की बजाय “न्यूड” का बारबार इस्तेमाल किया गया है। अब जाहिर सी बात है ट्रेनी पत्रकारों को या नौसिखियों को कम तनख्वा देकर बिठाओगे तो यही सब तो पढ़ने मिलेगा।

आशीष चौकसे
पत्रकार और ब्लॉगर
ashishchouksey0019@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

फागुन में गाली के रंग अनेक…

प्रवीण कुमार सिंह

‘गाली के जवाब में गोली चल जाती है।’ ये पान सिंह तोमर में इरफान खान बोलते हैं। एक और पुरानी कहावत है कि बोली पर गोली चल जाती है। बोली कोई भी हो। वो बिना गाली के नहीं हो सकती है। जैसें बोली से पता चलता है। कि इंसान सभ्य है कि असभ्य है। पढ़ा-लिखा है कि बिना पढ़ा-लिखा है। ये वर्गीय विभाजन गाली में भी है। पढ़ा लिखा षुद्ध भाषा में गाली देगा। जबकि बिना पढ़ा-लिखा बेचारा ठेठ देसज अंदाज में गाली देता है।

बेचारी गालियां भी समाज के भेदभाव और ऊॅंच-नीच से बच नहीं पाई। इनको कई प्रकार और कई श्रेणियों में बांट दिया गया हैं। विद्वान और साहित्यकार लोग किसी को गाली देंगे तो महामूर्ख असाहित्यक निरक्षर और लिखा-पढ़ा बोलेंगे। वो बंदा समझ नहीं पायेगा कि गाली दे रहें हैं कि अपुन की तारीफ कर रहे हैं। और साहित्यकार साहब अपने भड़ास की ज्वालामुखी शान्त कर लिये।

कम्युनिस्ट गाली में बुर्जवा, प्रतिक्रियावादी, फासिस्ट, साम्राज्यवादी की उपाधि देते हैं। गाली खाने वाले को समझ में नहीं आये़गा कि ये गाली है कि भौतिकवादी दर्शन। हो सकता है वो बेचारा गाली का अर्थ समझते-समझते। अपना दिमाग खो बैठे। दक्षिणपंथी गाली में विरोधी को हिन्दू विरोधी, राष्ट्रद्रोही, राष्ट्र के कलंक बताते हैं। गाली खाने वाले के पल्ले नहीं पड़ता कि इस सर्टिफिकेट का करें क्या। राजनीति के नवेले प्लेयर केजरीवाल की गालियां तो सुपरहिट हैं। उनका साहित्य और सिनेमा में बकायदा प्रयोग किया जा रहा है। नरेन्द्र भाई की गाली में काशी में किये पावन गंगा स्नान की यादें और रस भरी बातें हैं।‘‘ ..कि बचवा रेनकोट पहन के न नहाऔं, अउर एक्के डुबकी लगायो।’’ वैसे काशी शिव की नगरी के अलावा ठेठ गाली के लिए भी जगत प्रसिद्ध है। विश्वास न हो तो ‘काशी की अस्सी’ पढ़ लीजिये।

अगर गाली का रस लेना है तो कद्रान अवध पधारिये। मियां नज़ाकत और नफ़ासत से गाली देते हैं। सुनने वाले को समझ नहीं आयेगा कि गाली खा रहा है कि पान की गिलौरियॉं।

धर्मक्षेत्र-कुरूक्षेत्र हरियाणा में आजकल गाली राष्ट्रवादी परिधान में दी जाती है। पड़ोसी साढ़ा पंजाब में गाली लस्सी के साथ मिक्स हो गई है। साढ़ा विच कुछ मजा सजा नहीं आता है।

चाहे गाली ठेठ हो या भदेष वालीवुड उसे राष्ट्रव्यापी बना देता है। बच्चा भी स्टाईल में गाली देने लगता है। फिल्मों ने तो निरीह पालतू कुत्ते को भी नहीं छोड़ा सरेबाजार उसे कमीना बना दिया। कुत्तो के लिए दिल जान एक करने वाले कुत्ता भक्त भी इसका विरोध नहीं करते कि ‘मेरे कुत्ते को गाली मत दो’। पशु चिंतक मेनका गांधी ने भी इनके लिए अवाज नहीं उठायी।

कृश्न चंदर का बोलने वाला प्यारा गधा (एक गधे की आत्मकथा) शान्त है। उस बेचारे के साथ नस्लीय भेदभाव किया जा रहा है। और समुद्री गधे को इज्जत बक्षा जा रहा है। अब गधा बोलना सम्मान की बात हो गई है।

