‘नेशनल दुनिया’ अखबार के कर्मी न्याय के लिए आज भी भटक रहे, मालिक शलैंद्र भदौरिया पूरे तंत्र को मुंह चिढ़ा रहा

सेवा में,
उप श्रमायुक्त
श्रम विभाग
गौतमबुद्ध नगर, नोएडा
(उत्तर प्रदेश)

विषय- कर्मचारियों को एसबी मीडिया प्रा. लि. प्रबंधन द्वारा श्रमिकों के प्रति अनियमितताएं एवं वेतन भुगतान न होने के संबंध में ज्ञापन

महोदय,

आपके ध्यानार्थ निवेदन है कि अधोलिखित कर्मचारी डब्ल्यू-23 सेक्टर-11 स्थित एसबी मीडिया प्रा. लि. द्वारा संचालित नेशनल दुनिया सामाचार पत्र में कार्यरत रहे हैं। अप्रैल 2012 से संस्थान द्वारा बकायादा नौकरी पर रखे गए। ये सभी लोग गैर पत्रकार एवं पत्रकार कर्मचारियों का लगातार कार्य करते रहे। हम सभी लोगों के साथ घोर अनियमितताएं की गईं। हम लोग निरंतर दैनिक रूप से हाजिरी रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराते रहे। हालांकि शुरू में इलेक्ट्रानिक माध्यम से उपस्थिति दर्ज होती थी, तब बायो मैट्रिक विधि थी। हम लोग नियमित रूप से दैनिक समाचार पत्र नेशनल दुनिया के प्रत्येक विभाग के कार्य को संपादित करते रहे।

लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यालय में ताला लगा दिया गया। हम सभी लोगों को मासिक सैलरी का पिछले 15 महीनों से भुगतान नहीं किया गया। कर्मचारियों का विगत चार वर्षोंं से लगातार प्रोविडेंट फंड काटा जाता रहा लेकिन संबंधित कार्यालय में जमा नहीं कराया गया। इनकम टैक्स काटा गया लेकिन फार्म 16 आदि नहीं दिया गया। तरह-तरह से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

कई निकाले गए लोगों के फुल एंड फाइनल का चेक दिया गया जो बैंक में बाउंस हो गया। कुछ लोगों ने इस्तीफा दिया उनका भी बकाया नहीं दिया गया है। इसको लेकर कई बार निदेशक श्री शैलेंद्र भदौरिया तथा श्रीमति सुरभि भदौरिया के साथ बैठकों व अन्य उच्च अधिकारियों से मिलने के बाद भी आश्वासन दिया गया लेकिन कार्यान्वन नहीं किया गया। यही नहीं समय-समय पर कंपनी से निकालने, कंपनी बंद करा देने, मरवा देने आदि प्रकार की धमकियां दी गईं। हमारे पास आज न तो रोजगार है और न ही आमदनी का कोई सोत्र। ऐसे में परिवार को चला पाना बेहद मुश्किल है। आपसे विनम्र निवेदन है कि आप हमारी समस्या समझते हुए बकाया वेतन, प्रोविडेंट फंड, टैक्स सर्टिफिकेट, निकाले गए कर्मचारियों का फुल एंड फाइनल दिलाने का कष्ट करें। साथ ही मार्गदर्शन करें।

धन्यवाद सहित

भवदीय (सभी प्रार्थी और प्रताड़ित कर्मचारी)

-श्री चंद्र कुमार (श्री चंद्र)
-प्रभात कुमार मिश्रा
-धीरेंद्र कुमार मिश्रा
-गणपत सिंह चौहान
-रंजीत सिंह
-बसंत जोशी
-दीपांकर जैन
-त्रिलोक रावत
-राकेश शर्मा
-नंदन उप्रेती
-अनूप पांडे
-ज्योति दुबे
-ओंकार सिंह
-अनिल शर्मा
-जगदीश चंद्रा
-अनिल पांडे
-अरूण कुमार
-अमलेंदू भूषण
-प्रकाश सिंह
-सुरेश
-मनोजअग्रवाल
-संगीता काला