गाली का सबसे ज्यादा महत्व होली में है। होली में रंग-गुलाल के साथ गाली फ्री दी जाती है। ब्रज के राधा-कृष्ण की होली मषहूर है। पर ये पता नहीं चलता कि कृष्णकाल में रंग के साथ-साथ सब ग्वाल-बाल गाली भी देते थे कि नहीं। या फिर कलयुग में भक्तगण ने रंग के साथ भंग और गाली का श्रीगणेश किया।

हमारे यहां शादी में गाली न हो तो वो शादी नहीं बर्बादी लगती है। पैसा देकर चाव से गाली सुनी जाती है। वधू की विदाई से पहले खिचड़ी-खवाई में तो दूल्हे राजा के फूफी, दीदी, चाची और मामा की एैसी की तैसी हो जाती है।

गाली की अपनी शैली और अपना अंदाज है। गाली पर कोई इतिहासविद्, शोधार्थी, साहित्यकार ने काम नहीं किया। लेकिन गाली सर्वव्यापी है। हर मनुष्य बोलता है और हर जगह बोली जाती है। गाली का अपना सौंदर्य शास्त्र और रस है। कुछ धुरन्धर बोली कम गाली ज्यादा देते हैं। गाली उनके लिए तकिया कलाम है। अगर उनकी गाली बंद करा दिया जाय तो श्वास रूक जायेगी। शायद परलोक भी सिधार जायं। गाली का अर्थ भी अनेका-अनेक है।

जीजा साला को गाली न दे तो साला अपने को दुलारा नहीं समझता। भाभी देवर को गाली न दे तो देवर बेचारा अपने को किस्मत का मारा समझता है। करमजले जीजा तो अपनी सालियों पर आधी घरवाली का अधिकार जताते रहते हैं। पर साली बेचारी खूसट जीजी का ताना बर्दाश्त करने के अलावा क्या कर सकती है। बाई द वे अगर उनके प्रापर्टी पर आधा अधिकार जताने लगे, तो जीजा झट से दलबदल कर भाई बन जाते हैं।

हम गाली में दूसरे की मां-बहन एक देते हैं। बाप की गाली नहीं होती है। होली के रंग-बिरंगें गीतो में महिलाओं की चुनरी गिराने व उठाने वाले वाले मनोज तिवारी ‘मृदुल’ का हृदय फागुन की बयार से एकाएक बदल गया। वो संसद में महिलाओं के सच्चे पैरोकार बन गये हैं। दिलफेक आशिक भी इनके मधुर गीत गाने-गुनगुनाने में शर्म करने लगे हैं। 

महिला एक्टविस्टो ने बोला है कि हम ही गाली क्यों सुनें बाप-भाई भी सुनें। बात भी बिल्कुल सही है। महिलाओं का गाली सुनने का आरक्षण थोड़े है। भाई, सम्हल जाओ महिलायें जाग उठी हैं। अब की फागुन में बाप-भाई को गाली दी जयेगी। महिलायें सुनकर खुशियां मनायेंगी तो क्या इससे महिला मुक्ति का सपना साकार हो उठेगा?

Pravin Kumar Singh
E 20, Jawahar park (First Floor)
Laxmi Nagar
Delhi- 110092
Tel: 9968599320, 9455146238

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अतुल अग्रवाल फिर सुर्खियों में, अबकी उन्हीं के वेब चैनल के पत्रकार ने दी जमकर गालियां (सुनें टेप)

अतुल अग्रवाल अपने कर्मों से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. ताजा मामला ठगी और गाली खाने का है. अपने वेब न्यूज चैनल हिंदी खबर में अतुल अग्रवाल ने यूपी का स्थानीय संपादक अमितेश श्रीवास्तव को बनाया था. अमितेश ने अतुल के कहने पर पैसे भी चैनल में लगाए. अतुल अग्रवाल की फितरत है कि वह इस्तेमाल करने के बाद आदमी को किनारे कर देते हैं और दूसरे को पकड़ लेते हैं. इसी क्रम में उन्होंने आजतक चैनल से निकाले गए अनूप श्रीवास्तव को हिंदी खबर यूपी का स्थानीय संपादक बना दिया और अमितेश को साइ़डलाइन कर दिया.

जो अमितेश कभी ‘समाचार प्लस’ न्यूज चैनल में ठीकठाक हैसियत में हुआ करते थे, अतुल अग्रवाल के कहने पर उनके नए चैनल में आए और तन मन धन से काम किया. लेकिन जब अतुल ने अमितेश के साथ ठगी, धोखाधड़ी और विश्वासघात कर दिया तो अमितेश आग बबूला हो गए. उन्होंने अतुल अग्रवाल को जमकर गालियां दी. इस पूरे टेप में खास बात है दो पत्रकारों की गाली-गलौज की भाषा.

बात तो सामान्य और शिष्ट तरीके से भी हो सकती है लेकिन हिंदी पट्टी के सामंती चेतना वाले पत्रकार या तो पैर पूजन जानते हैं या फिर माकानाका करना. बीच में रेशनल / डेमोक्रेटिक होकर जीना बतियाना कतई नहीं जानते. अतुल अग्रवाल पर हिंदी खबर चैनल चलाने के दौरान कई किस्म के आरोप कई लोगों ने लगाए जिसमें उगाही से लेकर सेक्सुअल एब्यूज तक के मामले हैं. माना जा रहा है कि अमितेश श्रीवास्तव अब उमेश कुमार और प्रवीण साहनी वाले चैनल समाचार प्लस में लौट सकते हैं, यह इन टेपों में बातचीत से भी जाहिर है. फिलहाल तो ये गालीगलौज भरा टेप सुनिए. नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें :

पार्ट 1

https://www.youtube.com/watch?v=CsCrWsxR6uw

पार्ट 2

https://www.youtube.com/watch?v=vQG1_JOUoGg

अतुल अग्रवाल के बारे में ज्यादा जानने के लिए इसे भी पढ़ सकते हैं…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

यूपी में मंत्री ने अफसर को दी मां-बहन की गालियां (सुनें टेप)

यूपी में समाजवार्दी पार्टी की सरकार के मंत्री बेलगाम हैं और पूरा जंगलराज कायम कर रखा है. अखिलेश यादव अपनी इमेज के सहारे इलेक्शन जीतने की तैयारी में लगे हैं लेकिन उनके मंत्री उनकी लुटिया डुबाने के लिए कमर कसे हैं. तभी तो आए दिन मंत्रियों के कारनामों की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है. ताजा मामला सपा सरकार के एक राज्यमंत्री की दबंगई का है.

खबर है कि एक राज्यमंत्री ने कुशीनगर में जिला पंचायत के ठेके के बंटवारे को लेकर अपर मुख्य अधिकारी (जिला पंचायत) को माँ-बहन की खूब गालियां दी. इस गालीबाजी से संबंधित आडियो सामने आया है. यह आडियो जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी के मोबाइल में रिकार्ड हुआ. इसमें चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री राधेश्याम सिंह जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी उमेश पटेल को भद्दी-भद्दी गाली दे रहे हैं. डर के चलते अपर मुख्य अधिकारी पूरे मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं. आडियो सुनने के लिए नीचे दिए गए यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें :

https://youtu.be/z5bCZ0J3gjU

कुशीनगर से शकील अहमद की रिपोर्ट.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

ताजमहल देखने गई एक रइसजादी ने दी मां-बहिन की गंदी-गंदी गालियां (देखें वीडियो)

Are you safe in TajMahal? see this video आगरा में एक बार फिर से शराब के नशे में धुत शराबी पर्यटकों ने ताजमहल की सुरक्षा में सेंध लगाते हुए ताजमहल के पश्चिमी गेट को तोड़ते हुए अपनी गांड़ी के अंदर ले गए..पर्यटकों की इस दुस्साहिक कदम से रोकने में तैनात ताज सुरक्षा के सिपाहियों की पर्यटकों ने लात घूसों से जमकर पिटाई कर दी…

दिल्ली के रहने वाले चार पर्यटकों में दो लड़के और दो लड़कियां ताजमहल के प्रतिबंधित क्षेत्र में शराब के नशे में धुत होकर गाड़ी के साथ बैरियर तोड़ते हुए अंदर प्रवेश कर गए… ताज सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के रोकने पर चारों पर्यटकों ने ताज सुरक्षा के सिपाहियों को जमकर पीटना शुरू कर दिया…

इस दौरान एक लड़की ने पूरी ताज सुरक्षा को धता बताते हुए पुलिसकर्मियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धमकी देते हुए जमकर गाली गलौज किया… वहीं इस महिला के साथ आए दो लड़कों ने सिपाहियों को लात घूसों से पीटना शुरू कर दिया…

सुरक्षा के लिहाज से संवेदशील माने जाने वाले पश्चिमी गेट पर पुलिसकर्मियों को चार पर्यटकों ने जमकर पीटा.. इसको देखने के बाद ताजमहल की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है… फिलहाल पुलिस सभी पर्यटकों को हिरासत में लेकर ताजगंज थाने ले आई है.

वीडियो देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=PRnWPPTlrQc

आगरा से syed shakeel की रिपोर्ट.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

रवीश ने गाली देने वाले से पूछा- क्या तुम ऐसे सवाल अपनी मां से कर लेते हो?