प्रतिलिपि :
प्रधानमंत्री कार्यालय
मुख्यमंत्री कार्यालय
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय
मानव संसाधन मंत्रालय
एसएसपी (गौतमबुद्ध नगर)
जिला अधिकारी (गौतमबुद्ध नगर)
निकट थाना अध्यक्ष,

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ग्रेच्युटी लूट के खिलाफ हिण्डालकों रेनूसागर के मजदूरों ने हासिल की जीत

सोनभद्र के अनपरा, ओबरा, रेनूसागर, शक्तिनगर, बीजपुर जैसे विद्युत उत्पादन गृहों, हिण्डालकों, हाईटेक कार्बन, सीमेन्ट कारखाने, बिरला कैमीकल्स जैसे उद्योगों में कार्यरत संविदा श्रमिकों की ग्रेच्युटी की लूट हो रही है। इन उद्योगों में नियमों और कानूनों का उल्लंधन करके स्थायी प्रकृति के कामों में संविदा श्रमिकों से काम कराया जाता है। यह संविदा श्रमिक अपनी पूरी जिन्दगी एक ही स्थान पर काम करते है। इन्हें सेवानिवृत्ति, मृत्यु या छटंनी पर ग्रेच्युटी का एक पैसा नहीं मिलता है। गौरतलब है कि ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 की धारा 4 के अनुसार पांच वर्ष की सेवा अवधि पूरा होने पर ही श्रमिक ग्रेच्युटी भुगतान का लाभ प्राप्त कर सकता है।

इसी अधिनियम के अनुसार हर श्रमिक को उसकी सेवानिवृत्ति, मृत्यु अथवा छंटनी के समय जितने वर्ष उसने उद्योग में कार्य किया है प्रति वर्ष के 15 दिन के वेतन के हिसाब से ग्रेच्युटी का भुगतान प्रबंधन को करना होता है। इस कानूनी अधिकार का लाभ सोनभद्र औद्योगिक क्षेत्र में किसी भी उद्योग में कार्यरत संविदा श्रमिकों को नहीं दिया जाता। यहां उद्योगों में कई-कई फर्मो के नामों से संविदाकार काम कराते है। यह संविदाकार पांच वर्ष पूर्ण होने के पूर्व ही फर्म का नाम बदल देते है। संविदा श्रमिक वहीं रहते है संविदाकार भी वहीं रहते है पर फर्म बदल जाती है इस खेल के जरिए करोड़ों रू0 ग्रेच्युटी का संविदा श्रमिक का लूट लिया जाता है। इसके लूट के खिलाफ लगातार यूपी वर्कर्स फ्रंट और उससे सम्बद्ध ठेका मजदूर यूनियन आवाज उठाते रहे। इस सम्बंध में उपश्रमायुक्त को पत्रक भी दिए गए थे पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

कल हिण्डालकों के रेनूसागर पावर डिवीजन के कोल हैण्डलिंग विभाग में संविदाकार कुमार कन्सटैªक्शन में कार्यरत चालीस मजदूरों को संविदाकार विष्णु कन्सटैªक्शन में और विष्णु कन्सटैªक्शन के श्रमिकों को कुमार कन्सटैªक्शन में प्रबंधन द्वारा किया गया था। यह सभी श्रमिक करीब बीस सालों से कोल हैण्डलिंग प्लांट में एक ही जगह काम कर रहे है। प्रबंधन की यह कार्यवाही महज इन संविदा श्रमिकों की ग्रेच्युटी की लूट के लिए थी। इसके खिलाफ मजदूरों में आक्रोश फैल गया और प्रबंधन द्वारा सुनवाई न करने पर कल सुबह 6 बजे पहली शिफ्ट के साथ ही संविदा श्रमिक अपने जायज कानूनी अधिकार के लिए घरने पर बैठ गए।