अरविंद, आपने पूछा है कि क्या मेरी मां चाचा के साथ सोई थी। क्या तुम ऐसे सवाल अपनी मां से कर लेते हो?  किस घर्मग्रंथ से तुमने ऐसे सवालों की प्रेरणा पाई है मेरे मित्र। मेरी मां देवी हो या न हो, वो मां है इसीलिए मेरी नज़र कभी उसके सामने उठ भी नहीं सकती। वैसे भी मेरी मां तो भारत माता है। दोस्त मैं माफी चाहता हूं। मैं अपनी भारत माता से ये सवाल नहीं कर सकता। वैसे तुम लोगों की हिन्दी भी बहुत ख़राब है। आप जिस विचारधारा के गुप्त गुंडे हैं, आप भारत माता का अपमान कर सकते हैं लेकिन मैं नहीं कर सकता क्योंकि इससे तो उन शहीदों का अपमान हो जाएगा जिन्होंने भारत माता के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। गुप्त गुंडे इसलिए कहा कि आप ये ट्वीट न तो अपनी बहन को दिखा सकते हैं, न अपनी मां को या पत्नी को। ज़ाहिर है आप कभी सामने नहीं आएंगे। आप अपने पिता को भी नहीं दिखा सकते।

मित्र पता है मुझे लगता है कि कोई तुम्हें ब्लैक मेल कर रहा है। अभी तुमसे मुझे गाली दिलवा रहा है। एक दिन वो तुमसे कहेगा कि अब तुम अपनी मां को गाली दो नहीं तो पूरी दुनिया को बता देगा कि तुम्हीं हो जिसने रवीश कुमार की मां को गाली दी थी। ये जिस भी आई डी से, जिस भी संगठन के आई टी सेल से तुमने ये गाली लिखी है वो उसके रिकार्ड में है। वहां कोई सी सी टी वी कैमरा भी होगा। इसलिए मुझे तुम्हारी चिन्ता हो रही है। क्योंकि मुझे पता है कि तुम जब मेरी मां से मिलोगे तो तुरंत पांव छू लोगे। हम और तुम जिस धर्म परंपरा से आते हैं उसमें इतना तो सीख ही लेते हैं। मैं भी तुम्हारी मां के पैर ही छुऊंगा। वैसे मेरी मां रोज़ तुलसी की पूजा करती है। साल में अनगिनत व्रत रखती है। सूरज को जल चढ़ाती है। मैं उसे तीर्थ यात्राओं पर भी ले जाता हूं। तुम्हारी मां भी यही करती होगी। नहीं भी करती होंगी तो कोई बात नहीं। ईश्वर तो दिल में होता है। पर हम तो पत्थर को भी भगवान मानते हैं और तुम इतने पत्थर हो गए कि मेरी मां को क्या क्या कह गए। कोई बात नहीं। मैं तुम्हारे भीतर मौजूद वैचारिक पत्थर को भगवान मानता हूं। उसे पूजना चाहूंगा। जल चढ़ाना चाहूंगा। मैं अपनी मां से कहूंगा कि अरविंद अच्छा लड़का है। उसे अपना ही बेटा समझ कर माफ कर देना। मैंने कहां और कब हिन्दुओं के खिलाफ ज़हर उगला है एक प्रमाण तो दे दो। इस तरह की बातें लिखकर, व्हाट्स अप पर फैला कर आप हिन्दू धर्म को उसी तरह बदनाम कर रहे हैं जिस तरह आतंक की राह पर जाकर, आईसीस की तरफ जाकर कई लोग इस्लाम को बदनाम कर चुके हैं। माल्दा में जिन गुंडों ने यह हरकत की है उन्होंने कोई शान नहीं बढ़ाई है। मैं उस घटना पर भी लिखूंगा। मैं तुम्हारे लिए लिखूंगा क्योंकि मुझे पता है कि तुम दादरी की हकीकत के लिए कितने बेचैन थे। तुमने इखलाक के हत्यारों को सज़ा दिलवाने के लिए कैसे दिन रात एक कर दी थी।

इस तरह के कई मैसेज आए हैं । जिनके हिसाब से मैं पठानकोट हमले की रिपोर्टिंग कर रहा हूं। आप सब जानते हैं कि मैं छुट्टी पर हूं। मैं कैसे आतंकवादियों की मदद के लिए संवेदनशील सूचनाएं दे सकता हूं। इस तरह के अफवाह व्हाट्स अप पर फैला रहे हैं। असलियत यह है कि किसी भी चैनल ने लाइव रिपोर्टिंग नहीं की है। मैंने पठानकोट आपरेशन को असफल साबित करने का कोई प्रयास नहीं किया है। कई लोग कह रहे हैं कि असफल ही है। सेना के भी लोग कह रहे हैं। क्या सवाल उठाने वाले पूर्व सैनिक अधिकारी भी आतंकवादियों की मदद कर रहे हैं।

इस मैसेज के हिसाब से मैंने कहा है कि सैनिक कार्रवाई में मारे गए लोगों को आतंकवादी कहना गलत है। हद है। जब मैं छुट्टी पर हूं तो कब कह दी ऐसी बात। और मैं आतंकवादी को क्यों न आतंकवादी कहूंगा। वैसे प्रधानमंत्री ने मानवता के दुश्मन कहा है। इंडिया युनाइटेड नाम से भेजे गए इस मैसेज में कहा गया है कि मैंने ऐसा कह कर शहीदों का अपमान कर दिया है।

इसे भी पढ़ें>

नवभारत टाइम्स ने रवीश कुमार पर बनाया घटिया चुटकुला, पढ़िए रवीश की प्रतिक्रिया

क्या आपको भी व्हाट्स अप पर मुझे लेकर अफवाहें, लतीफे और गालियों वाले मैसेज मिल रहे हैं। क्या आपने इन गालियों को भेजने वाले की राजनीतिक और वैचारिक सोच के बारे में पता किया है ? अगर आप महिला हैं, लड़की हैं तो ऐसे गाली देने वालों से सावधान रहिएगा। इनकी प्रोफाइल नकली हो सकती है मगर कोई लिखने वाला तो होगा ही। किसी जगह से जुड़ा होगा। इनकी सोच नकली नहीं है। आपकी आज़ादी पर हमला न हो इसलिए आप लड़कियों के लिए ये पोस्ट लिखा है।

असहमतियाँ हो सकती हैं लेकिन गालियों और धमकियों की प्रवृत्ति दिन ब दिन घिनौनी होती जा रही है । इन्हें नोटिस में लाना जरूरी है । मुझसे असहमत होने वाले भी जान सकेंगे कि इस तरह सीमा पार कर जाने के बारे में उन्होंने भी नहीं सोचा होगा। मैं इन्हें भाव नहीं देता लेकिन हमारी राजनीति और समाज में असहमति के इस रूप को लेकर हम इतने सहज कैसे होते जा रहे हैं । इस बीमारी को रोकिये । कोई हमारे लोकतंत्र को बीमार कर रहा है।

मित्रों, हम किसके लिए सनक रहे हैं। क्या इस देश में बहुत सारे अच्छे और सस्ते अस्पताल बन गए हैं, क्या सरकारी स्कूलो की हालत इतनी बेहतर हो गई है वहां एडमिशन के लिए लोग मार कर रहे हैं, क्या सबको नौकरी मिल गई है। क्या दवाएं सस्ती हो गईं हैं, क्या सबके पेंशन का इंतज़ाम हो गया है, । प्लीज आई टी सेल में बर्बाद हो रहे हमारे नौजवानों को बचा लीजिए । इन लड़कों का कोई क़सूर नहीं है । कोई इन्हें अपने हित में जला रहा है । मैंने उन्हें बचाने के लिए लिखा है । अपनी माँ के लिए नहीं, भारत मां के बेटों के लिए लिखा है । जय माँ भारती, जय हिन्द ।

जाने माने पत्रकार रवीश कुमार के ब्लाग कस्बा से साभार.

इसे भी पढ़ें>

गाली देने वाले को रवीश ने समझाया- ….इसलिए कभी किसी को रंडी मत कहना

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

गाली देने वाले को रवीश ने यूं समझाया


मैं भारत माता की संतान हूं। अगर मेरी मां भारत माता नहीं है तो फिर कोई भारत माता नहीं है। फिर कोई मां पूजे जाने के लायक नहीं है। मैंने हमेशा भारत माता को अपनी माता समझा है और अपनी मां में भारत माता देखी है। क्या हम सभी सौ फीसदी माँ भारती की औलाद नहीं हैं? सवाल मेरी मां का भी नहीं है। सवाल उन तमाम मांओं का है जिनके आगे बड़े बड़े नेता देवी कह कह कर गिड़गिड़ाते हैं और बाद में अपने वैचारिक समर्थकों से उन्हीं देवियो को किसी न किसी बहाने गाली पड़वाते हैं। गाली देने वाले की प्रोफाइल गलत हो सकती है मगर नकली नाम के पीछे किसी असली आदमी ने ही तो लिखा होगा। उसकी कुछ सोच होगी। वो किसी संगठन के लिए काम करता होगा। उसकी भलाई चाहता होगा। क्या उस संगठन में मांओं की यही इज़्ज़त है। अगर आप इस प्रवृत्ति को अब भी नहीं समझे और सतर्क नहीं हुए तो बहुत देर हो जाएगी। आखिर कौन लोग हैं जो पिछले कुछ दिनों धड़ाधड़ गालियां दिये जा रहे हैं। Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