इन संविदा श्रमिकों के समर्थन में पूरे पावर प्लांट के संविदा श्रमिक घरने पर आ गए और उन लोगों ने सत्याग्रह आंदोलन की घोषणा कर दी। आंदोलनरत संविदा श्रमिकों को प्रबंधन और पुलिस प्रशासन ने बार-बार धमकी दी, फर्जी मुकदमें में फंसाने के लिए झूठी तहरीर थाने में डलवाई गयी, शांतिपूर्ण जारी घरने पर उकसावामूलक कार्यवाही की। पर श्रमिक धैर्य से सत्य के पक्ष में अपने आंदोलन में डटे रहे। प्रबंधन से दिनभर ठेका मजदूर यूनियन के नेताओं द्वारा वार्ता करने का प्रयास किया गया परन्तु इस लूट में रंगे हाथ पकड़ा गया प्रबंधन वार्ता से भाग रहा था।

रात में वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने जिलाधिकारी से दूरभाष पर बात की। इसके बाद रात 12 बजे उपश्रमायुक्त सोनभद्र वार्ता के लिए रेनूसागर पहुंचे। जहां रातभर चली वार्ता के बाद सुबह पांच बजे लिखित समझौता हुआ जिसमें प्रबंधन को संविदाकार बदलने के अपने फैसले को वापस लेना पड़ा, ग्रेच्युटी भुगतान की जिम्मेदारी प्रबंधन की तय की गयी, आंदोलनरत श्रमिकों का किसी भी प्रकार का उत्पीड़न न करने और संविदा श्रमिकों की अन्य मांगों पर 8 जून को उपश्रमायुक्त कार्यालय में वार्ता की तिथि को तय किया गया। वार्ता में प्रबंधन, संविदाकार व प्रशासन के प्रतिनिधि के बतौर थानाध्यक्ष अनपरा और संविदा श्रमिकों के प्रतिनिधि के बतौर ठेका मजदूर यूनियन के जिला उपाध्यक्ष राम नरेश यादव, कुलदीप पाल, मुन्ना चंद्रवंशी, नागेन्द्र चौहान, शिव यादव, हीरालाल, चांदगी यादव शामिल रहे। इस आंदोलन में मदद के लिए ठेका मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र पाल के नेतृत्व में एक टीम अनपरा तापीय परियोजना से भी लगातार रही। इस टीम में तेजधारी गुप्ता, मुश्ताक अहमद, केदार सिंह, गणेश सिंह शामिल रहे।

राम नरेश यादव
जिला उपाध्यक्ष
ठेका मजदूर यूनियन, सोनभद्र।

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भास्कर प्रबंधन को तमाचा : लेबर ट्रिब्यूनल ने छह कर्मियों की बर्खास्तगी को गैर-कानूनी करार दिया

दैनिक भास्कर, जालंधर के छह मीडियाकर्मियों को जीत मिली है. लेबर ट्रिब्यूनल ने भास्कर प्रबंधन द्वारा इन छह कर्मियों की बर्खास्तगी को गैरकानूनी करार दिया है. ट्रिब्यूनल ने इनकी सेवाओं को बर्खास्तगी की डेट से ही बहाल करने के आदेश दिए हैं. जिन लोगों को इस आदेश से लाभ मिला है उनके नाम हैं- पत्रकार वीना जोशी, नीलांबर जोशी (अब दिवंगत), अनिल शर्मा, जतिंदर कुमार, जतिंदर चौहान व संजय शर्मा.

ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि बिना उचित कारण के किसी कर्मचारी को एक महीने का नोटिस देकर नहीं निकाल जा सकता है. ट्रिब्यूनल ने अखबार प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह इन सभी लोगों को टर्मिनेशन से लेकर अभी तक की सेलरी तुरंत दे. जिन नीलांबर जोशी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई, उनके आश्रितों को उनके जीवित रहने तक का लाभ देने के आदेश हुए हैं. इनकी पत्नी वीना जोशी को रिटायरमेंट आयु तक के समस्त लाभ मिलेंगे. हालांकि 4 अन्य कर्मचारियों का केस अभी लंबित है. प्रबंधन ने इन कर्मचारियों को साल 2009 में एकाएक नौकरी से निकाल दिया था. इसके बाद सभी ने प्रबंधन के नाजायज फैसले को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी. प्रबंधन के पास इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने का विकल्प खुला है. हालांकि ऐसे मामलों में प्रबंधन की पहले भी हाईकोर्ट में कई बार किरकिरी हो चुकी है.

ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद नौकरी ज्वाइन करने गए कर्मचारियों ने स्थानीय प्रबंधन पर ज्वायनिंग न कराने का आरोप लगाते हुए अवमानना का केस दायर करने की बात कही है. कर्मचारी अनिल शर्मा ने बताया कि वह केस जीतने के बाद कोर्ट के आदेश पर अपने अन्य साथियों के साथ दैनिक भास्कर अखबार में नौकरी ज्वाइन करने गए थे लेकिन डिप्टी मैनेजर नरेश कुमार दुआ ने प्रबंधन का आदेश न होने का हवाला देते हुए वापस लौटा दिया. कर्मचारियों के केसों की पैरवी करने वाले श्रम सलाहकार राम सिंह का कहना है कि प्रबंधन ने ऐसा करके खुद को अदालती अवमानना की श्रेणी में ला खड़ा किया है.

इस पूरे प्रकरण को जालंधर के एक तेवरदार अखबार जय हिंद ने प्रकाशित किया है, जो इस प्रकार है…

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हिंदुस्तान, आगरा के 11 कर्मियों ने मांगा मजीठिया, श्रम विभाग ने प्रबंधन को लगाई कड़ी फटकार

20 मार्च और 22 मार्च को श्रम विभाग में हुई सुनवाई… हिंदुस्तान अखबार को चलाने वाली कंपनी को बुधवार को एक और तगड़े झटके का सामना करना पड़ा। हिन्दुस्तान की आगरा यूनिट में 11 मीडिया कर्मचारियों ने मजीठिया वेतन की सिफारिशें लागू करने की मांग की तो कंपनी ने कुछ को बाहर का रास्ता दिखाया तो कई के खिलाफ शोषण और प्रताड़ना का अभियान-सा छेड़ दिया। इससे दुखी कर्मचारियों ने श्रम विभाग की ओर रुख किया तो उन्हें बुधवार को बड़ी राहत मिली।

सोमवार को अपर श्रम आयुक्त प्रतिभा तिवारी के सामने दोनों पार्टियां उपस्थित हुईं। कंपनी प्रबंधन की ओर से बड़े अधिकारी आशीष मित्तल उपस्थित हुए। वहीं कर्मचारियों की तरफ से 11 मीडिया कर्मी अपने वकील शरद शुक्ला के साथ मौजूद रहे। गौरतलब है कि शरद शुक्ला यूपी के श्रम मामलों के काफी जानकार अधिवक्ता हैं।

कार्यवाही शुरू हुई तो कंपनी के अधिकारी आशीष मित्तल ने कई कुतर्क पेश किये। लेकिन जानकार अधिवक्ता शरद शुक्ला ने मित्तल के बड़े-बड़े दावों को आधारहीन और फर्जी साबित कर दिया। सुनवाई के दूसरे दिन कंपनी के तर्कों को फर्जी मानते हुए श्रम अधिकारी ने आरसी जारी करने का फैसला सुरक्षित रख लिया। आगरा में 11 कर्मचारियों के लिए कंपनी की ओर से करीब 4 करोड़ की देनदारी बन रही है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
9322411335

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‘हिंदुस्तान’ अखबार से 6 करोड़ वसूलने के लखनऊ के अतिरिक्त श्रमायुक्त के आदेश की कापी को पढ़िए

लखनऊ के श्रम विभाग ने हिंदुस्तान के 16 पत्रकारों व कर्मचारियों को क़रीब 6 करोड़ रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है. लखनऊ के एडिशनल कमिशनर बी.जे. सिंह व सक्षम अधिकारी डॉ. एमके पाण्डेय ने 6 मार्च को हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ आरसी जारी कर दी और पैसा वसूलने के लिए ज़िलाधिकारी को अधिकृत कर दिया है. इस बाबत खबर तो भड़ास4मीडिया पर पहले ही प्रकाशित हो चुकी है लेकिन आज हम यहां आदेश की पूरी कापी दे रहे हैं… नीचे आर्डर कापी का पहला पेज है….

पेज वन..

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