खबर छपने से बौराए फर्रूखाबाद के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चंद्र मिश्रा ने पत्रकार आनंद भान शाक्य को दी जमकर गालियां (सुनें टेप)

: गुंडों को लेकर रात में पत्रकार के घर पर बोला धावा : यूपी के जंगल राज में सबसे ज्यादा बेलगाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हैं. भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने बारिश में बिना वाइपर लगे बस चलाने की लिखित शिकायत गाजीपुर जिले में पदस्थ रोडवेज अधिकारी से की तो अधिकारी ने बदतमीजी करते हुए अपने नेतृत्व में रोडवेजकर्मियों के साथ हमला बोल दिया. इस मामले में अधिकारी के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर 36 घंटे बाद तब दर्ज की जब लखनऊ से एफआईआर दर्ज किए जाने के लिए दबाव डलवाया गया. यह मामला अभी पुराना भी नहीं पड़ा था कि यूपी के फर्रूखाबाद जिले से एक नया मामला सामने आ गया है. यहां के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चंद्र मिश्रा ने एक पत्रकार को फोन कर धाराप्रवाह गंदी गंदी गालियां दीं.

अखिलेश यादव का यह बेलगाम अधिकारी फोन कर पत्रकार को धमकाता है और फिर गंदी गालियां देता है. टेप सुनेंगे तो कहेंगे कि ऐसी गाली तो कोई नशेड़ी ही दे सकता है जिसे होश न हो कि वह किससे क्या बात क रहा है. जनपद फर्रूखाबाद के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चन्द्र मिश्रा को डीएम ने बीते दिनों पंचायत चुनाव के मतगणना के दौरान मीडिया कर्मियों के सामने जमकर हड़काया था और एफआईआर कराने व जेल भेजने तक की चेतावनी देते हुए कार्यालय में उपस्थित होने को कहा था.

डीएम ने यह निर्देश तब दिया जब उनसे मीडिया कर्मियों ने रुपये लेकर पत्रकारों को पास दिये जाने की शिकायत की थी. इस खबर को एक स्थानीय वेब पोर्टल एफबीडी न्यूज ने चलाया. इसी बात पर गुस्साये पूरन चन्द्र मिश्रा ने अपने मोबाइल नम्बर 9453005387 से बेब पोर्टल के सम्पादक आनंद भान शाक्य को रात 9.49 बजे फोन कर 1.04 मिनट तक धमकाते हुए गंदी गंदी गालियां दीं. वे पत्रकार की एक बात नहीं सुन रहे थे.

दबंग अधिकारी का इतने से भी मन नहीं भरा तो वह अपने 4 गुंडों के साथ रात 10 बजे सम्पादक के आवास पर भी पहुंच गया और यह कहकर दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया कि बाहर निकलो तो मैं तुम्हे खबर छापने का नतीजा दे दूं. उसने जान से मारने तक की धमकी दी. पुलिस ने अधिकारी का मामला होने के कारण रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया.  एएसपी ने भी यह कहकर रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया कि वह मामले की पहले सीओ सिटी से जांच करायेंगे. एफबीडी न्यूज के सम्पादक ने बीते माह ही डीएम से सूचनाधिकारी की लिखित व मौखिक शिकायत की थी कि वह प्रेस नोट उपलब्ध नहीं कराते.

सुनें गालियों वाला टेप :

https://www.youtube.com/watch?v=JqWvgbigVqg


इसे भी पढ़ें>> 

यशवंत पर हमले की कहानी, उन्हीं की जुबानी ( देखें सुनें संबंधित आडियो, वीडियो और तस्वीरें )

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

श्रुति सेठ, कविता कृष्णन, शर्मिला टैगोर, शोभा डे आदि को रंडी, वेश्या, चरित्रहीन कहने वाले ये लोग कौन हैं?

Krishna Kant : भारतीय सवर्ण मर्द के पास महिला की बात का जवाब नहीं होता तो तुरंत चरित्र हनन पर उतर आता है. यह पाखंडी समाज है इसलिए किसी का भी चरित्र हनन बहुत कारगर हथियार है. प्राय: पति जब पत्नी से हारता है तो लांछन लगा देता है. कोई किसी से हारता है तो उसके चरित्र पर कीचड़ उचाल देता है. सोशल मीडिया पर महिलाओं को गालियां देने वाले कौन लोग हैं?

श्रुति सेठ, कविता कृष्णन, शर्मिला टैगोर, शोभा डे… आदि को लेकर चारित्रिक अभियान चलाने वाले कौन लोग हैं? ये ऐसे गिरे हुए गलीज संस्कारी हैं कि यदि सुषमा स्वराज भी मोदी या संघ पर उंगली उठा दें तो ये लोग उन जैसी भद्र महिला के साथ भी यही करेंगे. सोनिया गांधी को लेकर अश्लील चुटकुले पिछले कुछ सालों में खूब मजे लेकर शेयर किए गए. गांधी और नेहरू की फोटोशाप्‍ड पिक्‍चर पर इन सिपाहियों ने बड़ी मेहनत की है.

इनकी खासियत देखिए कि ये माताओं बहनों की इज्जत के लिए ही जीते हैं. स्वनामधन्य संस्कारवान होते हैं. ईश्‍वर में जान देने की हद तक भरोसा है. गोमूत्र तक का अपमान नहीं सह सकते. उस संगठन के समर्थक हैं जो 90 साल तक मेहनत करके इनका चरित्र निर्माण कर पाया है. ये भारत मां की अस्मिता के रखवाले हैं. देवी की पूजा करते हैं. गाय माता के लिए सर काटने और कटाने के लिए तैयार हैं.

दलितों, महिलाओं, मुसलमानों से घृणा करने वाले लोगों में एक खास समानता है कि वे सवर्ण हिंदू हैं और आरएसएस समर्थक हैं. ये खास लोगों की खास प्रवृत्ति है जिसके मूल में वर्णव्‍यवस्‍था है. वह वर्णव्‍यवस्‍था जहां दलित और महिलाएं अछूत हैं, कमतर हैं. मुसलमान म्‍लेच्‍छ है. जहां भी स्त्रियों की असहमति का सामना हो, उन्‍हें रंडी बता देते हैं. कुछ नमूने उपर और नीचे दिए गए हैं, देखें.

युवा पत्रकार कृष्णकांत के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

थानवी ने कहा – गाली देकर केजरीवाल ने खुद को छोटा कर लिया, योगेंद्र का धरना खत्म, आप की हंगामी मीटिंग शुरू

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने अपने फेसबुक वॉल पर आज लिखा कि.. ‘माना कि गुस्सा आ सकता है, पर आपसी गलतफहमियां लगता है चरम पर पहुँच गईं। दोनों खेमे जरूर कहीं न कहीं सीमाएं लांघ गए होंगे, पर उन्हें निपटा कर पार्टी को लाइन पर ले आना ही नेतृत्व की सफलता होता।

 

‘बहरहाल कोई गाली सहज या संसदीय है या नहीं, यह मुद्दा नहीं है; दरअसल स्वराज की बात के साथ यह भाषा सुहाती नहीं; इसलिए मेरी तरह बहुत मानते होंगे (शायद उनके मित्र और शुभेच्छु भी) कि इससे अरविन्द ने खुद को कुछ छोटा किया है। अपनी भाषा और बरताव की फिसलन मान लेते, तब भी भला था। समस्या से खुद दो-चार होते, प्यादों के जरिए नहीं। पर असल समस्या अहंकार की है, जिससे दूसरों को आगाह करना आसान है, खुद निर्वाह करना मुश्किल।

‘अगर सर्वोच्च नेता के नाते अरविन्द अपनी देर से सुधारते भी हैं तो उसका क्या लाभ होगा? स्टिंग क्यों किया या दिखाया गया, यह उतना अहम नहीं; राजनीति में यह धंधा सदा चलता रहेगा। अच्छी सरकार चलाना एक बात है, पार्टी अच्छे से चलाना दूसरी – ‘अच्छे से’ में दुश्मनों, षड्यंत्रकारियों से निपटने के लिए भी कुछ नए तरीके खोजने-आजमाने होते हैं। यह भाषा, ये तरीके बहुत बोदे हैं। सब ऐसा करते हैं कहने से काम नहीं चलेगा। ‘आप’ को अलग कैसे जाहिर और साबित करेंगे – निरंतर कसौटी यह है। यह टूट कोई सबक देगी या मौजूदा तौर-तरीकों के बीच सिलसिला बन जाएगी? वक्त बताएगा।’

उधर, आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की दिल्ली में बैठक शुरू हो चुकी है। इससे पहले बैठक स्थल के बाहर पार्टी के नेता योगेंद्र यादव के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी और धक्कामुक्की हुई। वहीं योगेंद्र यादव धरने पर बैठ गए। बाद में धरना ख़त्म कर वह बैठक में शामिल होने चले गए। वह यह कहते हुए धरने पर बैठे थे कि जब तक उन सब लोगों को राष्ट्रीय परिषद की बैठक में जाने नहीं दिया जाता जिनके पास न्योता है, तब तक वह धरने पर रहेंगे।

योगेंद्र ने अपने ट्विटर पर पार्टी के लोकपाल एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल रामदास की एक चिट्ठी डाली है, जिसमें रामदास ने कहा है कि उन्हें बैठक में आने से मना कर दिया गया है। रामदास बैठक में हिस्सा लेने के लिए महाराष्ट्र से दिल्ली आए हैं।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अगर ‘चूतिया’, ‘हरामी’ और ‘हरामखोर’ जैसी गालियां इस्तेमाल करते हैं तो आप दलित-ओबीसी विरोधी हैं!

Pramod Ranjan : आप अपने विरोधियों के लिए किस प्रकार की गालियों का इस्‍तेमाल करते हैं? ‘हंस’ के संपादक राजेंद्र यादव व अनेक स्‍त्रीवादी इस मसले को उठाते रहे हैं कि अधिकांश गालियां स्‍त्री यौनांग से संबंधित हैं। पुरूष एक-दूसरे को गाली देते हैं, लेकिन वे वास्‍तव में स्‍त्री को अपमानित करते हैं। लेकिन जो इनसे बची हुई गालियां हैं, वे क्‍या हैं? ‘चूतिया’, ‘हरामी’, ‘हरामखोर’..आदि। क्‍या आप जानते हैं कि ये भारत की दलित, ओबीसी जातियों के नाम हैं या उन नामों से बनाये गये शब्‍द हैं। इनमें से अनेक मुसलमानों की जातियां हैं।

आप कितनी आसानी से कह देते हैं – ‘चोरी-चमारी’ मत करो। यह कहते हुए आप ‘चोरी’ को एक जाति विशेष से जोड देते हैं। ‘चूतिया’ जाति मुख्‍य रूप से आसाम की है। हलालखोर/ हरामखोर बिहार की जाति है। यहां देखिए असम की ओबीसी सेंट्रल लिस्‍ट में ‘चूतिया जाति’ का नाम : http://ncbc.nic.in/Writereaddata/cl/assam.pdf

अहो! कितनी दमदार ‘संस्‍कृति’ है आपकी और कितना प्‍यारा होगा इस संस्‍कृति पर आधारित आपका ‘सांस्‍कृतिक राष्‍ट्रवाद’?

फारवर्ड प्रेस मैग्जीन के संपादक प्रमोद रंजन के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

6 मिनट में 41 गाली बकने वाला BJP का MLA

..प्रह्लाद गुंजल को नहीं जानते? ये वैसे ही है जैसे पंखा चलाते हैं और पीएसपीए नहीं जानते। बीजेपी के पीएसपीओ। ऊपर से पार्टी सत्ता में है। तो दिसंबर की सर्दी में भी पारा जून की दोपहरी वाला था। सरोकार, संस्कार, धर्म, पूजा, वंदना, आराधना वाली भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्री प्रह्लाद गुंजल मां-बहन-बेटियों के साथ ऐसे धारा प्रवाह संबंध बनाए जा रहे थे जैसे सत्यनारायण की कंठस्थ कथा का सस्वर वाचन कर रहे हों। ..

..मुंह मत बिचकाइए। गाली, धमकी, गलीजपन ये सब तो पीएम मोदी वाली पार्टी के विधायक जी ने अमृत समझकर दिल ही में उतार लिया था। एहसान है जो अमरत्व का जल फोकट में सीएमएचओ पर उलीचे जा रहे थे। ऐसा तेज तो पवन पुत्र हनुमान के अंदर भी न रहा होगा। सुमेरू पर्वत उठा लिया था तो क्या हुआ। 6 मिनट में 41 गाली..आप रिकॉर्ड पता कर लीजिएगा। माइकल शुमाकर इतनी तेजी से फॉर्मूला वन की कार नहीं दौड़ा पाता होगा।

..समय समय की बात है। नेता अब विद्वान नहीं पहलवान होना चाहता है। हर जगह की यही कहानी है। सिनेमा के डायलॉग पर हंसी न आए तो ये बात सोलह आने सच है कि थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब विधायक से लगता है।..

..भतीजे तो तमाम हुए दुनिया में। आगे भी होंगे। द्वापर में धर्मराज युधिष्ठिर के भतीजे हुए। त्रेता में भरत-शत्रुघ्न के भतीजे हुए। द्रोणाचार्य और यागवल्क्य जैसे मुनियों के भतीजों का भी उल्लेख मिलता है। लेकिन ऐसा भतीजा किसी का नहीं हुआ जैसा समाजवादी पार्टी के विधायक बृजलाल सोनकर का हुआ। सत्ताधारी पार्टी का विधायक का भतीजा होना सारे भतीजो से खास होता है। विधायक का भतीजा भतीजा नहीं होता भगवान हो जाता है। और जैसे भगवान पर कोई सवाल नहीं उठा सकता वैसे विधायक जी के भतीजे पर भी कोई नहीं उठा सकता। ..

न्यूज24 पर रात 7.57 बजे प्रसारित रिपोर्टों के कुछ हिस्से. साभार, नवीन कुमार के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: